वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. स्वभाव निर्धारण के कितने तत्व हैं?
(a) पाँच
(b) दो
(c) सात
(d) दस
उत्तर: (c) : स्वभाव निर्धारण के सात तत्व होते है
प्रश्न 2. "चरित्र आदतों का पुंज है" वह कथन है-
(a) सैमुअल स्माइल्स
(b) डमविले
(c) कार्टर वी. गुड
(d) एस मुनरो।
उत्तर: (a) : सैमुअल स्माइल्स के अनुसार, "चरित्र आदतों का पुंज है"
प्रश्न 3. "समस्त शिक्षा शान्ति के लिए ही है।" यह परिभाषा किसकी है?
(a) मारिया मॉण्टेसरी
(b) महात्मा गाँधी
(c) टैगोर
(d) विवेकानन्द ।
उत्तर: (a) : "समस्त शिक्षा शान्ति के लिए ही है" यह कथन मारिया मॉण्टेसरी का है।
प्रश्न 4. जीवन में शान्ति के उपाय है-
(a) उचित शिक्षा तन्त्र
(b) पाठ्य सहगामी क्रियाएँ
(c) उचित सामाजीकरण
(d) उपर्युक्त सभी।
उत्तर: (d) : जीवन में शान्ति के उपाय-
- उचित शिक्षा तंत्र
- पाठ्य सहगामी क्रियाएं
- उचित समाजीकरण
प्रश्न 5. तनाव के प्रकार हैं-
(a) जैविक तनाव
(b) मनोवैज्ञानिक तनाव
(c) सामाजिक तनाव
(d) उपर्युक्त सभी
उत्तर: (d) : तनाव के प्रकार जैविक तनाव, मनोवैज्ञानिक तनाव तथा सामाजिक तनाव उपर्युक्त सभी है।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. शांति शिक्षा का अर्थ बताइए।
Ans.: शांति शिक्षा का अर्थ- शान्ति शिक्षा वह शिक्षा है, जो शोषित, अहिंसक तथा न्यायप्रिय समाज का निमार्ण करती है।
प्रश्न 7. व्यक्तित्व की एक परिभाषा लिखिए।
Ans.: मन के अनुसार, " व्यक्तित्व एक व्यक्ति के गठन, व्यवहार के तरीकों, रूचियों, दृष्टिकोणों क्षमताओं तथा तरीकों का सबसे विशिष्ट संगठन है।"
प्रश्न 8. भेदभाव को दूर करने के उपाय बताइए।
Ans.: भेदभाव दूर करने के उपाय-
- कानून के समक्ष समानता
- अवसर की समानता
- अस्पृश्यता का उन्मूलन
- आर्थिक भेदभाव दूर करना
- जातिगत व्यवस्था को मिटाना
प्रश्न 9. अहिसां से क्या तात्पर्य है?
Ans.: अहिसां से तात्पर्य" हिंसा न करना" अहिंसा है अर्थात किसी भी प्राणी तथा जीव से हिंसा (हत्या या कष्ट) नही करना। मन में किसी का अहित न सोचना, किसी को कटु वाणी आदि के द्वारा भी नुकसान न देना तथा कर्म से भी किसी भी अवस्था में किसी भी प्राणी की हिंसा न करना, यह अहिंसा है।
प्रश्न 10. सामाजिक तनाव से क्या अभिप्राय है?
Ans.: सामाजिक तनाव वह तनाव है जो किसी व्यक्ति से दूसरों के साथ संबंधो और समान्य रूप से सामाजिक परिवेश से उत्पन्न होता है।
प्रश्न 11. नैतिक शिक्षा की कोई एक परिभाषा बताइए।
Ans.: प्राणायाम दो शब्दों से मिलकर बना है प्राण आयाम। यहाँ प्राण का अर्थ-श्वास, श्वसोंच्छावास है और आयाम का अर्थ- लम्बाई-विस्तार है। इस प्रकार प्राणायम का अर्थ है- श्वासों का विस्तार एवं नियंत्रण।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. अष्टांग योग की क्या उपयोगिता है?
Ans.: अष्टांग योग के द्वारा मन पूर्ण शांत हो जाता है। व्यक्ति को विवेक और ज्ञान हो जाता है उचित और अनुचित का ज्ञान हो जाता है। उसके द्वारा समाज में कोई ऐसा कृत्य नही किया जाता है जो किसी व्यक्ति या समाज के लिए अप्रिय हो। अष्टांग योग की उपयोगिता संसार का प्रत्येक व्यक्ति सुख और शांति चाहता है। मानव कल्याण के लिए, उसके शारीरिक और मानसिक संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए अष्टांग योग वरदान है। यह ऐसा मार्ग है, जिस पर चलकर व्यक्ति अपने जीवन को संपूर्ण सुखमय बना सकता है
प्रश्न 13. साम्प्रदायिकता उन्मूलन के उपाय बताइए।
Ans.: साम्प्रदायिकता उन्मूलन के उपाय-
- हमारे देश में विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक संगठनों के तहत सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के लिए राजनीतिक दल मुख्य रूप से जिम्मेदार है। ऐसे दलो को समाप्त कर देना चाहिए। अनिवार्य शिक्षा द्वारा शिक्षा में ज्ञान की ज्योति जलाई जाए। शिक्षा का पाठ्यक्रम इस प्रकार का हो जो पारस्परिक सद्भाव, राष्ट्रीय चरित्र एवं एकीकरण को बढ़ावा देता है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की नीति तैयार की जानी चाहिए।
- साम्प्रदायिकता को समाप्त करने के लिए आवश्यक है कि ग्राम स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक के नेता समाज और देश के हितों को प्रधानता देते हुए प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाएँ।
प्रश्न 14. महात्मा गाँधी के अनुसार शिक्षा के उद्देश्य बताइए।
Ans.: महात्मा गाँधी के अनुसार, शिक्षा का सर्वोच्च उद्देश्य परम सत्य अथवा ईश्वर से साक्षात्कार करना है। सत्य की खोज एवं आत्मा का ज्ञान आवश्यक है, जिससे बच्चों में नैतिक गुणों का विकास किया जा सके।
गाँधी जी का मानना था कि व्यक्ति अपनी मातृभाषा में शिक्षा को अधिक रूचि एवं सजगता के साथ ग्रहण कर सकता है। अतः वे आरंभिक शिक्षा व्यक्ति को उसकी मातृभाषा में दिये जाने के पक्षधर थे। वे शिक्षा को मानव के सर्वागीण विकास का सशक्त माध्यम मानते थे
प्रश्न 15. भारतीय दर्शन की प्रमुख विशेषताएँ बताइए।
Ans.: भारतीय दर्शन की प्रमुख विशेषताएँ-
- विचारों की स्वतंत्रता- भारतीय दर्शन की एक बड़ी विशेषता यह है कि बिना किसी दबाव के चिन्तन हुआ हो।
- मोक्ष का महत्व- यहाँ दार्शनिक केवल जिज्ञासा की तृप्ति के लिए दार्शनिक दार्शनिक चिन्तन नही करता है
- आत्मा के अस्तित्व में विश्ववास- अधिकांश भारतीय दर्शन आत्मा के अस्तित्व में विश्वास रखते है और जो शरीर से पृथक है, वही अजर अमर है।
प्रश्न 16. आत्म-जागरूकता की विभिन्न स्थितियाँ बनाइए
Ans.: आत्म-जागरूकता की विभिन्न स्थितियाँ- आत्म-जागरूकता के विकास द्वारा व्यक्ति अपने प्रति चेतन होते है। आत्म जागरूकता को एक विशिष्ट प्रकार के स्व-विकास के रूप में देखा जा सकता है जो व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्थिति जिनमें विचारों, कार्यों, धारणाओं, अहसासों तथा दूसरो से अन्तक्रिया का समावेश रहता है। आत्म- जागरूकता किसी एक व्यवहार से एकाएक विकसित नही होता है। वह धीरे-धीरे क्रमिक रूप से 'स्व' संबंधित विभिन्न व्यवहारो द्वारा विकसित होता है। प्रारम्भ में यह जागरूकता शरीर के प्रति होती है फिर आयु बढ़ने के साथ विकास में वृद्धि होने पर जागरूकता का स्तर बढ़ाता है और वे सरल से जटिल रूप से लेते हैं। आत्म जागरूकता जीवन के अनुभवों, कार्यों एवं चिन्तन के कारण बहु-आयामी होता है। यह एक गतिशील प्रक्रिया है।
प्रश्न 17. भ्रष्ट्राचार को दूर करने के उपाय बताइए।
Ans.: भ्रष्ट्राचार को दूर करने के उपाय-
- संसद द्वारा त्वरित गति से कार्य करने वाला कानून बनाया जाए।
- न्यायालय में मामलों का त्वरित निपटारा किया जाये।
- प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता बनाए और जनता को भागीदारी बनाए।
- कानून और सरकार पर से जनता की मानसिकता बदलने की आवश्यकता है।
- लोकपाल कानून लागू करने के लिए आवश्यक है संक्षिप्त एवं कारगर कानून हो, जिसमें अपने शपथ के साथ शुरू करे न कि रिश्वत ले और न ही रिश्वत दें।
प्रश्न 18. बालकों के चरित्र निर्माण में परिवार के सदस्यों का क्या योगदान है?
Ans.: बालकों के चरित्र निर्माण में परिवार के सदस्यों का योगदान-
- बालकों का सामाजिक एवं नैतिक विकास- नैतिक विकास करना बालकों का समाजिक एवं नैतिक विकास सर्वप्रथम परिवार में ही शुरू होता है। वह सबसे पहले मातृभाषा का अनुकरण करते हुए सीखता है
- बालक का शारीरिक विकास- बालकों का पालन-पोषण परिवार में ही होता है। परिवार ही बच्चों के भोजन की व्यवस्था करता है, उनकी देखभाल करना, रोगग्रस्त होने पर उनका इलाज कराना आदि कार्य बालकों के विकास में महत्वपूर्ण होता है
- अनुशासन का विकास- बालक परिवार में ही रहकर बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना छोटे से प्यार करना सीखता है बालक का प्रथम विद्यालय उसका घर ही होता है
- व्यवहार संबंधी शिक्षा देना- परिवार ही बालकों को व्यवहार संबंधी शिक्षा देते है तत्पश्चात वह उसी के अनुरूप अन्य लोगों से व्यवहार करता है।