वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. य, र, ल, व व्यंजन होते है-
(a) ऊष्म व्यंजन
(b) स्पर्श व्यंजन
(c) अन्तस्थ व्यंजन
(d) संयुक्त व्यंजन
उत्तर: (c) : 'य, र, ल, व' अन्तस्थ व्यंजन कहलाते हैं। 'क्ष, त्र, ज्ञ, श्र' संयुक्त व्यंजन कहलाते हैं। क से म तक के व्यंजन स्पर्श व्यंजन कहलाते हैं। 'श, ष, स, ह' ऊष्म व्यंजन कहलाते हैं।
प्रश्न 2. शुद्ध वर्तनी युक्त शब्द है-
(a) उपरोक्त
(b) उपर्युक्त
(c) उपरियुक्त
(d) ऊपर उक्त
उत्तर: (b) : 'उपर्युक्त' शुद्ध वर्तनी वाला शब्द है जबकि अन्य शब्दों में त्रुटियाँ है।
प्रश्न 3. 'साकेत' महाकाव्य के लेखक हैं-
(a) जयशंकर प्रसाद
(b) विष्णु प्रभाकर
(c) मैथलीशरण गुप्त
(d) रामधारी सिंह दिनकर
उत्तर: (c) : 'साकेत' राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित महाकाव्य है। जिसके लिए वर्ष 1932 में मंगलाप्रसाद पारितोषिक प्राप्त हुआ। कामायनी जयशंकर प्रसाद जी की कालजयी रचना है
प्रश्न 4. पं. सोहनलाल द्विवेदी की रचना नहीं है-
(a) दूध बताशा
(b) शिशु-भारती
(c) पल्लव
(d) झरना
उत्तर: (c) : दूध बताशा, शिशुभारती तथा झरना सोहन लाल द्विवेदी जी की रचना है जबकि पल्लव प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत जी की है
प्रश्न 5. वाक्य का गुण नहीं है-
(a) सार्थकता
(b) योग्यता
(c) उद्देश्य
(d) क्रमबद्धता
उत्तर: (c) : वाक्य के गुण के रूप में उद्देश्य को परिलक्षित नहीं किया जाता है। जबकि योग्यता, सार्थकता, आकांक्षा, अन्वय, पदक्रम तथा आसाक्ति को वाक्य के गुण के रूप में परिलक्षित किया जाता है तथा उद्देश्य और विधेय को वाक्य के दो अंग के रूप में मान्यता प्राप्त है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. शुद्ध उच्चारण के प्रमुख तत्व क्या है?
उत्तर: शुद्ध उच्चारण के प्रमुख तत्व निम्नलिखित है -
- स्वर व व्यंजन का उचित तालमेल
- वर्णों का शुद्धता पूर्वक उच्चारण
- अनुस्वार और विसर्ग का उच्चारण
- बलाघात व अनुतान।
- संगम, गति तथा विराम।
प्रश्न 7. पठन (वाचन) के प्रकार बताइए।
उत्तर: पठन (वाचन) के निम्न प्रकार है:
- व्यक्तिगत पठन (वाचन) - विद्यार्थी तथा शिक्षक व्यक्तिगत रूप में मौखिक पठन।
- सामूहिक पठन (वाचन) - कक्षा के सभी विद्यार्थियों का एक साथ मिलकर समान, स्वर, गति तथा लय के साथ मौखिक पठन।
प्रश्न 8. समाचार-पत्रों में विभिन्न स्तम्भ कौन-कौन से होते हैं?
उत्तर: समाचार पत्रों के स्तंभ के रूप में मुख्यतः छह सवालों का जबाव देने की कोशिश की जाती है -
- क्या हुआ?
- किसके साथ हुआ?
- कहाँ हुआ ?
- कब हुआ?
- कैसे हुआ?
- क्यों हुआ?
क्या, कौन, कब और कहाँ सूचनात्मक और तथ्यों पर आधारित होते हैं। जबकि कैसे और क्यों में विवरणात्मक, व्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक पक्ष पर जोर दिया जाता है।
प्रश्न 9. महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ लिखिए।
उत्तर: महादेवी वर्मा जी की प्रमुख रचनाएँ - नीहार, रश्मि, नीरजा, सान्ध्यगीत, यामा, दीप शिखा, अतीत के चललित्र, श्रृंखला की कड़िया, नीलांबरा, तथा स्मृति की रेखाएँ आदि।
प्रश्न 10. 'बीजक' काव्यसंग्रह के कितने भाग हैं? नाम लिखिए।
उत्तर: बीजक काव्य संग्रह कबीर दास के दोहो का संकलन है। इसको तीन भागों में विभाजित किया गया है -
- साखी
- सबद (पद)
- रमैनी
प्रश्न 11. 'हितं मनोहारि च वचं दुर्लभः' सूक्त का अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: श्लोक 'हितं मनोहारि च दुर्लभम् वचः'
अर्थ- जो वाणी हितकारी हो और कानों को सुनने में प्रिय भी हो ऐसा वचन अर्थात् जिसमें दोनों गुण हो मिलना कठिन हैं क्योंकि प्रायः जो वचन हितकारी होता है, वह मन को प्रिय लगने वाला नहीं होता है
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. जीवनी तथा आत्मकथा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| जीवनी | आत्मकथा |
|---|---|
| 1. जीवनी किसी के जीवन पर आधारित होती है | 1. आत्मकथा में लेखक की स्वयं की कथा होती है |
| 2. जीवनी संस्मरणात्मक नहीं होती है | 2. आत्मकथा संस्मरणात्मक होती है। |
| 3. जीवनी में लेखक किसी अन्य के जीवन की घटनाओं का चित्रण करता है। | 3. जबकि आत्मकथा में लेखक के जवीन की घटनाओं का चित्रण होता है |
| 4. जीवनी में लेखक द्वारा किसी साहित्यकार के जीवन के विशेष विषय में लिखा विवरण होता है | 4. आत्मकथा में किसी साहित्यकार द्वारा स्वयं के किसी विशेष पर लिखा विवरण होता है। |
प्रश्न 13. छात्रों के लिए समाचार पत्र पठन क्यों आवश्यक है?
उत्तर: छात्रों के लिए समाचार पत्र पठन आवश्यकता:
- छात्रों में दैनिक जागरूकता, देश दुनिया में दिन-प्रतिदिन घटने वाली घटनाओं जैसे खेल, राजनीति, सिनेमा तथा अन्य स्थानीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ी घटनाओं के प्रति जुड़े रहने तथा उनकी तथ्यात्मक जानकारी के लिए छात्रों का समाचार पत्र पढ़ना आवश्यक माना जाता है।
- छात्रों का प्रतिदिन समाचार-पत्र पढ़ना उनके सामान्य ज्ञान तथा शब्द कोषों की संख्या में वृद्धि करता है।
- सामान्यतः समाचार पत्र का प्रतिदिन पढ़ना सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं अपितु एक सामान्य व्यक्ति, राजनेता, अभिनेता, कोई भी सेलिब्रिटी हो सभी के लिए आवश्यक माना जाता है
- समाचार पत्र से किसी व्यापारी को अनेक क्रय-विक्रय संबंधी, मूल्य वृद्धि और मूल्य ह्रास का ज्ञान होता है। अखबारों में ऋतु परिवर्तन के हिसाब से स्वास्थ्य चर्चाएँ भी प्रकाशित होती है जिनसे बच्चों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बनाए रखने में सहायता प्राप्त होती है।
- अध्यापकों को अपने विद्यार्थियों को समाचार पत्रों की महत्वपूर्ण कटिंग को यथोचित साज-सज्जा के साथ कक्षा में लाकर विद्यार्थियों को दिखानी चाहिए, जिससें विद्यार्थियों में समाचार-पत्रों के प्रति रूचि उत्पन्न की जा सकें।
प्रश्न 14. अनुस्वार एवं विसर्ग को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विसर्ग (:) : विसर्ग हमेशा स्वर वर्ण के पश्चात् होता है यह व्यंजन है, इसका उच्चारण 'ह' की तरह होता है। जिस स्वर के पश्चात् इसका प्रयोग होता है, तो उसी के उच्चाराण स्थान से इसको भी उच्चारित किया जाता है। विसर्ग लगा देने से शब्द को बल प्रदान होता है परन्तु यह स्वतंत्र वर्ण न होकर मात्र वर्णों के चिह्न है
उदाहरण: प्रायः, नमः, अतः, सम्भवतः आदि।
अनुस्वार ( ) : स्वर वर्ण के ऊपर जो बिन्दु लगाया जाता है, उसे अनुस्वार कहते हैं। इसकी ध्यनि नाक से निकलती है। यदि इसका प्रयोग पाँचों वर्ण के पूर्व होता है तो इसका उच्चारण उसी वर्ण के पंचम वर्ण के समान ही होगा।
उदाहरण: रंग, भंग, हंस, कंत, वंश आदि।
प्रश्न 15. नाटक तथा संवाद शिक्षण की प्रमुख विधियाँ लिखिए।
उत्तर: नाटक शिक्षण विधि: नाटक एक ऐसी अभिनय परक विद्या है, जिसमें सम्पूर्ण मानव जीवन का रोचक एवं कुतुहल पूर्ण वर्णन होता है। यह एक दृश्य काव्य है। नाटक छात्रों को नए तरीकों से संवाद करने और समझने की अनुमति देता है
नाटक शिक्षण विधियाँ निम्नलिखित है:
- कक्षाभिनय विधियाँ: i. कक्षा अभिनय (मनोवैज्ञानिक विधि), ii. रंगमंच अभिनय (खर्चीली विधि)
- प्रयोग विधि: इस विधि में विद्यार्थी शिक्षकों के मार्गदर्शन में रंगमंच तैयार करके नाटक के मंचन का पूर्वाभ्यास करते हैं
- आदर्श नाट्य विधि: इस विधि में अध्यापक सम्पूर्ण नाटक को भंगिमा के साथ पढ़ता है
- समीक्षा विधि: इसमें 7 तत्व होते हैं - i. कक्षा वस्तु, ii. संवाद, iii. पात्र, iv. देशकाल, v. भाषा शैली, vi. उद्देश्य, vii. अभिनय
संवाद शिक्षण का अर्थ है शिक्षण और सीखने के लिए बातचीत का सबसे प्रभावी ढंग से उपयोग करना। संवाद शिक्षण में शिक्षक और छात्र के बीच चल रही बातचीत शामिल है, न कि केवल शिक्षक प्रस्तुति।
संवाद शिक्षण की निम्नलिखित विधियाँ है -
- समूह चर्चा
- समस्या समाधान
- सहयोगी शिक्षण
- विचार मंथन
प्रश्न 16. मुंशी प्रेमचन्द का संक्षिप्त जीवन परिचय लिखिए।
उत्तर: मुंशी प्रेमचन्द्र जिनका वास्तविक नाम धनपतराय था। उनका जन्म वाराणसी जिले के लमही नामक गाँव में 31 जुलाई सन् 1880 ई. को हुआ था। उन्होंने बी.ए. से स्नातक किया तथा उर्दू का विशेष ज्ञान प्राप्त किया तथा उर्दू में नवाबराय के नाम से कहानियाँ लिखा करते थे। मुंशी प्रेमचन्द्र जी हिन्दी साहित्य में एक प्रसिद्ध उपन्यासकार, नाटककार तथा कहानिकार के रूप में जाने जाते हैं। मुंशी प्रेमचंद्र की लगभग 300 से ज्यादा कहानियाँ मानसरोवर के रूप में संकलित है। मुंशी प्रेमचन्द्र द्वारा रचित उनका सबसे प्रसिद्ध उपन्यास 'गोदान' है। जिसकी रचना उन्होंने 1936 में की थी।
प्रेमचन्द्र की कृतियाँ -
सेवासदन, प्रेमाश्रम, रंगभूमि, निर्मला, गबन, कर्मभूमि, गोदान आदि उपन्यास है। कफन, पूस की रात, पंच परमेश्वर, बड़े घर की बेटी, बूढ़ी काकी, दो बैलों की कथा आदि कहानियाँ है।
उन्होंने अपने दौर की सभी प्रमुख उर्दू और हिन्दी पत्रिकाओं जमाना, सरस्वती, माधुरी, मर्यादा, चाँद सुधा आदि में लिखा।
मुंशी प्रेमचन्द्र जी की रचना शैली में आदर्शवाद से यथार्थवाद का पुट लक्षित होता है। पूस की रात, कफन, सद्गति आदि इनकी प्रमुख यथार्थवादी कहानियाँ है। इनका निधन 8 अक्टूबर 1936 ई. को हुआ था
प्रश्न 17. एक कंठस्थ नीतिश्लोक लिखकर अर्थ स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: श्लोक: रूप यौवन सम्पन्नाः विशाल कुल सम्भवाः
विद्याहीनाः न शोभन्ते निर्गन्धाः इव किंशुकाः ॥
अर्थ- व्यक्ति कितना भी रूपवान हो, यौवन से भरा हो, क्यों न किसी महान कुल में जन्मा हो, यदि वह विद्या रूपी धन से वंचित है। तो उसकी वही स्थिति होती है, जैसे बिना खुशबू के पलाश के पुष्प की होती है।
प्रश्न 18. हिन्दी में कारक कितने होते हैं? कारकों के प्रकार लिखिए।
उत्तर: कारक :- वाक्य में क्रिया के साथ संबंध रखने वाले को कारक कहते है। वाक्य विन्यास में संज्ञा, सर्वनाम आदि का क्रिया के साथ संबंध रहता है, इसलिए उन्हें कारक कहते हैं। साधारणतयः कारक का अर्थ होता है 'करने वाला' अर्थात् क्रिया को पूर्ण करने वाले को कारक कहते है
जैसे- राजा दशरथ के पुत्र राम ने लंका में रावण को बाणों से मारा। इस वाक्य में पुत्र राम, लंका, रावण तथा बाण ये शब्द कारक है
कारको की संख्या 6 होती है। संज्ञा या सर्वनाम के आगे जो प्रत्यय (चिह्न) लगाये जाते हैं, उन्हें विभक्ति कहते हैं। विविध कारको का ज्ञान कराने के लिए शब्द के साथ कोई न कोई विभक्ति लगानी पड़ती है
कारको के नाम तथा विभक्ति चिन्ह:
| कारक | चिह्न | विभक्ति |
|---|---|---|
| कर्ता | ने | प्रथमा |
| कर्म | को | द्वितीया |
| करण | से, द्वारा, साथ (संबंध जुड़ना) | तृतीया |
| सम्प्रदान | को, के लिए | चतुर्थी |
| अपादान | से (अलग होने के अर्थ में) | पंचमी |
| संबंध | का, की, के, रा, री, रे | षष्ठी |
| अधिकरण | में, पर | सप्तमी |