वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. गैलेना किस धातु का अयस्क है-
(a) लेड (Pb)
(b) कॉपर (Cu)
(c) लोहा (Fe)
(d) जिंक (Zn)
उत्तर: (a): गैलेना लेड (pb) का अयस्क है। यह एक सल्फाइड खनिज है जिसका रासायनिक सूत्र PbS है। गैलेना, जिसे लेड ग्लेंस भी कहा जाता है, सीसा का एक प्रमुख अयस्क है।
प्रश्न 2. वातावरण और जीवधारियों के पारस्परिक सम्बन्धों से क्या बनता हैं-
(a) समुदाय
(b) पारिस्थितिक तन्त्र
(c) जीवोम
(d) खाद्य जाल
उत्तर: (b) : वातावरण और जीवधारियों के पारस्परिक सम्बंधों से परिस्थितिक तंत्र बनता है। पारिस्थितिक तंत्रः- यह एक जगह का वह तंत्र है जहाँ विभिन्न जीव एक दूसरे और अपने भौतिक पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं। इसमें जैविक और अजैविक घटक शामिल होते हैं।
प्रश्न 3. किस सेल को पुनः आवेशित किया जा सकता है-
(a) शुष्क सेल
(b) डेनियल सेल
(c) वोल्टीय सेल
(d) सीसा संचायक सेल
उत्तर: (d): सीसा संचायक सेल को पुनः आवेशित किया जा सकता है। द्वितीयक सेल, जिन्हे "पुनः आवेशित" सेल के रूप में भी जाना जाता है, रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में और फिर विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में परिवर्तन करने में सक्षम होते हैं।
प्रश्न 4. नोबेल गैस का उदाहरण है-
(a) रेडॉन
(b) हाइड्रोजन
(c) ऑक्सीजन
(d) कार्बन डाई आक्साइड
उत्तर: (a): नोबेल गैस का उदाहरण रेडॉन है। नोबेल गैसः वे गैस जो सामान्य परिस्थितियों में रासायनिक रूप से निष्क्रिय होती है। रेडॉन, हीलियम, नियोन, आर्गन, क्रिप्टन और जेनॉन नोबेल गैसों के उदाहरण हैं।
प्रश्न 5. सर्वाहारी जन्तु किस प्रकार का भोजन ग्रहण करते हैं-
(a) मांसाहार
(b) शाकाहार
(c) दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) : सर्वाहारी जन्तु दोनों प्रकार का भोजन ग्रहण करते हैं। सर्वाहारी जीव वे होते हैं जो अपने आहार में वनस्पति (सब्जी, फल, अनाज) और मांस दोनों को शामिल करते हैं।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. विद्युत धारा से आप क्या समझते हैं? इसका मात्रक लिखिए.
उत्तर: किसी चालक से एकांक समय में प्रवाहित आवेश की मात्रा को विद्युत धारा कहते हैं। जिसका सूत्र I = Q/t (एम्पियर) है। विद्युत धारा का मात्रक एम्पियर (Ampere) होता है।
प्रश्न 7. मानव में पाए जाने वाले किन्हीं दो अवशेषी अंगों के नाम लिखिए.
उत्तर: मानव शरीर में दो अवशेषी अंगो के नाम अपेन्डिक्स (Vermiform appendix) और कोक्सीक्स (Coccyx) है-
- अवशेषी अंगः- अवशेषी अंग वे अंग या संरचनाएं हैं जिनका पहले कोई कार्य होता था, लेकिन अब उनका कोई स्पष्ट कार्य नहीं बचा है।
- कोक्सीक्स (Coccyx): यह पूंछ की हड्डी है, जो रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से पर होती हैं।
प्रश्न 8. सोडियम धातु की जल से अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए.
उत्तर: सोडियम धातु की जल के साथ अभिक्रिया का रासायनिक समीकरणः
$[2Na(S)+2H_{2}O(I)\rightarrow2NaOH(aq)+H_{2}(g)]$
यह समीकरण बताता है कि सोडियम धातु (Na) जब पानी (H₂O) के साथ अभिक्रिया करता है, तो सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) और हाइड्रोजन गैस (H₂) उत्पन्न होती है।
प्रश्न 9. प्राथमिक उपचार के किन्हीं दो उद्देश्यों को लिखिए.
उत्तर: प्राथमिक उपचार के दो मुख्य उद्देश्य जीवन को बचाना और स्थिति को बिगड़ने से रोकना है।
- जीवन बचाना: प्राथमिक उपचार का मुख्य उद्देश्य गंभीर चोटों या बीमारियों के मामले में तत्काल सहायता प्रदान करना
- स्थिति को बिगड़ने से रोकना: प्राथमिक उपचार का दूसरा उद्देश्य स्थिति को और खराब होने से रोकना है।
प्रश्न 10. एड्स किस विषाणु के द्वारा होता है?
उत्तर: एड्स (AIDS) acquired immunodeficiency Syndrome मानव प्रतिरक्षी अपूर्णता विषाणु (Human Immunodeficiency Virus) (HIV) के संक्रमण से होता है। एच आई वी संक्रमण से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है, जिससे व्यक्ति विभिन्न बीमारियों से लड़ने में असमर्थ हो जाता है।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 11. किसी परिपथ में 5 एम्पियर की धारा एक घण्टे के लिए प्रवाहित की जाती है। आवेश की मात्रा की गणना कीजिए.
उत्तर: किसी परिपथ में 5 एम्पियर की धारा एक घंटे के लिए प्रवाहित की जाती है। तो आवेश की मात्रा की गणना-
आवेश (Q) की मात्रा = धारा (I) × समय (t)
धारा (I) = 5 एम्पियर
समय (t) = 1 घंटा = 3600 सेकण्ड
आवेश (Q) = 5 एम्पियर × 3600 सेकण्ड = 18000 कूलॉम
अतः परिपथ में प्रवाहित आवेश की मात्रा 18000 कूलॉम है
प्रश्न 12. जैविक घटक क्या होता हैं? इनके घटकों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए.
उत्तर: जैविक घटकः जैविक घटक जीवित प्राणी है जो अपने पर्यावरण में अन्य प्रजातियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालते हैं।
- उत्पादक: वे घटक जो अपना भोजन स्वयं बनाते है उसे उत्पादक कहते है, जैसे हरे पेड़ पौधे।
- उपभोक्ता: वे घटक जो उत्पादक या उत्पादक द्वारा बनाये गये भोज्य पदार्थों का उपयोग करते है उसे उपभोक्ता कहते हैं। जैसे- गाय, बकरी, बाघ आदि।
- अपघटक: इनमें कवक एवं जीवाणु आते है। ये मृत उत्पादक और उपभोक्ताओं का अपघटन करके भौतिक तत्वों में परिवर्तित कर देते है।
प्रश्न 13. हीमोफीलिया रोग के कारण तथा लक्षण बताइए.
उत्तर: हीमोफीलिया रोग के कारण तथा लक्षणः-
हीमोफीलिया एक वंशानुगत रक्तस्त्राव विकार है, जिसमें शरीर को रक्त का थक्का बनाने में समस्या होती है यह आमतौर पर पुरूषों को प्रभावित करता है।
हीमोफीलिया के कारण-
- वंशानुगतः हीमोफीलिया एक वंशानुगत रोग है जिसका अर्थ है कि यह माता-पिता से बच्चों को प्राप्त होता है।
- थक्के बनाने वाले कारकों की कमीः हिमोफीलिया में, शरीर किसी विशेष थक्के बनाने वाले कारक (जैसे फैक्टर VIII या फैक्टर IX) का पर्याप्त उत्पादन नही करता है।
- अनुवांशिक उत्परिवर्तनः हीमोफीलिया अनुवांशिक उत्परिर्वतन के कारण होता है। जो थक्के बनाने वाले कारकों के जीन को प्रभावित करता है।
हीमोफीलिया के लक्षण -
- अत्यधिक रक्तस्त्रावः कटने या चोट लगने पर सामान्य से अधिक रक्तस्त्राव होना जो लंबे समय तक जारी रहता है।
- चोटेः बिना किसी कारण के चोटे, जो बड़ी और गहरी दिखाई देती है।
- जोड़ो में दर्द और सूजनः जोड़ों में रक्तस्त्राव के कारण दर्द, सूजन और गतिशीलता में कमी आना।
- मांसपेशियों में सूजन और असुविधाः मांसपेशियों में सूजन और असुविधा मांसपेशियों में रक्तस्त्राव के कारण होती है।
- अन्य लक्षणः दंत प्रक्रियाओं या सर्जरी के बाद लंबे समय तक रक्तस्त्राव, अचानक नाक से खून आना मूत्र या मल में रक्त आना।
प्रश्न 14. मेंडलीफ की आवर्त सारणी के लाभ तथा दोष का उल्लेख कीजिए.
उत्तर: मेंडलीफ की आवर्त सारणी के लाभ तथा दोष-
मेंडलीफ की आवर्त सारणी के लाभ:-
- तत्वों के गुणों के अध्ययन में सहायक है।
- नए तत्वों की खोज में मदद करता है।
- एक तत्व के गुणों के आधार पर दूसरे तत्वों के गुणों की व्याख्या की जा सकती है।
- संदिग्ध परमाणु भारों के शोधन में मदद करता है।
- एक ही समूहों के तत्वों और विभिन्न समूहों के तत्वों में गुणों की सहसंबंध का बोध होता हैं, जिससे अनुसंधान में सहायता मिलती है।
मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोष:-
- हाइड्रोजन को कोई निश्चित स्थान नही दिया जा सकता है।
- एक तत्व से दूसरे तत्व में जाने पर परमाणु द्रव्यमान में वृद्धि नियमित नही थी।
- समस्थानिकों की खोज मेंडेलीफ के आर्वत नियम का उल्लंघन होता है।
- असमान गुणों वाले तत्वों को एक साथ रखा गया है और समान गुणों वाले तत्वों को अलग किया गया है।
- बाद में खोजे गए लैंथेनाइड और एक्टिनाइड में मौजूद तत्वों को उनकी आवर्त सारणी में नहीं रखा जा सकता।
प्रश्न 15. ओम का नियम क्या है? समझाइए.
उत्तर: ओम का नियमः ओम का नियम बताता है कि किसी चालक मे, यदि तापमान स्थिर रहे, तो प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा (I) उसके सिरों पर विभवांतर (V) के सीधे समानुपाती होती है। अथवा यदि किसी चालक के सिरों पर लगाया गया विभवांतर दुगना कर दिया जाए, तो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा भी दुगनी हो जायेगी, बशर्ते कि चालक का प्रतिरोध स्थिर रहे।
V ∝ I या V = RI
जहाँ: V = विभवांतर, I = धारा, R = प्रतिरोध
प्रश्न 16. धातु तथा अधातु में अन्तर लिखिए.
उत्तर: धातु और अधातु के बीच कुछ मुख्य अंतर इस प्रकार है:
| अन्तर | धातु | अधातु |
|---|---|---|
| 1. भौतिक गुण | कठोर, चमकदार, या तन्य होती है | नरम, रंगीन, भंगुर |
| 2. चालकता | उच्च तापीय और विद्युत चालकता होती है। | खराब चालकता है, (ग्रेफाइट अपवाद हैं) |
| 3. अवस्था | कमरे के तापमान पर ठोस होती है (पारा और गैलियम को छोड़कर) | कमरे के तापमान पर ठोस, तरल गैस होती है (ब्रोमीन को छोड़कर) |
| 4. गलनांक | गलनांक उच्च होता है। | गलनांक निम्न होता है। |
| 5. क्वथनांक | उच्च क्वथनांक होता है। | निम्न क्वथनांक होता है। |
प्रश्न 17. लैमार्कवाद तथा डार्विनवाद के सिद्धान्तों में मुख्य अन्तर क्या है? स्पष्ट कीजिए.
उत्तर: लैमार्कवाद और डार्विनवाद, दोनो विकास के सिद्धांत है। लेकिन उनमें मुख्य अंतर यह है कि लैमार्कवाद आर्जित लक्षणों की विरासत पर जोर देता है, जबकि डार्विनवाद प्राकृतिक चयन पर जोर देता हैं-
- आर्जित लक्षणों की विरासत बनाम वंशानुगत विविधताः- लैमार्कवाद में अर्जित लक्षण को अगली पीढ़ी को पारित किया जाता है, जबकि डार्विनवाद में, केवल वंशानुगत विविधताएं ही आगे पारित होती है।
- पर्यावरण का प्रभावः लैमार्कवाद में, पर्यावरण का प्रभाव सीधे जीवों के विकास को प्रभावित करता है, जबकि डार्विनवाद में, पर्यावरण केवल उन विविधताओं को चुनता है जो सबसे उच्छी तरह से अनुकूलित हैं।
- विकास की गतिः- लैमार्कवाद में, विकास अपेक्षाकृत तेजी से होता है, क्योंकि आर्जित लक्षणों को पीढ़ी दर पीढ़ी तक पारित किया जा सकता है। डार्विनवाद में, विकास अपेक्षाकृत धीमी गति से होता है क्योंकि केवल वंशानुगत विविधताएं ही आगे पारित होती है।
प्रश्न 18. रूधिर कणिकाएँ कितने प्रकार की होती हैं? उनके नाम तथा किसी एक रूधिर कणिका के कार्य लिखिए.
उत्तर: रूधिर कणिकाओं के प्रकारः रूधिर कणिकाएँ तीन प्रकार की होती है:
- लाल रूधिर कणिकाएँ
- श्वेत रूधिर कणिकाएँ
- प्लेटलेट्स
रूधिर कणिकाओं के नाम और कार्य:-
- लाल रूधिर कणिकाएँ (लाल रक्त कोशिकाएँ):- ये कणिकाएँ हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन से भरी होती है, जो आक्सीजन को शरीर के विभिन्न भागों में ले जाने मे मदद करती है। ये कार्बन डाइआक्साइड को भी शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है। इनकी कमी से रक्ताल्पता (अनिमिया) नामक रोग हो सकता है।
- श्वेत रूधिर कणिकाएँ (श्वेत रक्त कोशिकाएँ):- ये कणिकाएँ संक्रमण से शरीर की रक्षा करती हैं। ये हानिकारक जीवाणु और विषाणु को नष्ट कर देती हैं। ये शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
- प्लेटलेट्स (थ्रोम्बोसाइड्स ):- ये रूधिर का थक्का बनाने में मदद करती है। जब कोई चोट लगती है, तो प्लेटलेट्स उस जगह पर इकट्ठे होकर रक्त को बहने से रोकते हैं। ये रक्त वाहिकाओं की मरम्मत में भी मदद करते हैं।
Semester 4 की Complete तैयारी
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