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PYQ 2015 • शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त

शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Paper 2015

UP DELED Semester 1 शिक्षण अधिगम के सिद्धान्त Previous Year Question Paper 2015 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. शिक्षण की गति आधारित होनी चाहिए—

(a) छात्रों के सीखने की गति पर

(b) परीक्षा तिथियों पर

(c) बालकों पर

(d) अध्यापक कार्य पर

उत्तर: (a) छात्रों के सीखने की गति पर।

व्याख्या: प्रभावी शिक्षण में विद्यार्थियों की वैयक्तिक भिन्नताओं, क्षमता तथा सीखने की गति का ध्यान रखा जाता है। इसलिए शिक्षण की गति विद्यार्थियों की अधिगम गति के अनुरूप होनी चाहिए।

प्रश्न 2. “शिक्षण को सीखने के संगठन के रूप में सर्वोत्तम प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है।” यह परिभाषा है—

(a) रायबर्न

(b) रस्क

(c) मन

(d) मरसेल

उत्तर: (d) मरसेल।

व्याख्या: मरसेल के अनुसार शिक्षण को सीखने के संगठन के रूप में सर्वोत्तम प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है। अर्थात् शिक्षक ऐसी परिस्थितियों का संगठन करता है जिनमें विद्यार्थी प्रभावी ढंग से सीख सके।

प्रश्न 3. कक्षा शिक्षण तब अच्छा होता है जब कक्षा के सभी छात्र—

(a) शान्त बैठे हों

(b) प्रश्न पूछने व उत्तर देने में तत्पर हों

(c) गणवेश में हों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (b) प्रश्न पूछने व उत्तर देने में तत्पर हों।

व्याख्या: प्रभावी कक्षा-शिक्षण में विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। प्रश्न पूछना तथा उत्तर देना उनकी जिज्ञासा, चिन्तन और सक्रियता को दर्शाता है।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा शिक्षण सूत्र गेस्टाल्ट मनोविज्ञान पर आधारित है?

(a) ज्ञात से अज्ञात की ओर

(b) पूर्ण से अंश की ओर

(c) मूर्त से अमूर्त की ओर

(d) अनिश्चित से निश्चित की ओर

उत्तर: (b) पूर्ण से अंश की ओर।

व्याख्या: गेस्टाल्ट मनोविज्ञान सम्पूर्णता पर बल देता है। इसके अनुसार व्यक्ति पहले किसी वस्तु या परिस्थिति को सम्पूर्ण रूप में ग्रहण करता है और बाद में उसके विभिन्न अंशों को समझता है।

प्रश्न 5. पर्यटन सर्वाधिक सहायक है—

(a) गणित शिक्षण में

(b) संगीत शिक्षण में

(c) भूगोल शिक्षण में

(d) भाषा शिक्षण में

उत्तर: (c) भूगोल शिक्षण में।

व्याख्या: भूगोल शिक्षण में शैक्षिक पर्यटन द्वारा विद्यार्थियों को प्राकृतिक एवं भौगोलिक स्थानों, घटनाओं और परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त होता है।

प्रश्न 6. “वास्तव में प्रश्न सबसे अच्छा उत्तेजक है और यह शिक्षक को शीघ्र उपलब्ध हो जाता है।” यह कथन है—

(a) पार्कर

(b) कॉलविन

(c) रेयान

(d) हैरिस

उत्तर: (a) पार्कर।

व्याख्या: पार्कर ने प्रश्न को शिक्षण में प्रभावी उद्दीपक माना। उचित प्रश्न विद्यार्थियों में जिज्ञासा उत्पन्न करते हैं और उन्हें सक्रिय चिन्तन के लिए प्रेरित करते हैं।

प्रश्न 7. प्रयोग प्रदर्शन विधि का गुण है—

(a) सक्रिय वातावरण

(b) स्थायी ज्ञान

(c) मानसिक विकास में सहायक

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।

व्याख्या: प्रयोग-प्रदर्शन विधि विद्यार्थियों में सक्रियता उत्पन्न करती है, प्रत्यक्ष अनुभव द्वारा ज्ञान को अधिक स्थायी बनाती है तथा निरीक्षण, तर्क और मानसिक विकास में सहायता करती है।

प्रश्न 8. छात्रों का पूर्वज्ञान जानने में कौन-सा कौशल सहायक है?

(a) प्रस्तावना कौशल

(b) उद्दीपन परिवर्तन कौशल

(c) पुनर्बलन कौशल

(d) व्याख्यान कौशल

उत्तर: (a) प्रस्तावना कौशल।

व्याख्या: पाठ-प्रस्तावना कौशल द्वारा शिक्षक विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान का पता लगाता है और उसे नए ज्ञान से जोड़कर पाठ के प्रति रुचि उत्पन्न करता है।

प्रश्न 9. बाल-केन्द्रित शिक्षा का उद्देश्य है—

(a) बालकों के नामांकन में वृद्धि

(b) बालकों का शारीरिक विकास

(c) बालकों का सर्वांगीण विकास

(d) बालकों को खेलना सिखाना

उत्तर: (c) बालकों का सर्वांगीण विकास।

व्याख्या: बाल-केन्द्रित शिक्षा में बालक की रुचि, आवश्यकता, क्षमता और विकास-गति को आधार बनाया जाता है। इसका उद्देश्य बालक का शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक सहित सर्वांगीण विकास करना है।

प्रश्न 10. संज्ञानात्मक क्षेत्र से सम्बन्धित नहीं है—

(a) जानना

(b) समझना

(c) चिन्तन करना

(d) समयबद्धता

उत्तर: (d) समयबद्धता।

व्याख्या: जानना, समझना और चिन्तन करना संज्ञानात्मक क्षेत्र से सम्बन्धित मानसिक क्रियाएँ हैं। समयबद्धता संज्ञानात्मक क्षेत्र की मानसिक प्रक्रिया नहीं है।

प्रश्न 11. डोमिनोज सर्वाधिक उपयोगी हैं—

(a) इतिहास शिक्षण में

(b) गणित शिक्षण में

(c) कला शिक्षण में

(d) भाषा शिक्षण में

उत्तर: (b) गणित शिक्षण में।

व्याख्या: डोमिनोज गणित किट की उपयोगी सामग्री है। इसके माध्यम से संख्या-बोध, गणना, मिलान और अन्य प्रारम्भिक गणितीय अवधारणाओं का अभ्यास कराया जा सकता है।

प्रश्न 12. सुकराती विधि कहते हैं—

(a) कहानी विधि को

(b) व्याख्या विधि को

(c) प्रश्नोत्तर विधि को

(d) विश्लेषण विधि को

उत्तर: (c) प्रश्नोत्तर विधि को।

व्याख्या: सुकरात शिक्षण में प्रश्नों के माध्यम से विचार और सत्य तक पहुँचने पर बल देते थे। इसलिए प्रश्नोत्तर विधि को सुकराती विधि भी कहा जाता है।

प्रश्न 13. प्राथमिक स्तर पर दवे समिति ने किन विषयों में अपेक्षित अधिगम स्तर का निर्धारण किया था?

(a) भाषा अध्ययन

(b) गणित अध्ययन

(c) पर्यावरण अध्ययन

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।

व्याख्या: डॉ. आर. एच. दवे की अध्यक्षता वाली समिति ने प्राथमिक स्तर पर कक्षा V तक भाषा, गणित और पर्यावरण अध्ययन में न्यूनतम अधिगम स्तर निर्धारित किए थे।

प्रश्न 14. बाल-केन्द्रित शिक्षण का उद्देश्य है—

(a) बालक का शारीरिक विकास

(b) बालक का मानसिक विकास

(c) बालक का सर्वांगीण विकास

(d) ये सभी

उत्तर: (c) बालक का सर्वांगीण विकास।

व्याख्या: बाल-केन्द्रित शिक्षण का व्यापक उद्देश्य बालक का सर्वांगीण विकास है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक और अन्य विकासात्मक पक्ष सम्मिलित हैं।

प्रश्न 15. वह शिक्षण प्रतिमान किसने बनाया जिसमें अध्यापक का स्थान कम्प्यूटर ने लिया है?

(a) आसुवेल

(b) डेनियल डेविस

(c) क्वीन्स

(d) जॉन रेंड्स

उत्तर: (b) डेनियल डेविस।

व्याख्या: कम्प्यूटर आधारित शिक्षण प्रतिमान डेनियल डेविस एवं लॉरेन्स एम. स्टोलुरो से सम्बन्धित है। इस प्रतिमान में अनुदेशन के अनेक कार्य कम्प्यूटर के माध्यम से सम्पन्न किए जाते हैं। दिए गए विकल्पों में डेनियल डेविस सही उत्तर है।

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Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. शिक्षण के कोई दो उद्देश्य बताइए।

उत्तर: (1) ज्ञान एवं कौशल का विकास करना। (2) व्यवहार में वांछित परिवर्तन लाना।

प्रश्न 17. वैयक्तिक सम्प्रेषण के दो लाभ बताइए।

उत्तर: (1) व्यक्तिगत आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जा सकता है। (2) तुरन्त प्रतिपुष्टि प्राप्त होती है।

प्रश्न 18. सम्प्रेषण की उपयुक्त परिभाषा दीजिए।

उत्तर: विचारों, सूचनाओं, भावनाओं या संदेशों के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आदान-प्रदान की प्रक्रिया सम्प्रेषण कहलाती है।

प्रश्न 19. शिक्षण के दो प्रमुख शिक्षण सूत्रों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: (1) ज्ञात से अज्ञात की ओर। (2) सरल से जटिल की ओर।

प्रश्न 20. अन्वेषण विधि का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: जिस विधि में विद्यार्थी स्वयं खोज एवं अन्वेषण द्वारा ज्ञान प्राप्त करता है, उसे अन्वेषण विधि कहते हैं।

प्रश्न 21. विज्ञान शिक्षण में सर्वाधिक उपयोगी शिक्षण विधि कौन-सी है और क्यों?

उत्तर: प्रयोगात्मक विधि, क्योंकि इससे विद्यार्थी वैज्ञानिक तथ्यों एवं सिद्धान्तों को प्रत्यक्ष प्रयोग द्वारा समझता और सत्यापित करता है।

प्रश्न 22. निरीक्षण विधि का शिक्षण में क्या महत्व है?

उत्तर: निरीक्षण विधि प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करके विद्यार्थियों की निरीक्षण शक्ति, जिज्ञासा और समझ का विकास करती है।

प्रश्न 23. रुचिपूर्ण शिक्षण का प्रमुख उद्देश्य क्या है?

उत्तर: विद्यार्थियों में रुचि एवं सक्रियता उत्पन्न करके शिक्षण को सरल, आनन्ददायी और प्रभावी बनाना।

प्रश्न 24. पुनर्बलन कितने प्रकार का होता है? केवल नामों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: दो प्रकार—धनात्मक पुनर्बलन और ऋणात्मक पुनर्बलन।

प्रश्न 25. शिक्षण क्रियाशीलता के सिद्धान्त का क्या अर्थ है?

उत्तर: बालक को स्वयं क्रिया एवं गतिविधियों में भाग लेकर सीखने का अवसर देना क्रियाशीलता का सिद्धान्त है।

प्रश्न 26. खेल पर आधारित दो शिक्षण प्रविधियों के नाम लिखिए।

उत्तर: नाट्यीकरण प्रविधि और भूमिका-निर्वाह प्रविधि।

प्रश्न 27. सूक्ष्म शिक्षण से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: सीमित समय, सीमित विषय-वस्तु और कम विद्यार्थियों के बीच किसी एक शिक्षण-कौशल का अभ्यास कराना सूक्ष्म शिक्षण कहलाता है।

प्रश्न 28. पाठ प्रस्तावना कौशल का क्या उद्देश्य है?

उत्तर: विद्यार्थियों का ध्यान एवं रुचि पाठ की ओर केन्द्रित करना तथा पूर्वज्ञान को नवीन ज्ञान से जोड़ना।

प्रश्न 29. अपेक्षित अधिगम स्तर की संकल्पना क्या है?

उत्तर: किसी कक्षा और विषय के अध्ययन के बाद विद्यार्थी से अपेक्षित निर्धारित ज्ञान एवं दक्षता के स्तर को अपेक्षित अधिगम स्तर कहते हैं।

प्रश्न 30. बहुउद्देशीय शिक्षण अधिगम सामग्री किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस शिक्षण-अधिगम सामग्री का उपयोग अनेक विषयों, कक्षाओं अथवा शिक्षण उद्देश्यों के लिए किया जा सके, उसे बहुउद्देशीय शिक्षण-अधिगम सामग्री कहते हैं।

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Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. सम्प्रेषण की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए शिक्षण में इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: सम्प्रेषण वह प्रक्रिया है जिसमें प्रेषक अपने विचार, सूचना या संदेश को किसी माध्यम द्वारा ग्राही तक पहुँचाता है और ग्राही से प्रतिपुष्टि प्राप्त होती है।

सम्प्रेषण प्रक्रिया के प्रमुख तत्त्व—

  1. प्रेषक
  2. सन्देश
  3. माध्यम
  4. ग्राही
  5. प्रतिपुष्टि

शिक्षण में महत्त्व—

  • शिक्षक और विद्यार्थी के बीच ज्ञान एवं विचारों का आदान-प्रदान सम्भव होता है।
  • विषय-वस्तु को स्पष्ट एवं बोधगम्य बनाने में सहायता मिलती है।
  • विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता एवं रुचि बढ़ती है।
  • प्रतिपुष्टि द्वारा शिक्षक विद्यार्थियों की समझ और कठिनाइयों का पता लगा सकता है।

प्रश्न 32. शिक्षण अधिगम सामग्री में श्यामपट्ट की उपयोगिता बताइए।

उत्तर: श्यामपट्ट कक्षा-शिक्षण की सरल एवं उपयोगी दृश्य सहायक सामग्री है। इसकी प्रमुख उपयोगिताएँ हैं—

  • मुख्य शिक्षण-बिन्दुओं, शब्दों, सूत्रों एवं उदाहरणों को लिखने में उपयोगी है।
  • रेखाचित्र, तालिका और आकृतियाँ बनाकर विषय को स्पष्ट किया जा सकता है।
  • विद्यार्थियों का ध्यान विषय-वस्तु पर केन्द्रित करता है।
  • आवश्यकतानुसार तत्काल लिखने, मिटाने और संशोधन की सुविधा देता है।

प्रश्न 33. शिक्षण अधिगम में मानचित्र की उपयोगिता बताइए।

उत्तर: मानचित्र महत्वपूर्ण दृश्य शिक्षण-अधिगम सामग्री है। इसकी प्रमुख उपयोगिताएँ हैं—

  • स्थान, दिशा, दूरी एवं सीमाओं को स्पष्ट करता है।
  • नदियों, पर्वतों, मैदानों, नगरों आदि की स्थिति समझने में सहायता करता है।
  • भौगोलिक तथ्यों को दृश्य एवं सरल रूप में प्रस्तुत करता है।
  • विद्यार्थियों की रुचि, निरीक्षण शक्ति एवं स्थानिक समझ का विकास करता है।

प्रश्न 34. शिक्षण अधिगम किसे कहते हैं?

उत्तर: शिक्षण-अधिगम शिक्षक एवं शिक्षार्थी के बीच होने वाली उद्देश्यपूर्ण अन्तःक्रियात्मक प्रक्रिया है। इसमें शिक्षक उपयुक्त परिस्थितियाँ, अनुभव एवं मार्गदर्शन प्रदान करता है तथा विद्यार्थी सक्रिय रूप से ज्ञान, कौशल, अभिवृत्तियाँ और अनुभव अर्जित करता है।

इस प्रकार शिक्षण और अधिगम परस्पर सम्बन्धित तथा एक-दूसरे के पूरक हैं।

प्रश्न 35. शिक्षण की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर:

  1. शिक्षण एक उद्देश्यपूर्ण एवं योजनाबद्ध प्रक्रिया है।
  2. शिक्षण शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच अन्तःक्रियात्मक प्रक्रिया है।

प्रश्न 36. शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षण सूत्रों का क्या महत्व है? संक्षेप में लिखिए।

उत्तर: शिक्षण सूत्र शिक्षक को विषय-वस्तु प्रस्तुत करने की व्यावहारिक एवं मनोवैज्ञानिक दिशा प्रदान करते हैं। इनके प्रमुख लाभ हैं—

  • शिक्षण को सरल, क्रमबद्ध एवं बोधगम्य बनाते हैं।
  • नए ज्ञान को विद्यार्थी के पूर्वज्ञान से जोड़ते हैं।
  • विषय-वस्तु को बालक की मानसिक क्षमता के अनुरूप प्रस्तुत करने में सहायता करते हैं।
  • ज्ञात से अज्ञात, सरल से जटिल और मूर्त से अमूर्त की ओर क्रमबद्ध अधिगम सम्भव बनाते हैं।

प्रश्न 37. “स्थूल से सूक्ष्म की ओर” शिक्षण सूत्र का अभिप्राय एवं उदाहरण दीजिए।

उत्तर: “स्थूल से सूक्ष्म की ओर” का अर्थ है कि शिक्षण का आरम्भ ऐसी बड़ी एवं स्पष्ट वस्तु या तथ्य से किया जाए जिसे विद्यार्थी आसानी से देख और समझ सके तथा बाद में उसके सूक्ष्म भागों का अध्ययन कराया जाए।

उदाहरण: मानव शरीर का अध्ययन कराते समय पहले सम्पूर्ण शरीर एवं उसके प्रमुख अंगों का परिचय कराया जाए और बाद में ऊतक तथा कोशिका जैसे सूक्ष्म भागों का अध्ययन कराया जाए।

प्रश्न 38. शिक्षण में प्रश्नोत्तर प्रविधि की उपयोगिता बताइए।

उत्तर: प्रश्नोत्तर प्रविधि की प्रमुख उपयोगिताएँ निम्नलिखित हैं—

  • विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान की जाँच की जा सकती है।
  • रुचि, जिज्ञासा, अवधान एवं चिन्तन को सक्रिय करती है।
  • विद्यार्थियों को शिक्षण में सक्रिय सहभागिता का अवसर मिलता है।
  • शिक्षक विद्यार्थियों की समझ एवं कठिनाइयों का पता लगा सकता है।
  • पुनरावृत्ति एवं मूल्यांकन में उपयोगी है।

प्रश्न 39. व्याख्यान युक्ति का क्या अभिप्राय है? इसके गुण एवं दोषों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: जिस शिक्षण युक्ति में शिक्षक विषय-वस्तु को मुख्यतः मौखिक रूप से क्रमबद्ध एवं व्यवस्थित ढंग से विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत करता है, उसे व्याख्यान युक्ति कहते हैं।

गुण—

  • कम समय में अधिक विषय-वस्तु प्रस्तुत की जा सकती है।
  • बड़ी कक्षाओं के लिए सुविधाजनक एवं कम खर्चीली है।
  • विषय-वस्तु को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया जा सकता है।

दोष—

  • विद्यार्थी प्रायः निष्क्रिय श्रोता बने रहते हैं।
  • वैयक्तिक भिन्नताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा सकता।
  • करके सीखने एवं प्रत्यक्ष अनुभव के अवसर सीमित होते हैं।

प्रश्न 40. बाल-केन्द्रित शिक्षण उपागम से क्या अभिप्राय है? शिक्षण में इसका क्या महत्व है?

उत्तर: जिस शिक्षण उपागम में बालक की रुचि, आवश्यकता, क्षमता, अनुभव एवं विकास-गति को शिक्षण का केन्द्र बनाया जाता है, उसे बाल-केन्द्रित शिक्षण उपागम कहते हैं। इसमें शिक्षक ज्ञान देने वाला मात्र न होकर मार्गदर्शक और सहायक की भूमिका निभाता है।

महत्त्व—

  • बालक को सक्रिय होकर स्वयं सीखने का अवसर मिलता है।
  • वैयक्तिक भिन्नताओं का सम्मान होता है।
  • रुचि, जिज्ञासा एवं सृजनात्मकता का विकास होता है।
  • आत्मविश्वास एवं स्वावलम्बन बढ़ता है।
  • बालक के सर्वांगीण विकास में सहायता मिलती है।
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