वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. बाल विकास के अन्तर्गत निम्नलिखित आयु वर्ग है-
(a) 0-18 वर्ष
(b) 20-30 वर्ष
(c) 25-35 वर्ष
(d) 35 से ऊपर
उत्तर: (a) 0-18 वर्ष।
व्याख्या : बाल विकास के अन्तर्गत सामान्यतः जन्म से लगभग 18 वर्ष तक होने वाले शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक और भाषा सम्बन्धी विकास का अध्ययन किया जाता है।
प्रश्न 2. बुद्धि का विकास लगभग पूर्ण हो जाता है-
(a) शैशवावस्था में
(b) बाल्यावस्था में
(c) किशोरावस्था में
(d) सभी अवस्थाओं में
उत्तर: (c) किशोरावस्था में।
व्याख्या : पारम्परिक शैक्षिक दृष्टि से किशोरावस्था में बुद्धि एवं अमूर्त चिन्तन की क्षमताएँ अपेक्षाकृत परिपक्व स्तर तक पहुँच जाती हैं।
प्रश्न 3. नवजात शिशु में हड्डियाँ होती हैं-
(a) 100
(b) 205
(c) 306
(d) 350
उत्तर: यह प्रश्न तथ्यात्मक रूप से त्रुटिपूर्ण है। नवजात शिशु में सामान्यतः लगभग 270 से 300 हड्डियाँ मानी जाती हैं, इसलिए दिए गए विकल्पों में कोई सटीक विकल्प नहीं है।
व्याख्या : जन्म के समय हड्डियों की संख्या वयस्कों से अधिक होती है। वृद्धि के दौरान अनेक अस्थियाँ आपस में जुड़ जाती हैं और वयस्क मानव में सामान्यतः 206 हड्डियाँ रह जाती हैं।
प्रश्न 4. सीखने को प्रभावित करने वाला सबसे महत्त्वपूर्ण कारक है-
(a) प्रेरणा
(b) ध्यान
(c) रुचि
(d) स्मृति
उत्तर: (a) प्रेरणा।
व्याख्या : अभिप्रेरणा बालक को सीखने के लिए सक्रिय करती है और उसके व्यवहार को लक्ष्य की ओर निर्देशित करती है। अभिप्रेरित विद्यार्थी अधिगम में अधिक सक्रियता और रुचि से भाग लेता है।
प्रश्न 5. सीखने की सही परिभाषा है-
(a) आदेशों का पालन करना
(b) रटना
(c) अनुभव और प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में परिवर्तन
(d) दूसरों के साथ काम करना
उत्तर: (c) अनुभव और प्रशिक्षण द्वारा व्यवहार में परिवर्तन।
व्याख्या : अनुभव, अभ्यास और प्रशिक्षण के फलस्वरूप व्यवहार या व्यवहार-क्षमता में होने वाले अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन को अधिगम कहते हैं।
प्रश्न 6. ‘प्रयत्न एवं भूल सिद्धान्त’ का प्रतिपादन किया-
(a) कोहलर ने
(b) योकम ने
(c) थार्नडाइक ने
(d) हल ने
उत्तर: (c) थार्नडाइक ने।
व्याख्या : ई. एल. थार्नडाइक ने बिल्ली पर प्रयोग करके प्रयत्न एवं भूल द्वारा अधिगम को स्पष्ट किया।
प्रश्न 7. बालक के नैतिक विकास का तात्पर्य है उसके-
(a) सामाजिक विकास
(b) शारीरिक विकास
(c) धार्मिक विकास
(d) चारित्रिक विकास
उत्तर: (d) चारित्रिक विकास।
व्याख्या : नैतिक विकास का सम्बन्ध उचित-अनुचित, सही-गलत, मूल्यों, उत्तरदायित्व तथा चरित्र के विकास से होता है।
प्रश्न 8. निम्न में कौन-सा प्रकार मनोवैज्ञानिक है?
(a) बहिर्मुखी
(b) सैद्धान्तिक
(c) भक्तिहीन
(d) राजनैतिक
उत्तर: (a) बहिर्मुखी।
व्याख्या : बहिर्मुखी व्यक्तित्व का एक मनोवैज्ञानिक प्रकार है। कार्ल युंग ने व्यक्तित्व के अन्तर्मुखी और बहिर्मुखी अभिविन्यासों पर विशेष बल दिया।
प्रश्न 9. आत्मकेन्द्रित व्यक्ति का व्यक्तित्व होता है-
(a) अन्तर्मुखी
(b) बहिर्मुखी
(c) उभयमुखी
(d) सभी
उत्तर: (a) अन्तर्मुखी।
व्याख्या : इस प्रश्न में आत्मकेन्द्रित से आशय अपने आन्तरिक विचारों और अनुभवों की ओर अधिक उन्मुख होने से है। ऐसे व्यक्तित्व को अन्तर्मुखी कहा गया है।
प्रश्न 10. चिन्तन के साधनों में एक है-
(a) संकेत
(b) रटना
(c) गुणों का विश्लेषण
(d) सामान्यीकरण
उत्तर: (a) संकेत।
व्याख्या : चिन्तन के प्रमुख साधनों में प्रतिमा, भाषा, सम्प्रत्यय तथा प्रतीक एवं संकेत सम्मिलित हैं। सामान्यीकरण चिन्तन की एक प्रक्रिया हो सकती है, साधन नहीं।
प्रश्न 11. बालक में अभिप्रेरणा उत्पन्न करने का प्रमुख स्रोत है-
(a) उद्दीपक
(b) रुचि
(c) आवश्यकता
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या : उद्दीपक, रुचि और आवश्यकता सभी बालक के व्यवहार को सक्रिय कर सकते हैं तथा उसमें अभिप्रेरणा उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।
प्रश्न 12. "स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है।" यह कथन किसका है?
(a) स्टाउट
(b) जैक्स
(c) रायबर्न
(d) रॉस
उत्तर: (a) स्टाउट।
व्याख्या : “स्मृति एक आदर्श पुनरावृत्ति है।” यह कथन स्टाउट का है।
प्रश्न 13. सृजनात्मक बालक की विशेषता है कि वह-
(a) संवेदनशील होता है
(b) परिहासप्रिय होता है
(c) जिज्ञासु होता है
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) उपर्युक्त सभी।
व्याख्या : सृजनात्मक बालकों में सामान्यतः जिज्ञासा, संवेदनशीलता, मौलिकता, कल्पनाशीलता तथा परिहासप्रियता जैसी विशेषताएँ पाई जा सकती हैं।
प्रश्न 14. संवेग का प्रकार नहीं है-
(a) क्रोध
(b) भय
(c) ध्यान
(d) उपलब्धि प्रेरक
उत्तर: यह प्रश्न तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण है। (c) ध्यान और (d) उपलब्धि प्रेरक दोनों संवेग नहीं हैं।
व्याख्या : क्रोध और भय संवेग हैं। ध्यान चेतना को किसी वस्तु या विचार पर केन्द्रित करने की मानसिक प्रक्रिया है, जबकि उपलब्धि प्रेरक एक अभिप्रेरक है।
प्रश्न 15. फ्रायड के अनुसार आक्रामकता का कारण है-
(a) उच्च अधिगम
(b) उद्दोलन
(c) जिज्ञासा
(d) उपलब्धि प्रेरक
उत्तर: (b) उद्दोलन।
व्याख्या : फ्रायड ने आक्रामकता को मूल प्रवृत्तिजन्य प्रेरणा से जोड़ा। उनके बाद के विचारों में आक्रामकता का सम्बन्ध मृत्यु-प्रवृत्ति (Thanatos) से माना गया। यहाँ उद्दोलन को निराशा का पर्याय मानना उचित नहीं है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षक को बाल विकास का ज्ञान क्यों आवश्यक है? दो कारण बताइए।
उत्तर: बाल विकास का ज्ञान शिक्षक को बालक के विकास-स्तर को समझने तथा उसकी आयु, रुचि और क्षमता के अनुरूप उपयुक्त शिक्षण-विधि अपनाने में सहायता करता है।
प्रश्न 17. शैशवावस्था की प्रमुख दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: शैशवावस्था में शारीरिक विकास अत्यन्त तीव्र होता है तथा शिशु शारीरिक एवं मानसिक रूप से अपेक्षाकृत अपरिपक्व और आश्रित होता है।
प्रश्न 18. किशोरावस्था का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: बाल्यावस्था और प्रौढ़ावस्था के मध्य की संक्रमणकालीन अवस्था को किशोरावस्था कहते हैं। इसे सामान्यतः लगभग 12 से 18 वर्ष तक माना जाता है।
प्रश्न 19. समायोजन क्या है?
उत्तर: व्यक्ति द्वारा अपनी आवश्यकताओं और वातावरण की परिस्थितियों के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए व्यवहार में उचित परिवर्तन करने की प्रक्रिया समायोजन कहलाती है।
प्रश्न 20. तर्क का क्या तात्पर्य है?
उत्तर: किसी उद्देश्य या समस्या के समाधान के लिए तथ्यों एवं अनुभवों को क्रमबद्ध करके उचित निष्कर्ष तक पहुँचने की मानसिक प्रक्रिया को तर्क कहते हैं।
प्रश्न 21. सामाजिक विकास क्या है?
उत्तर: सामाजिक नियमों, सम्बन्धों और व्यवहारों को सीखकर समाज के साथ उचित समायोजन स्थापित करने की प्रक्रिया को सामाजिक विकास कहते हैं।
प्रश्न 22. व्यक्तित्व की कोई एक परिभाषा लिखिए।
उत्तर: व्यक्ति की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, संवेगात्मक एवं व्यवहारगत विशेषताओं के संगठित और विशिष्ट स्वरूप को व्यक्तित्व कहते हैं।
प्रश्न 23. आवाज में भारीपन किस अवस्था में आता है?
उत्तर: आवाज में भारीपन किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक एवं हार्मोन सम्बन्धी परिवर्तनों के कारण आता है।
प्रश्न 24. अधिगम का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अनुभव एवं अभ्यास के फलस्वरूप व्यवहार या व्यवहार-क्षमता में होने वाले अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन को अधिगम कहते हैं।
प्रश्न 25. रुचि के भेद बताइए।
उत्तर: रुचि मुख्यतः दो प्रकार की होती है—जन्मजात रुचि और अर्जित रुचि।
प्रश्न 26. बुद्धि परीक्षण कितने प्रकार के होते हैं?
उत्तर: क्रियाओं के आधार पर बुद्धि-परीक्षण मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—शाब्दिक और अशाब्दिक परीक्षण। प्रशासन के आधार पर इन्हें वैयक्तिक और सामूहिक भी बाँटा जाता है।
प्रश्न 27. कल्पना से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: पूर्व अनुभवों और प्रतिमाओं को नए रूप में संगठित करके प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित न होने वाली वस्तु या स्थिति की मानसिक रचना करना कल्पना कहलाता है।
प्रश्न 28. अमूर्त बुद्धि से क्या आप समझते हैं?
उत्तर: शब्दों, संख्याओं, प्रतीकों, अवधारणाओं और अमूर्त विचारों के आधार पर तर्क एवं समस्या-समाधान करने की क्षमता को अमूर्त बुद्धि कहते हैं।
प्रश्न 29. शारीरिक विकास का अध्ययन क्यों जरूरी है? दो कारण बताइए।
उत्तर: इससे विभिन्न आयु में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों का ज्ञान होता है तथा बालक के स्वास्थ्य, परिपक्वता और शिक्षण की आवश्यकताओं को समझने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 30. बाल्यावस्था की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: बाल्यावस्था में शारीरिक विकास अपेक्षाकृत स्थिर होता है तथा स्मृति, तर्क, ध्यान और अन्य मानसिक योग्यताओं में वृद्धि होती है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. अधिगम की विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: अधिगम व्यक्ति के व्यवहार, ज्ञान, कौशल और अनुभवों में परिवर्तन लाने वाली निरन्तर प्रक्रिया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं-
- अधिगम व्यवहार में परिवर्तन लाता है : सीखने के बाद व्यक्ति के ज्ञान, कौशल या व्यवहार में परिवर्तन दिखाई देता है।
- अधिगम अनुभव एवं अभ्यास पर आधारित है : अभ्यास, प्रशिक्षण और अनुभव से सीखना अधिक प्रभावी होता है।
- अधिगम अपेक्षाकृत स्थायी होता है : केवल क्षणिक परिवर्तन को अधिगम नहीं कहा जाता।
- अधिगम जीवनपर्यन्त चलता है : व्यक्ति जन्म से जीवन के अन्त तक सीखता रहता है।
- अधिगम उद्देश्यपूर्ण होता है : लक्ष्य और अभिप्रेरणा होने पर सीखना अधिक प्रभावी होता है।
- अधिगम समायोजन में सहायक है : व्यक्ति सीखकर नई परिस्थितियों के अनुरूप व्यवहार करना सीखता है।
प्रश्न 32. सीखने की प्रभावशाली विधियाँ कौन-कौन सी हैं?
उत्तर: सीखने को सक्रिय एवं प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक विधियों का प्रयोग किया जाता है। प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं-
- प्रश्नोत्तर विधि : शिक्षक क्रमबद्ध प्रश्नों द्वारा विद्यार्थियों को स्वयं सोचने और उत्तर तक पहुँचने के लिए प्रेरित करता है।
- करके सीखना : विद्यार्थी स्वयं कार्य, प्रयोग और गतिविधि करके प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त करता है।
- परियोजना विधि : विद्यार्थी किसी उद्देश्यपूर्ण समस्या या कार्य की योजना बनाकर उसे पूरा करता है। इस विधि को डब्ल्यू. एच. किलपैट्रिक ने व्यवस्थित रूप दिया।
- बुनियादी शिक्षा या वर्धा योजना : महात्मा गाँधी ने शिक्षा में उत्पादक कार्य एवं हस्तकौशल को महत्त्व देते हुए करके सीखने पर बल दिया।
इनके अतिरिक्त अनुकरण, निरीक्षण, प्रयोग, समूह-कार्य तथा खेल आधारित विधियाँ भी प्रभावी अधिगम में सहायक होती हैं।
प्रश्न 33. "किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तनाव, तूफान तथा विरोध की अवस्था है।" इस कथन की विवेचना कीजिए।
उत्तर: किशोरावस्था बाल्यावस्था और प्रौढ़ावस्था के बीच की संक्रमणकालीन अवस्था है। जी. स्टैनले हॉल ने इसे तूफान और तनाव की अवस्था कहा। इस समय अनेक शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक और सामाजिक परिवर्तन तीव्र गति से होते हैं।
किशोरावस्था की प्रमुख विशेषताएँ-
- शरीर में तीव्र वृद्धि तथा यौन परिपक्वता आती है।
- हार्मोन सम्बन्धी परिवर्तनों के कारण संवेगों में तीव्रता दिखाई दे सकती है।
- स्वतन्त्रता और अपनी अलग पहचान स्थापित करने की इच्छा बढ़ती है।
- आत्मसम्मान और आत्मचेतना का विकास होता है।
- मित्र-समूह और सामाजिक स्वीकृति का महत्त्व बढ़ जाता है।
- अमूर्त चिन्तन, तर्क और निर्णय की क्षमता विकसित होती है।
- भविष्य, व्यवसाय और जीवन-मूल्यों के विषय में सोच बढ़ती है।
उचित मार्गदर्शन, सहयोग और स्वस्थ वातावरण मिलने पर किशोर इन परिवर्तनों के साथ सफलतापूर्वक समायोजन कर सकता है।
प्रश्न 34. बाल विकास की आवश्यकता एवं महत्त्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: बाल विकास का अध्ययन शिक्षक और अभिभावक को बालक की आयु, आवश्यकताओं, क्षमताओं तथा व्यवहार को समझने में सहायता करता है। शिक्षा को बाल-केन्द्रित बनाने के लिए बाल विकास का ज्ञान आवश्यक है।
बाल विकास के अध्ययन का महत्त्व-
- विभिन्न विकासात्मक अवस्थाओं का ज्ञान प्राप्त होता है।
- बालक की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और संवेगात्मक आवश्यकताओं को समझने में सहायता मिलती है।
- वैयक्तिक भिन्नताओं का ज्ञान होता है।
- आयु और क्षमता के अनुरूप शिक्षण-विधि अपनाई जा सकती है।
- विकास सम्बन्धी कठिनाइयों की समय रहते पहचान की जा सकती है।
- बाल निर्देशन और परामर्श में सहायता मिलती है।
- उचित अनुशासन एवं स्वस्थ कक्षा-वातावरण बनाने में सहायता मिलती है।
- बालक के सर्वांगीण विकास के लिए उचित अवसर दिए जा सकते हैं।
प्रश्न 35. किशोरों की व्यवहार सम्बन्धी समस्याओं का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर: किशोरावस्था में तीव्र शारीरिक, मानसिक और सामाजिक परिवर्तनों के कारण कुछ किशोरों को व्यवहार एवं समायोजन सम्बन्धी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
प्रमुख समस्याएँ-
- माता-पिता या अन्य बड़ों से मतभेद एवं विवाद।
- संवेगों में तीव्र उतार-चढ़ाव।
- आत्मसम्मान और पहचान से सम्बन्धित उलझन।
- साथियों के दबाव का अधिक प्रभाव।
- अत्यधिक प्रतिस्पर्धा या असफलता से निराशा।
- पढ़ाई एवं भविष्य को लेकर तनाव।
- अत्यधिक जोखिमपूर्ण व्यवहार की प्रवृत्ति।
- परिवार और सामाजिक नियमों के प्रति विरोध की भावना।
इन समस्याओं के समाधान के लिए किशोरों को सहानुभूति, संवाद, उचित स्वतन्त्रता और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना चाहिए।
प्रश्न 36. चिन्तन का शिक्षा में क्या महत्त्व है?
उत्तर: चिन्तन शिक्षा एवं अधिगम की महत्त्वपूर्ण संज्ञानात्मक प्रक्रिया है। इसके माध्यम से विद्यार्थी ज्ञान को केवल याद नहीं करता, बल्कि उसका विश्लेषण, संगठन और प्रयोग भी करता है।
शिक्षा में चिन्तन का महत्त्व-
- समस्या-समाधान क्षमता का विकास करता है।
- तर्क एवं निर्णय-शक्ति को विकसित करता है।
- नई परिस्थितियों में ज्ञान का प्रयोग करने में सहायता करता है।
- सृजनात्मकता और नवीन विचारों को प्रोत्साहित करता है।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करता है।
- सही और गलत का विवेकपूर्ण निर्णय करने की क्षमता बढ़ाता है।
- स्वतन्त्र एवं आलोचनात्मक चिन्तन का विकास करता है।
अतः शिक्षक को प्रश्नोत्तर, समस्या-समाधान, चर्चा, प्रयोग और गतिविधियों द्वारा विद्यार्थियों को सोचने के अवसर देने चाहिए।
प्रश्न 37. मानसिक विकास के विभिन्न पक्षों के नाम लिखिए।
उत्तर: मानसिक विकास का सम्बन्ध विभिन्न संज्ञानात्मक एवं मानसिक शक्तियों के विकास से है। इसके प्रमुख पक्ष निम्नलिखित हैं-
- संवेदन
- प्रत्यक्षीकरण
- ध्यान एवं एकाग्रता
- स्मृति एवं विस्मरण
- कल्पना
- चिन्तन
- तर्क
- निर्णय
- निरीक्षण
- बुद्धि
- समस्या-समाधान
- अधिगम
आयु, परिपक्वता, अनुभव, शिक्षा और वातावरण के साथ इन मानसिक क्षमताओं का क्रमशः विकास होता है।
प्रश्न 38. बुद्धि से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: नवीन परिस्थितियों को समझने, ज्ञान अर्जित करने, तर्क करने, समस्याओं का समाधान करने और वातावरण के साथ प्रभावी समायोजन करने की मानसिक क्षमता को बुद्धि कहते हैं।
बुद्धि की प्रमुख विशेषताएँ-
- सीखने एवं अनुभव से लाभ उठाने की क्षमता।
- तर्क एवं समस्या-समाधान की क्षमता।
- अमूर्त विचारों को समझने की क्षमता।
- नई परिस्थितियों में उचित समायोजन की क्षमता।
- उपलब्ध ज्ञान का उचित प्रयोग करने की क्षमता।
टरमैन ने बुद्धि में अमूर्त चिन्तन की क्षमता पर विशेष बल दिया, जबकि अनेक अन्य मनोवैज्ञानिकों ने सीखने एवं समायोजन की क्षमता को बुद्धि का महत्त्वपूर्ण पक्ष माना है।
प्रश्न 39. व्यक्तित्व मापन की कौन-कौन सी विधियाँ हैं? किसी एक विधि का वर्णन कीजिए।
उत्तर: व्यक्तित्व को समझने और मापने के लिए विभिन्न मनोवैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है। प्रमुख विधियाँ हैं-
- आत्मनिष्ठ विधियाँ : आत्मकथा, जीवन-इतिहास, साक्षात्कार, प्रश्नावली आदि।
- वस्तुनिष्ठ विधियाँ : निरीक्षण, परिस्थिति परीक्षण, मापन-रेखा, समाजमिति आदि।
- प्रक्षेपी विधियाँ : रोर्शाक स्याही-धब्बा परीक्षण, टी.ए.टी., सी.ए.टी., शब्द-साहचर्य आदि।
प्रक्षेपी विधि- इसमें व्यक्ति के सामने अस्पष्ट उद्दीपक प्रस्तुत किए जाते हैं और उसकी स्वतन्त्र प्रतिक्रियाओं के आधार पर उसकी भावनाओं, आवश्यकताओं, संघर्षों तथा व्यक्तित्वगत विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है।
उदाहरण के लिए, रोर्शाक परीक्षण में स्याही के अस्पष्ट धब्बे दिखाए जाते हैं, जबकि टी.ए.टी. में अस्पष्ट चित्रों के आधार पर व्यक्ति से कहानी बनाने को कहा जाता है।
प्रश्न 40. वंशानुक्रम के नियमों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: माता-पिता एवं पूर्वजों से सन्तान में आनुवंशिक गुणों के हस्तान्तरण को वंशानुक्रम कहते हैं। शैक्षिक मनोविज्ञान में वंशानुक्रम के प्रमुख नियम निम्नलिखित बताए जाते हैं-
- 1. समानता का नियम : इस नियम के अनुसार सन्तान में अपने माता-पिता तथा अपनी जाति के अनेक समान गुण पाए जाते हैं। जैसे शारीरिक बनावट, रंग-रूप आदि में समानता दिखाई दे सकती है।
- 2. भिन्नता का नियम : एक ही माता-पिता की सभी सन्तानें बिल्कुल समान नहीं होतीं। जीनों के विभिन्न संयोजनों के कारण प्रत्येक सन्तान में कुछ न कुछ वैयक्तिक भिन्नता पाई जाती है।
- 3. प्रत्यागमन का नियम : अत्यन्त उच्च या निम्न आनुवंशिक गुणों में अगली पीढ़ी में सामान्य अथवा औसत स्तर की ओर लौटने की प्रवृत्ति को प्रत्यागमन कहते हैं। जैसे अत्यन्त प्रतिभाशाली माता-पिता की सन्तान आवश्यक नहीं कि समान स्तर की ही प्रतिभाशाली हो।
वंशानुक्रम बालक के विकास की सम्भावनाओं को प्रभावित करता है, परन्तु वास्तविक विकास में वातावरण, पोषण, शिक्षा और अनुभव की भी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
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