बहुविकल्पीय प्रश्न
प्रश्न 1. कलिंग विजय किसने की थी-
(a) चन्द्रगुप्त मौर्य
(b) बिन्दुसार
(c) अशोक
(d) सेल्यूकस
उत्तर: (c) : कलिंग विजय अशोक ने 261 ई पू० में प्राप्त की थी। यह युद्ध उनके शासनकाल के आठवें वर्ष में हुआ था।
प्रश्न 2. हर्षचरित के रचयिता कौन थे-
(a) हर्ष
(b) बाणभट्ट
(c) मातंग
(d) भवभूति
उत्तर: (b) : हर्षचरित के रचयिता बाणभट्ट थे। यह संस्कृत काव्य है। बाणभट्ट हर्षवर्धन के दरबारी कवि थे।
प्रश्न 3. अलबरूनी किसके राजदरबार से सम्बन्धित था-
(a) मोहम्मद गोरी
(b) महमूद गजनवी
(c) कुतुबुद्दीन ऐबक
(d) अलाउद्दीन
उत्तर: (b) : अलबरूनी महमूद गजनी के राजदरबार से सम्बन्धित था। अलबरूनी ने 1030 ईस्वी में 'किताब-उल-हिन्द' नामक एक पुस्तक लिखी।
प्रश्न 4. 'अढ़ाई' दिन का झोपड़ा स्थित है-
(a) दिल्ली
(b) लाहौर
(c) अजमेर
(d) काबुल
उत्तर: (c) : 'अढ़ाई' दिन का झोपड़ा राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित है। यह एक मस्जिद है। इसे मोहम्मद गौरी के आदेश पर ढ़ाई दिनों के भीतर बनाया गया था।
प्रश्न 5. चोल शासकों की राजधानी कहाँ थी?
(a) कानपुर में
(b) तंजौर में
(c) उज्जैन में
(d) धारा में
उत्तर: (b) : चोल शासकों की राजधानी तंजौर में थी।
प्रश्न 6. सापेक्ष आर्द्रता मापी जाती है।
(a) हाइ मीटर
(b) हाइग्रोमीटर
(c) बैरोमीटर
(d) एनिमोमीटर
उत्तर: (b) : सापेक्ष आर्द्रता हाइग्रोमीटर द्वारा मापी जाती है। बैरोमीटर से वायुमंडलीय दबाव मापा जाता है। एनीमोमीटर से हवा की गति को मापा जाता है।
प्रश्न 7. वायुमण्डल में किस गैस की मात्रा सबसे अधिक हैं-
(a) आक्सीजन
(b) हाइड्रोजन
(c) नियान
(d) नाइट्रोजन
उत्तर: (d) : वायुमंडल में नाइट्रोजन गैस की मात्रा सबसे अधिक होती है। यह वायुमण्डल का लगभग 78% हिस्सा बनाता है।
प्रश्न 8. भारतीय संविधान में कितनी अनुसूचियाँ हैं-
(a) 9
(b) 10
(c) 11
(d) 12
उत्तर: (d) : भारतीय संविधान में मूल रूप से 8 अनुसूचियाँ थी। परन्तु वर्तमान में भारतीय संविधान में 12 अनुसूचियाँ है।
प्रश्न 9. सर्वाधिक लवणता पायी जाती है।
(a) कैस्पियन सागर
(b) लाल सागर
(c) भूमध्य सागर
(d) मृत सागर
उत्तर: (d) : सर्वाधिक लवगता मृत सागर में पायी जाती है। इसे सॉल्ट साल्ट के नाम से भी जाना जाता है।
प्रश्न 10. वी (V) आकार की घाटी नदी के किस मार्ग में बनती हैं।
(a) ऊपरी मार्ग में
(b) मध्य मार्ग में
(c) निचले मार्ग में
(d) नदी के मुहाने पर
उत्तर: (a) : वी (V) आकार की घाटी नदी के ऊपरी मार्ग में बनती है। यह नदी के स्त्रोत के पास, जहाँ ढलान खड़ी होती है, वहाँ बनती है।
प्रश्न 11. ज्वालामुखी उदार से प्राप्त द्रव पदार्थ का भूतल पर नाम हैं-
(a) सियाल
(b) सीमा
(c) लावा
(d) डायोराइट
उत्तर: (c) : ज्वालामुखी उद्गार से प्राप्त द्रव पदार्थ का भूतल पर नाम लावा है।
प्रश्न 12. गुलाम वंश का प्रथम सुल्तान कौन सा है?
(a) इल्तुतमिश
(b) कुतुबुद्दीन ऐबक
(c) रजिया सुल्तान
(d) ग्यासुद्दीन बलबन
उत्तर: (b) : गुलाम वंश का प्रथम सुल्तान कुतुबुद्दीन ऐबक था। इल्तुतमिश को गुलाम वंश का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। यह कुतुबद्दीन ऐबक का गुलाम था। रजिया सुल्तान भारत के उत्तरी भाग पर शासन करने वाली पहली महिला मुस्लिम शासक थी।
प्रश्न 13. सर्वाधिक गहराई वाला महासागर कौन-सा है?
(a) प्रशान्त महासागर
(b) अटलांटिक महासागर
(c) हिन्द महासागर
(d) आर्कटिक महासागर
उत्तर: (a) : प्रशान्त महासागर सर्वाधिक गहराई वाला महासागर है। यह पृथ्वी पर सबसे बड़ा महासागर है।
प्रश्न 14. क्षुद्र ग्रह किनकी कक्षाओं के बीच पाए जाते हैं?
(a) शनि और बृहस्पति ग्रह
(b) मंगल और बृहस्पति ग्रह
(c) पृथ्वी और मंगल ग्रह
(d) शानि ओर अरूण ग्रह
उत्तर: (b) : क्षुद्र ग्रह मंगल और बृहस्पति ग्रहों की कक्षाओं के बीच में पाए जाते हैं।
प्रश्न 15. संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था-
(a) महात्मा गाँधी को
(b) पं. जवाहरलाल नेहरू को
(c) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को
(d) महारानी विक्टोरिया को
उत्तर: (c) : संविधान सभा के अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को चुना गया था। संविधान सभा के अस्थायी अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे।
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 16. गुजरात में मुहम्मद गोरी को किसने हराया था?
उत्तर: गुजरात में मुहम्मद गोरी को सोलंकी वंश के राजा भीमदेव द्वितीय ने हराया था। यह युद्ध 1178 ईस्वी में हुआ था, जिसे कायादरा की लड़ाई के नाम से जाना जाता है।
प्रश्न 17. मौर्य साम्राज्य की स्थापना किसने की थी?
उत्तर: मौर्य साम्राज्य की स्थापना 322 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य द्वारा की गई थी। मौर्य साम्राज्य भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण और शाक्तिशाली साम्राज्य था।
प्रश्न 18. आंध्र भोज के नाम से किस शासक को जाना जाता है?
उत्तर: आंध्र भोज के नाम से कृष्ण देव राय को जाना जाता है। कृष्णदेव राय को कन्नड़ राज्य राम रमण और मूरे रायरा गंड़ा जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता था। यह तुलुव राजवंश से था तथा अपने वंश का सबसे शाक्तिशाली शासक माना जाता हैं।
प्रश्न 19. स्थलमंडल की ऊपरी परत को क्या कहा जाता है?
उत्तर: स्थलमंढल की ऊपरी परत को भूपर्पटी कहा जाता है। यह पृथ्वी की सबसे बाहरी, ठोस परत है जो चट्टानों और मिट्टी से बनी होती है। जो जमीन बनाते हैं।
प्रश्न 20. भारत की सबसे बड़ी लैगून झील कौन सी है?
उत्तर: भारत की सबसे बड़ी लैगून झील चिल्का झील है जो भारत के पूर्वी तट पर ओडिशा राज्य के पुरी खुदी और गंजम जिलों में दया नदी के मुहाने पर बंगाल की खाड़ी में बहती है। यह झील एशिया की सबसे बड़ी खारे जल की लैगून और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी तटीय लैगून है। पुलिकट लैगून भारत की दूसरी सबसे बड़ी खारे जल की लैगून है।
प्रश्न 21. राष्ट्रकूट वंश के दो शासकों के नाम लिखिए।
उत्तर: राष्ट्रकूट वंश के दो शासकों के नाम- (1) अमोघवर्ष (2) कृष्णराज प्रथम। अन्य नाम- दन्तिदुर्ग, ध्रुव कृष्ण द्वितीय, कृष्ण तृतीय, गोविंद द्वितीय आदि।
प्रश्न 22. सैय्यद वंश की स्थापना किसने की थी?
उत्तर: सैय्यद वंश की स्थापना खिज्र खान ने की थी। खिज्र खान मुल्तान का पूर्व गवर्नर था और उसने 1414 में दिल्ली सल्तनत में सैयद वंश की स्थापना की। सैय्यद राजवंश दिल्ली सल्तनत का चौथा राजवंश था। इस वंश का अंतिम शासक अलाउद्दीन आलम शाह था।
प्रश्न 23. दिल्ली में सल्तनत काल का अन्त कब हुआ?
उत्तर: दिल्ली में सल्तनत काल का अन्त 1526 ई. में हुआ था। बाबर ने इब्राहिम लोदी को पानीपत के प्रथम युद्ध में हराकर दिल्ली सल्तनम का अंत किया और मुगल साम्राज्य की स्थापना की।
प्रश्न 24. उपभोक्ता संरक्षण से क्या तात्पर्य हैं?
उत्तर: उपभोक्ता संरक्षणः उपभोक्ता संरक्षण से तात्पर्य है। उपभोक्ताओं के अधिकारों और हितों की रक्षा करना। अर्थात् उपभोक्ताओं को उत्पादों और सेवाओं की ब्रिकी के दौरान होने वाले किसी भी प्रकार के शोषण या अन्याय से बचाने के लिए कानून, नियम और नीतियां बनाई जाती हैं। यह सुनिश्चित करता है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के बारे में जागरूक हो और उन्हें उचित उपचार उपलब्ध हो।
प्रश्न 25. भारत की प्रथम औद्योगिक नीति किसके द्वारा घोषित की गयी थी?
उत्तर: भारत की प्रथम औद्योगिक नीति डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी द्वारा 6 अप्रैल 1948 में घोषित की गई थी यह नीति संसद में प्रस्तुत की गई थी और इसका मुख्य उद्देश्य देश में औद्योगिक विकास को बढ़ाया देना है। यह नीति सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के बीच एक संतुलन स्थापित करती थी और मिश्रित अर्थ व्यवस्था के सिद्धांत पर आधारित थी।
प्रश्न 26. मत्तविलास प्रहसन के रचयिता कौन थे?
उत्तर: मत्तविलास प्रहसन एक प्राचीन संस्कृत एकांकी नाटक है। यह सातवों शाताब्दी की शुरूआत में विद्वान राजा महेन्द्रवर्मन प्रथम (571-630 C.E) द्वारा लिखित दो महान एकांकी नाटकों में से एक है।
प्रश्न 27. आगरा नगर की स्थापना किसने की थी?
उत्तर: आगरा नगर की स्थापना सुल्तान सिंकदर लोदी ने की थी, जो लोदी वंश का शासन था उन्होने 1504 ईस्वी में आगरा की स्थापना की थी और इसे अपनी राजधानी बनाया था।
प्रश्न 28. सौरमंडल में कितने ग्रह हैं?
उत्तर: हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह है बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस और नेपच्यून।
प्रश्न 29. संविधान की आत्मा किसे कहा गया है?
उत्तर: भारतीय संविधान में निहित 'प्रस्तावना' को 'संविधान की आत्मा' कहा गया है। यह सरकार के किसी भी कानून और कार्रवाई की जांच और मूल्यांकन करने के लिए एक मानक प्रदान करता है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह अच्छा है या बुरा। इसलिए, यह संविधान की आत्मा है। भारतीय संविधान की मूल आत्मा अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) को कहा जाता है। डॉ भीमराव अंबेडकर ने इसे संविधान का हृदय और आत्मा कहा था क्योंकि यह आम नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए सर्वोच्च अदालत तक पहुंचने का सीधा रास्ता प्रदान करता है।
प्रश्न 30. हरित क्रांन्ति किसे कहते है?
उत्तर: हरित क्रांतिः कृषि उत्पादों तथा कृषि से सम्बन्धित औजारों, कीटनाशी, खाद उन्नत किस्म का बीज आदि को विकसित करने की प्रणाली को हरित क्रांति कहते है। जिससे अन्न दूध कपास, फल आदि का उत्पादन अधिक से अधिक हो सके। विश्व में हरित क्रांति के जनक के रूप में नॉर्मन बोरलॉग को जाना जाता है। भारत में हरित क्रांति का नेतृत्व मुख्य रूप से एम. एस. स्वामीनाथन द्वारा किया गया।
लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 31. राजपूतकालीन आर्थिक स्थिति का वर्णन करें।
उत्तर: राजपूतकालीन आर्थिक स्थितिः- राजपूत काल में आर्थिक स्थिति सामंती व्यवस्था पर आधारित थी, जिसमे राजा और सामंत प्रमुख थे। किसान, जमींदार और अन्य सामजिक वर्ग थी थे, लेकिन राजपूत शासकों के पास सबसे ज्यादा आर्थिक शाक्ति थी। इस काल में कृर्षि और व्यापार प्रमुख आर्थिक गतिविधियों में से थे।
कृर्षि :-
- राजपूत काल में कृषि मुख्य आर्थिक गतिविधि थी।
- किसान भूमि को जोतते थे और फसलों को उगाते थे।
- भूमि पर कर लगाना एक सामान्य अभ्यास था, जिसे सामंत और राजा वसूलते थे।
- कुछ क्षेत्रों में सिंचाई तकनीक का उपयोग किया जाता था जैसे कि नहरें और बांध।
व्यापारः-
- राजपूत काल में व्यापार भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक गतिविधि थी।
- विभिन्न वस्तुओं का उत्पादन और व्यापार किया जाता था, जैसे कि कपड़े, मसाले और धातु
- व्यापारिक मार्गों का विकास किया गया था, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के बीच व्यापार होता था।
करः-
- राजपूत शासक किसानों से कर वसूलते थे।
- करों के अलावा, अन्य शुक्ल थी लिए जाते थे, जैसे कि ब्रिकी कर और व्यापार शुल्क।
अन्य राजपूतकालीन स्थितियाँ निम्नालिखित हैं- सामजिक स्थितिः राजपूतकालीन वर्ण व्यवस्था व आधुनिक वर्ण व्यवस्था में काफी समानता है। प्राचीन काल से चले आ रहे वर्णों के अतिरिक्त राजपूत काल में अनेक नवीन उपजातियों का प्रादुर्भाव हुआ इस काल में लोगों के व्यवसाय के नाम पर उनकी जाति का नाम पड़ गया था। जैसे:- सोने के काम करने वाला स्वर्णकार राजपूत काल में बहुविवाह की प्रथा थी। समाज में जौहर तथा सती प्रथा भी प्रचलित थी। दास प्रथा का अत्याधिक विकास हुआ। शासन व्यवस्थाः राजा की स्थिति सर्वोपरि थी। न्याय तथा सेना का वह सर्वोच्च अधिकारी था। धामिक दशाः विष्णु, शिव, सूर्य, दुर्गा आदि देवी देवताओं की उपासना की जाती थी। जैन धर्म भी लोकप्रिय था। बौद्ध धर्म का प्रचलन कम था। हिन्दु धर्म में बहुदेववाद की प्रतिष्ठा थी तथा अनेक देवी देवताओं की उपासना की जाती थी।
प्रश्न 32. गुप्तकाल के पतन के मुख्य कारणों का विश्लेषण करें।
उत्तर: परिचयः- गुप्त साम्राज्य की नींव श्री गुप्त ने रखी थी, यह एक सामंत थे। इस साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक चन्द्रगुप्त प्रथम था। जिसने एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की थी। जिसकी राजधानी पाटलिपुत्र थी। इस वंश में समुद्रगुप्त तथा चंद्रगुप्त द्वितीय जैसे कई योग्य एवं शाक्तिशाली शासक हुए। गुप्तों के काल को भारतीय इतिहास में स्वर्ण युग कहा गया फिर भी गुप्त साम्राज्य का पतन कैसे हुआ। गुप्त साम्राज्य के पतन होने के कई कारण थे जैसेः-
- अयोग्य उत्तराधिकारी का होनाः गुप्त साम्रात्य के विस्तार में समुद्रगुप्त और चंद्रगुप्त द्वितीय का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। समुद्रगुप्त के बारे में कहा गया है कि इनके घोड़े तीन समुद्र का पानी पिया है इसका अर्थ यह है कि इसका साम्राज्य भारत के अधिकतर भागों पर स्थापित था। गुप्त साम्राज्य में स्कंद गुप्त के शासनकाल तक स्थिति ठीक थी। स्कद गुप्त के मृत्यू हो जाने के बाद गुप्त वंश में कोई ऐसा शासक नहीं हुआ जो साम्राज्य की एकता कों एक सूत्र में बांध कर रखा जा सके। इस प्रकार गुप्तों के अयोग्य उत्तराधिकारी के कारण पतन माना जाता है।
- विदेशी आक्रमणः गुप्त साम्राज्य के पतन होने का मुख्य कारण विदेशी आक्रमण को भी माना जाता है। गुप्त साम्राज्य को पुष्यमित्र एवं हूणों के आक्रमण का सामना करना पड़ा प्रत्येक विदेशी आंतरिक आक्रमण ने साम्राज्य की स्थिति को अत्यंत दयनीय बना दिया। पुष्यमित्र के आक्रमण से ज्यादा घातक हूणों का आक्रमण था।
- आर्थिक कारणः गुप्त साम्राज्य के पतन के कुछ आर्थिक कारण भी थे गुप्तों द्वारा दान में दिये गये भूमि पर किसी भी प्रकार का कर (टैक्स) नहीं लिया जाता था। साथ ही जिन व्यक्ति को भूमि दान में दिया जाता था। उन पर राजा का अधिकार ना होकर उस व्यक्ति का अधिकार प्राप्त हो जाता था।
- सांमतों के विद्रोहः- गुप्त काल में सामतंवादी प्रथा प्रचलित थी। समुद्रगुप्त के शासनकाल के समय से ही सामंत लोग इनके अधीन कार्य करते थे। जब गुप्त वंश में अयोग्य उत्तराधिकारी आया तो इन सभी सांमतों ने अवसर को देखकर गुप्तों के विरूद्ध विद्रोह कर दिया। इसके परिणामस्वरूप सभी सामंतों ने अपना स्वतंत्र राज्य स्थापित कर लिया। सबसे पहले पल्लवी के मैत्रक वंश के शासकों ने गुप्त सम्राटों से अपने को मुक्त करा लिया ।
- धार्मिक कारणः गुप्त साम्राज्य के पतन के लिए धार्मिक कारण भी प्रमुख था। प्रारंभ में गुप्त शासकों ने वैष्णव धर्म को मानते थे, परन्तु बाद में बौद्ध धर्म को स्वीकार कर लिया। जो गुप्तों के साम्राज्य के पतन का मुख्य कारण बना।
- सैनिक कारणः गुप्त साम्राज्य के पतन का एक प्रमुख कारण सैनिक संगठन भी था। मौर्य शासकों की तरह गुप्तों के पास अपनी एक विशाल सेना संगठन नहीं थी। इनके अभिलेखों में सैन्य बल एवं सैनिक संगठन का उल्लेख कहीं भी नहीं मिलता है।
प्रश्न 33. उपभोक्ता के अधिकारों का परिचय दीजिए?
उत्तर: उपभोक्ता अधिकारः उपभोक्ता अधिकार एक ऐसे व्यक्ति के अधिकारों का एक समूह है जो विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं को खरीदता और उपयोग करता है। उपभोक्ता अधिकार उपभोक्ताओं को सुरक्षित और निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं के साथ साथ उनकी सुरक्षा के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करते हैं। उपभोक्ता अधिकारों में कुछ प्रमुख अधिकार शामिल हैः-
- सुरक्षा का अधिकारः यह अधिकार उपभोक्ताओं को जीवन या संपन्ति के खतरनाक वस्तुओं और सेवाओं से बचाता है।
- जानकारी का अधिकारः यह अधिकार उपभोक्ताओं को वस्तुओं और सेवाओं की गुणवत्ता, मात्र, शुद्धता, मानक और मूल्य के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देता है।
- चुनने का अधिकारः यह अधिकार उपभोक्ताओं को विभिन्न उत्पादों और सेवाओं में से अपने विवेक से चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
- सुनवाई का अधिकारः यह अधिकार उपभोक्ताओं को विभिन्न उत्पादों और सेवाओं में से अपने विवेक से चुनने की स्वतंत्रता प्रदान करता है।
- निवारण माँगने का अधिकारः यह अधिकार उपभोक्ताओं को अनुनित व्यवहार या शोषण के मामलों में मुआवजे का दावा करने और शिकायतों से निपटने की क्षमता प्रदान करता है।
- उपभोक्ता शिक्षा का अधिकारः- यह अधिकार उपभोक्ताओं को उपभोक्ता अधिकारों और उनकी रक्षा के लिए उपलब्ध उपायों के बारे में जागरूक करने पर केंद्रित है।
प्रश्न 34. संविधान की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर: संविधान की प्रमुख विशेषताएँः संविधान की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं-
- सबसे लंबा लिखित संविधानः भारत का संविधान दुनिया के सभी लिखित संविधानों में सबसे लंबा है। यह एक बहुत ही व्यापक और विस्तृत दस्तावेज है।
- विभिन्न स्त्रोंतों से लिया गयाः भारत के संविधान ने अपने अधिकांश प्रावधानों को विभिन्न अन्य देशों के संविधानों के साथ साथ 1935 के भारत सरकार अधिनियम से उधार लिया है। संविधान का दार्शनिक हिस्सा (मौलिक अधिकार और राज्य नीति के निर्देशक सिंद्धान्त) क्रमशः अमेरिका और आयरिश संविधानों से प्रेरित हैं। संविधान का राजनीतिक हिस्सा (कैबिनेट सरकार का सिद्धांत और कार्यपालिका और विधायिका के बीच संबंध) काफी हद तक ब्रिटिश संविधान से लिया गया है।
- कठोरता और लचीलेपन का मिश्रणः भारतीय संविधान को कठोर और भारतीय संविधान कठोरता और लचीलेपन के मेल का एक अनूठा उदाहरण है। किसी भी संविधान को उसकी संशोधन प्रक्रिया के आधार पर कठोर या लचीला कहा जा सकता है। एक कठोर संविधान वह है जिसके संशोधन के लिए एक विशेष प्रक्रिया की आवश्यकता होती है। उदहारण अमेरिका संविधान। एक लचीला संविधान वह है जिसे सामान्य कानूनों की तरह संशोधित किया जा सकता है। उदाहरण ब्रिटिश संविधान।
- संघात्मकता और एकात्मकता का मिश्रणः भारत का संविधान सरकार की एक संघीय प्रणाली स्थापित करता है। इसमें एक संघ की सभी सामान्य विशेषताएं शामिल हैं, जैसे दो सरकारें, शाक्तियों का विभाजन, लिखित संविधान, संविधान की सर्वोच्चता संविधान की कठोरता स्वंतत्र न्यायपालिका और द्विसदनीयता । हालांकि भारतीय संविधान में बड़ी संख्या में एकात्मक या गैर संघीय विशेषताएँ भी शामिल हैं, जैसे कि एक मजबूत केंद्र, एकल संविधान, एकीकृत न्यायपालिका आदि।
- सरकार का संसदीय रूपः संसदीय प्रणाली विधायी और कार्यकारी अंगों के बीच सहयोग और समन्वय के सिद्धांत पर आधारित है भारत की संसदीय प्रणाली को जिम्मेदार सरकार और कैबिनेट सरकार के 'वेस्टमिंस्टर' मॉडल के रूप में भी जाना जाता है।
- संसदीय संप्रभुता और न्यायिक सर्वोच्चताः- भारत की संसद की संप्रभुता का सिद्धांत बिंटिश संसद से लिया गया है जबकि न्यायिक सर्वोच्चता का सिद्धांत अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से लिया गया है। भारतीय संविधान ने यह सिद्धांत अपनाया कि न्यायपालिका यह तय कर सकती है कि कोई कानून संविधान के अनुसार है या नहीं ।
- कानून का शासनः भारत में लोग कानून द्वारा शासित होते हैं, किसी व्यक्ति द्वारा नहीं यानी बुनियादी सत्यवाद कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। लोकतंत्र के लिए कानून व्यवस्था बेहद महत्पूर्ण हैं। लोकतंत्र में कानून संप्रभु हैं।
- एकीकृत और स्वंतत्र न्यायपालिकाः भारत में एकल एकीकृत न्यायिक प्रणाली है। साथ ही, भारतीय संविधान कार्यपालिका और विधायिका के प्रभाव से मुक्त होने के साथ भारतीय न्यायपालिका को सक्षम करके स्वतंत्र न्यायपालिका की स्थापना करता है।
- मौलिक अधिकारः- भारतीय संविधान का भाग (III) सभी नागरिकों को छह मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है। संविधान में मूल सिद्धांत है कि प्रत्येक व्यक्ति एक मनुष्य के रूप में कुछ अधिकारों का हकदार है। और ऐसे अधिकारों का उपभोग किसी बहुसंख्यक या अल्पसंख्या की इच्छा पर निर्भर नहीं करता है किसी भी बहुसंख्याक को इन अधिकारों को निरस्त करने का अधिकार नहीं है।
- राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतः डॉ. वीर. आर. अम्बेडकर के अनुसार, राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत भारतीय संविधान की एक 'नई विशेषता' है इसे संविधान के भाग (IV) में सूचीबद्ध किया गया है। ये सिद्धांत देश के शासन में मौलिक हैं और कानून बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा।
- मौलिक कर्त्तव्यः स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42 वें संविधान संशोधन अधिनियम 1976 द्वारा आंतरिक आपतकाल (1975-77) के दौरान इन्हें जोड़ा गया था। मौलिक कर्त्तव्य नागरिकों को यह स्मरण कराते हैं कि अपने देश, समाज और साथी नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्यों के संबंध में भी सचेत रहना चाहिए।
प्रश्न 35. अपरदन चक्र से आप क्या समझते हैं?
उत्तर: अपरदन चक्रः अपरदन चक्र से तात्पर्य उस क्रमबद्ध प्रक्रिया से हैं जिसके द्वारा कोई नवोत्थित भूभाग (Newly uplifted landmass) विभिन्न अपरदनकारी शाक्तियों (Erosion forces) जैसे कि नदी, पवन, हिमानी आदि के प्रभाव से धीरे धीरे समतल होता जाता है। इस प्रक्रिया में विभिन्न अवस्थाएँ शामिल होती हैं, जो भूभाग की स्थलाकृति में क्रमिक परिवर्तन लाती है। अपरदन चक्र की मुख्य अवधारणा यह है कि भूभाग का उत्थान अपरदन की प्रक्रिया को जन्म देता है, और समय के साथ, अपरदन उस भूभाग को निम्नतम स्तर तक ले जाता हैं, जिसे लगभग समुद्र तल के बराबर माना जाता है। अपरदन चक्र को आम तौर पर तीन मुख्य अवस्थाओं में विभाजित किया जाता है। (1) युवावस्था (Youth stage) (2) प्रौढ़ावस्था (Mature stage) (3) वृद्धावस्था (Old stage)।
प्रश्न 36. चक्रवात किसे कहते हैं? चक्रवात के प्रकारों का वर्णन कीजिए।
उत्तर: चक्रवातः चक्रवात (Cyclone) एक प्रकार की वायुमंडलीय अवस्था है जिसमें वायुदाब बहुत कम (निम्न) होता है और उसके चारों उच्च दाब का क्षेत्र होता है। जब किसी क्षेत्र में वायुदाब बहुत कम हो जाता है, तो उसके चारों ओर की हवा उस क्षेत्र की ओर तेजी से खिंचती है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण यह हवा सीधे नहीं जाकर घूमती हुई केंद्र की ओर जाती है और एक चक्र (स्पाइरल) का निर्माण करती हैं। इस धुमावदार गति को ही चक्रवात कहते हैं।
चक्रवात के प्रकारः- चक्रवात मूख्य: दो प्रकार के होते हैं:-
(1) उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Topical cyclones) :-
- यह समुद्रो के ऊपर, विषुवत रेखा के निकट के गर्म क्षेत्रां में बनते हैं।
- समुद्र की सतह का तापमान 27°C से अधिक होने पर यह चक्रवात बनते हैं।
- इसमें तेज हवा, भारी, वर्षा, समुद्र में ऊंची लहरे और तुफानी परिस्थितियाँ होती है।
- भारत में बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवात इसी श्रेणी में आते हैं। उदाहरणः फानी, अम्फान, यास आदि।
(2) शीत कटिबंधीय या उपोष्णकटिबंधीय चक्रवात (Temperate or extra -Tropical cyclones:)-
- यह 30°C से 60°C अक्षाशों के बीच क्षेत्रो में बनते हैं, जहाँ गर्म और ठंडी हवाएं आपस में टकराती हैं।
- इनका निर्माण स्थल मुख्यतः स्थल होता है, लेकिन यह महासागरों के पास भी विकसित हो सकते हैं।
- इनका आकर बड़ा होता है लेकिन गति और विनाश क्षमता उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तुलना में कम होती है।
प्रश्न 37. ज्वार - भाटा किसे कहते है? बताइये ।
उत्तर: ज्वार भाटाः- ज्वार भाटा समुद्र के पानी के स्तर में दिन में दो बार होने वाली नियमित वृद्धि और गिरावत है। यह चंद्रमा और सूर्य के गुरूत्वाकर्षण बल के कारण होता है। जब पानी अपने उच्चतम स्तर तक उठ जाता है, तो इसे ज्वार (high tide) कहते हैं, और जब यह अपने निम्नतम स्तर तक गिर जाता है, तो इसे भाटा (Low tide) कहते हैं। ज्वार भाटा नौवहन, मछली पकड़ने, समुद्री जीव के जीवन चक्र और यहाँ तक की मौसम को प्रभावित करता है।
प्रश्न 38. वायुमण्डल की परतों का नाम लिखिये।
उत्तर: वायुमण्डल :- पृथ्वी के चारों ओर सैकड़ों किमी. की मोटाई में लपेटने वाले गैसीय आवरण को वायुमण्डल कहते हैं। वायुमण्डल विभिन्न गैसों का मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से धेरे हुए हैं। वायुमण्डल को 5 विभिन्न परतों में विभाजित किया गया है।
- क्षोभमण्डल (Troposphere:)- क्षोभमण्डल वायुमंडल की सबसे निचली परत है। यह मण्डल जैव मण्डलीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि मौसम संबंधी सारी घटनाएं इसी में घटित होती है।
- समतापमण्डल (Stratasphere):- ओजोन मण्डल समतापंमडल से 38 से 50 किलोमीटर तक विस्तृत है। इस मण्डल में तापमान स्थिर रहता है तथा इसके बाद ऊंचाई के साथ बढ़ता जाता है। समताप मण्डल बादल तथा मौसम संबंधी घटनाओं से मुक्त रहता है। इस मण्डल के निचले भाग में जेट वायुयान के उड़ान भरने के लिए आदर्श दशाएँ है।
- मध्यमण्डल (Mesosphere:)- यह वायुमंडल की तीसरी परत है जो समताप सीमा के ऊपर स्थित है इसकी ऊंचाई लगभग 80 किलोमिटर तक है। अंतरिक्ष से आने वाले उल्का पिंड इसी परत में जलते है। इस मंडल में ऊंचाई के साथ तापमान में पुनः गिरावट लगती है।
- तापमंडल या आयन मण्डल (Thermo sphere:)- इस मण्डल में ऊँचाई के साथ ताप में तेजी से वृद्धि होती है। आयनमण्डल, तापमण्डल का निचला भाग है जिसमें विद्युत आवेशित कण होते है जिन्हें आयन कहते हैं। ये कण रेडियों तरंगों को भूपृष्ठ पर परावर्तित करते हैं और बेहतर संचार को संभव बनाते है।
- बाह्यमण्डल (Exosphere: )- धरातल से 500 से 1000 किमी० के मध्य बहिर्मडल पाया जाता है, कुछ विद्वान इसको 1600 किमी० तक मानते है। इस परत का विशेष अध्ययन लैमेन स्पिट्जर ने किया था। इसमें हीलियम तथा हाइड्रोजन गैसों की अधिकता है।
प्रश्न 39. वायु धरातल पर क्या प्रभाव डालती है?
उत्तर: वायु, धरातल पर कई तरह से प्रभाव डालती है। वायुमण्डलीय दाब और तापमान, पृथ्वी के मौसम तथा जलवायु को प्रभावित करते है, जबकि वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य, पौधों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा सकता है। वायु के धरातल पर प्रभावः-
- मौसम और जलवायुः वायुमंडलीय दाब और तापमान, वर्षा तूफान और अन्य मौसम संबंधी घटनाओं प्रभावित करते हैं।
- वायु प्रदूषणः- वायु प्रदूषण मानव स्वास्थ्य पौधों और वन्यजीवों को प्रभावित करता है।
- सूर्य का विकिरणः वायुमंडल की परतें विशेष रूप से ओजोन परत, सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैगनी विकिरण को अवशोषित करती है।
- वायु गतिः पवन धरातल पर पानी और ऊर्जा के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- वायु का प्रभावः वायु पृथ्वी के तापमान को बनाए रखने में भी महत्वूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 40. भारतीय अर्थव्यवस्था में कृर्षि का योगदान बताइए।
उत्तर: भारतीय अर्थ व्यवस्था में कृर्षि का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है, यह सिर्फ एक व्यवसाय नहीं, बल्कि हमारे देश की संस्कृति और जीवन शैली का एक अभिन्न हिस्सा है। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृर्षि का योगदान इस प्रकार हैं:-
- सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदानः कृषि भारतीय अर्थ व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में उभरा है, जो देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद में अलभग 17.18% तक योगदान देता है। यह अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा है।
- रोजगार का प्रमुख स्त्रोतः कृषि आज भी भारत में रोजगार का सबसे बड़ा स्त्रोत है। लगभग 50% से अधिक कार्यशील जनसंख्या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृर्षि पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो यह आकड़ा और भी अधिक हैं, जहाँ लगभग दो तिहाई आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर करती है।
- खाद्य सुरक्षाः कृषि देश की बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए भोजन का प्रावधान करती है। यह न केवल अनाज बल्कि फल, सब्जियां, दूध और अन्य आवश्यक खाद्य पदार्थों की आपूर्ति सुनिश्चित करती हैं, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होती है।
- उद्योगों को कच्चा मालः कृषि कई प्रमुख उद्योगों के लिए कच्चे माल की आपूर्ति करती है। इनमें कपड़ा उद्योग, चीनी उद्योग, जूट उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, वनस्पति तेल उद्योग और तंबाकू उद्योग शामिल है। इन उद्योगों का विकास सीधे तौर पर कृषि उत्पादन पर निर्भर करता है।
- पूंजी निर्माण में योगदानः कृर्षि क्षेत्र रेलवे और परिवहन जैसे बुनियादी ढ़ाचे के विकास में भी महत्वूपर्ण भूमिका निभाता है। कृषि उत्पादों की ढुलाई से रेलवे की अच्छी आय होती है।
- विदेशी व्यापार में योगदानः भारत कृषि उत्पादों का निर्यात करके विदेशी मुद्रा अर्जित करता है। चाय, तंबाकू, मसाले और अन्य कृषि उत्पाद भारत के विदेशी व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान देते है।
- ग्रामीण विकास का आधारः कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में आय और रोजगार के अवसर पैदा करती है। जिससे ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलता है और गरीबी कम करने में मदद मिलती है।