वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'आँसू' किसकी रचना है?
(a) सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला'
(b) प्रेमचन्द
(c) जयशंकर प्रसाद
(d) महादेवी वर्मा
उत्तर: (c) : 'आँसू' जयशंकर प्रसाद जी की प्रदीर्घ गीतात्मक काव्य है, जिसका पहला प्रकाशन वर्ष 1925 ई. में साहित्य सदन चिरगांव, झांसी से हुआ था।
प्रश्न 2. 'प्रत्येक' शब्द में सन्धि है-
(a) दीर्घ सन्धि
(b) यण सन्धि
(c) वृद्धि सन्धि
(d) गुण सन्धि।
उत्तर: (b): यण संधि यदि इ/ई, उ/ऊ, और ऋ के बाद भिन्न स्वर आये तो इ/ई का 'य'; उ/ऊ का 'व' तथा ऋ का 'र' होता है।
उदाहरण:
प्रत्येक = प्रति + एक (यण संधि)
भानूदय = भानु + उदय (दीर्घ संधि)
देवर्षि = देव + ऋषि (गुण संधि)
एकैक = एक + एक (वृद्धि संधि)
प्रश्न 3. 'बसेरे से दूर' पुस्तक के लेखक हैं-
(a) राहुल सांकृत्यायन
(b) हरिवंश राय बच्चन
(c) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
(d) वियोगी हरि।
उत्तर: (b) : 'बसेरे से दूर' लोकप्रिय कवि हरिवंश राय बच्चन जी की बहुप्रशंसित आत्मकथा में से एक है। यह चार खण्ड़ों में हैः क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक आदि।
प्रश्न 4. 'राम' शब्द का पंचमी, एकवचन रूप है-
(a) रामः
(b) रामेभ्यः
(c) रामस्य
(d) रामात्।
उत्तर: (d) : 'राम' शब्द का रूप
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | रामः | रामौ | रामाः |
| द्वितीया | रामम् | रामौ | रामान् |
| तृतीया | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः |
| चतुर्थी | रामाय | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| पंचमी | रामात् | रामाभ्याम् | रामेभ्यः |
| पष्ठी | रामस्य | रामयोः | रामाणाम् |
| सप्तमी | रामे | रामयोः | रामेषु |
| सम्बोधन | हे राम ! | हे रामौ ! | हे रामाः ! |
प्रश्न 5. 'आधुनिक युग की मीरा' किस कवियत्री को कहा जाता है?
(a) मीराबाई
(b) महादेवी वर्मा
(c) सुभद्रा कुमारी चौहान
(d) शिवानी।
उत्तर: (b): आधुनिक युग की मीराबाई के रूप में हिन्दी साहित्य जगत में महादेवी वर्मा जी को जाना जाता है क्योकि उनकी रचनाओं में प्रेम, वेदना, आध्यात्मिकता और रहस्यवाद का मिश्रण मिलता है, जो मीरबाई की रचनाओं से मिलता-जुलता है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. 'वृक्ष से पत्ते गिरते हैं।' वाक्य में कौन-सा कारक है?
उत्तर: अपादान कारक संज्ञा के जिस रूप से एक वस्तु का दूसरे वस्तु से अलग होना पाया जाये, वहाँ अपादान कारक होता है।
उदाहरण -
वृक्ष से पत्ते गिरते है
चिड़ियाँ पेड़ से उड़ गई।
प्रश्न 7. 'कंठ्य ध्वनियाँ' कौन-कौन सी हैं?
उत्तर: कंठ्य ध्वनियाँ गले के सामने की ओर का उभरा हुआ भाग कण्ठ कहलाता है। यहाँ से जिन शब्दों का उच्चारण होता है, उन्हें कंठ्य कहते हैं। इसके अन्तर्गत अ, आ, क वर्ग (क, ख, ग, घ, ङ) तथा विसर्ग (:) आता है
प्रश्न 8. 'हार' शब्द में उपसर्ग जोड़ते हुए दो शब्द बनाइएं।
उत्तर:
| उपसर्ग | मूल शब्द | व्युत्पन्न शब्द | अर्थ |
|---|---|---|---|
| प्र | हार | प्रहार | हमला करना |
| आ | हार | आहार | भोजन |
प्रश्न 9. 'हितं मनोहारि च दुर्लभम् वचः' सूक्ति का हिन्दी में अर्थ लिखिए।
उत्तर: श्लोक 'हितं मनोहारि च दुर्लभम् वचः'
अर्थ- जो वाणी हितकारी हो और कानों को सुनने में प्रिय भी हो वैसा वचन अर्थात् जिसमें दोनों गुण हो मिलना कठिन हैं क्योंकि प्रायः जो वचन हितकारी होता है, वह मन को प्रिय लगने वाला नहीं होता है।
प्रश्न 10. हिन्दी गद्य साहित्य की किन्हीं चार विधाओं के नाम लिखिए।
उत्तर: हिन्दी गद्य की विभिन्न विधाएँ है, जिनमें से चार निम्नलिखित है-
- उपन्यास
- कहानी
- नाटक
- एकांकी
प्रश्न 11. 'नदी' एवं 'आकाश' शब्द के तीन-तीन पर्यायवाची शब्द लिखिए।
उत्तर:
| शब्द | पर्यायवाची |
|---|---|
| नदी | सरिता, तरंगिणी, वाहिनी |
| आकाश | नभ, अम्बर, व्योम |
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. 'कबीरदास' का संक्षिप्त जीवन परिचय देते हुए उनकी रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: कबीरदास जीवन परिचय-
कबीरदास जी हिन्दी साहित्य जगत के भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति के ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रमुख कवि थे। उनके जन्म और मृत्यु के संबंध में साहित्य के विद्वानों में आज भी परस्पर मतभेद है, यद्यपि प्रमाणिक साक्ष्यों के आधार पर इनका जन्म सन् 1398 ई० में काशी में और मृत्यु सन् 1518 ई में हुई थी (उ०प्र० शासन द्वारा प्रकाशित 'मंजरी' पुस्तक के अनुसार)। किंदवंती एंव जनश्रुति के अनुसार कबीरदास जी एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से उत्पन्न हुए, लोकापवाद के भय के कारण वह उन्हें लहरतारा नामक तालाब के किनारे फेंक देती है, जहाँ से नीरू और नीमा नामक जुलाहा दंपत्ति उन्हें उठा लेते है और उनका पालन-पोषण करते हैं। उन्होंने रामानंद जी को अपना गुरू स्वीकार किया है। कबीरदास जी का विवाह लोई नामक स्त्री से हुआ जिससे उनको कमाल और कमाली नामक दो संताने प्राप्त हुई। कबीरदास जी ने नाथपंथी अवधूतों, मुल्लाओं और पंड़ितों को उनके बाह्य आडंबर के लिए हमेशा ही फटकारा है। उन्होंने हमेशा से अपने कृत्यों, वचनों से अंधविश्वास, बाह्यआंडबर को नकारा है। उन्होंने हमेशा हिन्दू और मुस्लिम दोनों को एक समान दृष्टि से देखा है
साहित्यक परिचयः-
कबीरदास जी अनपढ़ थे, यह बात उनके कहें गये दोहो से प्रमाणित होती है - 'मसि कागद छुओं नहीं कलम गही नहिं हाथ'
कबीरदास जी ने जो भी उपदेश दिये उसका संग्रह उनके शिष्यों के द्वारा 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित किया गया। बीजक के तीन भाग है- साखी, सबद, रमैनी।
रचनायें- कबीर की सखियाँ, दोहावली, रहना नहि देस विराना है आदि।
प्रश्न 13. संस्कृत भाषा के उच्चारण में दोष के पाँच कारण बताइए।
उत्तर: संस्कृत भाषा के उच्चारण के प्रमुख दोषः-
- भाषा में उच्चारण पारिवारिक तथा अनुकरण द्वारा होता है।
- भाषा में उच्चारण दोष के लिए कंठ, तालु, जिह्वा आदि ध्वनि यंत्रों का दोषपूर्ण होना भी हो सकता है।
- संस्कृत ध्वनियों तथा उनके उच्चारण स्थानों के ज्ञान में अपूर्णता।
- ध्वनि व्यवस्था, स्वराघात, बल, लय, विराम, गति आदि उच्चारण अवयवों के ज्ञान का अभाव होना।
- संस्कृत भाषा के उच्चारण को क्षेत्रीय भाषाओं का उच्चारण भी प्रभावित करता है।
- अशिक्षित परिवारों के बच्चों द्वारा भी परिवार में बड़ों द्वारा दोषपूर्ण उच्चारण का अनुसरण कर संस्कृत भाषा का दोषपूर्ण उच्चारण शुरू कर दिया जाता है।
प्रश्न 14. निम्नलिखित शब्दों को सन्धि विच्छेद कीजिए- विद्यालय, महोत्सव, रमेश, पवन, यद्यपि।
उत्तर:
| शब्द | विच्छेद | संधि |
|---|---|---|
| विद्यालय | विद्या + आलय | दीर्घ स्वर संधि |
| महोत्सव | महा + उत्सव | गुण स्वर संधि |
| रमेश | रमा + ईश | गुण स्वर संधि |
| पवन | पो + अन | अयादि स्वर संधि |
| यद्यपि | यदि + अपि | यण स्वर संधि |
प्रश्न 15. यात्रा वृत्तान्त किसे कहते हैं? हिन्दी के किसी एक यात्रा वृत्तान्त का नाम एवं उसके लेखक का नाम बताइए।
उत्तर: यात्रा वृतांत: यह हिन्दी गद्य साहित्य की ऐसी विधा है, जिसमें लेखक या संबंधित रचनाकार उन स्थनों के बारें में जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। यात्रा वृत्तांत से सीधा सा तात्पर्य है कि लेखक के यात्राओं का अनुभव संग्रह। यात्रा वृत्तांत के श्रेष्ठ लेखक के रूप में राहुल सांकृत्यायन जी को हिन्दी साहित्य जगत में प्रतिष्ठा प्राप्त है।
यात्रा वृत्तांत लेखक - राहुल सांकृत्यायन
रचना - अथातों घुम्मकड़, मेरी लद्दाख यात्रा, मेरी तिब्बत यात्रा, रूस में पच्चीस मांस
प्रश्न 16. मौन वाचन के उद्देश्य बताइए।
उत्तर: मौन वाचन: मौन वाचन जिसे आत्म-पाठ भी कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति शब्दों को बिना बोले अपने मन में पढ़ता है। यह एक महत्वपूर्ण कौशल है, जो पढ़ने की गति और समझ को बेहतर बनाने में मदद करता है
मौन वाचन का उद्देश्य:
- तथ्यों के स्मरण शक्ति में विकास करना
- बोध-ज्ञान की गति में वृद्धि करना
- पढ़े गये वाक्य या वाक्यांश के समझने की क्षमता उत्पन्न करना।
- पढ़ने की गति को तीव्र करना।
- विद्याथियों में शब्द तथा सूक्ति भण्डार में वृद्धि करना।
- मौन वाचन से पढ़ने की गति में वृद्धि होना।
- यह शब्दावली को विकसित करने तथा भाषा की समझ को बेहतर बनाने में मदद करता है
- जब व्यक्ति मौन वाचन में कुशल हो जाता है, तो उसका आत्मविश्वास बढ़ जाता है।
प्रश्न 17. नीचे लिखे नीतिपरक श्लोक का अर्थ लिखिए- 'अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।।'
उत्तर: श्लोक: 'अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम् । उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ॥'
अर्थ: अपना पराया ऐसी गणना करना छोटे चित्त वाले व्यक्ति ही करते है। जबकि उदार हृदय (चित्त) वाले व्यक्ति सारे जगत के लोगों को अपना ही परिवार मानते हैं
प्रश्न 18. निम्नलिखित शब्दों का हिन्दी में अर्थ लिखिए- अभितः, ध्रुवम, श्वः, साम्प्रतम्।
उत्तर:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| अभितः | दोनों ओर |
| ध्रुवम् | अवश्य |
| श्वः | कल |
| साम्प्रतम् | अब |