वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. बल में होता है—
(a) केवल परिमाण
(b) केवल दिशा
(c) परिमाण व दिशा दोनों
(d) न परिमाण न ही दिशा
उत्तर: (c) परिमाण व दिशा दोनों।
व्याख्या : बल एक सदिश राशि है। किसी सदिश राशि को पूर्ण रूप से व्यक्त करने के लिए उसका परिमाण तथा दिशा दोनों आवश्यक होते हैं। बल का SI मात्रक न्यूटन (N) है।
प्रश्न 2. ऊर्ध्वपातज पदार्थ का उदाहरण नहीं है—
(a) कपूर
(b) नमक
(c) आयोडीन
(d) नौसादर
उत्तर: (b) नमक।
व्याख्या : वे ठोस पदार्थ जो गर्म करने पर द्रव अवस्था में आए बिना सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं, ऊर्ध्वपातज पदार्थ कहलाते हैं। कपूर, आयोडीन तथा नौसादर इसके उदाहरण हैं, जबकि सामान्य नमक ऊर्ध्वपातज पदार्थ नहीं है।
प्रश्न 3. एक फुट बराबर होता है—
(a) 25.48 सेमी
(b) 29.48 सेमी
(c) 30.48 सेमी
(d) 28.48 सेमी
उत्तर: (c) 30.48 सेमी।
व्याख्या : 1 फुट = 12 इंच तथा 1 इंच = 2.54 सेमी होता है।
प्रश्न 4. किसी घुलनशील ठोस पदार्थ को द्रव से पृथक करने की विधि है—
(a) निथारना
(b) छानना
(c) तलछटीकरण
(d) वाष्पीकरण
उत्तर: (d) वाष्पीकरण।
व्याख्या : किसी द्रव में घुले ठोस पदार्थ को प्राप्त करने के लिए द्रव का वाष्पीकरण किया जा सकता है। जैसे नमक के विलयन से जल को वाष्पित करने पर नमक शेष रह जाता है।
प्रश्न 5. चने के बीज में दो हल्के पीले रंग की संरचनाओं का नाम है—
(a) बीजपत्र
(b) मूलांकुर
(c) बीजचोल
(d) भ्रूण
उत्तर: (a) बीजपत्र।
व्याख्या : चना एक द्विबीजपत्री पौधा है। इसके बीज में दो मोटे एवं हल्के पीले रंग के बीजपत्र पाए जाते हैं, जिनमें भ्रूण के अंकुरण एवं प्रारम्भिक वृद्धि के लिए भोजन संचित रहता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. पुष्प के चार प्रमुख भागों के नाम लिखिए।
उत्तर: पुष्प के चार प्रमुख भाग हैं- बाह्यदलपुंज, दलपुंज, पुमंग तथा जायांग। पुमंग नर और जायांग मादा जनन भाग है।
प्रश्न 7. सिंघाड़ा तथा ऑर्किड की जड़ें किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न हैं?
उत्तर: सिंघाड़े में कुछ हरी जल-जड़ें प्रकाश-संश्लेषण में सहायक होती हैं, जबकि ऑर्किड में वेलामेनयुक्त वायवीय या आर्द्रताग्राही जड़ें होती हैं, जो वातावरण से नमी अवशोषित करती हैं।
प्रश्न 8. एक एंग्स्ट्रॉम (Å) में कितने मीटर होते हैं?
उत्तर: 1 एंग्स्ट्रॉम (Å) = 10−10 मीटर = 0.0000000001 मीटर।
प्रश्न 9. मूल मात्रक किसे कहते हैं? कोई दो उदाहरण भी दीजिए।
उत्तर: मूल भौतिक राशियों को मापने के लिए प्रयुक्त स्वतंत्र मात्रकों को मूल मात्रक कहते हैं। उदाहरण- लम्बाई का मीटर (m) तथा द्रव्यमान का किलोग्राम (kg)।
प्रश्न 10. पदार्थ की वह कौन-सी अवस्था है, जिसमें पदार्थ का आयतन तो निश्चित होता है किन्तु आकृति अनिश्चित होती है?
उत्तर: द्रव अवस्था। द्रव का आयतन निश्चित होता है, परन्तु आकृति निश्चित नहीं होती और वह पात्र का आकार ग्रहण कर लेता है।
प्रश्न 11. भंगुर एवं अभंगुर पदार्थ किसे कहते हैं? प्रत्येक का उदाहरण दीजिए।
उत्तर: जो पदार्थ आघात से आसानी से टूट जाते हैं वे भंगुर, जैसे- काँच; जबकि जो आसानी से नहीं टूटते वे अभंगुर पदार्थ कहलाते हैं, जैसे- ताँबा।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. अलैंगिक जनन के अन्तर्गत विखण्डन एवं मुकुलन को उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: अलैंगिक जनन वह जनन है जिसमें केवल एक जनक भाग लेता है तथा नर और मादा युग्मकों का संलयन नहीं होता।
विखण्डन : अलैंगिक जनन की वह विधि जिसमें जनक जीव विभाजित होकर दो या अधिक नए जीवों का निर्माण करता है, विखण्डन कहलाती है।
उदाहरण : अमीबा में एक जनक कोशिका दो संतति कोशिकाओं में विभाजित होती है। इसे द्विखण्डन कहते हैं।
मुकुलन : अलैंगिक जनन की वह विधि जिसमें जनक जीव के शरीर पर एक छोटा उभार या मुकुल बनता है। यह मुकुल वृद्धि करके नए जीव में विकसित हो जाता है।
उदाहरण : यीस्ट तथा हाइड्रा।
प्रश्न 13. प्रयोगशाला थर्मामीटर का चित्र बनाइए। सेन्टीग्रेड तथा फॉरेनहाइट स्केल में परिवर्तन का सूत्र लिखिए।
उत्तर: प्रयोगशाला थर्मामीटर का उपयोग विभिन्न पदार्थों का तापमान मापने के लिए किया जाता है। इसमें तापमापी द्रव से भरा बल्ब, संकीर्ण केशिका नली तथा अंकित मापनी होती है।
सेन्टीग्रेड तथा फॉरेनहाइट परिवर्तन सूत्र :
प्रश्न 14. मृदु साबुन एवं कठोर साबुन में क्या अन्तर है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: मृदु एवं कठोर साबुन में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं—
| मृदु साबुन | कठोर साबुन |
|---|---|
| (1) मृदु साबुन उच्च वसीय अम्लों के पोटैशियम लवण होते हैं। | (1) कठोर साबुन उच्च वसीय अम्लों के सोडियम लवण होते हैं। |
| (2) इन्हें बनाने में सामान्यतः पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (KOH) का उपयोग किया जाता है। | (2) इन्हें बनाने में सामान्यतः सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) का उपयोग किया जाता है। |
| (3) ये अपेक्षाकृत मुलायम या अर्द्ध-द्रव प्रकृति के होते हैं। | (3) ये सामान्यतः ठोस तथा कठोर होते हैं। |
| (4) उदाहरण—पोटैशियम ओलिएट आधारित मृदु साबुन। | (4) उदाहरण—सोडियम स्टीयरेट आधारित कठोर साबुन। |
प्रश्न 15. घर्षण बल किसे कहते हैं? दैनिक जीवन में घर्षण बल का क्या महत्त्व है? उदाहरण देते हुए समझाइए।
उत्तर: दो सम्पर्क सतहों के बीच होने वाली सापेक्ष गति अथवा सापेक्ष गति की प्रवृत्ति का विरोध करने वाले बल को घर्षण बल कहते हैं। यह सम्पर्क सतह के समान्तर तथा गति या संभावित गति की विपरीत दिशा में कार्य करता है।
दैनिक जीवन में घर्षण का महत्त्व—
- घर्षण के कारण हम जमीन पर बिना फिसले चल पाते हैं।
- टायर और सड़क के बीच घर्षण के कारण वाहन चल पाते हैं।
- ब्रेक में घर्षण के कारण वाहनों को धीमा या रोका जा सकता है।
- घर्षण के कारण हम वस्तुओं को हाथ से पकड़ पाते हैं।
- पेंसिल या कलम और कागज के बीच घर्षण के कारण लिखना सम्भव होता है।
हालाँकि अत्यधिक घर्षण से मशीनों के भाग घिसते हैं तथा ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है।
प्रश्न 16. पदार्थों के पृथक्करण से आप क्या समझते हैं? आसवन तथा अपकेन्द्रण विधियों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर: किसी मिश्रण में उपस्थित विभिन्न घटकों को उनके भौतिक गुणों के आधार पर अलग करने की प्रक्रिया को पदार्थों का पृथक्करण कहते हैं।
आसवन : इस विधि में द्रव को गर्म करके वाष्प में परिवर्तित किया जाता है और फिर वाष्प को ठंडा करके पुनः द्रव में संघनित किया जाता है। इसका उपयोग किसी विलयन से शुद्ध द्रव प्राप्त करने अथवा पर्याप्त भिन्न क्वथनांक वाले मिश्रणीय द्रवों को पृथक करने में किया जाता है।
उदाहरण : नमक के विलयन से शुद्ध जल प्राप्त करना।
अपकेन्द्रण : किसी मिश्रण को तीव्र गति से घुमाकर उसके अलग-अलग घनत्व वाले घटकों को पृथक करने की प्रक्रिया अपकेन्द्रण कहलाती है।
उदाहरण : दूध से क्रीम अथवा दही से मक्खन अलग करना।
प्रश्न 17. सरल एवं संयुक्त पत्ती में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: सरल एवं संयुक्त पत्ती में प्रमुख अन्तर निम्नलिखित हैं—
| सरल पत्ती | संयुक्त पत्ती |
|---|---|
| (1) इसमें एक ही पर्णफलक होता है। | (1) इसका पर्णफलक अनेक छोटे-छोटे पर्णकों में विभाजित होता है। |
| (2) यदि पर्णफलक में कटाव हो भी तो वह मध्यशिरा या पर्णवृन्त तक नहीं पहुँचता। | (2) पर्णफलक का कटाव मध्यशिरा या मुख्य अक्ष तक पहुँचकर अलग-अलग पर्णकों का निर्माण करता है। |
| (3) पत्ती के आधार के कक्ष में कक्षीय कली पाई जाती है। | (3) कक्षीय कली पूरी संयुक्त पत्ती के आधार पर होती है; प्रत्येक पर्णक के आधार पर कक्षीय कली नहीं होती। |
| (4) उदाहरण—आम, अमरूद, पीपल। | (4) उदाहरण—नीम, गुलमोहर, बबूल। |
प्रश्न 18. पुष्प को परिभाषित करते हुए इसके विभिन्न भागों का नामांकित चित्र बनाइए।
उत्तर: पुष्प आवृतबीजी पौधों का लैंगिक जनन अंग है। इसे सीमित वृद्धि वाला रूपान्तरित प्ररोह माना जाता है। एक पूर्ण पुष्प में सामान्यतः बाह्यदलपुंज, दलपुंज, पुमंग और जायांग चार प्रमुख पुष्पीय चक्र पाए जाते हैं।
पुष्प के प्रमुख भाग—
- बाह्यदलपुंज : बाह्यदलों से बना पुष्प का सबसे बाहरी चक्र, जो कली की रक्षा करता है।
- दलपुंज : पंखुड़ियों से बना चक्र, जो सामान्यतः रंगीन होता है और परागणकर्ताओं को आकर्षित करता है।
- पुमंग : पुंकेसरों का समूह तथा पुष्प का नर जनन भाग। प्रत्येक पुंकेसर में सामान्यतः पुंतंतु और परागकोष होते हैं।
- जायांग : पुष्प का मादा जनन भाग। इसमें वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय होते हैं तथा अंडाशय के भीतर बीजांड पाए जाते हैं।
Semester 1 की Complete तैयारी
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