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शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Paper 2022

UP DELED Semester 1 शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Question Paper 2022 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. ब्लूम के अनुसार शिक्षण के उद्देश्य हैं-

(a) ज्ञानात्मक उद्देश्य

(b) भावात्मक उद्देश्य

(c) क्रियात्मक उद्देश्य

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : बी. एस. ब्लूम (B.S. Bloom) ने शिक्षण में सम्प्रेषण की सुविधा के लिए शैक्षिक उद्देश्यों को मुख्य रूप से तीन भागों में विभक्त किया है- (1) ज्ञानात्मक उद्देश्य (2) भावनात्मक उद्देश्य (3) क्रियात्मक उद्देश्य। ब्लूम के अनुसार ये सभी शिक्षण के उद्देश्य हैं。

प्रश्न 2. 'सा विद्या या विमुक्तये' शिक्षा का उद्देश्य किस विचारधारा का मानना है?

(a) आदर्शवादी

(b) प्रकृतिवादी

(c) प्रयोजनवादी

(d) अस्तित्ववादी

उत्तर: (a) : 'सा विद्या या विमुक्तये' शिक्षा का उद्देश्य आदर्शवादी विचारधारा का मानना है। हमारे भारत के ऋषि मुनियों ने 'सा विद्या या विमुक्तये' का ज्ञान देकर शिक्षा की महत्ता पर बल दिया था। वास्तविक शिक्षा वही होती है जो मुक्ति का मार्ग प्रदान करें。

प्रश्न 3. गेस्टाल्ट मनोवैज्ञानिक सिद्धान्त पर आधारित शिक्षण सूत्र है-

(a) सूक्ष्म-शिथिल

(b) ज्ञात-अज्ञात

(c) पूर्ण-अंश

(d) विशिष्ट से सामान्य

उत्तर: (c) : गेस्टाल्टवादियों का मानना है कि व्यक्ति किसी तत्व या अवधारणा को आंशिक रूप से नही बल्कि पूर्ण रूप से सीखता है। अतः इसे सम्पूर्णवाद भी कहा जाता है, इस सिद्धान्त में प्रत्यक्षीकरण पर अधिक बल दिया जाता है। यह सिद्धात मानता है कि व्यक्ति किसी वस्तु का पूर्ण रूप से प्रत्यक्षीकरण कर पाता है, न कि भागों में。

प्रश्न 4. 'शिक्षण एक त्रिध्रुवी प्रक्रिया है।' किसका कथन है?

(a) जॉन डीवी

(b) एडम्स

(c) रेमण्ट

(d) एन्डरसन

उत्तर: (a) : जॉन डी.वी. ने शिक्षा को त्रिध्रुवीय प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया है। शिक्षा की त्रिध्रुवीय प्रक्रिया मानती है कि बच्चे का विकास उस समाज में और उसके माध्यम से होता है, जिसमें शिक्षक और बालक एक साथ रहते हैं。

प्रश्न 5. सम्प्रेषण शब्द की उत्पत्ति किस लैटिन शब्द से हुई है?

(a) कम्यूनिस

(b) कम्यूनिकल

(c) कानुनिकेसन

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (a) : सम्प्रेषण शब्द लैटिन शब्द 'कम्यूनिस' से लिया गया है। जिसका अर्थ है- बाँटना या साझा करना。

प्रश्न 6. सम्प्रेषण के प्रकार हैं-

(a) चार

(b) दो

(c) एक

(d) तीन

उत्तर: (d) : सम्प्रेषण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं- (i) मौखिक सम्प्रेषण (ii) लिखित सम्प्रेषण, (iii) अशाब्दिक या आंगिक सम्प्रेषण。

प्रश्न 7. प्रोजेक्ट पद्धति के जन्मदाता हैं-

(a) फ्रोबेल

(b) माण्टेसरी

(c) किलपैट्रिक

(d) पेस्टालाजी

उत्तर: (c) : प्रोजेक्ट विधि की मूल अवधारणा जॉन डीवी के द्वारा दी गई है तथा उनके शिष्य किलपैट्रिक ने इस विधि का प्रतिपादन किया। इस विधि में बालक द्वारा ही किसी समस्या को प्रोजेक्ट द्वारा हल किया जाता है यह उद्देश्य पूर्ण होती है। इसमें शिक्षक मार्गदर्शक के रूप में काम करता है, इस विधि के द्वारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है。

प्रश्न 8. निम्न में से शिक्षण का सामान्य सिद्धान्त नहीं है-

(a) क्रियाशीलता का सिद्धान्त

(b) रुचि का सिद्धान्त

(c) नियोजन का सिद्धान्त

(d) परिमाण का सिद्धान्त

उत्तर: (d) : शिक्षण सिद्धान्त से अभिप्राय है कि किसी भी विषय क्षेत्र या प्रक्रिया के विषय में सुव्यवस्थित, सुसंगठित तथा निश्चित क्रम में विचारों को इस प्रकार से आयोजित किया जाये कि वह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से सभी के समक्ष प्रदर्शित की जा सके। शिक्षण के सामान्य सिद्धान्त में परिणाम का सिद्धान्त नही शामिल है。

प्रश्न 9. कल्पना एवं तर्क शक्ति का विकास किस शिक्षण प्रविधि के माध्यम से करते हैं?

(a) व्याख्यान प्रविधि

(b) प्रश्नोत्तर प्रविधि

(c) खेल प्रविधि

(d) कहानी प्रविधि

उत्तर: (d) : कल्पना एवं तर्क शक्ति का विकास कहानी प्रविधि के माध्यम से करते हैं। इस विधि में विद्यार्थियों को उदाहरण देकर उनकी तर्कशक्ति एवं चिंतन क्षमता का विकास किया जाता है。

प्रश्न 10. सुकराती प्रविधि कहते हैं-

(a) कहानी प्रविधि

(b) प्रयोग प्रविधि

(c) प्रश्नोत्तर प्रविधि

(d) विश्लेषण प्रविधि

उत्तर: (c) : प्रश्नोत्तर प्रविधि को सुकराती प्रविधि कहते हैं। इस प्रविधि के प्रवर्तक के रूप में सुकराती को माना जाता है। इसके अन्तर्गत अध्यापक द्वारा प्रश्न पूछकर अपने पाठ्य अथवा विषय- वस्तु को आगे बढ़ाया जाता है。

प्रश्न 11. शिक्षक केन्द्रित शिक्षण में शिक्षा का केन्द्र बिन्दु होता है-

(a) शिक्षक

(b) विद्यार्थी

(c) प्रधानाचार्य

(d) पाठ्यक्रम

उत्तर: (a) : शिक्षक केद्रित शिक्षण में शिक्षा का केन्द्र बिन्दु शिक्षक ही होता है। अध्यापक केन्द्रित कक्षा में शिक्षक निर्देश देते हैं और बच्चें सुनते हैं। बच्चों से अपेक्षा होती है कि वे शिक्षक की आज्ञा का पालन करेगें और अनुशासन में रहेगें。

प्रश्न 12. सूक्ष्म-शिक्षण पद्धति के जन्मदाता हैं-

(a) डी.एलेन

(b) स्किनर

(c) बी.के. पासी

(d) रायबर्न

उत्तर: (a) : सूक्ष्म शिक्षण विधि के जनक/माइक्रो टीचिंग के जनक डी. एलन (D. Allen) हैं, इन्होंने ही सूक्ष्म शिक्षण का नामकरण 1963 में अमेरिका के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में किया था。

प्रश्न 13. पाठ-प्रस्तावना कौशल का आधार बिन्दु है-

(a) पाठ्यक्रम

(b) परिवार

(c) पूर्वज्ञान

(d) पाठ

उत्तर: (c) : पाठ-प्रस्तावना का आधार बिन्दु पूर्व ज्ञान है। पूर्व ज्ञान छात्रों के पास पहले से मौजूद ज्ञान को संदर्भित करता है। यदि किसी नए ज्ञान को पूर्व ज्ञान में जोड़ा जाना है, तो उनके बीच एक तार्किक निरंतरता होनी चाहिए。

प्रश्न 14. व्याख्यान विधि में छात्र बने रहते हैं-

(a) मूक

(b) सक्रिय

(c) निष्क्रिय

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) : व्याख्यान विधि छात्रों को निष्क्रिय श्रोता बना देती है। इस पद्धति में 'करके सीखने' के सिद्धान्त के लिए कोई स्थान नहीं है। इस पद्धति की सफलता व्याख्यानकर्ता पर अधिक निर्भर करती है。

प्रश्न 15. अधिगम का अर्थ है-

(a) लक्ष्य प्राप्त करना

(b) सीखना

(c) व्यवहार करना

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (b) : अधिगम का अर्थ सीखना होता है। सीखना या अधिगम एक व्यापक सतत् एवं जीवन पर्यन्त चलने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म के उपरान्त ही सीखना प्रारंभ कर देता है और जीवन भर कुछ न कुछ सीखता रहता है। धीरे-धीरे वह अपने को वातावरण से समायोजित करने का प्रयत्न करता है。

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. सम्प्रेषण की एक परिभाषा लिखिए।

उत्तर: सामान्य भाषा में सम्प्रेषण या संचार से आशय उस विचार-विमर्श से है, जो किन्हीं दो व्यक्तियों के बीच किसी सूचना अथवा जानकारी के लिए होता है। न्यूमर एवं समर के अनुसार, "सम्प्रेषण में एक या दो से अधिक व्यक्तियों के बीच तथ्यों, विचारों, सभाओं अथवा भावनाओं का आदान-प्रदान होता है।"

प्रश्न 17. सम्प्रेषण के प्रमुख घटक कौन-कौन से हैं?

उत्तर: सम्प्रेषण को सामान्य रूप से समझने योग्य तरीकों में प्रेषक से प्राप्तकर्ता को संदेश के संचरण के रूप में परिभाषित किया जाता है। अतः प्रेषक, प्राप्तकर्ता और संदेश एक सम्प्रेषण घटना के मूलभूत घटक हैं。

प्रश्न 18. शिक्षण में अभिप्रेरणा के सिद्धान्तों का क्या अभिप्राय है?

उत्तर: अभिप्रेरणा का तात्पर्य व्यक्ति की उस आंतरिक स्थिति से है जो किसी विशेष परिस्थिति में व्यक्ति को अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए क्रियाशील करती है। दूसरे शब्दों में अभिप्रेरणा एक आंतरिक शक्ति है, जो व्यक्ति को कार्य करने के लिए प्रेरित करती है। अभिप्रेरणा के सिद्धान्तों से बालक को स्वअध्ययन करने का अवसर मिला है। जिनमें से कुछ सिद्धान्त निम्न हैं- मूल प्रवृत्ति का सिद्धान्त, अंतर्नोद सिद्धान्त, मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त, प्रोत्साहन का सिद्धान्त, शरीर क्रिया सिद्धान्त。

प्रश्न 19. शिक्षण के किन्हीं दो शिक्षण-सूत्रों को लिखिए।

उत्तर: शिक्षण के विभिन्न सूत्र शिक्षण को प्रभावी बनाने की दृष्टि से ध्यान में रखे जाने चाहिए, जिनमें से प्रमुख हैं: 1. ज्ञात से अज्ञात की ओर 2. सरल से कठिन की ओर。

प्रश्न 20. प्रशिक्षण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: प्रशिक्षण एक विशिष्ट क्रिया अथवा अल्पकालिक प्रक्रिया है। जिसमें विशेष कार्य-सम्बन्धित सूचना एवं कार्य पद्धति के बारे में जानकारी प्रदान की जाती है。

प्रश्न 21. पुनर्बलन कितने प्रकार का होता है?

उत्तर: पुनर्बलन का अर्थ शिक्षक का वह व्यवहार है जिससे छात्रों को पाठ के विकास में भाग लेने हेतु एवं प्रश्नों का सही उत्तर देने हेतु प्रोत्साहन प्राप्त हो। पुनर्बलन मूलतः दो प्रकार का हो सकता है- 1. धनात्मक या सकारात्मक 2. ऋणात्मक या नकारात्मक। इन दोनों ही प्रकार के पुनर्बलन के, दो-दो रूप हो सकते हैं- 1. शाब्दिक 2. अशाब्दिक या सांकेतिक。

प्रश्न 22. अपेक्षित अधिगम शब्द का शाब्दिक अर्थ बताइए।

उत्तर: अपेक्षित अधिगम स्तर की रचना तीन शब्दों से हुई है- अपेक्षित, अधिगम और स्तर। अपेक्षित शब्द का अर्थ होता है ज्ञात करना। अधिगम शब्द का अर्थ होता है, सीखना अर्थात् सीखने को जीवनोपयोगी दक्षताओं में परिवर्तन करना ही अधिगम कहलाता है। स्तर शब्द का आशय उपलब्धि के स्तरों से लगाया जाता है。

प्रश्न 23. बाल केन्द्रित शिक्षण की कोई दो विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: बाल केन्द्रित शिक्षा की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं- 1. बालकों को समझना: बाल-केन्द्रित शिक्षक को बालकों के मूल प्रवृत्तियों, रूचियों, आवश्यकताओं आदि सभी की विस्तृत जानकारी होनी चाहिए। 2. शिक्षण विधि: शिक्षाशास्त्र शिक्षक को यह बताता है कि बालकों को क्या पढ़ाया जाए, परन्तु वास्तविक समस्या यह है की कैसे पढ़ाया जाए? इस समस्या को सुलझाने में बाल मनोविज्ञान शिक्षक की सहायता करता है。

प्रश्न 24. खेल पर आधारित दो शिक्षण विधियों के नाम लिखिए।

उत्तर: खेल पर आधारित शिक्षण विधियाँ हैं- 1. मान्टेसरी विधि 2. किण्डर गार्डन विधि (अन्य: प्रोजेक्ट विधि, डाल्टन विधि, बेसिक पद्धति)。

प्रश्न 26. पर्यटन विधि का प्रयोग किन विषयों के शिक्षण हेतु लाभप्रद है?

उत्तर: पर्यटन विधि का अर्थ "विद्यालय के बाहर कक्षा" से है। इस विद्या के अभाव में सामाजिक विषयों का अध्ययन पूर्ण नहीं है। यदि हम सामाजिक ज्ञान को अनुभव केन्द्रित बनाना चाहते हैं तो पर्यटन का सहारा आवश्यक है। इससे हम संसार का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकते हैं。

प्रश्न 27. सूक्ष्म-शिक्षण को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: बुश (Bush) के अनुसार, "सूक्ष्म शिक्षण प्रशिक्षण की प्रविधि है, जिसमें शिक्षक स्पष्ट रूप से परिभाषित शिक्षण कौशलों का प्रयोग करते हुए ध्यानपूर्वक नियोजित पाठों के आधार पर 5 से 10 मिनट तक वास्तविक छात्रों के छोटे समूह के साथ अतः क्रिया करता है जिसके परिणामस्वरूप वीडियो टेप पर प्रेक्षण प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होता है।"

प्रश्न 28. शिक्षण-कौशल की एक परिभाषा दीजिए।

उत्तर: डा० बी. के. पासी के अनुसार- "शिक्षण कौशल छात्रों के सीखने के लिए सुगमता प्रदान करने के विचार से सम्पन्न की गई सम्बन्धित शिक्षण क्रियाओं या व्यवहारों का समूह है।"

प्रश्न 29. श्यामपट्ट कौशल के किन्हीं दो घटकों के नाम लिखिए।

उत्तर: श्यामपट्ट कौशल शिक्षण प्रक्रिया का एक भाग है। एक शिक्षक इसी के माध्यम से शिक्षण अधिगम कार्य का प्रारम्भ करता है। लिखते समय शिक्षक को बीच-बीच में विद्यार्थियों को देखते रहना चाहिए कि वह अनुशासनहीनता तो नही कर रहा है。

प्रश्न 30. स्पष्टीकरण युक्ति से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: स्पष्टीकरण का उद्देश्य है छात्रों के सामने नवीन ज्ञान को इतने सुन्दर और बोधगम्य ढंग से प्रस्तुत करना कि वे उसे हृदयंगम कर लें। अध्यापक इस युक्ति का प्रयोग उस समय करता है जब उसे यह ज्ञात होता है कि उसके छात्र उस विषय के बारे में अल्प ज्ञान रखते हैं जिसे वह पढ़ाने जा रहा है। इस प्रकार स्पष्टीकरण का अर्थ है, खेलना, प्रदर्शित करना, दिखाना, प्रकाश में लाना तथा छात्रों को नयी सूचना प्रदान करना。

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. शिक्षा में मानचित्र व चार्ट की उपयोगिता को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: एक अवधारणा मानचित्र एक प्रकार का ग्राफिक आयोजक है जिसका उपयोग किसी विषय के ज्ञान का प्रतिनिधित्व करने, विचारों के बीच संबंध बनाने और किसी के समझ के दृश्य प्रतिनिधित्व बनाने के लिये किया जाता है। अवधारणा मानचित्र मुख्य विचार (या अवधारणा) से शुरू होते हैं और फिर यह दिखाने के लिए शाखा लगाते हैं कि उस मुख्य विचार को विशिष्ट विषयों में कैसे तोड़ा जा सकता है。

प्रश्न 32. सम्प्रेषण के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: सम्प्रेषण के प्रकार निम्नलिखित हैं-

  1. मौखिक सम्प्रेषण- मौखिक सम्प्रेषण का अर्थ है आमने-सामने मौखिक बातचीत करके सूचनाओं का आदान प्रदान करना।
  2. लिखित सम्प्रेषण- लिखित सम्प्रेषण से आशय ऐसे सम्प्रेषण से है जो कि लिखित में हो। ज्यादातर दशाओं में यह औपचारिक सम्प्रेषण होता है।
  3. औपचारिक सम्प्रेषण- जब सन्देश के प्रेषक और प्रापक के बीच औपचारिक सम्बन्ध होते हैं तो सम्प्रेषण औपचारिक रूप में होता है।
  4. अनौपचारिक सम्प्रेषण- जब सन्देश के प्रेषक एवं प्रापक के बीच अनौपचारिक संबंध होते हैं तो सम्प्रेषण भी अनौपचारिक रूप में होता है।
  5. अधोमुखी सम्प्रेषण- अधोमुखी सम्प्रेषण से तात्पर्य ऐसे सम्प्रेषण से है जो उच्च अधिकारियों से चलकर नीचे अधिकारियों की ओर जाता है। जैसे विपणन प्रबन्धक के द्वारा विक्रय प्रबन्धक को आदेश देना।
  6. उर्ध्वमुखी सम्प्रेषण- जब सम्प्रेषण निम्न से उच्च स्तर की ओर होता है तो उसे ऊर्ध्वमुखी सम्प्रेषण कहते हैं।
  7. क्षैतिजिक सम्प्रेषण- क्षैतिजिक अथवा समतल सम्प्रेषण वह है जो किसी संस्था के समान स्तर के अधिकारियों के बीच होता है।

प्रश्न 33. क्रियाशीलता के सिद्धान्तों की विवेचना कीजिए।

उत्तर: क्रियाशीलता का सिद्धान्त यह शिक्षण का एक मूल्यवान सिद्धान्त है। इस सिद्धान्त के अनुसार, सीखने के लिए छात्र का क्रियाशील होना अति आवश्यक है। क्रियाशीलता दो प्रकार की होती है- 1. शारीरिक क्रियाशीलता 2. मानसिक क्रियाशीलता। शारीरिक क्रियाशीलता के अन्तर्गत छात्रों को कर्मेन्द्रियों की क्रियाशीलता का शिक्षण दिया जाना चाहिए तथा मानसिक क्रियाशीलता में ज्ञानेन्द्रियों का शिक्षण दिया जाना चाहिए। मनोविज्ञान के अनुसार, प्रत्येक छात्र अपने स्वभाव से ही क्रियाशील होता है। अतः क्रियाशीलता उसकी प्रकृति के अनुरूप होती है। बालक का विकास भाषण सुनने और पुस्तकों को रटने से नहीं हो सकता। यह उसी शिक्षण विधि के द्वारा हो सकता है जो बालक को अधिक से अधिक शारीरिक और मानसिक कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इसी को सफल शिक्षण विधि कहते हैं। इसमें बालकों को तर्क और चिंतन करने एवं समस्याओं से लड़ने का अधिक से अधिक अवसर दिया जाता है。

प्रश्न 34. शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर बताइए।

उत्तर: शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर निम्नलिखित है-

तुलना का आधार शिक्षण प्रशिक्षण
अर्थ शिक्षण एक शैक्षणिक गतिविधि है, जिसमें एक शिक्षक छात्र को किसी दिए गए विषय पर ज्ञान और अवधारणाएँ प्रदान करता है, ताकि उसे भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके। प्रशिक्षण एक सीखने की प्रक्रिया है, जिसमें किसी व्यक्ति को शिक्षार्थी के प्रदर्शन में सुधार के लिए नौकरी से सम्बन्धित एक विशिष्ट कौशल के संबंध मे एक पेशेवर या विशेषज्ञ द्वारा निर्देश और दिशानिर्देश दिए जाते है।
दृष्टिकोण सैद्धान्तिक व्यावहारिक
यह क्या है? विद्यार्थियों को नवीन ज्ञान का प्रावधान शिक्षार्थियों के मौजूदा ज्ञान का एक विशिष्ट तरीके से अनुप्रयोग
जोर शिक्षा, ज्ञान और बुद्धि दक्षताएँ और योग्यताएं
संस्कारित करता है विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञान का विस्तार किसी विशेष क्षेत्र में गहन अध्ययन

प्रश्न 35. उपचारात्मक शिक्षण को स्पष्ट करें।

उत्तर: उपचारात्मक शिक्षण का अर्थ है, शिक्षा में कमजोर शिक्षार्थियों के शिक्षण अधिगम दोष प्रभावों को दूर करने की प्रक्रिया। शिक्षण या अधिगम की कठिनाइयों या त्रुटियों के कारण बच्चे कक्षा में पिछड़ जाते हैं, उपचारात्मक शिक्षण द्वारा उपयुक्त शिक्षण विधि का चयन करके उनकी कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया जाता है। उपचारात्मक शिक्षण एक ऐसा कार्य है जो विद्यार्थियों की सामान्य या विशिष्ट अधिगम कमजोरियों को खत्म करने के लिए किया जाता है। किसी विशेष विद्यार्थी की किसी विशेष विषय या प्रकरण में अनुभव होने वाले कठिनाई एवं कमजोरी के निदान से उनके निवारण के लिए उपचारात्मक शिक्षण योजना का काम शुरू होता है। किसी समस्या विशेष के अनुसार ही उसका उपचार प्रारम्भ किया जाता है。

प्रश्न 36. सूक्ष्म-शिक्षण की प्रक्रिया को समझाइए।

उत्तर: सूक्ष्म शिक्षण की प्रक्रिया सामान्यतः निम्न सोपानों में की जाती है-

  1. प्रथम सोपान (पाठ-योजना निर्माण)- छात्राध्यापक को एक शिक्षण कौशल, जैसे वर्णन करना, व्याख्या करना, प्रश्न पूछना आदि में से किसी एक जिसे कि छात्राध्यापक को सीखना है का ज्ञान उसे प्रशिक्षण की परिस्थिति में करा दिया जाता है और उस पर आधारित सूक्ष्म शिक्षण की पाठ योजना तैयार की जाती है।
  2. द्वितीय सोपान (कक्षा शिक्षण)- छात्राध्यापक छोटे से पाठ को अपने सहयोगी छात्रों द्वारा 5-10 मिनट तक पढ़ाता है यह सोपान सूक्ष्म शिक्षण का शिक्षण सूत्र है।
  3. तृतीय सोपान (प्रतिपुष्टि)- छात्राध्यापक द्वारा पढ़ाए गए पाठ की प्रभाविता के विषय में पर्यवेक्षक द्वारा एक विशेष रुप से विकसित मूल्यांकन प्रपत्र की सहायता से जानकारी दी जाती है या सम्पूर्ण पाठ को ऑडियो टेप के माध्यम से रिकार्ड कर लिया जाता है तथा पर्यवेक्षक, प्रशिक्षणार्थी को आडियो टेप सुना कर उसकी कमियों को इंगित करता है।
  4. चतुर्थ सोपान (पुनः पाठ-योजना)- प्रतिपुष्टि के तुरन्त बाद छात्राध्यापक सुझाए गए विचारों के आधार पर फिर पाठ को पुनः नियोजित करता है सूक्ष्म शिक्षण का यह सोपान पुनर्योजन सत्र कहलाता है।
  5. पंचम सोपान (पुनर्शिक्षण)- पुनर्योजन के पश्चात् पुनर्योजित पाठ को उसी के समान स्तर के दूसरे समूह पर पुनर्शिक्षण कराया जाता है। यह सोपान पुनर्शिक्षण सत्र कहलाता है।
  6. षष्ठ्म सोपान (पुनः प्रतिपुष्टि)- पुनर्योजित पुनर्शिक्षण पाठ को पुनः पर्यवेक्षित कर पर्यवेक्षक छात्राध्यापक से फिर पाठ सम्बन्धित विचार-विमर्श करता है व पुनः प्रतिपुष्टि प्रदान करता है।

प्रश्न 37. बहुक्षेत्रीय शिक्षण से क्या अभिप्राय है?

उत्तर: बहुक्षेत्रीय शिक्षण विधि में एक ही कक्ष में एक से ज्यादा कक्षा के बच्चे तथा एक ही कक्षा के अलग-अलग स्तर के बच्चे एक साथ बैठते हैं। ऐसे में बच्चों के साथ सीखने-सिखाने की प्रक्रिया करना बहुत चुनौती पूर्ण होता है। इस प्रक्रिया में हमने बैठक व्यवस्था इस तरह रखी है कि लगभग एक स्तर के बच्चे एक साथ बैठकर सीख सकते हैं。

प्रश्न 38. कथन युक्ति को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: एक युक्ति प्रारूप जो ऐसे प्रतिस्थान की अनुमति देता हो जिसमें सत्य, आधार, वाक्यों से असत्य निष्कर्ष निकालने का अवकाश हो वह वैध प्रारूप होगा। ऐसी युक्ति जिसमें सत्य, आधार, वाक्य तथा असत्य निष्कर्ष हो, एक अवैध युक्ति है。

प्रश्न 39. शिक्षण में 'अभिप्रेरणा का सिद्धान्त' से क्या आशय है?

उत्तर: शिक्षण में अभिप्रेरणा का सिद्धान्त निम्न है-

  • (ⅰ) मूल प्रवृत्ति का सिद्धान्त- अभिप्रेरणा के मूल प्रवृत्ति के सिद्धान्त का प्रतिपादन मैक्डूगल (1908) ने किया था। मनुष्य का व्यवहार उसकी मूल प्रवृत्तियों पर आधारित होता है इन मूल प्रवृत्तियों के पीछे छिपे संवेग किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करते हैं।
  • (ii) अंतर्नोद सिद्धान्त- इस सिद्धान्त का प्रतिपादन मनोवैज्ञानिक हल ने किया था। मनुष्य की शारीरिक आवश्यकताएँ उसमे तनाव उत्पन्न करती हैं मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे अन्तर्नोद कहा जाता है यही अन्तर्नोद व्यक्ति को कोई विशेष कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।
  • (iii) मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त- इस सिद्धान्त का प्रतिपादन सिगमन फ्रायड ने किया इस सिद्धान्त के अनुसार अभिप्रेरणा के दो मुख्य कारक हैं- (a) मूल प्रवृत्ति (b) अचेतन मन। इन्होंने मूल प्रवृत्तियों को दो भागों में बांटा है- (a) जीवन मूल प्रवृत्ति (b) मृत्यु मूल प्रवृत्ति।

प्रश्न 40. अपेक्षित अधिगम स्तर की संकल्पना क्या है?

उत्तर: अपेक्षित अधिगम स्तर की रचना तीन शब्दों से हुई है- अपेक्षित, अधिगम और स्तर। अपेक्षित शब्द का अर्थ होता है ज्ञात करना। अधिगम शब्द का अर्थ होता है, सीखना अर्थात् सीखने को जीवनोपयोगी दक्षताओं में परिवर्तन करना ही अधिगम कहलाता है। स्तर शब्द का आशय उपलब्धि के स्तरों से लगाया जाता है। अपेक्षित अधिगम स्तर सम्पूर्ण व्यवहार को प्रदर्शित करते हैं, जिनका अवलोकन किया जा सकता है। व्यक्ति ज्ञान, समझ, संप्रयोग, विश्लेषण, संश्लेषण, आकलन इत्यादि जैसे अधिगम के उद्देश्यों का वर्गीकृत विश्लेषण कर सकता है और इसके अनुसार वांछित अधिगम की उपलब्धि को दर्शा सकता है。

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शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Paper 2022

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