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PYQ 2019 • आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास

आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Paper 2019

UP DELED Semester 4 आरम्भिक स्तर पर भाषा एवं गणित के पठन लेखन-क्षमता का विकास Previous Year Question Paper 2019 with solution.

Section 1 वस्तुनिष्ठ प्रश्न

वस्तुनिष्ठ प्रश्न

प्रश्न 1. निम्नलिखित में से स्वर नहीं है -

(a) अ

(b) ई

(c) ऊ

(d) ञ

उत्तर: (d) : हिन्दी वर्णमाला में 11 स्वर हैं। अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। अतः ञ स्वर नहीं है।

प्रश्न 2. 'क्ष' वर्ण किन दो वर्णों के मिश्रण से बना है?

(a) क् + श्

(b) च् + छ

(c) क् + ष्

(d) छ + अ

उत्तर: (c) : 'क्ष' एक संयुक्ताक्षर अर्थात एक संयुक्त व्यंजन है जो 'क्ष' वर्ण 'क् + ष्' दो वर्षों के मिश्रण से बना है।

प्रश्न 3. निम्नलिखित में 'अयोगवाह' है -

(a) अ, आ

(b) इ, ई

(c) अं, अः

(d) ए, ऐ

उत्तर: (c) : अं, अः अयोगवाह कहलाते हैं। अं को अनुस्वर तथा अः को विसर्ग कहा जाता है। अयोगवाह में स्वर एवं व्यंजन दोनों के गुण पाए जाते हैं।

प्रश्न 4. वाक्य के गुण होते हैं -

(a) सार्थकता

(b) क्रमबद्धता

(c) योग्यता

(d) उपर्युक्त सभी

उत्तर: (d) : वाक्य के गुण-

  1. सार्थकता
  2. क्रमबद्धता
  3. योग्यता
  4. उद्देश्य
  5. संयोजन
  6. मेल

प्रश्न 5. श्वास के आधार पर व्यंजनों का वर्गीकरण होता है-

(a) सघोष एवं अघोष

(b) अनुस्वार एवं अनुनासिक

(c) स्पर्श एवं ऊष्म

(d) अल्पप्राण एवं महाप्राण

उत्तर: (d) : श्वास के आधार पर व्यंजनों का वर्गीकरण दो प्रकार के होते हैं-

  1. अल्पप्राण- जिन वर्णों के उच्चारण में मुख से कम श्वास निकलें उन्हें अल्पप्राण कहते हैं।
  2. महाप्राण- जिन वर्णों के उच्चारण में मुख से अधिक श्वास निकलें, उन्हें महाप्राण कहते हैं।

प्रश्न 6. उत्क्षिप्त वर्ण हैं -

(a) य, व

(b) ढ़, ड़

(c) ड, ढ

(d) ट, ठ

उत्तर: (b) : उत्क्षिप्त वर्ण हैं ढ़, ड़। उत्क्षिप्त का अर्थ होता है फेंका हुआ। अर्थात् जिन व्यंजन वर्णों का उच्चारण करते समय जीभ का अग्रभाग (नोक) एक झटके के साथ नीचे गिरता हो उन्हें उत्क्षिप्त व्यंजन कहते हैं। उत्क्षिप्त व्यंजन की संख्या दो होती है। ड़ और ढ़ को उत्क्षिप्त व्यंजन कहते है।

प्रश्न 7. 'मुझसे बैठा नहीं जाता' उदाहरण है -

(a) कर्तृवाच्य का

(b) कर्मवाच्य का

(c) भाववाच्य का

(d) विधिवाच्य का

उत्तर: (c) : भाववाच्य जिसमें ना कर्ता प्रधान है और ना ही कर्म ही प्रधान हो, क्रिया ही मुख्य रूप से प्रधान हो भाववाच्य कहलाता है। जैसे- राम खाना खाता है। उदाहरण: अब चला नहीं जाता। मुझसे बैठा नहीं जाता।

प्रश्न 8. भाषा का भेद है -

(a) लिखित

(b) मौखिक

(c) 'a' एवं 'b' दोनों

(d) इनमें से कोई नहीं

उत्तर: (c) : भाषा के तीन भेद होते हैं।

  1. कथित या मौखिक भाषा
  2. लिखित भाषा
  3. सांकेतिक भाषा

प्रश्न 9. किसी वाक्य की पूर्णता पर विराम चिह्न लगता है-

(a) अल्प विराम चिह्न

(b) पूर्ण विराम चिह्न

(c) प्रश्नवाचक चिह्न

(d) लाघव चिह्न

उत्तर: (b) : किसी वाक्य की पूर्णता पर पूर्ण विराम चिन्ह (।) लगता है। हिन्दी में इसे 'खड़ी पाई' भी कहते हैं।

प्रश्न 10. बिना सोचे-समझे अधिक खर्च करने वाले के लिए एक शब्द है-

(a) कृपण

(b) कंजूस

(c) अपव्ययी

(d) मितव्ययी

उत्तर: (c) : बिना सोचे समझे अधिक खर्च करने वाले को अपव्ययी कहते हैं तथा कम खर्च करने वाले को मितव्ययी कहते हैं।

प्रश्न 11. किसी संख्या के दाहिनी ओर शून्य रखने पर वह संख्या बढ़ जाती है-

(a) 10 गुना

(b) 20 गुना

(c) 2 गुना

(d) 5 गुना

उत्तर: (a) : किसी संख्या के दाहिनी ओर शून्य रखने पर वह संख्या 10 गुना बढ़ जाती है।

प्रश्न 12. तीन अंकों की सबसे बड़ी संख्या होती है-

(a) 100

(b) 299

(c) 999

(d) 998

उत्तर: (c) : तीन अंको की सबसे बड़ी संख्या होती है 999।

प्रश्न 13. 3478 में सैंकड़े वाली संख्या है-

(a) 7

(b) 8

(c) 4

(d) 3

उत्तर: (c) : संख्या 3478 में संख्या 8 इकाई स्थान पर, संख्या 7 दहाई स्थान पर तथा संख्या 4 सैकड़ा स्थान पर है।

प्रश्न 14. दस तक के अंको में सबसे छोटा अंक है-

(a) 1

(b) 0

(c) 2

(d) 3

उत्तर: (b) : 1 सबसे छोटी प्राकृतिक संख्या है। 0 सबसे छोटी पूर्ण संख्या है।

प्रश्न 15. निम्नलिखित में शुद्ध शब्द है-

(a) अन्ताक्षरी

(b) अन्त्याक्षरी

(c) अन्तक्षरी

(d) अनताक्षरी

उत्तर: (b) : अन्त्याक्षरी

Section 2 अति लघु उत्तरीय प्रश्न

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 16. लेखन किसे कहते है?

उत्तर: लेखन - लेखन का शाब्दिक अर्थ है- 'लिखना' अपने भावों/विचारों की अभिव्यक्ति लिपि के माध्यम से करना ही लिखना है। प्रारम्भिक स्तर पर भाषा की दक्षताओं में लेखन का स्थान, सुनने, बोलने तथा पढ़ने के बाद आता है। जो कुछ भी हम बोलते हैं उसे प्रतीकों (अक्षरों) के रूप में व्यक्त करना ही लेखन कहलाता है।

प्रश्न 17. पठन कौशल के दो बाधक तत्व बताइए।

उत्तर: पठन कौशल के दो बाधक तत्व-

  1. व्याकरणिक और भाषाई क्षमता का अभाव।
  2. कभी-कभी पाठक जो पढ़ रहा है उसमें उसकी दिलचस्पी या रूचि नहीं होती है।

प्रश्न 18. उच्चारण में लगने वाले समय के आधार पर स्वरों के भेद बताइए।

उत्तर: उच्चारण में लगने वाले समय (मात्रा) के आधार पर स्वरों के तीन भेद होते हैं-

  1. ह्रस्व स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में एक मात्रा का समय लगता है। उन्हें हस्व स्वर कहते हैं। इनकी संख्या 4 होती हैं- अ, इ, उ, तथा ऋ।
  2. दीर्घ स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में दो मात्रा का समय लगता है। उन्हें दीर्घ स्वर कहते हैं इनकी संख्या 7 होती है- आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ तथा औ।
  3. प्लुत स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर से तीन गुना समय लगता है, उन्हें प्लुत स्वर कहते हैं। जैसे :- ओड्म आदि। इसका प्रयोग संस्कृत में होता है।

प्रश्न 19. अन्तस्थ वर्ण कौन-कौन से हैं?

उत्तर: अन्तस्थ वर्ण - जो वर्ण स्वर और व्यंजनों के मध्य होते हैं, उन्हें अन्तस्थ वर्ण कहते हैं। अन्तस्थ व्यंजनों की संख्या 4 है य, र, ल, व।

प्रश्न 20. समानार्थी शब्द किसे कहते हैं?

उत्तर: समानार्थी शब्द - समान अर्थ बताने वाले शब्दों को समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहते हैं।
जैसेः सूर्य का पर्यायवाची आदित्य, भानु, भास्कर आदि।
पानी का पर्यायवाची जल, नीर, वारि आदि।

प्रश्न 21. अर्द्धविराम चिह्न को परिभाषित कीजिए।

उत्तर: अर्द्धविराम का प्रयोग अल्प विराम की अपेक्षा अधिक समय तक ठहरने के लिए करते हैं।
अथवा
जब किसी वाक्य को कहते हुए बीच में हल्का सा विराम लेना हो पर वाक्य को खत्म न किया जाये तो वहाँ पर अर्द्धविराम (;) चिंह का प्रयोग किया जाता है।
जैसेः- अर्जुन बहुत अच्छा लड़का है लेकिन उसकी संगत ठीक नहीं है।

प्रश्न 22. 'रबीन्द्रनाथ ने शान्तिनिकेतन की स्थापना की' इस वाक्य को कर्मवाच्य में परिवर्तित कीजिए।

उत्तर: रबीन्द्र नाथ द्वारा शान्ति निकेतन की स्थापना हुई।

प्रश्न 23. मूर्धन्य वर्ण कौन-से हैं?

उत्तर: मूर्धन्य वर्ण - जिन वर्णों का उच्चारण मूर्द्धा से होता है।, उन्हें मूर्धन्य वर्ण कहते हैं। मूर्धन्य वर्ण ट्, ठ्, ड्, ढ्, ण, (ट वर्ग), ऋ, र, ष् है।

प्रश्न 24. दीर्घ स्वर किसे कहते हैं?

उत्तर: दीर्घ स्वर - जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर से दुगुना समय लगता है, उन्हें दीर्घ स्वर कहते है। आ, ई, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ दीर्घ स्वर के उदाहरण है।

प्रश्न 25. योजक चिह्न लगाते हुए दो उदाहरण लिखिए।

उत्तर: योजक चिन्ह को 'विभाजक चिह्न भी कहते हैं। दो शब्दों में परस्पर संबंध स्पष्ट करने के लिए तथा उन्हें जोड़कर लिखने के लिए योजक चिंह का प्रयोग किया जाता है।
जैसेः सुख-दुखः, स्त्री-पुरूष, माता-पिता, तन-मन आदि।

प्रश्न 26. ऊष्म व्यंजन किसे कहते हैं?

उत्तर: ऊष्म व्यंजन - जिन वर्णों के उच्चारण में हवा मुख से रगड़ खाती हुई धीरे-धीरे बाहर निकलती है, उन्हें उष्म व्यंजन कहते हैं।
जैसे : स, श, ष, ह।

प्रश्न 27. संख्या 636 में दोनों 6 के स्थानीय मान का अन्तर ज्ञात कीजिए।

उत्तर: संख्या 636 में दोनों 6 के स्थानीय मान का अन्तर :
636
सै. द. ई.
6 x 100 = 600
6 x 1 = 6
अतः संख्या 636 में 6 के दोनों स्थानीय मान का अंतर 600 - 6 = 594 होगा।

प्रश्न 28. शून्य को किसी संख्या से गुणा करने पर गुणनफल क्या आता है?

उत्तर: शून्य को किसी संख्या से गुणा करने पर गुणनफल शून्य आता है।
उदाहरण- 0 x 1 = 0, 0 x 2 = 0

प्रश्न 29. 48 सेब चार बच्चों में बाँटे गए, प्रत्येक बच्चे को कितने सेब मिले ?

उत्तर:
द. इ.
4 ) 48 ( 12
- 4
8
- 8
0
अतः प्रत्येक बच्चे को 12 सेब मिलें।

प्रश्न 30. निम्नलिखित को अवरोही क्रम में लिखिए- 6,3,8,5,9,7

उत्तर: अवरोही क्रम - जब हम संख्याओं को सबसे बड़े से छोटे के क्रम में व्यवस्थित करते हैं तो उसे अवरोही क्रम कहते हैं।
अवरोही क्रम 9, 8, 7, 6, 5, 3

Section 3 लघु उत्तरीय प्रश्न

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 31. आरम्भिक भाषा कौशल कौन-कौन से हैं?

उत्तर: भाषा कौशल - वह कौशल जिसके माध्यम से बच्चे भाषा सीखते हैं तथा भाषा का शुद्ध-शुद्ध उपयोग करते हैं, भाषा कौशल कहलता है।
भाषा कौशल के 4 प्रकार है -

  1. श्रवण कौशल
  2. वाचन कौशल
  3. पठन कौशल
  4. लेखन कौशल

(1) श्रवण कौशल - श्रवण कौशल का संबंध सुनने से है। सुनना एक प्रकृति प्रदत्त शक्ति है। जिस व्यक्ति की श्रवणेन्द्रियाँ ठीक नहीं होती है वह कभी-कभार अर्थ का अनर्थ सुन लेता है। सामान्यतः श्रवण का अर्थ किसी ध्वनि, बातचीत वाद्य संगीत आदि के सुनने से लिया जाता है, किन्तु यह सुनने का बहुत सीमित अर्थ है। श्रवण का अर्थ ध्वनियों का सुनना मात्र नहीं है। अपितु आचरण या व्यवहार करने जैसी जटिल प्रक्रियाएँ सम्मिलित है। विद्यालय में भी विद्यार्थियों का लगभग आधा समय सुनने में लगता है। श्रवण केवल शरीरिक क्रिया नहीं अपितु एक मानसिक क्रिया है। बालकों को अच्छा श्रोता बनाना श्रवण कौशल का प्रमुख उद्देश्य है।
(2) वाचन कौशल - किसी लिखित सामग्री का पढ़ना ही वाचन कौशल कहलाता है। ल्यूइस के अनुसार "वाचन एक साधन है, जिसके माध्यम से बालक सम्पूर्ण मानवता के द्वारा संचित ज्ञान राशि से परिचित हो सकता है।"
(3) पठन कौशल - पठन कौशल के संबंध पढ़ने से है। पठन कौशल का अर्थ भाषा कौशल उच्चारित करना और उसका अर्थ ग्रहण करने से है। पठन कौशल सभी विषय के ज्ञानार्जन में सहायक होता है।
(4) लेखन कौशल - लेखन कौशल का संबंध 'लिखना' से है। लेखन कौशल के माध्यम से छात्र अपने मनोभाव को लिखकर व्यक्त कर सकते हैं। लेखन कौशल में बालक व्याकरण के नियम, प्रतीक, विराम, चिंह, मात्रा इत्यादि का प्रयोग करना सीखते हैं।

प्रश्न 32. देवनागरी लिपि की विशेषताएँ लिखिए।

उत्तर: देवनागरी लिपि की विशेषताएँ निम्न प्रकार है-

  1. देवनागरी लिपि का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है।
  2. देवनागरी लिपि एक ध्वन्यात्मक लिपि है, जिसका अर्थ है कि प्रत्येक अक्षर एक ध्वनि से मेल खाता है।
  3. देवनागरी लिपि बायें से दायें लिखी जाती है।
  4. देवनागरी लिपि का उपयोग संस्कृत, हिंदी और मराठी सहित कई भाषाओं को लिखने के लिए किया जाता है।
  5. देवनागरी लिपि एक वैज्ञानिक लिपि है।
  6. देवनागरी लिपि में कुल 52 वर्ण होते हैं।
  7. देवनागरी लिपि लिखने में आसान है।

प्रश्न 33. घोष एवं अघोष ध्वनियों में अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: घोष एवं अघोष ध्वनियों में अन्तर-

  • घोष - जिन वर्षों के उच्चारण में स्वरतंत्रियों में कंपन होता है, उन्हें सघोष या घोष कहते हैं।
    घोष का उदाहरण : जैसे-
    (1) सभी स्वर
    (2) प्रत्येक वर्ग का तृतीय, चतुर्थ और पंचम।
    (3) अंतःस्थ और ह।
  • अघोष - जिन वर्णों के उच्चारण में स्वरतंत्रियों में कंपन नहीं होता हैं, उन्हें अघोष कहते हैं।
    अघोष का उदाहरण : जैसे-
    (1) प्रत्येक वर्ग का प्रथम तथा द्वितीय
    (2) श, ष और स।

प्रश्न 34. शुद्ध उच्चारण अभ्यास हेतु कक्षा शिक्षक में किए जाने वाले प्रयोग बताइए।

उत्तर: शुद्ध उच्चारण अभ्यास हेतु कक्षा शिक्षण में किए जाने वाले उपाय निम्न है -

  1. शुद्ध उच्चारण के साथ पढ़कर विद्यार्थियों को बताना चाहिए तथा उनसे भी उच्चारण करवाना चाहिए।
  2. प्रतिभागी यदि किसी शब्द का शुद्ध उच्चारण करने में असमर्थ हो तो उस शब्द का खण्ड-खण्ड उच्चारण अभ्यास करना चाहिए।
  3. ऋ, श, ष, ज्ञ वर्णों से बने शब्दों के शुद्ध उच्चारण का अभ्यास कराया जाए।
  4. ध्वनियों के उच्चारण स्थान से परिचित कराकर उसी के अनुसार उच्चारण अभ्यास कराया जाए।
  5. ड, ढ के उच्चारण का अभ्यास कराया जाये।
  6. आदर्श उच्चारण के उदाहरण श्रव्य सहायक सामग्री जैसे टेप- रिकॉर्डर की सहायता से भी प्रस्तुत किये जा सकते हैं।
  7. संयुक्ताक्षरों के उच्चारण पर ध्यान दिया जाये जैसे- ज्ञानी ज्ञ = ज् + ञ

प्रश्न 35. छात्रों की वर्तनी सम्बन्धी त्रुटि निवारण के उपाय बताइए।

उत्तर: वर्तनी की अशुद्धियाँ सुधारने के उपाय-

  1. कक्षा में शिक्षक शुद्ध उच्चारण करें।
  2. छात्रों से शुद्ध उच्चारण का अभ्यास करवाना।
  3. श्रुत लेख लिखवाना।
  4. लिखते समय सावधान रहना।
  5. समान उच्चारण वाले अक्षरों के अन्तर समझाना।
  6. अशुद्ध शब्दों को अनेक बार लिखवाकर अभ्यास कराना।
  7. सुलेख का अभ्यास करना।
  8. कक्षा में खड़ी भाषा का प्रयोग कराना।

प्रश्न 36. श्रुतलेख एवं अनुलेख के अन्तर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: श्रुतलेख एवं अनुलेख के अन्तर -
श्रुतलेख - सुलेख अथवा श्रुतलेख को अंग्रेजी भाषा में डिक्टेशन कहा जाता है। श्रुतलेख सुनकर लिखा जाता है। अध्यापक बोलता जाता है और छात्र उसे लिखते जाते हैं। श्रुतलेख का उद्देश्य हिज्जे दुरस्त करना तथा लिखने में तीव्रता का विकास करना होता है।
अनुलेख - अनुलेख का शाब्दिक अर्थ है जैसा पहले से लिखा है वैसा ही लिखना। अनुलेख के अन्तर्गत बच्चा उसी प्रकार लिखता है। जैसे सुलेख में अध्यापक ने लिखा हो। अनुलेख में भाषा-शिक्षण का लेख भी सुन्दर तथा स्पष्ट होना चाहिए।

प्रश्न 37. विस्मयादिबोधक चिह्न किसे कहते हैं? सोदाहरण बताइए।

उत्तर: विस्मयादिबोधक चिंह या संबोधन सूचक (!) - ऐसे शब्द जो वाक्य में हर्ष, विषाद, घृणा, आश्चर्य, भय, आज्ञा आदि भाव व्यक्त करने के लिए प्रयुक्त हो, वे विस्मयादिबोधक कहलाते हैं।
जैसेः- आह ! उसे कितना दुःख हो रहा है। (विषाद), इतनी लम्बी दीवार (आश्चर्य) आदि। इसका प्रयोग सम्बोधन के लिए; जैसे अध्यक्ष महोदय ! अब हमारी बात सुनिए।
विस्मयादिबोधक या संबोधक सूचक चिह्न वाक्य के अंत में प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 38. संख्या किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: संख्या - वे गणितीय वस्तुएँ जिनका उपयोग गिनने, मापने और नामकरण करने के लिए किया जाता है उन्हें संख्या कहते हैं। अंकों से मिलकर संख्या बनती है। अंकगणित में कुल 10 संख्याएँ (0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9) होती है। जिनकी मदद से बड़ी-बड़ी संख्याएँ बनती है। शून्य को पूर्ण संख्या माना गया है।
जैसे; 8032, 153, 123 आदि।

प्रश्न 39. गणित की संक्रियाओं में शून्य का महत्व स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: गणित की संक्रियाओं में शून्य का महत्व -
शून्य (0) एक अंक है जो संख्याओं की निरूपण के लिये प्रयुक्त आज की सभी स्थानीय मान पद्धतियों का अपरिहार्य प्रतीक है। इसके अलावा यह एक संख्या भी है। दोनों रूपों में गणित में इसकी अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका है। अतः शून्य वह संख्या है जो किसी राशि या किसी वस्तु का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। शून्य और प्राकृतिक संख्याएँ मिलकर पूर्ण संख्याएँ कहलाती है शून्य को प्रतीक "0" द्वारा दर्शाया जाता है। शून्य एक परिमेय संख्या है। प्रसिद्ध भारतीय गणितज्ञ आर्यभट्ट ने 'शून्य' की खोज की थी।
महत्व -

  1. शून्य का योग गुणः जब भी किसी पूर्ण संख्या में शून्य जोड़ा जाता है, तो योग एक पूर्ण संख्या होगी। उदाहरण: 0 + 3 = 3, 3 + 0 = 3
  2. घटाव गुणः जब भी किसी पूर्ण संख्या में से शून्य घटाया जाता तो अंतर पूर्ण संख्या होगा और जब भी किसी पूर्ण संख्या में से शून्य घटाया जाता है, तो अंतर शून्य होगा। उदाहरण: 3 - 0 = 3
  3. गुणन गुण: किसी संख्या में 0 से गुणा करने पर शून्य (0) ही प्राप्त होता है। उदाहरण: 0 x 3 = 3 x 0 = 0

प्रश्न 40. दो अंकों वाली संख्या को दो अंकों वाली संख्या से किस प्रकार गुणा किया जाता है? उदाहरण के द्वारा समझाइए।

उत्तर:
उदाहरण : 20 को 21 से गुणा करो।
सै. द. इ.
20
x 21
20
40 x
420
उत्तर = 420
क्रिया -
20 को पहले 1 इकाई से गुणा किया। 20 x 1 = 20 को पहली पंक्ति में लिखो।
फिर 20 को 2 दहाई से गुणा किया। 20 x 2 = 40
इकाई के स्थान पर गुणा (x) लगाकर संख्या को दूसरे लाइन में लिखो।
अन्त में दोनों पंक्तियों का योग कर दिया जो 420 आया।

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