बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. "बालक एक ऐसी पुस्तक है, जिसका शिक्षक को आद्योपान्त अध्ययन करना चाहिए।" यह कथन है—
(a) प्लेटो का
(b) अरस्तु का
(c) रॉस का
(d) रूसो का
उत्तर: (d) : यह कथन रूसो का है। बालकेन्द्रित शिक्षा में बालक की प्रकृति, रुचि, आवश्यकता तथा व्यक्तिगत भिन्नताओं को समझने पर विशेष बल दिया जाता है।
प्रश्न 2. व्यापक मूल्यांकन द्वारा मूल्यांकन किया जाता है—
(a) व्यक्ति के सभी पक्षों का
(b) केवल बुद्धि का
(c) केवल ज्ञान का
(d) केवल रचनाओं का
उत्तर: (a) : व्यापक मूल्यांकन में विद्यार्थी के संज्ञानात्मक, भावात्मक, कौशलात्मक एवं व्यवहारात्मक पक्षों का समग्र मूल्यांकन किया जाता है।
प्रश्न 3. मूल्यांकन का संज्ञानात्मक पक्ष सम्बन्धित है—
(a) ज्ञान से
(b) बोध से
(c) अनुप्रयोग से
(d) उपर्युक्त सभी से
उत्तर: (d) : संज्ञानात्मक पक्ष में ज्ञान, बोध एवं अनुप्रयोग जैसी बौद्धिक क्षमताएँ सम्मिलित होती हैं।
प्रश्न 4. सतत मूल्यांकन कहलाता है—
(a) सत्र के अन्त में किया जाने वाला मूल्यांकन
(b) सत्र के मध्य में किया जाने वाला मूल्यांकन
(c) निरन्तर किया जाने वाला मूल्यांकन
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (c) : शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के साथ नियमित एवं निरन्तर रूप से किया जाने वाला मूल्यांकन सतत मूल्यांकन कहलाता है।
प्रश्न 5. "मूल्यांकन वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शिक्षक एवं छात्र यह निर्णय करते हैं कि शिक्षण-लक्ष्यों को प्राप्त किया जा रहा है या नहीं।" यह कथन किसका है—
(a) क्रॉनबैक का
(b) ली का
(c) क्रो का
(d) क्विलिन तथा हन्ना का
उत्तर: (a) : यह परिभाषा क्रॉनबैक की है।
प्रश्न 6. विज्ञान, भूगोल तथा कृषि विषय होते हैं—
(a) केवल सैद्धान्तिक मूल्यांकन वाले
(b) सैद्धान्तिक तथा प्रायोगिक मूल्यांकन वाले
(c) केवल मौखिक मूल्यांकन वाले
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (b) : विज्ञान, भूगोल तथा कृषि जैसे विषयों में सैद्धान्तिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल का भी मूल्यांकन किया जाता है।
प्रश्न 7. उत्तम परीक्षण की विशेषता है—
(a) वैधता
(b) विश्वसनीयता
(c) वस्तुनिष्ठता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : वैधता, विश्वसनीयता एवं वस्तुनिष्ठता उत्तम परीक्षण की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
प्रश्न 8. रचनात्मक मूल्यांकन में किया जाता है—
(a) बच्चों के प्रारम्भिक ज्ञान का मूल्यांकन
(b) बच्चों के अन्तिम ज्ञान का मूल्यांकन
(c) बच्चों के मध्यस्थ ज्ञान का मूल्यांकन
(d) बच्चों के समग्र ज्ञान का मूल्यांकन
उत्तर: (a) : रचनात्मक मूल्यांकन में विद्यार्थी के प्रारम्भिक ज्ञान एवं अधिगम की प्रगति की जानकारी लेकर शिक्षण में आवश्यक सुधार किया जाता है।
प्रश्न 9. भावात्मक पक्ष कहलाता है—
(a) बच्चों की रुचियों से सम्बन्धित मूल्यांकन का पक्ष
(b) बच्चों के संवेगों से सम्बन्धित मूल्यांकन का पक्ष
(c) बच्चों की मनोवृत्तियों से सम्बन्धित मूल्यांकन का पक्ष
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : रुचि, मनोवृत्ति, मूल्य एवं संवेगों का सम्बन्ध भावात्मक पक्ष से होता है।
प्रश्न 10. "ब्लू प्रिन्ट" का सम्बन्ध है—
(a) उपचारात्मक शिक्षण से
(b) नवाचार से
(c) प्रश्नपत्र निर्माण से
(d) क्रियात्मक शोध से
उत्तर: (c) : ब्लू प्रिन्ट प्रश्नपत्र निर्माण की रूपरेखा है, जिसमें उद्देश्यों, विषय-वस्तु, प्रश्न-प्रकारों और अंकों का संतुलित वितरण निर्धारित किया जाता है।
प्रश्न 11. उपचारात्मक शिक्षण सम्बन्धित है—
(a) बच्चों को गणित विषय पढ़ाने से
(b) बच्चों में पठन क्षमता विकसित करने से
(c) बच्चों की अधिगम-त्रुटियों को दूर करने से
(d) बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाने से
उत्तर: (c) : निदान द्वारा ज्ञात अधिगम-कठिनाइयों एवं त्रुटियों को दूर करने के लिए किया जाने वाला शिक्षण उपचारात्मक शिक्षण कहलाता है।
प्रश्न 12. टी. पी. नन का कथन है—
(a) "बचाव निदान का निम्नतम स्तर है।"
(b) "बचाव निदान का उच्चतम स्तर है।"
(c) "बचाव निदान का मध्यम स्तर है।"
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (b) : "बचाव निदान का उच्चतम स्तर है" यह कथन टी. पी. नन का है।
प्रश्न 13. स्टीफन एम. कोरे ने शैक्षिक क्षेत्र में किस प्रकार के अनुसंधान का प्रयोग किया था—
(a) क्रियात्मक शोध
(b) मौलिक शोध
(c) ऐतिहासिक शोध
(d) वैज्ञानिक शोध
उत्तर: (a) : शिक्षा के क्षेत्र में क्रियात्मक शोध के प्रयोग एवं विकास में स्टीफन एम. कोरे (Stephen M. Corey) का प्रमुख योगदान रहा है।
प्रश्न 14. क्रियात्मक शोध करने का अधिकार है—
(a) केवल शिक्षकों को
(b) शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों को
(c) शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों व छात्रों को
(d) शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, छात्रों तथा ए.बी.एस.ए. सभी को
उत्तर: (d) : क्रियात्मक शोध कार्यक्षेत्र की समस्या से सम्बन्धित व्यक्तियों द्वारा किया जा सकता है। विद्यालयी समस्याओं में शिक्षक, प्रधानाध्यापक, विद्यार्थी एवं शैक्षिक अधिकारी इसमें सहभागी हो सकते हैं।
प्रश्न 15. क्रियात्मक शोध में शोधकर्ता होता है—
(a) उत्पादक
(b) उपभोक्ता
(c) उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों
(d) न तो उत्पादक और न ही उपभोक्ता
उत्तर: (c) : क्रियात्मक शोध में अभ्यासकर्ता स्वयं शोध करता है और उसके निष्कर्षों का स्वयं उपयोग भी करता है। अतः वह उत्पादक एवं उपभोक्ता दोनों होता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. नवाचार से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: किसी प्रचलित व्यवस्था, प्रक्रिया या विधि में किया गया नवीन, उपयोगी एवं उद्देश्यपूर्ण परिवर्तन नवाचार कहलाता है।
प्रश्न 17. क्रियात्मक शोध के दो प्रमुख उपकरण बताइए।
उत्तर: क्रियात्मक शोध के दो प्रमुख उपकरण हैं—अवलोकन तथा प्रश्नावली।
प्रश्न 18. क्रियात्मक शोध को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अपने कार्यक्षेत्र की तात्कालिक व्यावहारिक समस्या के समाधान एवं कार्य में सुधार हेतु किया गया अनुसंधान क्रियात्मक शोध कहलाता है।
प्रश्न 19. अच्छे प्रश्नों की विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: अच्छे प्रश्न स्पष्ट, सरल, उद्देश्यपूर्ण, स्तरानुकूल तथा विचारोत्तेजक होते हैं।
प्रश्न 20. कक्षा में बच्चों से प्रश्न क्यों किए जाते हैं?
उत्तर: विद्यार्थियों के पूर्वज्ञान एवं समझ की जाँच, रुचि जागृत करने तथा सक्रिय सहभागिता बढ़ाने के लिए प्रश्न पूछे जाते हैं।
प्रश्न 21. परिकल्पना से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर: किसी समस्या के सम्भावित समाधान के सम्बन्ध में प्रस्तुत परीक्षणयोग्य अनुमान को परिकल्पना कहते हैं।
प्रश्न 22. मूल्यांकन के प्रमुख प्रकार बताइए।
उत्तर: मूल्यांकन के दो प्रमुख प्रकार हैं—रचनात्मक मूल्यांकन तथा योगात्मक (आकलित) मूल्यांकन।
प्रश्न 23. व्यापक मूल्यांकन की आवश्यकता बताइए।
उत्तर: विद्यार्थी के संज्ञानात्मक, भावात्मक, कौशलात्मक एवं व्यवहारात्मक विकास का समग्र आकलन करने के लिए व्यापक मूल्यांकन आवश्यक है।
प्रश्न 24. मूल्यांकन के प्रमुख पक्षों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: मूल्यांकन के प्रमुख पक्ष हैं—संज्ञानात्मक, भावात्मक तथा कौशलात्मक एवं व्यवहारात्मक पक्ष।
प्रश्न 25. प्रश्नों के पाँच प्रमुख प्रकार बताइए।
उत्तर: कक्षा-शिक्षण में प्रमुख प्रश्न हैं—प्रस्तावनात्मक, विकासात्मक, बोधात्मक, पुनरावृत्तिमूलक तथा मूल्यांकनात्मक प्रश्न।
प्रश्न 26. परीक्षण में वैधता से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: वैधता का अर्थ है कि परीक्षण उसी गुण या योग्यता का मापन करे, जिसके लिए उसका निर्माण किया गया है।
प्रश्न 27. क्रियात्मक शोध की क्या आवश्यकता है?
उत्तर: कार्यक्षेत्र की वास्तविक समस्याओं का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान खोजकर कार्यप्रणाली में सुधार करने के लिए क्रियात्मक शोध आवश्यक है।
प्रश्न 28. मूल्यांकन से आपका क्या अभिप्राय है?
उत्तर: निर्धारित शैक्षिक उद्देश्यों की प्राप्ति के सम्बन्ध में गुणात्मक एवं मात्रात्मक सूचनाओं के आधार पर मूल्य-निर्णय करने की प्रक्रिया मूल्यांकन कहलाती है।
प्रश्न 29. शैक्षिक मापन किसे कहते हैं?
उत्तर: विद्यार्थी की किसी शैक्षिक विशेषता या उपलब्धि को निर्धारित नियमों के अनुसार संख्यात्मक रूप में व्यक्त करने की प्रक्रिया शैक्षिक मापन कहलाती है।
प्रश्न 30. परीक्षण का अर्थ बताइए।
उत्तर: किसी व्यक्ति के ज्ञान, योग्यता, उपलब्धि अथवा अन्य विशेषता के मापन हेतु प्रयुक्त प्रश्नों या कार्यों के व्यवस्थित समूह को परीक्षण कहते हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. मूल्यांकन, मापन एवं निर्णय के आपस में सम्बन्ध को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: मापन, मूल्य-निर्णय और मूल्यांकन परस्पर सम्बन्धित प्रक्रियाएँ हैं। मापन द्वारा किसी गुण या उपलब्धि को संख्यात्मक रूप में व्यक्त किया जाता है। इन प्राप्त आँकड़ों की किसी निर्धारित मानदण्ड से तुलना करके मूल्य-निर्णय किया जाता है।
मापन से प्राप्त मात्रात्मक सूचना तथा अन्य गुणात्मक सूचनाओं की व्याख्या करके जब उद्देश्यों की प्राप्ति के सम्बन्ध में निर्णय लिया जाता है, तब मूल्यांकन की प्रक्रिया पूर्ण होती है। अतः मापन मूल्यांकन का एक अंग है, जबकि मूल्यांकन उससे अधिक व्यापक प्रक्रिया है।
प्रश्न 32. मूल्यांकन के विभिन्न पक्ष कौन-कौन से हैं? एक शिक्षक को मूल्यांकन के विभिन्न पक्षों का ज्ञान होने से क्या लाभ है?
उत्तर: मूल्यांकन के प्रमुख पक्ष निम्नलिखित हैं—
- संज्ञानात्मक पक्ष— ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग एवं अन्य बौद्धिक क्षमताओं से सम्बन्धित है।
- भावात्मक पक्ष— रुचि, अभिवृत्ति, मूल्य, भावना एवं संवेगों से सम्बन्धित है।
- कौशलात्मक एवं व्यवहारात्मक पक्ष— क्रियात्मक दक्षता, व्यावहारिक कौशल एवं कार्य-निष्पादन से सम्बन्धित है।
इन पक्षों का ज्ञान होने से शिक्षक विद्यार्थी का समग्र मूल्यांकन कर सकता है, उसकी उपलब्धियों एवं कठिनाइयों की सही पहचान कर सकता है और आवश्यकता के अनुसार शिक्षण-विधि में सुधार कर सकता है।
प्रश्न 33. निबन्धात्मक तथा वस्तुनिष्ठ परीक्षण के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| निबन्धात्मक परीक्षण | वस्तुनिष्ठ परीक्षण |
|---|---|
| उत्तर विस्तारपूर्वक एवं अपने शब्दों में दिया जाता है। | उत्तर निश्चित, संक्षिप्त अथवा दिए गए विकल्पों में से होता है। |
| अभिव्यक्ति, संगठन एवं विचार प्रस्तुत करने की क्षमता का परीक्षण करता है। | ज्ञान एवं उपलब्धि के विस्तृत क्षेत्र का परीक्षण किया जा सकता है। |
| फलांकन में परीक्षक की व्यक्तिगत धारणा का प्रभाव पड़ सकता है। | फलांकन अपेक्षाकृत वस्तुनिष्ठ एवं विश्वसनीय होता है। |
| कम प्रश्नों के कारण पाठ्यक्रम का सीमित भाग सम्मिलित होता है। | अधिक प्रश्नों द्वारा पाठ्यक्रम का व्यापक भाग सम्मिलित किया जा सकता है। |
| उत्तर देने एवं जाँचने में अधिक समय लगता है। | उत्तर देने एवं जाँचने में अपेक्षाकृत कम समय लगता है। |
प्रश्न 34. अच्छे प्रश्नों की विशेषताएँ क्या हैं? प्रश्न पूछते समय क्या-क्या सावधानियाँ रखनी चाहिए?
उत्तर: अच्छे प्रश्न स्पष्ट, सरल, उद्देश्यपूर्ण, विद्यार्थियों के स्तर के अनुरूप तथा विचारोत्तेजक होते हैं। उनका सम्बन्ध निर्धारित विषय-वस्तु और शिक्षण-उद्देश्यों से होना चाहिए।
प्रश्न पूछते समय निम्न सावधानियाँ रखनी चाहिए—
- प्रश्न पूरी कक्षा के सामने स्पष्ट भाषा में पूछा जाए।
- एक समय में केवल एक ही विचार पूछा जाए।
- प्रश्न विद्यार्थियों की आयु एवं मानसिक स्तर के अनुरूप हो।
- विद्यार्थियों को उत्तर सोचने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए।
- प्रश्न केवल कुछ विद्यार्थियों तक सीमित न रखकर पूरी कक्षा में वितरित किए जाएँ।
- अनावश्यक संकेत देने वाले एवं अस्पष्ट प्रश्नों से बचा जाए।
प्रश्न 35. क्रियात्मक शोध के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: क्रियात्मक शोध विद्यालय एवं कक्षा की वास्तविक समस्याओं का वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक समाधान खोजने की प्रक्रिया है। इसका महत्व निम्नलिखित है—
- विद्यालय की कार्यप्रणाली में सुधार करता है।
- शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाता है।
- विद्यार्थियों की अधिगम एवं व्यवहारगत समस्याओं के समाधान में सहायक होता है।
- शिक्षक को अपनी शिक्षण-विधियों का आत्ममूल्यांकन एवं सुधार करने का अवसर देता है।
- शिक्षकों एवं प्रधानाध्यापकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करता है।
- स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप त्वरित समाधान प्रदान करता है।
प्रश्न 36. क्रियात्मक शोध के विभिन्न चरण लिखिए।
उत्तर: क्रियात्मक शोध के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं—
- समस्या की पहचान— कार्यक्षेत्र की वास्तविक एवं समाधानयोग्य समस्या का चयन करना।
- समस्या के कारणों का विश्लेषण— समस्या के सम्भावित कारणों की पहचान करना।
- क्रियात्मक परिकल्पना का निर्माण— समस्या के सम्भावित समाधान के सम्बन्ध में परीक्षणयोग्य अनुमान बनाना।
- कार्ययोजना का निर्माण— प्रतिदर्श, समय, उपकरण एवं तथ्य-संग्रह की विधि निर्धारित करना।
- योजना का क्रियान्वयन एवं तथ्य-संकलन— निर्धारित योजना को लागू कर आवश्यक आँकड़े एकत्र करना।
- विश्लेषण एवं निष्कर्ष— प्राप्त तथ्यों का विश्लेषण कर निष्कर्ष निकालना और आवश्यक सुधार करना।
प्रश्न 37. क्रियात्मक शोध में प्रयुक्त होने वाले उपकरणों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर: क्रियात्मक शोध में समस्या की प्रकृति के अनुसार विभिन्न उपकरणों का प्रयोग किया जाता है—
- अवलोकन— विद्यार्थी के व्यवहार अथवा परिस्थिति का प्रत्यक्ष एवं योजनाबद्ध अध्ययन किया जाता है।
- साक्षात्कार— व्यक्ति से प्रत्यक्ष बातचीत करके आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाती है।
- प्रश्नावली— लिखित प्रश्नों के माध्यम से अनेक व्यक्तियों से व्यवस्थित सूचना प्राप्त की जाती है।
- परीक्षण— विद्यार्थी के ज्ञान, उपलब्धि, योग्यता या कौशल का मापन किया जाता है।
- अभिलेख एवं चेकलिस्ट— विद्यार्थी की प्रगति, व्यवहार एवं विशिष्ट घटनाओं का व्यवस्थित विवरण प्राप्त किया जाता है।
उचित उपकरणों के प्रयोग से शोधकर्ता विश्वसनीय तथ्य एकत्र कर समस्या के कारणों एवं समाधान तक पहुँच सकता है।
प्रश्न 38. नवाचारों की शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यकता एवं महत्व बताइए।
उत्तर: शिक्षा की आवश्यकताएँ, समाज, तकनीक तथा विद्यार्थियों की प्रकृति निरन्तर बदलती रहती हैं। अतः शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में नवीन एवं उपयोगी परिवर्तन आवश्यक हैं।
शैक्षिक नवाचार का महत्व—
- शिक्षण को सरल, प्रभावी एवं रुचिकर बनाता है।
- विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता एवं सृजनात्मकता बढ़ाता है।
- स्थानीय आवश्यकताओं एवं संसाधनों के अनुरूप शिक्षण सम्भव बनाता है।
- नई तकनीकों एवं शिक्षण-विधियों के उपयोग को प्रोत्साहित करता है।
- मूल्यांकन एवं विद्यालयी कार्यप्रणाली में सुधार लाता है।
- विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायता करता है।
प्रश्न 39. नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: शैक्षिक व्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार किए जा सकते हैं। प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं—
- शिक्षण-अधिगम— नई शिक्षण-विधियों, गतिविधियों एवं स्थानीय संसाधनों का प्रयोग।
- मूल्यांकन— विद्यार्थी की प्रगति जानने के लिए नवीन एवं विविध मूल्यांकन प्रविधियों का प्रयोग।
- पाठ्य-सहगामी गतिविधियाँ— खेल, कला, सांस्कृतिक एवं सृजनात्मक गतिविधियों में नवीन प्रयोग।
- सामुदायिक सहभागिता— अभिभावकों एवं स्थानीय समुदाय को विद्यालयी गतिविधियों से जोड़ना।
- विद्यालय प्रबन्धन— विद्यालय की व्यवस्था, अनुशासन, संसाधन-प्रबन्धन एवं प्रशासन में सुधार।
- विषयगत कक्षा-शिक्षण— भाषा, गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन आदि विषयों में नवीन शिक्षण-पद्धतियों का प्रयोग।
- पुस्तकालय एवं अन्य संसाधन— पुस्तकालय तथा स्थानीय परिवेश के संसाधनों का अभिनव उपयोग।
- प्रार्थना-सभा एवं विद्यालयी गतिविधियाँ— प्रार्थना-स्थल को मूल्य-शिक्षा, समाचार, सामान्य ज्ञान एवं अभिव्यक्ति से जोड़ना।
प्रश्न 40. अवलोकन से आप क्या समझते हैं? इसके उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: किसी व्यक्ति, घटना, व्यवहार या परिस्थिति का किसी निश्चित उद्देश्य से योजनाबद्ध एवं प्रत्यक्ष निरीक्षण करना अवलोकन कहलाता है। यह क्रियात्मक शोध में तथ्य-संग्रह की महत्वपूर्ण प्रविधि है।
अवलोकन के प्रमुख उद्देश्य—
- व्यक्ति के वास्तविक व्यवहार का प्रत्यक्ष अध्ययन करना।
- विद्यार्थियों की समस्याओं एवं कठिनाइयों की पहचान करना।
- कक्षा एवं विद्यालय की परिस्थितियों का अध्ययन करना।
- व्यवहार में होने वाले परिवर्तनों एवं प्रगति को जानना।
- शोध हेतु विश्वसनीय एवं वास्तविक तथ्य एकत्र करना।
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