वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'पूर्ण से अंश की ओर' का शिक्षण सूत्र आधारित है—
(a) गेस्टाल्ट मनोविज्ञान
(b) बाल मनोविज्ञान
(c) प्राणी मनोविज्ञान
(d) जीव विज्ञान
उत्तर: (a) गेस्टाल्ट मनोविज्ञान।
व्याख्या: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान सम्पूर्णता पर बल देता है। इसके अनुसार व्यक्ति पहले किसी वस्तु या परिस्थिति को सम्पूर्ण रूप में ग्रहण करता है और बाद में उसके विभिन्न अंशों को समझता है।
प्रश्न 2. बच्चों में कल्पना शक्ति का विकास किया जा सकता है—
(a) समूह कार्य द्वारा
(b) कहानी द्वारा
(c) प्रश्नोत्तर द्वारा
(d) व्याख्यान द्वारा
उत्तर: (b) कहानी द्वारा।
व्याख्या: कहानी सुनते समय बालक पात्रों, घटनाओं और परिस्थितियों की मानसिक कल्पना करता है। इससे उसकी कल्पनाशक्ति एवं सृजनात्मकता के विकास में सहायता मिलती है।
प्रश्न 3. शिक्षण का सामान्य सिद्धान्त निम्न में से नहीं है—
(a) क्रियाशीलता का सिद्धान्त
(b) रुचि का सिद्धान्त
(c) नियोजन का सिद्धान्त
(d) परिणाम का सिद्धान्त
उत्तर: (d) परिणाम का सिद्धान्त।
व्याख्या: क्रियाशीलता, रुचि और नियोजन शिक्षण के सामान्य सिद्धान्तों में सम्मिलित हैं। दिए गए विकल्पों में परिणाम का सिद्धान्त शिक्षण का सामान्य सिद्धान्त नहीं है।
प्रश्न 4. 'Becoming Better Teacher: A Micro Teaching Approach' निम्न में से किसकी पुस्तक है—
(a) डॉ. बी. के. पासी
(b) एन. एल. दोसाज
(c) एलन
(d) रेयान
उत्तर: (a) डॉ. बी. के. पासी।
व्याख्या: 'Becoming Better Teacher: A Micro Teaching Approach' बी. के. पासी से सम्बन्धित प्रसिद्ध पुस्तक है। इसमें सूक्ष्म शिक्षण एवं शिक्षण-कौशलों का वर्णन किया गया है।
प्रश्न 5. विज्ञान किट में कितनी वस्तुओं को शामिल किया है—
(a) 110
(b) 85
(c) 105
(d) 80
उत्तर: (a) 110।
व्याख्या: प्राथमिक स्तर की विज्ञान किट में कुल 110 वस्तुएँ सम्मिलित की गई थीं। इनका उपयोग विज्ञान की विभिन्न गतिविधियों, प्रयोगों एवं प्रदर्शनों के लिए किया जाता है।
प्रश्न 6. 'प्रश्नोत्तर प्रविधि' के जनक कौन हैं—
(a) प्लेटो
(b) सुकरात
(c) अरस्तु
(d) डीवी
उत्तर: (b) सुकरात।
व्याख्या: प्रश्नोत्तर प्रविधि का सम्बन्ध सुकरात से माना जाता है। वे क्रमबद्ध प्रश्नों द्वारा शिक्षार्थी को स्वयं उत्तर एवं सत्य तक पहुँचने के लिए प्रेरित करते थे।
प्रश्न 7. पाठ-प्रस्तावना कौशल का आधार बिन्दु है—
(a) पाठ्यक्रम
(b) परिवार
(c) पूर्वज्ञान
(d) TLM (टी.एल.एम.)
उत्तर: (c) पूर्वज्ञान।
व्याख्या: पाठ-प्रस्तावना में विद्यार्थी के पूर्वज्ञान को आधार बनाकर उसे नवीन पाठ से जोड़ा जाता है तथा सीखने के लिए रुचि एवं तत्परता उत्पन्न की जाती है।
प्रश्न 8. सम्प्रेषण के घटक हैं—
(a) प्रेषक
(b) संदेश
(c) ग्राही
(d) ये सभी
उत्तर: (d) ये सभी।
व्याख्या: सम्प्रेषण के प्रमुख घटकों में प्रेषक, संदेश, माध्यम, ग्राही तथा प्रतिपुष्टि सम्मिलित होते हैं। अतः दिए गए सभी विकल्प सही हैं।
प्रश्न 9. किस सूत्र का सम्बन्ध आगमन विधि से है—
(a) स्थूल से सूक्ष्म की ओर
(b) विशिष्ट से सामान्य की ओर
(c) सामान्य से विशिष्ट की ओर
(d) मूर्त से अमूर्त की ओर
उत्तर: (b) विशिष्ट से सामान्य की ओर।
व्याख्या: आगमन विधि में विशिष्ट उदाहरणों एवं तथ्यों के आधार पर सामान्य नियम या सिद्धान्त तक पहुँचा जाता है।
प्रश्न 10. सहयोग की भावना का विकास सम्भव है—
(a) समूह कार्य से
(b) वाद-विवाद से
(c) प्रश्नोत्तर से
(d) सहायक सामग्री से
उत्तर: (a) समूह कार्य से।
व्याख्या: समूह कार्य में विद्यार्थी साझा लक्ष्य के लिए मिलकर कार्य करते हैं, जिससे उनमें सहयोग, सहभागिता, उत्तरदायित्व एवं सामाजिकता का विकास होता है।
प्रश्न 11. 'उपचारात्मक शिक्षण' का प्रमुख कार्य है—
(a) लेख में सुधार
(b) सुलेख पर बल देना
(c) दोषपूर्ण अध्ययन एवं शिक्षण से सम्बन्धित समस्याओं को दूर करना
(d) गृहकार्य देना
उत्तर: (c) दोषपूर्ण अध्ययन एवं शिक्षण से सम्बन्धित समस्याओं को दूर करना।
व्याख्या: उपचारात्मक शिक्षण में विद्यार्थी की अधिगम-कठिनाइयों एवं त्रुटियों का निदान करके उपयुक्त पुनः शिक्षण, अभ्यास एवं सहायता द्वारा उनका निवारण किया जाता है।
प्रश्न 12. पाठ योजना का प्रथम बिन्दु निम्न में से है—
(a) प्रस्तावना के प्रश्न
(b) उद्देश्य कथन
(c) कठिनाई निवारण
(d) व्याख्या
उत्तर: (a) प्रस्तावना के प्रश्न।
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में कक्षागत पाठ-प्रस्तुतीकरण का प्रारम्भ प्रस्तावना से होता है। प्रस्तावना प्रश्नों द्वारा विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान की जाँच करके उन्हें नवीन पाठ के लिए तैयार किया जाता है।
प्रश्न 13. सूक्ष्म शिक्षण पद्धति के जन्मदाता हैं—
(a) ब्लूम
(b) बी. एफ. स्किनर
(c) रायबर्न
(d) डी. एलन
उत्तर: (d) डी. एलन।
व्याख्या: ड्वाइट डब्ल्यू. एलन को सूक्ष्म शिक्षण के विकास से प्रमुख रूप से जोड़ा जाता है। इसका विकास स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षक-प्रशिक्षण के लिए किया गया था।
प्रश्न 14. व्याख्यान विधि में प्रायः छात्रों के क्या बनने की सम्भावना रहती है—
(a) मूक
(b) सक्रिय
(c) निष्क्रिय
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) निष्क्रिय।
व्याख्या: परम्परागत व्याख्यान विधि में शिक्षक की भूमिका प्रधान होती है और विद्यार्थी मुख्यतः श्रोता बने रहते हैं, जिससे उनकी सक्रिय सहभागिता अपेक्षाकृत कम होती है।
प्रश्न 15. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में शिक्षण के कितने ध्रुव (Pole) हैं—
(a) एक
(b) तीन
(c) चार
(d) पाँच
उत्तर: (b) तीन।
व्याख्या: शिक्षण-अधिगम को त्रिध्रुवीय प्रक्रिया माना जाता है। इसमें शिक्षक, शिक्षार्थी तथा विषय-वस्तु/पाठ्यक्रम तीन प्रमुख ध्रुव होते हैं।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षण से क्या अभिप्राय है? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षार्थी के अधिगम को उद्देश्यपूर्ण ढंग से मार्गदर्शित एवं सुगम बनाने की प्रक्रिया शिक्षण कहलाती है।
प्रश्न 17. शाब्दिक सम्प्रेषण के दो प्रमुख प्रकारों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: (1) मौखिक सम्प्रेषण। (2) लिखित सम्प्रेषण।
प्रश्न 18. शिक्षण-सूत्रों के कोई दो लाभ बताइए।
उत्तर: (1) शिक्षण को सरल एवं क्रमबद्ध बनाते हैं। (2) विषय-वस्तु को मनोवैज्ञानिक एवं बोधगम्य ढंग से प्रस्तुत करने में सहायता करते हैं।
प्रश्न 19. निदानात्मक परीक्षण को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम-कठिनाइयों, त्रुटियों एवं उनके कारणों की पहचान करने वाला परीक्षण निदानात्मक परीक्षण कहलाता है।
प्रश्न 20. ज्ञात से अज्ञात सूत्र किस तथ्य पर आधारित है? समझाइए।
उत्तर: यह इस तथ्य पर आधारित है कि नवीन ज्ञान को विद्यार्थी के पूर्वज्ञान एवं पूर्व अनुभव से जोड़कर सरलता से सिखाया जा सकता है।
प्रश्न 21. शिक्षण में 'रुचि के सिद्धान्त' को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षण को बालक की रुचि एवं आवश्यकता के अनुरूप बनाकर उसे सीखने में सक्रिय रखना रुचि का सिद्धान्त है।
प्रश्न 22. पुनर्बलन शिक्षण कौशल के उद्देश्य को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थी की सही प्रतिक्रिया एवं वांछित व्यवहार को प्रोत्साहित और सुदृढ़ करना पुनर्बलन कौशल का उद्देश्य है।
प्रश्न 23. अनुदेशन से क्या अभिप्राय है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: निर्धारित अधिगम उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए शिक्षार्थी को व्यवस्थित निर्देश एवं मार्गदर्शन प्रदान करना अनुदेशन कहलाता है।
प्रश्न 24. श्यामपट्ट शिक्षण कौशल के घटकों का नाम लिखिए।
उत्तर: लेख की स्पष्टता, श्यामपट्ट कार्य की स्वच्छता तथा विषय-वस्तु का उचित एवं व्यवस्थित विन्यास।
प्रश्न 25. खेल पर आधारित दो शिक्षण विधियों के नाम लिखिए।
उत्तर: मॉन्टेसरी पद्धति और किण्डरगार्टन पद्धति।
प्रश्न 26. न्यूनतम अधिगम स्तर का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: किसी कक्षा या स्तर की शिक्षा के बाद प्रत्येक विद्यार्थी से अपेक्षित न्यूनतम ज्ञान, कौशल एवं दक्षताओं को न्यूनतम अधिगम स्तर कहते हैं।
प्रश्न 27. बालकेन्द्रित शिक्षण की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: (1) बालक शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का केन्द्र होता है। (2) उसकी रुचि, आवश्यकता, क्षमता एवं सक्रियता को महत्त्व दिया जाता है।
प्रश्न 28. क्षेत्रीय पर्यटन शैक्षिक विधि को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: विद्यार्थियों को किसी क्षेत्र का प्रत्यक्ष भ्रमण कराकर वास्तविक वस्तुओं, स्थानों एवं घटनाओं का अनुभव कराने की विधि क्षेत्रीय पर्यटन कहलाती है।
प्रश्न 29. शिक्षण उद्देश्यों के आधार पर प्रश्नों का वर्गीकरण कीजिए।
उत्तर: ज्ञानात्मक प्रश्न, बोधात्मक प्रश्न तथा अनुप्रयोगात्मक प्रश्न।
प्रश्न 30. शिक्षण प्रक्रिया को कौशल के रूप में किस संस्था ने सर्वप्रथम अध्ययन किया है?
उत्तर: स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. मन्दबुद्धि छात्रों के लिए किस प्रकार उपचारात्मक शिक्षण किया जाना चाहिए?
उत्तर: कम बौद्धिक क्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए उपचारात्मक शिक्षण उनकी व्यक्तिगत अधिगम-कठिनाइयों एवं सीखने की गति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
प्रमुख उपाय—
- सबसे पहले विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम-कठिनाइयों का निदान किया जाए।
- विषय-वस्तु को सरल एवं छोटे-छोटे सोपानों में प्रस्तुत किया जाए।
- ठोस वस्तुओं, चित्रों, मॉडल एवं गतिविधियों का अधिक प्रयोग किया जाए।
- पर्याप्त अभ्यास एवं पुनरावृत्ति कराई जाए।
- विद्यार्थी को उसकी व्यक्तिगत गति के अनुसार पर्याप्त समय दिया जाए।
- छोटी-छोटी सफलताओं पर प्रशंसा एवं सकारात्मक पुनर्बलन दिया जाए।
- आवश्यकतानुसार व्यक्तिगत या छोटे समूह में शिक्षण दिया जाए।
प्रश्न 32. दक्षता आधारित शिक्षण विधि के सोपान लिखिए।
उत्तर: दक्षता आधारित शिक्षण में किसी निर्धारित ज्ञान या कौशल को वांछित स्तर तक विकसित किया जाता है। इसके प्रमुख सोपान हैं—
- पूर्व तैयारी— उद्देश्य, अपेक्षित दक्षता एवं आवश्यक शिक्षण-सामग्री निर्धारित करना।
- विषय-वस्तु का प्रस्तुतीकरण— पूर्वज्ञान से सम्बन्ध स्थापित करते हुए विषय को स्पष्ट करना।
- नियम— सम्बन्धित नियमों एवं प्रक्रियाओं को व्यवस्थित करना।
- अभ्यास— विद्यार्थी को पर्याप्त अभ्यास के अवसर देना।
- अभ्यास कार्य में सुधार— त्रुटियों की पहचान कर उनका सुधार कराना।
- प्रयोग— अर्जित ज्ञान एवं दक्षता का नवीन या व्यावहारिक परिस्थिति में प्रयोग कराना।
प्रश्न 33. संश्लेषण से विश्लेषण की ओर शिक्षण-सूत्र की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: 'संश्लेषण से विश्लेषण की ओर' शिक्षण-सूत्र में किसी विषय, वस्तु या समस्या को पहले उसके समग्र रूप में प्रस्तुत किया जाता है और बाद में उसे विभिन्न भागों या तत्त्वों में विभाजित करके उनका अध्ययन कराया जाता है।
उदाहरण: विद्यार्थी को पहले सम्पूर्ण वाक्य दिखाकर बाद में उसमें प्रयुक्त शब्दों तथा शब्दों के विभिन्न भागों का अध्ययन कराना। इससे विद्यार्थी सम्पूर्ण विषय एवं उसके विभिन्न अंशों के सम्बन्ध को समझ पाता है।
प्रश्न 34. शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
| आधार | शिक्षण | प्रशिक्षण |
|---|---|---|
| उद्देश्य | ज्ञान, समझ, चिन्तन एवं व्यापक विकास करना। | किसी विशिष्ट कौशल या कार्य-दक्षता का विकास करना। |
| क्षेत्र | इसका क्षेत्र अपेक्षाकृत व्यापक होता है। | इसका क्षेत्र विशिष्ट एवं सीमित होता है। |
| प्रकृति | ज्ञानात्मक एवं व्यवहारात्मक दोनों हो सकती है। | मुख्यतः व्यावहारिक एवं कौशलपरक होती है। |
| बल | ज्ञान, समझ एवं बौद्धिक विकास पर बल दिया जाता है। | अभ्यास, दक्षता एवं कार्य-निष्पादन पर अधिक बल दिया जाता है। |
प्रश्न 35. शिक्षण में अभिप्रेरणा के सिद्धान्त पर सविस्तार प्रकाश डालिए।
उत्तर: अभिप्रेरणा वह आन्तरिक अथवा बाह्य शक्ति है जो व्यक्ति को किसी निश्चित लक्ष्य की प्राप्ति के लिए क्रियाशील करती है। शिक्षण में अभिप्रेरणा का सिद्धान्त इस बात पर बल देता है कि प्रभावी अधिगम के लिए विद्यार्थी में सीखने की इच्छा, रुचि एवं तत्परता उत्पन्न करना आवश्यक है।
शिक्षण में अभिप्रेरणा का महत्त्व—
- विद्यार्थियों में सीखने की रुचि एवं उत्साह उत्पन्न होता है।
- अवधान एवं एकाग्रता बढ़ती है।
- विद्यार्थी शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं।
- लक्ष्य प्राप्त करने के लिए निरन्तर प्रयास करने की प्रवृत्ति विकसित होती है।
- अधिगम अधिक प्रभावी एवं स्थायी बनता है।
अभिप्रेरित करने के प्रमुख उपाय—
- पाठ को विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान एवं जीवन से जोड़ना।
- स्पष्ट एवं प्राप्त करने योग्य लक्ष्य निर्धारित करना।
- कहानी, खेल, गतिविधि एवं रोचक उदाहरणों का प्रयोग करना।
- प्रशंसा एवं उचित सकारात्मक पुनर्बलन देना।
- विद्यार्थियों को सफलता के अवसर प्रदान करना।
प्रश्न 36. उत्तम शिक्षण की विशेषताओं को लिखिए।
उत्तर: उत्तम शिक्षण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- उद्देश्यपूर्ण एवं योजनाबद्ध होता है।
- बालक की रुचि, आवश्यकता, क्षमता एवं पूर्वज्ञान पर आधारित होता है।
- विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता पर बल देता है।
- विषय-वस्तु को सरल, स्पष्ट एवं क्रमबद्ध ढंग से प्रस्तुत करता है।
- वैयक्तिक भिन्नताओं का ध्यान रखता है।
- उपयुक्त शिक्षण-विधियों एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रयोग करता है।
- अनुकूल एवं भयमुक्त कक्षा-वातावरण प्रदान करता है।
- मूल्यांकन एवं प्रतिपुष्टि द्वारा आवश्यक सुधार करता है।
प्रश्न 37. शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सम्प्रेषण के महत्व एवं आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: सम्प्रेषण शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया का आधार है। इसके माध्यम से शिक्षक ज्ञान, विचार, सूचना एवं निर्देश विद्यार्थियों तक पहुँचाता है तथा विद्यार्थियों से प्रतिपुष्टि प्राप्त करता है।
इसका प्रमुख महत्त्व—
- विषय-वस्तु को स्पष्ट एवं बोधगम्य बनाता है।
- शिक्षक एवं विद्यार्थी के बीच विचारों का आदान-प्रदान सम्भव बनाता है।
- विद्यार्थियों की रुचि एवं सक्रिय सहभागिता बढ़ाता है।
- प्रश्नों एवं शंकाओं के समाधान में सहायता करता है।
- शिक्षक को विद्यार्थियों की समझ एवं कठिनाइयों की जानकारी देता है।
- प्रतिपुष्टि द्वारा शिक्षण में आवश्यक सुधार सम्भव बनाता है।
प्रश्न 38. शिक्षण कौशल की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए किन्हीं दो शिक्षण कौशलों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: शिक्षण उद्देश्यों की प्रभावी प्राप्ति के लिए शिक्षक द्वारा किए जाने वाले विशिष्ट, अभ्यास योग्य एवं उद्देश्यपूर्ण व्यवहारों को शिक्षण कौशल कहते हैं।
दो प्रमुख शिक्षण कौशल—
- पाठ-प्रस्तावना कौशल— पाठ के आरम्भ में विद्यार्थियों का ध्यान आकर्षित करना, उनके पूर्वज्ञान को जागृत करना तथा उसे नवीन पाठ से जोड़ना प्रस्तावना कौशल है।
- पुनर्बलन कौशल— विद्यार्थियों की उचित प्रतिक्रिया एवं वांछित व्यवहार को प्रशंसा, स्वीकृति, संकेत आदि द्वारा प्रोत्साहित और सुदृढ़ करना पुनर्बलन कौशल है।
प्रश्न 39. शिक्षण सूत्र एवं शिक्षण सिद्धान्त में अन्तर उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| आधार | शिक्षण सिद्धान्त | शिक्षण सूत्र |
|---|---|---|
| अर्थ | शिक्षण को प्रभावी बनाने वाले व्यापक एवं सामान्य आधारभूत नियम। | विषय-वस्तु को प्रस्तुत करने का व्यावहारिक एवं क्रमिक मार्ग। |
| क्षेत्र | सम्पूर्ण शिक्षण प्रक्रिया का मार्गदर्शन करते हैं। | मुख्यतः विषय-वस्तु के प्रस्तुतीकरण को दिशा देते हैं। |
| स्वरूप | अपेक्षाकृत व्यापक होते हैं। | अपेक्षाकृत विशिष्ट एवं व्यावहारिक होते हैं। |
| उदाहरण | रुचि का सिद्धान्त, क्रियाशीलता का सिद्धान्त, अभिप्रेरणा का सिद्धान्त। | ज्ञात से अज्ञात, सरल से कठिन, मूर्त से अमूर्त। |
प्रश्न 40. सहभागी शिक्षण का अर्थ स्पष्ट कीजिए तथा इसकी विशेषताएँ भी लिखिए।
उत्तर: जिस शिक्षण में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों सक्रिय रूप से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में भाग लेते हैं, उसे सहभागी शिक्षण कहते हैं। इसमें विद्यार्थी केवल ज्ञान ग्रहण करने वाला न होकर सीखने की प्रक्रिया का सक्रिय सहभागी होता है।
सहभागी शिक्षण की प्रमुख विशेषताएँ—
- शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों की सक्रिय सहभागिता होती है।
- प्रश्नोत्तर, चर्चा, समूह-कार्य एवं गतिविधियों को महत्त्व दिया जाता है।
- सहयोग एवं सामूहिक अधिगम को बढ़ावा मिलता है।
- कक्षा का वातावरण लोकतांत्रिक एवं भयमुक्त होता है।
- विद्यार्थियों में तर्क, चिन्तन एवं सृजनात्मकता विकसित होती है।
- आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति-कौशल का विकास होता है।
- अधिगम अधिक रुचिकर, सक्रिय एवं स्थायी बनता है।
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