वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. किशोरावस्था को गम्भीर उथल-पुथल की अवस्था कहा है-
(a) स्टेनले हॉल ने
(b) स्किनर ने
(c) ब्रूनर ने
(d) बागले ने
उत्तर: (a) : किशोरावस्था को गम्भीर उथल-पुथल, बड़े संघर्ष, तूफान एवं विरोध की अवस्था स्टेनले हॉल ने कहा है। किशोरावस्था को मनुष्य के जीवन का वसंतकाल माना गया है, यह काल 12-19 वर्ष तक रहता है।
प्रश्न 2. $\frac{\text{मानसिक आयु}}{\text{वास्तविक आयु}} \times 100$ सूत्र से मापन किया जाता है-
(a) अर्जित ज्ञान का
(b) बुद्धि-लब्धि का
(c) आयु का
(d) लम्बाई का
उत्तर: (b) : $\frac{\text{मानसिक आयु}}{\text{वास्तविक आयु}} \times 100$ सूत्र से बुद्धि-लब्धि का मापन किया जाता है। यह सूत्र 1912 ई. में जर्मन मनोवैज्ञानिक विलियम स्टर्नबर्ग द्वारा दिया गया था।
प्रश्न 3. वह मानसिक योग्यता जिसके द्वारा व्यक्ति किसी नवीन रचना को प्रस्तुत करता है, कहलाती है-
(a) ज्ञान
(b) योग्यता
(c) सृजनात्मकता
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (c) : वह मानसिक योग्यता जिसके द्वारा व्यक्ति किसी नवीन रचना को प्रस्तुत करता है, 'सृजनात्मकता' कहलाती है। सृजनात्मकता जन्मजात व अर्जित होती है। यह सार्वभौमिक होती है। सृजनात्मकता का विकास बाल्यावस्था से प्रारम्भ हो जाता है। 30 वर्ष की आयु तक सृजनात्मकता अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाती है।
प्रश्न 4. शारीरिक रचना, बुद्धि-रुचि, व्यक्तित्व आदि में एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से भिन्न होना कहलाता है-
(a) सामूहिक भिन्नता
(b) बौद्धिक भिन्नता
(c) शारीरिक भिन्नता
(d) वैयक्तिक भिन्नता
उत्तर: (d) : शारीरिक रचना, बुद्धि-रूचि, व्यक्तित्व आदि में एक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से भिन्न होना "वैयक्तिक भिन्नता" कहलाता है।
प्रश्न 5. संज्ञानात्मक क्षमता की कमी से व्यक्ति को कठिनाई होती है-
(a) शारीरिक विकास में
(b) बौद्धिक विकास में
(c) व्यावसायिक विकास में
(d) समायोजन में
उत्तर: (b) : संज्ञानात्मक क्षमता की कमी से व्यक्ति को 'बौद्धिक विकास' में कठिनाई होती है। संज्ञानात्मक क्षमता की कमी से व्यक्ति को औसत व्यक्ति की तुलना में, एक या अधिक प्रकार के मानसिक कार्यों को पूर्ण करने में अधिक कठिनाई होती है। यह कम संज्ञानात्मक क्षमता अनुकूली व्यवहार, बौद्धिक कार्यात्मक प्रदर्शन और व्यक्ति की अधिगम की क्षमता को प्रभावित करता है।
प्रश्न 6. सिगमण्ड फ्रॉयड द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व विकास के सिद्धान्त को कहा जाता है-
(a) शारीरिक विकास का सिद्धान्त
(b) भावात्मक विकास का सिद्धान्त
(c) मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त
(d) ज्ञानात्मक सिद्धान्त
उत्तर: (c) : सिगमण्ड फ्रायड आस्ट्रिया (वियना) के निवासी थे। सिगमण्ड फ्रायड ऐसे प्रथम मनोवैज्ञानिक हैं, जिन्होंने मूल प्रवृत्तियों को मानव व्यवहार का निर्धारित तत्व माना है। फ्रायड के व्यक्तित्व सम्बन्धी विचारों को मनोलैंगिक विकास का सिद्धान्त कहा जाता है। सिगमण्ड फ्रॉयड द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व विकास के सिद्धान्त को "मनोविश्लेषणात्मक सिद्धान्त" कहा जाता है।
प्रश्न 7. परोक्ष वस्तुओं के सम्बन्ध में चिन्तन कहलाता है-
(a) कल्पना
(b) चिन्तन
(c) तर्क
(d) स्मृति
उत्तर: (a) : परोक्ष वस्तुओं के सम्बन्ध में चिन्तन 'कल्पना' कहलाता है। 'कल्पना' वह आभासी मानसिक क्रिया है, जिसके द्वारा पुराने अनुभवों तथा घटनाओं को एक संगठित रूप में पुनः स्मरण करते हैं।
प्रश्न 8. किसी समस्या का समाधान करने के लिए गत अनुभवों को नये ढंग से समायोजित किया जाना कहलाता है-
(a) तर्क
(b) चिन्तन
(c) कल्पना
(d) स्मृति
उत्तर: (a) : किसी समस्या का समाधान करने के लिए गत अनुभवों को नये ढंग से समायोजित किया जाना "तर्क" कहलाता है। गैरेट के अनुसार- "मन में किसी उद्देश्य एवं लक्ष्य को रखकर क्रमानुसार चिन्तन करना "तर्क" है।" वुडवर्थ के अनुसार- "तर्क में (तथ्यों एवं सिद्धान्तों) जो स्मृति या वर्तमान निरीक्षण द्वारा प्राप्त होते हैं, को परस्पर मिलाया जाता है, फिर उस मिश्रण का परीक्षण में से निष्कर्ष निकाला जाता है।"
प्रश्न 9. किसी के द्वारा विभिन्न परिस्थितियों में समायोजन कहलाता है-
(a) शारीरिक स्वास्थ्य
(b) संवेगात्मक विकास
(c) मानसिक स्वास्थ्य
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : किसी के द्वारा विभिन्न स्थितियों में समायोजन, शारीरिक स्वास्थ्य, संवेगात्मक विकास, मानसिक स्वास्थ्य आदि कहलाता है।
प्रश्न 10. सीखने की मात्रा तथा समय के सम्बन्ध को चित्रांकित करने वाली वक्र रेखा कहलाती है-
(a) अधिगम
(b) पठार वक्र
(c) सम्प्राप्ति वक्र
(d) बुद्धि-लब्धि वक्र
उत्तर: (a) : सीखने की मात्रा तथा समय के सम्बन्ध को चित्रांकित करने वाली वक्र रेखा अधिगम वक्र कहलाती है। अधिगम वक्र में शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया की प्रगति को दर्शाया जाता है।
प्रश्न 11. जब कोई बालक सीखने को तत्पर होता है, तब वह चीजों को जल्दी से सीखता है, यह थार्नडाइक के सीखने के किस नियम के अन्तर्गत आता है ?
(a) प्रभाव का नियम
(b) तत्परता का नियम
(c) अभ्यास का नियम
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (b) : तत्परता का नियम-जब कोई बालक सीखने को तत्पर होता है, तब वह चीजों को जल्दी से सीखता है। यह कुछ नया सीखने के लिए उत्सुकता और जिज्ञासा के स्तर को संदर्भित करता है। इसे थार्नडाइक का तत्परता का नियम कहते हैं।
प्रश्न 12. सीखने के किस सिद्धान्त के अन्तर्गत व्यक्ति सम्पूर्ण परिस्थिति के प्रत्यक्षीकरण के आधार पर सीखता है?
(a) प्रयत्न और भूल का सिद्धान्त
(b) सम्बद्ध प्रतिक्रिया का सिद्धान्त
(c) अनुकरण का सिद्धान्त
(d) अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्त
उत्तर: (d) : सीखने के गेस्टाल्ट सिद्धान्त, अन्तर्दृष्टि या सूझ का सिद्धान्त के अन्तर्गत व्यक्ति सम्पूर्ण परिस्थिति के प्रत्यक्षीकरण के आधार पर सीखता है।
प्रश्न 13. वे प्रेरक जिन्हें व्यक्ति अपने प्रयासों से प्राप्त करता है, कहलाते हैं-
(a) अर्जित प्रेरक
(b) जाग्रत प्रेरक
(c) निर्देशित प्रेरक
(d) व्यवहार को परिचालित प्रेरक
उत्तर: (a) : वे प्रेरक जिन्हें व्यक्ति अपने प्रयासों से प्राप्त करता है, अर्जित प्रेरक कहलाता है। अर्जित प्रेरक अपने जीवन के अनुभवों और सामाजिक संपर्क के माध्यम से सीखते (अर्जित) करते हैं।
प्रश्न 14. अधिगम, धारणा, पुनः स्मरण तथा पहचान आदि प्रक्रियाएँ आती हैं-
(a) ध्यान के अन्तर्गत
(b) कल्पना के अन्तर्गत
(c) रुचि के अन्तर्गत
(d) स्मृति के अन्तर्गत
उत्तर: (d) : अधिगम, धारणा, पुनःस्मरण तथा पहचान आदि प्रक्रियाएँ स्मृति के अन्तर्गत आती हैं।
प्रश्न 15. वह प्राप्तांक जो किसी प्रदत्त को दो बराबर भागों में बाँटता है, कहलाता है-
(a) समान्तर माध्य
(b) माध्यिका
(c) बहुलक
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (b) : वह प्राप्तांक जो किसी प्रदत्त को दो बराबर भागों में बाँटता है, माध्यिका कहलाता है。
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. बाल विकास के अन्तर्गत शैशवावस्था की आयु कितनी होती है?
उत्तर: बाल विकास के अन्तर्गत शैशवावस्था की आयु जन्म से 5 या 6 वर्ष होती है।
प्रश्न 17. जन्म के समय शिशुओं के भीतर कितने संवेग पाये जाते हैं?
उत्तर: शिशुओं के भीतर तीन संवेग पाये जाते हैं-भय, क्रोध व प्रेम।
प्रश्न 18. बुद्धि के बहुकारक सिद्धान्त का प्रतिपादन किसने किया?
उत्तर: बुद्धि के बहु-कारक सिद्धान्त का प्रतिपादन मनोवैज्ञानिक थॉर्नडाइक ने किया। इन्होंने बुद्धि को विभिन्न कारकों का मिश्रण माना है।
प्रश्न 19. अन्तर्मुखी व्यक्तित्व से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: अन्तर्मुखी व्यक्ति आत्मकेन्द्रित, चिन्तनशील तथा एकान्तप्रिय होते हैं। इस व्यक्तित्व के लक्षण, स्वभाव, आदतें, अभिवृत्तियाँ आदि वाह्य रूप में प्रकट नहीं होते हैं, इसीलिए इसको अन्तर्मुखी कहा जाता है।
प्रश्न 20. सामान्य बौद्धिक स्तर के बालक की बुद्धि-लब्धि कितनी होती है?
उत्तर: सामान्य बौद्धिक स्तर के बालक की बुद्धि-लब्धि 90 से 109 तक होती है।
प्रश्न 21. बुद्धि परीक्षण के लिए प्रयुक्त होने वाले टी.ए.टी. परीक्षण का निर्माण किसने किया ?
उत्तर: बुद्धि परीक्षण के लिए प्रयुक्त होने वाले टी.ए.टी. परीक्षण का निर्माण मनोवैज्ञानिक मुरे (1935) एवं मार्गन (1938) ने किया।
प्रश्न 22. बालक के केन्द्रक में सामान्यतया कितने गुणूसत्र होते हैं?
उत्तर: बालक के केन्द्रक में सामान्यतया 46 गुणूसत्र होते हैं।
प्रश्न 23. 'सीखने का स्थानान्तरण' सम्प्रत्यय को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सीखने का स्थानान्तरण-जब कोई सीखा गया कार्य किसी दूसरे कार्य में उपयोगी सिद्ध होता है, तो इसे सीखने या अधिगम का स्थानान्तरण कहते हैं।
प्रश्न 24. बालक के कोषों एवं पेशियों में समय पर ही कोई कार्य करने के योग्य होता है, क्या कहलाता है?
उत्तर: बालक के कोषों एवं पेशियों में समय के साथ-साथ होने वाला वह परिवर्तन जिसके कारण बालक निश्चित तौर पर ही कोई कार्य करने के योग्य होता है, परिपक्वता कहलाता है।
प्रश्न 25. वैयक्तिक एवं सामूहिक बुद्धि परीक्षण में मुख्य अन्तर क्या है?
उत्तर:
- (1) वैयक्तिक परीक्षण एक व्यक्ति का किया जाता है और सामूहिक परीक्षण पूरे समूह का किया जाता है।
- (2) व्यक्तिगत परीक्षणों में वस्तुनिष्ठता और प्रामाणिकता कम होती है। जबकि सामूहिक परीक्षणों में ये गुण अधिक होते हैं।
- (3) व्यक्तिगत परीक्षणों द्वारा छोटे एवं बड़े दोनों का ही परीक्षण हो सकता है लेकिन सामूहिक परीक्षणों द्वारा बहुत छोटे बालकों का परीक्षण नहीं हो सकता।
प्रश्न 26. पावलाव ने सीखने से सम्बन्धित अपने सिद्धान्त का प्रतिपादन किसके ऊपर प्रयोग करके किया?
उत्तर: इवान पावलाव, एक रूसी मनोवैज्ञानिक ने 'शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त' को प्रतिपादित किया है जो इस बात पर जोर दिया है कि एक आदत के रूप में सीखना साचर्य और प्रतिस्थापन के सिद्धांत पर आधारित है। पावलाव के शास्त्रीय अनुबंधन के प्रयोग में कुत्ता शामिल था।
प्रश्न 27. थार्नडाइक ने अपने सीखने के सिद्धान्त के अन्तर्गत कितने नियमों की चर्चा की है?
उत्तर: थार्नडाइक ने अपने सीखने के सिद्धान्त के अन्तर्गत तीन नियमों की चर्चा की।
- (1) प्रभाव का नियम
- (2) अभ्यास का नियम
- (3) तत्परता का नियम
प्रश्न 28. प्यास, भूख, निद्रा, प्रतिष्ठा में से कौन-सा अर्जित अभिप्रेरणा के अन्तर्गत आता है?
उत्तर: प्यास, भूख, निद्रा, प्रतिष्ठा में से प्रतिष्ठा अर्जित अभिप्रेरणा के अन्तर्गत आता है। अर्जित अभिप्रेरणा : कुछ अभिप्रेरणा ऐसे होते हैं जो व्यक्ति के समाज में रहने तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण के प्रभाव के कारण निर्मित होते हैं। इन अभिप्रेरणों को अर्जित अभिप्रेरण कहते हैं।
प्रश्न 29. सीखी गई सामग्री को पुनः स्मरण रखने की असफलता क्या कहलाती है?
उत्तर: सीखी गयी सामग्री को पुनः स्मरण रखने की असफलता विस्मृति कहलाती है। विस्मृति विस्मृति से तात्पर्य स्मरण की विफलता से है। जब व्यक्ति अपने भूतकाल के अनुभवों को चेतन में लाने में असफल हो जाता है तब उसे विस्मृति कहते हैं। जिस प्रकार जीवन को उपयोगी तथा सुखी बनाने के लिए स्मृति आवश्यक है उसी प्रकार हमारे जीवन में विस्मृति की उपयोगिता तथा महत्व है।
प्रश्न 30. किसी अवर्गीकृत प्रदत्त में सबसे अधिक बार आने वाली संख्या क्या कहलाती है?
उत्तर: किसी अवर्गीकृत प्रदत्त में सबसे अधिक बार आने वाली संख्या बहुलक कहलाती है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. जन्म से किशोरावस्था तक बच्चे के सामाजिक विकास को विस्तार से समझाइए।
उत्तर: सामाजिक विकास-मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। जन्म से ही वह अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति समाज के बिना नहीं कर पाता है। अच्छा सामाजिक जीवन व्यतीत करने के लिए उसमें सामाजिक गुणों का विकास होना आवश्यक है। सामाजिक विकास से तात्पर्य होता है-समूह में एक साथ रहकर समाज के प्रति अच्छा व्यवहार।
(1) शैशवावस्था में सामाजिक विकास (Social Development in Infancy) - शैशवावस्था से तात्पर्य जन्म से 2 वर्ष की अवस्था से होता है। जन्म के समय शिशु का व्यवहार सामाजिकता से काफी दूर रहता है। फिर वह जब घरेलू परिस्थितियों में बालक माता-पिता, भाई-बहन, परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अन्तः क्रिया करके विशेष सामाजिक अनुभूतियाँ प्राप्त करता है। शिशुओं में सामाजिक विकास उनके प्रारम्भिक व्यवहार बहुत ही स्वार्थी और अहं भरा हुआ होता है। वे अपने खिलौने से दूसरे को खेलते हुए नहीं देख सकते हैं। लेकिन 2 साल के अंत में बालक साथियों की ओर उन्मुख हो जाता है अब वह मिलजुल कर खेलना पसंद करते हैं।
(2) बाल्यावस्था में सामाजिक विकास (Social Development in Childhood)- बाल्यावस्था से तात्पर्य है 2 वर्ष से 12 वर्ष की अवस्था से होता है। बाल्यावस्था में सामाजिक विकास को दो भागों में बाँटा गया है-
- (i) प्रारंभिक बाल्यावस्था में सामाजिक विकास (2-6 वर्ष)
- (ii) उत्तर बाल्यावस्था में सामाजिक विकास (6-12 वर्ष)
प्रारंभिक बाल्यावस्था में बालक घर के बाहर अपने उम्र के बच्चों के साथ संपर्क करना शुरू कर देता है वह अन्य बालकों के साथ संपर्क करना शुरू कर देता है जिससे उसका सामाजिक विकास होता है। बालक इस अवस्था में मित्र बनाने लगते हैं तथा सहयोग की भावना का विकास होता है। उत्तर बाल्यावस्था में बालकों में सामाजिक विकास काफी तेजी से देखने को मिलता है। इस अवस्था में बालक में सामाजिक सूझ, उत्तरदायित्व तथा प्रतिस्पर्धा (Comptition), सहयोग की भावना उत्पन्न हो जाती है। इसके साथ ही सहनशीलता की भावना बढ़ जाती है。
(3) किशोरावस्था में सामाजिक विकास (Social Development in Adolescence)-किशोरावस्था की आयु का काल 12 वर्ष से शुरू होकर 18 वर्ष तक होता है। इस अवस्था में किशोरों में तीव्र परिवर्तन और समायोजन होता है। जैसे शारीरिक मानसिक तथा संवेगात्मक विकास के साथ-साथ सामाजिक विकास की प्रक्रिया भी चलती रहती है। लड़के एवं लड़कियाँ एक-दूसरे के प्रति आकर्षण रखते हैं तरह-तरह की वेशभूषा, हाव-भाव द्वारा विपरीत लिंग के प्रति ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने का प्रत्यन करते दिखलाई पड़ते है। किशोरावस्था में व्यक्ति में नया सामाजिक समूहन देखने को मिलता है। वह सामाजिक समूह का सदस्य बनकर समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करना चाहता है। उनमें नेतृत्व की भावना का विकास हो जाता है。
प्रश्न 32. बच्चे के मानसिक विकास में 'वंशानुक्रम और वातावरण' का सापेक्षिक महत्व है, पर समीक्षात्मक व्याख्या दीजिए।
उत्तर: बच्चे के विकास की विभिन्न अवस्थाओं में होने वाले मानसिक विकास को अनेक घटक प्रभावित करते हैं। समाज, वातावरण, परिवार तथा अन्य परिस्थितियाँ इससे सम्बन्धित हैं। ये सब मानसिक विकास की गति को प्रभावित करते हैं。
बच्चे के मानसिक विकास में वंशानुक्रम का सापेक्षिक महत्व-वंशानुक्रम के प्रभाव से सभी बच्चों की शारीरिक संरचना में विविधता होती है। अतः इसके आधार पर एक शिक्षक बच्चों की शारीरिक संरचना के आधार पर उसके विकास में ध्यान दे सकता है। वंशानुक्रम के कारण बच्चों की जन्मजात क्षमताओं में भी अन्तर पाया जाता है। वंशानुक्रम बच्चे की मानसिक क्षमता को भी प्रभावित करता है। कोई भी बच्चा उससे अधिक विकास नहीं कर सकता जितना उसका वंशानुक्रम संभव बनाता है。
बच्चे के मानसिक विकास में वातावरण का सापेक्षिक महत्व-वातावरण का प्रभाव बच्चों की भावनाओं पर व्यापक रूप से पड़ता है। वातावरण बच्चे के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है, वातावरण के माध्यम से ही बालक के विकास की दिशा निर्धारित होती है। बच्चों के मानसिक विकास पर भी वातावरण का गहरा प्रभाव पड़ता है। अच्छे वातावरण में बालक का मानसिक विकास अच्छे से होता है। एक अच्छे वातावरण में बच्चे के सीखने में रूचि का विकास होता है。
प्रश्न 33. सीखने के पठार के कारण एवं उन्हें दूर करने के उपाय बताइए।
उत्तर: सीखने के पठार के कारण सीखने के पठार के निम्नलिखित कारण हैं-
- (i) प्रेरणा का प्रभाव-किसी कार्य को सीखने के लिए यदि प्रेरणा का प्रभाव नहीं है तो बच्चों के दिमाग में पठार बनना शुरू हो जाता है।
- (ii) व्यवधान अधिगम करते समय बीच में यदि किसी प्रकार का व्यवधान (बाधा) जैसे-शोरगुल होने लगे तो बच्चों के मष्तिस्क में पठार बनना शुरू हो जाता है।
- (iii) पुरानी आदतों का नयी आदतों से संघर्ष इसका तात्पर्य यह है कि यदि कोई छात्र अपनी पुरानी आदत से कोई कार्य करता है। और बाद में उसे नयी आदतों को अपनाना पड़ता है। इस स्थिति में उसे कठिनाई का सामना करना पड़ता है। जैसे-यदि छात्र बाएँ हाथ से लिखता है और उसे दाएँ हाथ से लिखने को कहा जाता है। तो वह जल्दी या तेजी से नहीं लिख पाता है जिससे अधिगम (सीखने) में पठार बन जाते हैं।
- (iv) सीखने की अनुचित विधि-लिखने में कलम को कसकर पकड़ना, शब्द को रूककर पढ़ना, उंगुलियों की सहायता से गिनती गिनना आदि अनुचित विधि है। इन विधियों को अपनाने से अधिगम में पठार बन जाते हैं।
- (v) अभ्यास का प्रभाव-थार्नडाइक के सीखने के नियम में अभ्यास को सबसे महत्वपूर्ण दिया गया। यदि अभ्यास गलत तरीके से हुआ है तो सीखने में पठार स्थान शीघ्र आ जायेगा।
- (vi) एक ही कार्य को लम्बे समय तक करते रहना-इसके अनुसार यदि एक ही कार्य को बहुत अधिक समय तक किया जाता है तो कुछ समय बाद उस कार्य में रूचि और ध्यान नहीं लग पाता है जिससे अधिगम में पठार बनना शुरू हो जाता है।
सीखने के पठार को दूर करने के उपाय-सीखने के पठार को दूर करने के निम्नलिखित उपाय हैं-
- (i) विश्राम-विश्राम, सीखने के पठार को दूर करने के लिए एक अच्छा उपाय है। सीखने में बीच-बीच में विश्राम करना चाहिए जिससे हमारे मस्तिष्क को आराम मिले। ऐसा करने से अधिगम में पठार नहीं आता है।
- (ii) बाल केन्द्रित शिक्षा बाल केन्द्रित शिक्षा में बालक को केन्द्र मानकर शिक्षा दी जाती है। बाल केन्द्रित शिक्षा का आजकल प्रचलन है, इससे बालकों में शिक्षा के प्रति रूचि उत्पन्न होती है और पठार भी दूर हो जाता है।
- (iii) शिक्षण विधि में परिवर्तन-शिक्षण विधि में बीच-बीच में परिवर्तन करने से अधिगम में पठार नहीं बनता है।
- (iv) पुनर्बलन का प्रयोग बालकों को समय समय पर अभिप्रेरित करना चाहिए, अच्छे कार्यों पर उसे अच्छे शब्दों द्वारा पुरस्कृत करना चाहिए। अतः पुनर्बलन के प्रयोग से भी पठार नहीं आता है।
- (v) खेल विधि द्वारा शिक्षा खेल-खेल में शिक्षा देना बहुत प्रभावी होता है। बच्चे खेलना अधिक पसंद करते हैं अतः खेल-खेल से दी गई शिक्षा अधिक प्रभावी होती है इस विधि से सीखने पर पठार भी नहीं बनता है।
- (vi) सीखने के समय का वितरण-सीखने के पठार को कम करने के लिए सीखने के समय को छोटे-छोटे समय में बाँट दिया जाता है।
प्रश्न 34. पावलाव के सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त क्या हैं? इस सिद्धान्त का चित्र भी बनाइए।
उत्तर: पावलाव के सम्बद्ध प्रतिक्रिया सिद्धान्त-पावलाव ने अपने सीखने के सिद्धान्त का आधार अनुबंधन को माना है। अनुबंधन के द्वारा उद्दीपन (Stimulus) तथा अनुक्रिया (Response) के बीच एक साह्वर्य स्थापित होता है। इस सिद्धान्त को क्लासिकी अनुबंधन सिद्धान्त या प्रतिवादी अनुबंधन सिद्धान्त भी कहा जाता है। पावलाव के सिद्धान्त के अनुसार, "कोई स्वाभाविक उद्दीपन, सीखने वाले प्राणी के सामने उपस्थित किया जाता है तो वह उसके प्रति एक स्वाभाविक अनुक्रिया करता है।" जैसे गर्म बर्तन को छूते ही हाथ को खींच लेना तथा भूखा होने पर भोजन देखकर मुँह में लार का आना। पावलाव ने स्वभाविक उद्दीपन को दर्शाने के लिए कुत्ते पर एक प्रयोग किया जिसमें एक भूखे कुत्ते को एक ध्वनि नियंत्रित प्रयोगशाला में एक विशेष उपकरण के सहारे खड़ा कर दिया गया। कुत्ते के सामने भोजन लाया गया चूँकि कुत्ता भूखा था इसलिए भोजन देखकर उसके मुँह में लार आ गया। कुछ प्रयासों के बाद भोजन देने के पहले एक घंटी बजायी गयी। यह क्रिया कुछ दिनों तक दोहराई गयी तथा देखा गया कि बिना भोजन आये ही मात्र घंटी की आवाज पर कुत्ते के मुँह से लार निकलना शुरू हो गया। पावलाव के अनुसार कुत्ते ने घंटी की आवाज पर लार के स्राव करने की क्रिया को सीख लिया। घंटी की आवाज तथा लार के स्राव के बीच एक नया सहचर्य कायम हुआ जिसे अनुबंधन की संज्ञा दी गयी। पावलाव ने अनुबंधित उद्दीपक घंटी की ध्वनि के साथ स्वभाविक उद्दीपक भोजन से स्त्राव में वृद्धि होने को पुनर्बलन कहा। सीखने के इस सिद्धान्त को पावलाव ने अनुबंधित सह क्रिया कहा जाता है।
- (1) U.C.S (भोजन) $\rightarrow$ कुत्ता $\rightarrow$ UCR (लार) स्वभाविक क्रिया
- (2) C.S (घंटी) + U.C.S (भोजन) $\rightarrow$ कुत्ता $\rightarrow$ UCR $\rightarrow$ स्वभाविक क्रिया
- (3) C.S (घंटी) $\rightarrow$ कुत्ता $\rightarrow$ CR $\rightarrow$ अस्वभाविक क्रिया
Note-
- (i) पावलाव के सिद्धान्त में घंटी के माध्यम से लार का आना एक अस्वभाविक क्रिया है। अतः घंटी एक अनुकूलित / अनुबंधित अस्वभाविक उद्दीपक कहलाता है।
- (ii) पावलाव के अनुसार व्यक्ति किसी उद्दीपक के माध्यम से कोई भी कार्य, अनुक्रिया करता हो तो वह अपने आस-पास की परिस्थितियों के साथ अनुबंधन कर लेता है।
प्रश्न 35. अभिप्रेरणा किसे कहते हैं? अभिप्रेरणा के प्रकार बताइए।
उत्तर: अभिप्रेरणा-मैकड्यूगल के अनुसार, "अभिप्रेरणा वे शारीरिक या मानसिक दशाएँ हैं जो किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित करती हैं।"
स्किनर के अनुसार, "अभिप्रेरणा अधिगम का सर्वोच्च राजपथ है।"
गुड के अनुसार, "किसी कार्य को आरम्भ करने, जारी रखने और नियमित बनाने की प्रक्रिया को अभिप्रेरणा कहते हैं।"
अभिप्रेरणा के प्रकार-अभिप्रेरणा मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है-
- (1) आन्तरिक या सकारात्मक अभिप्रेरणा-इसमें बालक किसी कार्य को अपने स्वयं की इच्छा से करता है तथा सुख और सन्तोष की अनुभूति को प्राप्त करता है।
- (2) बाह्य या नकारात्मक अभिप्रेरणा-इस अभिप्रेरणा में बालक किसी दिये हुए कार्य को स्वयं न करके किसी दूसरे की इच्छा या बाह्य प्रेरणा के कारण करता है। इसमें शिक्षक निन्दा, पुरस्कार प्रशंसा आदि नकारात्मक प्रेरणा प्रदान करता है।
प्रश्न 36. ध्यान एवं रुचि में क्या सम्बन्ध है? एक ऐसी सूची बनाएँ जिससे आप कक्षा में बच्चों में रुचि उत्पन्न कर सकते हैं?
उत्तर: ध्यान एवं रूचि में सम्बन्ध-ध्यान व रूचि का घनिष्ठ सम्बन्ध है। जिन वस्तुओं में हमारी रूचि होती है, ध्यान उसी में केन्द्रित होता है। मैकडूगल ने रूचि को गुप्त ध्यान कहा है और ध्यान को सक्रिय रूचि बताया है। रूचि एक मानसिक संरचना (Mental Structure) है और ध्यान एक मानसिक क्रिया (Mental Process) है। ध्यान एवं रूचि के सम्बन्ध में निम्नलिखित विचार प्रस्तुत किये गये हैं-
- (1) ध्यान रूचि पर निर्भर है-रूचि, ध्यान का संचालन करती है। अर्थात् बिना रूचि के ध्यान की क्रिया नहीं हो सकती है। व्यक्ति उन्हीं वस्तुओं पर ध्यान देता है जिसमें उसकी रूचि होती है। अतः रूचि ध्यान के रूप में प्रकट होती है। जैसे-बालक पढ़ने के समय खेल पर ध्यान नहीं देते पर अवधान रूचि के रूचि में छिपा रहता है।
- (2) रूचि ध्यान पर निर्भर है-जब तक व्यक्ति किसी वस्तु पर ठीक से ध्यान नहीं देता, उसकी रूचि उसमें नहीं हो सकती। जैसे-बालकों को गणित विषय प्रायः बहुत कठिन लगता है, किन्तु यदि वे ध्यान पूर्वक गणित पढ़ना आरम्भ कर दे तो उनकी रूचि उत्पन्न हो जायेगी। इस प्रकार ध्यान के अभाव में रूचि असम्भव है
- (3) रूचि और ध्यान एक सिक्के के दो पहलू हैं-उपर्युक्त दोनों मतों के अनुसार, यह स्पष्ट होता है कि ध्यान और रूचि एक-दूसरे पर आधारित हैं। रास के अनुसार, "ध्यान और रूचि एक ही वस्तु को देखने के केवल दो भिन्न तरीके हैं जैसे एक सिक्के के दो पहलू।" रूचि व्यक्ति के अन्दर छिपी रहती है और ध्यान में क्रियाशीलता होती है।
विद्यालय की कक्षा में बच्चों की रूचि जाग्रत करने के लिए निम्नलिखित उपाय किये जा सकते हैं-
- छात्रों से मिट्टी के लिखौने बनवायें जायें।
- मिट्टी के खिलौने को रंगने के लिये कहा जाये
- बच्चों से पौधा रोपण कराया जाये।
- बच्चों से हैण्डीक्राफ्ट का कार्य करवाया जाये।
- बच्चों के लिए दृश्य-श्रव्य सामग्री का उपयोग किया जाये।
प्रश्न 37. शिक्षा में वैयक्तिक भिन्नताओं के प्रभाव की विवेचना कीजिए।
उत्तर: शिक्षा में वैयक्तिक भिन्नताओं के प्रभाव-शिक्षा व्यक्ति में पर्याप्त परिवर्तन कर देती है, जो व्यक्ति साक्षर होते हैं वे निरक्षर व्यक्तियों से काफी भिन्नताएँ रखते हैं। शिक्षा में वैयक्तिक भिन्नताओं के प्रभाव निम्नलिखित हैं-
- (1) वातावरण का प्रभाव-एक अच्छे वातावरण में बालक की शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से होती है। जहाँ का वातावरण शांत होता है बच्चा वहाँ पर अधिक सीखता है। इसके विपरीत जहाँ का वातावरण कुसमायोजित होता है वहाँ पर बच्चा सही से सीख नहीं पाता है और वह अपने आप को कुसमायोजित समझता है।
- (2) वंशानुक्रम का प्रभाव-कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार वैयक्तिक भिन्नता का मूल कारण वंशानुक्रम है। बुद्धिमान माता-पिता की सन्ताने अधिक बुद्धिमान होती हैं तथा मन्द बुद्धि माता-पिता की सन्तानें प्रायः कम बुद्धिमान होती हैं।
- (3) लिंग भेद-शिक्षा में लिंग भेद वैयक्तिक भिन्नताओं को प्रभावित करती है। बालक-बालिकाओं की शारीरिक बनावट, बौद्धिक क्षमता में काफी अन्तर पाया जाता है। बालिकाओं की स्मरण शक्ति बालकों की अपेक्षा तीव्र होती है। यदि बालक गणित और विज्ञान में अधिक कुशाग्र होते हैं तो बालिकाएँ साहित्य और कला कला में विशेष निपुण होती हैं।
प्रश्न 38. स्मृति को परिभाषित कीजिए। स्मृति के विभिन्न प्रकारों को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर: स्मृति की परिभाषा हिलगार्ड के अनुसार, "स्मृति वह मानसिक प्रक्रिया है जिसमें अतीत में सीखे गये ज्ञान, अनुभव या कौशल का पुनः स्मरण किया जाता है।"
वुडवर्थ के अनुसार, "स्मृति सीखी हुई वस्तु का सीधा उपयोग है।"
स्मृति के प्रकार-स्मृति निम्नलिखित प्रकार की होती है-
- (i) स्थायी स्मृति-वह स्मृति जिसमें याद की हुई चीजें अधिक दिनों तक रहती है स्थायी स्मृति कहलाती है।
- (ii) अस्थायी स्मृति-वह स्मृति जिसमें याद की हुई चीजें अधिक दिनों तक नहीं रहती हैं जल्दी भूल जाती है अस्थायी स्मृति कहलाती है।
- (iii) सक्रिय स्मृति-जब कोई घटना, तथ्य आवश्यकता Active Memory पड़ने पर तुरन्त स्मरण हो जाये तो इस प्रकार की स्मृति सक्रिय स्मृति कहलाती हैं।
- (iv) निष्क्रिय स्मृति-इसमें बिना किसी प्रयत्न के ही कोई भी बातें स्मृति में बनी रहती है।
- (v) तार्किक स्मृति-इस स्मृति में तर्क एवं चिन्तन शक्ति का विकास होता है। इससे वैज्ञानिक सोच विकसित होती है।
- (vi) यान्त्रिक स्मृति-इसमें कुछ कार्य यन्त्रवत् स्वतः होते रहते हैं
- (vii) शुद्ध स्मृति-इस स्मृति में कोई कार्य व्यवस्थित ढंग से सीखा जाता है।
- (viii) रटन्त स्मृति-इसमें तथ्यों को रटकर याद किये जाते हैं
प्रश्न 39. आप कक्षा में बच्चों के भूलने की क्रिया को कैसे नियन्त्रित करेंगे? भूलने की गति को रोकने के उपाय सुझाइए।
उत्तर: कक्षा में बच्चों के भूलने की क्रिया को नियन्त्रित करना-अगर बच्चा बार-बार बताई गयी एक ही बात को भूल जाता है तो इसके लिए उसे डांटे या मारे नहीं। यदि बच्चे को गृहकार्य के रूप में 1 से 30 तक की गिनती याद करने को दिया गया है तो इसे बच्चे को एक बार में न याद करायें। इसके लिए समय को 2-3 अन्तराल में बाँट दें। जैसे-सबसे पहले तय किये गये समय में बच्चे को सिर्फ 1 से 10 तक ही गिनती याद करायें। इसके अगले दिन 10 से 30 तक गिनती याद कराये। इसके बाद इसका रिवीजन करवायें। ऐसा करने से बच्चों में भूलने की क्रिया को नियन्त्रित किया जा सकता है।
भूलने की गति को रोकने के उपाय-इसके निम्न उपाय हैं-
- (1) गेम्स खेलें-अनेक प्रकार के गेम्स हैं जो बच्चे की याददाश्त को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। बच्चों के लिए ब्रेन स्टॉर्निंग इनडोर गेम्स अधिक उपयोगी हैं।
- (2) बार-बार बच्चे की गलती याद न दिलाएँ-यदि बच्चों को कोई बात दस बार बताई गयी हो लेकिन वह फिर भी उसे याद नहीं कर पा रहा है तो उसे यह न बोले की आपने उसे वह बात दस बार बताई है। बच्चों को अलग-अलग तरीकों से उसे याद दिलाने की कोशिश करें।
प्रश्न 40. सांख्यिकी से आप क्या समझते हैं? सांख्यिकी के प्रकारों की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
उत्तर: सांख्यिकी-सांख्यिकी एक गणितीय विज्ञान हैं जिसमें किसी वस्तु / अवयव / तन्त्र / समुदाय से सम्बन्धित आँकड़ों का संग्रह, विश्लेषण, व्याख्या या स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाता है। इसका क्षेत्र व्यापक है। इसमें प्राकृतिक विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, मानविकी, सरकार और व्यापार आदि शामिल हैं।
सांख्यिकी के प्रकार-इसके निम्नलिखित प्रकार हैं-
- (i) वर्णनात्मक सांख्यिकी-वर्णानात्मक सांख्यिकी में नमूना, और जनसंख्या डेटा (आँकड़ा) के गुणों का अध्ययन किया जाता है। जैसे-किसी शहर में इंटरनेट या टेलीविजन का उपयोग करने वाले लोगों का समूह।
- (ii) अनुमानात्मक सांख्यिकी-इसमें परिकल्पनाओं का परीक्षण करने और निष्कर्ष निकालने के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे-काल्पनिक शोध से अनुमान प्राप्त करना।