वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. विशिष्ट बालक किस बुद्धि-लब्धि में नहीं आते हैं?
(a) 70-75
(b) 75-85
(c) 90-110
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) : पारम्परिक बुद्धि-वर्गीकरण के अनुसार 90-110 IQ को सामान्य या औसत बुद्धि की श्रेणी माना जाता है। इसलिए दिए गए विकल्पों में 90-110 सही उत्तर है। ध्यान रहे कि विशिष्ट बालकों की पहचान केवल बुद्धिलब्धि के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी शारीरिक, बौद्धिक, शैक्षिक तथा अन्य विशेषताओं के आधार पर भी की जाती है।
प्रश्न 2. विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों में सम्मिलित नहीं है-
(a) सामान्य बालक
(b) दिव्यांग बालक
(c) तीव्र बुद्धि वाले बालक
(d) इनमें से सभी
उत्तर: (a) : सामान्य बालक विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की श्रेणी में सम्मिलित नहीं होता, जबकि दिव्यांग तथा असाधारण रूप से तीव्र बुद्धि वाले बालकों को विशेष शैक्षिक आवश्यकताएँ हो सकती हैं।
प्रश्न 3. ब्रेल लिपि का विकास किया-
(a) किर्क
(b) इताई
(c) लुई ब्रेल
(d) ऐलिस
उत्तर: (c) : लुई ब्रेल ने दृष्टिबाधित व्यक्तियों के पढ़ने और लिखने के लिए स्पर्श आधारित ब्रेल प्रणाली विकसित की। इसमें उभरे हुए छह बिन्दुओं के विभिन्न संयोजनों का प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 4. भाषा कौशलों के विकास हेतु उपकरण है-
(a) कम्प्यूटर
(b) दृश्य-श्रव्य सामग्री
(c) भाषा प्रयोगशाला
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : भाषा कौशलों के विकास में कम्प्यूटर, दृश्य-श्रव्य सामग्री तथा भाषा प्रयोगशाला सभी उपयोगी उपकरण हैं।
प्रश्न 5. भारतीय पुनर्वास परिषद् की स्थापना हुई थी-
(a) 1995 ई.
(b) 1993 ई.
(c) 1994 ई.
(d) 1992 ई.
उत्तर: दिए गए विकल्पों में भारतीय पुनर्वास परिषद् की मूल स्थापना का सही वर्ष उपलब्ध नहीं है। भारतीय पुनर्वास परिषद् (RCI) की स्थापना 1986 में एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में हुई थी। भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम 1992 में पारित हुआ और परिषद् 1993 में सांविधिक निकाय बनी। अतः यदि प्रश्न सांविधिक निकाय बनने के वर्ष से सम्बन्धित हो, तो उत्तर (b) 1993 ई. होगा।
प्रश्न 6. ब्रेल लिपि उपकरण उपयोग आती है-
(a) दृष्टि दोष बालकों के लिए
(b) वाणी दोष बालकों के लिए
(c) मन्द बुद्धि बालकों के लिए
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (a) : ब्रेल लिपि मुख्यतः दृष्टिबाधित बालकों के पढ़ने और लिखने के लिए उपयोग की जाती है।
प्रश्न 7. अस्थिबाधितों हेतु आरक्षण का प्रावधान है-
(a) 2%
(b) 4%
(c) 3%
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) : दिए गए विकल्पों में 4% दिव्यांगजनों के लिए सरकारी नौकरियों में निर्धारित कुल आरक्षण को दर्शाता है। वर्तमान प्रावधान के अनुसार बेंचमार्क दिव्यांगजनों के लिए कुल 4% आरक्षण है, जिसमें चलन अक्षमता (Locomotor Disability) सहित सम्बन्धित श्रेणी के लिए 1% आरक्षण निर्धारित है। अतः केवल अस्थिबाधितों के लिए 4% कहना तकनीकी रूप से पूर्णतः सही नहीं है।
प्रश्न 8. अस्थिबाधितों हेतु संस्थान स्थित है-
(a) कानपुर
(b) नागपुर
(c) देहरादून
(d) नई दिल्ली
उत्तर: (c) : राष्ट्रीय अस्थि विकलांग संस्थान, वर्तमान में राष्ट्रीय चलन दिव्यांगजन संस्थान (NILD), का एक क्षेत्रीय केन्द्र देहरादून में स्थापित किया गया था।
प्रश्न 9. विशिष्ट शिक्षा के अन्तर्गत कौन आता है?
(a) विकलांगता
(b) रोगग्रस्तता
(c) अक्षमता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : विशिष्ट शिक्षा का सम्बन्ध ऐसे बच्चों की विशेष शैक्षिक आवश्यकताओं से है जिन्हें विकलांगता, अक्षमता, दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या अथवा अन्य विशिष्ट परिस्थितियों के कारण अतिरिक्त शैक्षिक सहायता की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 10. परामर्श एवं निर्देशन देने वाली संस्था मनोविज्ञानशाला उत्तर प्रदेश में स्थित है-
(a) लखनऊ में
(b) बरेली में
(c) वाराणसी में
(d) इलाहाबाद में
उत्तर: (d) : परामर्श एवं निर्देशन सम्बन्धी सेवाएँ प्रदान करने वाली मनोविज्ञानशाला, उत्तर प्रदेश की स्थापना जुलाई 1947 में इलाहाबाद, वर्तमान प्रयागराज में की गई थी।
प्रश्न 11. निर्देशन एवं परामर्श द्वारा बताया जा सकता है-
(a) क्या करने योग्य है
(b) क्या न करने योग्य है
(c) अ और ब दोनों
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) : निर्देशन एवं परामर्श व्यक्ति को उचित विकल्पों को समझने, क्या करना उचित है तथा किन कार्यों से बचना चाहिए, इस सम्बन्ध में सही निर्णय लेने में सहायता करता है।
प्रश्न 12. सही दृष्टि कहलाती है-
(a) 6/6
(b) 6/9
(c) 6/12
(d) 6/18
उत्तर: (a) : 6/6 दृष्टि को सामान्य दृष्टि माना जाता है। इसका अर्थ है कि व्यक्ति 6 मीटर की दूरी से वह वस्तु स्पष्ट देख सकता है जिसे सामान्य दृष्टि वाला व्यक्ति 6 मीटर से देखता है।
प्रश्न 13. प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा में क्या आवश्यक है?
(a) तीव्र गति से अध्ययन
(b) सम्पुष्ट कार्यक्रम
(c) व्यक्तिगत ध्यान
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : प्रतिभाशाली बालकों के लिए गतिवर्द्धन, समृद्ध या सम्पुष्ट शैक्षिक कार्यक्रम तथा व्यक्तिगत ध्यान सभी उपयोगी हैं। इससे उन्हें अपनी क्षमता और सीखने की गति के अनुरूप विकास के अवसर मिलते हैं।
प्रश्न 14. भारत सरकार स्वयंसेवी संस्थानों को अनुदान देती है-
(a) 90%
(b) 50%
(c) 40%
(d) 60%
उत्तर: (a) : दीनदयाल दिव्यांगजन पुनर्वास योजना जैसी सम्बन्धित योजनाओं के अन्तर्गत पात्र स्वयंसेवी संस्थाएँ निर्धारित मानकों के अनुसार परियोजना लागत के 90% तक अनुदान के लिए पात्र हो सकती हैं।
प्रश्न 15. समस्यात्मक बालक है-
(a) झूठ बोलने वाला
(b) चोरी करने वाला
(c) माता-पिता का कहना न मानने वाला
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : बार-बार झूठ बोलना, चोरी करना, अत्यधिक अवज्ञा तथा अन्य लगातार समस्यात्मक व्यवहारों को समस्यात्मक बालक की पहचान के संकेतों में रखा जा सकता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. पर्यवेक्षण का क्या अर्थ है?
उत्तर: किसी संस्था में कार्यों का अवलोकन, मार्गदर्शन, समन्वय और मूल्यांकन करके उनमें सुधार लाने की प्रक्रिया को पर्यवेक्षण कहते हैं। शैक्षिक पर्यवेक्षण का प्रमुख उद्देश्य शिक्षण-अधिगम की गुणवत्ता में सुधार करना है।
प्रश्न 17. निदान एवं उपचार को समझाइए।
उत्तर: निदान से आशय बालक की अधिगम सम्बन्धी कठिनाई तथा उसके कारणों की पहचान करना है। उपचार से आशय पहचानी गई कठिनाइयों को दूर करने के लिए उपचारात्मक शिक्षण, अतिरिक्त अभ्यास तथा उपयुक्त शिक्षण-विधियों का प्रयोग करना है।
प्रश्न 18. पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण में अन्तर बताइए।
उत्तर:
| पर्यवेक्षण | निरीक्षण |
|---|---|
| इसका प्रमुख उद्देश्य कार्य में सुधार और मार्गदर्शन करना है। | इसका प्रमुख उद्देश्य कार्य की स्थिति तथा नियमों के पालन की जाँच करना है। |
| यह सहयोगात्मक एवं विकासात्मक प्रक्रिया है। | यह अपेक्षाकृत औपचारिक एवं मूल्यांकनपरक प्रक्रिया है। |
| इसका क्षेत्र व्यापक एवं निरन्तर होता है। | यह सामान्यतः निश्चित अवसर या अवधि पर किया जाता है। |
प्रश्न 19. मनोविज्ञानशाला उत्तर प्रदेश में कब और कहाँ स्थापित की गई?
उत्तर: आचार्य नरेन्द्र देव समिति, 1935 की संस्तुतियों के आधार पर जुलाई 1947 में प्रयागराज (तत्कालीन इलाहाबाद) में मनोविज्ञानशाला, उत्तर प्रदेश की स्थापना की गई।
प्रश्न 20. परामर्श में सहयोग देने वाली दो संस्थाओं का नाम लिखिए।
उत्तर: परामर्श में सहयोग देने वाली दो प्रमुख संस्थाएँ हैं—
- मनोविज्ञानशाला, उत्तर प्रदेश, प्रयागराज
- मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र
प्रश्न 21. परामर्श के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: परामर्श का उद्देश्य व्यक्ति को अपनी समस्याओं, क्षमताओं और परिस्थितियों को समझने, उचित निर्णय लेने, समस्या-समाधान करने तथा व्यक्तिगत, सामाजिक और शैक्षिक समायोजन स्थापित करने में सहायता देना है।
प्रश्न 22. शिक्षण एवं निर्देशन में अन्तर लिखिए।
उत्तर:
| शिक्षण | निर्देशन |
|---|---|
| शिक्षण का मुख्य उद्देश्य ज्ञान, कौशल और अधिगम अनुभव प्रदान करना है। | निर्देशन का उद्देश्य व्यक्ति को स्वयं को समझने और उचित निर्णय लेने में सहायता देना है। |
| यह सामान्यतः पाठ्यक्रम एवं कक्षा-शिक्षण से सम्बन्धित होता है। | यह शैक्षिक, व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक समस्याओं से सम्बन्धित हो सकता है। |
| शिक्षण मुख्यतः शिक्षक और शिक्षार्थी के बीच अधिगम प्रक्रिया है। | निर्देशन व्यक्ति की आवश्यकताओं, रुचियों और क्षमताओं को ध्यान में रखकर दिया जाता है। |
प्रश्न 23. विशिष्ट बालक किन्हें कहा जाता है?
उत्तर: ऐसे बालक जो शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, संवेगात्मक अथवा शैक्षिक विशेषताओं में औसत बालकों से इतनी भिन्नता रखते हों कि उनकी क्षमताओं के समुचित विकास के लिए विशेष सहायता या शैक्षिक व्यवस्था की आवश्यकता पड़े, विशिष्ट बालक कहलाते हैं।
प्रश्न 24. शारीरिक विकलांग बालक कौन होते हैं?
उत्तर: ऐसे बालक जिनकी शारीरिक या गत्यात्मक क्षमता किसी जन्मजात स्थिति, रोग या दुर्घटना के कारण प्रभावित हो और जिन्हें चलने-फिरने अथवा दैनिक क्रियाओं में कठिनाई हो, शारीरिक रूप से बाधित बालक कहलाते हैं। उनकी बौद्धिक क्षमता आवश्यक रूप से प्रभावित नहीं होती।
प्रश्न 25. पिछड़ापन मापने की इकाई क्या होती है?
उत्तर: शैक्षिक पिछड़ेपन के आकलन में शैक्षिक लब्धि या शैक्षिक भागफल (Educational Quotient – E.Q.) का प्रयोग किया जाता है।
E.Q. = (शैक्षिक आयु / वास्तविक आयु) × 100
पारम्परिक वर्गीकरण में 85 से कम शैक्षिक लब्धि को शैक्षिक पिछड़ेपन का संकेत माना गया है।
प्रश्न 26. अपंगता के दो कारण बताइए।
उत्तर: अपंगता या शारीरिक अक्षमता के दो प्रमुख कारण हैं—
- जन्मजात कारण
- दुर्घटना या चोट
प्रश्न 27. समावेशी शिक्षा का सूक्ष्म आशय बताइए।
उत्तर: समावेशी शिक्षा का आशय ऐसी शिक्षा व्यवस्था से है जिसमें सामान्य तथा विशिष्ट आवश्यकता वाले सभी बच्चे एक साथ सामान्य विद्यालय और कक्षा में शिक्षा प्राप्त करते हैं तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें उचित सहायता उपलब्ध कराई जाती है।
प्रश्न 28. शैक्षिक लब्धि का सूत्र लिखिए।
उत्तर:
शैक्षिक लब्धि (E.Q.) = (शैक्षिक आयु / वास्तविक आयु) × 100
प्रश्न 29. श्रवण विकृति क्या है?
उत्तर: ध्वनियों को आंशिक या पूर्ण रूप से सुनने अथवा समझने की क्षमता में कमी को श्रवण विकृति या श्रवण बाधिता कहते हैं। यह हल्की से लेकर गम्भीर या पूर्ण श्रवण हानि तक हो सकती है।
प्रश्न 30. आवाज की समस्या क्या दोष है?
उत्तर: जब व्यक्ति की आवाज की गुणवत्ता, ऊँचाई-नीचाई (Pitch), तीव्रता (Loudness) या स्वर उसकी आयु और परिस्थिति के अनुरूप सामान्य न हो, तो इसे आवाज या स्वर-दोष कहा जाता है। यह हकलाने और उच्चारण-दोष से अलग वाक्-समस्या है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. अधिगम बाधित बालकों हेतु शिक्षण सिद्धान्त बताइए।
उत्तर: अधिगम बाधित बालकों के शिक्षण में उनकी व्यक्तिगत आवश्यकता और सीखने की गति को ध्यान में रखना चाहिए। प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-
- व्यक्तिगत भिन्नता का सिद्धान्त - प्रत्येक बालक की कठिनाई के अनुसार शिक्षण योजना बनाई जाए।
- सरल से कठिन - विषयवस्तु को छोटे-छोटे क्रमबद्ध चरणों में प्रस्तुत किया जाए।
- बहु-संवेदी शिक्षण - देखने, सुनने, बोलने, छूने और करके सीखने के अवसर दिए जाएँ।
- पुनरावृत्ति एवं अभ्यास - आवश्यकतानुसार बार-बार अभ्यास और पुनर्बलन दिया जाए।
- उपचारात्मक शिक्षण - निदान के आधार पर पढ़ने, लिखने या गणित की विशिष्ट कठिनाइयों को दूर करने के लिए उपचारात्मक शिक्षा दी जाए।
- सकारात्मक प्रोत्साहन - छोटी उपलब्धियों की भी प्रशंसा कर बालक का आत्मविश्वास बढ़ाया जाए।
प्रश्न 32. अपंग बालकों को शिक्षा किस प्रकार की दी जानी चाहिए?
उत्तर: शारीरिक रूप से बाधित बालकों को यथासम्भव समावेशी वातावरण में सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जानी चाहिए। उनकी आवश्यकता के अनुसार निम्न सुविधाएँ प्रदान की जानी चाहिए-
- बाधारहित विद्यालय भवन, रैम्प एवं सुलभ शौचालय।
- उपयुक्त बैठने की व्यवस्था तथा आवश्यक सहायक उपकरण।
- आवश्यकतानुसार व्यक्तिगत शैक्षिक सहायता।
- विद्यालयी तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में समान भागीदारी।
- फिजियोथेरेपी, चिकित्सा या पुनर्वास सेवाओं से आवश्यक समन्वय।
- शिक्षक द्वारा सहयोगपूर्ण व्यवहार तथा बालक की आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहन।
प्रश्न 33. श्रवण बाधित बालकों को शिक्षा किस प्रकार दी जाती है?
उत्तर: श्रवण बाधित बालकों की शिक्षा उनकी श्रवण हानि और संचार की आवश्यकता के अनुसार दी जाती है। प्रमुख उपाय हैं-
- सांकेतिक भाषा तथा आवश्यकता अनुसार द्विभाषिक शिक्षण।
- उपयुक्त बालकों में श्रवण यंत्र या अन्य सहायक श्रवण उपकरण।
- चित्र, चार्ट, लिखित सामग्री और अन्य दृश्य शिक्षण-सामग्री का अधिक प्रयोग।
- ओष्ठ-पठन, वाणी एवं भाषा प्रशिक्षण जहाँ उपयुक्त हो।
- बालक को शिक्षक का चेहरा स्पष्ट दिखाई देने वाली उचित बैठने की व्यवस्था।
प्रश्न 34. हकलाने की समस्या क्या है?
उत्तर: हकलाना वाणी के प्रवाह से सम्बन्धित एक विकार है जिसमें ध्वनियों, वर्णों या शब्दों की अनैच्छिक पुनरावृत्ति, ध्वनि को लम्बा खींचना अथवा बोलते समय अचानक रुकावट उत्पन्न होती है। इससे बोलने की सामान्य लय और प्रवाह प्रभावित होते हैं। तनाव या घबराहट इसके लक्षणों को बढ़ा सकते हैं, परन्तु वे अकेले इसका मूल कारण नहीं होते।
प्रश्न 35. अधिगम असमर्थी बालक कौन होते हैं?
उत्तर: ऐसे बालक जिन्हें सामान्य शिक्षण अवसर मिलने के बावजूद पढ़ने, लिखने, वर्तनी, गणित या भाषा के किसी विशिष्ट क्षेत्र में लगातार कठिनाई होती है, अधिगम असमर्थी बालक कहलाते हैं।
इनकी कठिनाई सामान्यतः केवल कम बुद्धि, दृष्टि या श्रवण दोष के कारण नहीं होती। डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया और डिस्कैल्कुलिया विशिष्ट अधिगम अक्षमता के प्रमुख उदाहरण हैं।
प्रश्न 36. मानसिक मन्दित बालक कौन होते हैं? संक्षेप में बताइए।
उत्तर: पारम्परिक पाठ्यक्रम में मानसिक मन्दता शब्द का प्रयोग ऐसे बालकों के लिए किया गया है जिनकी बौद्धिक कार्यक्षमता तथा अनुकूलन व्यवहार सामान्य स्तर से महत्वपूर्ण रूप से कम होते हैं और यह स्थिति विकासकाल में प्रकट होती है। आधुनिक शब्दावली में इसे बौद्धिक अक्षमता कहा जाता है।
ऐसे बच्चों को सीखने, संचार, सामाजिक व्यवहार तथा दैनिक जीवन के कौशलों में उनकी आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता हो सकती है।
प्रश्न 37. शारीरिक एवं बौद्धिक कमजोर बालकों से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: शारीरिक और बौद्धिक अक्षमता दो अलग स्थितियाँ हैं-
- शारीरिक रूप से बाधित बालक - इनके शरीर या गत्यात्मक क्रियाओं में ऐसी कठिनाई होती है जिससे चलने-फिरने या दैनिक गतिविधियों में बाधा आती है। उनकी बुद्धि सामान्य भी हो सकती है।
- बौद्धिक रूप से बाधित बालक - इनमें बौद्धिक कार्यक्षमता के साथ-साथ अनुकूलन व्यवहार, समस्या-समाधान, संचार अथवा दैनिक जीवन के कौशलों में महत्वपूर्ण कठिनाई होती है।
दोनों प्रकार के बालकों के लिए उनकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार शिक्षण-अनुकूलन, सहायक उपकरण, अतिरिक्त समय तथा व्यक्तिगत सहायता प्रदान की जानी चाहिए।
प्रश्न 38. समावेशी शिक्षा की प्रकृति बताइए।
उत्तर: समावेशी शिक्षा की प्रकृति लोकतांत्रिक, बाल-केन्द्रित और समानता पर आधारित है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- यह सभी बच्चों को एक साथ सीखने का समान अवसर देती है।
- यह व्यक्तिगत भिन्नताओं और विविधता को स्वीकार एवं सम्मान करती है।
- यह बालक की कमियों के स्थान पर उसकी क्षमताओं और विकास की सम्भावनाओं पर बल देती है।
- आवश्यकता के अनुसार पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधि और मूल्यांकन में उचित अनुकूलन किया जाता है।
- विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और समुदाय की सहभागिता पर बल दिया जाता है।
- इसका उद्देश्य प्रत्येक बच्चे में आत्मनिर्भरता, सहभागिता और सामाजिक समायोजन का विकास करना है।
प्रश्न 39. प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा के सिद्धान्त बताइए।
उत्तर: प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा उनकी तीव्र सीखने की गति, जिज्ञासा और विशेष क्षमताओं को ध्यान में रखकर दी जानी चाहिए। प्रमुख सिद्धान्त हैं-
- गतिवर्द्धन - बालक को उसकी क्षमता के अनुसार अपेक्षाकृत तीव्र गति से आगे बढ़ने का अवसर देना।
- समृद्धिकरण - सामान्य पाठ्यक्रम के साथ अतिरिक्त, गहन और चुनौतीपूर्ण अधिगम-अनुभव देना।
- व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान - रुचि और योग्यता के अनुसार कार्य तथा परियोजनाएँ प्रदान करना।
- स्वतंत्र अध्ययन - खोज, अनुसंधान, समस्या-समाधान और सृजनात्मक कार्यों के अवसर देना।
- नेतृत्व एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियाँ - नेतृत्व, कला, खेल, वाद-विवाद आदि में भाग लेने के अवसर देना।
- सामाजिक एवं संवेगात्मक विकास - बालक के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना तथा केवल शैक्षिक उपलब्धि पर जोर न देना।
प्रश्न 40. शैक्षिक पर्यवेक्षण की विशेषता बताइए।
उत्तर: शैक्षिक पर्यवेक्षण की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- यह निरन्तर एवं गतिशील प्रक्रिया है।
- इसका आधुनिक स्वरूप लोकतांत्रिक एवं सहयोगात्मक होता है।
- इसका उद्देश्य दोष ढूँढना मात्र नहीं, बल्कि शिक्षण-अधिगम में सुधार करना है।
- यह वैज्ञानिक, योजनाबद्ध एवं वस्तुनिष्ठ प्रक्रिया है।
- यह शिक्षकों को आवश्यक मार्गदर्शन और व्यावसायिक विकास के अवसर प्रदान करता है।
- यह शिक्षण-विधियों, पाठ्यक्रम, शिक्षण-सामग्री और मूल्यांकन में सुधार में सहायक होता है।
- यह विद्यालय की गतिविधियों और विद्यार्थियों की प्रगति का मूल्यांकन करके गुणवत्ता बढ़ाने में सहायता करता है।
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