बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. लिपि विकास का प्रथम सोपान है-
(a) वर्ण लिपि
(b) अक्षर लिपि
(c) चित्र लिपि
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर: (c) : लिपि विकास का प्रथम सोपान चित्र लिपि है।
प्रश्न 2. पर्वत शब्द का समानार्थी शब्द है-
(a) कूट
(b) पादप
(c) नग
(d) आगार
उत्तर: (c) : पर्वत शब्द का समानार्थी शब्द नग है।
प्रश्न 3. अल्पप्राण ध्वनि नहीं है-
(a) क
(b) ख
(c) ग
(d) ब
उत्तर: (b) : 'ख' अल्पप्राण ध्वनि नहीं है।
प्रश्न 4. अं अः वर्ण कहलाते हैं-
(a) अयोगवाह
(b) ऊष्म व्यंजन
(c) स्पर्श व्यंजन
(d) स्वर
उत्तर: (a) : अं अः वर्ण अयोगवाह कहलाते हैं।
प्रश्न 5. 'कामायनी' के लेखक हैं-
(a) मुंशी प्रेमचन्द
(b) जयशंकर प्रसाद
(c) सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
(d) सुमित्रा नंदन पन्त
उत्तर: (b) : जयशंकर प्रसाद कामायनी के लेखक हैं।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. कहानी शिक्षण की विधियाँ बताइए।
उत्तर: कहानी शिक्षण की विधियाँ निम्नलिखित हैं-
- कहानी कथन विधि- इस विधि में अध्यापक विद्यार्थियों को मौखिक रूप से कोई कहानी सुनाता है। विद्यार्थी उसे ध्यानपूर्वक सुनते हैं। इसके बाद अध्यापक द्वारा उस कहानी के मूलभाव व नैतिक शिक्षा से सम्बन्धित प्रश्न किये जाते हैं।
- चित्र आधारित कहानी विधि- इस विधि का प्रयोग प्राथमिक स्तर पर कहानी शिक्षण के लिए किया जाता है। इस विधि में कोई घटना चित्र पर आधारित होती है। चित्र को देखकर उस घटना को समझा जाता है।
- अधूरी कहानी पूर्ति विधि- इस विधि का प्रयोग उच्च प्राथमिक स्तर पर किया जाता है। इस विधि में कोई कहानी दी हुई होती है तथा बीच-बीच में रिक्त स्थान होता है। उस रिक्त स्थान को पूरा करना होता है।
प्रश्न 7. उच्चारण दोष के सामान्य कारण क्या हैं?
उत्तर: उच्चारण दोष के सामान्य कारण-
- भय, संकोच, शीघ्रता, विलम्ब आदि से उच्चारण में दोष आ जाते हैं। इससे तुतलाना, लापरवाही आदि का विकास होता है और उच्चारण दोषपूर्ण हो जाता है।
- वागेन्द्रियों में विकार- कंठ, तालु, होंठ, दाँत आदि अंगों में दोष के कारण।
- प्रयत्न-लाघव- ध्वनियों व शब्दों के उच्चारण में पूर्ण सावधानी न रखने पर यह दोष उत्पन्न होता है।
प्रश्न 8. मौखिक अभिव्यक्ति के सोपान क्या हैं?
उत्तर: मौखिक अभिव्यक्ति के सोपान निम्नलिखित हैं-
- स्वाभाविकता एवं स्पष्टता
- विचार क्रमबद्धता
- सशक्तता
- प्रवाह
- अवसरानुकूलता
- प्रभावोत्पादकता
प्रश्न 9. शब्द की शक्तियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर: शब्द की तीन शक्तियाँ हैं- अभिधा, लक्षणा और व्यंजना। शब्द तीन प्रकार के होते हैं- वाचक, लक्षक और व्यंजक तथा इनसे क्रमशः तीन प्रकार के अर्थ प्रकट होते हैं- वाच्यार्थ, लक्ष्यार्थ तथा व्यंग्यार्थ। इन तीनों अर्थों की प्रतीति तीन प्रकार की शक्तियों अभिधा, लक्षणा और व्यंजना द्वारा होती है। अभिधा (मौखिक अर्थ), या लक्षणा (सांकेतिक अर्थ) द्वारा संकेतिक या व्यंजना (सूचक अर्थ) द्वारा सुझाए गए शब्दों का अर्थ है।
प्रश्न 10. हिन्दी व्याकरण के अनुसार वाक्यों के प्रकार लिखिए।
उत्तर: वाक्य शब्दों के एक सार्थक समूह को ही वाक्य कहते हैं। सार्थक का मतलब होता है अर्थ रखने वाला।
अर्थ के आधार पर आठ प्रकार के वाक्य होते हैं-
- विधानवाचक वाक्य
- निषेधवाचक वाक्य
- प्रश्नवाचक वाक्य
- विस्मादिवाचक वाक्य
- इच्छावाचक वाक्य
- संकेतवाचक वाक्य
- संदेहवाचक वाक्य
- आज्ञावाचक वाक्य
प्रश्न 11. उपसर्ग क्या है? सोदाहरण समझाइए।
उत्तर: उपसर्ग शब्द 'उप' और 'सर्ग' शब्दों से मिलकर बना है। 'उप' का अर्थ है 'पास' या 'पहले' और 'सर्ग' का अर्थ है 'रचना' या 'बनाना'। इस प्रकार, उपसर्ग वे शब्दांश होते हैं, जो किसी शब्द के आगे लगकर उसके अर्थ में परिवर्तन लाते हैं या उसमें विशेषता जोड़ते हैं।
उदाहरण:
- प्र + हार = प्रहार
- नि + डर = निडर
- अप + मान = अपमान
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. प्राथमिक स्तर पर कहानी शिक्षण के उद्देश्य लिखिए।
उत्तर: प्राथमिक स्तर पर कहानी शिक्षण के उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
- रूचि का विकास- प्राथमिक स्तर पर कहानी सुनाने से बच्चों में रूचि जागृत होती है। बच्चे पाठ्य-सामग्री को जल्दी सीख लेते हैं।
- कल्पना शक्ति का विकास- प्राथमिक स्तर पर बच्चा अनेक कल्पनाएँ लिये हुए होता है। उसके दिमाग में परियों की कहानी, दिवा स्वप्न आदि भाव जाग्रत होते रहते हैं। कहानी से उनकी कल्पना शक्ति के साथ सोचने की शक्ति का भी विकास होता है।
- तार्किक शक्ति का विकास- कहानी सुनाने पर बच्चे कब, कहाँ, क्यों, कैसे प्रकार के प्रश्न पूछते हैं। इससे बालक में तार्किक शक्ति का विकास होता है। इससे वैज्ञानिक प्रवृत्ति का विकास होता है।
- सामाजिक गुणों का विकास- कहानी किसी सामाजिक परिवेश से होती है। अतः बच्चों को कहानी के माध्यम से शिक्षण कराते समय सामाजिक गुणों का विकास होता है।
प्रश्न 13. लिखित अभिव्यक्ति की विधाओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर: लिखित अभिव्यक्ति से तात्पर्य मौलिक विचारों को स्वतंत्र रूप से लिखकर अभिव्यक्त करने से है। यह लेखन कौशल से संबंधित है, जो चारों भाषा कौशलों में सबसे अन्तिम चरण है।
इसकी विधाएँ निम्नलिखित हैं-
- पत्र लेखन
- निबन्ध लेखन
- नाट्य लेखन
- कहानी लेखन
पत्र लेखन, निबन्ध तथा नाट्य लेखन और कहानी लेखन ये सभी लिखित अभिव्यक्ति के साधन हैं क्योंकि इन गतिविधियों के द्वारा बच्चों में पत्र, निबन्ध, नाटक तथा कहानी लेखन का विकास किया जाता है।
प्रश्न 14. किन्हीं चार विरामचिह्नों को सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: विराम चिन्ह भाषा के लिखित रूप में उक्त ठहरने के स्थान पर जो निश्चित संकेत चिन्ह लगाये जाते हैं, उन्हें विराम चिन्ह कहते हैं।
हिन्दी में 13 प्रकार के विराम चिन्ह इस प्रकार हैं-
- पूर्ण विराम (।)
- अर्द्ध विराम (;)
- अल्प विराम (,)
- उप विराम (:)
- प्रश्नवाचक चिन्ह (?)
- योजक चिन्ह (-)
- कोष्ठक चिन्ह ()
- अवतरण या उद्धरण चिन्ह (".....")
- विस्मयादिबोधक चिन्ह (!)
- लाघव/संक्षेपसूचक चिन्ह (.)
- निर्देशक चिन्ह (-)
- विवरण चिन्ह (:-)
- विस्मरण चिन्ह या त्रुटिपूरक चिन्ह ( ^ )
किन्हीं चार विराम चिन्हों के उदाहरण-
- पूर्ण विराम (।) - लड़के का पैर फिसल गया।
- अर्द्ध विराम (;) - सूर्यास्त हो गया; लालिमा का स्थान कालिमा ने ले लिया।
- अल्प विराम (,) - बी.ए., एम.ए., पी.एच.डी।
- उपविराम (:) - माँ : ममता की प्रतिमूर्ति।
प्रश्न 15. उपसर्ग एवं प्रत्यय में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: उपसर्ग तथा प्रत्यय में अन्तर-
- उपसर्ग शब्द दो शब्दों से बना है- उप + सर्ग। प्रत्यय शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- प्रति + अय।
- उपसर्ग शब्द प्रारंभ में जुड़ते हैं। प्रत्यय शब्द के अन्तिम में जुड़ता है।
- उपसर्ग शब्द का अर्थ बदलता है या नया अर्थ देता है। प्रत्यय शब्द का रूप बदलता है या नया रूप देता है।
- उपसर्ग उस शब्द अथवा समूह का नाम है, जिसका स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता है एवं जिसे किसी शब्द के पूर्व, कुछ सार्थक विशेषता लाने के लिए जोड़ा जाता है। जिस शब्दांश का शब्द अथवा धातु में विधान किया जाये, वह प्रत्यय कहलाता है।
- उपसर्ग के उदाहरण- अन्याय, निराश, प्रभाव, विश्वास, सम्मान आदि। प्रत्यय के उदाहरण- लड़का, बड़ा, पढ़ना, खाना, देना, लिखना, भलाई, बुराई आदि।
प्रश्न 16. अव्ययीभाव समास की सोदाहरण परिभाषा लिखिए।
उत्तर: अव्ययीभाव समास वह समास है, जिसका प्रथम पद अव्यय हो तथा वह प्रधान भी हो। अव्ययीभाव समास में प्रथम पद अव्यय तथा दूसरा पद संज्ञा होता है। इस समास में कभी दूसरा पद भी प्रधान होता है।
उदाहरण:
- भर पेट
- यथा संभव
- दिनो-दिन
- उपकार
- अधिभार
- यथाशक्ति आदि।
संकेत- प्रति, भर, आ, यथा, बे, नि, से शुरू होने वाले शब्द अव्ययीभाव समास के अन्तर्गत आते हैं। जैसे- प्रतिदिन, भरपेट, आजन्म, यथाशक्ति, बेचैन, बेदाग, बेवफा, निडर, निधड़क, निर्विकार।
प्रश्न 17. सर्वनाम किसे कहते हैं? सर्वनाम के प्रकार भी लिखिए।
उत्तर: संज्ञा के स्थान पर प्रयोग किये जाने वाले शब्द सर्वनाम कहलाते हैं।
उदाहरण: यह राम की पुस्तक है। वह खेलता है। वह सिलाई करती है। वे घर जाते हैं। मैं घर जाता हूँ। तुम विद्यालय जाते हो। उपर्युक्त वाक्यों में वह, वे, मैं, तुम सर्वनाम हैं।
सर्वनाम के प्रकार-
- पुरूषवाचक सर्वनाम - जैसे तुम, वह, मैं, वे, तुम्हारा, हमारा।
- निश्चयवाचक सर्वनाम - जैसे यह, वह, इस, उस, ये, वे इत्यादि।
- अनिश्चयवाचक सर्वनाम - जैसे कोई, कुछ, जहाँ, वहाँ, अनेक।
- संबंधवाचक सर्वनाम - जैसे जो, सो, जिसका, जिसके।
- प्रश्नवाचक सर्वनाम - जैसे कौन, कहाँ, कब, क्यों, कैसे, कौनसा।
- निजवाचक सर्वनाम - जैसे आप, स्वयं, निज, खुद, अपने।
प्रश्न 18. औपचारिक एवं अनौपचारिक पत्र में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: औपचारिक एवं अनौपचारिक पत्र में अन्तर-
- औपचारिक पत्र उन लोगों को लिखे जाते हैं, जिन्हें हम जानते तक नहीं हैं। ये पत्र किसी व्यवसाय से जुड़े होते हैं। जैसे- प्रधानाचार्य को लिखे जाने वाले पत्र (प्रार्थना पत्र), कार्यालयी पत्र, संपादकीय पत्र, सुझाव एवं शिकायती पत्र इत्यादि। अनौपचारिक पत्र उन लोगों को लिखे जाते हैं, जिनसे हमारा व्यक्तिगत सम्बन्ध होता है, जिन्हें हम जानते हैं। जैसे- भाई की शादी में मित्र को पत्र लिखना, पिता को पत्र लिखना, बहन को पत्र लिखना आदि।
- औपचारिक पत्र शालीन व शिष्ट शैली में लिखे जाते हैं। अनौपचारिक पत्र मर्मस्पर्शी शैली में लिखे जाते हैं।
- औपचारिक पत्र में अभिवादन नहीं लिखा जाता है। अनौपचारिक पत्र में अभिवादन लिखा जाता है।
- औपचारिक पत्र लम्बे और जटिल वाक्यों में लिखा जाता है। अनौपचारिक पत्र कम और सरल वाक्यों में लिखा जाता है।
- औपचारिक पत्र सूझ-बूझ तथा दिमाग से लिखे जाते हैं। अनौपचारिक पत्र हृदय से लिखे जाते हैं।