वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. 'जमीन पक गई है' काव्य-संग्रह है-
(a) जयंशकर प्रसाद का
(b) सुभद्राकुमारी चौहान का
(c) केदारनाथ सिंह का
(d) अज्ञेय का।
उत्तर: (c) : 'जमीन पक गई है' काव्य संग्रह केदारनाथ सिंह का है। यह 1965 में प्रकाशित हुआ था। यह काव्य संग्रह 1947 के बाद भारत में हुए सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तनों पर केन्द्रित है।
प्रश्न 2. 'देवेन्द्रः' शब्द में सन्धि है-
(a) दीर्घ सन्धि
(b) गुण सन्धि
(c) वृद्धि सन्धि
(d) यण सन्धि
उत्तर: (b) : देवेन्द्र में गुण संधि है। गुण संधि में अ, आ के साथ इ, ई का मेल होने पर 'ए', उ, ऊ का मेल होने पर 'ओ' तथा ऋ का मेल होने पर 'अर्' हो जाता है।
उदाहरण:
ज्ञान + उपदेश = ज्ञानोपदेश
महा + ऊर्मि = महोर्मि
प्र + ईक्षा = प्रेक्षा
गज + इंद्र = गजेन्द्र
प्रश्न 3. 'तुम अपने कार्य में सफल रहो।' वाक्य किस प्रकार का वाक्य है?
(a) इच्छावाचक
(b) संकेतवाचक
(c) आज्ञावाचक
(d) सन्देहवाचक।
उत्तर: (a) : 'तुम अपने कार्य में सफल रहो' इच्छावाचक वाक्य है। इच्छावाचक वाक्य में हमें वक्ता की कोई इच्छा, कामना, आकांक्षा, आशीर्वाद आदि का बोध होता है।
संकेतवाचक वाक्य: वे वाक्य जिसमें एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध हो, ऐसे वाक्य संकेतवाचक वाक्य कहलाते हैं। उदाहरण: अगर तुम परिश्रम करते तो आज सफल हो जाते।
आज्ञावाचक वाक्य: ऐसे वाक्य जिनमें आदेश, आज्ञा या अनुमति का पता चले या बोध हो, वे आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं। उदाहरण: सभी अपना-अपना काम करो।
संदेहवाचक वाक्य: ऐसे वाक्य जिनमें हमें किसी प्रकार के संदेह या संभावना का बोध होता है। उसे संदेहवाचक वाक्य कहा जाता है। उदाहरण: आज बहुत तेज बारिश हो सकती है।
प्रश्न 4. 'स्वच्छ' शब्द का अर्थ है-
(a) साफ-सुथरा
(b) छाती
(c) कंघा
(d) सुन्दर आँख
उत्तर: (a) : शब्द - अर्थ
स्वच्छ - साफ-सुथरा
छाती - वक्ष
कंघा - जुलाहों का एक औजार
सुन्दर आँख - सुन्दर नयन
प्रश्न 5. 'सुन्दरता' शब्द का अर्थ है-
(a) जातिवाचक संज्ञा
(b) व्यक्तिवाचक संज्ञा
(c) भाववाचक संज्ञा
(d) समुदायवाचक संज्ञा
उत्तर: (c) : भाववाचक संज्ञा जो किसी भाव, गुण, दशा आदि का बोध कराती है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। सुन्दर (विशेषण) शब्द में 'ता' प्रत्यय जोड़ कर भाववाचक संज्ञा 'सुन्दरता' बनाई जाती है।
उदाहरण:
भावुक + ता = भावुकता
बुढ़ा + पा = बुढ़ापा
मीठा + स = मिठास
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. श्लेष अलंकार की परिभाषा लिखिए।
उत्तर: श्लेष अलंकार: जब किसी वाक्य में एक ही शब्द का प्रयोग कई बार हो और हर बार उसके अलग-अलग अर्थ निकलते हो, वहाँ पर श्लेष अलंकार होता है।
उदाहरण:
रहिमन पानी रखिए, बिन पानी सब सून ।
पानी गए न ऊबरे, मोती, मानुष, चून।
स्पष्टीकरण: रहीम जी ने इस पंक्ति में पानी को तीन अर्थों में प्रयुक्त किया है। पानी का पहला अर्थ मनुष्य के संदर्भ में 'विनम्रता' से है, मनुष्य में हमेशा विनम्रता होनी चाहिए। पानी का दूसरा अर्थ आभा या चमक से है, जिसके बिना मोती का कोई मूल्य नहीं है। तीसरा अर्थ जल से संबंधित है जिसे आटे से जोड़कर दर्शाया गया है। रहीम जी का कहना है कि जिस तरह आटे का अस्तित्व पानी के बिना नम्र नहीं हो सकता, मोती का मूल्य उसकी आभा के बिना नहीं हो सकता है, उसी तरह विनम्रता के बिना व्यक्ति का कोई मूल्य नहीं हो सकता है। मनुष्य को अपने व्यवहार में हमेशा विनम्रता रखनी चाहिए।
प्रश्न 7. 'प्र' उपसर्ग से बनने वाले दो शब्द बनाइए।
उत्तर: उपसर्गः वे शब्दांश या अवयव जो किसी शब्द के पहले जुड़कर उसका विशेष अर्थ बनाते है, उन्हें उपसर्ग कहा जाता है। उपसर्ग का अर्थ होता समीप बैठना।
'प्र' उपसर्ग से बनने वाले शब्द: प्रगति, प्रबल, प्रभाव, प्रकृति, प्रकोप, प्रसारित, प्रयोग, प्रसार, प्रकाश, प्रयास आदि।
प्रश्न 8. 'जो पुरुष अभिनय करे' वाक्यांश के लिए एक शब्द लिखिए।
उत्तर: जो पुरूष अभिनय करें वाक्यांश के लिए एक शब्द 'अभिनेता' प्रयुक्त होता है।
ईश्वर में आस्था रखने वाला: आस्तिक
ईश्वर में आस्था न रखने वाला: नास्तिक
प्रश्न 9. 'तत्र एकः विशालः सरोबरः अस्ति' का हिन्दी में अनुवाद लिखिए।
उत्तर: तत्र एकः विशालः सरोवरः अस्ति।
अर्थ- वहाँ एक विशाल सरोवर (तालाब) है।
प्रश्न 10. 'प्रकृति के सुकुमार कवि' किसे कहा जाता है?
उत्तर: छायावादी युग के चार स्तंभों में से एक सुमित्रानंदन पंत जी है। प्रकृति के सुकुमार कवि सुमित्रानंदन पंत को कहा जाता है। पंत जी की रचनाओं में प्रकृति का अत्यंन सुन्दर और मधुर चित्रण मिलता है। उन्होंने प्रकृति के हर पहलु को बड़ी बारीकी से देखा और समझा तथा अपनी कविताओं में उसका वर्णन बड़ी ही मार्मिक ढंग से किया है। उनके शब्दों में प्रकृति जीवन्त हो उठती है।
प्रश्न 11. हरि शब्द का तृतीय विभक्ति और एकवचन का रूप लिखिए।
उत्तर:
| विभक्ति | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | हरिः | हरी | हरयः |
| द्वितीया | हरिम् | हरी | हरीन् |
| तृतीया | हरिणा | हरिभ्याम् | हरिभिः |
| चतुर्थी | हरये | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| पंचर्मी | हरेः | हरिभ्याम् | हरिभ्यः |
| पष्ठी | हरेः | हर्योः | हरीणाम् |
| सप्तमी | हरौ | हर्योः | हरिषु |
| सम्बोधन | हे हरे ! | हे हरी ! | हे हरयः ! |
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. कबीरदास जी का संक्षिप्त जीवन-परिचय एवं रचनाओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: कबीरदास जी: कबीरदास जी हिन्दी साहित्य के भक्तिकाल के निर्गुण भक्ति के ज्ञानाश्रयी शाखा के प्रधान कवि थे। उनके जन्म-मृत्यु के संबंध में आज भी विद्ववानों में परस्पर मतभेद है यद्यपि प्रमाणिक साक्ष्यों के आधार पर कबीरदास जी का जन्म सन् 1398 ई० में वाराणसी में और मृत्यु सन् 1518 ई0 में मगहर में हुई। ऐसी मान्यता है कि कबीर दास जी का जन्म एक विधवा ब्राह्मणी के गर्भ से हुआ, जिसने लोकापवाद के भय के कारण उन्हें लहरतारा नामक तालाब के किनारे फेंक दिया, जहाँ से नीमा-नीरू नामक जुलाहा दंपत्ति इन्हें उठाकर इनका पालन-पोषण करते हैं। इन्होंने रामानन्द जी को अपना गुरु माना है। कबीरदास जी का लोई नामक महिला के साथ वैवाहिक संबंध का वर्णन मिलता है, जिससे इनकी दो संताने कमाल तथा कमाली थी। कबीरदास जी अनपढ़ थे 'मसि कागद छुओ नहीं कलम गही नहिं हाथ'।
कबीरदास जी ने जो भी उपदेश दिये उसका संग्रह उनके शिष्यों के द्वारा 'बीजक' नामक ग्रंथ में संकलित किया गया है। बीजक के तीन भाग है- साखी, सबद, रमैनी।
रचनायें: कबीर की सखियाँ, दोहावली, रहना नहि देस विराना है आदि।
प्रश्न 13. कारक किसे कहते हैं? उनके नाम तथा विभक्ति चिह्न लिखिए?
उत्तर: कारक: वाक्य में क्रिया के साथ संबंध रखने वाले को कारक कहते है। वाक्य विन्यास में संज्ञा, सर्वनाम आदि का क्रिया के साथ संबंध रहता है, इसलिए उन्हें कारक कहते हैं। साधारणतयः कारक का अर्थ होता है 'करने वाला' अर्थात् क्रिया को पूर्ण करने वाले को कारक कहते है।
जैसे- राजा दशरथ के पुत्र राम ने लंका में रावण को बाणों से मारा। इस वाक्य में पुत्र राम, लंका, रावण तथा बाण ये शब्द कारक है।
संज्ञा या सर्वनाम के आगे जो प्रत्यय (चिह्न) लगाये जाते हैं, उन्हें विभक्ति कहते हैं। विविध कारको का ज्ञान कराने के लिए शब्द के साथ कोई न कोई विभक्ति लगानी पड़ती है।
कारको के नाम तथा विभक्ति चिन्ह:
| कारक | चिह्न | विभक्ति |
|---|---|---|
| कर्ता | ने | प्रथमा |
| कर्म | को | द्वितीया |
| करण | से, द्वारा, साथ (संबंध जुड़ना) | तृतीया |
| सम्प्रदान | को, के लिए | चतुर्थी |
| अपादान | से (अलग होने के अर्थ में) | पंचमी |
| संबंध | का, की, के, रा, री, रे | षष्ठी |
| अधिकरण | में, पर | सप्तमी |
प्रश्न 14. जीवनी एवं आत्मकथा में मूलभूत अन्तर लिखिए।
उत्तर: आत्मकथा व्यक्ति के जीवन का विस्तृत वर्णन करता हैं, एक आत्मकथा में लेखक अपने जीवन में घटित सभी महत्वपूर्ण घटनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी देता है। आत्मकथा का उद्देश्य समाज को लेखक के संपूर्ण जीवन की अनुभूति कराना होता है।
जीवनी और आत्मकथा में अंतर -
| जीवनी | आत्मकथा |
|---|---|
| 1. जीवनी किसी के जीवन पर आधारित होती है। | 1. आत्मकथा में लेखक की स्वयं की कथा होती है। |
| 2. जीवनी संस्मरणात्मक नहीं होती है। | 2. आत्मकथा संस्मरणात्मक होती है। |
| 3. जीवनी में लेखक किसी अन्य के जीवन की घटनाओं का चित्रण करता है। | 3. जबकि आत्मकथा में लेखक के जीवन की घटनाओं का चित्रण होता है। |
| 4. जीवनी में लेखक द्वारा किसी साहित्यकार के जीवन के विशेष विषय में लिखा विवरण होता है। | 4. आत्मकथा में किसी साहित्यकार द्वारा स्वयं के किसी विशेष पर लिखा विवरण होता है। |
प्रश्न 15. कहानी- शिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए
उत्तर: कहानी शिक्षण- कहानी का मुख्य उद्देश्य पाठक या श्रोता का मनोरंजन करना व आनंद प्रदान करना होता है। विद्यालय में बालकों को कहानी का शिक्षण देने का मुख्य उद्देश्य आनंद देना होता है।
कहानी शिक्षण की उपयोगिता निम्नलिखित है:
- छात्रों का चरित्र-निर्माण करने में सहयोग देना
- छात्रों में साहित्य के प्रति रूचि पैदा करना।
- छात्रों में समाजिकता की भावना पैदा करना।
- छात्रों में कहानी लेखन की रूचि पैदा करना।
- छात्रों में भावनात्मक व चरित्रिक भावनाओं को विकसित करना।
- छात्रों के मौखिक व लेखन अभिव्यक्ति को विकसित करना।
- छात्रों को शब्द, सूक्ति, लोकाक्ति व मुहावरों का ज्ञान कराना।
- छात्रों के सम्मुख ज्ञान को सरल और रोचक रूप में प्रस्तुत करना।
- छात्रों को भाषा व लेखन की विभिन्न शैलियों से परिचित कराना।
- छात्रों में विचार, कल्पना व तर्क शक्ति को विकसित कराना।
प्रश्न 16. अपनी पाठ्य-पुस्तक से चार पंक्ति का कोई श्लोक लिखिए।
उत्तर: येषां न विद्या न तपो न दानम्, ज्ञानं न शीलं न गुणों न धर्मः।
ते मर्त्यलोके भुविभारभूता, मनुष्य रूपेण मृगाश्चरिन्त ।।
अर्थ- जिन लोगों के पास न तो विद्या है, न दान है, न शील है, न गुण और न धर्म, ऐसे लोग इस पृथ्वी पर भार है और मनुष्य के रूप में जानवर की तरह घूमते रहते हैं।
प्रश्न 17. निम्नलिखित शब्दों का हिन्दी में अर्थ लिखिएँ। मक्षिका, बहवः, मा, तक्रम्
उत्तर:
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मक्षिका | मक्खी |
| बहतः | बहुत/बड़ी संख्या में |
| मा | मत/नहीं |
| तक्रम् | छाछ |
प्रश्न 18. निम्नलिखित संस्कृत शब्दों का संधि-विच्छेद कीजिए। मनोरथः, सज्जनः, वसन्तोत्सवः, मध्वरिः
उत्तर: संधि-विच्छेद : दो शब्दों के मेल से बने शब्द को अलग-अलग करना संधि-विच्छेद कहलाता है।
| शब्द | संधि-विच्छेद |
|---|---|
| मनोरथः | मनः + रथः |
| सज्जनः | सत् + जनः |
| वसन्तोत्सवः | वसन्त + उत्सवः |
| मध्वरिः | मधु + अरिः |