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PYQ 2017 • शान्ति शिक्षा एवं सतत् विकास

शान्ति शिक्षा एवं सतत् विकास Previous Year Paper 2017

UP DELED Semester 4 शान्ति शिक्षा एवं सतत् विकास Previous Year Question Paper 2017 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नांकित में से कौन सा गुण व्यक्तित्व के पाँच गुणों में शामिल है-

(a) सामाजिकता

(b) एकान्तप्रियता

(c) स्वार्थपरता

(d) खुलापन

उत्तर: (d) : खुलापन व्यक्तित्व के पाँच गुणों में शामिल हैं- व्यक्तित्व के पाँच गुण-बहिर्मुखता, सहमतता, खुलापन, कर्तव्यनिष्ठा, विश्रिप्तता आदि हैं।

प्रश्न 2. उ-अ बंधन का निर्माण होता है-

(a) खोज से

(b) प्रभाव के नियम से

(c) अनुकूलन के नियम से

(d) खोज और अनुकूलन से

उत्तर: (c) : उ-अ बंधन का निर्माण अनुकूलन के नियम से होता है।

प्रश्न 3. शान्ति निकेतन और 'विश्व भारती' की स्थापना की है-

(a) अरविन्द घोष ने

(b) रवीन्द्रनाथ टैगोर ने

(c) महात्मा गाँधी ने

(d) विवेकानन्द ने

उत्तर: (b) : शान्ति निकेतन और विश्व भारती की स्थापना रवीन्द्रनाथ टैगोर ने की हैं।

प्रश्न 4. निम्नलिखित में से कौन सा लोकतन्त्र के सिद्धान्त है-

(a) बन्धुत्व, जातिवाद, समानता

(b) सन्तोष समाजवाद, बहिर्मुक्ता

(c) स्वतंत्रता, समाजवाद, समानता

(d) स्वतंत्रता, जातिवाद, समानता

उत्तर: (c) : 'स्वतंत्रता, समाजवाद, समानता' लोकतंत्र के सिद्धान्त है।

प्रश्न 5. संयुक्त राष्ट्र संघ में शान्ति और अहिंसा के संस्कृति का अन्तर्राष्ट्रीय दशक कब घोषित किया था-

(a) वर्ष 2001 से 2010 तक

(b) वर्ष 2002 से 2011 तक

(c) वर्ष 1999 से 2008 तक

(d) वर्ष 2005 से 2014 तक

उत्तर: (a) : संयुक्त राष्ट्र संघ में शान्ति और अहिंसा के संस्कृति का अन्तर्राष्ट्रीय दशक वर्ष 2001 से 2010 तक घोषित किया था।

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 6. व्यक्तित्व का पाँच गुण कौन-कौन से है?

Ans.: व्यक्तित्व का पाँच गुण-व्यक्तित्व के पाँच गुण निम्न हैं-बहिर्मुखता, सहमतता, खुलापन, कर्तव्यनिष्ठा, विक्षिप्तता आदि।

प्रश्न 7. हिंसा के कौन-कौन से प्रकार है? नामांकित करिए

Ans.: हिंसा के प्रकार- हिंसा के निम्न प्रकार हैं-

  1. मनोवैज्ञानिक हिंसा
  2. मौखिक हिंसा
  3. ढांचागत हिंसा
  4. शारीरिक हिंसा
  5. लोकप्रिय संस्कृति में अश्लीलता

प्रश्न 8. शान्ति शिक्षा में मूल्य का क्या तात्पर्य है?

Ans.: शान्ति शिक्षा में मूल्य-मूल्य एक ऐसी आचार संहिता है या सद्‌गुणों का समूह है जिसे व्यक्ति अपना कर अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है। विश्वबंधुत्व तथा वसुधैव कुटुम्बकम् जैसे प्राचीन जीवन मूल्यों व लोकतंत्रीय मूल्यों से अपने मानव जीवन को चरितार्थ करें।

प्रश्न 9. योग सूत्र के आठ अंग कौन-कौन से है?

Ans.: योग सूत्र के आठ अंग-योग सूत्र के आठ अंक निम्न हैं-यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि।

प्रश्न 10. भारत में 'राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग' का गठन कब और किस उद्देश्य से हुआ था?

Ans.: भारत में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन-12 अक्टूबर 1993 को भारत सरकार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया था। इसका उद्देश्य भारतीय नागरिकों को न्याय स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व, राष्ट्रीय, एकता तथा अखण्डता आदि मानवाधिकारों पर बल देना था।

प्रश्न 11. मीडिया के अन्तर्गत कौन-कौन से संचार माध्यमों को सम्मिलित किया जाता है?

Ans.: मीडिया के अन्तर्गत सम्मिलित संचार माध्यम-मीडिया एक समग्र तंत्र है इसके अन्तर्गत निम्न संचार माध्यम सम्मिलित किये जाते हैं। प्रिंटिंगप्रेस, पत्रकार, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम, रेडियो, सिनेमा, इंटरनेट आदि।

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 12. शान्ति शिक्षा की आवश्यकता का क्या औचित्य है, इस पर प्रकाश डालें ?

Ans.: शान्ति शिक्षा की आवश्यकता का औचित्व-

  1. पर्यावरणीय दृष्टि से औचित्य-शान्ति शिक्षा की आवश्यकता पर्यावरणीय दृष्टि से भी है। गुरुदेव रविन्द्रनाथ टैगोर प्रकृति एवं मनुष्य में घनिष्ठ सम्बन्ध मानते हैं। उनका तर्क था कि प्रकृति में वह आन्तरिक शक्ति नहीं है जो मनुष्य में है, जिसके कारण उनमें चेतना, नैतिकता, सौन्दर्य और स्वतंत्रता की भावनाएँ हैं।
  2. सामाजिक दृष्टि से औचित्य-व्यक्तियों से ही समाज का निर्माण होता है। एक राष्ट्र में रहने वाले लोग एक समाज बनाते हैं।
  3. वैश्विक दृष्टि से औचित्य-संसार में ऐसे कई राष्ट्र है जिनमें विभिन्न प्रकार की असमानताएँ दृष्टिगोचर होती हैं। कई बार एक ही राष्ट्र में कई प्रकार की जलवायु जीव-जन्तु प्राकृतिक वनस्पति दिखाई पड़ती है।
  4. वैयक्तिक दृष्टि से औचित्य-व्यक्ति में कई कौशल एवं मूल्य समाज में अनुकूलन करने के लिए आवश्यक है, जिससे लोग अशान्ति के दुष्परिणाम समझें और शांति की स्थापना में सहयोग करें।

प्रश्न 13. बच्चों के स्वस्थ साथी सम्बन्ध को बढाने के लिए परिवार की क्या भूमिका है?

Ans.: बच्चों के स्वस्थ साथी सम्बन्धों को बढ़ाने के लिए परिवार की भूमिका-

  1. बच्चे से उसके साथियों और उनके व्यवहार के बारे में समय-समय पर बातचीत करें।
  2. यदि ऐसा प्रतीत हो कि बच्चे का कोई साथी गलत है तो उसे उचित परामर्श दें।
  3. कोई अन्य यादि आपके बच्चे की शिकायत लेकर आए तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।
  4. जब बच्चे अपने साथियों से बात कर रहे हो तो उनके वार्तालाप का निरीक्षण करना चाहिए।
  5. माता-पिता को अपने बच्चों के संगी-साथियों के विषय में पूर्ण जानकारी रखनी चाहिए।

प्रश्न 14. अवांछित व्यवहार को हतोत्साहित करने के लिए शिक्षक के रूप मे जो रणनीतियाँ है, किन्ही दो का वर्णन कीजिए।

Ans.:

  1. पृथकीकरण- पृथकीकरण अवांछित व्यवहार का पता लगाने की दूसरी महत्वपूर्ण रणनीति है। छात्रों के आक्रामक व्यवहार अपनाने पर उन्हें कक्षा में एक-दूसरे से अलग बिठाएँ। उन सभी बालकों से व्यक्तिगत रूप से वार्ता करें तथा उनके अवांछित व्यवहार को जानने का प्रयास करें।
  2. छात्र का ध्यानपूर्वक निरीक्षण-शिक्षक को बालक के अवांछित व्यवहार का ध्यानपूर्वक निरीक्षण करना चाहिए तथा उसके व्यवहार का विश्लेषण करके उसके अवांछित व्यवहार के कारणों का पता लगाने का प्रयास करना चाहिए।

प्रश्न 15. वैश्वीकरण के बाधक तत्व कौन-कौन से है?

Ans.: वैश्वीकरण के बाधक तत्व-वैश्वीकरण के निम्न बाधक तत्व हैं-

  1. राजनीतिक व्यवधान
  2. भाषायी व्यवधान
  3. भौतिक व्यवधान
  4. धार्मिक एवं सांस्कृतिक व्यवधान
  5. मनोवैज्ञानिक व्यवधान
  1. राजनीतिक व्यवधान-वैश्वीकरण ने भारत में लोकतंत्र, संघवाद और शासन की कार्य प्रणाली को भी प्रभावित किया है।
  2. भाषायी व्यवधान-वैश्वीकरण भाषाओं को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभावित करता है। नकारात्मक प्रभावों में अल्पसंख्यक भाषाओं का नुकसान शामिल है, क्योंकि बहुसंख्यक भाषाएँ मानक बन जाती है।
  3. भौतिक व्यवधान-वैश्वीकरण में प्रौद्योगिकी के समावेशन के माध्यम से दूरी व यात्रा के समय में कमी आयी हैं। सभी मानव जाति के लिये लाभ के समान रूप से आवण्टन के बजाय स्रोतों के असमान आवण्टन को प्रतिबिंबित करता है।
  4. मनोवैज्ञानिक व्यवधान-वैश्वीकरण की प्रक्रिया में वैचारिक प्रतिबद्धता के अभाव का होना भी इसके मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है।
  5. धार्मिक एवं सांस्कृतिक कारण-वैश्वीकरण की प्रक्रिया में धार्मिक एवं सांस्कृतिक अभाव का होना भी इसके मार्ग में बाधा उत्पन्न करता है।

प्रश्न 16. राष्ट्रीय एकता के बाधक तत्वों का वर्णन कीजिए ?

Ans.: राष्ट्रीय एकता के बाधक तत्व-राष्ट्रीय एकता वह विचार धारा है जो देश के सभी नागरिकों को सामंजस्य पूर्ण तथा सहयोग पूर्ण जीवन यापन हेतु प्रेरित करती है।

  1. प्रान्तीयता-भारत के प्रान्तों में स्वस्थ विकासात्मक प्रतिस्पर्धा का अभाव देखने को मिलता है यह प्रान्तीयता की भावना हिंसात्मक आन्दोलन व आतंकवाद में परिणित हो जाती है।
  2. साम्प्रदायिकता-इस देश की एकता के समक्ष साम्प्रदायिकता बहुत विकराल समस्या के रूप में उभरी है जो सम्प्रदाय हमारी भारतीय सनातन सभ्यता की उदारता से पनपे वही अलगाववादी दुष्प्रभाव से युक्त हैं।
  3. राजनीतिक दल-भारतीय परिदृश्य में निहित स्वार्थ वाले, संकीर्ण मानसिकता से युक्त राजनीतिक दल अस्तित्व में आ गए हैं।
  4. संचार व्यवस्था-संचार के बहुत से साधन अस्तित्व में आये हैं लेकिन गलत तथ्य सम्प्रेषण पर रोक की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।

प्रश्न 17. नैतिक शिक्षा से आप क्या समझते है? समझाइए।

Ans.: नैतिक शिक्षा-नैतिक शिक्षा वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से लोग दूसरों में नैतिक मूल्यों का संचार करते हैं। यह कार्य घर, विद्यालय, मन्दिर, जेल या किसी सामाजिक स्थान में किया जा सकता है। आज ऐसी शिक्षा की आवश्यकता है, जो पूरे समाज और देश में नैतिकता उत्पन्न कर सके। यह नैतिकता नैतिक शिक्षा के द्वारा ही उत्पन्न की जा सकती है। अतः हम कह सकते हैं कि नैतिकता वह गुण है और नैतिक शिक्षा वह शिक्षा है, जो कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति सम्पूर्ण समाज तथा देश का हित करती है।

प्रश्न 18. निम्नांकित में से किन्ही दो पर टिप्पणी लिखिए-
(1) मनोवैज्ञानिक हिंसा
(2) अनुबन्धन
(3) पर्यापरणीय सन्तुलन हेतु सतत् विकास।

Ans.:

  1. मनोवैज्ञानिक हिंसा- कोई भी जानबूझकर किया गया आचरण जो जबरदस्ती या धमकियों के माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक अखंडता को गंभीर रूप से खराब करता है। कोई भी कार्य जो किसी व्यकित को मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुँचाता है। मनोवैज्ञानिक हिंसा जबरदस्ती, मानहानि, मौखिक अपमान या उत्पीड़न का रूप ले सकती है।
  2. अनुबन्धन-अनुबन्धन की प्रक्रिया का सिद्धान्त पावलॉव का है। उनके अनुसार अनुबन्धन वह प्रक्रिया है जिसके अन्तर्गत एक तटस्थ उद्दीपक एक स्वाभाविक उद्दीपक के साथ बार-बार प्रस्तुत करने के कारण वह स्वाभाविक उद्दीपक की सभी विशेषताओं को ग्रहण कर लेता है।
  3. पर्यावरणीय संतुलन हेतु सतत् विकास-सतत् विकास वास्तव में साधन सम्पन्न लोगों की तुलना में साधनहीन लोगों तथा वर्तमान पीढ़ी से अधिक भावी पीढ़ी को महत्व देता हैं। नियन्त्रण, जल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री एवं तटीय पर्यावरण से सम्बन्धित विभिन्न नीतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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