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समावेशी शिक्षा Previous Year Paper 2020

UP DELED Semester 3 समावेशी शिक्षा Previous Year Question Paper 2020 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. संयुक्त राष्ट्र ने निःशक्त जन अधिकार की घोषणा कब की?

(a) 14 दिसम्बर 1974

(b) 11 दिसम्बर 1975

(c) 12 दिसम्बर 1974

(d) 9 दिसम्बर 1975

उत्तर: (d) : संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 9 दिसम्बर 1975 को प्रस्ताव 3447 (XXX) द्वारा निःशक्त व्यक्तियों के अधिकारों की घोषणा (Declaration on the Rights of Disabled Persons) को अंगीकृत किया था।

प्रश्न 2. दृष्टिबाधितों के लिये लिपि है-

(a) ब्रेल लिपि

(b) हिन्दी लिपि

(c) अंग्रेजी लिपि

(d) संस्कृत लिपि

उत्तर: (a) : ब्रेल लिपि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के पढ़ने और लिखने के लिए प्रयुक्त स्पर्श-आधारित लिपि है।

प्रश्न 3. विशेष आवश्यकता शिक्षा विश्व सम्मेलन सलामांका में किस वर्ष आयोजित किया गया?

(a) 1994

(b) 1993

(c) 1995

(d) 1992

उत्तर: (a) : विशेष आवश्यकता शिक्षा पर विश्व सम्मेलन 7 से 10 जून 1994 को सलामांका, स्पेन में आयोजित हुआ। इससे समावेशी शिक्षा को वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण प्रोत्साहन मिला।

प्रश्न 4. हकलाने के कारण हैं-

(a) वंशानुक्रम

(b) वातावरण

(c) उक्त दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) : दिए गए विकल्पों में उक्त दोनों अपेक्षित उत्तर है। हकलाने में आनुवंशिक एवं तंत्रिका-विकास सम्बन्धी कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जबकि वातावरण एवं बोलने की परिस्थितियाँ इसकी तीव्रता को प्रभावित कर सकती हैं।

प्रश्न 5. भारत सरकार द्वारा मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम कब लागू किया गया?

(a) 1986

(b) 1987

(c) 1989

(d) 1988

उत्तर: (b) : दिए गए विकल्पों के अनुसार सही उत्तर 1987 है, क्योंकि इसे मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 1987 (Mental Health Act, 1987) कहा जाता है और इसे 22 मई 1987 को अधिनियमित किया गया था।

नोट: यह अधिनियम वास्तविक रूप से 1 अप्रैल 1993 से प्रभावी हुआ था।

प्रश्न 6. टेलर-फ्रेम का उपयोग किया जाता है-

(a) दृष्टिबाधित

(b) श्रवणबाधित

(c) मानसिक मंदता

(d) विशिष्ट अधिगम अक्षमता

उत्तर: (a) : टेलर-फ्रेम दृष्टिबाधित बच्चों को गणितीय गणनाएँ सिखाने में उपयोग किया जाने वाला स्पर्श-आधारित सहायक उपकरण है।

प्रश्न 7. बालक सामाजीकरण की प्रक्रिया को सीखते हैं-

(a) विद्यालय से

(b) रुचियों से

(c) परिवार से

(d) उपर्युक्त सभी से

उत्तर: (d) : बालक का समाजीकरण परिवार, विद्यालय तथा उसकी विभिन्न सामाजिक गतिविधियों एवं अनुभवों से होता है। अतः दिए गए विकल्पों में उपर्युक्त सभी सही उत्तर है।

प्रश्न 8. परामर्श का मुख्य उद्देश्य है-

(a) आत्मज्ञान

(b) आत्म-स्वीकृति

(c) सामाजिक सामंजस्य

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : परामर्श का उद्देश्य व्यक्ति में आत्मज्ञान, आत्म-स्वीकृति तथा उचित सामाजिक समायोजन विकसित करने में सहायता देना है। अतः सही उत्तर उपर्युक्त सभी है।

प्रश्न 9. गैर-सरकारी संगठन जो अभावग्रस्त बालकों के लिये योजना बनाते हैं, इन्हें कहते हैं-

(a) SCERT

(b) NCERT

(c) ICET

(d) NGO

उत्तर: (d) : गैर-सरकारी संगठन को NGO (Non-Governmental Organization) कहा जाता है। अनेक NGO वंचित एवं विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शिक्षा और पुनर्वास सम्बन्धी कार्य करते हैं।

प्रश्न 10. मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र की उ.प्र. में कुल संख्या है-

(a) 10

(b) 12

(c) 14

(d) 15

उत्तर: (a) : इस प्रश्न के पाठ्यक्रमीय विवरण के अनुसार उत्तर प्रदेश में 10 मण्डलीय मनोविज्ञान केन्द्र बताए गए हैं। ये केन्द्र विद्यार्थियों को शैक्षिक, व्यावसायिक एवं वैयक्तिक निर्देशन और परामर्श सेवाएँ प्रदान करते हैं।

प्रश्न 11. निम्न में से किसे बुद्धि परीक्षण का जनक कहा जाता है-

(a) थार्नडाइक

(b) कोहलर

(c) टिचनर

(d) बिने

उत्तर: (d) : अल्फ्रेड बिने को बुद्धि परीक्षण का जनक माना जाता है। बिने और थियोडोर साइमन ने 1905 में प्रथम व्यावहारिक बुद्धि परीक्षण विकसित किया था।

प्रश्न 12. टर्मन के अनुसार सामान्य बालकों की बुद्धिलब्धि होती है-

(a) 140 से अधिक

(b) 120 से 140

(c) 110 से 120

(d) 90 से 110

उत्तर: (d) : टर्मन के पारम्परिक वर्गीकरण के अनुसार 90 से 110 IQ सामान्य या औसत बुद्धि की श्रेणी मानी जाती है।

प्रश्न 13. राष्ट्रीय न्यास अधिनियम कब पारित हुआ?

(a) 1999

(b) 1988

(c) 1998

(d) 2000

उत्तर: (a) : राष्ट्रीय न्यास अधिनियम, 1999 (National Trust Act, 1999) ऑटिज्म, प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात, बौद्धिक अक्षमता और बहु-दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के कल्याण से सम्बन्धित अधिनियम है।

प्रश्न 14. राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान कहाँ स्थित है?

(a) देहरादून

(b) सिकन्दराबाद

(c) मुम्बई

(d) नई दिल्ली

उत्तर: (a) : राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) देहरादून, उत्तराखण्ड में स्थित है।

प्रश्न 15. वाइट केन डे (White Cane Day) कब मनाया जाता है?

(a) 15 अक्टूबर

(b) 5 अक्टूबर

(c) 4 अक्टूबर

(d) 8 अक्टूबर

उत्तर: (a) : वाइट केन डे प्रत्येक वर्ष 15 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह दृष्टिबाधित व्यक्तियों की स्वतंत्रता, गतिशीलता और अधिकारों के प्रति जागरूकता से सम्बन्धित है।

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Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. श्रवण क्षीणता के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?

उत्तर: श्रवण क्षीणता को सामान्यतः हल्की, मध्यम, गंभीर तथा गहन/पूर्ण श्रवण हानि में वर्गीकृत किया जाता है।

प्रश्न 17. विशिष्ट अधिगम निःशक्तता के प्रकारों के नाम लिखिए।

उत्तर: प्रमुख प्रकार हैं—डिस्लेक्सिया, डिसग्राफिया, डिस्कैल्कुलिया तथा डिस्प्रैक्सिया

प्रश्न 18. पिछड़े बालकों की एक विशेषता बताइए।

उत्तर: शैक्षिक रूप से पिछड़े बालक की शैक्षिक उपलब्धि उसकी आयु या कक्षा के अपेक्षित स्तर से कम रहती है।

प्रश्न 19. समस्यात्मक बालक किसे कहते हैं?

उत्तर: जिस बालक का व्यवहार लगातार उसके अधिगम, समायोजन या सामाजिक जीवन में गंभीर समस्या उत्पन्न करे, उसे समस्यात्मक बालक कहा जाता है।

प्रश्न 20. बुद्धिलब्धि ज्ञात करने का सूत्र लिखिए।

उत्तर: बुद्धिलब्धि (IQ) = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100

प्रश्न 21. प्रतिभाशाली बालकों की पहचान किस प्रकार करते हैं?

उत्तर: प्रतिभाशाली बालकों की पहचान बुद्धि एवं उपलब्धि परीक्षण, सृजनात्मकता, शिक्षक-अवलोकन तथा अन्य क्षमताओं के मूल्यांकन से की जाती है।

प्रश्न 22. बाल अपराध रोकने के दो उपाय लिखिए।

उत्तर: (1) परिवार एवं विद्यालय में उचित देखभाल और परामर्श देना। (2) बच्चे को सकारात्मक संगति, शिक्षा एवं रचनात्मक गतिविधियों के अवसर प्रदान करना।

प्रश्न 23. अन्वेषण विधि की खोज किसने की है?

उत्तर: अन्वेषण या ह्यूरिस्टिक विधि के जनक एच. ई. आर्मस्ट्रांग माने जाते हैं।

प्रश्न 24. कृत्रिम अंगों का निर्माण क्या कहलाता है?

उत्तर: कृत्रिम अंगों के निर्माण, फिटिंग एवं उपयोग से सम्बन्धित क्षेत्र को प्रोस्थेटिक्स (Prosthetics) कहा जाता है।

प्रश्न 25. शरीर के आधे भाग में अवरुद्ध गति-अक्षमता का नाम लिखिए।

उत्तर: शरीर के एक ओर के आधे भाग में पक्षाघात को हेमिप्लेजिया या अर्धांगघात कहा जाता है।

प्रश्न 26. समायोजन एवं परिष्करण में क्या अन्तर है?

उत्तर: समायोजन व्यक्ति का वातावरण से संतुलन स्थापित करना है, जबकि परिष्करण किसी व्यवहार या कार्य में सुधार एवं दोषों को दूर करने की प्रक्रिया है।

प्रश्न 27. शरीर के अंगों में असमन्वयित गति क्या कहलाती है?

उत्तर: शरीर की असमन्वित एवं अनियंत्रित गति को गतिविभ्रम या एटैक्सिया (Ataxia) कहा जाता है।

प्रश्न 28. सहायक उपकरणों के निर्माण की प्रक्रिया का क्या नाम है?

उत्तर: शरीर को सहारा देने वाले ब्रेस, स्प्लिंट आदि उपकरणों के निर्माण एवं फिटिंग से सम्बन्धित क्षेत्र को ऑर्थोटिक्स (Orthotics) कहा जाता है।

प्रश्न 29. निःशक्तता के प्रतिमानों के नामों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: निःशक्तता के प्रमुख प्रतिमान हैं—चिकित्सकीय प्रतिमान, सामाजिक प्रतिमान तथा अधिकार-आधारित प्रतिमान

प्रश्न 30. आप कक्षा-कक्ष में श्रवण निःशक्त बच्चों की पहचान कैसे करते हैं?

उत्तर: बार-बार बात दोहराने को कहना, आवाज पर प्रतिक्रिया न देना, एक कान आगे करना तथा मौखिक निर्देश समझने में कठिनाई श्रवण बाधिता के संभावित संकेत हैं।

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Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. समावेशी शिक्षा के विकास हेतु क्या कदम उठाये गए हैं?

उत्तर: भारत में समावेशी शिक्षा के विकास के लिए समय-समय पर नीतियों, योजनाओं और कानूनों के माध्यम से सभी बच्चों को समान शैक्षिक अवसर देने का प्रयास किया गया है। प्रमुख कदम निम्नलिखित हैं-

  • कोठारी आयोग (1964-66): दिव्यांग बच्चों को सामान्य शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने पर बल दिया।
  • समेकित दिव्यांग बाल शिक्षा योजना (IEDC), 1974: दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालयों में पढ़ाने के लिए सहायता प्रदान की गई।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 एवं कार्ययोजना 1992: जहाँ सम्भव हो, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य विद्यालयों में शिक्षा देने पर बल दिया गया।
  • दिव्यांग व्यक्ति अधिनियम, 1995: शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में दिव्यांग व्यक्तियों के अवसरों और अधिकारों को बढ़ाया गया।
  • राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा, 2005: बाल-केन्द्रित एवं समावेशी कक्षा-व्यवस्था को प्रोत्साहित किया गया।
  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009: 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए निःशुल्क एवं अनिवार्य प्रारम्भिक शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित किया गया।
  • दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016: समावेशी शिक्षा, उचित अनुकूलन तथा बाधारहित पहुँच पर स्पष्ट बल दिया गया।
  • समग्र शिक्षा, 2018: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए पहचान, सहायक उपकरण, संसाधन सहायता एवं शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था को विद्यालयी शिक्षा के साथ जोड़ा गया।
  • राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020: सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित समूहों तथा दिव्यांग बच्चों सहित सभी विद्यार्थियों की समान सहभागिता और पहुँच पर बल दिया गया।

प्रश्न 32. विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों में दृष्टि, श्रवण, चलन, वाणी, बौद्धिक या अधिगम सम्बन्धी कठिनाइयों वाले बच्चों के साथ-साथ प्रतिभाशाली एवं अन्य विशेष शैक्षिक आवश्यकता वाले बच्चे भी सम्मिलित हो सकते हैं। इनकी पहचान किसी एक लक्षण या परीक्षण के आधार पर नहीं करनी चाहिए।

पहचान के प्रमुख उपाय-

  • व्यवहार एवं कक्षा-अवलोकन: सीखने, संचार, सहभागिता और व्यवहार में लगातार दिखाई देने वाली कठिनाइयों का अध्ययन।
  • विकासात्मक एवं पारिवारिक इतिहास: जन्म, स्वास्थ्य, भाषा, गति तथा विकास के विभिन्न चरणों की जानकारी लेना।
  • शैक्षिक अभिलेख: उपलब्धि, कक्षा-कार्य और सीखने की प्रगति का विश्लेषण करना।
  • मानकीकृत परीक्षण: आवश्यकता के अनुसार बुद्धि, उपलब्धि, अधिगम, दृष्टि या श्रवण सम्बन्धी परीक्षण कराना।
  • अभिभावक एवं शिक्षक साक्षात्कार: विभिन्न परिस्थितियों में बच्चे के व्यवहार और कठिनाइयों की जानकारी प्राप्त करना।
  • विशेषज्ञ मूल्यांकन: आवश्यकता होने पर मनोवैज्ञानिक, विशेष शिक्षक, चिकित्सक, ऑडियोलॉजिस्ट या अन्य विशेषज्ञ से जाँच कराना।

प्रश्न 33. अस्थिबाधित बालकों की समस्याएँ बताइए।

उत्तर: अस्थिबाधित अथवा चलन सम्बन्धी अक्षमता वाले बच्चों को शरीर की गति या अंगों के उपयोग में कठिनाई हो सकती है। उनकी प्रमुख समस्याएँ निम्नलिखित हैं-

  • आवागमन की समस्या: सीढ़ियाँ चढ़ने, एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने या खेल-कूद में भाग लेने में कठिनाई।
  • बाधारहित सुविधाओं का अभाव: रैम्प, रेलिंग, सुगम शौचालय अथवा उपयुक्त फर्नीचर न होना।
  • कक्षा सम्बन्धी कठिनाइयाँ: बैठने, लिखने या लंबे समय तक एक स्थिति में रहने में परेशानी हो सकती है।
  • सहायक उपकरणों की आवश्यकता: व्हीलचेयर, बैसाखी, ऑर्थोसिस या अन्य उपकरणों की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • सामाजिक एवं संवेगात्मक समस्या: उपेक्षा, नकारात्मक दृष्टिकोण या अत्यधिक दया के कारण आत्मविश्वास एवं सामाजिक सहभागिता प्रभावित हो सकती है।

इन बच्चों के लिए विद्यालय को बाधारहित बनाना तथा उनकी आवश्यकता के अनुसार उचित शिक्षण-अनुकूलन उपलब्ध कराना आवश्यक है।

प्रश्न 34. प्रतिभाशाली बालकों को परिभाषा द्वारा स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: प्रतिभाशाली बालक वह बालक है जो बौद्धिक क्षमता, सृजनात्मकता, नेतृत्व, कला, शैक्षिक उपलब्धि अथवा किसी अन्य क्षेत्र में अपनी आयु के सामान्य बच्चों की अपेक्षा उल्लेखनीय उच्च क्षमता प्रदर्शित करता है।

प्रतिभाशालिता को केवल उच्च IQ तक सीमित नहीं माना जाता। आधुनिक दृष्टिकोण में उच्च क्षमता के साथ सृजनात्मकता, कार्य-प्रतिबद्धता, विशिष्ट योग्यता और उपलब्धि को भी महत्व दिया जाता है। ऐसे बच्चों को सामान्य पाठ्यक्रम के अतिरिक्त समृद्ध एवं चुनौतीपूर्ण अधिगम अवसरों की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 35. बाल अपराध के प्रमुख कारण लिखिए।

उत्तर: बाल अपराध से आशय बच्चे या किशोर द्वारा किये जाने वाले कानून-विरोधी व्यवहार से है। इसके पीछे सामान्यतः किसी एक कारण के बजाय अनेक पारिवारिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक परिस्थितियाँ कार्य करती हैं। प्रमुख कारण हैं-

  • प्रतिकूल पारिवारिक वातावरण: अत्यधिक संघर्ष, हिंसा, उपेक्षा या उचित देखभाल का अभाव।
  • आर्थिक एवं सामाजिक कठिनाइयाँ: गरीबी, सामाजिक वंचना और शिक्षा के अवसरों की कमी।
  • अनुचित संगति: अपराधी या असामाजिक साथी-समूह के प्रभाव में आना।
  • विद्यालयी असफलता: लगातार असफलता, विद्यालय से अनुपस्थिति या विद्यालय छोड़ देना।
  • नशे एवं अन्य जोखिमपूर्ण व्यवहार का प्रभाव: मादक पदार्थों का प्रयोग अपराध की सम्भावना बढ़ा सकता है।
  • संवेगात्मक एवं व्यवहारगत कठिनाइयाँ: अनियंत्रित आक्रामकता, आवेगशीलता या गंभीर समायोजन समस्याएँ भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।

इन कारणों की समय पर पहचान, परामर्श, पारिवारिक सहयोग और सकारात्मक शैक्षिक वातावरण बाल अपराध की रोकथाम में सहायक होते हैं।

प्रश्न 36. परामर्शदाता के गुण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: परामर्श प्रक्रिया की सफलता काफी हद तक परामर्शदाता के ज्ञान, कौशल, व्यवहार एवं व्यावसायिक नैतिकता पर निर्भर करती है। एक अच्छे परामर्शदाता में निम्न गुण होने चाहिए-

  • सहानुभूति: परामर्शार्थी की भावनाओं और परिस्थितियों को उसकी दृष्टि से समझने की क्षमता।
  • सक्रिय श्रवण: बिना अनावश्यक बाधा के ध्यानपूर्वक बात सुनना।
  • स्वीकार्यता एवं निष्पक्षता: पूर्वाग्रह और भेदभाव से मुक्त व्यवहार करना।
  • गोपनीयता: परामर्शार्थी द्वारा दी गई निजी जानकारी को उचित सीमा तक गोपनीय रखना।
  • उचित प्रशिक्षण: परामर्श, मनोविज्ञान एवं आवश्यक परीक्षणों का पर्याप्त ज्ञान होना।
  • धैर्य एवं संवेदनशीलता: व्यक्ति को अपनी बात समझने एवं निर्णय लेने के लिए पर्याप्त समय देना।
  • संचार-कौशल: स्पष्ट, सहज और सम्मानपूर्ण ढंग से संवाद करना।

प्रश्न 37. मनोविज्ञान के प्रमुख कार्य बताइए।

उत्तर: शिक्षा के क्षेत्र में मनोविज्ञान बालक के व्यवहार, विकास एवं अधिगम को समझने में सहायता करता है। इसके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं-

  • बालक की प्रकृति को समझना: उसकी शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक विशेषताओं का अध्ययन करना।
  • वैयक्तिक भिन्नताओं की पहचान: विद्यार्थियों की बुद्धि, रुचि, अभिरुचि, क्षमता एवं सीखने की गति में भिन्नताओं को समझना।
  • शिक्षण-विधियों का चयन: बालक की आवश्यकता और अधिगम-स्तर के अनुरूप शिक्षण-विधि चुनने में सहायता करना।
  • विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान: सीखने या विकास सम्बन्धी विशेष आवश्यकताओं का पता लगाने में सहायता देना।
  • प्रेरणा एवं अधिगम: बालकों को सीखने के लिए प्रेरित करने और प्रभावी अधिगम परिस्थितियाँ तैयार करने में सहायता करना।
  • मूल्यांकन एवं निर्देशन: बालक की उपलब्धि, कठिनाई तथा समायोजन का मूल्यांकन करके उचित निर्देशन प्रदान करना।

प्रश्न 38. भारतीय पुनर्वास परिषद् के कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: भारतीय पुनर्वास परिषद् (RCI) पुनर्वास एवं विशेष शिक्षा से सम्बन्धित पेशेवरों के प्रशिक्षण तथा मानकों को विनियमित करने वाला वैधानिक निकाय है। इसके प्रमुख कार्य हैं-

  • पुनर्वास एवं विशेष शिक्षा के क्षेत्र में प्रशिक्षण नीतियों और कार्यक्रमों का विनियमन करना।
  • विभिन्न पुनर्वास पाठ्यक्रमों के न्यूनतम मानक निर्धारित और मानकीकृत करना।
  • मान्य पुनर्वास पाठ्यक्रम चलाने वाली संस्थाओं, विश्वविद्यालयों एवं संगठनों को मान्यता प्रदान करना
  • योग्य पुनर्वास पेशेवरों एवं कर्मियों का केन्द्रीय पुनर्वास रजिस्टर (CRR) बनाए रखना।
  • पुनर्वास एवं विशेष शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान और सतत व्यावसायिक शिक्षा को प्रोत्साहित करना।
  • पुनर्वास सेवाओं में निर्धारित व्यावसायिक मानकों के पालन की निगरानी करना।

प्रश्न 39. बौद्धिक निःशक्त बच्चों हेतु संसाधन कक्षा गतिविधियों को लिखिए।

उत्तर: बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों की संसाधन कक्षा में उनकी व्यक्तिगत क्षमता एवं आवश्यकता के अनुरूप सरल, व्यावहारिक और क्रमबद्ध गतिविधियाँ कराई जानी चाहिए।

  • व्यक्तिगत शिक्षण: बच्चे की वर्तमान क्षमता के अनुसार छोटे-छोटे अधिगम लक्ष्य निर्धारित करना।
  • कार्य-विश्लेषण: कठिन कार्य को छोटे और सरल चरणों में बाँटकर सिखाना।
  • बहु-संवेदी सामग्री: चित्र, वास्तविक वस्तुएँ, मॉडल, फ्लैश कार्ड एवं श्रव्य-दृश्य सामग्री का प्रयोग करना।
  • कार्यात्मक शैक्षिक कौशल: आवश्यक पढ़ना, लिखना, गिनती, पैसे और समय का प्रयोग सिखाना।
  • दैनिक जीवन कौशल: भोजन, वस्त्र, स्वच्छता और व्यक्तिगत देखभाल की आदतें विकसित करना।
  • सामाजिक एवं संचार कौशल: अभिवादन, संवाद, सहयोग और समूह गतिविधियों का अभ्यास कराना।
  • पुनरावृत्ति एवं पुनर्बलन: बार-बार अभ्यास कराकर प्रत्येक छोटी सफलता पर सकारात्मक प्रोत्साहन देना।

प्रश्न 40. प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात वाले बच्चों हेतु थैरेपिक विधियाँ लिखिए।

उत्तर: प्रमस्तिष्कीय पक्षाघात (Cerebral Palsy) में उपचार का उद्देश्य बच्चे की गति, मुद्रा, संचार, दैनिक जीवन कौशल और स्वतंत्रता में अधिकतम सुधार करना होता है। इसके लिए बहुविषयक उपचार उपयोगी होता है-

  • फिजियोथेरेपी: मांसपेशियों की जकड़न कम करने, संतुलन, मुद्रा और गति में सुधार हेतु व्यायाम कराया जाता है।
  • ऑक्यूपेशनल थेरेपी: भोजन करना, कपड़े पहनना, लिखना और अन्य दैनिक जीवन कौशल विकसित किए जाते हैं।
  • स्पीच एवं लैंग्वेज थेरेपी: बोलने, भाषा, संचार तथा आवश्यकता होने पर निगलने की कठिनाइयों में सहायता दी जाती है।
  • स्थिति एवं गति प्रशिक्षण: उचित बैठने, खड़े होने, चलने और शरीर के संतुलन का अभ्यास कराया जाता है।
  • सहायक उपकरण: आवश्यकता के अनुसार ऑर्थोसिस, वॉकर, व्हीलचेयर या अन्य सहायक उपकरण दिए जा सकते हैं।
  • विशेष एवं समावेशी शिक्षा: बच्चे की सीखने की क्षमता के अनुसार शैक्षिक अनुकूलन और आवश्यक सहायता प्रदान की जाती है।
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