वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'शिक्षण एक त्रिध्रुवी प्रक्रिया है' कथन है—
(a) जॉनसन
(b) एडम्स
(c) बी. एस. ब्लूम
(d) जॉन डीवी
उत्तर: (d) जॉन डीवी।
व्याख्या: जॉन डीवी ने शिक्षा को त्रिध्रुवीय प्रक्रिया माना है, जिसमें शिक्षक, शिक्षार्थी तथा सामाजिक वातावरण परस्पर सम्बन्धित होते हैं।
प्रश्न 2. किस शिक्षाशास्त्री ने शिक्षा को सम्पूर्ण जीवन माना है—
(a) टी. पी. नन
(b) स्पेन्सर
(c) जॉन लॉक
(d) आदि शंकराचार्य
उत्तर: (b) स्पेन्सर।
व्याख्या: हरबर्ट स्पेन्सर ने शिक्षा का उद्देश्य मनुष्य को 'सम्पूर्ण जीवन' के लिए तैयार करना माना। उनके अनुसार शिक्षा जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं एवं उत्तरदायित्वों के लिए व्यक्ति को सक्षम बनाए।
प्रश्न 3. सम्प्रेषण शब्द के लैटिन शब्द 'कम्यूनिस' का आशय है—
(a) सामान्य
(b) असामान्य
(c) उपयोगी
(d) आदान-प्रदान
उत्तर: (a) सामान्य।
व्याख्या: Communication शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द Communis से मानी जाती है, जिसका अर्थ सामान्य अथवा साझा होता है।
प्रश्न 4. सम्प्रेषण के तत्व हैं—
(a) सन्देश
(b) माध्यम
(c) स्रोत
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: सम्प्रेषण के प्रमुख तत्वों में स्रोत या प्रेषक, सन्देश, माध्यम, ग्राही तथा प्रतिपुष्टि सम्मिलित होते हैं।
प्रश्न 5. 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण सूत्र किस सिद्धान्त पर आधारित है—
(a) पुनर्बलन सिद्धान्त
(b) क्रिया-प्रसूत सिद्धान्त
(c) गेस्टाल्ट सिद्धान्त
(d) उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धान्त
उत्तर: (c) गेस्टाल्ट सिद्धान्त।
व्याख्या: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान सम्पूर्णता पर बल देता है। इसके अनुसार व्यक्ति पहले किसी वस्तु या परिस्थिति को पूर्ण रूप में ग्रहण करता है और बाद में उसके अंशों को समझता है।
प्रश्न 6. प्रश्नोत्तर प्रविधि के जनक कौन हैं?
(a) सुकरात
(b) प्लेटो
(c) अरस्तू
(d) डीवी
उत्तर: (a) सुकरात।
व्याख्या: सुकरात क्रमबद्ध प्रश्नों के माध्यम से शिक्षार्थी को स्वयं उत्तर एवं सत्य तक पहुँचने के लिए प्रेरित करते थे। इसलिए प्रश्नोत्तर विधि को सुकराती विधि भी कहा जाता है।
प्रश्न 7. निदान की प्रक्रिया से सम्पादित होता है—
(a) समस्या पहचान
(b) समस्या समाधान
(c) समस्या की आवश्यकता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (a) समस्या पहचान।
व्याख्या: निदान का मुख्य कार्य विद्यार्थी की अधिगम-कठिनाइयों, त्रुटियों तथा उनके कारणों की पहचान करना है। इसके बाद उपचारात्मक शिक्षण द्वारा कठिनाइयों को दूर किया जाता है।
प्रश्न 8. सूक्ष्म शिक्षण में निम्न में कौन-से तत्व का समावेश नहीं होता है—
(a) सूक्ष्म समय
(b) सूक्ष्म कक्षा-आकार
(c) वृहद् पाठ्य-वस्तु
(d) अभ्यास आधारित शिक्षण
उत्तर: (c) वृहद् पाठ्य-वस्तु।
व्याख्या: सूक्ष्म शिक्षण में समय, छात्र-संख्या और विषय-वस्तु को सीमित रखा जाता है तथा किसी एक विशिष्ट शिक्षण-कौशल का अभ्यास किया जाता है।
प्रश्न 9. पाठशाला/विद्यालय को उद्यान की संज्ञा दी—
(a) हरबर्ट
(b) मॉन्टेसरी
(c) फ्रोबेल
(d) फ्रैंकलिन
उत्तर: (c) फ्रोबेल।
व्याख्या: फ्रेडरिक फ्रोबेल ने किण्डरगार्टन पद्धति का विकास किया। इसमें बालकों की तुलना पौधों और शिक्षक की तुलना माली से की गई है।
प्रश्न 10. व्याख्यान विधि में छात्र बने रहते हैं—
(a) सक्रिय
(b) उत्साही
(c) क्रियाशील
(d) निष्क्रिय
उत्तर: (d) निष्क्रिय।
व्याख्या: परम्परागत व्याख्यान विधि में शिक्षक की भूमिका प्रधान होती है तथा विद्यार्थी मुख्यतः श्रोता रहते हैं, इसलिए उनकी सक्रिय सहभागिता अपेक्षाकृत कम होती है।
प्रश्न 11. प्राचीनकालीन शिक्षण विधियाँ थीं—
(a) पाठ्यक्रम केन्द्रित
(b) शिक्षक केन्द्रित
(c) पाठ्य-पुस्तक केन्द्रित
(d) बाल केन्द्रित
उत्तर: (b) शिक्षक केन्द्रित।
व्याख्या: परम्परागत शिक्षण व्यवस्था में शिक्षक की भूमिका प्रधान मानी जाती थी तथा विद्यार्थी मुख्यतः शिक्षक से ज्ञान ग्रहण करते थे।
प्रश्न 12. 'प्रस्तावना प्रश्न' का सम्बन्ध है—
(a) विषय-वस्तु से
(b) पूर्वज्ञान से
(c) शिक्षक ज्ञान से
(d) अशृंखलाबद्धता से
उत्तर: (b) पूर्वज्ञान से।
व्याख्या: प्रस्तावना प्रश्नों द्वारा विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान की जाँच की जाती है और उसी आधार पर नवीन पाठ से सम्बन्ध स्थापित किया जाता है।
प्रश्न 13. बच्चों में कल्पनाशक्ति का विकास किया जा सकता है—
(a) समूह कार्य द्वारा
(b) व्याख्यान द्वारा
(c) कहानी द्वारा
(d) प्रश्नोत्तर द्वारा
उत्तर: (c) कहानी द्वारा।
व्याख्या: कहानी सुनते समय बालक पात्रों, घटनाओं एवं परिस्थितियों की मानसिक कल्पना करता है, जिससे उसकी कल्पनाशक्ति का विकास होता है।
प्रश्न 14. पाठ के प्रमुख तथ्यों को बार-बार दोहराना किस शिक्षण सिद्धान्त के अन्तर्गत आता है?
(a) चयन का सिद्धान्त
(b) प्रेरणा का सिद्धान्त
(c) आवृत्ति का सिद्धान्त
(d) नियोजन का सिद्धान्त
उत्तर: (c) आवृत्ति का सिद्धान्त।
व्याख्या: आवृत्ति का सिद्धान्त महत्वपूर्ण विषय-वस्तु की पुनरावृत्ति पर बल देता है, जिससे अधिगम अधिक स्थायी होता है।
प्रश्न 15. पर्यटन विधि से छात्रों में विकास होता है—
(a) समय का सदुपयोग
(b) मनोरंजकता
(c) बौद्धिकता
(d) निरीक्षण या अवलोकन
उत्तर: (d) निरीक्षण या अवलोकन।
व्याख्या: शैक्षिक पर्यटन में विद्यार्थी वास्तविक स्थानों, वस्तुओं और घटनाओं का प्रत्यक्ष निरीक्षण करते हैं, जिससे उनकी अवलोकन एवं निरीक्षण शक्ति का विकास होता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षण में प्रश्नोत्तर प्रविधि का क्या महत्व है?
उत्तर: प्रश्नोत्तर प्रविधि विद्यार्थियों की सक्रियता, रुचि, जिज्ञासा एवं चिन्तन बढ़ाती है तथा उनकी समझ की जाँच में सहायक होती है।
प्रश्न 17. बहुस्तरीय कक्षा-शिक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर: एक ही कक्षा में विभिन्न अधिगम एवं उपलब्धि स्तर वाले विद्यार्थियों को उनके स्तर के अनुरूप शिक्षण देना बहुस्तरीय शिक्षण कहलाता है।
प्रश्न 18. सम्प्रेषण की चार विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: सम्प्रेषण द्विपक्षीय, निरन्तर, गतिशील तथा प्रतिपुष्टि पर आधारित प्रक्रिया है।
प्रश्न 19. 'बाल-केन्द्रित शिक्षण' का क्या अर्थ है?
उत्तर: जिस शिक्षण में बालक की रुचि, आवश्यकता, क्षमता और सक्रियता को शिक्षण का केन्द्र बनाया जाता है, उसे बाल-केन्द्रित शिक्षण कहते हैं।
प्रश्न 20. सूक्ष्म शिक्षण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सीमित समय, सीमित विषय-वस्तु एवं छोटे छात्र-समूह में किसी एक शिक्षण-कौशल का अभ्यास कराना सूक्ष्म शिक्षण कहलाता है।
प्रश्न 21. शिक्षण सामग्री का वर्गीकरण कितने भागों में किया गया है?
उत्तर: तीन भागों में—श्रव्य सामग्री, दृश्य सामग्री तथा श्रव्य-दृश्य सामग्री।
प्रश्न 22. पुनर्बलन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: किसी व्यवहार या प्रतिक्रिया की पुनरावृत्ति की सम्भावना बढ़ाने वाली प्रक्रिया को पुनर्बलन कहते हैं।
प्रश्न 23. अनुदेशन का क्या आशय है? समझाइए।
उत्तर: निर्धारित अधिगम उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए शिक्षार्थी को व्यवस्थित निर्देश एवं मार्गदर्शन प्रदान करने की प्रक्रिया अनुदेशन कहलाती है।
प्रश्न 24. शिक्षण के अभिप्रेरणा सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: विद्यार्थी में सीखने की इच्छा, रुचि एवं उत्साह उत्पन्न करके उसे लक्ष्य की ओर सक्रिय करना अभिप्रेरणा का सिद्धान्त है।
प्रश्न 25. प्रश्नीकरण कौशल के किन्हीं दो घटकों का नाम लिखिए।
उत्तर: (1) प्रश्नों की संरचना। (2) प्रश्नों का प्रस्तुतीकरण।
प्रश्न 26. एलेन तथा रियान ने कितने शिक्षण कौशलों का उल्लेख किया?
उत्तर: एलेन तथा रियान ने 14 शिक्षण कौशलों का उल्लेख किया।
प्रश्न 27. विज्ञान विषय के शिक्षण के लिए सर्वाधिक उपयोगी विधि कौन-सी है?
उत्तर: प्रयोग-प्रदर्शन विधि।
प्रश्न 28. अपेक्षित अधिगम स्तर को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: किसी कक्षा एवं विषय के अध्ययन के बाद विद्यार्थी से अपेक्षित निर्धारित ज्ञान एवं दक्षता को अपेक्षित अधिगम स्तर कहते हैं।
प्रश्न 29. शिक्षक-केन्द्रित शिक्षण के दो दोष लिखिए।
उत्तर: (1) विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता कम रहती है। (2) वैयक्तिक भिन्नताओं की उपेक्षा होती है।
प्रश्न 30. शिक्षण-अधिगम सामग्री के रख-रखाव में क्या सावधानी रखनी चाहिए?
उत्तर: सामग्री को साफ, सुरक्षित एवं व्यवस्थित स्थान पर रखकर धूल, नमी, टूट-फूट और अनुचित उपयोग से बचाना चाहिए।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
| आधार | शिक्षण | प्रशिक्षण |
|---|---|---|
| उद्देश्य | ज्ञान, समझ, चिन्तन एवं व्यापक विकास करना। | किसी विशिष्ट कौशल या कार्य-दक्षता का विकास करना। |
| क्षेत्र | इसका क्षेत्र व्यापक होता है। | इसका क्षेत्र अपेक्षाकृत विशिष्ट एवं सीमित होता है। |
| प्रकृति | ज्ञानात्मक एवं व्यवहारात्मक दोनों हो सकती है। | मुख्यतः व्यावहारिक एवं कौशलपरक होती है। |
| बल | ज्ञान, समझ और बौद्धिक विकास पर बल दिया जाता है। | अभ्यास, दक्षता और कार्य-निष्पादन पर अधिक बल दिया जाता है। |
प्रश्न 32. शिक्षण में उपचारात्मक एवं निदानात्मक शिक्षण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
निदानात्मक प्रक्रिया— विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम-कठिनाइयों, त्रुटियों तथा उनके कारणों की पहचान करने की प्रक्रिया निदानात्मक प्रक्रिया कहलाती है। इसमें परीक्षण, अवलोकन, कार्य-पत्र और अन्य साधनों द्वारा कमजोरी का पता लगाया जाता है।
उपचारात्मक शिक्षण— निदान द्वारा पहचानी गई अधिगम-कठिनाइयों को दूर करने के लिए दिया जाने वाला विशेष सुधारात्मक शिक्षण उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है। इसमें पुनः शिक्षण, अतिरिक्त अभ्यास, सरल गतिविधियों तथा व्यक्तिगत सहायता का प्रयोग किया जाता है।
इस प्रकार निदान कठिनाई की पहचान करता है, जबकि उपचारात्मक शिक्षण उसका निवारण करता है।
प्रश्न 33. शिक्षण में मनोरंजन एवं रुचि के सिद्धान्तों को समझाइए।
उत्तर: मनोरंजन एवं रुचि के सिद्धान्त के अनुसार शिक्षण ऐसा होना चाहिए कि विद्यार्थी उसमें रुचिपूर्वक एवं प्रसन्नतापूर्वक भाग ले। नीरस एवं बोझिल शिक्षण की अपेक्षा रुचिकर शिक्षण बालक को अधिक सक्रिय एवं अभिप्रेरित करता है।
इस सिद्धान्त के प्रमुख बिन्दु—
- विषय-वस्तु को बालक की रुचि, आवश्यकता एवं अनुभव से जोड़ा जाए।
- खेल, कहानी, गतिविधि, उदाहरण एवं शिक्षण-सामग्री का उचित प्रयोग किया जाए।
- विद्यार्थियों को प्रश्न करने एवं स्वयं कार्य करने के अवसर दिए जाएँ।
- कक्षा का वातावरण आनन्ददायक एवं भयमुक्त रखा जाए।
- रुचि उत्पन्न होने से अवधान, सक्रियता और अधिगम की स्थायित्व बढ़ती है।
प्रश्न 34. ब्लूम द्वारा सम्पादित शिक्षण के उद्देश्य बताइए।
उत्तर: शैक्षिक उद्देश्यों को तीन व्यापक क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जाता है—
- संज्ञानात्मक या ज्ञानात्मक क्षेत्र— ज्ञान, समझ एवं बौद्धिक क्षमताओं से सम्बन्धित।
- भावात्मक क्षेत्र— रुचि, अभिवृत्ति, भावना एवं मूल्यों से सम्बन्धित।
- मनोक्रियात्मक या मनोगत्यात्मक क्षेत्र— शारीरिक एवं क्रियात्मक कौशलों से सम्बन्धित।
संज्ञानात्मक क्षेत्र के परम्परागत छह स्तर—
- ज्ञान
- बोध
- प्रयोग
- विश्लेषण
- संश्लेषण
- मूल्यांकन
भावात्मक क्षेत्र के पाँच स्तर—
- ग्रहण करना
- अनुक्रिया करना
- मूल्य ग्रहण करना
- मूल्यों का संगठन करना
- मूल्यों द्वारा चरित्रीकरण
नोट: संज्ञानात्मक क्षेत्र की मूल वर्गीकरण-व्यवस्था ब्लूम के नेतृत्व वाली समिति से सम्बन्धित है। भावात्मक क्षेत्र का व्यवस्थित वर्गीकरण क्रैथवोल, ब्लूम एवं मासिया ने किया, जबकि मनोगत्यात्मक क्षेत्र के स्तरों का विकास बाद में अन्य विद्वानों ने किया।
प्रश्न 35. वैयक्तिक विभिन्नता के सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं? संक्षेप में बताइए।
उत्तर: वैयक्तिक विभिन्नता का सिद्धान्त इस तथ्य पर आधारित है कि प्रत्येक बालक शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक तथा व्यक्तित्व सम्बन्धी गुणों में दूसरे से भिन्न होता है।
शिक्षण में इसका महत्त्व—
- विद्यार्थियों की बुद्धि, रुचि, योग्यता और सीखने की गति अलग-अलग होती है।
- शिक्षक को एक ही विधि से सभी विद्यार्थियों को पढ़ाने के बजाय विविध विधियों का प्रयोग करना चाहिए।
- तेज, औसत एवं धीमी गति से सीखने वाले विद्यार्थियों को स्तरानुकूल कार्य देना चाहिए।
- आवश्यकतानुसार व्यक्तिगत सहायता एवं उपचारात्मक शिक्षण देना चाहिए।
- मूल्यांकन में भी वैयक्तिक भिन्नताओं का ध्यान रखा जाना चाहिए।
प्रश्न 36. खेल-विधि की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: खेल बालक की स्वाभाविक प्रवृत्ति है। इसलिए खेल-विधि में खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से सीखने के अवसर प्रदान किए जाते हैं। विशेष रूप से प्राथमिक स्तर पर यह अत्यन्त उपयोगी है।
इसका महत्त्व—
- शिक्षण को रुचिकर एवं आनन्ददायक बनाती है।
- बालक सक्रिय रूप से सीखता है।
- शारीरिक, मानसिक, सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास में सहायता करती है।
- सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व जैसे सामाजिक गुणों का विकास करती है।
- प्रत्यक्ष अनुभव के कारण अधिगम अधिक स्थायी होता है।
- आत्मविश्वास, सृजनात्मकता एवं समस्या-समाधान क्षमता बढ़ती है।
प्रश्न 37. विधि एवं प्रविधि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| आधार | विधि | प्रविधि |
|---|---|---|
| स्वरूप | विधि शिक्षण की व्यापक एवं व्यवस्थित योजना होती है। | प्रविधि किसी विधि को क्रियान्वित करने की विशिष्ट युक्ति या तरीका होती है। |
| क्षेत्र | इसका क्षेत्र अपेक्षाकृत व्यापक होता है। | इसका क्षेत्र अपेक्षाकृत सीमित होता है। |
| निर्भरता | विधि का अपना स्वतंत्र स्वरूप हो सकता है। | प्रविधि सामान्यतः किसी विधि या शिक्षण परिस्थिति के अन्तर्गत प्रयुक्त होती है। |
| प्रयोग | एक पाठ में कोई प्रमुख विधि अपनाई जा सकती है। | एक ही पाठ में आवश्यकता के अनुसार अनेक प्रविधियों का प्रयोग किया जा सकता है। |
| उदाहरण | आगमन विधि, प्रोजेक्ट विधि। | प्रश्नोत्तर, कहानी-कथन, स्पष्टीकरण। |
प्रश्न 38. शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर का उपयोग बताइए।
उत्तर: कम्प्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण, अधिगम, मूल्यांकन, सूचना-संग्रह एवं प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण साधन है।
प्रमुख उपयोग—
- डिजिटल पाठ्य-सामग्री, चित्र, वीडियो एवं प्रस्तुतीकरण द्वारा शिक्षण।
- ऑनलाइन एवं स्व-अधिगम के अवसर प्रदान करना।
- जानकारी एवं शैक्षिक संसाधनों की खोज करना।
- प्रश्न-पत्र, कार्यपत्रक एवं अन्य शिक्षण-सामग्री तैयार करना।
- ऑनलाइन परीक्षण एवं विद्यार्थियों की उपलब्धि का मूल्यांकन करना।
- अभिलेख, परिणाम एवं अन्य शैक्षिक आँकड़ों का संग्रह एवं प्रबन्धन करना।
- गणना, ग्राफ, सिमुलेशन एवं शैक्षिक सॉफ्टवेयर का प्रयोग करना।
प्रश्न 39. सहभागी शिक्षण के उद्देश्य बताइए।
उत्तर: सहभागी शिक्षण में शिक्षक और विद्यार्थी दोनों सक्रिय रूप से शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में भाग लेते हैं। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं—
- विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करना।
- विषय-वस्तु को सरल एवं बोधगम्य बनाना।
- सहयोग एवं समूह में कार्य करने की क्षमता विकसित करना।
- तर्क, चिन्तन, जिज्ञासा एवं सृजनात्मकता का विकास करना।
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति-कौशल विकसित करना।
- कक्षा-वातावरण को रुचिकर एवं आनन्ददायक बनाना।
- अधिगम को अधिक प्रभावी एवं स्थायी बनाना।
प्रश्न 40. शिक्षण में व्याख्यान प्रविधि को समझाइए।
उत्तर: जिस शिक्षण प्रविधि में शिक्षक विषय-वस्तु को मुख्यतः मौखिक रूप से क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित ढंग से विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करता है, उसे व्याख्यान प्रविधि कहते हैं।
प्रमुख विशेषताएँ एवं सावधानियाँ—
- विषय-वस्तु को तार्किक एवं क्रमबद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाए।
- भाषा सरल, स्पष्ट और विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप हो।
- उदाहरण, चित्र, मॉडल एवं शिक्षण-सामग्री का आवश्यकतानुसार प्रयोग किया जाए।
- आवाज, गति एवं हाव-भाव में उचित परिवर्तन रखा जाए।
- बीच-बीच में प्रश्न पूछकर विद्यार्थियों की सक्रियता एवं समझ की जाँच की जाए।
- अन्त में मुख्य बिन्दुओं का संक्षिप्त पुनरावलोकन किया जाए।
यह विधि कम समय में अधिक विषय-वस्तु प्रस्तुत करने में उपयोगी है, लेकिन केवल व्याख्यान पर निर्भर रहने से विद्यार्थी निष्क्रिय हो सकते हैं।
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