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PYQ 2021 • शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार

शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार Previous Year Paper 2021

UP DELED Semester 3 शैक्षिक मूल्यांकन, क्रियात्मक शोध एवं नवाचार Previous Year Question Paper 2021 with solution.

Section 1 बहुविकल्पीय प्रश्न

बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रश्न 1. मूल्यांकन प्रक्रिया का केन्द्र-बिन्दु होता है—

(a) विद्यार्थी

(b) अध्यापक

(c) विद्यालय

(d) प्रधानाचार्य

उत्तर: (a) : मूल्यांकन प्रक्रिया का केन्द्र-बिन्दु विद्यार्थी होता है, क्योंकि उसके अधिगम, उपलब्धि एवं व्यवहार-परिवर्तन का आकलन किया जाता है।

प्रश्न 2. निम्न में से क्या टी. पी. नन का कथन है—

(a) बचाव निदान का निम्नतम स्तर है।

(b) बचाव निदान का उच्चतम स्तर है।

(c) बचाव निदान का मध्यम स्तर है।

(d) बचाव निदान का स्तर नहीं है।

उत्तर: (b) : "बचाव निदान का उच्चतम स्तर है" यह कथन टी. पी. नन का है।

प्रश्न 3. क्रियात्मक शोध का उपयोग होता है—

(a) शिक्षण सुधार हेतु

(b) शिक्षण में परिवर्तन हेतु

(c) विद्यालय एवं शिक्षण की समस्याओं के समाधान हेतु

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : क्रियात्मक शोध का उपयोग शिक्षण-सुधार, आवश्यक परिवर्तन तथा विद्यालय एवं कक्षा की व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए किया जाता है।

प्रश्न 4. सर्वशिक्षा अभियान के क्रियान्वयन में सहायक है—

(a) क्रियात्मक शोध

(b) परम्परागत शोध

(c) वैज्ञानिक शोध

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (a) : सर्वशिक्षा अभियान जैसी शैक्षिक योजनाओं के क्रियान्वयन में उत्पन्न स्थानीय एवं व्यावहारिक समस्याओं के समाधान हेतु क्रियात्मक शोध उपयोगी होता है।

प्रश्न 5. हरी ने अंग्रेजी में 80 अंक प्राप्त किए। यह है—

(a) परीक्षण

(b) मात्रात्मक मापन

(c) गुणात्मक मापन

(d) मूल्यांकन

उत्तर: (b) : 80 अंक के रूप में उपलब्धि को संख्या में व्यक्त करना मात्रात्मक मापन है। मूल्यांकन तब होगा जब इन अंकों के आधार पर उपलब्धि के सम्बन्ध में निर्णय किया जाए।

प्रश्न 6. व्यवस्थापन किस पक्ष का स्तर है—

(a) ज्ञानात्मक पक्ष

(b) भावात्मक पक्ष

(c) मनोगत्यात्मक पक्ष

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (b) : व्यवस्थापन भावात्मक पक्ष का एक स्तर है, जिसमें व्यक्ति विभिन्न मूल्यों को व्यवस्थित कर उनमें सामंजस्य एवं प्राथमिकता स्थापित करता है।

प्रश्न 7. मूल्यांकन के महत्वपूर्ण बिन्दु हैं—

(a) शैक्षिक उद्देश्य

(b) व्यवहार-परिवर्तन

(c) अधिगम अनुभव

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : मूल्यांकन प्रक्रिया में शैक्षिक उद्देश्य, अधिगम अनुभव तथा व्यवहार-परिवर्तन तीनों महत्वपूर्ण हैं।

प्रश्न 8. लिंग के आधार पर व्यक्ति का महिला एवं पुरुष में विभाजन कहलाता है—

(a) गुणात्मक मापन

(b) मात्रात्मक मापन

(c) मूल्यांकन

(d) परीक्षण

उत्तर: (a) : महिला एवं पुरुष में विभाजन किसी मात्रा के बजाय गुण या श्रेणी के आधार पर किया जाता है, इसलिए यह गुणात्मक मापन का उदाहरण है।

प्रश्न 9. "किन्हीं निश्चित स्वीकृत नियमों के अनुसार वस्तुओं को अंक प्रदान करना मापन है।" यह कथन किसका है—

(a) कैम्पबेल का

(b) थॉर्नडाइक का

(c) एस. एस. स्टीवेन्स का

(d) रॉस का

उत्तर: (c) : मापन की यह प्रसिद्ध परिभाषा एस. एस. स्टीवेन्स (S. S. Stevens) ने दी है।

प्रश्न 10. कौन-से क्षेत्र के उद्देश्यों द्वारा बालक के शारीरिक गतिविधियों सम्बन्धी कौशलों का विकास होता है—

(a) ज्ञानात्मक क्षेत्र

(b) भावात्मक क्षेत्र

(c) मनोगत्यात्मक क्षेत्र

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (c) : शारीरिक, क्रियात्मक एवं व्यावहारिक कौशलों का विकास मनोगत्यात्मक अथवा मनोचालक क्षेत्र से सम्बन्धित है।

प्रश्न 11. स्टीफन एम. कोरे ने शैक्षिक क्षेत्र में किस प्रकार के अनुसंधान का प्रयोग किया?

(a) मौलिक शोध

(b) ऐतिहासिक शोध

(c) क्रियात्मक शोध

(d) वैज्ञानिक शोध

उत्तर: (c) : शिक्षा के क्षेत्र में क्रियात्मक शोध के प्रयोग एवं विकास में स्टीफन एम. कोरे (Stephen M. Corey) का प्रमुख योगदान रहा है।

प्रश्न 12. ब्लूम टैक्सोनॉमी किस सन् में विकसित हुई—

(a) 1975

(b) 1957

(c) 1956

(d) 1965

उत्तर: (c) : ब्लूम की शैक्षिक उद्देश्यों की ज्ञानात्मक वर्गीकरण-पद्धति 1956 में प्रकाशित हुई।

प्रश्न 13. जो परीक्षण एक ही व्यक्ति पर बार-बार प्रयोग करने पर लगभग एक जैसा परिणाम देता है, वह कहलाता है—

(a) वस्तुनिष्ठ परीक्षण

(b) व्यावहारिक परीक्षण

(c) वैध परीक्षण

(d) विश्वसनीय परीक्षण

उत्तर: (d) : समान परिस्थितियों में पुनः प्रयोग करने पर परिणामों में स्थिरता एवं संगति देने वाला परीक्षण विश्वसनीय परीक्षण कहलाता है।

प्रश्न 14. शोध में सम्पूर्ण जनसंख्या का छोटा प्रतिनिधि भाग कहलाता है—

(a) सार्थक

(b) न्यादर्श

(c) सार्थकिकी

(d) प्रतिजन

उत्तर: (b) : सम्पूर्ण जनसंख्या में से अध्ययन हेतु चुने गए प्रतिनिधि छोटे भाग को न्यादर्श अथवा प्रतिदर्श (Sample) कहते हैं।

प्रश्न 15. स्थान के आधार पर छात्रों को ग्रामीण एवं शहरी में विभक्त करना किसके अन्तर्गत आता है—

(a) क्रमित स्तर

(b) अन्तराल स्तर

(c) नामित स्तर

(d) अनुपात स्तर

उत्तर: (c) : ग्रामीण एवं शहरी जैसी श्रेणियों में वर्गीकरण नामित अथवा नामिक स्तर का मापन है।

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Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. उपचारात्मक शिक्षण से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: निदान द्वारा ज्ञात विद्यार्थी की अधिगम-कठिनाइयों एवं त्रुटियों को दूर करने के लिए दिया गया विशेष शिक्षण उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।

प्रश्न 17. परिकल्पना का क्या अर्थ है?

उत्तर: किसी समस्या के सम्भावित समाधान के सम्बन्ध में प्रस्तुत परीक्षणयोग्य अनुमान को परिकल्पना कहते हैं।

प्रश्न 18. साक्षात्कार कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: साक्षात्कार मुख्यतः दो प्रकार—संरचित साक्षात्कार तथा असंरचित साक्षात्कार होते हैं।

प्रश्न 19. शैक्षिक नवाचार का अर्थ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: शिक्षण-अधिगम को अधिक प्रभावी बनाने हेतु किए गए नवीन, उपयोगी एवं उद्देश्यपूर्ण परिवर्तन शैक्षिक नवाचार कहलाते हैं।

प्रश्न 20. छात्र-प्रोफाइल का क्या महत्व है?

उत्तर: छात्र-प्रोफाइल से विद्यार्थी की उपलब्धियों, रुचियों, क्षमताओं, व्यवहार एवं कठिनाइयों की समग्र जानकारी मिलती है।

प्रश्न 21. निदानात्मक परीक्षण का उपयोग क्या है?

उत्तर: निदानात्मक परीक्षण का उपयोग विद्यार्थी की विशिष्ट अधिगम-कठिनाइयों एवं उनके कारणों की पहचान करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 22. प्रश्न-पत्र बनाने के चरणों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: प्रश्न-पत्र निर्माण के प्रमुख चरण हैं—योजना निर्माण, ब्लू-प्रिन्ट तैयार करना, प्रश्नों का सम्पादन तथा अंक निर्धारण

प्रश्न 23. ब्लू-प्रिन्ट क्या है?

उत्तर: प्रश्न-पत्र में उद्देश्य, विषय-वस्तु, प्रश्न-प्रकार एवं अंकभार का नियोजित वितरण दर्शाने वाली रूपरेखा ब्लू-प्रिन्ट कहलाती है।

प्रश्न 24. ब्लूम ने शैक्षिक उद्देश्यों को कितने भागों में विभाजित किया है?

उत्तर: शैक्षिक उद्देश्यों को तीन क्षेत्रों—ज्ञानात्मक, भावात्मक तथा मनोगत्यात्मक में विभाजित किया गया है।

प्रश्न 25. प्रश्न कितने प्रकार के होते हैं?

उत्तर: प्रश्न मुख्यतः चार प्रकार—वस्तुनिष्ठ, अति लघु उत्तरीय, लघु उत्तरीय तथा दीर्घ उत्तरीय होते हैं।

प्रश्न 26. पुनर्बलन का क्या अर्थ है?

उत्तर: किसी व्यवहार के पुनः होने की सम्भावना बढ़ाने वाली प्रक्रिया को पुनर्बलन कहते हैं। यह सकारात्मक अथवा नकारात्मक हो सकता है।

प्रश्न 27. क्रियात्मक शोध की क्या उपयोगिता है?

उत्तर: क्रियात्मक शोध द्वारा स्थानीय एवं तात्कालिक व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कर शिक्षण एवं कार्यप्रणाली में सुधार किया जाता है।

प्रश्न 28. एक अच्छे उपकरण की क्या विशेषताएँ होती हैं?

उत्तर: अच्छे मूल्यांकन-उपकरण में वैधता, विश्वसनीयता, वस्तुनिष्ठता, व्यावहारिकता एवं उपयोगिता होनी चाहिए।

प्रश्न 29. परीक्षण की वैधता से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: वैधता का अर्थ है कि परीक्षण उसी गुण या योग्यता का मापन करे, जिसके लिए उसका निर्माण किया गया है

प्रश्न 30. अनुसंधान का क्या अर्थ है?

उत्तर: किसी समस्या अथवा तथ्य का वैज्ञानिक, व्यवस्थित एवं वस्तुनिष्ठ ढंग से अध्ययन करके नवीन ज्ञान प्राप्त करना अनुसंधान कहलाता है।

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Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. मापन एवं मूल्यांकन में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

मापन मूल्यांकन
किसी गुण या उपलब्धि को संख्या अथवा अंक में व्यक्त करता है। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर गुण, उपलब्धि या उद्देश्य-प्राप्ति के सम्बन्ध में निर्णय करता है।
यह मुख्यतः मात्रात्मक होता है। यह मात्रात्मक एवं गुणात्मक दोनों प्रकार की सूचनाओं का प्रयोग करता है।
इसका क्षेत्र अपेक्षाकृत संकुचित होता है। इसका क्षेत्र व्यापक होता है।
यह बताता है कि किसी गुण की मात्रा कितनी है। यह बताता है कि प्राप्त उपलब्धि कितनी उचित, उपयोगी या संतोषजनक है।
मापन मूल्यांकन का एक अंग है। मूल्यांकन में मापन, व्याख्या एवं मूल्य-निर्णय सम्मिलित होते हैं।

प्रश्न 32. किसी विद्यालयी विषय पर विभिन्न प्रकार के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का निर्माण कीजिए।

उत्तर: वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर निश्चित होते हैं तथा उनका फलांकन वस्तुनिष्ठ रूप से किया जा सकता है। उदाहरण—

  • बहुविकल्पीय प्रश्न— पौधे भोजन किस प्रक्रिया द्वारा बनाते हैं? (a) श्वसन (b) प्रकाश-संश्लेषण (c) पाचन (d) उत्सर्जन।
  • सत्य-असत्य— पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है। — सत्य
  • रिक्त स्थान— जल का क्वथनांक _____°C है। — 100
  • मिलान— सूर्य—तारा, पृथ्वी—ग्रह।

प्रश्न 33. रचनात्मक एवं योगात्मक मूल्यांकन की तुलना कीजिए।

उत्तर:

रचनात्मक मूल्यांकन योगात्मक मूल्यांकन
शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के दौरान किया जाता है। इकाई, पाठ्यक्रम अथवा सत्र की समाप्ति पर किया जाता है।
उद्देश्य विद्यार्थी की कठिनाइयों की पहचान एवं सुधार करना है। उद्देश्य अन्तिम उपलब्धि का निर्णय करना है।
नियमित प्रतिपुष्टि प्रदान करता है। अन्तिम परिणाम एवं उपलब्धि की जानकारी देता है।
शिक्षण-विधि में तत्काल सुधार सम्भव होता है। पदोन्नति, ग्रेड एवं प्रमाणन जैसे निर्णयों में उपयोगी होता है।

प्रश्न 34. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: सतत एवं व्यापक मूल्यांकन का उद्देश्य विद्यार्थी की प्रगति का पूरे सत्र में निरन्तर आकलन करते हुए उसके समग्र विकास की जानकारी प्राप्त करना है।

  • ज्ञानात्मक, भावात्मक एवं क्रियात्मक पक्षों का मूल्यांकन करना।
  • अधिगम-कठिनाइयों की समय पर पहचान करना।
  • विद्यार्थी को नियमित प्रतिपुष्टि प्रदान करना।
  • उपचारात्मक शिक्षण एवं शिक्षण-विधि में सुधार करना।
  • विद्यार्थी के सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहित करना।

प्रश्न 35. ग्रेडिंग प्रणाली से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: जिस मूल्यांकन व्यवस्था में विद्यार्थी की उपलब्धि को केवल कच्चे अंकों के बजाय निर्धारित ग्रेड अथवा श्रेणियों में व्यक्त किया जाता है, उसे ग्रेडिंग प्रणाली कहते हैं।

ग्रेडिंग में समान उपलब्धि-स्तर वाले विद्यार्थियों को एक ही श्रेणी में रखा जाता है। इससे अंकों के अत्यधिक सूक्ष्म अन्तर का प्रभाव कम होता है तथा विद्यार्थी की उपलब्धि को सरल रूप में व्यक्त किया जा सकता है।

प्रश्न 36. बालक के ज्ञानात्मक पक्ष का वर्गीकरण ब्लूम ने किस प्रकार किया है?

उत्तर: ब्लूम के मूल वर्गीकरण में ज्ञानात्मक पक्ष को सरल से जटिल क्रम में निम्न छह स्तरों में विभाजित किया गया है—

  1. ज्ञान— सीखे हुए तथ्यों एवं सूचनाओं का स्मरण।
  2. बोध— प्राप्त ज्ञान को समझना एवं अपने शब्दों में व्यक्त करना।
  3. अनुप्रयोग— सीखे हुए ज्ञान एवं सिद्धान्तों का नई परिस्थिति में प्रयोग करना।
  4. विश्लेषण— विषय-वस्तु को उसके विभिन्न घटकों में विभाजित कर सम्बन्ध समझना।
  5. संश्लेषण— विभिन्न तत्वों को जोड़कर नया रूप या विचार निर्मित करना।
  6. मूल्यांकन— निर्धारित कसौटियों के आधार पर किसी विचार या कार्य का निर्णय करना।

प्रश्न 37. शैक्षिक नवाचार को अपनाने में आने वाली बाधाओं को सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर: शैक्षिक नवाचार को अपनाने में निम्न प्रमुख बाधाएँ आती हैं—

  • आर्थिक एवं भौतिक संसाधनों की कमी।
  • प्रशिक्षित एवं नवाचारोन्मुख शिक्षकों का अभाव।
  • नवीन शिक्षण-सामग्री एवं तकनीकी साधनों की कमी।
  • परिवर्तन के प्रति शिक्षकों या प्रशासन का प्रतिरोध।
  • अत्यधिक कार्यभार एवं समय की कमी।
  • प्रशासनिक सहयोग एवं उचित मार्गदर्शन का अभाव।
  • अभिभावकों एवं समुदाय की सीमित सहभागिता।

प्रश्न 38. क्रियात्मक शोध के सोपानों को बताइए।

उत्तर: क्रियात्मक शोध के प्रमुख सोपान निम्नलिखित हैं—

  1. समस्या की पहचान— कार्यक्षेत्र की वास्तविक समस्या का चयन करना।
  2. समस्या का सीमांकन— समस्या को स्पष्ट एवं निश्चित रूप देना।
  3. समस्या के कारणों का विश्लेषण— सम्भावित कारणों की पहचान करना।
  4. क्रियात्मक परिकल्पना का निर्माण— सम्भावित समाधान का परीक्षणयोग्य अनुमान बनाना।
  5. कार्ययोजना तैयार करना— समय, उपकरण एवं कार्यविधि निर्धारित करना।
  6. योजना का क्रियान्वयन एवं तथ्य-संकलन— योजना लागू कर आवश्यक आँकड़े एकत्र करना।
  7. विश्लेषण एवं निष्कर्ष— प्राप्त आँकड़ों का विश्लेषण कर परिणाम निकालना।
  8. प्रतिवेदन— सम्पूर्ण शोध-कार्य एवं निष्कर्षों को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत करना।

प्रश्न 39. क्रियात्मक शोध एवं परम्परागत शोध में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:

क्रियात्मक शोध परम्परागत शोध
स्थानीय एवं तात्कालिक समस्या के समाधान पर केन्द्रित होता है। व्यापक ज्ञान, सिद्धान्त या सामान्यीकरण विकसित करने पर केन्द्रित होता है।
समस्या से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा कार्यकर्ता स्वयं शोध करता है। सामान्यतः प्रशिक्षित शोधकर्ता द्वारा किया जाता है।
मुख्य उद्देश्य कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार है। मुख्य उद्देश्य नवीन ज्ञान एवं सिद्धान्तों का विकास है।
शोध-रूपरेखा अपेक्षाकृत लचीली होती है। शोध-रूपरेखा अधिक औपचारिक एवं नियंत्रित होती है।
निष्कर्ष मुख्यतः स्थानीय परिस्थिति पर लागू होते हैं। निष्कर्षों के व्यापक सामान्यीकरण पर बल दिया जाता है।

प्रश्न 40. मौखिक परीक्षा के गुण एवं दोष क्या हैं?

उत्तर:

मौखिक परीक्षा के गुण—

  • विद्यार्थी के ज्ञान एवं समझ की तत्काल जाँच सम्भव होती है।
  • मौखिक अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास का मूल्यांकन किया जा सकता है।
  • विद्यार्थी के उत्तर के आधार पर पूरक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
  • तत्काल प्रतिपुष्टि दी जा सकती है।

मौखिक परीक्षा के दोष—

  • परीक्षक के व्यक्तिगत पक्षपात की सम्भावना रहती है।
  • अधिक विद्यार्थियों की परीक्षा लेने में अधिक समय लगता है।
  • सभी विद्यार्थियों से समान प्रश्न पूछना कठिन होता है।
  • उत्तर का स्थायी लिखित अभिलेख सामान्यतः उपलब्ध नहीं रहता।
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