वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'सुगम' शब्द का विलोम हैं-
(a) सूक्ष्म
(b) विषाद
(c) दुर्गम
(d) नीरस
उत्तर: (c) : 'सुगम' शब्द का अर्थ है- दुर्गम । सुगम का अर्थ आसान, सरल, सहज। दुर्गम का अर्थ कठिन, मुश्किल, दुष्कर।
विलोम शब्द: स्थूल-सूक्ष्म, विषाद-आहह्लाद, नीरस-सरस
प्रश्न 2. 'रवीन्द्रः' शब्द में सन्धि है-
(a) गुण सन्धि
(b) दीर्घ सन्धि
(c) यण् सन्धि
(d) वृद्धि सन्धि
उत्तर: (b) : दीर्घ सन्धि
इस संधि में ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ के बाद ह्रस्व या दीर्घ अ, इ, उ, आए तो ये आपस में मिलकर क्रमशः दीर्घ आ, ई, ऊ हो जाते हैं, इसी कारण इसे दीर्घ संधि कहते हैं।
रवि + इन्द = रवीन्द्र
उदाहरण: विद्या + आलय = विद्यालय, विधु + उदय = विधूदय
प्रश्न 3. 'जयशंकर प्रसाद' की रचना है-
(a) कामायनी
(b) साकेत
(c) प्रिय प्रवास
(d) पल्लव
उत्तर: (a): जयशंकर प्रसाद कामायनी के रचयिता जयशंकर प्रसाद जी है। कामायनी हिन्दी भाषा का एक महाकाव्य है। यह आधुनिक छायावादी युग का सर्वोत्तम और प्रतिनिधि हिन्दी महाकाव्य है।
साकेत मैथिलीशरण गुप्त द्वारा रचित महाकाव्य का नाम है। इसे द्विवेदी युग की सर्वश्रेष्ठ रचना माना जाता है।
प्रिय प्रवास के रचयिता अयोध्यासिंह हरिऔध जी है। यह खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है और हरिऔध जी खड़ी बोली के प्रथम महाकवि थे।
पल्लव (1926)- इसके रचनाकार सुमित्रानन्दन पंज जी है
प्रश्न 4. 'दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय'। उपर्युक्त पंक्ति के रचनाकार हैं-
(a) कबीरदास
(b) रहीमदास
(c) सूरदास
(d) नन्ददास
उत्तर: (a) : 'दुर्बल को न सताइए, जाकी मोटी हाय' उपर्युक्त कथन कबीरदास जी का है। कबीरदास जी की इस पंक्ति में बहुत बड़ा मर्म छिपा है। इस पंक्ति के माध्यम से दुर्बल की हाय के प्रभाव को बताया गया है। कबीर जी कहते हैं, किसी को दुर्बल या कमजोर समझ कर उसको सताना नहीं चाहिए क्योंकि दुर्बल की हाय बहुत प्रभावशाली होती है।
प्रश्न 5. 'दमक' का तुकान्त शब्द है-
(a) कदम्ब
(b) तरस
(c) धमक
(d) हृदय
उत्तर: (c) : 'दमक' का तुकान्त शब्द 'धमक' है। तुकान्त शब्द वे शब्द होते हैं। जिनकी अंतिम ध्वनि एक जैसी होती है
अतिलघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. 'प्रकृति के सुकुमार कवि' किसे कहा जाता है?
उत्तर: प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत को कहा जाता है। पंत जी की रचनाओं में प्रकृति का अत्यंन सुन्दर और मधुर चित्रण मिलता है। उन्होंने प्रकृति के हर पहलु को बड़ी बारीकी से देखा और समझा है। उनके शब्दों में प्रकृति जीवन्त हो उठती है।
प्रश्न 7. निम्नलिखित शब्दों के एक-एक समानार्थी शब्द लिखिए: खग, धरती
उत्तर:
खग का समानार्थी: पक्षी, विहग, चिड़ियाँ, नभचर आदि।
धरती का समानार्थी: धरा, भूमि, वसुधा, पृथ्वी आदि।
प्रश्न 8. 'सरोरुह' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: 'सरोरुह' शब्द का अर्थ है कमल। यह शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है। 'सरोरुह' शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है सरस और रूह।
सरस - जिसका अर्थ है 'सुन्दर'
रूह - जिसका अर्थ है 'आत्मा'
इस प्रकार 'सरोरूह' का अर्थ है सुन्दर आत्मा वाला। यह शब्द कमल के फूल के लिए बहुत उपयुक्त है क्योंकि कमल का फूल अपनी सुन्दरता और पवित्रता के लिए जाना जाता है।
प्रश्न 9. 'तुलसीदास जी के गुरु कौन थे?
उत्तर: 'तुलसीदास जी के गुरू नरहरिदास जी थे। नरहरिदास जी वैष्णव संत थे और रामानंद संप्रदाय से जुड़े थे। उन्होंने तुलसीदास जी को ज्ञान का मार्ग दिखाया। रामचरितमानस में उन्होंने अपने गुरू नरहरिदास जी का उल्लेख किया हैः
गुरु बिन ज्ञान नहिं होई, गुरु बिन मिलै न मोक्ष।
गुरु बिन सभै सुख सुने, गुरु बिन सब अंधेर ॥
अर्थ: बिना गुरु के ज्ञान मिलना असम्भव है। मोक्ष रूपी ज्ञान दिखाने वाले गुरु है। बिना गुरु के सत्य एवं असत्य का ज्ञान नहीं होता है। गुरु हमें ज्ञान प्रदान करता है, जो हमें जीवन में सफलता प्राप्त करने में मदद करता है।
प्रश्न 10. हिन्दी गद्य की दो विधाओं के नाम लिखिए
उत्तर: हिन्दी गद्य की दो विधाओं के नाम निम्नलिखित है -
- कहानी: यह हिन्दी गद्य की एक लोकप्रिय विधा है। जिसमें लेखक किसी घटना या कल्पनाशील कथा को रोचक ढंग से प्रस्तुत करता है। कहानी में पात्र, कथानक, संवाद, वातावरण और चरमोत्कर्ष जैसे तत्व शामिल होते हैं।
- निबंध: निबंध में लेखक किसी विषय पर अपने विचारों, भावनाओं और अनुभवों को प्रस्तुत करता है। निबन्ध में विषय का गहन विश्लेषण और तार्किक विवेचन होता है।
प्रश्न 11. निम्नलिखित संस्कृत शब्दों के हिन्दी अर्थ लिखिए- तडागः, नृपः
उत्तर: संस्कृत शब्दों के हिन्दी में अर्थ -
तडागः - तालाब
नृपः - राजा
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. 'विसर्ग' एवं अनुस्वार की उदाहरण सहित संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
उत्तर: विसर्ग (:) : विसर्ग हमेशा स्वर वर्ण के पश्चात् होते हैं, जो किर्स् का रूपान्तर मात्र है। जिस स्वर के पश्चात् इसका प्रयोग होता है, तो उसी के उच्चाराण स्थान से इसको भी उच्चारित किया जाता है। विसर्ग लगा देने से शब्द को बल प्रदान होता है। परन्तु यह स्वतंत्र वर्ण न होकर मात्र वर्णों के चिह्न है।
उदाहरण: प्रायः, नमः, अतः, सम्भवतः आदि।
अनुस्वार ( ) : स्वर वर्ण के ऊपर जो बिन्दु लगाया जाता है, उसे अनुस्वार कहते हैं। यह स्वतंत्र नहीं होते हैं। यदि इसका प्रयोग पाँचों वर्ण के पूर्व होता है तो इसका उच्चारण उसी वर्ण के पंचम वर्ण के समान ही होगा।
उदाहरण: रंग, भंग, हंस, कंत, वंश आदि।
प्रश्न 13. जयशंकर प्रसाद के प्रमुख नाटकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: जयशंकर प्रसाद हिन्दी साहित्य के प्रमुख नाटककारों में से एक हैं। इनके नाटक अपने गहन चरित्र चित्रण, भावपूर्ण भाषा और शानदार प्रस्तुति के लिए जाने जाते हैं। इनके नाटकों में इतिहास, पौराणिक कथाएँ, दर्शन और सामाजिक मुद्दे जैसे विभिन्न विषयों का समावेश है।
जयशंकर प्रसाद के प्रमुख नाटक: विशाखा, राज्यश्री, अजातशत्रु, कामना, सज्जन, जन्मेजय का नागयज्ञ, स्कन्दगुप्त, ध्रुवस्वामिनी, करूणालय, कल्याणी परिणय, कानन-कुसुम, राजर्षि, विशाख आदि।
प्रश्न 14. 'सूरदास' अथवा 'कबीरदास' का जीवन-परिचय एवं उनकी रचनाओं का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
उत्तर:
सूरदास: सूरदास का जन्म आगरा के निकट रुनकता नामक स्थान पर सन् 1478 ई. में माना जाता है और इनकी मृत्यु दिल्ली के निकट सीही नामक स्थान में हुआ था। इन्हें लोग जन्मान्ध (जन्म से अन्धा) मानते हैं। ये उच्च कोटि के गायक थे। महाप्रभु बल्लभाचार्य ने इनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर इन्हें श्रीनाथ मन्दिर में कीर्तन करने वाले के रूप में नियुक्त कर दिया था इन्होंने जीवन भर श्रीकृष्ण की लीलाओं का गायन किया।
रचनाएँ - सूरसागर, सूरसारावली, साहित्य लहरी, नल-दमयन्ती, ब्याहलो आदि।
कबीरदास: कबीरदास जी का जन्म सन् 1398 ई. में बनारस में और मृत्यु 1518ई. में मगहर में हुई थी। जनश्रुति के आधार पर इन्हें एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से उत्पन्न माना जाता है। उस ब्राह्मणी में इन्हें लोक अपवाद के डर से लहरतारा नामक तालाब के किनारे फेंक दिया था। जहाँ से जुलाहा दम्पत्ति नीरू तथा नीमा ने इन्हें उठा लिया और इनका पालन पोषण किया। जुलाहों का धन्धा करते हुए कबीर जी के हृदय में ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा जाग्रत हुई। ज्ञान प्राप्ति के लिए इन्होंने महात्मा रामानन्द जी को अपना गुरू बनाया। कबीर जी का विवाह लोई नामक महिला से हुआ और इन्हें दो बच्चे हुए पुत्र कमाल तथा पुत्री कमाली। कबीर मस्तमौला फकीर थे। उन्होंने नाथपन्थी अवभूतों, मुल्लाओं तथा पण्डितों को उनके बाह्य आडम्बरों के लिए फटकारा। उनके व्यक्तित्व तथा विचारों से अधिकतर लोग प्रभावित हुए।
रचनाएँ - बीजक, साखियाँ, सबद, रमैनी, दोहावली आदि।
प्रश्न 15. 'जीवनी' और 'आत्मकथा' में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:
| जीवनी | आत्मकथा |
|---|---|
| 1. जीवनी किसी के जीवन पर आधारित होती है। | 1. आत्मकथा में लेखक की स्वयं की कथा होती है। |
| 2. जीवनी संस्मरणात्मक नहीं होती हे। | 2. आत्मकथा संस्मरणात्मक होती है। |
| 3. जीवनी में लेखक किसी अन्य के जीवन की घटनाओं का चित्रण करता है। | 3. जबकि आत्मकथा में लेखक के जवीन की घटनाओं का चित्रण होता है। |
| 4. जीवनी में लेखक द्वारा किसी साहित्यकार के जीवन के विशेष विषय में लिखा विवरण होता है। | 4. आत्मकथा में किसी साहित्यकार द्वारा स्वयं के किसी विशेष पर लिखा विवरण होता है। |
प्रश्न 16. 'पठ्' धातु का लङ् लकार, प्रथम पुरुष, तीनों वचनों में रूप लिखिए।
उत्तर: 'पठ्' धातु का लङ् लकार का रूप
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | अपठत् | अपठातम् | अपठन् |
| मध्यम पुरुष | अपठः | अपठतम् | अपठत |
| उत्तम पुरुष | अपठम् | अपठाव | अपठाम |
प्रश्न 17. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
रहिमन पानी राखिए,
बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरै,
मोती मानुस चून ॥
उत्तर:
दोहा -
रहिमन पानी राखिए,
बिन पानी सब सून।
पानी गये न ऊबरै,
मोती मानुस चून।।
अर्थ: रहीम जी ने इस पंक्ति में पानी को तीन अर्थों में प्रयुक्त किया है। पानी का पहला अर्थ मनुष्य के संदर्भ में 'विनम्रता' से है, मनुष्य में हमेशा विनम्रता होनी चाहिए। पानी का दूसरा अर्थ आभा या चमक से है, जिसके बिना मोती का कोई मूल्य नहीं है। तीसरा अर्थ जल से संबंधित है जिसे आटे से जोड़कर दर्शाया गया है। रहीम जी का कहना है कि जिस तरह आटे का अस्तित्व पानी के बिना नम्र नहीं हो सकता, मोती का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकता है, उसी तरह विनम्रता के बिना व्यक्ति का कोई मूल्य नहीं हो सकता है। मनुष्य को अपने व्यवहार में हमेशा विनम्रता रखनी चाहिए।
प्रश्न 18. 'प्रधानाध्यापक' एवं 'इत्यादि' शब्दों का सन्धि-विच्छेद कीजिए।
उत्तर: संधि-दो वर्णों के परस्पर मेल से उत्पन्न होने वाला परिवर्तन संधि कहलाता है।
संधि का अर्थ है मेल या जोड़।
उदाहरण:
प्रधानाध्यापक = प्रधान + अध्यापक
इत्यादि = इति + आदि