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PYQ 2025 • शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार

शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार Previous Year Paper 2025

UP DELED Semester 3 शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार Previous Year Question Paper 2025 with solution.

Section 1 बहुविकल्पीय प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. ब्लूम टैक्सोनॉमी विकसित हुई—

(A) 1957 ई.

(B) 1958 ई.

(C) 1956 ई.

(D) 1955 ई.

उत्तर: (C) : ब्लूम की शैक्षिक उद्देश्यों के ज्ञानात्मक क्षेत्र की वर्गीकरण-पद्धति 1956 ई. में प्रकाशित हुई।

प्रश्न 2. चर के प्रकार हैं—

(A) सतत

(B) असतत

(C) उपर्युक्त दोनों (A) एवं (B)

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (C) : मात्रात्मक चर मुख्यतः सतत तथा असतत होते हैं। सतत चर किसी निश्चित सीमा के बीच अनेक मान ग्रहण कर सकता है, जबकि असतत चर पृथक-पृथक निश्चित मान ग्रहण करता है।

प्रश्न 3. रीता ने भाषा में 60 अंक प्राप्त किए हैं। 60 अंक प्राप्त करना प्रदर्शित करता है—

(A) मापन को

(B) मूल्यांकन को

(C) परीक्षण को

(D) उपलब्धि को

उत्तर: (A) : किसी विद्यार्थी की उपलब्धि को अंक अथवा संख्या के रूप में व्यक्त करना मापन है। अतः 60 अंक प्राप्त करना मापन को प्रदर्शित करता है।

प्रश्न 4. परिकल्पना होती है—

(A) समाधान का पूर्व अनुमान

(B) समाधान का बाद में अनुमान

(C) शोध के मध्य में अनुमान

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (A) : किसी समस्या के सम्भावित समाधान के सम्बन्ध में प्रस्तुत परीक्षणयोग्य पूर्व-अनुमान को परिकल्पना कहते हैं।

प्रश्न 5. "बचाव, निदान का उच्चतम स्तर है।" यह कथन है—

(A) स्किनर का

(B) फ्रॉबेल का

(C) रॉस का

(D) क्रॉनबैक का

उत्तर: टी. पी. नन का : प्रश्न में दिए गए विकल्पों में सही उत्तर उपलब्ध नहीं है। "बचाव, निदान का उच्चतम स्तर है" कथन टी. पी. नन का है।

प्रश्न 6. 'सर्वशिक्षा अभियान' के क्रियान्वयन में सहायक है—

(A) क्रियात्मक शोध

(B) परम्परागत शोध

(C) वैज्ञानिक शोध

(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं

उत्तर: (A) : विद्यालय एवं शिक्षा-व्यवस्था की स्थानीय समस्याओं की पहचान तथा उनके व्यावहारिक समाधान के लिए क्रियात्मक शोध उपयोगी होता है।

प्रश्न 7. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन का आरम्भ हुआ—

(A) सन् 2009 ई. में

(B) सन् 2008 ई. में

(C) सन् 2010 ई. में

(D) सन् 2011 ई. में

उत्तर: (A) : विद्यालयी स्तर पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) व्यवस्था को सन् 2009 में लागू किया गया।

प्रश्न 8. मापन होता है—

(A) मात्रात्मक

(B) गुणात्मक

(C) तुलनात्मक

(D) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (A) : मापन में किसी गुण, योग्यता या उपलब्धि को अंक अथवा संख्या में व्यक्त किया जाता है। अतः मापन मुख्यतः मात्रात्मक होता है।

प्रश्न 9. छात्रों के प्रारम्भिक ज्ञान का मूल्यांकन किया जाता है—

(A) आकलित मूल्यांकन में

(B) स्थानात्मक मूल्यांकन में

(C) मौखिक मूल्यांकन में

(D) दक्षता मूल्यांकन में

उत्तर: (B) : शिक्षण प्रारम्भ करने से पूर्व विद्यार्थी के पूर्वज्ञान, क्षमता एवं उचित अधिगम-स्तर की जानकारी के लिए स्थानात्मक मूल्यांकन किया जाता है।

प्रश्न 10. बौद्धिक योग्यता में बोध का अंग नहीं है—

(A) अनुवाद

(B) विवेचना

(C) व्याख्या-विस्तार

(D) अनुप्रयोग

उत्तर: (D) : बोध के अन्तर्गत अनुवाद, व्याख्या/विवेचना तथा विस्तार आते हैं। अनुप्रयोग ज्ञानात्मक क्षेत्र का अलग स्तर है।

प्रश्न 11. "दिल्ली का लाल किला किसने बनवाया था?" यह किस प्रकार का प्रश्न है?

(A) स्मृति सम्बन्धी

(B) विचारोत्तेजक

(C) तर्क सम्बन्धी

(D) विकासात्मक

उत्तर: (A) : इसमें विद्यार्थी से पहले से सीखे हुए तथ्य का पुनःस्मरण अपेक्षित है, इसलिए यह स्मृति सम्बन्धी प्रश्न है।

प्रश्न 12. क्रियात्मक शोध के अन्तर्गत समष्टि (सम्पूर्ण जनसंख्या) के छोटे-से भाग को कहते हैं—

(A) सादर्श

(B) प्रेक्षेपण

(C) न्यायदर्श

(D) न्यादर्श

उत्तर: (D) : सम्पूर्ण जनसंख्या अथवा समष्टि में से अध्ययन के लिए चुने गए प्रतिनिधि छोटे भाग को न्यादर्श (Sample) कहते हैं।

प्रश्न 13. मूल्यांकन के कितने पक्ष होते हैं?

(A) 3

(B) 2

(C) 6

(D) 4

उत्तर: (A) : मूल्यांकन के तीन प्रमुख पक्ष हैं—ज्ञानात्मक, भावात्मक तथा क्रियात्मक अथवा मनोचालक पक्ष

प्रश्न 14. 'नील मुद्रण' का निर्माण आवश्यक है—

(A) कक्षा-शिक्षण में

(B) प्रश्न-पत्र निर्माण में

(C) परीक्षा आयोजन में

(D) गृहकार्य के मूल्यांकन में

उत्तर: (B) : नील मुद्रण (Blue Print) प्रश्न-पत्र निर्माण की योजनाबद्ध रूपरेखा है। इससे उद्देश्यों, विषय-वस्तु, प्रश्न-प्रकारों एवं अंकों का उचित वितरण सुनिश्चित किया जाता है।

प्रश्न 15. उत्तम परीक्षण की विशेषताएँ हैं—

(A) वैधता

(B) विश्वसनीयता

(C) उद्देश्यपूर्णता

(D) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (D) : वैधता, विश्वसनीयता एवं उद्देश्यपूर्णता उत्तम परीक्षण की प्रमुख विशेषताएँ हैं।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. किसी समस्या का प्रस्तावित उत्तर क्या कहलाता है?

उत्तर: किसी समस्या के सम्भावित समाधान से सम्बन्धित परीक्षणयोग्य पूर्व-अनुमान को परिकल्पना कहते हैं।

प्रश्न 17. प्रार्थना स्थल की गतिविधियों में मुख्य नवाचार क्या माना जाता है?

उत्तर: प्रार्थना स्थल की गतिविधियों में ड्रम एवं संगीत का प्रयोग मुख्य नवाचार माना जाता है।

प्रश्न 18. मांसपेशियों एवं आंगिक गतिविधियाँ मूल्यांकन के किस पक्ष से सम्बन्धित हैं?

उत्तर: मांसपेशीय एवं आंगिक गतिविधियाँ क्रियात्मक अथवा मनोचालक पक्ष से सम्बन्धित होती हैं।

प्रश्न 19. उपचारात्मक शिक्षण को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: निदान द्वारा ज्ञात विद्यार्थी की अधिगम-कठिनाइयों एवं त्रुटियों को दूर करने के लिए दिया गया विशेष शिक्षण उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।

प्रश्न 20. शैक्षिक नवाचार को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: शिक्षा में सुधार हेतु शिक्षण-अधिगम अथवा शैक्षिक व्यवस्था में किए गए नवीन, उपयोगी एवं उद्देश्यपूर्ण परिवर्तन शैक्षिक नवाचार कहलाते हैं।

प्रश्न 21. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: पूरे सत्र में विद्यार्थी की प्रगति का निरन्तर तथा उसके व्यक्तित्व के विभिन्न पक्षों का समग्र मूल्यांकन सतत एवं व्यापक मूल्यांकन कहलाता है।

प्रश्न 22. शैक्षिक मापन के स्तरों के नाम लिखिए।

उत्तर: शैक्षिक मापन के चार स्तर हैं—नामित (नामिक), क्रमित (क्रमिक), अन्तराल तथा अनुपात स्तर

प्रश्न 23. शैक्षिक अनुसंधान के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।

उत्तर: शैक्षिक अनुसंधान के प्रमुख उद्देश्य हैं—नवीन शैक्षिक ज्ञान की खोज तथा शैक्षिक समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान

प्रश्न 24. मौलिक शोध किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: नवीन ज्ञान, सिद्धान्त अथवा सामान्य नियमों के विकास के लिए किया गया अनुसंधान मौलिक शोध कहलाता है।

प्रश्न 25. न्यादर्श से आप क्या समझते हैं? परिभाषित कीजिए।

उत्तर: सम्पूर्ण जनसंख्या में से अध्ययन हेतु चुने गए प्रतिनिधि छोटे भाग को न्यादर्श (Sample) कहते हैं।

प्रश्न 26. रचनात्मक (Formative) मूल्यांकन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: शिक्षण-अधिगम के दौरान विद्यार्थी की प्रगति एवं कठिनाइयों का आकलन करके प्रतिपुष्टि एवं सुधार हेतु किया गया मूल्यांकन रचनात्मक मूल्यांकन कहलाता है।

प्रश्न 27. शून्य परिकल्पना को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: दो चरों या समूहों के बीच कोई सार्थक अन्तर अथवा सम्बन्ध नहीं है—ऐसी परिकल्पना शून्य परिकल्पना कहलाती है।

प्रश्न 28. मापन किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: किसी गुण या विशेषता को निश्चित नियमों के अनुसार संख्या अथवा अंक प्रदान करने की प्रक्रिया मापन कहलाती है।

प्रश्न 29. मूल्यांकन प्रक्रिया में अभिलेखीकरण के दो महत्त्व बताइए।

उत्तर: अभिलेखीकरण से विद्यार्थी की प्रगति का स्थायी विवरण सुरक्षित रहता है तथा भविष्य के मूल्यांकन, निर्देशन एवं सुधार में सहायता मिलती है।

प्रश्न 30. मौखिक परीक्षा के दो दोष लिखिए।

उत्तर: मौखिक परीक्षा में परीक्षक के पक्षपात की सम्भावना रहती है तथा अधिक विद्यार्थियों की परीक्षा लेने में अधिक समय लगता है।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. परीक्षण एवं मापन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

परीक्षण मापन
परीक्षण किसी गुण, योग्यता या उपलब्धि की जाँच का उपकरण है। मापन किसी गुण अथवा उपलब्धि को संख्या में व्यक्त करने की प्रक्रिया है।
इसमें प्रश्नों, कार्यों अथवा परिस्थितियों के माध्यम से प्रतिक्रियाएँ प्राप्त की जाती हैं। प्राप्त प्रतिक्रियाओं या निष्पादन को निर्धारित नियमों के अनुसार अंक प्रदान किए जाते हैं।
परीक्षण मापन के लिए आवश्यक सूचना प्रदान करता है। मापन उस सूचना को परिमाणात्मक रूप प्रदान करता है।
यह मुख्यतः मापन का साधन है। मापन का क्षेत्र परीक्षण से व्यापक है।

प्रश्न 32. गणितीय कौशल से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: संख्याओं, गणितीय संक्रियाओं, मापन, गणना, तर्क एवं समस्या-समाधान से सम्बन्धित कार्यों को शुद्धता, गति और समझ के साथ करने की क्षमता गणितीय कौशल कहलाती है।

इसका मूल्यांकन मौखिक एवं लिखित प्रश्नों, व्यावहारिक गतिविधियों, दैनिक जीवन की समस्याओं और गणितीय कार्यों के माध्यम से किया जा सकता है। गणितीय कौशल विद्यार्थी को गणितीय ज्ञान का व्यावहारिक परिस्थितियों में उपयोग करने योग्य बनाता है।

प्रश्न 33. उत्तम प्रश्नपत्र निर्माण के सोपानों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: उत्तम प्रश्नपत्र निर्माण के प्रमुख सोपान निम्नलिखित हैं—

  1. योजना निर्माण— कक्षा, विषय, परीक्षा की अवधि, पूर्णांक एवं शैक्षिक उद्देश्यों का निर्धारण करना।
  2. विषय-वस्तु एवं अंकभार का निर्धारण— पाठ्यक्रम की विभिन्न इकाइयों को उचित भार देना।
  3. ब्लू-प्रिन्ट निर्माण— उद्देश्यों, विषय-वस्तु, प्रश्न-प्रकार एवं अंकों का संतुलित वितरण करना।
  4. प्रश्नों की रचना— ब्लू-प्रिन्ट के अनुसार स्पष्ट, स्तरानुकूल एवं उद्देश्यपूर्ण प्रश्न तैयार करना।
  5. सम्पादन एवं परिष्करण— प्रश्नों की भाषा, शुद्धता, कठिनाई-स्तर एवं पुनरावृत्ति की जाँच करना।
  6. उत्तर-संकेत एवं अंक-योजना— अपेक्षित उत्तर तथा प्रत्येक प्रश्न के लिए अंक निर्धारित करना।

प्रश्न 34. शैक्षिक नवाचार के महत्त्व एवं आवश्यकता पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: समाज, विज्ञान, तकनीक तथा विद्यार्थियों की आवश्यकताएँ निरन्तर बदलती रहती हैं। इसलिए शिक्षा को प्रभावी एवं समयानुकूल बनाने के लिए शैक्षिक नवाचार आवश्यक है।

  • शिक्षण-अधिगम को सरल, रुचिकर एवं प्रभावी बनाता है।
  • विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता एवं सृजनात्मकता बढ़ाता है।
  • नई शिक्षण-विधियों एवं तकनीकी साधनों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
  • विद्यार्थियों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षण सम्भव बनाता है।
  • विद्यालयी एवं शैक्षिक समस्याओं के नवीन समाधान खोजने में सहायक होता है।
  • शिक्षा की गुणवत्ता एवं उपयोगिता में सुधार करता है।

प्रश्न 35. क्रियात्मक शोध को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: शिक्षक अथवा अन्य कार्यकर्ता द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में उत्पन्न किसी तात्कालिक एवं व्यावहारिक समस्या का वैज्ञानिक ढंग से अध्ययन करके उसका समाधान खोजने तथा कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए किया गया अनुसंधान क्रियात्मक शोध कहलाता है।

उदाहरण— यदि कक्षा के कुछ विद्यार्थियों की पठन-गति बहुत कम है, तो शिक्षक समस्या के कारणों की पहचान करके नई पठन-विधि एवं नियमित अभ्यास लागू करता है और कुछ समय बाद विद्यार्थियों की प्रगति का पुनः मूल्यांकन करता है। यह क्रियात्मक शोध का उदाहरण है।

प्रश्न 36. दक्षता आधारित मूल्यांकन को स्पष्ट कीजिए एवं इसकी आवश्यकता पर भी प्रकाश डालिए।

उत्तर: विद्यार्थी द्वारा निर्धारित ज्ञान, कौशल एवं अधिगम-दक्षताओं की वास्तविक प्राप्ति का आकलन करने वाली प्रक्रिया को दक्षता आधारित मूल्यांकन कहते हैं। इसमें केवल अंकों के बजाय यह देखा जाता है कि विद्यार्थी अपेक्षित कार्य को कितनी कुशलता से कर सकता है।

दक्षता आधारित मूल्यांकन की आवश्यकता—

  • विद्यार्थी की वास्तविक अधिगम-उपलब्धि जानने के लिए।
  • विशिष्ट कठिनाइयों एवं कमजोरियों की पहचान करने के लिए।
  • ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग एवं समस्या-समाधान क्षमता का आकलन करने के लिए।
  • व्यक्तिगत आवश्यकता के अनुसार प्रतिपुष्टि एवं उपचारात्मक शिक्षण देने के लिए।
  • निर्धारित अधिगम-परिणामों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए।

प्रश्न 37. बालक के भावात्मक पक्ष का वर्गीकरण ब्लूम टैक्सोनॉमी के आधार पर कीजिए।

उत्तर: भावात्मक पक्ष का सम्बन्ध विद्यार्थी की रुचि, अभिवृत्ति, भावना, मूल्य एवं आदर्शों से होता है। इसके प्रमुख स्तर निम्नलिखित हैं—

  1. आग्रहण या ध्यान देना— किसी विचार, घटना या उद्दीपन के प्रति जागरूक होकर उसे ग्रहण करना।
  2. अनुक्रिया करना— ग्रहण किए गए उद्दीपन के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया एवं सहभागिता करना।
  3. अनुमूल्यन— किसी विचार, कार्य अथवा मूल्य के महत्व को स्वीकार करना।
  4. धारणा या प्रत्ययीकरण— स्वीकृत मूल्य के प्रति स्थायी धारणा एवं प्रतिबद्धता विकसित करना।
  5. संगठन या व्यवस्थापन— विभिन्न मूल्यों को एक व्यवस्थित मूल्य-प्रणाली में संगठित करना।
  6. चारित्रीकरण— स्वीकृत मूल्यों का व्यक्ति के व्यवहार एवं चरित्र का स्थायी अंग बन जाना।

प्रश्न 38. सेमेस्टर एवं ग्रेडिंग सिस्टम को उदाहरण सहित परिभाषित कीजिए।

उत्तर: सेमेस्टर प्रणाली में शैक्षिक वर्ष को सामान्यतः दो निश्चित अवधियों में विभाजित किया जाता है और प्रत्येक सेमेस्टर के अन्त में निर्धारित पाठ्यक्रम का मूल्यांकन किया जाता है। इससे पाठ्यक्रम छोटे भागों में विभाजित होकर नियमित अध्ययन एवं मूल्यांकन सम्भव होता है।

उदाहरण— किसी एक वर्षीय पाठ्यक्रम को Semester 1 तथा Semester 2 में विभाजित करना।

ग्रेडिंग प्रणाली में विद्यार्थी की उपलब्धि को केवल कच्चे अंकों के बजाय निर्धारित ग्रेड या श्रेणियों—जैसे A, B, C आदि—के रूप में व्यक्त किया जाता है।

उदाहरण— 90% या उससे अधिक उपलब्धि को A ग्रेड के रूप में व्यक्त करना, यदि निर्धारित ग्रेडिंग मानदण्ड ऐसा हो।

प्रश्न 39. अवलोकन विधि से आपका क्या आशय है? इसके महत्त्व को समझाइए।

उत्तर: किसी व्यक्ति, घटना, व्यवहार या परिस्थिति का किसी निश्चित उद्देश्य से प्रत्यक्ष एवं योजनाबद्ध निरीक्षण करना अवलोकन विधि कहलाता है।

अवलोकन का महत्त्व—

  • विद्यार्थी के वास्तविक व्यवहार का प्रत्यक्ष अध्ययन किया जा सकता है।
  • रुचि, अभिवृत्ति, सामाजिक व्यवहार एवं क्रियात्मक कौशल का मूल्यांकन सम्भव होता है।
  • कक्षा में सहभागिता, अनुशासन एवं प्रतिक्रियाओं की जानकारी मिलती है।
  • अधिगम एवं व्यवहारगत समस्याओं की पहचान में सहायता मिलती है।
  • क्रियात्मक शोध एवं गुणात्मक मूल्यांकन के लिए उपयोगी तथ्य प्राप्त होते हैं।

प्रश्न 40. शोध में परिकल्पना को परिभाषित करते हुए इसके प्रकारों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर: किसी शोध-समस्या के सम्भावित समाधान अथवा चरों के बीच सम्भावित सम्बन्ध के बारे में प्रस्तुत परीक्षणयोग्य पूर्व-अनुमान को परिकल्पना कहते हैं।

परिकल्पना के प्रमुख प्रकार—

  • दिशात्मक परिकल्पना— चरों के बीच अन्तर अथवा सम्बन्ध के साथ उसकी दिशा भी स्पष्ट करती है।
  • अदिशात्मक परिकल्पना— अन्तर अथवा सम्बन्ध की सम्भावना बताती है, परन्तु उसकी दिशा स्पष्ट नहीं करती।
  • शून्य परिकल्पना— यह मानती है कि चरों या समूहों के बीच कोई सार्थक अन्तर अथवा सम्बन्ध नहीं है।
  • वैकल्पिक परिकल्पना— शून्य परिकल्पना के विपरीत सार्थक अन्तर अथवा सम्बन्ध की सम्भावना व्यक्त करती है।
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शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार Previous Year Paper 2025

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