Home
Store Updates
Home PYQs Semester 1 बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया 2017
PYQ 2017 • बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया

बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Paper 2017

UP DELED Semester 1 बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Question Paper 2017 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. बाल विकास की अवस्थाएँ होती हैं-

(a) 2

(b) 3

(c) 4

(d) 5

उत्तर: (c) : बाल विकास की चार अवस्थाएँ होती हैं।

  • (1) शैशवावस्था
  • (2) बाल्यावस्था
  • (3) किशोरावस्था
  • (4) प्रौढ़ावस्था

प्रश्न 2. बाल- मनोविज्ञान का सर्वाधिक महत्व है-

(a) बाल विकास की दृष्टि से

(b) बाल शिक्षा की दृष्टि से

(c) बाल विकास एवं शिक्षा की दृष्टि से

(d) बाल समायोजन की दृष्टि से

उत्तर: (c) : बाल विकास एवं शिक्षा की दृाष्ट से बाल मनोविज्ञान का सर्वाधिक महत्व है। यह आपको यह समझने में मदद करता है। कि बच्चे कैसे विकसित होते हैं और बढ़ते हैं。

प्रश्न 3. "किशोरावस्था बड़े बल, तनाव तूफान तथा विरोध की अवस्था है" यह कथन है-

(a) किलपैट्रिक

(b) स्टैनले हॉल

(c) टी. पी. नन

(d) वाटसन

उत्तर: (b) : किशोशवस्था बड़े बल, तनाव तूफान तथा विरोध की अवस्था है। यह कथन स्टैनले हॉल का है। सन् 1904 में स्टैनले हॉल द्वारा दिया गया उपर्युक्त कथन यह दर्शाता है कि, किशोरावस्था एक अशांत समय है जिसमें संघर्ष और मनोभावों की उथल पुथल देखने को मिलती है。

प्रश्न 4. प्रयास तथा त्रुटि सिद्धान्त के प्रतिपादक हैं -

(a) सी. एल. हल

(b) पालवव

(c) थर्नाडाइक

(d) वुडवर्थ

उत्तर: (c) : प्रयास तथा त्रुटि सिद्धान्त के प्रतिपादक एडवर्ड थार्नडाइक है। जो यह दर्शाता है कि शिक्षण उद्दीपकों और अनुक्रियाओं के बीच संबंध बनाने का परिणाम है。

प्रश्न 5. केन्द्रीय प्रवृत्ति का मापक नहीं है-

(a) मध्यमान

(b) मध्यांक

(c) प्रसार

(d) बहुलक

उत्तर: (c) : केन्द्रीय प्रवृत्ति का मापक प्रसार नहीं है। केन्द्रीय प्रवृत्ति के चार मापक हैं माध्य, माध्यिका, बहुलक और मध्यश्रेणी。

प्रश्न 6. किशोरावस्था की विशेषताओं को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करने वाला एक शब्द है-

(a) विकास

(b) परिवर्तन

(c) समायोजन

(d) अस्थिरता

उत्तर: (b) : किशोरावस्था की विशेषताओं को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करने वाला एक शब्द परिवर्तन है। परिवर्तन शारीरिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक है。

प्रश्न 7. बाल विकास को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है-

(a) पोषण

(b) लिंग-भेद

(c) संस्कृति

(d) वातावरण

उत्तर: (b) : बाल-विकास को प्रभावित करने वाला कारक लिंग भेद नहीं है। बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक आहार (पोषण), जलवायु, हार्मोन, संस्कृति जीवन शैली इत्यादि हैं。

प्रश्न 8. अभ्यास और अनुभव के द्वारा व्यवहार में होने वाला परिवर्तन कहलाता है-

(a) अवधान

(b) प्रेरणा

(c) प्रतिकार

(d) अधिगम

उत्तर: (b) : अभ्यास और अनुभव के द्वारा व्यवहार में होने वाला परिवर्तन प्रेरणा कहलाता है。

प्रश्न 9. पदों के योग में पदों की संख्या से भाग देने पर जो प्राप्त होता है, कहलाता है-

(a) प्रसरण

(b) माध्यिका

(c) बहुलक

(d) माध्य

उत्तर: (d) : पदों के योग में पदों की संख्या से भाग देने पर जो प्राप्त होता है। वह माध्य (समांतर माध्य) कहलाता है。

प्रश्न 10. बालकों में स्वतन्त्रता की आकांक्षा किस अवस्था में प्रबल हो जाती है?

(a) किशोरावस्था

(b) शैशवावस्था

(c) बाल्यावस्था

(d) प्रौढ़ावस्था

उत्तर: (a) : बालकों में स्वतन्त्रता की आकांक्षा किशोरावस्था में प्रबल हो जाती है। किशोरावस्था का शाब्दिक अर्थ है। "परिपक्वता की ओर बढ़ता इसकी आयु सीमा 12 से 19 वर्ष है。

प्रश्न 11. "जिन तथ्यों को भूतकाल में सीखा जा चुका है, उन्हें स्मरण करना ही स्मृति है "

(a) रॉस का

(b) वुडवर्थ का

(c) रायबर्न का

(d) स्किनर का

उत्तर: (b) : "जिन तथ्यों को भूतकाल से सीखा जा चुका है उन्हें स्मरण करना ही स्मृति है।" यह कथन वुडवर्थ का है। स्मृति का शाब्दिक अर्थ है। "याद किया हुआ"

प्रश्न 12. सी. ए. टी. परीक्षण किस आयु के बच्चों के व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने हेतु प्रयुक्त होता है-

(a) 01 से 05 वर्ष

(b) 03 से 11 वर्ष

(c) 11 से 13 वर्ष

(d) 11 से 15 वर्ष

उत्तर: (b) : सी. ए. टी. 03 से 11 वर्ष आयु के बच्चों के व्यक्तित्व का मूल्यांकन करने हेतु प्रयुक्त होता है। सी. ए. टी. परीक्षण में बच्चों को उनके हितों को प्रकट करने और उनका मूल्यांकन करने के लिऐ चित्रित कार्ड दिये जाते हैं。

प्रश्न 13. संवेग का प्रकार नहीं है-

(a) क्रोध

(b) भय

(c) ध्यान

(d) प्रेम

उत्तर: (c) : संवेग का प्रकार ध्यान नहीं है संवेग वस्तुतः ऐसी प्रक्रिया है, जिसे व्यक्ति उद्दीपक द्वारा अनुभव करता है। संवेग भय, क्रोध, प्रेम, ईर्ष्या, जिज्ञासा, चिन्ता, दुखः, शर्म आदि को कहते हैं。

प्रश्न 14. प्रतिभाशाली बालक की बुद्धिलब्धि होती है -

(a) 80 से 90

(b) 110 से 120

(c) 140 से अधिक

(d) 100 से 120

उत्तर: (c) : प्रतिभाशाली बालक की बुद्धिलब्धि 140 से अधिक होती है। प्रतिभाशाली बालक वे बालक हैं, जो शैक्षिक प्रयासों में लगातार उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हैं。

प्रश्न 15. पियाजे के अनुसार बालक के संज्ञानात्मक विकास की स्थितियाँ हैं -

(a) दो

(b) चार

(c) छः

(d) तीन

उत्तर: (b) : पियाजे के अनुसार बालक के संज्ञानात्मक विकास की चार स्थितियाँ हैं। इनका सही क्रम, "संवेदी गामक अवस्था, पूर्व संक्रियात्मक अवस्था, मूर्त संक्रियात्मक अवस्था तथा अमूर्त संक्रियात्मक अवस्था" है。

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. बुद्धि लब्धि निकालने का सूत्र क्या है?

उत्तर: मनुष्य की बुद्धि लब्धि $(IQ)=\frac{\text{मानसिक आयु (MA)}}{\text{वास्तविक आयु (CA)}}\times100$ के सूत्र द्वारा निकाला जाता है। यह सूत्र 1912 में स्टर्नबर्ग द्वारा दिया गया। यदि 15 वर्ष की आयु के व्यक्ति की मानसिक आयु 20 वर्ष है, तो उसकी बुद्धि लब्धि होगा। $(IQ)=\frac{20}{15}\times100=133.3$

प्रश्न 17. सृजनात्मक से क्या आशय है?

उत्तर: यह एक मानसिक संक्रिया है जो भौतिक परिवर्तनों को जन्म देती है। सृजनात्मकता अथवा रचनात्मकता किसी वस्तु, विचार, कला, साहित्य से संबद्ध किसी समस्या का समाधान निकालने आदि के क्षेत्र में कुछ नया रचने, आविष्कृत करने या पुनसृजित करने की प्रक्रिया है。

प्रश्न 18. व्यक्तित्व की एक परिभाषा लिखिए।

उत्तर: व्यक्तित्व (Personalisty) व्यक्ति के आन्तरिक एवं बाह्य व्यवहार के तरीकों, रूचियों, अभिवृत्तियों, योग्यताओं, क्षमताओं, उद्देश्यों, प्रेरणाओं तथा शारीरिक गुणों आदि के सम्मिलित योग को कहते हैं। Personality (व्यक्तित्व) शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के Personality शब्द से हुई है, जिसका अर्थ मुखौटा / नकाब / नकली चेहरा है。

प्रश्न 19. 'रोर्शा परीक्षण' विधि को किस मनौवैज्ञानिक ने आरम्भ किया था?

उत्तर: 'रोर्शा परीक्षण' विधि को 1921 में स्विस मनोवैज्ञानिक हरमन रोर्शा द्वारा प्रतिपादित किया गया है। इसका उपयोग किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के लक्षणों का आकलन करने के लिये किया जाता है。

प्रश्न 20. 'मध्यमान' का उपयोग कब किया जाता है?

उत्तर: गणितीय भाषा में किसी भी संख्या को जोड़कर जब उसके पद से भाग देने पर प्राप्तांक को ही मध्यमान कहते हैं। मध्यमान का सूत्र- $X = \frac{X_1 + X_2 +....+X_n}{N}$

जहाँ,

  • $X=$ मध्यमान
  • $X=$ प्राप्तांक या मूल्य
  • $\Sigma X=$ मूल्यों या प्राप्तांको का योग
  • $N=$ पदों की संख्या

प्रश्न 21. मध्यांक की कोई एक परिभाषा लिखिए।

उत्तर: मध्यांक एक ऐसा बिंदु होता है जिसके मापन के किसी एक स्केल पर टिके आधे अंक ऊपर की तरफ तथा ठीक आधे अंक नीचे की तरफ होते हैं। मध्यांक का सूत्र $(M)=\frac{(N+1)}{2}$

जहाँ,

  • $M=$ मध्यांक मूल्य
  • $N=$ पदों की संख्या

प्रश्न 22. सीखने के वक्र में सीखने में उन्नति होना किस रूप में प्रदर्शित की जाती है?

उत्तर: सीखने का वक्र-जब व्यक्ति किसी कार्य को सीखना आरम्भ करता है, तो सीखने की गति आरम्भ से अन्त तक एक समान नहीं होती है। वह किसी कौशल में शीघ्र ही प्रवीण नहीं हो जाता है। उसके सीखने की गति कभी तेज, कभी धीमी और कभी बिल्कुल रूक जाती है। यदि सीखने की इस गति को एक ग्राफ पेपर पर अंकित किया जाए तो सीखने का वक्र रेखा सीखने की उन्नति या अवनति को दिखाती हुई एक वक्र रेखा बन जाती है। इसी को सीखने का वक्र कहा जाता है。

प्रश्न 23. बालक की वृद्धि कब रूक जाती है?

उत्तर: बालक की वृद्धि के विषय में समस्त विद्वान इस बात को स्वीकार करते हैं कि बालक की वृद्धि 25 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर स्थिरता प्राप्त करके रूक जाती है。

प्रश्न 24. टी. ए.टी. का सम्बन्ध किससे है?

उत्तर: टी.ए.टी. (T.A.T.) का सम्बन्ध व्यक्तित्व परीक्षण से है, जिसका प्रतिपादन मरे एवं मॉर्गन ने किया था। टी.ए.टी. का फुल फॉर्म Thematic Apperception Test (थीमैटिक एपेरसेप्शन टेस्ट) होता है。

प्रश्न 25. स्मृति का मुख्य कार्य क्या है?

उत्तर: स्मृति (Memory) वो प्रक्रिया है, जो अनजाने में काम करती है और सूचना को पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया को तेज करने में मदद करती है। स्मृति का शाब्दिक अर्थ है- "याद किया हुआ"。

प्रश्न 26. सक्रिय स्मृति से क्या आशय है?

उत्तर: सिंग्मण्ड फ्रॉयड के अनुसार "हम विस्मृति की क्रिया द्वारा अपने खुद के अनुभव को स्मृति से निकाल देते हैं।" सक्रिय विस्मृति का कारण व्यक्ति है वह स्वयं ही किसी बात को भूलने का प्रयास करके उसे भुला देता है。

प्रश्न 27. अभिप्रेरणा का क्या अर्थ है?

उत्तर: अभिप्रेरणा एक संक्रिया है जो जीव को कुछ करने के लिये प्रेरित करती है। अभिप्रेरणा (Motivation) का अर्थ किसी व्यक्ति के लक्ष्योन्मुख (goal-oriented) व्यवहार को सक्रिय या ऊर्जान्वित करना है。

प्रश्न 28. 'हल' के अनुसार सीखने की प्रक्रिया का आधार क्या है?

उत्तर: 'हल' के अनुसार सीखने की प्रक्रिया का आधार आत्म- संशोधन है। सीखने की प्रक्रिया में छह अलग-अलग घटकों की इंटरैक्टिव प्रक्रिया शामिल होती है। उच्च क्रम पर स्मृति, ध्यान, भाषा, प्रसंस्करण, लेखन और संगठन। सीखने के लिये, ये सभी घटक एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते हैं。

प्रश्न 29. 'सीखने की कोई एक परिभाषा लिखिए।

उत्तर: सीखना या अधिगम (Learning) एक व्यापक सतत् एवं जीवन पर्यन्त चलने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। मनुष्य जन्म के उपरांत ही सीखना प्रारंभ कर देता है और जीवन भर कुछ न कुछ सीखता रहता है। सीखना व्यवहार या ज्ञान में एक परिवर्तन है जो अनुभव से उत्पन्न होता है। वुडवर्थ के अनुसार- "नवीन ज्ञान व प्रतिक्रियाओं को अर्जित करने की प्रक्रिया अधिगम या सीखना कहलाती हैं।"

प्रश्न 30. बच्चों के भाषा ज्ञान में अवरोधक दो कारण लिखिए।

उत्तर: बच्चों के भाषा ज्ञान में अवरोधक दो कारण निम्नलिखित हैं-

  • (i) बोलने के अंगों में दोष के कारण भी भाषा विकास में अवरोधन आ जाता है।
  • (ii) ध्वनि दोष के कारण भाषा विकास में अवरोधन हो जाता है।
Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. बाल विकास की आवश्यकता पर संक्षिप्त लेख लिखिए।

उत्तर: बाल विकास की आवश्यकता-

  • (1) बालक के बुद्धि एवं विकास की प्रगति का ज्ञान कर लेने के बाद बालक भविष्य में कैसे और क्या बन सकता है हम अनावश्यक श्रम तथा निराशा से उसे अपने आप को स्वतंत्र रख सकते हैं।
  • (2) बालक के भविष्य में होने वाली वृद्धि और विकास को ध्यान में रखते हुए क्या-क्या विशेष परिवर्तन होंगें इस बात पर ज्ञान हमें सिद्धान्तों के आधार पर हो सकता है।
  • (3) प्रत्येक बालक में बुद्धि एवं विकास की गति एक समान नहीं होती इसलिये हमें व्यक्तिगत भिन्नताओं का ध्यान रखना चाहिये।
  • (4) वृद्धि और विकास की दिशा में परिणाम संबंधी सिद्धान्त यह बताते हैं कि विकास निश्चित दिशा में होता है विशेष अवस्था एवं आयु में बालक के विकास के ज्ञान से इस विषय में मदद ली जा सकती है।

प्रश्न 32. बाल्यावस्था में संवेगात्मक विकास कैसे होता है?

उत्तर: बाल्यावस्था में बालक के संवेग मात्र उत्तेजना न होकर उसकी अभिव्यक्ति में सामाजिकता उत्पन्न होने लगती है और उनकी अभिव्यक्ति पर नियंत्रण करने लगता है और इस कारण उनके संवेगों की उग्रता कम होने लगती है। इस अवस्था में बालक में संवेगों को दमन करने की क्षमता पैदा हो जाती है। वह यह समझने लगता है कि उसके किस व्यवहार से परिजन, शिक्षक व अन्य लोग प्रसन्न होंगें और किस प्रकार के व्यवहार से वे रूष्ट होंगें। इस अवस्था में बालकों में ईर्ष्या एवं द्वेष की भावना विकसित होने लगती है। और प्रकटीकरण व चिढ़ाना, उपेक्षा करना, निन्दा करना, आरोप लगाना, व्यंग्यात्मक भाषा का प्रयोग करना आदि करने लगता हैं। इस अवस्था में बालक में विभिन्न प्रकार के संवेग, जैसे-भय, निराशा, चिन्ता, व्यग्रता, कुंठा, स्नेह, प्रेम, प्रसन्नता आदि स्पष्ट रूप से प्रकट होने लगते है। इस तरह बाल्यावस्था में संवेगात्मक विकास होता है。

प्रश्न 33. बच्चों में सृजनात्मक क्षमता का विकास कैसे किया जाता है?

उत्तर: बच्चों में सृजनात्मक क्षमता का विकास तब संभव है, जब बालक को वैसा वातावरण प्रदान किया जाये। बच्चों में सृजनात्मक क्षमता का विकास कुछ निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है-

  • (1) मन की झिझक और डर को दूर करने पर बालकों की अभिव्यक्ति की क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।
  • (2) बच्चों की मौलिकता को बढ़ावा देकर।
  • (3) लचीलेपन को प्रोत्साहित करके, लचीलेपन से आशय, किसी काम को सीखते समय यदि वो अपने तरीके से सीखना चाहे तो उनकी इस गतिविधि को उत्साहित किया जाना चाहिए।

प्रश्न 34. बहिर्मुखी व्यक्तित्व की क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर: बहिर्मुखी वह व्यक्ति होता है, जो अन्य लोगों और बाहरी दुनिया में रूचि रखता है। बहिर्मुखी बहिर्मुखीता, अन्य लोगों के प्रति चौकसता, गतिविधि, आक्रामकता रखते हैं। बहिर्मुखी होना यानी बाह्य जगत से जुड़कर उसके आकर्षणों में उलझते रहना। इन्हें दूसरों से बात करने में आंनन्द आता है क्योंकि इससे उन्हें अपने आस-पास की दुनिया से जुड़ाव और जुड़ाव महसूस करने में मदद मिलती है。

प्रश्न 35. बच्चों में कल्पना शक्ति का विकास किस प्रकार किया जा सकता है ?

उत्तर: परियों की कहानियाँ छोटे बालकों की कल्पना शक्ति का विकास करने का सर्वाधिक उपयुक्त माध्यम है। अधिक पढ़ाई और ज्ञान प्राप्त करके आपकी कल्पना शक्ति में सुधार हो सकता है। विभिन्न क्रियाओं में भाग लें और नये चुनौतीपूर्ण कार्यों का सामना करें, जैसे कि कला, लेखन, या गीत गाना। बच्चों में कल्पना शक्ति का विकास निम्न प्रकार से किया जा सकता है-

  • (1) रोल-प्ले में व्यस्त रखें।
  • (2) रचनात्मक खेल खेलने दें।
  • (3) आउटडोर खेल के लिये भेजें।

प्रश्न 36. बाल विकास पर वंशानुक्रम का क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: किसी बालक के माता-पिता का जैसा शारीरिक विकास होता है वही उनकी संतानों को भी प्राप्त होता है। प्रत्येक बालक विभिन्न शारीरिक गुणों जैसे रंग, रूप, शारीरिक गठन, स्वास्थ्य रोग, लैंगिक परिपक्वता, शारीरिक विकृति, शारीरिक दोष आदि बातों को बालक वंशानुक्रम द्वारा ही प्राप्त करता है। बालक के विकास पर वंशानुक्रम का प्रभाव निम्नलिखित हैं-

  • (1) तन्त्रिका तंत्र की बनावट।
  • (2) मानसिक विकास पर प्रभाव।
  • (3) चरित्र पर प्रभाव।
  • (4) संवेगात्मक विकास पर प्रभाव।
  • (5) सामाजिक विकास पर प्रभाव।
  • (6) व्यावसायिक योग्यता पर प्रभाव।
  • (7) स्वभाव पर प्रभाव।

प्रश्न 37. अनुकरण द्वारा सीखने का क्या आशय है?

उत्तर: अनुकरण का शाब्दिक अर्थ है 'नकल करना' बच्चे भी अपने सभी नित्य कर्मों को बड़ों के अनुकरण के द्वारा ही सीखते हैं। अनुकरण शब्द यूनानी भाषा के Mimesis (मिमेसिस) के समानार्थी रूप में प्रयुक्त हुआ है। मिमेसिस को अंग्रेजी में Imitation कहते हैं। अनुकरण का अन्य अर्थ किसी पाठ को या कठिन कार्य को सीखने के लिए अध्यापक या किसी अन्य छात्र का अनुसरण करना। अनुकरण के सिद्धान्त के प्रतिपादक मनोवैज्ञानिक हैगार्ट को माना जाता है। अनुकरण एक सामान्य प्रवृत्ति है, जिसका प्रयोग मानव दैनिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने में करता है। अनुकरण में हम दूसरों को क्रिया करते हुये देखते हैं और वैसा ही करना सीख लेते हैं。

प्रश्न 38. कोहलर के सूझ या अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त की विशेषताएँ लिखिए ।

उत्तर: कोहलर के सूझ या अन्तर्दृष्टि सिद्धांत, अधिगम सिद्धांतों में 'क्षेत्र सिद्धान्त' के अंतर्गत वर्णित किया गया है। अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त की व्याख्या कोहलर ने अपनी पुस्तक 'गेस्टाल्ट साइकोलॉजी' (1959) में की है। अंतर्दृष्टि सिद्धान्त की विशेषतायें निम्नलिखित हैं-

  • (1) परिवर्तित अनुक्रियाओं द्वारा प्रयास करना।
  • (2) समस्यात्मक स्थिति का सर्वेक्षण।
  • (3) एकाएक उपयुक्त अनुक्रिया अभिव्यक्त करना।
  • (4) अनुकूलित अनुक्रिया की पुनरावृत्ति करना।
  • (5) उद्देश्य लक्ष्य अथवा प्रेरणा की ओर बार-बार ध्यान केन्द्रित करना।
  • (6) प्रथम अनुक्रिया उपयुक्त सिद्ध न होने पर अन्य अनुक्रिया करना।
  • (7) समस्यात्मक स्थिति में हिचकिचाहट विश्राम एवं ध्यान का केंद्रीकरण करना।

प्रश्न 39. सीखने में पठार के क्या कारण हैं संक्षेप में लिखिए।

उत्तर: सीखने की इस प्रकार की अवस्था जिसमें सीखने की उन्नति रूक जाती है। इस अवस्था में अधिगम वक्र ऊपर चढ़ने के स्थान पर समान्तर चलने लगता है और अधिक देर तक कोई प्रगति नहीं दिखायी पड़ती है। इस सपाट स्थल को अधिगम का पठार कहते हैं। सीखने में पठार कब एवं कितने समय के लिये आयेगा, यह निश्चित नहीं रहता? एक व्यक्ति शीघ्र सीख सकता है, दूसरे को बिलम्ब हो सकता है। सीखने की प्रक्रिया में पठारों का आना अनिवार्य है पर यह व्यक्ति की प्रवृत्ति पर निर्भर करता है कि वह पठारों में कितनी देर में पहुँचता है और पठार कितनी देर तक रहते हैं। रैक्स एवं नाइट (Rex and Knight) के अनुसार, "सीखने में पठार जब आते हैं तब व्यक्ति सीखने की एक अवस्था पर पहुँच जाता है।" अधिगम पठार बनने के प्रमुख कारण निम्न हैं-

  • (1) मनोशारीरिक सीमा
  • (2) नकारात्मक कारक
  • (3) कार्य की जटिलता
  • (4) सीखने की अनुचित विधि
  • (5) पुरानी आदतों का नयी आदतों से संघर्ष
  • (6) अभ्यास का अभाव
  • (7) उपयुक्तता न होना
  • (8) जटिल कार्य के केवल एक पक्ष पर ध्यान
  • (9) व्यवधान
  • (10) प्रेरणा का अभाव
  • (11) आवश्यकता के अनुरूप नहीं

प्रश्न 40. स्मृति के प्रभावी कारकों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर: वुडवर्थ के अनुसार, "सीखे हुये अनुभवों के सीधे उपयोग को स्मृति कहते हैं।" स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया है जो प्रत्येक प्राणी में किसी न किसी मात्रा में अवश्य पायी जाती है। किसी बात को याद करने की योग्यता प्रत्येक व्यक्ति में अलग-अलग होती है। वस्तुतः जब व्यक्ति किसी वस्तु, पदार्थ अथवा स्थान को देखता है तो उस वस्तु, पदार्थ अथवा स्थान की प्रतिमा अथवा चिन्ह उसके मस्तिष्क में बन जाते हैं। इन्हीं संचित चिन्हों अथवा पूर्व समय में सीखी हुई बातों को याद करना ही स्मृति कहलाती है। स्मृति के प्रभावी कारक निम्नलिखित हैं-

  • (1) अधिगम (Learning)
  • (2) प्रत्यास्मरण (Recall)
  • (3) धारण (Retention)
  • (4) पहचान (Recognition)

Question Paper PDF

इस प्रश्न पत्र की PDF डाउनलोड करें।

PDF Download

बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Paper 2017

Solved question paper PDF download.

Complete 10 Years Solved PYQ Collection

2015 से 2025 तक के solved previous year papers, महत्वपूर्ण प्रश्न, उत्तर एवं PDF resources एक ही package में प्राप्त करें और अपनी UP DELED परीक्षा की तैयारी को मजबूत बनाएं।