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समावेशी शिक्षा Previous Year Paper 2019

UP DELED Semester 3 समावेशी शिक्षा Previous Year Question Paper 2019 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. कौन विशिष्ट बालक नहीं है?

(a) प्रतिभाशाली बालक

(b) मन्द बुद्धि बालक

(c) दृष्टिदोष युक्त बालक

(d) अल्पसंख्यक बालक

उत्तर: (d) : दिए गए विकल्पों में अल्पसंख्यक बालक केवल अल्पसंख्यक समुदाय से सम्बन्धित होने के कारण विशिष्ट बालक की श्रेणी में नहीं आता। प्रतिभाशाली, बौद्धिक अक्षमता वाले तथा दृष्टिबाधित बालकों की शैक्षिक आवश्यकताएँ सामान्य से भिन्न हो सकती हैं।

प्रश्न 2. प्रतिभाशाली बालकों की शिक्षा में क्या आवश्यक है?

(a) तीव्र गति से अध्ययन

(b) संपुष्ट कार्यक्रम

(c) व्यक्तिगत ध्यान

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : प्रतिभाशाली बालकों के लिए गतिवर्द्धन, समृद्ध या संपुष्ट कार्यक्रम तथा व्यक्तिगत ध्यान सभी उपयोगी हैं। अतः सही उत्तर उपर्युक्त सभी है।

प्रश्न 3. प्रारम्भिक अवस्था में मन्द बुद्धि बालकों की पहचान हो सकती है-

(a) अवलोकन से

(b) परीक्षण से

(c) साक्षात्कार से

(d) प्रक्षेपी प्रविधि से

उत्तर: (a) : प्रारम्भिक अवस्था में बच्चे के विकास, व्यवहार, भाषा, सीखने की गति और दैनिक कार्यों का अवलोकन करके कठिनाइयों के प्रारम्भिक संकेत पहचाने जा सकते हैं। बाद में आवश्यकता के अनुसार मानकीकृत परीक्षणों एवं विशेषज्ञ मूल्यांकन का प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 4. निर्देशन की आवश्यकता होती है-

(a) अपंग व्यक्तियों को

(b) विशेष व्यक्तियों को

(c) सामान्य व्यक्तियों को

(d) सभी व्यक्तियों को

उत्तर: (d) : निर्देशन की आवश्यकता सभी व्यक्तियों को हो सकती है। यह व्यक्ति को अपनी क्षमताएँ समझने, उचित निर्णय लेने तथा शैक्षिक, व्यावसायिक और वैयक्तिक समायोजन में सहायता देता है।

प्रश्न 5. दृष्टि-दोष की पहचान है-

(a) आँखों को बार-बार झपकाना

(b) पढ़ते समय आँखों में दर्द

(c) पुस्तक को आँखों के निकट रखना

(d) उपर्युक्त सभी परेशानियाँ

उत्तर: (d) : आँखों को बार-बार झपकाना, पढ़ते समय आँखों में दर्द या थकान तथा पुस्तक को बहुत निकट रखकर पढ़ना दृष्टि सम्बन्धी कठिनाई के संभावित संकेत हो सकते हैं।

प्रश्न 6. विशिष्टता का सम्प्रत्यय होता है-

(a) केवल गुणात्मक

(b) केवल मात्रात्मक

(c) गुणात्मक व मात्रात्मक दोनों

(d) कुछ कहा नहीं जा सकता।

उत्तर: (c) : विशिष्टता का सम्प्रत्यय गुणात्मक तथा मात्रात्मक दोनों प्रकार की भिन्नताओं से सम्बन्धित हो सकता है।

प्रश्न 7. कौन शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट बालकों का वर्ग नहीं है?

(a) बौद्धिक दृष्टि से विशिष्ट बालक

(b) शारीरिक दृष्टि से विशिष्ट बालक

(c) जातिगत दृष्टि से विशिष्ट बालक

(d) शैक्षिक दृष्टि से विशिष्ट बालक

उत्तर: (c) : जातिगत दृष्टि से विशिष्ट बालक शिक्षा के क्षेत्र में विशिष्ट बालकों का मान्य वर्गीकरण नहीं है।

प्रश्न 8. ब्रेल विधि सम्बन्धित है-

(a) श्रवण दोष

(b) मानसिक दोष

(c) अपंगहीनता

(d) दृष्टि-दोष

उत्तर: (d) : ब्रेल दृष्टिबाधित व्यक्तियों के पढ़ने और लिखने के लिए प्रयुक्त स्पर्श-आधारित लिपि है।

प्रश्न 9. भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम कब पारित हुआ था?

(a) 1991

(b) 1992

(c) 1993

(d) 1995

उत्तर: (b) : भारतीय पुनर्वास परिषद् अधिनियम, 1992 संसद द्वारा पारित किया गया। इसके अंतर्गत Rehabilitation Council of India (RCI) 22 जून 1993 से वैधानिक निकाय बना।

प्रश्न 10. विशिष्ट बालकों की शिक्षा के लिए चलाये जाते हैं-

(a) विशिष्ट कार्यक्रम

(b) संवर्धन कार्यक्रम

(c) उपचारी कार्यक्रम

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : विभिन्न प्रकार के विशिष्ट बालकों की आवश्यकताओं के अनुसार विशिष्ट कार्यक्रम, संवर्धन कार्यक्रम तथा उपचारात्मक कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं। अतः सही उत्तर उपर्युक्त सभी है।

प्रश्न 11. श्रवण बाधित बालकों में प्रायः सुनने की क्षमता होती है-

(a) 30-50 डेसिबल

(b) 50-60 डेसिबल

(c) 60 डेसिबल या अधिक

(d) 50 डेसिबल या अधिक

उत्तर: (a) : इस प्रश्न के पाठ्यक्रमीय वर्गीकरण के अनुसार 30-50 डेसिबल अपेक्षित उत्तर है। श्रवण-हानि के आधुनिक चिकित्सकीय वर्गीकरण में विभिन्न श्रेणियों के लिए अलग मानक सीमाएँ प्रयुक्त की जा सकती हैं।

प्रश्न 12. विशिष्ट शिक्षा के अन्तर्गत कौन आता है?

(a) विकलांगता

(b) रोगग्रस्तता

(c) अक्षमता

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : पाठ्यक्रम के अनुसार विशेष शैक्षिक आवश्यकता विकलांगता, दीर्घकालिक रोग या अन्य प्रकार की अक्षमता से उत्पन्न हो सकती है। अतः सही उत्तर उपर्युक्त सभी है।

प्रश्न 13. सही दृष्टि कहलाती है-

(a) 6/6

(b) 6/9

(c) 6/12

(d) 6/18

उत्तर: (a) : स्नेलन दृष्टि-परीक्षण में 6/6 दृष्टि को सामान्य दृष्टि-तीक्ष्णता माना जाता है।

प्रश्न 14. शैक्षिक समावेशन से तात्पर्य है-

(a) पिछड़े बच्चों को शिक्षा प्रदान करना

(b) विकलांग बच्चों को शिक्षा से जोड़ना

(c) सभी बच्चों को शिक्षा प्रक्रिया से जोड़ना

(d) बच्चों में शैक्षिक समझ बढ़ाना

उत्तर: (c) : शैक्षिक समावेशन का अर्थ सभी बच्चों को उनकी विविध आवश्यकताओं एवं क्षमताओं सहित समान शिक्षा व्यवस्था में सीखने और सहभागिता का अवसर देना है।

प्रश्न 15. भाटिया बैटरी में कुल कितने उपपरीक्षण हैं?

(a) 2

(b) 3

(c) 5

(d) 7

उत्तर: (c) : भाटिया बैटरी में कुल पाँच उपपरीक्षण हैं—कोह ब्लॉक डिजाइन परीक्षण, एलेक्जेंडर पास-अलॉन्ग परीक्षण, पैटर्न ड्राइंग परीक्षण, तात्कालिक स्मृति परीक्षण तथा चित्र निर्माण परीक्षण।

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Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. शैक्षिक उपलब्धि का सूत्र बताइए।

उत्तर: शैक्षिक लब्धि (EQ) = (शैक्षिक आयु / वास्तविक आयु) × 100

प्रश्न 17. मन्द बुद्धि बालकों की बुद्धिलब्धि कितनी होती है?

उत्तर: पारम्परिक शैक्षिक वर्गीकरण में सामान्यतः 70 से कम IQ को बौद्धिक अक्षमता से जोड़ा गया है; आधुनिक पहचान में अनुकूली व्यवहार का मूल्यांकन भी आवश्यक है।

प्रश्न 18. सृजनात्मकता के प्रमुख तत्व बताइए।

उत्तर: सृजनात्मकता के प्रमुख तत्व हैं—प्रवाह, लचीलापन, मौलिकता तथा विस्तार

प्रश्न 19. परामर्श प्रक्रिया के प्रमुख अंग बताइए।

उत्तर: प्रमुख चरण हैं—सम्बन्ध स्थापना, समस्या की पहचान, लक्ष्य निर्धारण, सहायता/हस्तक्षेप, मूल्यांकन तथा समापन एवं अनुवर्ती कार्य

प्रश्न 20. निर्देशन के दो उद्देश्य बताइए।

उत्तर: (1) व्यक्ति को अपनी योग्यता, रुचि और क्षमता समझने में सहायता देना। (2) उचित निर्णय एवं समायोजन की क्षमता विकसित करना।

प्रश्न 21. निर्देशन के दो उदाहरण बताइए।

उत्तर: (1) विद्यार्थी को उपयुक्त विषय चुनने में सहायता देना। (2) उसकी रुचि एवं योग्यता के अनुसार व्यवसाय चयन में मार्गदर्शन देना।

प्रश्न 22. An Enriched Curriculum for Rapid Learners पुस्तक के लेखक कौन हैं?

उत्तर: लेटा स्टेटर हॉलिंगवर्थ (Leta Stetter Hollingworth) इससे सम्बन्धित प्रसिद्ध लेखिका एवं शोधकर्ता थीं।

प्रश्न 23. प्रतिभाशाली बालक की एक परिभाषा बताइए।

उत्तर: रेनजुली के अनुसार प्रतिभाशालिता में औसत से उच्च क्षमता, सृजनात्मकता तथा कार्य-प्रतिबद्धता का समन्वय पाया जाता है।

प्रश्न 24. पिछड़े बालकों की दो विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: (1) सीखने की गति अपेक्षाकृत धीमी होती है। (2) उनकी शैक्षिक उपलब्धि अपेक्षित कक्षा-स्तर से कम रह सकती है।

प्रश्न 25. मन्द बुद्धि बालकों के शिक्षक के दो गुण बताइए।

उत्तर: ऐसे शिक्षक में धैर्य एवं सहानुभूति तथा बच्चे को बार-बार सकारात्मक प्रोत्साहन देने की क्षमता होनी चाहिए।

प्रश्न 26. दो बुद्धि परीक्षणों के नाम बताइए।

उत्तर: दो प्रमुख बुद्धि परीक्षण हैं—स्टैनफोर्ड-बिने बुद्धि परीक्षण तथा रेवेन प्रोग्रेसिव मैट्रिसेज

प्रश्न 27. परामर्शदाता के चार गुण बताइए।

उत्तर: अच्छे परामर्शदाता में सक्रिय श्रवण, सहानुभूति, निष्पक्षता तथा गोपनीयता बनाए रखने के गुण होने चाहिए।

प्रश्न 28. Educational and Vocational Guidance का लेखक बताइए।

उत्तर: एस. के. कोछर (S. K. Kochhar) Educational and Vocational Guidance से सम्बन्धित प्रसिद्ध लेखक हैं।

प्रश्न 29. रेविन्स प्रोग्रेसिव मैट्रिक्स क्या है?

उत्तर: रेवेन प्रोग्रेसिव मैट्रिसेज एक गैर-मौखिक बुद्धि परीक्षण है, जो मुख्यतः अमूर्त तर्क एवं पैटर्न पहचानने की क्षमता का मापन करता है।

प्रश्न 30. बिने ने साइमन के सहयोग से सर्वप्रथम कब बुद्धि परीक्षण तैयार किया?

उत्तर: अल्फ्रेड बिने और थियोडोर साइमन ने अपना पहला बुद्धि परीक्षण 1905 ई. में तैयार किया था।

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Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. पिछड़े बालकों की शिक्षा व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: शैक्षिक रूप से पिछड़े बालक वे हैं जिनकी उपलब्धि अपेक्षित कक्षा-स्तर से लगातार कम रहती है। इनके पिछड़ेपन के कारणों की पहचान करके उनकी आवश्यकता के अनुरूप शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए।

  • नैदानिक मूल्यांकन: बच्चे की वास्तविक कठिनाइयों और कमजोर अधिगम क्षेत्रों की पहचान की जाए।
  • व्यक्तिगत ध्यान: उसकी सीखने की गति और आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त सहायता दी जाए।
  • उपचारात्मक शिक्षण: कमजोर अवधारणाओं को सरल एवं क्रमबद्ध ढंग से पुनः सिखाया जाए।
  • बहु-संवेदी शिक्षण: चित्र, मॉडल, खेल, गतिविधि एवं श्रव्य-दृश्य सामग्री का प्रयोग किया जाए।
  • पुनरावृत्ति और अभ्यास: पर्याप्त अभ्यास, पुनर्बलन और छोटी सफलताओं पर प्रोत्साहन दिया जाए।
  • अभिभावक सहयोग: विद्यालय एवं परिवार मिलकर बच्चे की प्रगति के लिए कार्य करें।

प्रश्न 32. समस्यात्मक बालकों के प्रकार उदाहरण सहित बताइए।

उत्तर: जिन बच्चों का व्यवहार लगातार उनके अधिगम, सामाजिक समायोजन या दैनिक जीवन में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है, उन्हें परम्परागत शैक्षिक भाषा में समस्यात्मक बालक कहा जाता है। इनके कुछ प्रमुख रूप हैं-

  • आक्रामक व्यवहार वाले बालक: बार-बार लड़ाई करना, वस्तुओं को नुकसान पहुँचाना या दूसरों को धमकाना।
  • अवज्ञाकारी बालक: लगातार नियमों का उल्लंघन करना और उचित निर्देशों का विरोध करना।
  • अतिसक्रिय एवं असावधान बालक: अत्यधिक चंचलता, एकाग्रता में कठिनाई और आवेगपूर्ण व्यवहार।
  • संवेगात्मक रूप से पीछे हटने वाले बालक: अत्यधिक भय, चिंता, सामाजिक दूरी या लगातार उदासी दिखाना।
  • असामाजिक व्यवहार वाले बालक: बार-बार चोरी, झूठ या अन्य समाज-विरोधी व्यवहार करना।

केवल अन्तर्मुखी स्वभाव होना अपने-आप में समस्यात्मक व्यवहार नहीं माना जाना चाहिए।

प्रश्न 33. अपराधी बालकों की उपचार विधियों पर प्रकाश डालिए।

उत्तर: बाल अपराध से जुड़े बच्चों के सुधार का उद्देश्य दण्ड मात्र देना नहीं, बल्कि कारणों की पहचान करके उनका पुनर्वास एवं सामाजिक पुनर्समायोजन करना है। प्रमुख विधियाँ हैं-

  • मनोवैज्ञानिक एवं परामर्श विधि: बच्चे की संवेगात्मक एवं व्यवहारगत समस्याओं को समझकर परामर्श देना।
  • मनोविश्लेषणात्मक विधि: गंभीर आन्तरिक संघर्षों एवं भावनात्मक कारणों को समझने का प्रयास करना।
  • व्यवहार-संशोधन: सकारात्मक पुनर्बलन द्वारा उचित व्यवहार विकसित करना।
  • परिवीक्षण विधि: बच्चे को समाज में रखते हुए प्रशिक्षित अधिकारी की निगरानी और मार्गदर्शन देना।
  • क्रिया एवं मनोरंजन चिकित्सा: खेल, कला, कार्य-अनुभव और रचनात्मक गतिविधियों में भाग दिलाना।
  • परिवार एवं विद्यालय सहयोग: घर और विद्यालय में सुरक्षित, सहयोगात्मक एवं अनुशासित वातावरण प्रदान करना।

प्रश्न 34. निर्देशन तथा परामर्श में अन्तर बताइए।

उत्तर: निर्देशन और परामर्श दोनों सहायता-प्रक्रियाएँ हैं, किन्तु उनके स्वरूप एवं गहराई में अन्तर होता है।

आधार निर्देशन परामर्श
क्षेत्र व्यापक प्रक्रिया है। अपेक्षाकृत गहन एवं विशिष्ट प्रक्रिया है।
उद्देश्य उचित चयन, निर्णय एवं समायोजन में सहायता देता है। व्यक्ति को समस्या समझने और स्वयं समाधान तक पहुँचने में सहायता देता है।
स्वरूप विकासात्मक एवं निवारक दोनों हो सकता है। मुख्यतः वैयक्तिक एवं समस्या-केंद्रित होता है।
प्रयोग व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों रूप में दिया जा सकता है। प्रायः गहन व्यक्तिगत अन्तःक्रिया पर आधारित होता है; समूह परामर्श भी सम्भव है।
विशेषज्ञता शिक्षक एवं निर्देशन-कर्मी भी अनेक सेवाएँ दे सकते हैं। गंभीर मामलों में प्रशिक्षित परामर्शदाता की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 35. विकलांग बालकों की पुनर्वास योजना तैयार कीजिए।

उत्तर: दिव्यांगता या विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास का उद्देश्य उनकी क्षमता का अधिकतम विकास करके उन्हें शिक्षा, परिवार और समाज में अधिकतम स्वतंत्र एवं सक्रिय सहभागिता प्रदान करना है।

  1. प्रारम्भिक पहचान एवं मूल्यांकन: बच्चे की अक्षमता, क्षमता और सहायता की आवश्यकता का समय पर आकलन किया जाए।
  2. चिकित्सकीय एवं चिकित्सोपचार सहायता: आवश्यकता के अनुसार चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी या अन्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाएँ।
  3. समावेशी शिक्षा: सामान्य विद्यालय में उचित अनुकूलन एवं व्यक्तिगत शैक्षिक सहायता दी जाए।
  4. सहायक उपकरण: आवश्यकता के अनुसार व्हीलचेयर, श्रवण यंत्र, ब्रेल सामग्री या अन्य सहायक तकनीक उपलब्ध कराई जाए।
  5. बाधारहित वातावरण: विद्यालय और सार्वजनिक स्थानों को अधिक सुलभ बनाया जाए।
  6. व्यावसायिक प्रशिक्षण: आयु एवं क्षमता के अनुसार उपयोगी जीवन-कौशल और रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जाए।
  7. परिवार एवं सामाजिक सहयोग: अभिभावकों को प्रशिक्षण देकर सामाजिक समावेशन और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित किया जाए।

प्रश्न 36. वाक्-दोष के प्रकार बताइए।

उत्तर: वाणी के उच्चारण, प्रवाह, आवाज अथवा विकास में उत्पन्न कठिनाइयों को वाक्-दोष कहा जाता है। पाठ्यक्रम में इसके प्रमुख प्रकार निम्नलिखित बताए जाते हैं-

  • उच्चारण सम्बन्धी दोष: ध्वनियों का गलत उच्चारण करना, छोड़ना या बदलना।
  • हकलाना या प्रवाह-दोष: ध्वनि या शब्द को बार-बार दोहराना अथवा बोलते समय रुक जाना।
  • अंगीय वाणी-दोष: होंठ, तालु, जीभ या अन्य वाक्-अंगों की समस्या के कारण अस्पष्ट बोलना।
  • स्वर या आवाज सम्बन्धी दोष: आवाज का अत्यधिक भारी, कर्कश, ऊँचा या धीमा होना।
  • श्रवण-दोष से सम्बन्धित वाणी कठिनाई: ठीक से न सुन पाने के कारण उच्चारण एवं भाषा-विकास प्रभावित होना।
  • विलम्बित वाणी-विकास: आयु के अपेक्षित स्तर की तुलना में बोलना देर से प्रारम्भ होना।

प्रश्न 37. प्रतिभाशाली बालकों की विशेषताओं तथा शिक्षा-व्यवस्था को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: प्रतिभाशाली बालक किसी एक या अधिक क्षेत्रों में अपनी आयु के सामान्य बच्चों की तुलना में उच्च क्षमता प्रदर्शित करते हैं।

प्रमुख विशेषताएँ-

  • नई बातों को शीघ्र समझने एवं सीखने की क्षमता।
  • उच्च जिज्ञासा तथा बार-बार प्रश्न पूछने की प्रवृत्ति।
  • तर्क, समस्या-समाधान और सामान्यीकरण की अच्छी क्षमता।
  • अच्छी स्मृति एवं विस्तृत शब्दावली।
  • मौलिक एवं सृजनात्मक चिंतन।
  • रुचिकर विषयों पर अधिक समय तक एकाग्र रहने की क्षमता।

शिक्षा-व्यवस्था-

  • समृद्धिकरण: सामान्य पाठ्यक्रम के अतिरिक्त उन्नत एवं चुनौतीपूर्ण सामग्री दी जाए।
  • गतिवर्द्धन: आवश्यकता एवं परिपक्वता के अनुसार तेज गति से प्रगति का अवसर दिया जाए।
  • स्वतंत्र अध्ययन: परियोजना, शोध एवं समस्या-समाधान गतिविधियाँ दी जाएँ।
  • वैयक्तिक शिक्षण: रुचि एवं क्षमता के अनुसार सीखने के अवसर उपलब्ध कराए जाएँ।
  • सर्वांगीण विकास: बौद्धिक विकास के साथ सामाजिक एवं संवेगात्मक आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जाए।

प्रश्न 38. श्रवण क्षतियुक्त बालकों के प्रकार बताइए। इन बालकों की पहचान कैसे करेंगे?

उत्तर: श्रवण-हानि की तीव्रता को डेसीबल (dB) में व्यक्त किया जाता है। पाठ्यक्रम में श्रवणबाधिता को सामान्यतः निम्न श्रेणियों में समझाया गया है-

  • कम श्रवणबाधिता: लगभग 35-51 dB तक।
  • मन्द श्रवणबाधिता: लगभग 55-69 dB तक।
  • गंभीर श्रवणबाधिता: लगभग 70-89 dB तक।
  • पूर्ण या गहन श्रवणबाधिता: लगभग 90 dB या उससे अधिक।

पहचान के प्रमुख संकेत-

  • बार-बार बात दोहराने के लिए कहना।
  • आवाज की दिशा में उचित प्रतिक्रिया न देना।
  • बहुत ऊँची आवाज में बोलना या टीवी की आवाज तेज रखना।
  • बात सुनने के लिए एक कान वक्ता की ओर करना।
  • मौखिक निर्देश समझने में कठिनाई होना।
  • वाणी एवं भाषा-विकास में विलम्ब दिखाई देना।

अन्तिम पहचान के लिए बच्चे की ऑडियोमेट्रिक जाँच योग्य ऑडियोलॉजिस्ट से करानी चाहिए।

प्रश्न 39. मन्द बुद्धि बालकों के प्रकार बताइए। इन बालकों की पहचान कैसे करेंगे?

उत्तर: परम्परागत शैक्षिक एवं मनोवैज्ञानिक वर्गीकरण में बौद्धिक अक्षमता को IQ के आधार पर निम्न प्रकार से बताया गया है-

  • हल्की: लगभग 50-69 IQ।
  • मध्यम: लगभग 35-49 IQ।
  • गंभीर: लगभग 20-34 IQ।
  • गहन: लगभग 20 से कम IQ।

पहचान के संकेत-

  • बैठने, चलने या बोलने जैसे विकासात्मक चरणों में विलम्ब।
  • सीखने और नई अवधारणाएँ समझने में लगातार कठिनाई।
  • समस्या-समाधान और तर्क में आयु की अपेक्षा कठिनाई।
  • भाषा एवं संचार-कौशल का धीमा विकास।
  • स्व-देखभाल और सामाजिक अनुकूलन में अतिरिक्त सहायता की आवश्यकता।

नोट: आधुनिक मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण में बौद्धिक अक्षमता की पहचान केवल IQ से नहीं की जाती; बौद्धिक क्षमता के साथ अनुकूली व्यवहार का भी मूल्यांकन आवश्यक है।

प्रश्न 40. सृजनात्मक बालकों का अर्थ एवं विशेषताएँ बताइए।

उत्तर: जो बच्चे नवीन, मौलिक और उपयोगी विचार उत्पन्न करने तथा समस्याओं को परम्परागत तरीके से अलग दृष्टिकोण से हल करने की क्षमता रखते हैं, उन्हें सृजनात्मक बालक कहा जाता है।

प्रमुख विशेषताएँ-

  • मौलिकता: नए और सामान्य से भिन्न विचार प्रस्तुत करना।
  • विचार-प्रवाह: किसी समस्या के अनेक सम्भावित उत्तर या विचार प्रस्तुत करना।
  • लचीलापन: परिस्थिति के अनुसार सोचने का तरीका बदल सकना।
  • कल्पनाशीलता: नई परिस्थितियों एवं सम्भावनाओं की कल्पना करना।
  • जिज्ञासा: प्रश्न पूछना और नई बातों की खोज में रुचि रखना।
  • स्वतंत्र चिंतन: बिना अनावश्यक अनुकरण के स्वयं सोचने की प्रवृत्ति।
  • जोखिम लेने की प्रवृत्ति: नए विचारों और प्रयोगों को आजमाने का साहस रखना।
  • दृढ़ता: कठिनाई या असफलता के बाद भी समस्या पर कार्य करते रहना।
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