वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. दृष्टि बाधिता का मुख्य कारण है-
(a) वातावरण
(b) वंशानुक्रम
(c) दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) : दृष्टिबाधिता के कारण आनुवंशिक तथा वातावरणीय/अर्जित दोनों हो सकते हैं। जन्मजात नेत्र-विकार, संक्रमण, चोट, पोषण सम्बन्धी कमी तथा विभिन्न रोग इसके कारण बन सकते हैं।
प्रश्न 2. अच्छी निर्देशन सेवा होती है-
(a) बाल केन्द्रित
(b) शिक्षक केन्द्रित
(c) समाज केन्द्रित
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (a) : अच्छी निर्देशन सेवा बाल केन्द्रित होती है। इसमें बालक की रुचि, क्षमता, आवश्यकता, समस्या तथा वैयक्तिक भिन्नताओं को केन्द्र में रखा जाता है।
प्रश्न 3. टरमन के अनुसार सामान्य बुद्धि बालकों की बुद्धिलब्धि होती है-
(a) 140 से अधिक
(b) 120 से 140
(c) 110 से 120
(d) 90 से 110
उत्तर: (d) : टरमन के पारम्परिक वर्गीकरण के अनुसार 90 से 110 IQ सामान्य या औसत बुद्धि की श्रेणी मानी जाती है।
प्रश्न 4. समुदाय का अर्थ कितने शब्दों में मिलकर बना है?
(a) चार
(b) दो
(c) तीन
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) : पाठ्यपुस्तकीय व्याख्या के अनुसार Community शब्द को लैटिन के Com तथा Munis से सम्बन्धित माना जाता है। अतः दिए गए विकल्पों में सही उत्तर दो है।
प्रश्न 5. मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र कहाँ स्थित है?
(a) आगरा
(b) दिल्ली
(c) लखनऊ
(d) कानपुर
उत्तर: (a) : दिए गए विकल्पों में आगरा सही उत्तर है। उत्तर प्रदेश में आगरा सहित विभिन्न मण्डलों में मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र स्थापित किए गए हैं, जो विद्यार्थियों को शैक्षिक, व्यावसायिक एवं वैयक्तिक निर्देशन और परामर्श प्रदान करते हैं।
प्रश्न 6. विकलांग शिक्षा के मुख्य आधार हैं-
(a) शारीरिक विकलांगता
(b) आवेगात्मक विकलांगता
(c) मानसिक विकलांगता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : पाठ्यक्रम के अनुसार विशेष शिक्षा की आवश्यकता शारीरिक, संवेगात्मक तथा मानसिक/बौद्धिक कठिनाइयों से सम्बन्धित हो सकती है। अतः सही उत्तर उपर्युक्त सभी है।
प्रश्न 7. सांकेतिक भाषा किसके लिए प्रयुक्त होती है?
(a) प्रतिभाशाली
(b) श्रवण बाधित
(c) 'अ' एवं 'ब' दोनों
(d) चलन बाधित
उत्तर: (b) : सांकेतिक भाषा मुख्यतः बधिर एवं श्रवणबाधित व्यक्तियों के संचार और शिक्षा में प्रयुक्त होती है।
प्रश्न 8. निर्देशन का प्रकार नहीं है-
(a) शैक्षिक निर्देशन
(b) लिखित निर्देशन
(c) व्यक्तिगत निर्देशन
(d) व्यावसायिक निर्देशन
उत्तर: (b) : लिखित निर्देशन निर्देशन का मान्य प्रकार नहीं है। शैक्षिक, व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक निर्देशन इसके प्रमुख प्रकार हैं।
प्रश्न 9. शिक्षा प्रक्रिया में अनुकूलन की आवश्यकता नहीं होती है-
(a) श्रवण बाधितों के लिए
(b) अस्थि बाधितों के लिए
(c) प्रतिभाशाली बालकों के लिए
(d) दृष्टि बाधितों के लिए
उत्तर: (c) : दिए गए विकल्पों में पाठ्यपुस्तकीय अपेक्षित उत्तर प्रतिभाशाली बालक है, क्योंकि प्रश्न में अनुकूलन का आशय मुख्यतः दिव्यांगता के कारण आवश्यक भौतिक अथवा सहायक अनुकूलन से लिया गया है।
नोट: शैक्षिक दृष्टि से प्रतिभाशाली बच्चों को भी पाठ्यक्रमीय अनुकूलन, समृद्धिकरण और गतिवर्द्धन की आवश्यकता हो सकती है।
प्रश्न 10. विकृत बालकों को बनाना चाहिए-
(a) परिवार पर निर्भर
(b) आत्म-निर्भर
(c) सरकार पर निर्भर
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) : विशेष आवश्यकता अथवा दिव्यांगता वाले बच्चों की शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य उन्हें उनकी क्षमता के अनुसार आत्मनिर्भर बनाना है।
प्रश्न 11. वर्तमान में निःशक्त बच्चों की शिक्षा को क्या कहा जाता है?
(a) विशेष शिक्षा
(b) समेकित शिक्षा
(c) समावेशी शिक्षा
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) : आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में सभी बच्चों को आवश्यक सहयोग के साथ सामान्य विद्यालय एवं कक्षा में शिक्षा देने की अवधारणा को समावेशी शिक्षा कहा जाता है।
प्रश्न 12. हकलाने के कारण हैं-
(a) वंशानुक्रम
(b) वातावरण
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) : दिए गए विकल्पों में उपर्युक्त दोनों अपेक्षित उत्तर है। हकलाने में आनुवंशिक एवं न्यूरोफिजियोलॉजिकल कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जबकि वातावरण, तनाव अथवा बोलने की परिस्थितियाँ इसकी तीव्रता और अनुभव को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रश्न 13. मनोविज्ञान केन्द्र का प्रमुख कार्य है-
(a) निर्देशन
(b) प्रशिक्षण
(c) शोध कार्य
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : मनोविज्ञान केन्द्र के प्रमुख कार्यों में निर्देशन एवं परामर्श, प्रशिक्षण तथा मनोवैज्ञानिक शोध एवं परीक्षण सम्मिलित हैं। अतः सही उत्तर उपर्युक्त सभी है।
प्रश्न 14. वाक्दोष के प्रमुख प्रकार हैं-
(a) चार
(b) पाँच
(c) छः
(d) सात
उत्तर: (c) : पाठ्यक्रम के वर्गीकरण में वाक्दोष के छः प्रमुख प्रकार बताए गए हैं—उच्चारण सम्बन्धी दोष, हकलाना, ओष्ठ/अंगीय विकृति, आवाज की समस्या, श्रवण से सम्बन्धित वाणी-दोष तथा वाणी-विकास में विलम्ब।
प्रश्न 15. निर्देशन एवं परामर्श द्वारा बताया जा सकता है-
(a) क्या करने योग्य है
(b) क्या न करने योग्य है
(c) 'अ' एवं 'ब' दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) : निर्देशन एवं परामर्श व्यक्ति को विभिन्न विकल्पों और उनके परिणामों को समझकर क्या करना उचित है तथा क्या नहीं, इसका विवेकपूर्ण निर्णय लेने में सहायता करते हैं।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. पर्यवेक्षण के कोई दो प्रकार लिखिए।
उत्तर: पर्यवेक्षण के दो प्रकार हैं— (1) नियंत्रणात्मक पर्यवेक्षण तथा (2) निरीक्षणात्मक पर्यवेक्षण।
प्रश्न 17. डायट के कोई दो विभागों के नाम लिखिए।
उत्तर: DIET के दो प्रमुख विभाग हैं— (1) सेवापूर्व शिक्षक शिक्षा विभाग (PSTE) तथा (2) जिला संसाधन इकाई (DRU)।
प्रश्न 18. परामर्श की कोई एक परिभाषा लेखक के नाम सहित लिखिए।
उत्तर: शेफर के अनुसार परामर्श एक आमने-सामने की सहायता प्रक्रिया है जिसमें परामर्शदाता व्यक्ति को उसकी भावनाओं, परिस्थितियों एवं समस्या को समझने और विश्लेषित करने में सहायता करता है।
प्रश्न 19. वाक्दोष का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बोलने की ध्वनि, उच्चारण, प्रवाह, स्वर अथवा अनुनाद में ऐसी कठिनाई जिससे वाणी स्पष्ट एवं सहज न रह सके, वाक्दोष कहलाती है।
प्रश्न 20. बाल अपराध के कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर: बाल अपराध के दो संभावित कारण हैं— (1) प्रतिकूल या अस्थिर पारिवारिक वातावरण तथा (2) अनुचित संगति एवं सामाजिक वातावरण।
प्रश्न 21. डायट के कोई दो उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: (1) प्रारम्भिक शिक्षा और शिक्षक-शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना। (2) जिला स्तर पर शिक्षकों को प्रशिक्षण, शैक्षिक संसाधन एवं अकादमिक सहायता प्रदान करना।
प्रश्न 22. विद्यालय पर्यवेक्षण के क्षेत्र बताइए।
उत्तर: विद्यालय पर्यवेक्षण के प्रमुख क्षेत्र हैं— शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, शिक्षक कार्य, पाठ्यक्रम, विद्यार्थियों की प्रगति, विद्यालय वातावरण, अभिलेख, सहगामी गतिविधियाँ तथा भौतिक सुविधाएँ।
प्रश्न 23. निरीक्षण प्रणाली में सुधार के कोई दो सुझाव लिखिए।
उत्तर: (1) निरीक्षण को केवल त्रुटि खोजने के बजाय सुधार एवं सहयोग केन्द्रित बनाया जाए। (2) निरीक्षण के बाद शिक्षक और विद्यालय को व्यावहारिक सुझाव एवं अनुवर्ती सहायता दी जाए।
प्रश्न 24. "योग्य परामर्शदाताओं द्वारा किसी दूसरे व्यक्ति को दी जाने वाली सहायता निर्देशन कहलाती है।" यह परिभाषा किसने लिखी?
उत्तर: यह परिभाषा क्रो एवं क्रो से सम्बन्धित है।
प्रश्न 25. अधिगम अक्षमता वाले बालकों के दो प्रकार बताइए।
उत्तर: (1) डिस्लेक्सिया—पढ़ने में विशेष कठिनाई। (2) डिसग्राफिया—लेखन एवं लिखित अभिव्यक्ति में विशेष कठिनाई।
प्रश्न 26. धीमी गति से सीखने के कौन-कौन से कारण हैं?
उत्तर: धीमी गति से सीखने के कारण शारीरिक, बौद्धिक, संवेगात्मक, पारिवारिक, सामाजिक तथा विद्यालयी/वातावरणीय हो सकते हैं।
प्रश्न 27. एक अध्यापक दृष्टिबाधित बच्चे की पहचान कैसे करेगा?
उत्तर: शिक्षक बार-बार आँखें मलना, पुस्तक बहुत पास रखना, बोर्ड देखने में कठिनाई, आँखें सिकोड़ना तथा पढ़ते समय सिर झुकाना जैसे संकेत देखकर बच्चे को नेत्र-जाँच हेतु संदर्भित कर सकता है।
प्रश्न 28. समावेशी बालक किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर: समावेशी बालक कोई अलग श्रेणी नहीं है। समावेशी शिक्षा में सामान्य, दिव्यांगता वाले, प्रतिभाशाली, अधिगम कठिनाई वाले तथा सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित सहित सभी बच्चे सम्मिलित होते हैं।
प्रश्न 29. बुद्धि-लब्धि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: पारम्परिक सूत्र के अनुसार— IQ = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100। इससे मानसिक आयु और वास्तविक आयु के अनुपात को व्यक्त किया जाता है।
प्रश्न 30. अपवंचन क्या है?
उत्तर: आवश्यक सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक अथवा शैक्षिक साधनों, अवसरों एवं सुविधाओं से वंचित रहने की स्थिति को अपवंचन कहते हैं।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. अस्थिबाधित बालकों की समस्याएँ बताइए तथा इनकी शिक्षा व्यवस्था कैसी होनी चाहिए?
उत्तर: अस्थिबाधित या चलन सम्बन्धी दिव्यांगता वाले बच्चों को मुख्यतः आवागमन, बैठने, सीढ़ियों के प्रयोग, खेल-कूद तथा कुछ शारीरिक गतिविधियों में कठिनाई हो सकती है। बार-बार सहायता पर निर्भरता या सामाजिक दृष्टिकोण के कारण आत्मविश्वास एवं समायोजन भी प्रभावित हो सकता है।
इनकी शिक्षा व्यवस्था-
- बाधारहित विद्यालय: रैम्प, रेलिंग, सुगम शौचालय एवं पर्याप्त आवागमन स्थान उपलब्ध हो।
- उचित बैठने की व्यवस्था: बच्चे की शारीरिक आवश्यकता के अनुसार सुविधाजनक स्थान एवं फर्नीचर दिया जाए।
- सहायक उपकरण: आवश्यकता के अनुसार व्हीलचेयर, बैसाखी अथवा अन्य उपकरणों के प्रयोग की सुविधा हो।
- अनुकूलित गतिविधियाँ: खेल और कक्षागत गतिविधियों में आवश्यक परिवर्तन करके सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
- सकारात्मक व्यवहार: शिक्षक बच्चे के प्रति सहानुभूतिपूर्ण लेकिन समानता आधारित व्यवहार करे और अनावश्यक दया से बचे।
- परिवार एवं विशेषज्ञ सहयोग: आवश्यकता के अनुसार अभिभावक, चिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट और विशेष शिक्षक से सहयोग लिया जाए।
प्रश्न 32. समावेशी बालकों के लिए चलाई जा रही कार्य योजनाओं एवं नीतियों के बारे में बताइए।
उत्तर: भारत में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए समय-समय पर विभिन्न नीतियाँ, कानून एवं योजनाएँ लागू की गईं। 2018 तक प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित थे-
- समेकित दिव्यांग बाल शिक्षा योजना (IEDC), 1974: दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में शिक्षा देने के लिए सहायता प्रदान की गई।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 तथा कार्ययोजना 1992: जहाँ सम्भव हो, दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में शिक्षा देने तथा पाठ्यक्रम एवं शिक्षण में आवश्यक अनुकूलन पर बल दिया गया।
- दिव्यांग व्यक्ति अधिनियम, 1995: शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के अवसर और अधिकार बढ़ाने का प्रावधान किया गया।
- सर्व शिक्षा अभियान: प्राथमिक स्तर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के नामांकन, सहायक उपकरण, संसाधन सहायता एवं समावेशन पर बल दिया गया।
- शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रारम्भिक शिक्षा का कानूनी अधिकार प्रदान किया गया।
- IEDSS, 2009-10: माध्यमिक स्तर पर दिव्यांग बच्चों को समावेशी वातावरण में शिक्षा जारी रखने हेतु सहायता प्रदान की गई।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016: समावेशी शिक्षा, उचित अनुकूलन और बाधारहित पहुँच को अधिकार-आधारित दृष्टिकोण से मजबूत किया गया।
- समग्र शिक्षा, 2018-19: विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न कार्यक्रमों को एकीकृत कर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान, सहायक उपकरण, Braille/large-print सामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण और अन्य सहयोग का प्रावधान किया गया।
प्रश्न 33. लेखन अयोग्यता से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: लेखन से सम्बन्धित विशिष्ट अधिगम कठिनाई को डिसग्राफिया कहा जाता है। इसमें बच्चे को अक्षर बनाने, शब्दों के बीच उचित दूरी रखने, वर्तनी, लिखावट की गति अथवा लिखित अभिव्यक्ति में कठिनाई हो सकती है।
प्रमुख संकेत-
- अक्षरों का आकार एवं दिशा असंगत होना।
- शब्दों और अक्षरों के बीच अनुचित दूरी रखना।
- लिखने की गति बहुत धीमी होना।
- श्रुतिलेख अथवा विचारों को लिखित रूप देने में कठिनाई।
- पेंसिल पकड़ने एवं सूक्ष्म मोटर समन्वय में कठिनाई दिखाई देना।
सभी खराब लिखावट को डिसग्राफिया नहीं कहा जाता; इसकी पहचान बच्चे के समग्र प्रदर्शन एवं विशेषज्ञ मूल्यांकन के आधार पर की जानी चाहिए।
प्रश्न 34. ब्रेल लेखन की प्रक्रिया को समझाइए।
उत्तर: ब्रेल दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए स्पर्श द्वारा पढ़ी जाने वाली लेखन प्रणाली है। इसकी मूल इकाई छह बिन्दुओं का एक प्रकोष्ठ होता है, जिसमें बायीं ओर 1, 2, 3 तथा दायीं ओर 4, 5, 6 क्रमांक के बिन्दु होते हैं। विभिन्न बिन्दु-संयोजनों से अक्षर, अंक और विराम-चिह्न बनाए जाते हैं।
ब्रेल लेखन की प्रक्रिया-
- मोटे कागज को ब्रेल स्लेट में लगाया जाता है।
- स्टाइलस की सहायता से निर्धारित बिन्दुओं को दबाकर कागज पर बिन्दु उभारे जाते हैं।
- स्लेट और स्टाइलस से लिखते समय बिन्दु कागज के पीछे से बनाए जाते हैं, इसलिए लेखन दाएँ से बाएँ किया जाता है।
- कागज पलटने के बाद उभरे हुए बिन्दुओं को बाएँ से दाएँ स्पर्श द्वारा पढ़ा जाता है।
- ब्रेल टाइपराइटर में छह मुख्य कुंजियाँ छह बिन्दुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और आवश्यक बिन्दुओं की कुंजियाँ एक साथ दबाकर अक्षर लिखा जाता है।
लुई ब्रेल ने किशोरावस्था में छह-बिन्दु वाली इस प्रणाली को विकसित किया, जो आगे चलकर विश्वभर में दृष्टिबाधित व्यक्तियों की पढ़ने-लिखने की प्रमुख प्रणाली बनी।
प्रश्न 35. सामान्य बच्चों में कौन-कौन सी मानसिक भिन्नताएँ होती हैं?
उत्तर: सामान्य विकास वाले बच्चों में भी अनेक प्रकार की वैयक्तिक मानसिक भिन्नताएँ पाई जाती हैं। सभी बच्चों की मानसिक क्षमताएँ समान नहीं होतीं। प्रमुख भिन्नताएँ निम्नलिखित हैं-
- बुद्धि एवं तर्क करने की क्षमता।
- स्मृति एवं धारण शक्ति।
- ध्यान एवं एकाग्रता।
- कल्पना एवं सृजनात्मकता।
- रुचि एवं अभिरुचि।
- सीखने की गति एवं शैली।
- समस्या-समाधान और निर्णय क्षमता।
अतः सामान्य कक्षा में भी शिक्षक को वैयक्तिक भिन्नताओं को ध्यान में रखकर शिक्षण करना चाहिए।
प्रश्न 36. निर्देशन के कोई तीन सिद्धान्त बताइए।
उत्तर: निर्देशन के तीन प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं-
- वैयक्तिक भिन्नता का सिद्धान्त: प्रत्येक व्यक्ति की योग्यता, रुचि, आवश्यकता और परिस्थिति अलग होती है, इसलिए निर्देशन भी व्यक्ति की आवश्यकता के अनुरूप होना चाहिए।
- निरन्तरता का सिद्धान्त: निर्देशन किसी एक समस्या या अवस्था तक सीमित न होकर विकास के विभिन्न चरणों में निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया है।
- समग्र विकास का सिद्धान्त: निर्देशन में केवल शैक्षिक उपलब्धि नहीं, बल्कि व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक और व्यावसायिक विकास को भी ध्यान में रखा जाता है।
प्रश्न 37. पर्यवेक्षण क्यों आवश्यक है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विद्यालय एवं शिक्षण की गुणवत्ता सुधारने के लिए पर्यवेक्षण आवश्यक है। इसका उद्देश्य केवल त्रुटियाँ ढूँढना नहीं, बल्कि शिक्षक को सहयोग एवं व्यावसायिक सहायता देना है।
- शिक्षण-विधियों और अधिगम परिणामों में सुधार करना।
- शिक्षकों को आवश्यक सुझाव एवं मार्गदर्शन देना।
- पाठ्यक्रम एवं विद्यालयी योजनाओं के उचित क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना।
- शिक्षण-सामग्री और संसाधनों के प्रभावी प्रयोग में सहायता देना।
- विद्यार्थियों की प्रगति एवं विद्यालय की आवश्यकताओं का मूल्यांकन करना।
- शिक्षकों के व्यावसायिक विकास एवं समन्वय को बढ़ावा देना।
प्रश्न 38. परामर्श की आवश्यकता क्यों होती है? परामर्श के क्षेत्र बताइए।
उत्तर: व्यक्ति को अपनी समस्याओं, क्षमताओं और परिस्थितियों को समझकर उचित निर्णय लेने एवं स्वस्थ समायोजन करने में सहायता देने के लिए परामर्श आवश्यक होता है।
परामर्श की आवश्यकता-
- शैक्षिक कठिनाइयों और अध्ययन सम्बन्धी समस्याओं के समाधान के लिए।
- विषय, पाठ्यक्रम और व्यवसाय के उचित चयन के लिए।
- वैयक्तिक एवं संवेगात्मक समस्याओं को समझने के लिए।
- परिवार, विद्यालय और समाज से उचित समायोजन करने के लिए।
- आत्मविश्वास एवं स्वनिर्णय की क्षमता विकसित करने के लिए।
परामर्श के प्रमुख क्षेत्र-
- शैक्षिक परामर्श
- व्यावसायिक परामर्श
- वैयक्तिक एवं सामाजिक परामर्श
- स्वास्थ्य एवं मानसिक स्वास्थ्य परामर्श
- पारिवारिक परामर्श
प्रश्न 39. शारीरिक अक्षमता या विकलांगता की परिभाषित कीजिए।
उत्तर: ऐसी दीर्घकालिक शारीरिक स्थिति जिसमें शरीर के किसी अंग, चलने-फिरने, समन्वय अथवा अन्य शारीरिक क्रिया में कमी के कारण व्यक्ति को दैनिक कार्यों और सहभागिता में कठिनाई होती है, शारीरिक अक्षमता कहलाती है।
यह जन्मजात हो सकती है अथवा बीमारी, दुर्घटना, चोट या अन्य कारणों से बाद में उत्पन्न हो सकती है। शारीरिक अक्षमता का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति की बुद्धि या सीखने की क्षमता भी अनिवार्य रूप से प्रभावित होगी। उचित सहायक उपकरण, बाधारहित वातावरण और शिक्षण-अनुकूलन से बच्चा सामान्य विद्यालय में प्रभावी रूप से सीख सकता है।
प्रश्न 40. शैक्षिक समावेशन से आप क्या समझते हैं? उद्देश्यों की चर्चा कीजिए।
उत्तर: शैक्षिक समावेशन ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सभी बच्चों को उनकी शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक, भाषायी, सांस्कृतिक अथवा अन्य भिन्नताओं के बावजूद एक समान शिक्षा व्यवस्था में सीखने और भाग लेने का अवसर दिया जाता है। इसमें बच्चे को व्यवस्था के अनुरूप बनाने के बजाय विद्यालय एवं शिक्षण को बच्चे की आवश्यकता के अनुरूप बनाया जाता है।
शैक्षिक समावेशन के प्रमुख उद्देश्य-
- सभी बच्चों को समान एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसर प्रदान करना।
- दिव्यांगता अथवा अन्य भिन्नताओं के आधार पर अलगाव और भेदभाव को कम करना।
- प्रत्येक बच्चे की विशेष शैक्षिक आवश्यकता की समय पर पहचान करना।
- पाठ्यक्रम, शिक्षण-विधि और मूल्यांकन में आवश्यक अनुकूलन उपलब्ध कराना।
- विद्यालय को बाधारहित एवं सभी बच्चों के लिए सुलभ बनाना।
- बच्चों में आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता एवं सामाजिक सहभागिता विकसित करना।
- सामान्य एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के बीच सहयोग, समानता और सम्मान की भावना विकसित करना।
- सभी बच्चों को समाज और शिक्षा की मुख्यधारा में सक्रिय सहभागिता का अवसर देना।
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