बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. राधाकृष्णन आयोग की संस्तुतियां सम्बन्धित थी-
(a) उच्च शिक्षा में
(b) माध्यमिक शिक्षा से
(c) प्राथमिक शिक्षा से
(d) तकनीकी शिक्षा से
उत्तर: (a) : 1984 के राधाकृष्णन आयोग ने स्वतंत्रता के बाद के भारत में उच्च या विश्वविद्यालय शिक्षा को आकार देने के लिए कुछ मूल्यवान सिफारिशें की थी।
प्रश्न 2. वैदिक कालीन शिक्षा किस दर्शन पर आधारित थी-
(a) प्रकृतिवाद
(b) आदर्शवाद
(c) समाजवाद
(d) व्यवहार वाद
उत्तर: (b) : वैदिक कालीन शिक्षा, जिसे गुरूकुल प्रणाली भी कहा जाता है, आदर्शवाद दर्शन पर आधारित थी। इसमें शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को ऐसा जीवन जीने के लिए तैयार करना था जो धर्म, अर्थ और काम के सिद्धांतों के अनुरूप हो, और वेदों में निहित उच्च मूल्यों और आदर्शों को अपनाना हो।
प्रश्न 3. दर्शनशास्त्र अत्यन्त ही ........................ है।
(a) नवीन
(b) प्राचीन
(c) आधुनिक
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (b) : दर्शनशास्त्र अत्यंत ही पुराना अथवा प्राचीन हैं। इसका इतिहास मानव सभ्यता के प्रारंभ से ही जुड़ा हुआ है, जब मनुष्य ने ब्रहमांड और अपनी स्थिति के बारे में प्रश्न पूछने शुरू किए। भारतीय दर्शन में, सांख्य दर्शन को सबसे प्राचीन माना जाता है।
प्रश्न 4. "प्राथमिक शाला में भाषा शिक्षा" नामक पुस्तक के लेखक हैं-
(a) रवीद्रनाथ टैगोर
(b) गिजू भाई बधेका
(c) स्वामी विवेकानन्द
(d) महात्मा गाँधी
उत्तर: (b) : 'प्राथमिक शाला में भाषा शिक्षा' नामक पुस्तक के लेखक गिजू भाई बधेका है। यह उनकी एक प्रसिद्ध रचना है, जिसे 1934 में पहली बाद हिन्दी में प्रकाशित किया गया था। गिजुभाई बधेका बाल साहित्य और बाल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे।
प्रश्न 5. 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था का वर्णन संविधान के किस धारा के अन्तर्गत किया गया हैं-
(a) 45
(b) 49
(c) 26
(d) 50
उत्तर: (a) : भारतीय संविधान ने अनुच्छेद 45 के तहत 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए मुक्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान किया है। लेकिन यह लक्ष्य हासिल नही किया जा सका और फिर भारतीय संविधान के अनुच्छेद (21A) के तहत शिक्षा का अधिकार को एक मौलिक अधिकार बना दिया गया।
प्रश्न 6. मूल्यों के विकास का सम्बन्ध किस पक्ष में होता है।
(a) ज्ञानात्मक
(b) कौशलात्मक
(c) भावात्मक
(d) मनोगत्यात्मक
उत्तर: (c) : मूल्यों का विकास, व्यक्ति के भावनात्मक और व्यवहारिक पक्ष से संबंधित होता हैं। इन लक्ष्यों का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच कुछ रूचियों, दृष्टिकोण, प्रशंसा और मूल्यों को विकसित करना हैं।
प्रश्न 7. मनुष्यों में मूल्य के विकास में सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता हैं-
(a) आर्थिक पक्ष
(b) परिवार
(c) भौतिक सुविधाएं
(d) विदेशी मित्र
उत्तर: (b) : मुनष्य में मूल्यों के विकास में परिवार का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता हैं। परिवार ही वह जगह है जहां बच्चे सबसे पहले नैतिक मूल्यों, संस्कृति और व्यवहार के बारे में सीखते हैं।
प्रश्न 8. शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य हैं-
(a) शारीरिक विकास
(b) मानसिक विकास
(c) सर्वागीण विकास
(d) नैतिक विकास
उत्तर: (c) : शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य किसी व्यक्ति के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें उसके बौद्धिक, सामाजिक, भावनात्मक और शारीरिक क्षेत्रों का विकास शामिल हैं।
प्रश्न 9. मदरसों में शिक्षा का माध्यम था-
(a) फारसी
(b) अरबी
(c) उर्दू
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (d) : मदरसों में शिक्षा का माध्यमः धर्मार्थ मदरसा दरसे निजामी में शिक्षण का माध्यम अरबी, उर्दू और फारसी है, जबकि मदरसा दरसे आलिया में राज्य पाठ्यपुस्तक निगमों द्वारा प्रकाशित या राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) द्वारा निर्धारित पाठ्यपुस्तकों का उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 10. निस्यंदन सिद्धांत किसने दिया था-
(a) हण्टर
(b) मैकाले
(c) वुड
(d) फ्रांसिस
उत्तर: (b) : लार्ड मैकाले ने शिक्षा का निस्यंदन सिद्धांत दिया हैं, अर्थात् एक ऐसा सिद्धांत जो यह मानता था कि ज्ञान शिक्षित वर्गों से जनता तक पूर्व के स्वतंत्र प्रयासों के माध्यम से प्रसारित होगा।
प्रश्न 11. प्रकृतिवाद का श्रेष्ठ योगदान शिक्षा के किस क्षेत्र में हैं-
(a) उद्देश्य
(b) शिक्षण विधि
(c) पाठ्यक्रम
(d) अनुशासन
उत्तर: (b) : प्रकृतिवाद का श्रेष्ठ योगदान शिक्षा के शिक्षण विधि के क्षेत्र में हैं। प्रकृतिवाद की शिक्षण विधियाँ वैज्ञानिक एवं मनौवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित है जो निम्न प्रकार हैं-
- स्व-अधिगम विधि (Heuristic)
- क्रिया विधि (Learning by doing)
- खेल विधि (Play way method)
- भ्रमण विधि (Tour method)
प्रश्न 12. शिक्षा में प्रयोजनवादी शिक्षा हैं-
(a) अनुभव केन्द्रित
(b) विषय केन्द्रित
(c) पाठ्यक्रम केन्द्रित
(d) बाल केन्द्रित
उत्तर: (a) : शिक्षा में प्रयोजनवादी शिक्षा एक दर्शन है जो यह मानता है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को जीवन के लिए तैयार करना हैं, उन्हें सामाजिक रूप से सक्षम बनाना हैं, और उन्हें विभिन्न अनुभवों के माध्यम से ज्ञान प्राप्त करने में मदद करना है। इसलिए यह अनुभव केन्द्रित हैं।
प्रश्न 13. शिक्षा से मेरा अभिप्राय हैं- "बालक और मनुष्य मस्तिष्क और आत्मा में पाये जाने वाले सर्वोत्तम गुणों का चतुर्मुखी विकास।" यह कथन किसका हैं-
(a) महात्मा गाँधी
(b) विवेकानंद
(c) शंकराचार्य
(d) टैगोर
उत्तर: (a) : शिक्षा से मेरा अभिप्राय हैं- "बालक और मनुष्य मस्तिष्क और आत्मा में पाये जाने वाले सर्वोत्तम गुणों का चतुर्मुखी विकास"। यह कथन महात्मा गाँधी जी का हैं।
प्रश्न 14. जनसंख्या शिक्षा पर प्रथम राष्ट्रीय सेमिनार कहाँ आयोजित किया गया था?
(a) कलकत्ता
(b) सूरत
(c) दिल्ली
(d) मुम्बई
उत्तर: (d) : भारत सरकार के आदेशानुसार 'परिवार नियोजन संघ' ने 7 तथा 8 मार्च, 1969 को बम्बई (वर्तमान में मुम्बई) में एक सेमिनार का आयोजन किया और उसमें जनसंख्या शिक्षा के प्रासर को प्रस्तुत को किया।
प्रश्न 15. "डेमोक्रेसी एण्ड एजूकेशन" पुस्तक के लेखक हैं-
(a) मांण्टेसरी
(b) प्लेटो
(c) जॉन डी. वी
(d) रूसों
उत्तर: (c) : जॉन डी वी एक प्रभावशाली दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक और शैक्षिक विचारक थे। उन्होने 1916 में अपनी पुस्तक डेमोक्रेसी एंड एजुकेशनः एन इंट्रोडक्शन टू द फिलॉसफी ऑफ एजूकेशन प्रकाशित की।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. शिक्षा क्या है।
उत्तर: शिक्षा का मतलब ज्ञान, सदाचार, उचित आचरण, तकनीकी शिक्षा, तकनीकी दक्षता, विद्या आदि को प्राप्त करने की प्रक्रिया को कहते हैं। शिक्षा में ज्ञान, उचित आचरण और तकनीकि दक्षता आदि समाविष्ट हैं। मॉरीसन के अनुसार, "शिक्षा सीखने की क्रिया व्यक्ति का विकास है तो उसके शारीरिक विकास से भिन्न हैं।"
प्रश्न 17. शिक्षक के विषय में प्रकृतिवादियों के क्या विचार हैं?
उत्तर: अत्यन्त निष्क्रिय है। प्रकृतिवाद के अनुसार "प्रकृति ही वास्तविक शिक्षक हैं।" प्रकृतिवादी विचारक प्रकृति को ही पथ प्रदर्शक एवं समस्त ज्ञान का भंडार मानते हैं। शिक्षक के विषय में वुडवर्थ स्पष्ट कहते हैं कि, प्रकृति ही शिक्षक हैं।" इसके अतिरिक्त प्रकृतिवादी दार्शनिक 'जीन जैक्स रूसों' का कथन हैं कि, "प्रकृति ही शिक्षक है, तथा शिक्षक का स्थान पर्दे के पीछे हैं।"
प्रश्न 18. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम कब बना?
उत्तर: पर्यावरण की सुरक्षा एवं पर्यावरण में सुधार करने के उद्देश्य से पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम (Environment Protection Act - EPA), 1986 को अधिनियमित किया गया था। EPA का अधिनियमन जून 1972 (स्टॉकहोम सम्मेलन) में स्टॉक होम में आयोजित "मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन" को देश में प्रभावी बनाने हेतु किया गया। ज्ञातव्य है कि भारत ने 'मानव पर्यावरण में सुधार के लिये उचित कदम उठाने हेतु आयोजित' इस सम्मेलन में भाग लिया था।
प्रश्न 19. किन्ही तीन मूल्यों के नाम लिखे ?
उत्तर: मूल्यों के प्रकार इस प्रकार है:
- दृष्टिकोण के आधार पर-
- सकारात्मक मूल्य, जैसे अहिंसा, शांति, धैर्य आदि।
- नकारात्मक मूल्य, जैसे हिंसा, अन्याय, कायरता आदि।
- उद्देश्य के आधार पर -
- साध्य मूल्य वे सभी वस्तुएँ या अवस्थाएँ, जो स्वयं में शुभ होती है।
- साधन मूल्य जो अपने आप में शुभ न होकर किसी अन्य वस्तु के साधन के रूप में शुभ होता है।
- विषय क्षेत्र के आधार पर-
- सामाजिक मूल्य, जैसे अधिकार, कर्तव्य, न्याय आदि।
- मानव मूल्य, जैसे नैतिक मूल्य, आध्यात्मिक मूल्य आदि
- नैतिक मूल्य, जैसे न्याय, ईमानदारी आदि।
- आध्यात्मिक मूल्य, जैसे शांति, प्रेम अहिंसा आदि।
- भौतिक मूल्य, जैसे भोजन, मकान, वस्त्र आदि।
- सौन्दर्यात्मक मूल्य, प्रकृति, कला एवं मानवीय जीवन के सौंदर्य को कहते हैं।
- मनोवैज्ञानिक मूल्य, जैसे प्रेम, दया आदि।
प्रश्न 20. राष्ट्रीय बालश्रम नीति कब घोषित की गयी?
उत्तर: सातवीं पंचवर्षीय योजनावधि के दौरान 14 अगस्त, 1987 को राष्ट्रीय बाल श्रम नीति को मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किया गया।
उद्देश्यः इस नीति का उद्देश्य बच्चों को रोजगार से हटाकर उन्हें समुचित रूप से पुर्नवास कराना था।
मंत्रालयः श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार
तत्कालीन प्रधानमंत्रीः स्व. राजीव गांधी
प्रश्न 21. वुड्स डिस्पैच क्या हैं?
उत्तर: बोर्ड के अध्यक्ष थे। उन्होनें 1854 में भारत के तत्कालीन राज्यपाल जनरल लॉर्ड डलहौजी के पास एक प्रेषण भेजा। बुड्स डिसपैच की विशेषताएं:
- स्थानीय भाषाओं में प्राथमिक स्कूली शिक्षा
- माध्यमिक विद्यालय में ऐंग्लो- वर्नाक्यूलर माध्यम
- कॉलेज या उच्च शिक्षा अंग्रेजी माध्यम में
प्रश्न 22. संकुचित रूप में शिक्षा का स्वरूप क्या हैं?
उत्तर: संकुचित रूप में शिक्षा का मतलब है विद्यालय और महाविद्यालय जैसे औपचारिक संस्थानों में, निर्धारित समय और स्थान पर, सुनियोजित तरीके से ज्ञान और कौशल प्राप्त करना। यह एक सोद्देश्य प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विद्यार्थी परीक्षा पास करने और विशिष्ट पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए तैयार होते हैं। टी. रेमण्ट के अनुसार, "संकुचित अर्थ में शिक्षा का प्रयोग बोलचाल की भाषा और कानून में किया जाता हैं।"
प्रश्न 23. "वसुधैव कुटुम्बकम" इस सूफ्ति का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर: वसुधैव कुटुम्बकम् सनातन धर्म का मूल संस्कार तथा विचारधारा है जो महाउपनिषद् सहित कई ग्रंथों में लिपिबद्ध है। इसका अर्थ हैं- धरती ही परिवार है (वसुधा एव कुटुम्बकम)। यह वाक्य भारतीय संसद के प्रवेश कक्ष में भी अंकित हैं।
अयं निजः परोवेती गणना लघुचेतसाम् ।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् ।।
(महोपनिषद अध्याय छ, मंत्र 61)
अर्थ - यह (मेरा) बन्धु है और यह नही है, इस तरह की गणना छोटे चित्त (संकुचित मन) वाले लोग करते हैं। उदार हृदय वाले लोगों के लिए तो (सम्पूर्ण) धरती ही परिवार हैं।
प्रश्न 24. आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता किसे कहा गया हैं?
उत्तर: चार्ल्स ग्रांट को आधुनिक शिक्षा का जन्मदाता माना जाता है। 1813 ई0 के चार्टर एक्ट में भारत में वैज्ञानिक शिक्षा के प्रसार के लिए सालाना एक लाख रूपये की राशि का प्रावधान रखा गया। अतः ईस्ट इण्डिया कंपनी द्वारा भारत में शिक्षा के प्रसार का वास्तविक कार्य 1813 ई0 के बाद किया किया गया। 1833 ई0 के चार्टर एक्ट में शिक्षा हेतु इस एकम को बढ़ाकर सालाना दस लाख रूपये किया गया। इसके बाद समय-समय पर अनेक आयोग । समीतियों का गठन किया गया।
प्रश्न 25. उपनयन का शाब्दिक अर्थ क्या होता है?
उत्तर: हिंदू धर्मो के 16 संस्कारों में से 10वां संस्कार है उपनयन संस्कार। इसे यज्ञोपवित या जनेऊ संस्कार भी कहा जाता है। उप यानी पास और नयन यानी ले लाना अर्थात् गुरू के पास ले जाने का अर्थ है उपनयन संस्कार। प्राचीन काल में इसकी बहुत ज्यादा मान्यता थी। वर्तमान की बात करें तो आज भी यह परंपरा कायम है। लोग आज भी जनेऊ संस्कार करते हैं। जनेऊ में तीन सूत्र होते हैं। ये तीन सूत्र तीन देवता के प्रतीक हैं यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश। यह संस्कार करने से शिशु को बल, ऊर्जा और तेज की प्राप्ति होती है। यही नहीं, शिशु में आध्यात्मिक भाव जागृत होता है।
प्रश्न 26. ग्राम शिक्षा समिति का गठन क्यों किया गया है?
उत्तर: सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए बनायी गयी थी। समिति अपने सदस्यों में से अपने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव कर सकती हैं। ग्राम शिक्षा समिति के अध्यक्ष ग्राम सरपंच होते हैं।
प्रश्न 27. किस दर्शन को अर्थ क्रियावाद, व्यवहारवाद, अनुभवाद के नाम से जाना जाता हैं?
उत्तर: प्रयोजनवाद दर्शनशास्त्र की वह शाखा है जो किसी चिरस्थायी सत्य को स्वीकार नहीं करती अपितु यह परिवर्तित परिस्थितियों के अनुसार ही सत्य को परिभाषित करने का समर्थन करती हैं। बेकन को प्रयोजनवाद का सर्वप्रथम प्रवर्तक माना जाता है। एवं उसने विज्ञान को समाज का मार्गदर्शन बताया। प्रयोजनवादी दर्शन को कुछ अन्य नामों से भी जाना जाता हैं, जैसे व्यवहारवादी, कारणवाद अर्थ क्रियावाद, उपयोगितावाद, उपकरणवाद, प्रयोगवाद, फलकवाद, अनुभववाद इत्यादि।
प्रश्न 28. आदर्शवाद के अनुसार किस जगत का महत्वपूर्ण स्थान है?
उत्तर: आदर्शवादी विचारधारा सम्पूर्ण जगत को दो रूपों में विभाजित करती हैं, पहला भौतिक जगत; और दूसरा आध्यात्मिक जगत। आदर्शवादी भौतिक जगत की अपेक्षा आध्यात्मिक जगत को अधिक श्रेष्ठ मानते है तथा उसे उचित महत्व प्रदान करते हैं। आदर्शवादियों का तर्क है कि भौतिक संसार पदार्थों से बना है और पदार्थ नाशवान होते हैं। अतः भौतिक जगत नाशवान है। इसके विपरीत आध्यात्मिक जगत विचारयुक्त है और विचार कभी नष्ट नहीं होते इसलिए आध्यात्मिक जगत सत्य हैं।
प्रश्न 29. प्रयोजनवाद के अनुसार सर्वोच्च सत्ता किसकी हैं?
उत्तर: प्रयोजनवाद के अनुसार सर्वोच्च सत्ता मनुष्य की है। वह मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ प्राणी मानते हुए उसकी शक्ति में विश्वास करता है। वह अपनी आवश्यकताओं, उद्देश्यों तथा इच्छाओं के अनुसार अपने आपकों पर्यावरण के अनुसार ढ़ाल लेता हैं। अतः मानव के व्यक्तित्व के विकास के लिए समाज अनिवार्य हैं।
प्रश्न 30. आदर्शवादी शिक्षा की कितनी विधियाँ हैं?
उत्तर: आर्दशवादी शिक्षा में मुख्य रूप से तीन विधियाँ हैः व्याख्यान विधि, प्रश्न उत्तर विधि और वाद विवाद विधि। इन विधियों का उपयोग छात्रों को ज्ञान प्रदान करने, उनके विचारों को विकसित करने और आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. मानव जीवन में शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: मनुष्य के जीवन में शिक्षा का बहुत बड़ा महत्व है। शिक्षा व्यक्तित्व के निर्माण, ज्ञान और उसके कौशल में सुधार करती है। और साथ ही मनुष्य को सभ्यता की तरफ ले जाती है। एक शिक्षित व्यक्ति सही और गलत में भलींभांति अंतर जानता है, और साथ ही उसके सोचने और समझने की शक्ति प्रबल होती है। एक शिक्षित व्यक्ति का दिमाग विकसित होता है, जिसके कारण वह अच्छी सोच वाला समाज बनाता हैं। शिक्षित होना मनुष्य को उसकी भाषा और संस्कृतिक से जोड़े रखता है।
प्रश्न 32. बौद्ध कालीन शिक्षा की विशेषताएं लिखिए।
उत्तर: बौद्ध कालीन शिक्षा की विशेषताएं:-
- बौद्ध शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत भौतिक सुख सुविधाओं और विलासिता का त्याग अत्यंत महत्वपूर्ण था।
- विहार या बौद्ध मठ शिक्षा के केंद्र थे
- छात्रों को एक दीक्षा समारोह (पबज्जा) से गुजरना पड़ता था, जिसके बाद उन्हें 12 वर्षों तक नवदीक्षित जीवन व्यतीत करना पड़ता था।
- छात्रों से उस आज्ञाओं का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
- इसके बाद दूसरा समारोह होता था जिसे उपसम्पदा कहा जाता था जो अब उसे पूर्ण भिक्षु या भिक्षु बनने के योग्य उससे यह अपेक्षित था।
- यह दस वर्ष की अवधि थी जिसके अंत में वे आचार्य बन गये और अन्य विद्यार्थियों को पढ़ा सकते थे।
- इसमें मुक्ति पर जोर दिया गया।
प्रश्न 33. आधुनिक शिक्षा पर प्रकृतिवाद का क्या प्रभाव पड़ा? लिखिए।
उत्तर: प्रकृतिवाद ने आधुनिक शिक्षा पर एक महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। प्रकृतिवादी विचारकों ने शिक्षा को बच्चे के प्राकृतिक विकास के अनुसार बनाने और प्राकृतिक वातावरण में सीखने को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इस दृष्टिकोण ने कुछ शैक्षणिक पद्धतियों और अवधारणाओं को विकसित किया हैं, जैसे कि व्यक्तिगत विकास पर ध्यान केंद्रित करना, छात्र केंद्रित शिक्षा, और रचनात्मक तथा व्यावहारिक सीखने की विधियों को बढ़ावा देना।
आधुनिक शिक्षा पर प्रकृतिवाद का प्रभावः
- → व्यक्तिगत विकास पर जोर
- छात्र केंद्रित शिक्षा
- → रचनात्मक व व्यावहारिक शिक्षा
- → पर्यावरण और प्रकृति के प्रति जागरूकता
- मुक्त शिक्षा
- शिक्षक की भूमिका
- शिक्षा के मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण
प्रश्न 34. प्रयोजनवाद के किन्हीं चार गुण एवं चार दोषों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: प्रयोजनवाद दर्शन की आधुनिक विचारधारा प्रयोजनवाद है। इसके जन्मदाता प्रयोजनवादी दार्शनिक विलियम जेम्स हैं। जॉन ड्यूवी, जानलॉक तथा शिलर भी इसी श्रेणी में आते हैं।
प्रयोजनवाद के निम्नलिखित गुण हैं:-
- यह प्रयाग पर आधारित है। अतः इससे वज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास होता हैं।
- यह सामाजिक एवं वैयक्तिक विकास का साधन हैं
- यह उपयोगिता एवं व्यावहारिकता पर आधारित हैं।
प्रयोजनवाद के निम्नलिखित दोष हैं:-
- इससे बालक में आध्यत्मिक मूल्यों का विकास नही किया जा सकता।
- इसमें बालक अधिक सक्रिय रहता हैं, शिक्षक कम।
- यह तत्ववाद का विरोधी है तथा बहुत्ववाद में विश्वास रखता हैं।
- इसका क्षेत्र सीमित हैं, जो जीवन के लिए उपयोगी है, उसे ही अपना लक्ष्य बनाता है तथा अनुपयोगी होने पर परित्याग कर देता हैं।
प्रश्न 35. माध्यमिक शिक्षा आयोग के अध्यक्ष कौन थे? इसकी नियुक्ति कब हुई थी?
उत्तर: केंद्रिय शिक्षा सलाहकार बोर्ड ने भारत सरकार को सुझाव दिया कि माध्यमिक शिक्षा के पूर्ण गठन की आवश्यकता है। भारत सरकार ने बोर्ड के इस सुझाव को स्वीकार किया तथा 23 सितम्बर 1952 को मद्रास विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. लक्ष्मण स्वामी मुदालियर की अध्यक्षता में माध्यमिक शिक्षा आयोग की नियुक्ति की। अध्ययन के नाम पर इस आयोग को मुदालियर शिक्षा आयोग भी कहा जाता हैं। आयोग ने पाठ्यचर्या में विविधता लाने, एक मध्यवर्ती स्तर जोड़ने, त्रिस्तरीय स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने इत्यादि की सिफारिश की-
माध्यमिक शिक्षा आयोग की संस्तुतियाँ -
- 4 या 5 वर्ष की प्राइमरी शिक्षा।
- सेकण्डरी शिक्षा के दो भाग होने चाहिए
- वस्तुनिष्ठ (MCQ) परीक्षण पद्धति को अपनाया जाए।
- संख्यात्मक अंक देने के बजाय सांकेतिक अंक दिया जाए।
- उच्च तथा उच्चतर माध्यमिक स्तर की शिक्षा के पाठ्यक्रम में एक मूल विषय रहे जो अनिवार्य रहे जैसे गणित, सामान्य ज्ञान, कला, संगीत आदि।
प्रश्न 36. "हण्टर कमीशन" की क्या विशेषता थी?
उत्तर: 1882 के हंटर आयोग की अध्यक्षता सर विलियम हंटर ने की थी और इसे भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड रिपन ने नियुक्त किया था। हंटर आयोग का गठन 3 अप्रैल 1882 को किया गया था, जब शिक्षा की सामान्य परिषद ने रिपन से अनुरोध किया था। 1882 के हंटर आयोग की प्रमुख सिफारिशों के परिणामस्वरूप ब्रिटिश भारत की शिक्षा प्रणाली में निम्नलिखित परिवर्तन हुएः
- निचले स्तर पर सरकारी नौकरियों के लिए साक्षर उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई, साथ ही पिछड़े जिलों में प्राथमिक विद्यालायों का विस्तार किया गया।
- स्थानीय स्वशासन अधिनियम के तहत जिला और नगरपालिका बोर्डो को प्राथमिक शिक्षा के प्रबंधक का काम सौंपा गया था। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लिए निधियों को अलग अलग किया गया था ताकि ग्रामीण स्कूलों के लिए निर्धारित निधियों का शहरी स्कूलों द्वारा दुरूप्रयोग होने से बचा जा सकें।
- माध्यमिक विद्यालय के पाठ्यक्रम को भी संशोधित किया गया तथा शैक्षणिक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को विभिन्न शाखाओं में विविधतापूर्ण बनाया गया।
प्रश्न 37. टैगोर के अनुसार शिक्षा का अर्थ व उद्देश्य बताइए।
उत्तर: "मनुष्य और प्रकृति में मौजूद हर चीज के बीच केवल पूर्ण सामंजस्य ही मनुष्य की आत्मा को वास्तविकता के रहस्यों को समझने और अनंत को महसूस करने में सक्षम बनाएगा। इसलिए मनुष्य को मनुष्य से बढ़कर बनने, चेतना की स्वतंत्रता का अनुभव करने, सभी के साथ एक होने के लिए बाधाओं को पार करना चाहिए।" सभी प्राणियों के साथ ज्ञान, प्रेम और सेवा में वास्तव में एक होना और सर्वव्यापी ईश्वर में स्वयं को महसूस करना अच्छाई का सार हैं..... जीवन अपार है"।
टैगोर के अनुसार शिक्षा का अर्थ और उद्देश्यः-
टैगोर ने शिक्षा का अर्थ व्यापक अर्थ में लिया है, उन्होने अपनी पुस्तक (Personality) में लिखा हैं- "सर्वोत्तम शिक्षा वही हैं, जो सम्पूर्ण सृष्टि से हमारे जीवन का सामंजस्य स्थापित करती हैं।" सम्पूर्ण दृष्टि से टैगोर का अभिप्राय है संसार की चर और अचर, जड़ और चेतन, सजीव और निर्जीव सभी वस्तुएँ। इन वस्तुओं से हमारे जीवन का सामंजस्य तभी हो सकता है जब हमारी समस्त शक्तियाँ पूर्ण रूप से विकसित होकर, उच्चतम बिंदु पर पहुंच जायें, इसी को टैगोर ने पूर्ण मनुष्यत्व (Surplus in man) कहा हैं।
प्रश्न 38. जनसंख्या शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: वर्तमान में, भारत की जनसंख्या लगभग 146 करोड़ है और विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। 2025 तक इसकी जनसंख्या 1.46 बिलियन से अधिक होने का अनुमान हैं। ऐसे में भारत के लिये जनसंख्या शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यूनेस्कों के अनुसार, "जनसंख्या शिक्षा एक शैक्षिक कार्यक्रम है जो परिवार, समुदाय, राष्ट्र और विश्व की जनसंख्या की स्थिति के अध्ययन के लिए छात्रों में उस स्थिति के प्रति तर्कसंगत और जिम्मेदार दृष्टिकोण और व्यवहार विकसित करने के उद्देश्य से प्रदान की जाती हैं।"
जनसंख्या शिक्षा के उद्देश्यः-
- छात्रों में परिवार के आकार के प्रति समझ विकसित करना।
- जनसंख्या की वृद्धि के कारणों और परिणामों को समझने में व्यक्ति की सहायता करना।
- परिवार के आकार और राष्ट्रीय जनसंख्या में परिवर्तन के व्यक्ति पर प्रभाव के बारे में सटीक जानकारी प्रदान करना।
- व्यक्ति को यह समझने में सक्षम बनाना है कि एक विशाल जनसंख्या व्यक्ति और समाज को कैसे प्रभावित करती हैं।
- वर्तमान में जनसंख्या स्थितियों के बारे में सचेत और सही निर्णय लेने में सक्षम बनाना।
प्रश्न 39. भूमण्डलीय तापवृद्धि से क्या अभिप्राय हैं? इसके नियन्त्रण के प्रमुख उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: भूमण्डलीय तापवृद्धि (ग्लोबल वार्मिंग), जिसे अक्सर 'जलवायु परिवर्तन' के रूप में संदर्भित किया जाता है, मानवीय गतिविधियों के कारण पृथ्वी की सतह के औसत तापमान में दीर्घकालिक वृद्धि है। तापमान में यह वृद्धि मुख्य रूप से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और नाइट्रस ऑक्साइड जैसी ग्रीनहाउस गैसों (जीएचजी) की बढ़ती सांद्रता के कारण होती हैं। मौसम के पैटर्न, समुद्र के स्तर और वैश्विक स्तर पर पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित होते हैं।
कारण
- जीवाश्म ईंधन का जलना
- वनों की कटाई
- पशुपालन
ग्लोबल वार्मिंग परिणाम
- पर्यावरणीय प्रभाव
- सामाजिक प्रभाव
- स्वास्थ्य जोखिम
- आर्थिक लागत
- प्रवासन और विस्थापन
अंतर्राष्ट्रीय कानूनी प्रतिवद्धताएं
- जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल (आईपीसीसी)
- जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी)
- क्योटो प्रोटोकॉल (1997)
- पेरिस समझौता (2015)
- यूरोपीय ग्रीन डील (2019)
वैश्चिक तापमान में वृद्धि को नियंत्रित करने में आईपी सी सी की सिफारिशेः-
- जीवाश्म ईंधन को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करना
- नवीकरणीय ऊर्जा की ओर परिवर्तन
- जीवाश्म ईंधन सब्सिडी समाप्त करें
- ऊर्जा दक्षता बढ़ाना
- भवन मानकों में सुधार करें।
- औद्योगिक प्रक्रियाओं
- कुशल परिवहन को बढ़ावा दें
प्रश्न 40. विद्यालय एवं समुदाय में अंतर स्पष्ट कीजिए ?
उत्तर: विद्यालय और समुदाय मे कई अंतर होते हैं। विद्यालय एक शिक्षण संस्था है जो शिक्षा प्रदान करने पर केंद्रित है, जबकि समुदाय एक सामजिक इकाई है जो लोगों के एक समूह को दर्शाता है जो एक साथ रहते हैं, काम करते है और समान रूचियों को साझा करते हैं। विद्यालय एक औपचारिक व्यवस्था है जिसके नियम और विनियम होते हैं, जबकि समुदाय एक अनौपचारिक और अधिक गतिशील इकाई हैं। यहाँ विद्यालय और समुदाय के बीच कुछ प्रमुख अंतर दिये गये हैं:
- लक्ष्यः विद्यालय का मुख्य उद्देश्य छात्रों को ज्ञान, कौशल और मूलों से लैस करना है ताकि वे जीवन में सफल हो सकें, जबकि समुदाय का उद्देश्य अपने सदस्यों के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ाया देना है।
- संरचनाः विद्यालय एक औपचारिक संस्था है जिसमें शिक्षक, छात्र और प्रशासक शामिल हैं। विद्यालय की संरचना में कक्षाएं, पुस्तकालय, खेल के मैदान और अन्य सुविधाएँ शामिल हो सकती है। समुदाय एक अनौपचारिक संस्था है जिसमें लोग अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक संबंधों, रूचियों और गतिविधियों के माध्यम से एक साथ आते हैं।
- लक्ष्य समूहः- विद्यालय का मुख्य लक्ष्य छात्रों को शिक्षा देना है, जबकि समुदाय का लक्ष्य अपने सदस्यों की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक भालाई को बढ़ाना है।