वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. निर्देशन का प्रकार नहीं है-
(a) शैक्षिक निर्देशन
(b) लिखित निर्देशन
(c) व्यक्तिगत निर्देशन
(d) व्यावसायिक निर्देशन
उत्तर: (b) : लिखित निर्देशन निर्देशन का मान्य प्रकार नहीं है। शैक्षिक निर्देशन, व्यक्तिगत निर्देशन तथा व्यावसायिक निर्देशन इसके प्रमुख प्रकार हैं।
प्रश्न 2. ब्रेल लिपि सम्बन्धित है-
(a) श्रवण दोष
(b) मानसिक दोष
(c) अपंगहीनता
(d) दृष्टि दोष
उत्तर: (d) : ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के पढ़ने और लिखने के लिए प्रयुक्त स्पर्श-आधारित लिपि है। इसका विकास फ्रांसीसी लुई ब्रेल ने किया था।
प्रश्न 3. भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम कब पारित हुआ-
(a) 1991
(b) 1992
(c) 1993
(d) 1995
उत्तर: (b) : भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992 संसद द्वारा पारित किया गया। भारतीय पुनर्वास परिषद् (RCI) की स्थापना 1986 में एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में हुई थी और 22 जून 1993 से इसे सांविधिक निकाय का दर्जा प्राप्त हुआ।
प्रश्न 4. अच्छी निर्देशन सेवा होती है-
(a) बाल केन्द्रित
(b) शिक्षक केन्द्रित
(c) समाज केन्द्रित
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (a) : अच्छी निर्देशन सेवा बाल केन्द्रित होती है। इसमें बालक की रुचि, योग्यता, आवश्यकता, क्षमता और समस्या को केन्द्र में रखा जाता है।
प्रश्न 5. डिसग्राफिया (Dysgraphia) सम्बन्धित है-
(a) पठन अयोग्यता
(b) लेखन अयोग्यता
(c) गणितीय अयोग्यता
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (b) : डिसग्राफिया (Dysgraphia) लेखन से सम्बन्धित विशिष्ट अधिगम कठिनाई है। इसमें अक्षर-निर्माण, लिखावट, वर्तनी तथा लिखित अभिव्यक्ति में कठिनाई हो सकती है।
प्रश्न 6. दृष्टिबाधितों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा संस्थान स्थित है-
(a) देहरादून
(b) कानपुर
(c) आगरा
(d) हरिद्वार
उत्तर: (a) : दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय संस्थान, वर्तमान में राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD), देहरादून, उत्तराखण्ड में स्थित है।
प्रश्न 7. मनोवैज्ञानिक किर्क के अनुसार सामान्य एवं प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान का आधार है-
(a) खेल द्वारा
(b) पढ़ाई द्वारा
(c) व्यायाम द्वारा
(d) बच्चों द्वारा किये गये कार्य की गति द्वारा
उत्तर: (d) : किर्क (Kirk, 1962) ने धीमी गति से सीखने वाले, सामान्य और प्रतिभाशाली बच्चों के वर्गीकरण में उनकी सीखने की गति (Rate of Learning) को आधार माना।
प्रश्न 8. "निर्देशन युवकों को स्वयं से, अन्य से और परिस्थितियों से सामंजस्य करना एवं सीखने के लिए सहायता देने की प्रक्रिया है।" यह कथन है-
(a) स्किनर का
(b) शिक्षा आयोग का
(c) रायबर्न का
(d) जोन्स का
उत्तर: (a) : यह कथन स्किनर से सम्बन्धित है। इसके अनुसार निर्देशन व्यक्ति को स्वयं, अन्य व्यक्तियों और परिस्थितियों के साथ उचित समायोजन करना सीखने में सहायता देता है।
प्रश्न 9. परामर्श एवं निर्देशन देने वाली संस्था मनोविज्ञानशाला स्थित है-
(a) बरेली
(b) आगरा
(c) कानपुर
(d) इलाहाबाद (प्रयागराज)
उत्तर: (d) : मनोविज्ञानशाला, उत्तर प्रदेश प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में स्थित है। इसकी स्थापना जुलाई 1947 में की गई थी।
प्रश्न 10. "निरीक्षण एक आधार है जिस पर शिक्षा में उन्नति के सभी कार्यक्रम बनाये जाने चाहिए।" यह कथन है-
(a) डॉ. मुखर्जी का
(b) बर्टन का
(c) बार एवं बर्टन का
(d) बार का
उत्तर: (c) : यह कथन बार एवं बर्टन से सम्बन्धित है। निरीक्षण विद्यालय की वास्तविक स्थिति को समझकर सुधारात्मक कार्यक्रमों की योजना बनाने में सहायता करता है।
प्रश्न 11. केन्द्रीय शैक्षिक तथा व्यावसायिक निर्देशन ब्यूरो की स्थापना किस वर्ष की गयी थी-
(a) सन् 1952
(b) सन् 1953
(c) सन् 1954
(d) सन् 1955
उत्तर: (c) : केन्द्रीय शैक्षिक एवं व्यावसायिक निर्देशन ब्यूरो (Central Bureau of Educational and Vocational Guidance) की स्थापना भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा सन् 1954 में की गई थी।
प्रश्न 12. वर्तमान में निःशक्त बच्चों की शिक्षा कहलाती है-
(a) विशेष शिक्षा
(b) समेकित शिक्षा
(c) समावेशी शिक्षा
(d) उपर्युक्त से कोई नहीं
उत्तर: (c) : वर्तमान अधिकार-आधारित शिक्षा व्यवस्था में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सहायता एवं अनुकूलन के साथ सामान्य विद्यालयों में शिक्षा देने की अवधारणा को समावेशी शिक्षा कहा जाता है।
प्रश्न 13. भाटिया बैटरी में कुल कितने उप-परीक्षण हैं-
(a) 2
(b) 3
(c) 7
(d) 5
उत्तर: (d) : भाटिया बैटरी ऑफ परफॉर्मेंस टेस्ट्स ऑफ इंटेलिजेंस में कुल पाँच उप-परीक्षण होते हैं।
प्रश्न 14. प्रारम्भिक अवस्था में मन्दबुद्धि बालकों की पहचान हो सकती है-
(a) अवलोकन से
(b) परीक्षण से
(c) साक्षात्कार से
(d) प्रक्षेपी प्रविधि से
उत्तर: (a) : प्रारम्भिक अवस्था में बच्चे के विकास, व्यवहार, भाषा, सीखने की गति तथा दैनिक गतिविधियों का अवलोकन करके बौद्धिक एवं विकासात्मक कठिनाइयों के संभावित संकेत पहचाने जा सकते हैं।
प्रश्न 15. परामर्श से सम्बन्धित जिले की विशेषज्ञ समिति का नेतृत्व करता है-
(a) जिला मजिस्ट्रेट
(b) जिले का मुख्य चिकित्साधिकारी
(c) अपर जिलाधिकारी
(d) जिला विद्यालय निरीक्षक
उत्तर: (b) : जिला चिकित्सालय में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के चिकित्सकीय परीक्षण एवं सम्बन्धित सहायता के लिए गठित विशेषज्ञ चिकित्सकों की समिति का नेतृत्व मुख्य चिकित्साधिकारी (CMO) करता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. बुद्धिलब्धि का सूत्र बताइए।
उत्तर: बुद्धिलब्धि (IQ) = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100
प्रश्न 17. डायट का पूरा नाम लिखिए।
उत्तर: DIET का पूरा नाम District Institute of Education and Training अर्थात जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान है।
प्रश्न 18. सृजनात्मकता के प्रमुख तत्व बताइए।
उत्तर: सृजनात्मकता के प्रमुख तत्व हैं—प्रवाह (Fluency), लचीलापन (Flexibility), मौलिकता (Originality) तथा विस्तार (Elaboration)।
प्रश्न 19. किन्हीं दो व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षणों के नाम लिखिए।
उत्तर: दो व्यक्तिगत बुद्धि परीक्षण हैं—
- स्टैनफोर्ड-बिने बुद्धि परीक्षण
- बिने-साइमन बुद्धि परीक्षण
प्रश्न 20. भारत सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम कब पारित किया गया?
उत्तर: मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 को 22 मई 1987 को अधिनियमित किया गया था। यह 1 अप्रैल 1993 से लागू हुआ। बाद में इसे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।
प्रश्न 21. परामर्श में सहयोग देने वाली दो संस्थाओं के नाम बताइए।
उत्तर: परामर्श में सहयोग देने वाली दो प्रमुख संस्थाएँ हैं—
- मनोविज्ञानशाला, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
- मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र
प्रश्न 22. भाषा कौशल का सही क्रम बताइए।
उत्तर: भाषा कौशल का सामान्य क्रम है—सुनना → बोलना → पढ़ना → लिखना।
प्रश्न 23. An Enriched Curriculum for Rapid Learners पुस्तक के लेखक कौन हैं?
उत्तर: इससे सम्बन्धित प्रसिद्ध रचना लेटा एस. हॉलिंगवर्थ (Leta S. Hollingworth) की है। इसका प्रमाणित शीर्षक An Enrichment Curriculum for Rapid Learners at Public School 500: Speyer School है।
प्रश्न 24. निर्देशन के दो उपकरण बताइए।
उत्तर: निर्देशन के दो प्रमुख उपकरण हैं—
- अभिरुचि सूची (Interest Inventory)
- अभिक्षमता परीक्षण (Aptitude Test)
प्रश्न 25. परामर्श के चार गुण बताइए।
उत्तर: अच्छे परामर्श की चार प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- उपबोध्य-केन्द्रित होना
- सहानुभूतिपूर्ण एवं स्वीकारात्मक वातावरण
- गोपनीयता
- व्यक्ति को स्वयं निर्णय एवं समस्या-समाधान करने में सक्षम बनाना
प्रश्न 26. समूह परामर्श से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: जब प्रशिक्षित परामर्शदाता समान अथवा सम्बन्धित आवश्यकताओं वाले कई व्यक्तियों के समूह के साथ एक ही समय में परामर्श प्रक्रिया संचालित करता है, तो उसे समूह परामर्श कहते हैं।
प्रश्न 27. छात्रों को निर्देशन प्रदान करने के लिए विधियों के नाम बताइए।
उत्तर: निर्देशन प्रदान करने की दो प्रमुख विधियाँ हैं—
- वैयक्तिक निर्देशन
- सामूहिक निर्देशन
प्रश्न 28. शैक्षिक लब्धि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: शैक्षिक लब्धि या Educational Quotient (E.Q.) बालक की शैक्षिक आयु और वास्तविक आयु के अनुपात को व्यक्त करती है।
E.Q. = (शैक्षिक आयु / वास्तविक आयु) × 100
प्रश्न 29. समस्यात्मक बालक किसे कहते हैं?
उत्तर: जिस बालक का व्यवहार लगातार उसके अधिगम, विद्यालयी समायोजन, पारिवारिक जीवन या सामाजिक सम्बन्धों में गंभीर समस्या उत्पन्न करे, उसे परम्परागत शैक्षिक भाषा में समस्यात्मक बालक कहा जाता है।
प्रश्न 30. विद्यालय निरीक्षण के प्रकार बताइए।
उत्तर: विद्यालय निरीक्षण के प्रमुख प्रकार हैं—
- नियमित निरीक्षण
- विशेष निरीक्षण
- अधिकारिक निरीक्षण
- आकस्मिक निरीक्षण
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. प्रतिभाशाली बालक किसे कहते हैं? उनकी मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: ऐसे बालक जो बौद्धिक क्षमता, सृजनात्मकता, शैक्षिक उपलब्धि, नेतृत्व, कला अथवा किसी अन्य क्षेत्र में अपनी आयु के सामान्य बच्चों की अपेक्षा उल्लेखनीय उच्च क्षमता प्रदर्शित करते हैं, प्रतिभाशाली बालक कहलाते हैं। केवल IQ ही प्रतिभाशालिता का एकमात्र आधार नहीं है।
प्रतिभाशाली बालकों की प्रमुख विशेषताएँ-
- नई बातों को शीघ्र समझने और सीखने की क्षमता।
- उच्च स्तर की जिज्ञासा तथा प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति।
- अच्छी स्मृति एवं व्यापक शब्दावली।
- तर्क एवं समस्या-समाधान की उच्च क्षमता।
- मौलिक एवं सृजनात्मक चिंतन।
- रुचिकर विषय में लम्बे समय तक एकाग्र रहने की क्षमता।
प्रश्न 32. समावेशी शिक्षा के सिद्धान्त बताइए।
उत्तर: समावेशी शिक्षा समानता, सहभागिता और विविधता के सम्मान पर आधारित शिक्षा व्यवस्था है। इसके प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-
- समान अवसर: सभी बच्चों को बिना भेदभाव के शिक्षा प्राप्त करने का समान अवसर दिया जाए।
- एक साथ शिक्षा: सामान्य तथा विशेष आवश्यकता वाले बच्चे यथासम्भव एक ही विद्यालय और कक्षा में सीखें।
- विविधता का सम्मान: बच्चों की शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, भाषायी एवं सांस्कृतिक भिन्नताओं को स्वीकार किया जाए।
- उचित अनुकूलन: आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधि, मूल्यांकन एवं विद्यालयी वातावरण में परिवर्तन किया जाए।
- बाधारहित वातावरण: विद्यालय की इमारत, संसाधन और संचार व्यवस्था सभी बच्चों के लिए सुलभ हो।
- समान सहभागिता: प्रत्येक बच्चे को शैक्षिक तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर मिले।
- सहयोग: शिक्षक, अभिभावक, विशेष शिक्षक, विशेषज्ञ एवं समुदाय मिलकर बच्चे के विकास में सहयोग करें।
प्रश्न 33. परामर्श के महत्व बताइए।
उत्तर: परामर्श व्यक्ति को अपनी समस्याओं, क्षमताओं और परिस्थितियों को समझकर उचित निर्णय एवं समायोजन करने में सहायता देता है। इसका महत्व निम्नलिखित है-
- व्यक्ति को अपनी क्षमताओं, रुचियों और सीमाओं को समझने में सहायता मिलती है।
- शैक्षिक एवं व्यक्तिगत समस्याओं के समाधान में सहायता मिलती है।
- आत्मविश्वास एवं आत्म-स्वीकृति का विकास होता है।
- सामाजिक एवं संवेगात्मक समायोजन में सहायता मिलती है।
- विषय, पाठ्यक्रम तथा व्यवसाय के उचित चयन में सहायता मिलती है।
- व्यक्ति में स्वयं निर्णय लेने और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित होती है।
प्रश्न 34. बाल अपराध किसे कहते हैं? इसके चार प्रमुख कारण बताइए।
उत्तर: जब कोई बालक या किशोर ऐसा कार्य करता है जो कानून के विरुद्ध हो, तो उसे बाल या किशोर अपराध कहा जाता है। इसके पीछे सामान्यतः किसी एक कारण के बजाय अनेक पारिवारिक, सामाजिक तथा व्यक्तिगत परिस्थितियाँ मिलकर कार्य करती हैं।
बाल अपराध के चार प्रमुख कारण-
- प्रतिकूल पारिवारिक वातावरण: उपेक्षा, हिंसा, लगातार संघर्ष या उचित देखरेख का अभाव।
- सामाजिक-आर्थिक कठिनाइयाँ: अत्यधिक गरीबी, सामाजिक वंचना तथा अवसरों की कमी।
- अनुचित संगति: अपराधी या असामाजिक साथी-समूह का प्रभाव।
- विद्यालयी एवं व्यवहारगत समस्याएँ: लगातार असफलता, अनुपस्थिति, विद्यालय छोड़ना या गंभीर समायोजन कठिनाइयाँ।
प्रश्न 35. निर्देशन एवं परामर्श की अवधारणा स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: निर्देशन एक व्यापक एवं सतत सहायता-प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति को अपनी क्षमताएँ, रुचियाँ और परिस्थितियाँ समझने तथा उचित शैक्षिक, व्यावसायिक एवं व्यक्तिगत निर्णय लेने में सहायता दी जाती है।
परामर्श निर्देशन की एक महत्वपूर्ण एवं अपेक्षाकृत गहन प्रक्रिया है जिसमें प्रशिक्षित परामर्शदाता व्यक्ति के साथ विश्वासपूर्ण सम्बन्ध स्थापित करके उसे अपनी समस्या, भावनाओं तथा उपलब्ध विकल्पों को समझने और स्वयं उचित समाधान तक पहुँचने में सहायता करता है।
अतः निर्देशन का क्षेत्र व्यापक है, जबकि परामर्श मुख्यतः गहन व्यक्तिगत अन्तःक्रिया एवं समस्या-समाधान पर केन्द्रित रहता है।
प्रश्न 36. पर्यवेक्षण क्या है? एक अच्छे पर्यवेक्षक की विशेषताओं पर चर्चा कीजिए।
उत्तर: शैक्षिक पर्यवेक्षण वह सहयोगात्मक प्रक्रिया है जिसके द्वारा विद्यालय के शिक्षण-अधिगम, शिक्षक कार्य, संसाधनों तथा अन्य शैक्षिक गतिविधियों का अध्ययन करके उनमें सुधार हेतु मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान की जाती है।
एक अच्छे पर्यवेक्षक की प्रमुख विशेषताएँ-
- लोकतांत्रिक दृष्टिकोण: शिक्षक के साथ सहयोगी एवं सम्मानपूर्ण व्यवहार करे।
- विषय एवं शिक्षण का ज्ञान: पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधियों और मूल्यांकन की पर्याप्त समझ हो।
- निष्पक्षता: व्यक्तिगत पक्षपात से मुक्त होकर वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करे।
- संचार-कौशल: स्पष्ट एवं रचनात्मक ढंग से सुझाव दे सके।
- नेतृत्व क्षमता: शिक्षकों को प्रेरित एवं संगठित कर सके।
- सुधारात्मक दृष्टिकोण: केवल त्रुटियाँ खोजने के बजाय उनके समाधान एवं सुधार के उपाय बताए।
- सहानुभूति एवं धैर्य: शिक्षक की परिस्थितियों और कठिनाइयों को समझे।
प्रश्न 37. वाक्-दोष के प्रकार बताइए।
उत्तर: वाणी के उच्चारण, प्रवाह, आवाज अथवा विकास में उत्पन्न कठिनाइयों को वाक्-दोष कहा जाता है। पाठ्यक्रम में इसके प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
- उच्चारण सम्बन्धी दोष: ध्वनियों को गलत बोलना, छोड़ना या बदलना।
- हकलाना: ध्वनि या शब्द की पुनरावृत्ति, खिंचाव अथवा बोलते समय रुकावट।
- आवाज सम्बन्धी दोष: आवाज की गुणवत्ता, तीव्रता या पिच में असामान्यता।
- अंगीय वाणी-दोष: होंठ, जीभ, तालु अथवा अन्य वाक्-अंगों की समस्या से उत्पन्न कठिनाई।
- श्रवण-दोष से सम्बन्धित वाणी समस्या: ठीक से न सुन पाने के कारण उच्चारण एवं भाषा-विकास प्रभावित होना।
- विलम्बित वाणी-विकास: आयु के अपेक्षित स्तर की तुलना में बोलने का विकास देर से होना।
प्रश्न 38. श्रवण क्षतियुक्त बालकों के प्रकार बताइए। इन बालकों की पहचान कैसे करेंगे?
उत्तर: श्रवण-हानि की तीव्रता के आधार पर बच्चों को सामान्यतः निम्न प्रकार से समझा जा सकता है-
- हल्की श्रवण हानि
- मध्यम श्रवण हानि
- गंभीर श्रवण हानि
- गहन श्रवण हानि
पहचान के प्रमुख संकेत-
- बार-बार बात दोहराने के लिए कहना।
- सामान्य आवाज पर उचित प्रतिक्रिया न देना।
- शिक्षक की बात सुनने के लिए एक कान आगे करना या सिर झुकाना।
- टीवी या अन्य उपकरण की आवाज बहुत तेज रखना।
- मौखिक निर्देशों को समझने में कठिनाई होना।
- वाणी एवं भाषा-विकास में विलम्ब होना।
सही पहचान के लिए ऑडियोमेट्रिक परीक्षण एवं योग्य ऑडियोलॉजिस्ट द्वारा मूल्यांकन आवश्यक है।
प्रश्न 39. विकलांग बालकों की पुनर्वास योजना तैयार कीजिए।
उत्तर: दिव्यांग अथवा विशेष आवश्यकता वाले बालकों के पुनर्वास का उद्देश्य उनकी क्षमताओं का अधिकतम विकास, आत्मनिर्भरता तथा शिक्षा और समाज में पूर्ण सहभागिता सुनिश्चित करना है। पुनर्वास योजना में निम्नलिखित बिन्दु सम्मिलित होने चाहिए-
- प्रारम्भिक पहचान एवं मूल्यांकन: बच्चे की अक्षमता, क्षमता एवं आवश्यक सहायता का समय पर आकलन किया जाए।
- चिकित्सकीय एवं उपचारात्मक सहायता: आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी या अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
- सहायक उपकरण: व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ब्रेल सामग्री, ऑर्थोसिस अथवा अन्य उपयुक्त उपकरण दिए जाएँ।
- समावेशी शिक्षा: सामान्य विद्यालय में आवश्यक उचित अनुकूलन, संसाधन एवं व्यक्तिगत शैक्षिक सहायता दी जाए।
- बाधारहित वातावरण: रैम्प, सुलभ शौचालय, उपयुक्त फर्नीचर एवं अन्य आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हों।
- जीवन-कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण: बच्चे की आयु एवं क्षमता के अनुसार आत्मनिर्भरता और भविष्य के रोजगार से सम्बन्धित कौशल विकसित किए जाएँ।
- मनोवैज्ञानिक एवं पारिवारिक सहयोग: बच्चे तथा अभिभावकों को आवश्यक परामर्श एवं मार्गदर्शन दिया जाए।
- सामाजिक समावेशन: खेल, सांस्कृतिक एवं सामुदायिक गतिविधियों में समान भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
- अनुवर्ती मूल्यांकन: बच्चे की प्रगति का समय-समय पर मूल्यांकन कर पुनर्वास योजना में आवश्यक परिवर्तन किए जाएँ।
प्रश्न 40. अपराधी बालकों की उपचार विधियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: बाल-अपराध से जुड़े बच्चों के उपचार का उद्देश्य केवल दण्ड देना नहीं, बल्कि उनके सुधार, पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्समायोजन को सुनिश्चित करना है। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-
- मनोवैज्ञानिक परामर्श: बच्चे की भावनात्मक एवं व्यवहारगत समस्याओं के कारणों को समझकर सहायता देना।
- व्यवहार चिकित्सा: सकारात्मक पुनर्बलन एवं व्यवहार-संशोधन द्वारा उचित व्यवहार विकसित करना।
- परिवार परामर्श: परिवार के वातावरण और माता-पिता-बालक सम्बन्धों में सुधार करना।
- परिवीक्षा: बच्चे को समाज में रहते हुए आवश्यक निगरानी, मार्गदर्शन एवं सहायता प्रदान करना।
- शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण: बच्चे को विद्यालयी शिक्षा, जीवन-कौशल तथा रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना।
- क्रिया एवं मनोरंजन चिकित्सा: खेल, कला, संगीत एवं रचनात्मक गतिविधियों द्वारा सकारात्मक व्यक्तित्व-विकास करना।
- विशेष गृह/पर्यवेक्षण गृह: आवश्यकता और किशोर न्याय बोर्ड के आदेश के अनुसार बच्चे को सुरक्षित एवं सुधारात्मक वातावरण प्रदान करना।
- पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्समायोजन: बच्चे को परिवार, विद्यालय और समाज की मुख्यधारा से पुनः जोड़ने का प्रयास करना।
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