वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'शिक्षण एक त्रिध्रुवी प्रक्रिया है' कथन है-
(a) जान्सन
(b) एडम्स
(c) बी.एस.ब्लूम
(d) जान डीवी
उत्तर: (d) : जान डीवी के अनुसार, "शिक्षण एक त्रिधुवी प्रक्रिया है।" उन्होंने शिक्षा को त्रिधुवीय प्रक्रिया माना है, जिसमें शिक्षक, छात्र और समाज तीनों महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं。
प्रश्न 2. किस शिक्षाशास्त्री ने शिक्षा को सम्पूर्ण जीवन माना है-
(a) टी.पी.नन
(b) स्पेन्सर
(c) जॉन लॉक
(d) आदि शंकराचार्य
उत्तर: (b) : स्पेन्सर ने शिक्षा को सम्पूर्ण जीवन माना है। उन्होंने कहा था कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं है, बल्कि जीवन को पूर्णता प्रदान करना है。
प्रश्न 3. सम्प्रेषण शब्द का लैटिन वर्ड 'कम्यूनिस' का आशय है-
(a) सामान्य
(b) असामान्य
(c) उपयोगी
(d) आदान-प्रदान
उत्तर: (d) : सम्प्रेषण को अंग्रेजी में कम्यूनीकेशन (Communication) कहा जाता है। कम्यूनिकेशन शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के कम्यूनिस शब्द से मानी जाती है, जिसका अर्थ होता है- सामान्य बनाना। अतः सम्प्रेषण है, परस्पर सूचनाओं तथा विचारों का आदान प्रदान करना。
प्रश्न 4. सम्प्रेषण के तत्व हैं-
(a) सन्देश
(b) माध्यम
(c) स्रोत
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : सम्प्रेषण एक जटिल प्रक्रिया है, जिसमें कई तत्व शामिल होते हैं। इनमें निम्नलिखित तत्व शामिल हैं- प्रेषक, संदेश, माध्यम, प्राप्तकर्ता, प्रतिक्रिया, संदर्भ, बाधाएँ, प्रभावी सम्प्रेषण आदि。
प्रश्न 5. 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण सूत्र किस सिद्धांत पर आधारित है-
(a) पुनर्बलन सिद्धांत
(b) क्रिया-प्रसूत सिद्धांत
(c) गेस्टाल्ट सिद्धांत
(d) उद्दीपन-अनुक्रिया सिदांत
उत्तर: (c) : 'पूर्ण से अंश की ओर' शिक्षण सूत्र गेस्टाल्ट सिद्धान्त पर आधारित है。
प्रश्न 6. प्रश्नोत्तर प्रविधि के जनक कौन हैं?
(a) सुकरात
(b) प्लेटो
(c) अरस्तू
(d) डीवी
उत्तर: (a) : प्रश्नोत्तर विधि के जनक सुकरात हैं। प्रश्नोत्तर विधि भाषा शिक्षण की एक ऐसी विधि है, जिसके अन्तर्गत शिक्षक बच्चों से प्रश्न पूछता है तथा उनके उत्तरों के आधार पर पाठ को पढ़ाता है。
प्रश्न 7. निदान की प्रक्रिया से सम्पादित होता है-
(a) समस्या पहचान
(b) समस्या समाधान
(c) समस्या की आवश्यकता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (b) : निदान की प्रक्रिया समस्या समाधान से सम्पादित होती है。
प्रश्न 8. सूक्ष्म शिक्षण में निम्न में कौन से तत्व का समावेश नही होता है-
(a) सूक्ष्म समय
(b) सूक्ष्म कक्षा-आकार
(c) वृहद् पाठ्य वस्तु
(d) अभ्यास आधारित शिक्षण
उत्तर: (d) : सूक्ष्म शिक्षण में अभ्यास आधारित शिक्षण का पर्यवेक्षण अव्यवस्थित और अधिकतर अविश्वसनीय है。
प्रश्न 9. पाठशाला/विद्यायल को उद्यान की संज्ञा दी-
(a) हरबर्ट
(b) माण्टेसरी
(c) फ्रोबेल
(d) फ्रैंकलिन
उत्तर: (c) : फ्रेडरिक फ्रोबेल ने पाठ्शाला को उद्यान (गार्डन) की संज्ञा दी। फ्रोबेल ने बच्चों को पौधों के रूप में और शिक्षकों को बागवान के रूप में चित्रित किया था。
प्रश्न 10. व्याख्यान विधि में छात्र बने रहते हैं-
(a) सक्रिय
(b) उत्साही
(c) क्रियाशील
(d) निष्क्रिय
उत्तर: (d) : व्याख्यान विधि में छात्र निष्क्रिय होते हैं। इस विधि में बालकों को मौखिक रूप से जानकारी दी जाती है और वे किसी भी तरह से सक्रिय रूप से शामिल नहीं होते हैं。
प्रश्न 11. प्राचीन कालीन शिक्षण विधियाँ थीं-
(a) पाठ्यक्रम केन्द्रित
(b) शिक्षक केन्द्रित
(c) पाठ्य-पुस्तक केन्द्रित
(d) बाल केन्द्रित
उत्तर: (b) : प्राचीन कालीन शिक्षण विधियाँ शिक्षक केन्द्रित थीं। शिक्षक ज्ञान का स्रोत माना जाता था और छात्र उनसे सीखते थे。
प्रश्न 12. 'प्रस्तावना प्रश्न' का सम्बन्ध है-
(a) विषयवस्तु से
(b) पूर्वज्ञान से
(c) शिक्षक ज्ञान से
(d) अश्रृंखलाबद्धता से
उत्तर: (b) : 'प्रस्तावना प्रश्न' का संबंध पूर्व ज्ञान से है। पाठ पढ़ाने से पूर्व पूछे जाने वाले प्रश्न प्रस्तावनात्मक प्रश्नों के अन्तर्गत आते हैं。
प्रश्न 13. बच्चों में कल्पना शक्ति का विकास किया जा सकता है-
(a) समूह कार्य द्वारा
(b) व्याख्यान द्वारा
(c) कहानी द्वारा
(d) प्रश्नोत्तर द्वारा
उत्तर: (c) : बच्चों की कल्पना शक्ति को प्रेरित करने के लिए कहानी एक उत्तम माध्यम है。
प्रश्न 14. पाठ के प्रमुख तथ्यों को बार-बार दोहराना किस शिक्षण सिद्धान्त के अन्तर्गत आता है?
(a) चयन का सिद्धांत
(b) प्रेरणा का सिद्धांत
(c) आवृत्ति का सिद्धांत
(d) नियोजन का सिद्धांत
उत्तर: (c) : आवृत्ति सिद्धान्त के अनुसार, किसी भी जानकारी को दोहराने से उस जानकारी को याद रखने की संभावना बढ़ जाती है。
प्रश्न 15. पर्यटन विधि से छात्रों में विकास होता है-
(a) समय का सदुपयोग
(b) मनोरंजकता
(c) बौद्धिकता
(d) निरीक्षण या अवलोकन
उत्तर: (d) : पर्यटन विधि में छात्रों को विभिन्न स्थानों पर ले जाया जाता है और उन्हें विभिन्न चीजों को देखने और समझने का अवसर दिया जाता है। यह विधि छात्रों में निरीक्षण और अवलोकन की क्षमता विकसित करने में बहुत प्रभावी है。
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षण में प्रश्नोत्तर प्रविधि का क्या महत्व है?
उत्तर: शिक्षण में प्रश्नोत्तर विधि का महत्व - प्रश्नोत्तर प्रविधि शिक्षण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह छात्रों को सक्रिय रूप से सीखने में मदद करती है, उनकी समझ एवं ज्ञान को विकसित करती है और महत्वपूर्ण सोच और रचनात्मकता को बढ़ावा देती है。
प्रश्न 17. बहुस्तरीय कक्षा-शिक्षण किसे कहते हैं?
उत्तर: बहुस्तरीय कक्षा शिक्षण - बहुस्तरीय कक्षा-शिक्षण एक शिक्षण विधि है, जिसमें एक ही कक्षा में विभिन्न स्तरों के छात्रों को एक साथ पढ़ाया जाता है। यह उन स्कूलों में अधिक सामान्य है, जहाँ कम छात्र संख्या या कम शिक्षकों की संख्या होती है。
प्रश्न 18. सम्प्रेषण की चार विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: सम्प्रेषण की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- स्पष्टता - संदेश स्पष्ट और समझने में आसान होना चाहिए।
- संक्षिप्तता - सम्प्रेषण सीधा और संक्षिप्त होना चाहिए।
- सटीकता - सम्प्रेषण सटीक और गलतियों से मुक्त होना चाहिए।
- प्रभाव - सम्प्रेषण का प्रभाव प्राप्तकर्ता पर पड़ता है। प्रेषक प्राप्तकर्ता को कुछ सोचने, महसूस करने या करने के लिए प्रेरित करता है।
प्रश्न 19. 'बाल-केन्द्रित शिक्षण' का क्या अर्थ है?
उत्तर: बाल केन्द्रित शिक्षण- बाल केन्द्रित शिक्षण एक शिक्षण दृष्टिकोण है, जो बच्चों की रूचियों, आवश्यकताओं और क्षमताओं को ध्यान में रखकर शिक्षा प्रदान करता है। इस दृष्टिकोण में बच्चों को सक्रिय और सीखने की प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है。
प्रश्न 20. सूक्ष्म शिक्षण से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: सूक्ष्म शिक्षण-शिक्षण कौशल विकसित करने और सुधारने के लिए एक प्रशिक्षण तकनीक है। यह शिक्षण की एक छोटी इकाई पर केन्द्रित होता है, जैसे कि एक अवधारणा या एक कौशल और शिक्षकों को इसे प्रभावी ढंग से सिखाने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने में मदद करता है。
प्रश्न 21. शिक्षण सामग्री का वर्गीकरण कितने भागो में किया गया है?
उत्तर: शिक्षण सामग्री का वर्गीकरण तीन भागों में किया गया है। जो इस प्रकार है-
- दृश्यता- शिक्षण सामग्री में दृश्यता का महत्वपूर्ण स्थान है। बच्चे जो देखते हैं, उन्हें वह अधिक समय तक याद रहता है। इसमें किताबें ब्लैकबोर्ड, संकेतक, चित्र, मानचित्र आदि सामग्री शामिल है।
- ऑडियो सामग्री- ऑडियो सामग्री में ग्रामोफोन रेडियो, टेलीफोन, टेप रिकॉर्डर आदि सामग्री शामिल है।
- श्रव्य दृश्य सामग्री- श्रव्य दृश्य सामग्री में फिल्में, टेलीविजन, कम्प्यूटर, आदि सामग्री शामिल है।
प्रश्न 22. पुनर्बलन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: पुनर्बलन एक शिक्षण विधि है, जिसमें छात्रों को एक अवधारणा या कौशल को बेहतर ढंग से समझने और याद रखने के लिए बार-बार अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। यह विधि इस सिद्धान्त पर आधारित है कि सीखना दोहराने और अभ्यास से होता है。
प्रश्न 23. अनुदेशन का क्या आशय है? समझाइए।
उत्तर: अनुदेशन - अनुदेशन एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें ज्ञान, कौशल और व्यवहार को विकसित करने के लिए निर्देश और मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है। यह शिक्षा का एक महत्वपूर्ण घटक है और इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के संदर्भों में किया जाता है। जैसे कि विद्यालय तथा कार्यस्थल में。
प्रश्न 24. शिक्षण के अभिप्रेरणा सिद्धान्त से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: शिक्षण के अभिप्रेरणा के सिद्धान्त - शिक्षण के अभिप्ररेणा सिद्धान्त के समर्थक शिक्षार्थियों में सीखने की इच्छा और उत्साह को समझने और बढ़ाने का प्रयास करते हैं। ये सिद्धान्त शिक्षकों को यह समझने में मदद करते हैं कि छात्र क्यों सीखते हैं और वे छात्रों को अधिक प्रेरित और व्यस्त रखने के लिए रणनीति विकसित करने में मदद करते हैं。
प्रश्न 25. प्रश्नीकरण कौशल के किन्ही दो घटकों का नाम लिखिए।
उत्तर: प्रश्न कौशल के दो घटक निम्नलिखित हैं -
- निर्माण प्रक्रिया- प्रश्नों का निर्माण सरल विधि, सरल भाषा में होना चाहिए। प्रश्नों का आकार छोटा होना चाहिए तथा स्तर के अनुकूल होने चाहिए।
- प्रस्तुतीकरण- प्रश्न पूछते समय सभी छात्रों का ध्यान आकर्षित करना अपेक्षित है, प्रश्न पूछने से पहले छात्र को खड़ा नहीं करना चाहिए।
प्रश्न 26. एलेन तथा रियान ने कितने शिक्षण कौशलों का उल्लेख क्रिया।
उत्तर: एलेन तथा रियान ने शिक्षण में 14 शिक्षण कौशलों का उल्लेख किया है। 1. स्पष्टीकरण 2. बोधगम्यता 3. प्रश्न पूछना 4. उद्दीपन परिवर्तन 5. प्रबलन 6. वैयक्तिक ध्यान 7. प्रशंसा 8. निर्देश 9. समय प्रबंधन 10. अनुशासन 11. वर्ग प्रबंधन 12. मूल्यांकन 13. विभिन्न शिक्षण विधियों का प्रयोग 14. पाठ योजना。
प्रश्न 27. विज्ञान विषय के शिक्षण के लिये सर्वाधिक उपयोगी विधि कौन सी है?
उत्तर: प्रयोग-प्रदर्शन विधि विज्ञान विषय के शिक्षण के लिए सर्वाधिक उपयोगी है। विज्ञान विषय में प्रयोग-प्रदर्शन विधि का उपयोग करके छात्रों को विभिन्न अवधारणाओं को व्यवहारिक रूप से समझने में मदद मिलती है。
प्रश्न 28. अपेक्षित अधिगम स्तर को परिभाषित कीजिए।
उत्तर: अपेक्षित अधिगम स्तर एक शिक्षण लक्ष्य है, जो शिक्षार्थियों के सीखने के अनुभवों को अनुशासन, प्रभावी संचार और सकारात्मकता के साथ संचालित करने के लिए निर्धारित किया जाता है। यह शिक्षार्थियों को प्रेरित, सक्रिय और सीखने में व्यस्त रखने के लिए महत्वूपर्ण है。
प्रश्न 29. शिक्षक केन्द्रित शिक्षण के दो दोष लिखिए।
उत्तर: शिक्षक केन्द्रिक शिक्षण के दो दोष-
- सीखने में छात्रों की सक्रिय भागीदारी की कमी-शिक्षक केंद्रित शिक्षण में शिक्षक ही ज्ञान का स्त्रोत होता है, और छात्र निष्क्रिय श्रोता होते हैं।
- व्यक्तिगत भिन्नताओं की उपेक्षा करके शिक्षक सभी छात्रों को एक ही गति से और एक ही तरीके से पढ़ाता है। शिक्षक छात्रों की व्यक्तिगत भिन्नताओं को ध्यान में नहीं रखता है।
प्रश्न 30. शिक्षण अधिगम सामग्री के रख-रखाव में क्या सावधानी रखनी चाहिए।
उत्तर: शिक्षण अधिगम सामग्री के रख-रखाव के लिए उनका भण्डारण मरम्मत एवं उपयोग करना चाहिए。
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. शिक्षण एवं प्रशिक्षण में अन्तर को समझाइए।
उत्तर:
| शिक्षण | प्रशिक्षण |
|---|---|
| 1. शिक्षण अवधारणाओं से संबंधित है। | i. प्रशिक्षण ज्ञान का व्यवहारिक अनुप्रयोग है। |
| 2. शिक्षण नए ज्ञान के प्रदान करने की तलाश करता है। | ii. प्रशिक्षण एक विशिष्ट कौशल सेट विकसित करने के लिए उपकरणों और तकनीकों के साथ पहले से ही जानकारियों को तैयार करता है। |
| 3. शिक्षण का क्षेत्र व्यापक होता है। | iii. प्रशिक्षण का क्षेत्र संकुचित होता है। |
| 4. शिक्षण में शिक्षक अपने छात्रों को प्रतिक्रिया देते हैं। | iv. प्रशिक्षण में प्रशिक्षकों प्रशिक्षुओ से प्रतिक्रिया प्राप्त होती है। |
प्रश्न 32. शिक्षण में उपचारात्मक एवं निदानात्मक शिक्षण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: निदानात्मक शिक्षण - यदि कोई छात्र लगातार किसी विषय में अनुत्तीर्ण होता है, या पढ़ने में कमजोर होता है, तो छात्र की असफलता की जानकारी प्राप्त करना निदान कहलाता है। शैक्षिक निदान से तात्पर्य उस प्रक्रिया से है। जिसकी सहायता से हम व्यक्तिगत छात्रों की कठिनाइयों और उनकी अयोग्यताओं का अनुमान लगाते हैं। इसका उद्देश्य है कि सीखने में कम से कठिनाइयाँ हो。
उपचारात्मक शिक्षा - शिक्षा में कमजोर शिक्षार्थियों के शिक्षण अधिगम दोष प्रभावों को दूर करने की प्रक्रिया उपचारात्मक शिक्षण कहलाती है। शिक्षण या अधिगम की कठिनाइयों या त्रुटियों के कारण बच्चे कक्षा में पिछड़ जाते हैं, उपचारात्मक शिक्षण द्वारा उपयुक्त शिक्षण विधि का चयन करके उनकी कठिनाइयों को दूर करने का प्रयास किया जाता है。
प्रश्न 33. शिक्षण में मनोरंजन एवं रूचि के सिद्धांतों को समझाइए।
उत्तर: शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में अभिप्रेरणा और मनोरंजन का महत्वपूर्ण स्थान होता है। इस सिद्धान्त के अनुसार शिक्षक और छात्र दोनों ही अभिप्रेरित होकर रूचि से कार्य करते हैं। यह एक संचार रणनीति जिसका उद्देश्य किसी सामाजिक मुद्दो को कम करना या मनोरंजन के एक कस्टम अनुरूप टुकड़े के माध्यम से जनता को शिक्षित करना है। रूचि के सिद्धान्त के सन्दर्भ में पिन्टसेट महोदय ने यह कहा था कि जब तक छात्रों में सक्रिय रूचि नहीं होगी तब तक शिक्षक का कार्य पूर्ण नहीं होगा。
रूचि के सिद्धान्त निम्नलिखित हैं - 1. रूचि का संयम या प्रतीक्षा सिद्धान्त 2. सीमांत उत्पादकता सिद्धान्त 3. बचत और निवेश सिद्धान्त (शास्त्रीय सिद्धान्त) 4. ऋण योग्य निधि सिद्धान्त 5. तरलता वरीयता सिद्धान्त。
प्रश्न 34. ब्लूम द्वारा सम्पादित शिक्षण के उद्देश्य बताइए।
उत्तर: बेंजामिन ब्लूम ने निर्माण शिक्षा के क्षेत्र में सम्पादित शिक्षण के उद्देश्य बताए हैं। बालक के व्यवहार में परिवर्तन और विकास व्यक्तित्व के इन्ही तीनों पक्षो में होता है इसी को आधार मानकर ब्लूम ने सम्पादित शिक्षण के उद्देश्यों को तीन भागों में विभक्त किया है जो इस प्रकार हैं- 1. ज्ञानात्मक पक्ष के उद्देश्य (Objective of congnitive Domain) 2. भावात्मक पक्ष के उद्देश्य (Objective of Affective Domain) 3. मनोक्रियात्मक पक्ष के उद्देश्य (Objective of Psychomator Domain)。
ज्ञानात्मक पक्ष के स्तर- ज्ञानात्मक पक्ष के स्तर में वे उद्देश्य शामिल हैं। जिनका सम्बन्ध ज्ञान का स्मरण तथा प्रत्याभिज्ञान करने तथा बौद्धिक योग्यताओं का विकास करने से है। इसको छः वर्गों में बाँटा गया है- 1. ज्ञान 2. बोध 3. प्रयोग 4. विश्लेषण 5. संश्लेषण 6. मूल्यांकन。
भावात्मक पक्ष के स्तर- इसमें वे उद्देश्य शामिल हैं जिनका संबंध बालक की रुचि बालक की अभिवृत्ति, भावनाओं संवेदनाओं तथा मूल्यों से है। उद्देश्यों को स्तर के अनुसार 6 वर्गों में विभाजित किया गया है- 1. अभिग्रहण करना 2. अनुक्रिया करना 3. मूल्य आंकना 4. मूल्यों का साधारण 5. मूल्य पद्धति का संगठन 6. चरित्रीकरण。
मनोक्रियात्मक पक्ष के स्तर- इसका सम्बन्ध बालक के क्रियात्मक अथवा मनोगत्यात्मक कौशलों से हैं। मनोगत्यात्मक पक्ष को 6 वर्गों में बाँटा गया है- 1. उत्तेजना 2. कार्य करना 3. नियंत्रण 4. सामंजस्य 5. स्वाभावीकरण 6. (नोट: स्रोत में छठा बिंदु अपूर्ण है)।
प्रश्न 35. वैयक्तिक विभिन्नता के सिद्धांत से आप क्या समझते हैं? संक्षेप में बताइए।
उत्तर: वैयक्तिक विभिन्नता से तात्पर्य है प्रत्येक व्यक्ति में मानसिक, शारीरिक, संवेगात्मक आदि में अन्तर पाया जाना या इसी अन्तर के कारण व्यक्ति दूसरे से भिन्न माना जाता है। 19 वीं सदी में फ्रांसिस गाल्टन, पियर्सन, कैटेल, टर्मन आदि ने व्यक्तिगत विभिन्नता का पता लगाया तथा सिद्धान्तों को बताया。
वैयक्तिक विभिन्नता के निम्नलिखित सिद्धान्त हैं -
- व्यक्तिगत अन्तर सिद्धान्त की खोज- व्यक्तिगत विभिन्नताओं के क्षेत्र में अनुसंधान यह समझने का प्रयास करता है कि लोग कुछ आयामों पर कैसे और क्यों भिन्न होते हैं।
- व्यावसायिक अध्ययन में व्यक्तिगत भिन्नता के सिद्धान्त- व्यवसाय में व्यक्तिगत मतभेद महत्वपूर्ण है क्योंकि वे नियुक्ति प्रक्रिया से लेकर टीम सहयोग और प्रदर्शन तक कम्पनी के संचालन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित कर सकते हैं।
- श्रेणियों पर एक नज़दीकी नज़र- व्यक्तिगत अन्तर के प्रकार-व्यवहार विचार और भावना के विभिन्न पैटर्न को संदर्भित करते हैं।
व्यक्तिगत मतभेदों की अवधारणा की खोज करना कुछ लक्षणों पर 'बेहतर' या 'बढ़कर' के रूप में मूल्य निर्णय देने के बारे में नहीं है। बल्कि, यह प्रत्येक व्यक्ति द्वारा लाई गई विविधता और अद्वितीय क्षमता की सराहना करने के बारे में है。
प्रश्न 36. खेल-विधि की आवश्यकता एवं महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: खेल विधि प्राथमिक स्तर के शिक्षण में खेल विधि को सर्वश्रेष्ठ विधि माना जाता है क्योंकि यह पराम्परागत शिक्षण से भिन्न होता है। जिससे बालकों में अधिगम के लिए अधिक रूचि होती है। साथ ही प्राथमिक स्तर पर गणित शिक्षण के लिए भी खेल विधि को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है。
बच्चों को खेल-खेल में आसानी से सिखाया जा सकता है। खेल-खेल में प्राप्त अधिगम अधिक स्थाई माना जाता है। खेल द्वारा शिक्षा में शिक्षा का एक मात्र उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास होता है。
इस विधि के द्वारा प्रत्येक बात की शिक्षा देना संभव नहीं है, परन्तु यह निश्चित है कि खेलों में बालकों की रूचि अधिक होने के कारण उन्हें खेल द्वारा व्यावहारिक जीवन की सफल शिक्षा दी जा सकती है। भाषा-शिक्षण के लिए तो इस विधि को बड़ा उपयोगी बनाया जा सकता है। रचना, व्याकरण आदि सभी की शिक्षा प्राथमिक माध्यमिक तथा उच्च कक्षाओं में सफलतापूर्वक दी जा सकती है。
प्रश्न 37. विधि एवं प्रविधि में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| विधि | प्रविधि |
|---|---|
| 1. विधि का अपना व्यापक रूप होता है। | प्रविधि, विधि में प्रयोग होने वाला अंश है। |
| 2. विधि का अपना स्वतंत्र अस्तित्व होता है। | प्रविधि, विधि पर निर्भर करता है। |
| 3. विधि की एक सामान्य संरचना होती है। | प्रविधि, विधि की संरचना पर निर्भर करती है। |
| 4. शिक्षण में सामान्यतः एक बार में एक ही विधि का प्रयोग होता है। | शिक्षण में आवश्यकतानुसार कई प्रविधियों का प्रयोग किया जा सकता है। |
प्रश्न 38. शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर का उपयोग बताइए।
उत्तर: कम्प्यूटर-कम्प्यूटर एक डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक मशीन है, जिसका उपयोग सूचनाओं को स्टोर और प्रोसेस करने के लिए किया जाता है। कम्प्यूटर शब्द को लैटिन भाषा के कम्प्यूटर से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है गणना करना。
उपयोगिताएँ -
- शिक्षा के क्षेत्र में कम्प्यूटर के माध्यम से शिक्षक एवं विद्यार्थियों को विभिन्न तथ्य, आँकड़े तथा सूचनाएँ प्राप्त होती हैं।
- कम्प्यूटर में विभिन्न सूचनाओं तथा आँकड़ों का भण्डारण किया जा सकता है तथा उसे लम्बे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है।
- कम्प्यूटर सूचनाओं तथा आंकड़ों को प्रदान करने वाली एक विश्वसनीय तार्किक मशीन है।
- कम्प्यूटर के जरिए जटिल गणनाएँ तत्काल ही सम्पन्न की जा सकती है।
- कम्प्यूटर पर बच्चों को अनुक्रियाएँ करने का अवसर प्राप्त होता है।
- कम्प्यूटर से सीखने की प्रक्रिया सरल तथा प्रभावपूर्ण बन जाती है।
प्रश्न 39. सहभागी शिक्षण के उद्देश्य बताइए।
उत्तर: सहभागी शिक्षण के उद्देश्य-
- सहभागी शिक्षण के माध्यम से छात्र एवं शिक्षक दोनों को क्रियाशील बनाना आसान होता है।
- विषय वस्तु की प्रस्तुति को बोधगम्य एवं सरल बनाना है।
- छात्रों को स्थायी ज्ञान प्रदान करना।
- छात्रों के बहुमुखी विकास को सुनिश्चित करना।
- छात्रों में सृजनात्मकता, तार्किकता, जिज्ञासा, चिंतन, मनन आदि के विकास को सुनिश्चित करना।
- छात्रों की अन्तर्निहित शक्तियों का विकास करना।
- छात्रों के आवश्यकतानुसार कक्षा अभ्यास का निर्धारण करना।
- छात्रों के लिए कक्षा के वातावरण को रूचिकर एवं आनन्ददायी बनाना।
- शिक्षकों की सुविधाओं, अधिगम एवं ज्ञान में समन्वय स्थापित करना।
प्रश्न 40. शिक्षण में व्याख्यान प्रविधि को समझाइए।
उत्तर: थिंग के अनुसार 'शिक्षक शिक्षण प्रविधियों के द्वारा अपने छात्रों को कार्य करने योग्य बनाता है और स्वयं यह दर्शानें में लगा रहता है कि कार्य को कैसे किया जाएगा? साथ ही इस बात के लिए सतर्क रहता है कि इसे कैसे करें?'
एम.पी. मॉफेट के अनुसार, शिक्षण प्रविधियों का प्रयोग शिक्षक द्वारा अध्ययन करने के लिए दिए गए निर्देशात्मक तरीकों में होता है。
व्याख्यान विधि- किसी भी विषय वस्तु का गहन ढंग से विश्लेषण करना व्याख्यान विधि कहलाता है। इस विधि का प्रयोग जटिल विधियों को समझाने तथा सरल करने के लिए किया जाता है。
व्याख्यान विधि के प्रमुख कारक इसके निम्नलिखित कारक हैं-
- (i) व्याख्यान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए शिक्षक को चित्र, मॉडलों, उदाहरणों एवं तुलना के तरीकों का समावेश करना चाहिए।
- (ii) व्याख्यान सरल एवं स्पष्ट भाषा में होना चाहिए।
- (iii) व्याख्यान से पहले उद्देश्य का निश्चय करना।
- (iv) व्याख्यान देने के बाद शिक्षक रूचिकर प्रश्न पूछकर ज्ञात करें कि सीखने की क्रिया हो रही है या नहीं।