वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. संस्कृत में माहेश्वर सूत्रों की संख्या है—
(a) 8
(b) 12
(c) 10
(d) 14
उत्तर: (d) : संस्कृत व्याकरण में माहेश्वर सूत्रों की संख्या 14 है। इन सूत्रों के आधार पर विभिन्न प्रत्याहारों का निर्माण किया जाता है।
प्रश्न 2. 'ट' का उच्चारण स्थान है—
(a) कण्ठ
(b) तालु
(c) मूर्धा
(d) ओष्ठ
उत्तर: (c) : 'ट' वर्ण का उच्चारण स्थान मूर्धा है। सूत्र—ऋटुरषाणां मूर्धा। इसके अन्तर्गत ऋ, ॠ, टवर्ग तथा ष वर्ण आते हैं।
प्रश्न 3. कौन-सा शब्द नपुंसकलिङ्ग है?
(a) बालक
(b) नदी
(c) एतत्
(d) विद्यालय
उत्तर: (c) : एतत्, 'एतद्' सर्वनाम का नपुंसकलिङ्ग रूप है। 'बालक' और 'विद्यालय' पुल्लिङ्ग तथा 'नदी' स्त्रीलिङ्ग शब्द है।
प्रश्न 4. 'रमेशः' में कौन-सी सन्धि है?
(a) दीर्घ सन्धि
(b) गुण सन्धि
(c) वृद्धि सन्धि
(d) यण् सन्धि
उत्तर: (b) : 'रमेशः' में गुण सन्धि है। इसका सन्धि-विच्छेद है—रमा + ईशः = रमेशः। अ अथवा आ के बाद इ अथवा ई आने पर दोनों के स्थान पर ए हो जाता है।
प्रश्न 5. 'राजपुरुषः' में कौन-सा समास है?
(a) तत्पुरुष समास
(b) कर्मधारय समास
(c) अव्ययीभाव समास
(d) बहुब्रीहि समास
उत्तर: (a) : 'राजपुरुषः' में षष्ठी तत्पुरुष समास है। इसका विग्रह है—राज्ञः पुरुषः = राजपुरुषः।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. 'दीर्घ सन्धि' का सूत्र लिखकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: दीर्घ सन्धि का सूत्र है—अकः सवर्णे दीर्घः। सवर्ण स्वरों के मिलने पर उनके स्थान पर उसी वर्ण का दीर्घ स्वर हो जाता है; जैसे—विद्या + आलयः = विद्यालयः।
प्रश्न 7. 'नदी' शब्द के प्रथमा विभक्ति के तीनों वचनों के रूप लिखिए।
उत्तर: प्रथमा विभक्ति में—नदी (एकवचन), नद्यौ (द्विवचन), नद्यः (बहुवचन)।
प्रश्न 8. 'उन्नीस' संख्या को संस्कृत में लिखिए।
उत्तर: उन्नीस को संस्कृत में एकोनविंशतिः कहते हैं।
प्रश्न 9. 'नमः' के योग में कौन-सी विभक्ति लगती है?
उत्तर: 'नमः' के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है; जैसे—गणेशाय नमः।
प्रश्न 10. 'पठ्' धातु के लोट् लकार में प्रथम पुरुष के रूप लिखिए।
उत्तर: प्रथम पुरुष में—पठतु (एकवचन), पठताम् (द्विवचन), पठन्तु (बहुवचन)।
प्रश्न 11. 'चौमासा' में कौन-सा समास है?
उत्तर: 'चौमासा' में द्विगु समास है। इसका विग्रह है—चार मासों का समाहार।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. 'कृ' धातु का लृट् लकार का रूप लिखिए।
उत्तर:
| पुरुष | एकवचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| प्रथम पुरुष | करिष्यति | करिष्यतः | करिष्यन्ति |
| मध्यम पुरुष | करिष्यसि | करिष्यथः | करिष्यथ |
| उत्तम पुरुष | करिष्यामि | करिष्यावः | करिष्यामः |
प्रश्न 13. 11 से 20 तक की गिनती संस्कृत में लिखिए।
उत्तर:
- 11 — एकादश
- 12 — द्वादश
- 13 — त्रयोदश
- 14 — चतुर्दश
- 15 — पञ्चदश
- 16 — षोडश
- 17 — सप्तदश
- 18 — अष्टादश
- 19 — एकोनविंशतिः
- 20 — विंशतिः
प्रश्न 14. निम्नलिखित श्लोक का हिन्दी में अर्थ लिखिए—
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः।
तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।।
उत्तर: प्रिय वचन बोलने से सभी प्राणी प्रसन्न होते हैं। इसलिए सदैव प्रिय वचन ही बोलने चाहिए। मधुर वचन बोलने में किसी प्रकार का धन व्यय नहीं होता, अतः वाणी में दरिद्रता क्यों दिखाई जाए।
प्रश्न 15. उपसर्ग एवं प्रत्यय का अन्तर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर: उपसर्ग और प्रत्यय दोनों शब्द-निर्माण में सहायक होते हैं, किन्तु इनके प्रयोग का स्थान और कार्य भिन्न होता है—
| उपसर्ग | प्रत्यय |
|---|---|
| उपसर्ग धातु के पूर्व जुड़ता है। | प्रत्यय धातु या प्रातिपदिक के अन्त में जुड़ता है। |
| उपसर्ग धातु के अर्थ में परिवर्तन अथवा विशेषता उत्पन्न करता है। | प्रत्यय जुड़कर नया शब्द अथवा नया व्याकरणिक रूप बनाता है। |
| उदाहरण— अनु + गम् = अनुगच्छति | उदाहरण— गम् + क्त्वा = गत्वा |
| उदाहरण— आ + गम् = आगच्छति | उदाहरण— कृ + तव्य = कर्तव्यम् |
प्रश्न 16. शिक्षण-अधिगम में श्रव्य एवं दृश्य उपकरणों को सोदाहरण समझाइए।
उत्तर: शिक्षण-अधिगम को सरल, स्पष्ट और रुचिकर बनाने के लिए श्रव्य एवं दृश्य उपकरणों का प्रयोग किया जाता है।
1. श्रव्य उपकरण— जिन साधनों के माध्यम से विद्यार्थी सुनकर ज्ञान प्राप्त करते हैं, उन्हें श्रव्य उपकरण कहते हैं।
- रेडियो
- ऑडियो रिकॉर्डिंग
- टेप रिकॉर्डर
- भाषा-प्रयोगशाला
इनका उपयोग शुद्ध उच्चारण, श्लोक-पाठ, संवाद तथा श्रवण-कौशल के विकास में किया जाता है।
2. दृश्य उपकरण— जिन साधनों को देखकर विद्यार्थी विषय-वस्तु को समझते हैं, उन्हें दृश्य उपकरण कहते हैं।
- श्यामपट्ट
- चित्र एवं छायाचित्र
- चार्ट
- मानचित्र
- मॉडल एवं फ्लैश कार्ड
इनसे शब्दार्थ, व्याकरणिक नियम तथा विषय-वस्तु को अधिक स्पष्ट और स्थायी रूप से समझने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 17. यण् सन्धि की सूत्र के माध्यम से सोदाहरण व्याख्या कीजिए।
उत्तर: यण् सन्धि का सूत्र है—इको यणचि। जब इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ अथवा लृ के बाद कोई असवर्ण स्वर आता है, तो इनके स्थान पर क्रमशः य्, व्, र् और ल् हो जाते हैं।
- इ/ई → य् : अभि + उदयः = अभ्युदयः
- उ/ऊ → व् : सु + आगतम् = स्वागतम्
- ऋ/ॠ → र् : पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा
अतः यण् सन्धि में इक् वर्णों के स्थान पर यण् वर्णों का आदेश होता है।
प्रश्न 18. संस्कृत में कारक कितने होते हैं? नाम सहित लिखिए।
उत्तर: क्रिया के साथ जिसका प्रत्यक्ष सम्बन्ध होता है, उसे कारक कहते हैं। संस्कृत में कारकों की संख्या छः है—कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान तथा अधिकरण।
| कारक | सामान्य विभक्ति | सामान्य हिन्दी चिह्न |
|---|---|---|
| कर्ता | प्रथमा | ने / कर्ता |
| कर्म | द्वितीया | को |
| करण | तृतीया | से, के द्वारा |
| सम्प्रदान | चतुर्थी | को, के लिए |
| अपादान | पञ्चमी | से, अलग होने के अर्थ में |
| अधिकरण | सप्तमी | में, पर |
उदाहरण— बालकः विद्यालये पठति। यहाँ 'बालकः' कर्ता तथा 'विद्यालये' अधिकरण कारक है। सम्बन्ध (षष्ठी) और सम्बोधन को संस्कृत में कारक नहीं माना जाता, क्योंकि उनका क्रिया से प्रत्यक्ष सम्बन्ध नहीं होता।
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