वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. बालक के मानसिक विकास के लिए शिक्षक को करना चाहिए-
(a) स्नेह और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार
(b) सद्भचरण प्रस्तुत करना
(c) उपयुक्त शिक्षण विधि का प्रयोग
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : शिक्षक को बालक के मानसिक विकास के लिए स्नेह और सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार, सद्धचरण प्रस्तुत करना और उपयुक्त शिक्षण विधि का प्रयोग करना।
प्रश्न 2. विकास को प्रभावित करने वाले कारक हैं-
(a) बुद्धि
(b) यौन
(c) अन्तः स्त्रावी ग्रन्थियाँ
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (a) : विकास को प्रभावित करने वाला कारक बुद्धि होती है।
प्रश्न 3. टोली की आयु कहते हैं-
(a) किशोरावस्था को
(b) बाल्यावस्था को
(c) शैशवावस्था को
(d) युवावस्था को।
उत्तर: (b) : टोली की आयु बाल्यावस्था को कहते हैं जिसमें बच्चा समूह/टोली बनाता है。
प्रश्न 4. शिक्षा में सृजनात्मकता का प्रयोग किस रूप में होता है ?
(a) सीखना
(b) तर्क
(c) चिन्तन
(d) कल्पना
उत्तर: (d) : शिक्षा में सृजनात्मकता का प्रयोग कल्पना के रूप में होता है। नवीन क्रियाओं एवं नवीन विचारों को उत्पन्न करने की शक्ति या नवीन खोज करने की शक्ति होती है। प्रचलित ढंग से चिन्तन करने, विचार करने तथा कार्य करने की अमूर्त योग्यता को ही सृजनात्मकता कहते हैं。
प्रश्न 5. बाल्यावस्था में शिक्षा का क्या स्वरूप होना चाहिए ?
(a) खेलकूद की छूट बिल्कुल नहीं दी जानी चाहिए
(b) खेलों एवं रचनात्मक कार्यों के माध्यम से शिक्षा दी जानी चाहिए
(c) गुरुकुल प्रणाली द्वारा शिक्षा दी जानी चाहिए
(d) पिटाई करने वाले अध्यापक द्वारा शिक्षा दी जानी चाहिए
उत्तर: (b) : बाल्यावस्था में खेलों एवं रचनात्मक कार्यों के माध्यम से शिक्षा दी जाती है ताकि बच्चों में रूचि बनी रहे。
प्रश्न 6. "मनुष्य को जो कुछ बनना होता है प्रारम्भ के चार पाँच वर्षों में ही बन जाता है।" कथन है-
(a) फ्रॉयड
(b) क्रो एण्ड क्रो
(c) हरलॉक
(d) थार्नडाइक।
उत्तर: (a) : फ्रॉयड के अनुसार "मनुष्य को जो कुछ बनना होता है। प्रारम्भ के चार पाँच वर्षों में बन जाता है。
प्रश्न 7. "जिस प्रकार शारीरिक विकास के लिए भोजन का महत्व है, उसी प्रकार सामाजिक विकास के लिए शिक्षा का।" कथन है-
(a) स्किनर
(b) ड्यूवी
(c) वुडवर्थ
(d) अरस्तू ।
उत्तर: (b) : "जिस प्रकार शारीरिक विकास के लिए भोजन का महत्व है, उसी प्रकार सामाजिक विकास के लिए शिक्षा का" ये ड्यूवी का कथन है。
प्रश्न 8. कल्पना के विकास के लिए शिक्षा में निम्न बातों पर ध्यान देना चाहिए-
(a) भाषा विकास पर ध्यान
(b) कहानी सुनना
(c) काल्पनिक खेलों एवं क्रियाओं के लिए अवसर
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : कल्पना के विकास के लिए शिक्षा में निम्न बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए जो इस प्रकार है-
- (i) भाषा विकास का ध्यान
- (ii) कहानी सुनना
- (iii) काल्पनिक खेलों एवं क्रियाओं के लिए अवसर
प्रश्न 9. थार्नडाइक ने दिया-
(a) प्रभाव का नियम
(b) अभ्यास का नियम
(c) तत्परता का नियम
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : थार्नडाइक ने अधिगम के तीन महत्वपूर्ण नियम का प्रतिपादन किया था, जो इस प्रकार हैं-
- (i) तत्परता का नियम
- (ii) अभ्यास का नियम
- (iii) प्रभाव का नियम
प्रश्न 10. प्रेरणा होती है-
(a) सकारात्मक
(b) नकारात्मक
(c) विकल्प 'अ' और 'ब' दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं।
उत्तर: (a) : प्रेरणा सकारात्मक होती है जो एक व्यक्ति तब महसूस करता है जब वह पुरस्कार की उम्मीद करता है。
प्रश्न 11. जीन पियाजे द्वारा बालक के संज्ञानात्मक विकास की अवस्थाओं में वर्णन किया गया है-
(a) 3
(b) 4
(c) 5
(d) 6
उत्तर: (b) : जीन पियाजे द्वारा बालक के संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाओं में वर्णन किया गया है।
- (i) संवेदीगामक अवस्था
- (ii) पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था
- (iii) मूर्त संक्रियात्मक अवस्था
- (iv) अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था
प्रश्न 12. अधिगम स्थानान्तरण के सिद्धान्त हैं-
(a) मानसिक शक्तियों का सिद्धान्त
(b) समान तत्वों का सिद्धान्त
(c) सामान्यीकरण का सिद्धान्त
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : अधिगम स्थानान्तरण के सिद्धान्त निम्न हैं-
- (i) मानसिक शक्तियों का सिद्धान्त
- (ii) समान तत्वों का सिद्धान्त
- (iii) सामान्यीकरण का सिद्धान्त
प्रश्न 13. वह प्रेरक जिन्हें व्यक्ति अपने प्रयासों से प्राप्त करता है, कहलाता है-
(a) अर्जित प्रेरक
(b) जागृत प्रेरक
(c) निर्देशित प्रेरक
(d) व्यवहार को परिचालित प्रेरक
उत्तर: (a) : अर्जित प्रेरक जिन्हें व्यक्ति अपने प्रयासों से प्राप्त करता है, अर्जित प्रेरक या सामाजिक प्रेरक कहकर पुकारा जाता है। अर्जित प्रेरक मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं।
- (i) व्यक्तिगत अर्जित प्रेरक
- (ii) सामाजिक अर्जित प्रेरक
प्रश्न 14. "स्मृति सीखी हुई वस्तु का सीधा उपयोग है।" यह कथन है-
(a) वुडवर्थ का
(b) मैक्डूगल का
(c) स्किनर का
(d) रॉस का।
उत्तर: (a) : "स्मृति सीखी हुई वस्तु का सीधा उपयोग है" यह कथन वुडवर्थ का है。
प्रश्न 15. आँकड़ों के प्रकार हैं-
(a) अवर्गीकृत
(b) वर्गीकृत
(c) अवर्गीकृत व वर्गीकृत
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) : आँकड़ों के दो प्रकार होते हैं।
- (i) अवर्गीकृत
- (ii) वर्गीकृत
वर्गीकृत जानकारी उचित स्तर की मंजूरी वाले लोगों तक ही सीमित है। इस श्रेणी के क्लीयरेंस या कंपार्टमेंटलाइजेशन के कई स्तर हैं। अवर्गीकृत जानकारी वह जानकारी है जो किसी भी प्रतिबंध से मुक्त होती है。
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. बालक के विकास में जो परिवर्तन होते हैं, उनका सम्बन्ध शरीर और मन दोनों से होता है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: बालक के विकास में जो परिवर्तन होता है, उनका सम्बंध शरीर और मन दोनों में होता है- बालक के विकास का प्रभाव न केवल उसके शरीर में होने वाले परिवर्तन पर पड़ता है, बल्कि उसके हारमोनों में भी परिवर्तन आता है। जिसका प्रभाव उसके मन पर भी पड़ता है। इससे न केवल वह शारीरिक रूप से परिवर्तित तथा विकसित होता है, बल्कि मानसिक रूप से भी परिवर्तित होता है。
प्रश्न 17. बाल विकास के सिद्धान्तों का शैक्षिक महत्व बताइए।
उत्तर: बाल विकास के सिद्धान्तों का शैक्षिक महत्व निम्न है-
- (i) निरन्तर विकास का सिद्धांत
- (ii) विकास की विभिन्न गति का सिद्धांत
- (iii) विकास-क्रम का सिद्धांत
- (iv) विकास-दिशा का सिद्धांत
- (v) एकीकरण का सिद्धांत
- (vi) परस्पर संबंध का सिद्धांत
- (vii) वैयक्तिक विभिन्नताओं का सिद्धांत
- (viii) समान प्रतिमान का सिद्धांत
- (ix) सामान्य व विशिष्ट प्रतिक्रियाओं का सिद्धांत
- (x) वंशानुक्रम व वातावरण की अन्तःक्रिया का सिद्धांत
प्रश्न 18. शैशवावस्था में शिक्षा का स्वरूप कैसा होना चाहिए?
उत्तर: शैशवावस्था में शिक्षा का स्वरूप निम्न प्रकार होना चाहिए-
- (i) सीखने के अवसर- बालकों में जिज्ञासा की प्रवृत्ति बहुत ही तीव्र मात्रा में पायी जाती है। वे अपने पर्यावरण में पायी जाने वाली वस्तुओं के प्रति शीघ्र ही जिज्ञासा व्यक्त करने लगते हैं।
- (ii) पाठ्यक्रम- शैशवावस्था में बालकों का पाठ्यक्रम पूर्णरूप से व्यावहारिक होना चाहिये, जिससे बालकों को आत्म निर्भर बनाया जा सके।
प्रश्न 19. बाल्यावस्था में मानसिक विकास की दो विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: बाल्यावस्था में मानसिक विकास की दो विशेषताएँ निम्न है-
- (i) बाल्यावस्था में बालक की ज्ञानेन्द्रियाँ प्रौढ़ होने लगती हैं।
- (ii) बाल्यावस्था में बालक संवेदना से प्रत्यक्ष ज्ञान की ओर बढ़ने लगता है।
प्रश्न 20. वैयक्तिक भिन्नता का अर्थ लिखिए।
उत्तर: वैयक्तिक भिन्नता मानव के विविध प्रकार के विकास का आधार होती है, व्यक्तिगत भिन्नता के अन्तर्गत रूपरंग, नाक-नक्शा, शरीर रचना, विशिष्ट योग्यतायें, बुद्धि, रूचि, स्वभाव, उपलब्धि आदि की भिन्नता से व्यक्ति के समग्र रूप की पहचान की जाती है。
प्रश्न 21. बालक के विकास में संचार माध्यम से दो लाभ लिखिए।
उत्तर: बालक के विकास में संचार माध्यम के दो लाभ निम्न है-
- (i) बालक के ज्ञान का विकास होता है।
- (ii) बालक का सामाजिक वातावरण बढ़ता है।
प्रश्न 22. चिन्तन क्या है?
उत्तर: चिन्तन एक मानसिक प्रक्रिया है और ज्ञानात्मक व्यवहार का जटिल रूप है। यह शिक्षण, स्मरण कल्पना आदि मानसिक क्षमताओं से जुड़ा रहता है。
प्रश्न 23. अधिगम से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: अधिगम एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी व्यक्ति के व्यवहार में परिवर्तन आता है। यह परिवर्तन अनुभव, अभ्यास या शिक्षा के माध्यम से हो सकता है। अधिगम का अर्थ होता है कुछ नया सीखना。
प्रश्न 24. बाल विकास में अधिगम की सम्मेलन व विचारगोष्ठी विधि बताइए।
उत्तर: बाल विकास में अधिगम की सम्मेलन व विचारगोष्ठी विधि महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से छात्र का अधिगम अच्छा हो सकता है। इस विधि में कुछ विद्वान मिलकर सम्मेलन या विचार-विमर्श द्वारा समस्या का समाधान ढूँढ़ते हैं。
प्रश्न 25. जब एक कुत्ते के सामने पहले घण्टी बजायी जाती है फिर उसके सामने भोजन का टुकड़ा दिया जाता है और कुत्ता लार स्त्राव करता है, यह प्रक्रिया कई बार होने के बाद प्रयोगकर्ता द्वारा घण्टी बजाने के (बिना भोजन दिये ही) कुत्ते द्वारा लार स्त्राव करना किसके और कौन-से सिद्धान्त के अन्तर्गत आता है?
उत्तर: आई. पी. पावलव का सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त या सम्बद्ध-सहज क्रिया सिद्धान्त के अन्तर्गत आता है。
प्रश्न 26. सीखने में पठार के दो प्रमुख कारण एवं उन्हें दूर करने के उपाय बताइए
उत्तर: सीखने में पठार के दो प्रमुख कारण निम्न है-
- (i) प्रेरणा का अभाव
- (ii) अभ्यास का अभाव
सीखने के पठार को दूर करने के उपाय-
- (i) शारीरिक एवं मानसिक थकान को दूर करने के उपाय करना।
- (ii) विभिन्न साधनों से अभिप्रेरणा देना।
- (iii) आदतों को सुधारने का प्रयास करना।
प्रश्न 28. प्रतिद्वन्द्विता (Competition) से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: व्यक्तियों, समूहों, राष्ट्रों या जानवरों के बीच भू-क्षेत्र, पद या संसाधनों के आबंटन आदि के लिए संघर्ष को प्रतियोगिता कहते हैं。
प्रश्न 29. बालक में विस्मृति कम करने के कोई दो उपाय बताइए।
उत्तर: बालक में विस्मृति कम करने के दो निम्न उपाय है-
- (i) पाठ की पुनरावृत्ति
- (ii) स्मरण के बाद विश्राम
प्रश्न 30. बुद्धि-लब्धि का सूत्र लिखिए।
उत्तर: बुद्धि-लब्धि का सूत्र टर्मन ने दिया था।
बुद्धि-लब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) * 100
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. बाल विकास में अधिगम को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर: बाल विकास में अधिगम को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का वर्णन निम्न है-
- (i) विषय सामग्री का प्रस्तुतीकरण
- (ii) बालकों का शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य
- (iii) सीखने की इच्छा
- (iv) पुनर्बलन
- (v) सीखने का उचित वातावरण
- (vi) अध्यापक की भूमिका
- (vii) अधिगम हेतु प्रयुक्त विधियाँ
प्रश्न 32. जब बालक किशोरावस्था में पैर रखता है तो उसमें धीरे-धीरे परिवर्तन होते हैं। इस सन्धिकाल का शिक्षक तथा अभिभावक के लिए क्या महत्व है?
उत्तर: किशोरावस्था में किशोरों के विकास में शिक्षकों का अत्यन्त प्रभाव पड़ता है। विद्यार्थी की भावनाओं का यदि आदर किया जाये तो पढ़ाई में उन्हें आनन्द आता है। इस अवधि में किशोर अपने आपको इतना सक्षम समझने लगता है। कि वह अपना स्वतंत्र निर्णय ले सकता है。
प्रश्न 33. व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपण विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: व्यक्तित्व मापन की प्रक्षेपी विधियों की माप परोक्ष रूप से होती है। इस विधि द्वारा व्यक्ति के अचेतन स्तर पर दबी हुयी आन्तरिक भावनाओं का मापन किया जाता है। प्रक्षेपी विधि में साधारणतया व्यक्ति के सम्मुख उद्दीपक स्थिति प्रस्तुत की जाती है तथा उसे ऐसा अवसर प्रदान किया जाता है जिससे वह अपने व्यक्तिगत जीवन से संबंधित छिपी बातों को उन स्थितियों के माध्यम से प्रकट कर सके。
प्रश्न 34. प्रयास एवं त्रुटि सिद्धान्त की व्याख्या करते हुए बताइए कि शिक्षा में इसकी क्या उपयोगिता है?
उत्तर: प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत के प्रतिपादक थार्नडाइक थे। सीखने में यह सिद्धांत भी अपना विशेष महत्व रखता है। थार्नडाइक का विश्वास है कि चूहे तथा बिल्ली की तरह बालक भी प्रयास और त्रुटि के द्वारा सीखते हैं। बालक इस सिद्धांत के अनुसार चलना, बोलना तथा भोजन करना सीखते हैं।
शिक्षा में उपयोगिता निम्न है-
- (i) सीखने की प्रक्रिया में विशेष महत्व है।
- (ii) इसके द्वारा जो ज्ञान अर्जित किया जाता है, वह स्थायी रहता है
- (iii) यह उन त्रुटियों की ओर संकेत करता है जिनसे लाभ उठाया जा सकता है।
- (iv) यह गणित, विज्ञान विषयों के सीखने के लिए विशेष उपयोगी है।
प्रश्न 35. स्किनर के क्रियाप्रसूत अधिगम सिद्धान्त का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: स्किनर का क्रियाप्रसूत सिद्धांत में सीखी जाने वाली क्रिया को छोटे-छोटे पदो में विभाजित किया जाता है। शिक्षा में इस विधि का प्रयोग करके सीखने में गति और सफलता दोनों मिलती है। स्किनर का मत है कि जब भी कार्य में सफलता मिलती है तो संतोष प्राप्त होता है। यह संतोष क्रिया को बल प्रदान करता है
प्रश्न 36. सीखने सिखाने तथा विद्यालयी व्यवस्था के सन्दर्भ में समुदाय के सक्रिय सदस्यों का अभिप्रेरण में योगदान स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: समुदाय के सक्रिय सदस्य शिक्षा और विद्यालयी व्यवस्था में महत्वपूर्ण भागीदार होते हैं। वे विद्यार्थियों को प्रेरित करने, सीखने के अवसर प्रदान करने, और समग्र विद्यालयी माहौल को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि समुदाय की भागीदारी सभी समुदायों में समान नहीं होती है। कुछ समुदायों में, विद्यालयों के साथ मजबूत साझेदारी होती है, जबकि अन्य में भागीदारी कम होती है。
प्रश्न 37. "अन्तर्दृष्टि में पूर्वदृष्टि निहित होती है।" कथन को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अन्तर्दृष्टि में पूर्वदृष्टि निहित होती है यह कोहलबर्ग के अनुसार है। व्यक्ति किसी वस्तु का पूर्ण रूप से प्रत्यक्षीकरण करता है न कि उसके भागों को। प्रयोग 'सूझ द्वारा सीखने' के सिद्धांत के प्रतिपादक जर्मनी के गेस्टाल्टवादी है, इसलिए इसे गेस्टाल्ट सिद्धांत भी कहा जाता है। इनके अनुसार व्यक्ति द्वारा अपनी सम्पूर्ण परिस्थिति को अपनी मानसिक शक्ति द्वारा अच्छी तरह समझ लिया जाता है। इसी संबंध में कोहलर ने अपना प्रयोग चिम्पैंजी पर किया था जिसका नाम सुल्तान था。
प्रश्न 38. अवधान को प्रभावित करने वाले कारकों को लिखिए
उत्तर: अवधान को प्रभावित करने वाले व्यक्ति एक विशेष शारीरिक मुद्रा बनाकर किसी वस्तु को चेतना के केन्द्र में लाने के लिए तत्पर रहता है। अवधान को प्रभावित करने वाले कारक निम्न है-
- (i) गति, तीव्रता, नवीनता, आकार, विषमता, स्वरूप, पुनरावृत्ति, रहस्य।
- (ii) मूल प्रवृत्तिया, आवश्यकता, उद्देश्य, आदत, संवेग, जिज्ञासा।
प्रश्न 39. सांख्यिकी के महत्व को संक्षेप में लिखिए।
उत्तर: सांख्यिकी के महत्व निम्न हैं-
- (i) सांख्यिकी उचित मात्रात्मक डेटा के बारे में जानकारी इकट्ठा करने में मदद करती है।
- (ii) यह सटीक विवरण और बेहतर समझ प्रदान करता है।
- (iii) यह जटिल डेटा को आसानी से समझने के लिए ग्राफिकल रूप, सारणीबद्ध रूप और आरेखीय प्रतिनिधित्व में दर्शाता है।
- (iv) यह मात्रात्मक अवलोकनों के माध्यम से परिवर्तनशीलता पैटर्न को समझने में मदद करता है।
प्रश्न 40. सामान्य ज्ञान की परीक्षा में 8 विद्यार्थियों को निम्नलिखित अंक प्राप्त हुए। इनका मध्यमान ज्ञात कीजिए- प्राप्तांक : 20, 23, 27, 18, 17, 13, 24, 22
उत्तर: दिया है, 8 विद्यार्थियों का अंक प्राप्तांक
A B C D E F G H
20 23 27 18 17 13 24 22
$\text{माध्यमान} = \frac{\Sigma X}{N} = \frac{20+23+27+18+17+13+24+22}{8} = \frac{164}{8} = 20.5$