वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'चाँद का मुँह टेढ़ा है' रचना है-
(a) जयशंकर प्रसाद
(b) गजानन माधव 'मुक्तिबोध'
(c) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(d) सुमित्रानन्दन पन्त।
उत्तर: (b) : 'चांद का मुँह टेढ़ा है' गजानन माधव 'मुक्तिबोध' जी की कविताओं का प्रथम संग्रह है। जिसका प्रकाशन 1964 में हुआ।
• जयशंकर प्रसाद- कामायनी, झरना, आँसू आदि।
• सुमित्रानंदन पंत- पल्लव, कला और बूढ़ा चाँद, चिदम्बरा आदि।
• रवीन्द्रनाथ टैगोर- गीतांजलि (1913 साहित्य का नोबेल प्राप्त)
प्रश्न 2. श, ष, स व्यंजन हैं-
(a) स्पर्श व्यंजन
(b) ऊष्म व्यंजन
(c) उत्क्षिप्त व्यंजन
(d) अन्तस्थ व्यंजन।
उत्तर: (b) : ऊष्म व्यंजन जिन वर्णों के उच्चारण में मुख से विशेष प्रकार की (ऊष्म) वायु निकलती है, उन्हें ऊष्म व्यंजन कहते हैं। इनकी संख्या चार है- श, ष, स, ह।
• स्पर्श व्यंजनों की संख्या 25 है।
क वर्ग- क, ख, ग, घ, ड़
च वर्ग- च, छ, ज, झ, ञ
ट वर्ग- ट, ठ, ड, ढ, ण
त वर्ग- त, थ, द, ध, न
प वर्ग- प, फ, ब, भ, म।
• य, र, ल, व अंतःस्थ व्यंजन है।
• ड़, ढ़ को उत्क्षिप्त व्यंजन कहते हैं।
प्रश्न 3. 'परिमल' काव्य के रचियता हैं-
(a) कबीर
(b) बाबू गुलाबराय
(c) महादेवी वर्मा
(d) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'।
उत्तर: (d) : 'परिमल' छायावादी कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी की वर्ष 1929 में प्रकाशित काव्य संग्रह है।
कबीरदास जी की वाणियों को संग्रह के रूप में 'बीजक' में संकलित किया गया है।
महादेवी वर्मा जी का प्रथम काव्य संग्रह 'नीहार' जिसका प्रकाशन वर्ष 1930 है।
बाबू गुलाब राय हिन्दी साहित्य जगत में एक निबंधकार के रूप में प्रतिष्ठित है 'मेरी सफलताएँ' उनका एक निबंध संग्रह है।
प्रश्न 4. श्वः का अर्थ है-
(a) आज
(b) कल बीता हुआ
(c) आने वाला कल
(d) परसों।
उत्तर: (c): श्वः का अर्थ होता है 'आने वाला कल'
अद्य - आज
ह्यः - बीता हुआ कल
परह्यः - बीता हुआ परसों
परश्वः - आने वाला परसों
प्रश्न 5. 'अब्ज' शब्द का अर्थ है-
(a) शंख
(b) कमल
(c) कपूर
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : अब्ज का अर्थ-सीपी, कमल, चन्द्रमा, कपूर, शंख आदि।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. कहानी शिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: कहानी शिक्षण से बच्चों के सामान्य ज्ञान, तर्क, विवेक, संकल्पना एवं कल्पना शक्ति में अभिवृद्धि होती है। बालक छोटी-छोटी कहानियों के माध्यम से जगत के जीव-जन्तुओं के नाम गुण-अवगुण तथा स्वभाव से परिचित हो जाते हैं।
प्रश्न 7. 'विद्या' शब्द पर संस्कृत भाषा में दो वाक्य लिखिए।
उत्तर: 'विद्या' शब्द पर संस्कृत भाषा में दो वाक्य-
(1) विद्या ददाति विनयं, विनयाद्याति पात्रताम् ।
पात्रत्वाद्धानमाप्रोति धानाद्धर्म ततः सुखम् ।।
अर्थ :- विद्या विनय का उपहार देती है, विनय से पात्रता आती है। पात्रता से धन प्राप्त होती है, धन से धर्म प्राप्त होता है और धार्मिकता से सुख प्राप्त होता है
(2) आयुः कर्म च विद्या च वित्तं निधनमेव च।
पञ्चैतानि विलिख्यन्ते गर्भस्थस्थैव देहिनः ।।
अर्थ :- जीवन, कर्म, विद्या, धन और मृत्यु ये पाँच वस्तुएँ गर्भस्थ बच्चे के द्वारा ही निश्चित की जाती है
प्रश्न 8. हिन्दी गद्य की तीन विधाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: हिन्दी गद्य साहित्य की विभिन्न विधाएँ हैं, जिनमें से नाटक, एकांकी, उपन्यास, कहानी, निबंध और आलोचना प्रमुख हैं।
प्रश्न 9. मौन पठन के उद्देश्य क्या हैं?
उत्तर: मौन वाचन का उद्देश्य-
- तथ्यों के स्मरण शक्ति में विकास करना
- बोध-ज्ञान की गति में वृद्धि करना।
- पढ़े गये वाक्य या वाक्यांश के समझने की क्षमता उत्पन्न करना
- पढ़ने की गति को तीव्र करना।
- विद्याथियों में शब्द तथा सूक्ति भण्डार में वृद्धि करना।
- मौन वाचन से पढ़ने की गति में वृद्धि होना।
- यह शब्दावली को विकसित करने तथा भाषा की समझ को बेहतर बनाने में मदद करता है।
- जब व्यक्ति मौन वाचन में कुशल हो जाता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता है
प्रश्न 10. 'विद्या धर्मेण शोभते' सूक्ति का हिन्दी में अर्थ लिखिए।
उत्तर: 'विद्या धर्मेण शोभते'
अर्थ: विद्या धर्म से शोभा प्राप्त करती है
प्रश्न 11. 'अभितः' शब्द का वाक्य में प्रयोग कीजिए।
उत्तर: अभितः का अर्थ- चारो ओर से, पूर्णतः, शीघ्रता से आदि
वाक्य प्रयोग- विद्यालयं अभितः वृक्षाः सन्ति।
अनुवाद- विद्यालय के दोनों ओर वृक्ष हैं।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. महादेवी वर्मा का साहित्यिक परिचय लिखिए।
उत्तर: महादेवी वर्मा का सहित्यिक परिचय: पीड़ा की गायिका अथवा 'आधुनिक युग की मीरा' के नाम से सुप्रसिद्ध हिन्दी साहित्य के छायावाद युग के चार स्तंभों में से एक महादेवी वर्मा जी ने मैट्रिक उत्तीर्ण करने के पश्चात् ही काव्य रचना प्रारंभ कर दी थी। करूणा एवं भावुकता उनके व्यक्तित्व के अभिन्न अंग थे। उनके द्वारा रचित काव्य में रहस्यवाद, वेदना एवं सूक्ष्म अनुभूतियों के कोमल तथा मर्मस्पर्शी भाव मुखरित हुए है। इनके काव्य में संगीतात्मकता एवं भावतीव्रता का सहज तथा स्वाभाविक समावेश मिलता है। इनकी रचनाएँ सर्वप्रथम चाँद नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई। इन्हें मंगला प्रसाद पुरस्कार, पद्म विभूषण तथा ज्ञानपीठ पुरस्कारों से नवाजा गया।
कविता संग्रह: नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, यामा, दीपशिखा आदि।
गद्य रचनाएँ: अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ, श्रृंखला की कड़ियाँ आदि।
प्रश्न 13. जीवनी एवं आत्मकथा में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: जीवनी तथा आत्मकथा में अन्तर-
जीवनीः- जीवनी का शब्दिक अर्थ जीवन की व्याख्या करना यह एक ऐसी गद्य विधा है, जो काल्पनिक न होकर सत्य कथा पर आधारित होती है। जीवनी में संबंधित व्यक्तित्व के जन्म, कार्य सम्बन्ध, शिक्षा, मृत्यु अदि बुनियादी तथ्यों को शामिल किया जाता है। तथा अन्य साहित्यिक तथा सामाजिक उपलब्धियों का वर्णन मिलता हैं। जीवनी विशेषतः उस व्यक्ति के बारे में लिखी जाती है, जिसमें चारित्रिक विशेषताएँ हो या लोग उस व्यक्ति के जीवन से प्रेरणा ले सकें। जीवनी का एकमात्र लक्ष्य तथ्य एवं घटनाक्रम का प्रमाण देना होता है। जीवनी वस्तुनिष्ठ प्रकृति की होती है।
आत्मकथाः - आत्मकथा के लेखन में लेखक स्वयं के व्यक्तित्व का वर्णन करता है, जिसके अन्तर्गत अपने जीवन पर आधारित घटना विशेष का वर्णन करता है। आत्मकथा में लेखक निष्पक्ष भाव से स्वयं के जीवन के अनुभव का वर्णन करता है। आत्मकथा में लेखक स्वयं के जीवन की निजी जानकारियों से जुड़े घटनाक्रम का वर्णन करता है। इसलिए आत्मकथा अधिक विश्वसनीय होती है। आत्मकथा, आत्मिक या आत्मनिष्ठ प्रकृति की होती है। आत्मकथा में लेखक स्वयं के जीवन की आत्मालोचना करता है।
आत्मकथा जीवनी में अंतर
- आत्मकथा में लेखक स्वयं अपने जीवन के अनुभव का वर्णन करता है, जीवनी में किसी महान पुरुष या व्यक्ति के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं का वर्णन किया जाता है।
- आत्मकथा स्वरचित होती है जबकि जीवनी पररचित।
- आत्मकथा में तथ्यात्मक सत्यता होती है, जीवनी में काल्पनिकता।
- आत्मकथा स्वंय के गुणावगुण का वर्णन है जबकि जीवनी किसी और के बारे में उसके गुण अवगुण का वर्णन है।
प्रश्न 14. छात्रों के लिए समाचार-पत्र का नित्य पठन क्यों आवश्यक है?
उत्तर: छात्रों में दैनिक जागरूकता, देश दुनिया में दिन-प्रतिदिन घटने वाली घटनाओं जैसे खेल, राजनीति, सिनेमा तथा अन्य स्थानीय तथा राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ी घटनाओं के प्रति जुड़े रहने तथा उनकी तथ्यात्मक जानकारी के लिए छात्रों का समाचार पत्र पढ़ना आवश्यक माना जाता है। छात्रों का प्रतिदिन समाचार-पत्र पढ़ना उनके सामान्य ज्ञान तथा शब्द कोषों की संख्या में वृद्धि करता है। सामान्यतः समाचार पत्र का प्रतिदिन पढ़ना सिर्फ छात्रों के लिए ही नहीं अपितु एक सामान्य व्यक्ति, राजनेता, अभिनेता, कोई भी सेलिब्रिटी हो सभी के लिए आवश्यक माना जाता है। समाचार पत्र से किसी व्यापारी को अनेक क्रय-विक्रय संबंधी, मूल्य वृद्धि और मूल्य ह्रास का ज्ञान होता है। अखबारों में ऋतु परिवर्तन के हिसाब से स्वास्थ्य चर्चाएँ भी प्रकाशित होती है। जिनसे बच्चों को अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्कता बनाए रखने में सहायता प्राप्त होती है। अध्यापकों को अपने विद्यार्थियों को समाचार पत्रों की महत्वपूर्ण कटिंग को यथोचित साज-सज्जा के साथ कक्षा में लाकर विद्यार्थियों को दिखानी चाहिए, जिससें विद्यार्थियों में समाचार पत्रों के प्रति रूचि उत्पन्न की जा सकें।
प्रश्न 15. 'अक्षीणों वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतोहतः ।।' श्लोकांश का हिन्दी में भावार्थ लिखिए।
उत्तर: श्लोक-'अक्षीणों वित्ततः क्षीणो वृत्ततस्तु हतोहतः ।।'
भावार्थ: धन से हीन व्यक्ति हीन नहीं होता, किन्तु चरित्र नष्ट हो जाने पर पूर्णतयः नष्ट हो जाता है।
प्रश्न 16. विद्यालय की तरफ से शैक्षिक भ्रमण पर जाने के लिए अपने पिता को पुत्र लिखित ।
उत्तर:
आदरणीय पिता जी,
सादर प्रणाम,
आशा करता हूँ कि आप सकुशल होंगे। आपको बताते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि इस वर्ष मैनें अर्द्धवार्षिक परीक्षाओं में पूरी कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मेरे सभी अध्यापक मेरी इस सफलता से काफी ज्यादा प्रसन्न है, साथ ही वार्षिक परीक्षओं में भी इसी प्रकार के प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित किया है।
पिता जी, इसके अतिरिक्त मुझे आपसे एक विषय में आज्ञा भी प्राप्त करनी है। मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मेरे विद्यालय के तरफ से कुछ चयनित विद्यार्थियों को शैक्षणिक भ्रमण पर ले जाया जा रहा है। उस शैक्षणिक भ्रमण का हिस्सा बनने के लिए विद्यालय की तरफ से प्रत्येक विद्यार्थियों से उनके पिता जी द्वारा अनुमति पत्र मांगा है। पिता जी की तरफ से अनुमति पत्र प्राप्त करने के पश्चात् ही कोई भी विद्यार्थी शैक्षणिक भ्रमण पर जा सकता है।
अतः पिताजी आपसे मेरी विनती है कि आप मुझे इस शैक्षणिक भ्रमण का हिस्सा बनने की अनुमति प्रदान करें। यह शैक्षिणिक भ्रमण मेरी ऐतिहासिक तथ्यों की समझ में अवश्य ही सहायक सिद्ध होगा। इसके लिए मैं सदैव आपका आभारी रहूँगा। मुझे आशा है कि आप मेरे इस आग्रह को अवश्य स्वीकार करेंगे एवं मुझें निराश नहीं करेंगे।
चरण स्पर्श
आपका प्रिय पुत्र,
अ ख ग
प्रश्न 17. 'कन्दुकम्' एवं 'मिष्टान्नम्' शब्द का प्रयोग करते हुए एक-एक वाक्य बनाइए।
उत्तर:
| शब्द | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| कन्दुकम् | गेंद | बालकः कन्दुकम् क्रीडति । |
| मिष्टन्नम् | मिठाई | मोदकः गणेशायः प्रियः मिष्ठान्नम्। |
प्रश्न 18. संस्कृत ध्वनियाँ कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर: संस्कृत वर्णमाला में 11 स्वर, 33 व्यंजन और 4 अयोगवाह है। संस्कृत ध्वनियों को दो भागों में विभाजित किया गया है। (क) स्वर (ख) व्यंजन
(क) स्वरः
ऐसे वर्ण जिनके उच्चारण में किसी अन्य वर्णों की सहायता नहीं लेनी पड़ती है, उन्हें स्वर कहते हैं। अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ
स्वरों के भी तीन भेद किए गए है-
1. ह्रस्य स्वर 2. दीर्घ स्वर 3. प्लुत स्वर
- ह्रस्य स्वरः इनके उच्चारण में सबसे कम समय लगता है। ह्रस्य स्वर में पाँच वर्ण होते हैं जैसे अ, इ, उ, ऋ, ल
- दीर्घ स्वरः इन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वरों की अपेक्षा दो गुना समय लगता हैं। आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ओ, औ दीर्घ स्वर है।
- प्लुत स्वरः- इनके उच्चारण में दीर्घ से तिगुना समय लगता है। इन्हें प्लुत स्वर कहते हैं। उदाहरण- ओऽम्
(ख) व्यंजन: जिन वर्णों के उच्चारण में स्वरों की सहायता लेनी पड़ती है, उन्हें व्यंजन कहते हैं।
व्यंजनों के तीन भेद किए गए है-
1. स्पर्श व्यंजन 2. अन्तःस्थ व्यंजन 3. ऊष्म व्यंजन
- स्पर्श व्यंजन- ऐसे व्यंजन जिनका उच्चारण करते समय जीभ को कण्ठ, तालु, मूर्द्धा इत्यादि को पूर्ण स्पर्श करना पड़ता है, उन्हें स्पर्श व्यंजन कहते हैं। स्पर्श व्यंजनों की संख्या 25 है।
क वर्ग: क, ख, ग, घ, ड़
च वर्ग: च, छ, ज, झ, ञ
ट वर्ग: ट, ठ, ड, ढ, ण
त वर्ग: त, थ, द, ध, न
प वर्ग: प, फ, ब, भ, म - अन्तःस्थ व्यंजन: स्वर तथा व्यंजन के मध्य के व्यंजन को अन्तःस्थ व्यंजन कहते हैं। इनकी संख्या चार है य, र, ल, व। इन्हें अर्धस्वर भी कहते हैं।
- ऊष्म व्यंजन: ऐसे व्यंजन जिनका उच्चारण करते समय वायु मुख से आकर ऊष्मा पैदा करती है, उसे ऊष्म व्यंजन कहते हैं। इनकी संख्या चार है श, ष, स, ह।
- संयुक्त व्यंजन: एक से अधिक व्यंजनों के मेल से बनने वाले व्यंजन को संयुक्त व्यंजन कहते हैं।
क् + ष = क्ष
ज् + ञ = ज्ञ
त् + र = त्र
श् + र = श्र।