Home
App Install Updates
Home PYQs Semester 1 बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया 2016
PYQ 2016 • बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया

बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Paper 2016

UP DELED Semester 1 बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Question Paper 2016 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. बालक का विभाजन कितनी अवस्थाओं में किया जाता है?

(a) 4

(b) 3

(c) 5

(d) 6

उत्तर: (b) 3।

व्याख्या : बाल विकास की तीन प्रमुख अवस्थाएँ मानी जाती हैं-

  1. शैशवावस्था — जन्म से 6 वर्ष तक
  2. बाल्यावस्था — 6 से 12 वर्ष तक
  3. किशोरावस्था — 12 से 18 वर्ष तक

प्रश्न 2. बालकों को पूर्वजों से प्राप्त गुण कहा जाता है-

(a) आनुवंशिकता

(b) परिपक्वता

(c) वातावरण

(d) आत्मसातन

उत्तर: (a) आनुवंशिकता।

व्याख्या : माता-पिता तथा पूर्वजों से सन्तानों में प्राप्त होने वाले जैविक गुणों को आनुवंशिकता कहते हैं।

प्रश्न 3. बुद्धि के समूह कारक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया?

(a) हिल्माई

(b) बेबर

(c) थर्स्टन

(d) थाम्पसन

उत्तर: (c) थर्स्टन।

व्याख्या : लुई लियोन थर्स्टन ने बुद्धि के समूह कारक सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। उन्होंने बुद्धि में अनेक प्राथमिक मानसिक योग्यताओं पर बल दिया।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन-सा परीक्षण बुद्धि का मापन करता है?

(a) सी. ए. टी.

(b) टी. ए. टी.

(c) एम. ए. टी.

(d) भाटिया बैटरी परीक्षण

उत्तर: (d) भाटिया बैटरी परीक्षण।

व्याख्या : भाटिया बैटरी एक क्रियात्मक/प्रदर्शन बुद्धि परीक्षण है। इसका निर्माण सी. एम. भाटिया ने 1955 में भारतीय जनसंख्या के लिए किया था।

प्रश्न 5. जीन पियाजे द्वारा बालक के संज्ञानात्मक विकास का वर्णन कितनी अवस्थाओं में किया गया है?

(a) 5

(b) 4

(c) 3

(d) 6

उत्तर: (b) 4।

व्याख्या : जीन पियाजे ने संज्ञानात्मक विकास की चार अवस्थाएँ बताई हैं-

  1. संवेदी-पेशीय अवस्था — जन्म से लगभग 2 वर्ष
  2. पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था — लगभग 2 से 7 वर्ष
  3. मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था — लगभग 7 से 11/12 वर्ष
  4. औपचारिक-संक्रियात्मक अवस्था — लगभग 11/12 वर्ष के बाद

प्रश्न 6. वह मानवीय योग्यता जिसके आधार पर वह किसी नवीन रचना या विचार को प्रस्तुत करता है, कहलाती है-

(a) अभिसरण

(b) कल्पना

(c) सृजनात्मकता

(d) तर्क

उत्तर: (c) सृजनात्मकता।

व्याख्या : नवीन विचार, वस्तु या रचना प्रस्तुत करने की क्षमता को सृजनात्मकता कहते हैं।

प्रश्न 7. व्यक्ति का सम्पूर्ण व्यवहार प्रतिमान जो उसकी समस्त विशेषताओं के योग को व्यक्त करता है, कहलाता है-

(a) व्यक्तित्व

(b) रुचि

(c) प्रेरणा

(d) कल्पना

उत्तर: (a) व्यक्तित्व।

व्याख्या : व्यक्ति के व्यवहार, गुणों, अभिवृत्तियों, रुचियों तथा अन्य विशेषताओं के समग्र संगठन को व्यक्तित्व कहा जाता है।

प्रश्न 8. टी. ए. टी. व्यक्तित्व परीक्षण का निर्माण किसने किया है?

(a) सी कोई एवं बेकमैन

(b) थर्स्टन

(c) हरमन रोर्शाक

(d) मरे एवं मॉर्गन

उत्तर: (d) मरे एवं मॉर्गन।

व्याख्या : टी. ए. टी. अर्थात् Thematic Apperception Test का विकास हेनरी मरे और क्रिस्टियाना मॉर्गन ने किया था।

प्रश्न 9. अनुभव एवं प्रशिक्षण के कारण व्यवहार में होने वाला परिवर्तन कहलाता है-

(a) प्रेरणा

(b) प्रत्यक्षीकरण

(c) अधिगम

(d) संवेदना

उत्तर: (c) अधिगम।

व्याख्या : अनुभव एवं अभ्यास के फलस्वरूप व्यवहार या व्यवहार-क्षमता में होने वाले अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन को अधिगम कहते हैं।

प्रश्न 10. बालक के कोषों एवं पेशियों में समय के साथ-साथ होने वाला परिवर्तन जिसके कारण वह एक निश्चित समय पर कोई कार्य कर सकता है, कहलाता है-

(a) परिपक्वता

(b) अभिसरण

(c) समंजन

(d) प्रत्यक्षण

उत्तर: (a) परिपक्वता।

व्याख्या : जैविक एवं स्नायविक विकास के फलस्वरूप किसी कार्य को करने की स्वाभाविक तैयारी विकसित होने की प्रक्रिया को परिपक्वता कहते हैं।

प्रश्न 11. थार्नडाइक ने सीखने से सम्बन्धित मुख्य कितने सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है?

(a) 5

(b) 3

(c) 4

(d) 6

उत्तर: (b) 3।

व्याख्या : थार्नडाइक ने अधिगम के तीन मुख्य नियम बताए-

  1. तत्परता का नियम
  2. अभ्यास का नियम
  3. प्रभाव का नियम

प्रश्न 12. पावलॉव ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया है?

(a) बिल्ली

(b) वनमानुष

(c) कुत्ता

(d) मेढक

उत्तर: (c) कुत्ता।

व्याख्या : इवान पावलॉव ने कुत्ते पर प्रयोग करके शास्त्रीय अनुबंधन के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया।

प्रश्न 13. थार्नडाइक ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया?

(a) कुत्ता

(b) तोता

(c) मनुष्य

(d) बिल्ली

उत्तर: (d) बिल्ली।

व्याख्या : थार्नडाइक ने भूखी बिल्ली और पहेली-पेटी के प्रयोग के आधार पर प्रयत्न एवं भूल के सिद्धान्त को स्पष्ट किया।

प्रश्न 14. कोहलर के सीखने के सिद्धान्त को किस नाम से जाना जाता है?

(a) पूर्ण आकृति / समग्र सिद्धान्त

(b) पुनर्बलन सिद्धान्त

(c) उद्दीपन सिद्धान्त

(d) क्रियात्मक सिद्धान्त

उत्तर: (a) पूर्ण आकृति / समग्र सिद्धान्त।

व्याख्या : कोहलर का अधिगम सिद्धान्त अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्त कहलाता है और यह गेस्टाल्ट विचारधारा पर आधारित है। गेस्टाल्ट का अर्थ समग्र या सम्पूर्ण रूप से है।

प्रश्न 15. व्यक्ति की वह मनोस्थिति जिसके द्वारा वह विभिन्न परिस्थितियों में सामाजिक और व्यक्तिगत समायोजन करने में समर्थ होता है, कहलाता है-

(a) समंजन

(b) मानसिक स्वास्थ्य

(c) आत्मसातन

(d) प्रकीर्णन

उत्तर: (b) मानसिक स्वास्थ्य।

व्याख्या : मानसिक स्वास्थ्य ऐसी संतुलित मनोस्थिति है जिसमें व्यक्ति स्वयं, अन्य व्यक्तियों तथा विभिन्न जीवन-परिस्थितियों के साथ संतोषजनक व्यक्तिगत एवं सामाजिक समायोजन कर पाता है।

Advertisement

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. बाल विकास के अन्तर्गत बाल्यावस्था की अवधि कौन-सी मानी जाती है?

उत्तर: बाल्यावस्था की अवधि सामान्यतः 6 से 12 वर्ष मानी जाती है।

प्रश्न 17. अशिक्षित व्यक्तियों/बालकों की बुद्धि का मापन किस परीक्षण से किया जाता है?

उत्तर: अशिक्षित व्यक्तियों या बालकों की बुद्धि के मापन के लिए अशाब्दिक अथवा क्रियात्मक बुद्धि-परीक्षण उपयोगी होते हैं।

प्रश्न 18. बालक के संवेगात्मक विकास से सम्बन्धित सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया?

उत्तर: इस संदर्भ में विलियम मैक्डूगल का नाम प्रमुख है। उन्होंने मूल प्रवृत्तियों और संवेगों के सम्बन्ध पर बल दिया।

प्रश्न 19. जीन पियाजे द्वारा प्रतिपादित बालक के संज्ञानात्मक विकास से सम्बन्धित तीसरी अवस्था क्या कहलाती है?

उत्तर: तीसरी अवस्था मूर्त-संक्रियात्मक अवस्था कहलाती है, जो लगभग 7 से 11/12 वर्ष तक रहती है।

प्रश्न 20. क्रन्दन, बलबलाना, हावभाव, वाक्य निर्माण बालक में किस आयाम के विकास की अवस्थाएँ होती हैं?

उत्तर: क्रन्दन, बलबलाना, हावभाव तथा शब्द-वाक्य निर्माण भाषा एवं वाक्-विकास की अवस्थाएँ हैं।

प्रश्न 21. व्यक्तित्व का वह प्रकार जिसके अन्तर्गत व्यक्ति दूसरे लोगों/समाज के अन्य लोगों की प्रगति के लिए सोचकर कार्य करता है, क्या कहलाता है?

उत्तर: ऐसा व्यक्ति सामान्यतः बहिर्मुखी व्यक्तित्व वाला कहलाता है, जिसकी रुचि सामाजिक सम्बन्धों और बाह्य गतिविधियों में अधिक होती है।

प्रश्न 22. सी. ए. टी. का निर्माण किसने किया है?

उत्तर: Children's Apperception Test (CAT) का विकास लियोपोल्ड बेलॉक एवं सोन्या एस. बेलॉक ने किया था। इसमें बच्चों को 10 चित्र दिखाकर व्यक्तित्व का अध्ययन किया जाता है।

प्रश्न 23. स्टैनले हाल ने किशोरावस्था को कौन-सी अवस्था कहा है?

उत्तर: जी. स्टैनले हाल ने किशोरावस्था को तूफान और तनाव की अवस्था (Storm and Stress) कहा।

प्रश्न 24. वह शक्ति जिसके कारण व्यक्ति किसी कार्य को करने या न करने के लिए प्रेरित होता है, क्या कहलाती है?

उत्तर: ऐसी आन्तरिक शक्ति को अभिप्रेरणा (Motivation) कहते हैं।

प्रश्न 25. सीखने से सम्बन्धित प्रभाव के नियम का प्रतिपादन किसने किया है?

उत्तर: ई. एल. थार्नडाइक ने प्रभाव के नियम का प्रतिपादन किया। संतोषजनक परिणाम वाली प्रतिक्रिया के दोहराए जाने की सम्भावना बढ़ती है।

प्रश्न 26. कोहलर ने अपने सीखने के सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया?

उत्तर: कोहलर ने मुख्यतः सुल्तान नामक चिम्पैंजी सहित वनमानुषों पर प्रयोग करके अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त को स्पष्ट किया।

प्रश्न 27. पावलॉव द्वारा अपने प्रयोग में पहले घण्टी बजती थी, फिर भोजन दिया जाता था। यह प्रक्रिया कई बार होने पर अन्त में क्या पाया गया?

उत्तर: बार-बार अनुबंधन के बाद केवल घण्टी की आवाज सुनकर ही कुत्ते के मुँह में लार आने लगी। यह अनुबन्धित अनुक्रिया थी।

प्रश्न 28. नियमित दिनचर्या, सबके साथ समायोजन, आत्मविश्वास, संवेगात्मक परिपक्वता और आत्म-मूल्यांकन की क्षमता किसका प्रमुख लक्षण है?

उत्तर: ये सभी अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के प्रमुख लक्षण हैं।

प्रश्न 29. जीन पियाजे ने बालक के संज्ञानात्मक विकास में किन दो प्रक्रियाओं का वर्णन किया है?

उत्तर: पियाजे ने दो प्रमुख प्रक्रियाएँ बताईं—संगठन (Organization) और अनुकूलन (Adaptation)

प्रश्न 30. पूर्व ज्ञान, विषय-वस्तु, शारीरिक स्वास्थ्य व परिपक्वता, मानसिक स्वास्थ्य व परिपक्वता, अधिगम की इच्छा व प्रेरणा आदि किसे प्रभावित करने वाले कारक माने जाते हैं?

उत्तर: ये सभी अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हैं।

Advertisement

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. बुद्धिलब्धि से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: बुद्धिलब्धि (Intelligence Quotient—IQ) बुद्धि के स्तर को व्यक्त करने वाला एक सूचकांक है। पारम्परिक अनुपात-बुद्धिलब्धि में मानसिक आयु और वास्तविक/कालानुक्रमिक आयु के अनुपात को 100 से गुणा किया जाता है।

बुद्धिलब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100

सामान्य शैक्षिक वर्गीकरण-

  • 140 एवं उससे अधिक : अत्यन्त उच्च
  • 120-139 : उच्च
  • 110-119 : औसत से ऊपर
  • 90-109 : औसत
  • 80-89 : औसत से नीचे
  • 70-79 : सीमावर्ती स्तर
  • 70 से कम : बहुत निम्न स्तर; विस्तृत मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन आवश्यक हो सकता है

बुद्धिलब्धि की श्रेणियों के नाम और सीमाएँ अलग-अलग मानकीकृत परीक्षणों में कुछ भिन्न हो सकती हैं।

प्रश्न 32. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: अन्तर्मुखी व्यक्तित्व वाले व्यक्ति सामान्यतः बाह्य सामाजिक गतिविधियों की अपेक्षा अपने विचारों, भावनाओं और आन्तरिक अनुभवों पर अधिक ध्यान देना पसन्द करते हैं। वे प्रायः सीमित सामाजिक समूह, शान्त वातावरण और एकान्त में कार्य करना अधिक सुविधाजनक अनुभव करते हैं।

अन्तर्मुखी व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएँ-

  • आत्मचिन्तन और मनन की प्रवृत्ति अधिक होती है।
  • बड़े समूहों की अपेक्षा सीमित लोगों के साथ रहना पसन्द कर सकते हैं।
  • अपनी भावनाओं और विचारों को तुरंत व्यक्त करने की अपेक्षा सोच-विचार करना पसन्द करते हैं।
  • एकाग्रता तथा स्वतंत्र कार्य में सहज हो सकते हैं।
  • सामाजिकता की मात्रा व्यक्ति और परिस्थिति के अनुसार भिन्न हो सकती है।

प्रश्न 33. जीन पियाजे द्वारा प्रतिपादित विकास की अवस्था के अन्तर्गत पूर्व-संक्रिया की अवस्था से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर: पियाजे के संज्ञानात्मक विकास सिद्धान्त की दूसरी अवस्था को पूर्व-संक्रियात्मक अवस्था कहते हैं। यह लगभग 2 से 7 वर्ष की आयु तक रहती है। इस अवस्था में भाषा और प्रतीकात्मक सोच का तीव्र विकास होता है, परन्तु तार्किक संक्रियाएँ अभी पूर्ण रूप से विकसित नहीं होतीं।

इस अवस्था की प्रमुख विशेषताएँ-

  • प्रतीकात्मक चिन्तन : बालक शब्दों, चित्रों और प्रतीकों द्वारा वस्तुओं का प्रतिनिधित्व करने लगता है।
  • भाषा का तीव्र विकास : शब्द-भण्डार और वाक्य-निर्माण की क्षमता बढ़ती है।
  • अहंकेन्द्रिता : बालक को दूसरे व्यक्ति के दृष्टिकोण को समझने में कठिनाई हो सकती है।
  • केन्द्रीकरण : वह किसी परिस्थिति के एक प्रमुख पक्ष पर ही ध्यान केन्द्रित कर सकता है।
  • जीववाद : निर्जीव वस्तुओं में भी जीवन या मानवीय गुणों की कल्पना कर सकता है।
  • संरक्षण की समझ का अभाव : आकार या रूप बदलने पर मात्रा समान रहने की बात को समझने में कठिनाई होती है।

प्रश्न 34. वैयक्तिक भिन्नता से क्या तात्पर्य है?

उत्तर: प्रत्येक व्यक्ति शारीरिक, मानसिक, संवेगात्मक, सामाजिक, बौद्धिक, रुचि, अभिरुचि तथा व्यक्तित्व की दृष्टि से अन्य व्यक्तियों से कुछ न कुछ भिन्न होता है। इन अन्तरों को वैयक्तिक भिन्नता कहते हैं।

वैयक्तिक भिन्नता के प्रमुख क्षेत्र-

  • शारीरिक बनावट एवं स्वास्थ्य
  • बुद्धि एवं मानसिक क्षमताएँ
  • रुचि एवं अभिरुचि
  • संवेगात्मकता
  • व्यक्तित्व एवं स्वभाव
  • सीखने की गति और उपलब्धि
  • सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि

अतः शिक्षा में सभी विद्यार्थियों से समान गति और समान ढंग से सीखने की अपेक्षा न करके उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं और क्षमताओं का ध्यान रखना चाहिए।

प्रश्न 35. कल्पना से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: पूर्व अनुभवों से प्राप्त मानसिक प्रतिमाओं को पुनः संगठित करके किसी नई वस्तु, परिस्थिति या विचार की मानसिक रचना करने की प्रक्रिया को कल्पना कहते हैं। इसमें व्यक्ति ऐसी स्थिति की मानसिक छवि बना सकता है जो उस समय प्रत्यक्ष रूप से उसके सामने उपस्थित न हो।

कल्पना की प्रमुख विशेषताएँ-

  • यह पूर्व अनुभवों पर आधारित होती है।
  • पुराने अनुभवों को नए रूप में संयोजित करती है।
  • सृजनात्मकता और समस्या-समाधान में सहायक होती है।
  • भविष्य की योजनाएँ बनाने में सहायता करती है।
  • साहित्य, कला, विज्ञान और आविष्कार में इसका विशेष महत्त्व है।

प्रश्न 36. अनुकरण द्वारा सीखने से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर: दूसरे व्यक्ति के व्यवहार, क्रिया, भाषा या कौशल को देखकर उसी प्रकार करने और सीखने की प्रक्रिया को अनुकरण द्वारा सीखना कहते हैं। बालक अपने माता-पिता, शिक्षक, सहपाठियों तथा अन्य आदर्श व्यक्तियों के व्यवहार का अनुकरण करके अनेक बातें सीखता है।

अनुकरण द्वारा सीखने का महत्त्व-

  • भाषा एवं उच्चारण सीखने में सहायता करता है।
  • सामाजिक व्यवहार और शिष्टाचार का विकास करता है।
  • नए कौशलों को शीघ्र सीखने में सहायक होता है।
  • शिक्षक के आदर्श व्यवहार का विद्यार्थियों पर प्रभाव पड़ता है।

प्रश्न 37. सीखने के तत्परता के नियम से आपका क्या आशय है?

उत्तर: थार्नडाइक के तत्परता के नियम के अनुसार जब व्यक्ति किसी कार्य को करने या सीखने के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार होता है, तब उस कार्य को करने से उसे संतोष मिलता है और अधिगम अधिक प्रभावी होता है।

इसके विपरीत, तैयार न होने पर किसी कार्य को करने के लिए बाध्य किए जाने से असंतोष उत्पन्न हो सकता है। इसलिए शिक्षक को विद्यार्थियों में सीखने की रुचि, आवश्यकता और तैयारी उत्पन्न करनी चाहिए।

प्रश्न 38. मानसिक थकान से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: निरन्तर मानसिक कार्य, अत्यधिक एकाग्रता या पर्याप्त विश्राम के अभाव के कारण मानसिक कार्यक्षमता में अस्थायी कमी आने की स्थिति को मानसिक थकान कहते हैं।

मानसिक थकान के प्रमुख लक्षण-

  • कार्य में रुचि कम होना।
  • ध्यान और एकाग्रता में कमी आना।
  • बार-बार त्रुटियाँ होना।
  • चिड़चिड़ापन या ऊब अनुभव होना।
  • सोचने और निर्णय लेने की गति कम होना।
  • मानसिक भारीपन तथा विश्राम की इच्छा होना।

प्रश्न 39. कोहलर के अन्तर्दृष्टि सिद्धान्त से आपका क्या तात्पर्य है?

उत्तर: कोहलर के अनुसार सीखना केवल बार-बार प्रयत्न और भूल का परिणाम नहीं है, बल्कि समस्या-स्थिति को समग्र रूप में समझकर उसके विभिन्न भागों के सम्बन्ध को अचानक पहचान लेने से भी होता है। इसे अन्तर्दृष्टि या सूझ द्वारा सीखना कहते हैं। यह गेस्टाल्ट मनोविज्ञान पर आधारित है।

कोहलर ने चिम्पैंजियों, विशेष रूप से सुल्तान, पर प्रयोग किए। समस्या की सम्पूर्ण स्थिति का निरीक्षण करने के बाद चिम्पैंजी ने उपलब्ध साधनों—जैसे छड़ी या बक्सों—का उचित सम्बन्ध समझकर केले प्राप्त किए।

अन्तर्दृष्टि अधिगम की प्रमुख विशेषताएँ-

  • समस्या की सम्पूर्ण परिस्थिति का प्रत्यक्षीकरण होता है।
  • समस्या के विभिन्न भागों के सम्बन्ध को समझा जाता है।
  • समाधान अपेक्षाकृत अचानक सूझ सकता है।
  • बुद्धि, अनुभव और परिस्थिति की समझ महत्त्वपूर्ण होती है।
  • प्राप्त सूझ को समान परिस्थितियों में उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न 40. सीखने में परिपक्वता का योगदान बताइये।

उत्तर: परिपक्वता शरीर, मस्तिष्क और स्नायु-तन्त्र में होने वाला स्वाभाविक जैविक विकास है, जो बालक को किसी कार्य को सीखने के लिए आवश्यक तैयारी प्रदान करता है। सीखना और परिपक्वता एक-दूसरे से सम्बन्धित हैं, परन्तु दोनों समान नहीं हैं।

सीखने में परिपक्वता का योगदान-

  • परिपक्वता बालक को नई क्रियाएँ सीखने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार करती है।
  • आवश्यक स्नायविक एवं पेशीय विकास होने के बाद ही अनेक कौशल प्रभावी रूप से सीखे जा सकते हैं।
  • परिपक्वता के स्तर के अनुरूप दिया गया प्रशिक्षण अधिक प्रभावी होता है।
  • समय से पहले कठिन कार्य सिखाने पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिलते।
  • परिपक्वता सीखने की सम्भावना उत्पन्न करती है, जबकि अभ्यास और अनुभव उस क्षमता को विकसित करते हैं।
UP DELED Study App

Semester 1 की Complete तैयारी

  • Official Syllabus
  • Comprehensive Notes
  • Quick Revision Notes
  • Visual Revision Notes
  • Audio Revision
  • Solved MCQs
  • MCQ Tests
  • 2015–2025 Previous Year Papers
  • Repeated Exam Questions
  • 10 Model Papers
App में पढ़ाई शुरू करें

Question Paper PDF

इस प्रश्न पत्र की PDF डाउनलोड करें।

PDF Download

बाल विकास एवं सीखने की प्रक्रिया Previous Year Paper 2016

Solved question paper PDF download.

Complete 10 Years Solved PYQ Collection

2015 से 2025 तक के solved previous year papers, महत्वपूर्ण प्रश्न, उत्तर एवं PDF resources एक ही package में प्राप्त करें और अपनी UP DELED परीक्षा की तैयारी को मजबूत बनाएं।

PDF Store Join Telegram