वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. "सीखना व्यवहार में उत्तरोत्तर सामंजस्य की प्रक्रिया है।" यह कथन है—
(a) स्किनर
(b) जैक्सन
(c) क्रो एण्ड क्रो
(d) वाटसन
उत्तर: (a) स्किनर।
व्याख्या: बी. एफ. स्किनर के अनुसार अधिगम व्यवहार में क्रमिक अथवा उत्तरोत्तर अनुकूलन की प्रक्रिया है। अधिगम के परिणामस्वरूप व्यक्ति का व्यवहार अनुभव के आधार पर परिवर्तित होता है।
प्रश्न 2. सम्प्रेषण का कार्य है—
(a) सूचना प्रदान करना
(b) निर्देश प्रसारित करना
(c) समन्वय स्थापित करना
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: सम्प्रेषण के माध्यम से सूचना एवं निर्देशों का आदान-प्रदान होता है तथा व्यक्तियों और समूहों के बीच समन्वय स्थापित किया जाता है।
प्रश्न 3. क्रियाशीलता का सिद्धान्त सर्वाधिक बल देता है—
(a) अनुकरण का
(b) आदर्श पाठ की प्रस्तुति का
(c) करके सीखने का
(d) गृहकार्य करने का
उत्तर: (c) करके सीखने का।
व्याख्या: क्रियाशीलता का सिद्धान्त 'करके सीखने' पर बल देता है। विद्यार्थी स्वयं गतिविधियों में भाग लेकर अधिक प्रभावी एवं स्थायी रूप से सीखता है।
प्रश्न 4. कक्षा में सम्प्रेषण का प्रारूप होता है—
(a) शाब्दिक सम्प्रेषण
(b) शाब्दिक एवं अशाब्दिक सम्प्रेषण
(c) लिखित सम्प्रेषण
(d) मौखिक सम्प्रेषण
उत्तर: (b) शाब्दिक एवं अशाब्दिक सम्प्रेषण।
व्याख्या: कक्षा में शिक्षक और विद्यार्थी शब्दों, लेखन, हाव-भाव, मुख-मुद्रा तथा संकेतों के माध्यम से सम्प्रेषण करते हैं। इसलिए शाब्दिक और अशाब्दिक दोनों प्रकार के सम्प्रेषण का प्रयोग होता है।
प्रश्न 5. आगमन विधि से सम्बन्धित सूत्र है—
(a) स्थूल से सूक्ष्म की ओर
(b) ज्ञात से अज्ञात की ओर
(c) विशिष्ट से सामान्य की ओर
(d) मूर्त से अमूर्त की ओर
उत्तर: (c) विशिष्ट से सामान्य की ओर।
व्याख्या: आगमन विधि में अनेक विशिष्ट उदाहरणों एवं तथ्यों के आधार पर सामान्य नियम अथवा सिद्धान्त तक पहुँचा जाता है।
प्रश्न 6. भाषा शिक्षण हेतु उपयुक्त युक्ति है—
(a) पर्यटन
(b) कहानी
(c) वर्णन
(d) स्पष्टीकरण
उत्तर: (b) कहानी।
व्याख्या: कहानी-कथन भाषा शिक्षण में विशेष रूप से उपयोगी है। इससे बालकों की शब्दावली, अभिव्यक्ति, कल्पनाशक्ति और भाषा-बोध का विकास होता है।
प्रश्न 7. गेस्टाल्ट मनोविज्ञान पर आधारित शिक्षण सूत्र है—
(a) पूर्ण से अंश की ओर
(b) मूर्त से अमूर्त की ओर
(c) ज्ञात से अज्ञात की ओर
(d) सरल से जटिल की ओर
उत्तर: (a) पूर्ण से अंश की ओर।
व्याख्या: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान सम्पूर्णता को प्राथमिकता देता है। व्यक्ति पहले सम्पूर्ण वस्तु या परिस्थिति को ग्रहण करता है और बाद में उसके विभिन्न अंशों को समझता है।
प्रश्न 8. प्रदर्शन युक्ति किस स्तर के छात्रों के लिए उपयोगी है—
(a) माध्यमिक स्तर
(b) प्राथमिक स्तर
(c) उच्च स्तर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) प्राथमिक स्तर।
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में प्राथमिक स्तर अपेक्षित उत्तर है। इस स्तर पर प्रदर्शन द्वारा वस्तुओं एवं प्रक्रियाओं को प्रत्यक्ष रूप से दिखाने से अधिगम अधिक मूर्त और स्पष्ट बनता है। यद्यपि प्रदर्शन विधि आवश्यकता के अनुसार अन्य स्तरों पर भी उपयोगी हो सकती है।
प्रश्न 9. सहायक सामग्री का सर्वाधिक प्रयोग किया जा सकता है—
(a) विज्ञान
(b) गणित
(c) भूगोल
(d) उपर्युक्त सभी में
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी में।
व्याख्या: विज्ञान, गणित और भूगोल सहित विभिन्न विषयों में चार्ट, मॉडल, मानचित्र, उपकरण और अन्य शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रभावी प्रयोग किया जा सकता है।
प्रश्न 10. बच्चे में कल्पना शक्ति का विकास होता है—
(a) समूह कार्य द्वारा
(b) प्रश्नोत्तर द्वारा
(c) व्याख्यान द्वारा
(d) कहानी द्वारा
उत्तर: (d) कहानी द्वारा।
व्याख्या: कहानी सुनते समय बालक पात्रों, घटनाओं एवं परिस्थितियों की मानसिक कल्पना करता है, जिससे उसकी कल्पनाशक्ति का विकास होता है।
प्रश्न 11. सम्प्रेषण के घटक हैं—
(a) प्रेषक
(b) संदेश
(c) ग्राही
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या: सम्प्रेषण के प्रमुख घटकों में प्रेषक, संदेश, माध्यम, ग्राही तथा प्रतिपुष्टि सम्मिलित होते हैं।
प्रश्न 12. सूक्ष्म शिक्षण के जन्मदाता हैं—
(a) फ्लैण्डर्स
(b) डी. डब्ल्यू. एलन
(c) एन. एल. गेज
(d) स्किनर
उत्तर: (b) डी. डब्ल्यू. एलन।
व्याख्या: ड्वाइट डब्ल्यू. एलन को सूक्ष्म शिक्षण के विकास से प्रमुख रूप से जोड़ा जाता है। इसका विकास स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में शिक्षक-प्रशिक्षण के लिए किया गया था।
प्रश्न 13. पाठ योजना का प्रथम बिन्दु है—
(a) प्रस्तावना प्रश्न
(b) उद्देश्य कथन
(c) कठिनाई निवारण
(d) व्याख्या
उत्तर: (a) प्रस्तावना प्रश्न।
व्याख्या: दिए गए विकल्पों में पाठ के कक्षागत प्रस्तुतीकरण का प्रथम चरण प्रस्तावना है। प्रस्तावना प्रश्नों द्वारा विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान की जाँच कर उन्हें नए पाठ के लिए तैयार किया जाता है।
प्रश्न 14. शिक्षण के कितने चरण होते हैं—
(a) एक
(b) तीन
(c) दो
(d) चार
उत्तर: (b) तीन।
व्याख्या: शिक्षण के तीन प्रमुख चरण हैं—पूर्व-सक्रिय चरण, अन्तःक्रियात्मक चरण तथा पश्च-सक्रिय चरण। इनमें क्रमशः योजना, वास्तविक शिक्षण तथा मूल्यांकन की क्रियाएँ होती हैं।
प्रश्न 15. दृश्य सामग्री है—
(a) ग्रामोफोन
(b) चलचित्र
(c) श्यामपट्ट
(d) लिंग्वाफोन
उत्तर: (c) श्यामपट्ट।
व्याख्या: श्यामपट्ट मुख्यतः देखकर ग्रहण की जाने वाली शिक्षण सामग्री है, इसलिए इसे दृश्य सामग्री में रखा जाता है। ग्रामोफोन और लिंग्वाफोन श्रव्य तथा चलचित्र श्रव्य-दृश्य सामग्री है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. किन्हीं दो शिक्षण प्रविधियों का नाम लिखिए।
उत्तर: प्रश्नोत्तर प्रविधि और व्याख्यान प्रविधि।
प्रश्न 17. शिक्षण में प्रेरणा के सिद्धान्त से क्या आशय है?
उत्तर: विद्यार्थी में सीखने की इच्छा, रुचि एवं उत्साह उत्पन्न करके उसे लक्ष्य की ओर सक्रिय करना प्रेरणा का सिद्धान्त है।
प्रश्न 18. शिक्षण की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: (1) शिक्षण उद्देश्यपूर्ण एवं योजनाबद्ध प्रक्रिया है। (2) यह शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच अन्तःक्रियात्मक प्रक्रिया है।
प्रश्न 19. सम्प्रेषण से क्या आशय है?
उत्तर: विचारों, सूचनाओं, भावनाओं अथवा संदेशों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया सम्प्रेषण कहलाती है।
प्रश्न 20. सहगामी शिक्षण की दो उपयोगिता लिखिए।
उत्तर: (1) शिक्षक एवं विद्यार्थी दोनों की सक्रिय सहभागिता होती है। (2) शिक्षण अधिक रुचिकर, सहयोगपूर्ण और प्रभावी बनता है।
प्रश्न 21. उपचारात्मक शिक्षण के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: (1) अधिगम-कठिनाइयों एवं त्रुटियों को दूर करना। (2) विद्यार्थी को अपेक्षित अधिगम स्तर तक पहुँचाना।
प्रश्न 22. पुनर्बलन कौशल से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: विद्यार्थी के वांछित व्यवहार एवं सही प्रतिक्रिया को प्रोत्साहित और सुदृढ़ करने की शिक्षण क्षमता पुनर्बलन कौशल कहलाती है।
प्रश्न 23. प्रकृति का अनुसरण शिक्षण सूत्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: बालक की प्रकृति, आयु, रुचि, क्षमता एवं विकास की अवस्था के अनुरूप शिक्षण करना प्रकृति का अनुसरण कहलाता है।
प्रश्न 24. बहुकक्षा शिक्षण की दो समस्याएँ लिखिए।
उत्तर: (1) एक साथ कई कक्षाओं पर ध्यान देना कठिन होता है। (2) समय-प्रबन्धन एवं व्यक्तिगत सहायता में कठिनाई होती है।
प्रश्न 25. उपचारात्मक शिक्षण के दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: (1) विद्यार्थी की विशेष अधिगम-कमियों को दूर करना। (2) अतिरिक्त अभ्यास द्वारा उसकी उपलब्धि में सुधार करना।
प्रश्न 26. न्यूनतम अधिगम स्तर से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसी कक्षा या स्तर की शिक्षा के बाद प्रत्येक विद्यार्थी से अपेक्षित न्यूनतम ज्ञान एवं दक्षताओं को न्यूनतम अधिगम स्तर कहते हैं।
प्रश्न 27. शिक्षण में श्रव्य-दृश्य सामग्री के दो कार्य लिखिए।
उत्तर: (1) विषय-वस्तु को सरल एवं स्पष्ट बनाना। (2) देखकर और सुनकर अधिगम को अधिक प्रभावी एवं स्थायी बनाना।
प्रश्न 28. 'गणित किट' के चार उपकरणों के नाम लिखिए।
उत्तर: डोमिनोज, अबेकस, परकार और चाँदा।
प्रश्न 29. 'अनुभूति से युक्तियुक्त की ओर' शिक्षण सूत्र से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: पहले अनुभव के आधार पर ज्ञान देकर बाद में उसके कारण और तर्क को समझाना 'अनुभूति से युक्तियुक्त की ओर' शिक्षण सूत्र है।
प्रश्न 30. सामूहिक सम्प्रेषण के दो गुण लिखिए।
उत्तर: (1) एक साथ अनेक व्यक्तियों तक सूचना पहुँचाई जा सकती है। (2) सहयोग एवं सामाजिक सहभागिता का विकास होता है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. गतिविधि आधारित शिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: गतिविधि आधारित शिक्षण में विद्यार्थी विभिन्न क्रियाओं एवं अनुभवों में सक्रिय रूप से भाग लेकर सीखता है। यह 'करके सीखने' पर आधारित होता है।
इसकी प्रमुख उपयोगिताएँ—
- विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता बढ़ती है।
- शिक्षण रुचिकर एवं आनन्ददायक बनता है।
- प्रत्यक्ष अनुभव के कारण ज्ञान अधिक स्थायी होता है।
- सृजनात्मकता, तर्क एवं समस्या-समाधान क्षमता का विकास होता है।
- सहयोग, संचार एवं सामाजिक कौशलों का विकास होता है।
- विद्यार्थियों में आत्मविश्वास एवं स्वाध्याय की प्रवृत्ति बढ़ती है।
प्रश्न 32. उत्तम शिक्षण-अधिगम सामग्री की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: उत्तम शिक्षण-अधिगम सामग्री की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- उद्देश्यपरक— निर्धारित शिक्षण उद्देश्यों की प्राप्ति में सहायक हो।
- विषय-संगत— पढ़ाई जा रही विषय-वस्तु से सम्बन्धित हो।
- स्तरानुकूल— विद्यार्थियों की आयु, रुचि एवं मानसिक स्तर के अनुरूप हो।
- सरल एवं स्पष्ट— आसानी से समझ में आने वाली हो।
- आकर्षक— विद्यार्थियों का ध्यान एवं रुचि बनाए रखे।
- सटीक— तथ्यात्मक एवं भाषागत त्रुटियों से मुक्त हो।
- सुलभ एवं किफायती— सम्भव हो तो स्थानीय एवं कम लागत वाली हो।
- प्रयोग में सरल— शिक्षक एवं विद्यार्थी आसानी से उसका उपयोग कर सकें।
प्रश्न 33. खेल विधि पर आधारित शिक्षण पद्धतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: खेल विधि बालक की स्वाभाविक खेल-प्रवृत्ति एवं क्रियाशीलता को शिक्षण का आधार बनाती है। खेल एवं गतिविधि को विशेष महत्त्व देने वाली प्रमुख पद्धतियाँ हैं—
- किण्डरगार्टन पद्धति— फ्रेडरिक फ्रोबेल द्वारा विकसित। इसमें खेल, गीत, गतिविधि तथा फ्रोबेल के उपहारों के माध्यम से शिक्षा दी जाती है।
- मॉन्टेसरी पद्धति— मारिया मॉन्टेसरी द्वारा विकसित। इसमें स्वक्रिया, स्वतंत्रता, ज्ञानेन्द्रिय प्रशिक्षण एवं विशेष शिक्षण सामग्री पर बल दिया जाता है।
दोनों पद्धतियों में बालक की सक्रियता, स्वाभाविक विकास और गतिविधि द्वारा सीखने को महत्त्व दिया जाता है।
प्रश्न 34. शिक्षण तथा प्रशिक्षण में क्या अन्तर है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| शिक्षण | प्रशिक्षण |
|---|---|
| शिक्षण का उद्देश्य ज्ञान, समझ, अभिवृत्ति एवं बौद्धिक विकास करना है। | प्रशिक्षण का उद्देश्य किसी विशिष्ट कौशल या कार्य-दक्षता का विकास करना है। |
| इसका क्षेत्र अपेक्षाकृत व्यापक होता है। | इसका क्षेत्र किसी विशेष कार्य या कौशल तक सीमित हो सकता है। |
| इसमें ज्ञान, समझ, चिन्तन एवं व्यवहार सभी पर बल दिया जाता है। | इसमें अभ्यास, शुद्धता, गति एवं कार्य-निष्पादन पर अधिक बल होता है। |
| यह विद्यार्थी के व्यापक विकास से सम्बन्धित हो सकता है। | यह किसी विशेष कार्य को दक्षतापूर्वक करने की क्षमता विकसित करता है। |
Semester 1 की Complete तैयारी
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