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PYQ 2018 • शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार

शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार Previous Year Paper 2018

UP DELED Semester 3 शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार Previous Year Question Paper 2018 with solution.

Section 1 बहुविकल्पीय प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. शिक्षा के क्षेत्र में क्रियात्मक शोध के प्रवर्तक माने जाते हैं—

(a) एस. एस. स्टीवेन्स

(b) स्टीफन एम. कोरे

(c) जी. सी. हेल्मस्टेडर

(d) ब्रेडफील्ड

उत्तर: (b) : शिक्षा के क्षेत्र में क्रियात्मक शोध के विकास एवं प्रयोग में स्टीफन एम. कोरे (Stephen M. Corey) का प्रमुख योगदान रहा है।

प्रश्न 2. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन का आरम्भ हुआ—

(a) 2009

(b) 2008

(c) 2010

(d) 2011

उत्तर: (a) : केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने वर्ष 2009 में माध्यमिक स्तर पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) की व्यवस्था लागू की।

प्रश्न 3. रीता ने भाषा में 60 अंक प्राप्त किये हैं। 60 अंक प्राप्त करना है—

(a) मापन

(b) मूल्यांकन

(c) परीक्षण

(d) उपलब्धि

उत्तर: (a) : किसी उपलब्धि को अंक अथवा संख्या के रूप में व्यक्त करना मापन है। अतः 60 अंक प्राप्त करना मापन का उदाहरण है।

प्रश्न 4. ब्लूम टैक्सोनॉमी विकसित हुई—

(a) 1957

(b) 1958

(c) 1956

(d) 1965

उत्तर: (c) : ब्लूम की शैक्षिक उद्देश्यों की संज्ञानात्मक वर्गीकरण-पद्धति 1956 में प्रकाशित हुई।

प्रश्न 5. प्रोफेसर स्टीफन एम. कोरे की पुस्तक है—

(a) ऑरिजिन ऑफ स्पीसीज (Origin of Species)

(b) एसेंशियल्स ऑफ एजुकेशनल मेजरमेंट (Essentials of Educational Measurement)

(c) इम्प्रूव एजुकेशन (Improve Education)

(d) एक्शन रिसर्च टू इम्प्रूव स्कूल प्रैक्टिसेज (Action Research to Improve School Practices)

उत्तर: (d) : स्टीफन एम. कोरे की प्रसिद्ध पुस्तक Action Research to Improve School Practices है।

प्रश्न 6. निबन्धात्मक परीक्षण के प्रश्न हैं—

(a) उत्तरात्मक प्रश्न

(b) पुनःस्मरण प्रश्न

(c) प्रत्यभिज्ञान प्रश्न

(d) बहुविकल्पीय प्रश्न

उत्तर: (a) : निबन्धात्मक परीक्षण में परीक्षार्थी को अपने शब्दों में उत्तर प्रस्तुत करना होता है, इसलिए ये उत्तरात्मक प्रश्न होते हैं।

प्रश्न 7. वस्तुनिष्ठ परीक्षा की विशेषता नहीं है—

(a) समय की मितव्ययिता

(b) फलांकन की सुगमता

(c) पाठ्यक्रम की व्यापकता

(d) रचना एवं प्रशासन की सुगमता

उत्तर: (d) : वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का फलांकन सरल होता है, लेकिन अच्छे वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की रचना करना अपेक्षाकृत कठिन एवं समयसाध्य होता है।

प्रश्न 8. "समस्या हमारी और हल भी हमारा" यह मूल मन्त्र है—

(a) मौलिक शोध का

(b) व्यावहारिक शोध का

(c) क्रियात्मक शोध का

(d) उपर्युक्त सभी का

उत्तर: (c) : "समस्या हमारी और हल भी हमारा" क्रियात्मक शोध का मूल आधार है, क्योंकि इसमें कार्यकर्ता अपने कार्यक्षेत्र की समस्या का स्वयं वैज्ञानिक समाधान खोजता है।

प्रश्न 9. शैक्षिक मूल्यांकन का अंग है—

(a) व्यवहारात्मक अनुभव

(b) प्रेरणात्मक अनुभव

(c) स्मृति अनुभव

(d) अधिगम अनुभव

उत्तर: (d) : मूल्यांकन प्रक्रिया में शिक्षण-उद्देश्य, अधिगम क्रियाएँ/अनुभव तथा व्यवहार-परिवर्तन परस्पर सम्बन्धित होते हैं।

प्रश्न 10. परिकल्पना होती है—

(a) समाधान का पूर्व अनुमान

(b) समाधान का बाद में अनुमान

(c) शोध के मध्य में अनुमान

(d) कोई अनुमान नहीं

उत्तर: (a) : समस्या के सम्भावित समाधान के सम्बन्ध में शोध से पूर्व प्रस्तुत परीक्षणयोग्य अनुमान को परिकल्पना कहते हैं।

प्रश्न 11. मापन का सामान्य सिद्धान्त सम्बन्धित है—

(a) गणित से

(b) विज्ञान से

(c) भूगोल से

(d) अर्थशास्त्र से

उत्तर: (a) : मापन में किसी गुण अथवा विशेषता को निर्धारित नियमों के अनुसार संख्यात्मक रूप दिया जाता है, इसलिए इसका सामान्य सिद्धान्त गणित से सम्बन्धित है।

प्रश्न 12. "मापन किन्हीं निश्चित स्वीकृत नियमों के अनुसार वस्तुओं को अंक प्रदान करने की प्रक्रिया है।" कथन है—

(a) स्टेनफोर्ड का

(b) एस. एस. स्टीवेन्स का

(c) हेल्मस्टेडर का

(d) गुप्त का

उत्तर: (b) : मापन की यह प्रसिद्ध परिभाषा एस. एस. स्टीवेन्स (S. S. Stevens) की है।

प्रश्न 13. शैक्षिक उद्देश्यों के प्रमुख आधार हैं—

(a) बालक

(b) समाज

(c) विषय-वस्तु

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : शैक्षिक उद्देश्यों के निर्धारण में बालक, समाज तथा विषय-वस्तु तीनों को ध्यान में रखा जाता है।

प्रश्न 14. बालक के विभिन्न कौशल विकसित होने वाला क्षेत्र है—

(a) ज्ञानात्मक क्षेत्र

(b) भावात्मक क्षेत्र

(c) क्रियात्मक क्षेत्र

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (c) : शारीरिक, क्रियात्मक एवं व्यावहारिक कौशलों का विकास क्रियात्मक अथवा कौशलात्मक क्षेत्र से सम्बन्धित है।

प्रश्न 15. बौद्धिक योग्यता में बोध का अंग नहीं है—

(a) अनुवाद

(b) व्याख्या

(c) वर्गीकरण

(d) बहिर्वेशन

उत्तर: (c) : ब्लूम के मूल वर्गीकरण में बोध के प्रमुख रूप अनुवाद, व्याख्या तथा बहिर्वेशन हैं। अतः इनमें वर्गीकरण सम्मिलित नहीं है।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. क्रियात्मक शोध का मूल मन्त्र क्या है?

उत्तर: क्रियात्मक शोध का मूल मन्त्र है—"समस्या हमारी और हल भी हमारा।"

प्रश्न 17. मूल्यांकन प्रक्रिया के मुख्य अंग कौन-से हैं?

उत्तर: मूल्यांकन प्रक्रिया के तीन मुख्य अंग हैं—शिक्षण-उद्देश्य, अधिगम क्रियाएँ तथा व्यवहार-परिवर्तन

प्रश्न 18. क्रियात्मक शोध के चरण क्या हैं?

उत्तर: प्रमुख चरण हैं—समस्या की पहचान, कारणों का विश्लेषण, क्रियात्मक परिकल्पना, कार्यविधि, प्रदत्त विश्लेषण तथा निष्कर्ष

प्रश्न 19. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन किसके द्वारा शुरू किया गया?

उत्तर: माध्यमिक स्तर पर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE) को CBSE द्वारा वर्ष 2009 में लागू किया गया।

प्रश्न 20. निबन्धात्मक परीक्षा के प्रकार बताइए।

उत्तर: निबन्धात्मक प्रश्न मुख्यतः अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय प्रकार के होते हैं।

प्रश्न 21. आकलित मूल्यांकन से क्या समझते हैं?

उत्तर: किसी पाठ्यक्रम या कार्यक्रम के अन्त में उसकी समग्र उपलब्धि एवं उपयोगिता का निर्णय करने वाला मूल्यांकन आकलित अथवा योगात्मक मूल्यांकन कहलाता है।

प्रश्न 22. शिक्षा में नवाचार का क्या अर्थ है?

उत्तर: शिक्षण-अधिगम को अधिक प्रभावी बनाने हेतु प्रचलित व्यवस्था में किए गए नवीन एवं उपयोगी परिवर्तन शैक्षिक नवाचार कहलाते हैं।

प्रश्न 23. उत्तम परीक्षण की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: उत्तम परीक्षण की प्रमुख विशेषताएँ हैं—उद्देश्यपूर्णता, व्यापकता, मितव्ययिता, सुगमता, वैधता, विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता, विभेदकता तथा मानक

प्रश्न 24. मापन के प्रकार बताइए।

उत्तर: मापन की चार प्रमुख मापनियाँ हैं—नामिक, क्रमिक, अन्तराल तथा अनुपात मापनी

प्रश्न 25. क्रियात्मक शोध की समयावधि क्या है?

उत्तर: क्रियात्मक शोध सामान्यतः अल्पावधि का होता है; इसकी कोई निश्चित 10–15 दिन की अवधि नहीं होती, समय समस्या एवं कार्ययोजना के अनुसार तय होता है।

प्रश्न 26. विश्वसनीयता किसे कहते हैं?

उत्तर: समान परिस्थितियों में परीक्षण को दोहराने पर प्राप्त परिणामों में स्थिरता एवं संगति होना उसकी विश्वसनीयता कहलाती है।

प्रश्न 27. निदानात्मक परीक्षण किन छात्रों का किया जाता है?

उत्तर: जिन विद्यार्थियों को किसी विषय या कौशल में विशिष्ट अधिगम-कठिनाई अथवा कमजोरी होती है, उनके निदान हेतु यह परीक्षण किया जाता है।

प्रश्न 28. उपचारात्मक शिक्षण के उद्देश्य बताइए।

उत्तर: निदान द्वारा ज्ञात अधिगम-कठिनाइयों एवं त्रुटियों को दूर करना, उनकी पुनरावृत्ति रोकना तथा विद्यार्थी को अपेक्षित अधिगम-स्तर तक पहुँचाना इसका उद्देश्य है।

प्रश्न 29. दक्षता आधारित मूल्यांकन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: निर्धारित अधिगम-दक्षताओं की प्राप्ति का नियमित आकलन एवं विश्लेषण करना दक्षता आधारित मूल्यांकन कहलाता है।

प्रश्न 30. शिक्षण प्रक्रिया की दृष्टि से ज्ञानात्मक पक्ष के स्तर कौन-से हैं?

उत्तर: ज्ञानात्मक पक्ष के छह स्तर हैं—ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग, विश्लेषण, संश्लेषण तथा मूल्यांकन

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. बालक के भावात्मक पक्ष का वर्गीकरण ब्लूम एवं सहयोगियों ने किस प्रकार किया है? समझाइए।

उत्तर: भावात्मक पक्ष का सम्बन्ध रुचि, अभिवृत्ति, मूल्य, दृष्टिकोण एवं भावनाओं के विकास से है। इसके पाँच क्रमिक स्तर हैं—

  1. ग्रहण करना या ध्यान देना— विद्यार्थी किसी उद्दीपन, विचार या निर्देश के प्रति जागरूक होकर उस पर ध्यान देता है।
  2. अनुक्रिया करना— विद्यार्थी प्राप्त उद्दीपन के प्रति सक्रिय प्रतिक्रिया एवं सहभागिता करता है।
  3. मूल्य आँकना— विद्यार्थी किसी विचार, कार्य अथवा व्यवहार के मूल्य को स्वीकार कर उसके प्रति निश्चित धारणा बनाता है।
  4. संगठन— विभिन्न मूल्यों को व्यवस्थित कर उनमें प्राथमिकता एवं सामंजस्य स्थापित किया जाता है।
  5. मूल्य द्वारा विशिष्टीकरण— स्वीकृत मूल्य व्यक्ति के चरित्र एवं व्यवहार का स्थायी अंग बन जाते हैं।

प्रश्न 32. प्रतिमान-सन्दर्भित तथा कसौटी-सन्दर्भित परीक्षण में क्या अन्तर है?

उत्तर:

प्रतिमान-सन्दर्भित परीक्षण कसौटी-सन्दर्भित परीक्षण
विद्यार्थी की उपलब्धि की तुलना अन्य विद्यार्थियों या मानक समूह से की जाती है। विद्यार्थी की उपलब्धि की तुलना पूर्व निर्धारित कसौटी या अधिगम-उद्देश्य से की जाती है।
मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों की सापेक्ष स्थिति या क्रम ज्ञात करना है। मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि निर्धारित दक्षता प्राप्त हुई या नहीं।
परिणाम प्रतिशतक, मानक अंक या रैंक के रूप में व्यक्त किए जा सकते हैं। परिणाम प्राप्त/अप्राप्त दक्षता अथवा निर्धारित स्तर की प्राप्ति के रूप में व्यक्त किए जाते हैं।
चयन, वर्गीकरण एवं तुलना में उपयोगी है। निदान, शिक्षण-सुधार एवं दक्षता-निर्धारण में उपयोगी है।

प्रश्न 33. क्रियात्मक शोध की उपयोगिता बताइए।

उत्तर: क्रियात्मक शोध शिक्षक एवं विद्यालय को अपने कार्यक्षेत्र की वास्तविक समस्याओं का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान खोजने में सहायता देता है। इसकी प्रमुख उपयोगिताएँ हैं—

  • कक्षा एवं विद्यालय की स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान मिलता है।
  • शिक्षण-विधि एवं कार्यप्रणाली में सुधार किया जा सकता है।
  • विद्यार्थियों की अधिगम एवं व्यवहारगत कठिनाइयों को दूर करने में सहायता मिलती है।
  • शिक्षक में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं आत्ममूल्यांकन की प्रवृत्ति विकसित होती है।
  • विद्यालयी वातावरण एवं शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होता है।

प्रश्न 34. मूल्यांकन की विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: मूल्यांकन की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  • यह उद्देश्य-आधारित प्रक्रिया है।
  • यह सतत एवं व्यवस्थित प्रक्रिया है।
  • इसका क्षेत्र व्यापक है और यह विद्यार्थी के विभिन्न पक्षों का आकलन करता है।
  • इसमें मात्रात्मक एवं गुणात्मक दोनों प्रकार की सूचनाओं का प्रयोग होता है।
  • यह केवल मापन नहीं, बल्कि प्राप्त परिणामों की व्याख्या एवं मूल्य-निर्णय भी करता है।
  • इसके परिणामों का उपयोग शिक्षण-अधिगम एवं शैक्षिक व्यवस्था में सुधार के लिए किया जाता है।

प्रश्न 35. वस्तुनिष्ठ प्रश्न के प्रकारों का वर्णन कीजिए।

उत्तर: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को मुख्यतः दो वर्गों में रखा जा सकता है—

1. पूर्ति अथवा प्रत्यास्मरण प्रकार—

  • सरल प्रत्यास्मरण प्रश्न
  • रिक्त स्थान पूर्ति प्रश्न

2. चयन अथवा अभिज्ञान प्रकार—

  • सत्य-असत्य प्रश्न
  • बहुविकल्पीय प्रश्न
  • मिलान प्रश्न
  • वर्गीकरण प्रश्न

इन प्रश्नों के उत्तर निश्चित होने के कारण उनका फलांकन अधिक वस्तुनिष्ठ एवं विश्वसनीय होता है।

प्रश्न 36. रचनात्मक मूल्यांकन क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: रचनात्मक मूल्यांकन शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थी की प्रगति, उपलब्धियों तथा कठिनाइयों का समय रहते पता लगाकर शिक्षण में सुधार करना है।

  • विद्यार्थियों की अधिगम-कठिनाइयों की शीघ्र पहचान होती है।
  • शिक्षक को तत्काल प्रतिपुष्टि प्राप्त होती है।
  • आवश्यकतानुसार पुनः शिक्षण एवं उपचारात्मक सहायता दी जा सकती है।
  • शिक्षण-विधि, सामग्री एवं गतिविधियों में समय पर सुधार किया जा सकता है।
  • विद्यार्थियों की निरन्तर प्रगति को सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 37. परीक्षण एवं मापन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

परीक्षण मापन
परीक्षण किसी गुण, योग्यता या उपलब्धि की जाँच का उपकरण है। मापन किसी गुण की मात्रा को संख्यात्मक रूप में व्यक्त करने की प्रक्रिया है।
इसमें प्रश्नों, कार्यों या परिस्थितियों का व्यवस्थित समूह होता है। इसमें प्राप्त प्रतिक्रियाओं अथवा उपलब्धियों को अंक या संख्या प्रदान की जाती है।
परीक्षण मापन के लिए साधन प्रदान करता है। मापन परीक्षण से प्राप्त परिणामों को परिमाणात्मक रूप देता है।
परीक्षण के बिना भी कुछ गुणों का अन्य साधनों से मापन सम्भव है। मापन का क्षेत्र परीक्षण की अपेक्षा अधिक व्यापक है।

प्रश्न 38. शैक्षिक मापन एवं मूल्यांकन की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: शैक्षिक मापन वह प्रक्रिया है जिसमें विद्यार्थी की उपलब्धि, योग्यता अथवा अन्य शैक्षिक विशेषता को निर्धारित नियमों के अनुसार संख्यात्मक रूप में व्यक्त किया जाता है। यह मुख्यतः किसी गुण की मात्रा बताता है।

शैक्षिक मूल्यांकन मापन तथा अन्य गुणात्मक सूचनाओं के आधार पर यह निर्णय करने की व्यापक प्रक्रिया है कि निर्धारित शैक्षिक उद्देश्य किस सीमा तक प्राप्त हुए हैं।

मूल्यांकन प्रक्रिया के तीन प्रमुख अंग हैं—

  1. शिक्षण-उद्देश्य
  2. अधिगम क्रियाएँ
  3. व्यवहार-परिवर्तन

इस प्रकार मापन मूल्यांकन का एक अंग है, जबकि मूल्यांकन में मापन के साथ व्याख्या एवं मूल्य-निर्णय भी सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 39. पाठ्य-सहगामी क्रियाकलापों में उपयोग किए जाने वाले दो शैक्षिक नवाचारों के उदाहरण दीजिए।

उत्तर: पाठ्य-सहगामी क्रियाकलापों में निम्न नवाचारी प्रयोग किए जा सकते हैं—

  • खेल-पद्धति एवं गतिविधि आधारित अधिगम— खेल एवं गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को सक्रिय रूप से सीखने का अवसर देना।
  • भ्रमण एवं प्रयोग आधारित अधिगम— शैक्षिक भ्रमण, प्रत्यक्ष अनुभव और प्रयोगों द्वारा विषय-वस्तु को जीवन से जोड़ना।

प्रश्न 40. प्रश्न निर्माण प्रक्रिया में ब्लू प्रिन्ट की क्या भूमिका है?

उत्तर: ब्लू प्रिन्ट प्रश्नपत्र निर्माण की योजनाबद्ध रूपरेखा है। इसमें विषय-वस्तु, शैक्षिक उद्देश्यों, प्रश्नों के प्रकार, कठिनाई-स्तर तथा अंकभार का उचित वितरण निर्धारित किया जाता है।

ब्लू प्रिन्ट की प्रमुख भूमिकाएँ—

  • पाठ्यवस्तु का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना।
  • ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग एवं कौशल जैसे उद्देश्यों को उचित भार देना।
  • विभिन्न प्रकार के प्रश्नों एवं अंकों का उचित वितरण करना।
  • प्रश्नपत्र को अधिक वैध, संतुलित एवं उद्देश्यपूर्ण बनाना।
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