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Home Study Material Semester 1 संस्कृत संज्ञा, लिंग एवं वचन की जानकारी
Chapter 2 • संस्कृत

संज्ञा, लिंग एवं वचन की जानकारी

UP DELED Semester 1 के संस्कृत विषय के इस अध्याय में संज्ञा का अर्थ, उद्देश्य एवं भेद, लिंग का अर्थ एवं प्रकार, पुल्लिंग, स्त्रीलिंग, नपुंसकलिंग तथा वचन का अर्थ, प्रकार एवं इनसे सम्बन्धित शिक्षण गतिविधियों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

7
Topics
15
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10+
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Notes
Topic 1 संज्ञा—ज्ञान, अर्थ एवं उद्देश्य

संज्ञा—ज्ञान, अर्थ एवं उद्देश्य

संज्ञा का ज्ञान

बालक अपने आस-पास की वस्तुओं, व्यक्तियों तथा पशु-पक्षियों के नामों से सामान्य रूप से परिचित होते हैं। इसलिए उनमें संज्ञा का प्रारम्भिक ज्ञान पहले से मौजूद रहता है, लेकिन संज्ञा के व्याकरणिक स्वरूप को समझाने के लिए शिक्षक को योजनाबद्ध रूप से अभ्यास कराना आवश्यक होता है।

शिक्षक कक्षा में उपस्थित वस्तुओं के नाम पूछ सकता है तथा चित्रों की सहायता से विभिन्न वस्तुओं, स्थानों और पशु-पक्षियों के नाम बताकर संज्ञा की समझ विकसित कर सकता है। इससे विद्यार्थी शब्दों को सही रूप में पहचानना और उनका प्रयोग करना सीखते हैं।

बालकों को संज्ञा का ज्ञान कराने के उद्देश्य

  1. बालकों में संज्ञा की समझ विकसित करना।
  2. विभिन्न परिस्थितियों में संज्ञा के शब्दों को स्पष्ट रूप से पहचानने का ज्ञान प्रदान करना।
  3. संज्ञा के माध्यम से बालकों के संस्कृत ज्ञान को बढ़ाना।
  4. बालकों में संस्कृत वाक्य-कौशल का विकास करना।
  5. बालकों को संज्ञा के विभिन्न स्वरूपों से परिचित कराना।

संज्ञा का अर्थ

किसी प्राणी, व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, जाति, भाव या दशा आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं।

संज्ञा को समझने के लिए पुस्तक में विभिन्न प्रकार के नामों के अनेक उदाहरण दिए गए हैं—

1. प्राणी / व्यक्ति का नाम

हाथी, घोड़ा, बकरी, गाय, उल्लू, कबूतर, हिरन, शेर, चीता, साँप, भेड़, चेतक, जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गाँधी, भगत सिंह, चन्द्रशेखर, रामकृष्ण आदि।

2. वस्तु का नाम

टिफिन, मोबाइल, टीवी, कम्प्यूटर, पंखा, गिलास, कटोरी, चम्मच, साइकिल, कार, मेज, कुर्सी, पुस्तक, अलमारी, शर्ट, पैंट, पेन, ब्लैकबोर्ड, नल, पर्दा, खिड़की आदि।

3. स्थान का नाम

काशी, अयोध्या, दिल्ली, मेरठ, रामपुर, लन्दन, पेरिस, ब्रिटेन, हिमालय, नेपाल आदि।

4. भाव का नाम

प्रसन्नता, क्रोध, ईर्ष्या, घृणा, प्रेम, बुढ़ापा, बचपना, जवानी, सुन्दरता, मिठास, शान्ति, लड़ाई आदि।

संज्ञा की पहचान

जब कोई शब्द किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु, स्थान, गुण, भाव, जाति या अवस्था का नाम बताता है, तो वह संज्ञा कहलाता है। इसलिए संज्ञा की पहचान करने के लिए यह देखना आवश्यक है कि शब्द किसी नाम का बोध करा रहा है या नहीं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • किसी प्राणी, व्यक्ति, वस्तु, स्थान, गुण, जाति, भाव या दशा के नाम को संज्ञा कहते हैं।
  • बालकों को संज्ञा सिखाने के लिए आसपास की वस्तुओं, व्यक्तियों और पशु-पक्षियों के नामों का प्रयोग किया जा सकता है।
  • संज्ञा-शिक्षण का उद्देश्य संज्ञा की समझ, शब्द-पहचान, संस्कृत ज्ञान और वाक्य-कौशल का विकास करना है।
  • व्यक्ति, वस्तु, स्थान और भाव से सम्बन्धित शब्द संज्ञा के सरल उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

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Topic 2 संज्ञा के भेद एवं संज्ञा पर आधारित गतिविधियाँ

संज्ञा के भेद एवं संज्ञा पर आधारित गतिविधियाँ

संज्ञा के भेद / प्रकार

संस्कृत में संज्ञा के मुख्य तीन भेद माने गए हैं—

  1. व्यक्तिवाचक संज्ञा
  2. जातिवाचक संज्ञा
  3. भाववाचक संज्ञा

इसके अतिरिक्त समूहवाचक संज्ञा और द्रव्यवाचक संज्ञा को जातिवाचक संज्ञा के ही भेद माना गया है। इस प्रकार संज्ञा के पाँच प्रकारों का अध्ययन किया जाता है।

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा

जिस शब्द से किसी विशेष व्यक्ति, प्राणी, स्थान या वस्तु का बोध हो, उसे व्यक्तिवाचक संज्ञा कहते हैं।

उदाहरण—

  • व्यक्ति विशेष—राम, कृष्ण, मोहन, गोपाल।
  • स्थान विशेष—दिल्ली, कानपुर, मेरठ।
  • वस्तु विशेष—गिलास, कटोरी, मेज, कुर्सी।
  • अन्य नाम—गंगा, यमुना, हिमालय।

2. जातिवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी स्थान, प्राणी या वस्तु की सम्पूर्ण जाति अथवा समूह का बोध कराते हैं, उन्हें जातिवाचक संज्ञा कहते हैं।

उदाहरण—मनुष्य, नदी, नगर, पर्वत, बर्तन, पशु, पक्षी, लड़का, कुत्ता, गाय, घोड़ा, भैंस, बकरी, स्त्री, गाँव आदि।

3. भाववाचक संज्ञा

जिस शब्द से किसी गुण, दोष, दशा, स्वभाव या भाव का बोध हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं।

उदाहरण—ईमानदारी, सच्चाई, वीरता, जवानी, लड़कपन, बुढ़ापा, प्रसन्नता, घृणा, नाराजगी, गरीबी, अमीरी, गर्मी, सर्दी आदि।

4. समूहवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी समूह या समुदाय का बोध कराते हैं, उन्हें समूहवाचक संज्ञा कहते हैं।

उदाहरण—भीड़, जुलूस, सेना, खेल आदि।

5. द्रव्यवाचक संज्ञा

जो शब्द किसी द्रव्य, पदार्थ या धातु का बोध कराते हैं, उन्हें द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।

उदाहरण—स्टील, दूध, घी, लकड़ी, सोना, चाँदी आदि।

संज्ञा पर आधारित गतिविधियाँ

गतिविधि–1 : वाक्यों द्वारा संज्ञा की पहचान

विद्यार्थियों को संस्कृत वाक्यों में प्रयुक्त संज्ञा शब्द दिखाकर उनका प्रकार समझाया जा सकता है। पुस्तक में निम्न उदाहरण दिए गए हैं—

शब्द वाक्य-प्रयोग
हिमालयात्हिमालयात् हिमं पतति।
बालिका:बालिका: दुग्धं पिबति।
राजाराजा प्रजां पालयति।
वृक्षेवृक्षे खगाः तिष्ठन्ति।
उद्यानेउद्याने बहवः वृक्षाः सन्ति।
मित्रम्मम मित्रम् पठति।
सूर्यःसूर्यः उदयति।
काकःकाकः वृक्षे तिष्ठति।
नेत्राभ्याम्अहं नेत्राभ्याम् पश्यामि।
नद्या:नद्या: जलं मधुरम् अस्ति।
बालकायबालकाय मोदकानि रुच्यन्ते।
विद्यालयेषुबालकः विद्यालयेषु सुखात्मकम् अनुभवति।
पण्डितःपण्डितः यज्ञं करोति।
गणेशायश्री गणेशाय नमः।
सिंहात्सः सिंहात् बिभेति।
वृक्षात्वृक्षात् पत्राणि पतन्ति।
विद्यालयेसः विद्यालये पठति।
पुत्रःरामकृष्णस्य पुत्रः नन्दनायकः अस्ति।
कृषकःकृषकः विश्वस्य पिता अस्ति।
विद्यालयम्सः विद्यालयं गच्छति।
रामायरामाय मोदकं रोचते।
सुवर्णम्सः सुवर्णस्य हारम् अस्ति।

इन वाक्यों में संज्ञा के प्रकार

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा—रामाय, सूर्यः, काकः, हिमालयः।
  • जातिवाचक संज्ञा—बालिका:, राजानः, वृक्षे, उद्याने, मित्रम्, विद्यालयेषु, पण्डितः, पुत्रः, कृषकः।
  • भाववाचक संज्ञा—मधुरं, सुखात्मकं, भौक्तुम्।
  • समूहवाचक संज्ञा—समूहं, सेनायाः।
  • द्रव्यवाचक संज्ञा—दुग्धं, सुवर्णम्।
गतिविधि–2 : संज्ञा शब्दों का वर्गीकरण

शिक्षक विद्यार्थियों को संज्ञा की परिभाषा समझाकर उदाहरणों के आधार पर शब्दों का वर्गीकरण करा सकता है।

पुस्तक में निम्न शब्द दिए गए हैं—

पिपीलिका, कुञ्जिका, गंगा, हिमालयः, पुस्तकम्, क्रोधः, सुन्दरता, वृक्षः, अयोध्या, बालकः, रामः, सिंहः, लेखिका आदि।

  1. विद्यार्थियों से इन शब्दों को व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक तीन समूहों में अलग-अलग विभाजित कराया जाए।
  2. शिक्षक कुछ ऐसे संज्ञा शब्द बताए जिन्हें कुछ विद्यार्थी समझते हों और कुछ न समझते हों, फिर उन्हें सामान्य रूप से दो समूहों में बाँट दे।
  3. पहले समूह के विद्यार्थी संज्ञा शब्द बताएँ और शिक्षक उन्हें श्यामपट्ट पर लिखता जाए।
  4. दूसरे समूह से संज्ञा के विभिन्न रूपों से सम्बन्धित शब्दों को अलग-अलग करने को कहा जाए।
  5. अन्त में शिक्षक विद्यार्थियों की गलतियों का सुधार करे।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संज्ञा के तीन मुख्य भेद—व्यक्तिवाचक, जातिवाचक और भाववाचक हैं।
  • समूहवाचक और द्रव्यवाचक संज्ञा को जातिवाचक संज्ञा के भेद माना गया है।
  • व्यक्तिवाचक किसी विशेष नाम, जातिवाचक सम्पूर्ण जाति और भाववाचक गुण, दशा या भाव का बोध कराती है।
  • समूहवाचक संज्ञा समूह या समुदाय तथा द्रव्यवाचक संज्ञा पदार्थ या धातु का बोध कराती है।
  • वाक्य-प्रयोग, शब्द-वर्गीकरण और समूह गतिविधियों द्वारा बालकों को संज्ञा के भेद सरलता से सिखाए जा सकते हैं।
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Topic 3 लिंग—ज्ञान, अर्थ, उद्देश्य एवं भेद

लिंग—ज्ञान, अर्थ, उद्देश्य एवं भेद

लिंग का ज्ञान

बालक अपने दैनिक वातावरण में माता-पिता, चाचा-चाची, दादा-दादी तथा भाई-बहन जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं। इन शब्दों के माध्यम से उन्हें स्त्री और पुरुष का व्यावहारिक ज्ञान पहले से होता है।

किन्तु संस्कृत में लिंग के व्याकरणिक स्वरूप को ठीक प्रकार से समझने के लिए विद्यार्थियों को पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग शब्दों का वर्गीकरण तथा वाक्यों में उनका उचित प्रयोग कराना आवश्यक है।

बालकों को लिंग का ज्ञान कराने के उद्देश्य

  1. बालकों में लिंग की समझ विकसित करना।
  2. भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में लिंग-भेद से सम्बन्धित ज्ञान का विकास करना।
  3. संस्कृत में लिंग सम्बन्धी कौशलों का विकास करना।
  4. बालकों में स्त्री तथा पुरुष जाति के अन्तर की समझ विकसित करना।
  5. बालकों को पुल्लिंग एवं स्त्रीलिंग के अतिरिक्त नपुंसकलिंग का भी ज्ञान कराना।

लिंग का अर्थ

संज्ञा और सर्वनाम के जिस रूप से किसी व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान के स्त्री या पुरुष वाचक होने का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं। सरल शब्दों में, शब्द की जाति को लिंग कहा जाता है।

लिंग से यह ज्ञात होता है कि कोई शब्द स्त्री जाति, पुरुष जाति अथवा नपुंसक जाति के लिए प्रयुक्त हुआ है।

लिंग के उदाहरण

पुरुष जाति के शब्द

बेटा, लड़का, बकरा, गधा, भैंसा, उल्लू आदि पुरुष जाति के शब्द हैं, अतः ये पुल्लिंग माने जाते हैं।

स्त्री जाति के शब्द

गाय, लड़की, बकरी, गधी, भैंस आदि स्त्री जाति के शब्द हैं, अतः ये स्त्रीलिंग माने जाते हैं।

जड़ वस्तुओं के शब्द

मेज, घर, पुस्तक, जल आदि जड़ वस्तुओं के नाम हैं। पुस्तक में इन्हें नपुंसकलिंग के उदाहरण के रूप में दिया गया है।

लिंग के भेद

हिन्दी भाषा में सामान्यतः दो लिंग माने जाते हैं—

  1. पुल्लिंग
  2. स्त्रीलिंग

संस्कृत भाषा में तीन लिंगों की व्यवस्था है—

  1. पुल्लिंग
  2. स्त्रीलिंग
  3. नपुंसकलिंग

लिंग निर्धारण का आधार

पुस्तक में सृष्टि की तीन मुख्य जातियों के आधार पर संस्कृत के तीन लिंगों को समझाया गया है—

  • पुरुष जाति — पुल्लिंग
  • स्त्री जाति — स्त्रीलिंग
  • जड़ वस्तुएँ — नपुंसकलिंग

संस्कृत में किसी शब्द का लिंग उसके निर्धारित संस्कृत रूप के अनुसार जाना जाता है। इसलिए केवल हिन्दी में प्रयुक्त लिंग के आधार पर संस्कृत शब्द का लिंग निर्धारित करना उचित नहीं माना गया है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • शब्द की जाति का बोध कराने वाले रूप को लिंग कहते हैं।
  • संस्कृत में तीन लिंग होते हैं—पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग।
  • हिन्दी में सामान्यतः पुल्लिंग और स्त्रीलिंग दो लिंगों की व्यवस्था है।
  • बेटा, लड़का, बकरा, गधा, भैंसा और उल्लू पुल्लिंग के उदाहरण हैं।
  • गाय, लड़की, बकरी, गधी और भैंस स्त्रीलिंग के उदाहरण हैं।
  • मेज, घर, पुस्तक और जल को पुस्तक में नपुंसकलिंग के उदाहरण के रूप में दिया गया है।

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Topic 4 पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसकलिंग

पुल्लिंग, स्त्रीलिंग एवं नपुंसकलिंग

संस्कृत में लिंग

संस्कृत भाषा में संज्ञा शब्दों को तीन लिंगों में बाँटा जाता है—पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग। प्रत्येक लिंग के शब्द स्वरान्त अथवा व्यंजनान्त हो सकते हैं। इसी आधार पर उनके विभिन्न प्रकार बताए गए हैं।

1. पुल्लिंग

जिन संज्ञा शब्दों से पुरुष या नर जाति का बोध होता है, उन्हें पुल्लिंग कहते हैं।

पुस्तक में कुछ अन्य पुल्लिंग शब्दों की पहचान प्रत्ययों के आधार पर भी कराई गई है—

  • ‘अन्’ प्रत्यय वाले शब्द—राजन्, पठन्।
  • ‘घञ्’ प्रत्यय वाले शब्द—प्रणामः, विहारः।
  • ‘इमनिच्’ प्रत्यय वाले शब्द—महिमा, गरिमा।

कुछ मुख्य पुल्लिंग शब्द

  1. यज्ञवाचक शब्द—ऋत्वः, अहवः, स्वाहा।
  2. धातुओं के नाम—रजतः, स्वर्णः।
  3. रत्नों के नाम—हीरा, माणिक्यः।
  4. अनाजों के नाम—चणकः, गोधूमः।
  5. ग्रहों के नाम—भानुः, शशिः, बुधः।
  6. वारों के नाम—सोमवारः, मंगलवारः।
  7. पर्वतों के नाम—शैलः, गिरिः, हिमालयः।
  8. जल के नाम—सरोवरः, समुद्रः।
  9. स्थल के नाम—आकाशः, पातालः।

संस्कृत में पुल्लिंग के प्रकार

संस्कृत में पुल्लिंग शब्द दो प्रकार के होते हैं—

  1. अजन्त पुल्लिंग
  2. हलन्त पुल्लिंग
अजन्त पुल्लिंग

जो पुल्लिंग शब्द अपने अन्त में स्वर रखते हैं, उन्हें अजन्त या स्वरान्त पुल्लिंग कहते हैं।

अकारान्त पुल्लिंग

जिन पुल्लिंग शब्दों के अन्त में ‘अ’ होता है, वे अकारान्त पुल्लिंग कहलाते हैं।

उदाहरण—बालकः, देवः, अश्वः, गजः, वृक्षः, पर्वतः, कुक्कुरः, कपोतः, काकः, कुक्कुटः, कुलीरः, कुरंगः, वृकः, खगः, गर्दभः, उल्लूकः, मातुलः, बालकः, पितामहः, लोमशः, वृषभः, अजः, मर्कटः, नकुलः, मूषकः, शूकरः।

इकारान्त पुल्लिंग

जिन पुल्लिंग शब्दों के अन्त में ‘इ’ होता है, वे इकारान्त पुल्लिंग कहलाते हैं।

उदाहरण—कविः, मुनिः, पतिः, कपिः, निधिः, नृपतिः।

उकारान्त पुल्लिंग

जिन पुल्लिंग शब्दों के अन्त में ‘उ’ होता है, वे उकारान्त पुल्लिंग कहलाते हैं।

उदाहरण—गुरुः, भानु, साधु, शम्भु, विष्णु, सिन्धु, प्रभु, शिशु, शत्रु, बन्धु, इन्दु, पशु, तरु।

हलन्त पुल्लिंग

जिन पुल्लिंग शब्दों के अन्त में व्यंजन होता है, उन्हें हलन्त या व्यंजनान्त पुल्लिंग कहा जाता है।

  • सकारान्त पुल्लिंग—चन्द्रमस् (चन्द्रमा), विद्वस् (विद्वान)।
  • नकारान्त पुल्लिंग—आत्मन्।

2. स्त्रीलिंग

जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री जाति का बोध होता है, उन्हें स्त्रीलिंग कहते हैं। संस्कृत में स्त्रीलिंग शब्द भी अजन्त और हलन्त दो प्रकार के होते हैं।

अजन्त स्त्रीलिंग

जिन स्त्रीलिंग शब्दों के अन्त में स्वर होता है, वे अजन्त या स्वरान्त स्त्रीलिंग कहलाते हैं।

आकारान्त स्त्रीलिंग

उदाहरण—बाला, बालिका, कन्या, वसुधा, निशा, रमा, भार्या, कथा, महिला, वाटिका, उपचारिका, अजा, मक्षिका, सुता, सारिका, गृहगोधिका।

इकारान्त स्त्रीलिंग

उदाहरण—मति, रात्रि, कीर्ति, प्रकृति, शक्ति, प्रीति, सृष्टि, मुक्ति, ऊर्मि, कलि।

ईकारान्त स्त्रीलिंग

उदाहरण—नदी, स्त्री, नारी, लक्ष्मी, धी, श्री, पुत्री, रजनी, गौरी, पत्नी, सखी, भगिनी, राज्ञी, पृथ्वी, जननी, देवी।

उकारान्त स्त्रीलिंग

उदाहरण—धेनु, तनु, रज्जु, चञ्चु, रेणु।

ऊकारान्त स्त्रीलिंग

उदाहरण—वधू, साधू आदि।

हलन्त स्त्रीलिंग

जिन स्त्रीलिंग शब्दों के अन्त में व्यंजन होता है, वे हलन्त या व्यंजनान्त स्त्रीलिंग कहलाते हैं।

  • तकारान्त स्त्रीलिंग—सरित्, विद्युत्, योषित्, हरित्।
  • चकारान्त स्त्रीलिंग—वाच्, रुच्, शुच्।

3. नपुंसकलिंग

जिन संज्ञा शब्दों से स्त्री या पुरुष जाति का बोध नहीं होता, उन्हें नपुंसकलिंग कहते हैं।

उदाहरण—जल, अस्थि, दधि, मधु, वस्तु आदि।

संस्कृत में नपुंसकलिंग शब्द भी दो प्रकार के होते हैं—

  1. अजन्त नपुंसकलिंग
  2. हलन्त नपुंसकलिंग
अजन्त नपुंसकलिंग
अकारान्त नपुंसकलिंग

उदाहरण—जलम्, पुष्पम्, नेत्रम्, गृहम्, मित्रम्, पुस्तकम्, धनम्, भारतम्, कमलम्, द्रव्यम्।

इकारान्त नपुंसकलिंग

उदाहरण—वारि, अक्षि, अस्थि, दधि।

उकारान्त नपुंसकलिंग

उदाहरण—मधु, अश्रु, वस्तु, जानु, श्मश्रु (दाढ़ी), दारु (लकड़ी) आदि।

ऋकारान्त नपुंसकलिंग

उदाहरण—कर्तृ, धातृ, ज्ञातृ आदि।

हलन्त नपुंसकलिंग

जिन नपुंसकलिंग शब्दों के अन्त में व्यंजन होता है, उन्हें हलन्त या व्यंजनान्त नपुंसकलिंग कहते हैं। पुस्तक में सभी सर्वनाम शब्दों को व्यंजनान्त नपुंसकलिंग के उदाहरण के रूप में बताया गया है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संस्कृत में तीन लिंग हैं—पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग।
  • पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग शब्द अजन्त तथा हलन्त रूपों में पाए जाते हैं।
  • अजन्त शब्द स्वर पर समाप्त होते हैं, जबकि हलन्त शब्दों के अन्त में व्यंजन होता है।
  • पुल्लिंग के प्रमुख अजन्त भेद—अकारान्त, इकारान्त और उकारान्त हैं।
  • स्त्रीलिंग के अजन्त भेद—आकारान्त, इकारान्त, ईकारान्त, उकारान्त और ऊकारान्त हैं।
  • नपुंसकलिंग के अजन्त भेद—अकारान्त, इकारान्त, उकारान्त और ऋकारान्त बताए गए हैं।
Topic 5 लिंग पर आधारित गतिविधियाँ

लिंग पर आधारित गतिविधियाँ

लिंग पर आधारित गतिविधि

बालकों को पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग का व्यावहारिक ज्ञान कराने के लिए कक्षा में उपस्थित वस्तुओं, प्राणियों तथा बालक-बालिकाओं से सम्बन्धित शब्दों का प्रयोग किया जा सकता है। शिक्षक विद्यार्थियों से संस्कृत में शब्द कहलवाकर उनका तीनों लिंगों के आधार पर वर्गीकरण कराता है।

गतिविधि–1 : शब्दों का लिंग के आधार पर वर्गीकरण

  1. शिक्षक कक्षा में उपस्थित सभी वस्तुओं तथा प्राणियों के नाम विद्यार्थियों से संस्कृत में बताने को कहे। विद्यार्थियों द्वारा बताए गए सभी शब्दों को शिक्षक श्यामपट्ट पर लिखता जाए।
  2. इसके बाद शिक्षक छात्रों और छात्राओं के अलग-अलग समूह बना दे।
  3. छात्रों से श्यामपट्ट पर लिखे गए शब्दों में से पुल्लिंग शब्दों को अलग करने के लिए कहा जाए।
  4. छात्राओं से उन्हीं शब्दों में से स्त्रीलिंग शब्दों को अलग करने के लिए कहा जाए।
  5. यदि कोई पुल्लिंग या स्त्रीलिंग शब्द विद्यार्थियों से छूट जाए तो शिक्षक स्वयं उसकी पहचान कराकर सही वर्ग में रखे।
  6. पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्दों को अलग करने के बाद जो शब्द शेष बचें, उन्हें नपुंसकलिंग के रूप में समझाया जाए।
  7. अन्त में शिक्षक विद्यार्थियों को कुछ अन्य संस्कृत शब्द दे और उनसे उन शब्दों को पुल्लिंग, स्त्रीलिंग तथा नपुंसकलिंग—तीनों वर्गों में बाँटने को कहे।

गतिविधि का शैक्षिक उपयोग

इस गतिविधि में विद्यार्थी केवल लिंग की परिभाषा याद नहीं करते, बल्कि संस्कृत शब्दों को देखकर उनका लिंग पहचानने और उचित वर्ग में रखने का अभ्यास करते हैं। समूह में कार्य करने तथा शिक्षक द्वारा त्रुटियों के सुधार से तीनों लिंगों का अन्तर अधिक स्पष्ट होता है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • कक्षा की वस्तुओं और प्राणियों के संस्कृत नामों से लिंग का अभ्यास कराया जा सकता है।
  • विद्यार्थियों से पहले पुल्लिंग और स्त्रीलिंग शब्द अलग करवाए जाते हैं।
  • पुल्लिंग और स्त्रीलिंग को अलग करने के बाद शेष शब्दों को नपुंसकलिंग के रूप में समझाया जाता है।
  • अन्त में नए शब्द देकर उन्हें तीनों लिंगों में वर्गीकृत करने का अभ्यास कराया जाता है।
  • शिक्षक विद्यार्थियों की गलतियों का सुधार करके लिंग की समझ स्पष्ट करता है।

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Topic 6 वचन—ज्ञान, अर्थ, उद्देश्य एवं प्रकार

वचन—ज्ञान, अर्थ, उद्देश्य एवं प्रकार

वचन का ज्ञान

बालकों को अपने वातावरण से ही एक, दो, तीन, चार आदि संख्याओं का सामान्य ज्ञान प्राप्त हो जाता है। इसी संख्या-बोध को व्याकरण के शब्दों से जोड़कर उनमें वचन की समझ विकसित की जा सकती है।

बच्चे अपने दैनिक जीवन में वचन का प्रयोग करते हैं। शिक्षक किसी एक वस्तु को दिखाकर एकवचन, दो वस्तुओं को दिखाकर द्विवचन तथा बहुत-सी वस्तुओं को दिखाकर बहुवचन का बोध करा सकता है। इस प्रकार संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का ज्ञान वचन द्वारा कराया जाता है।

बालकों को वचन का ज्ञान कराने के उद्देश्य

  1. बालकों में वचन की समझ विकसित करना।
  2. भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में बालकों में वचन की दक्षता विकसित करना।
  3. संस्कृत में वचन सम्बन्धी वाक्य-बोध कराना।
  4. बालकों को संस्कृत अनुवाद के लिए तैयार करना।
  5. वचन के माध्यम से बालकों को संख्याओं का ज्ञान कराना।

वचन का अर्थ

भाषा-विज्ञान में वचन संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण एवं क्रिया आदि की वह व्याकरणिक श्रेणी है, जिससे उनकी संख्या का बोध होता है। सरल शब्दों में, जिन शब्दों से किसी व्यक्ति या वस्तु की संख्या का ज्ञान हो, उसे वचन कहते हैं।

वचन के प्रकार

अधिकांश भाषाओं में दो वचन—एकवचन और बहुवचन—का प्रयोग होता है, किन्तु संस्कृत भाषा में तीन वचनों की व्यवस्था है—

  1. एकवचन
  2. द्विवचन
  3. बहुवचन

1. एकवचन

जिन शब्दों से एक व्यक्ति, वस्तु या स्थान आदि का बोध होता है, उन्हें एकवचन कहते हैं।

उदाहरण—शुकः, मयूरः, गृहम्, पुस्तकम्, लेखनी, बालिका, नरः, पुष्पम् आदि।

2. द्विवचन

जिन शब्दों से दो व्यक्तियों या दो वस्तुओं का बोध होता है, उन्हें द्विवचन कहते हैं। संस्कृत भाषा की यह विशेषता है कि दो की संख्या के लिए अलग वचन का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—शुकौ, बालकौ, मयूरौ, बालिके, मूषिके, लते, फले, पुस्तके, कमले आदि।

3. बहुवचन

जिन शब्दों से तीन या तीन से अधिक व्यक्तियों अथवा वस्तुओं का बोध होता है, उन्हें बहुवचन कहते हैं।

उदाहरण—शुकाः, मयूराः, कपोताः, अजाः, मूषिकाः, फलानि, पुष्पाणि, पत्राणि आदि।

तीनों वचनों का सरल अन्तर

वचन संख्या का बोध उदाहरण
एकवचन एक शुकः, मयूरः, पुस्तकम्
द्विवचन दो शुकौ, मयूरौ, पुस्तके
बहुवचन तीन या तीन से अधिक शुकाः, मयूराः, पुष्पाणि
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • जिस व्याकरणिक रूप से व्यक्ति या वस्तु की संख्या का बोध हो, उसे वचन कहते हैं।
  • संस्कृत में तीन वचन होते हैं—एकवचन, द्विवचन और बहुवचन।
  • एकवचन से एक, द्विवचन से दो तथा बहुवचन से तीन या तीन से अधिक का बोध होता है।
  • वचन का प्रयोग संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया आदि की संख्या बताने के लिए किया जाता है।
  • संस्कृत में द्विवचन का अलग प्रयोग इसकी प्रमुख विशेषता है।
Topic 7 वचन पर आधारित गतिविधियाँ

वचन पर आधारित गतिविधियाँ

वचन पर आधारित गतिविधियाँ

एकवचन, द्विवचन और बहुवचन का प्रारम्भिक ज्ञान देने के बाद विद्यार्थियों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से इनका अभ्यास कराया जा सकता है। वस्तुओं, पशु-पक्षियों, फलों और विद्यार्थियों की संख्या को आधार बनाकर वचन का ज्ञान अधिक सरल और व्यावहारिक बनाया जा सकता है।

वस्तुओं की संख्या द्वारा वचन का ज्ञान

  1. शिक्षक जानवरों, फलों तथा अन्य वस्तुओं के चित्र अलग-अलग संख्याओं में दिखाकर विद्यार्थियों को एकवचन, द्विवचन और बहुवचन का ज्ञान करा सकता है।
  2. विद्यार्थियों को तीन समूहों में बाँटा जाए—
    • पहले समूह में एक विद्यार्थी रखकर समझाया जाए कि एक व्यक्ति या वस्तु का बोध कराने वाला शब्द एकवचन होता है।
    • दूसरे समूह में दो विद्यार्थी रखकर बताया जाए कि दो की संख्या का बोध कराने वाला शब्द द्विवचन होता है।
    • तीसरे समूह में तीन या अधिक विद्यार्थी रखकर बहुवचन का बोध कराया जाए।
  3. अन्त में शिक्षक कुछ पुस्तकों को एक साथ रखकर विद्यार्थियों से उन्हें एकवचन, द्विवचन और बहुवचन के आधार पर पहचानने या बाँटने को कह सकता है।

गतिविधि–1 : शब्दों को सही वचन-रूप से मिलाना

विद्यार्थियों को हिन्दी शब्द और संस्कृत शब्द अव्यवस्थित रूप में देकर सही जोड़ियाँ बनवाई जा सकती हैं।

असुमेलित शब्द
हिन्दी संस्कृत
कौआकुक्कुरः
दो बैलकमलानि
कुत्तावानरः
कमलेंवृषभौ
वानरकाकः
पुस्तकेंबालिकाः
लड़कियाँपुस्तकानि
सही मिलान
हिन्दी संस्कृत
कौआकाकः
दो बैलवृषभौ
कुत्ताकुक्कुरः
कमलेंकमलानि
वानरवानरः
पुस्तकेंपुस्तकानि
लड़कियाँबालिकाः

इस गतिविधि से विद्यार्थी शब्द के अर्थ के साथ उसके एकवचन, द्विवचन या बहुवचन रूप को भी पहचानना सीखते हैं।

गतिविधि–2 : चित्र देखकर वचन पहचानना

शिक्षक अलग-अलग संख्या में वस्तुओं या पशु-पक्षियों के चित्र दिखाकर संस्कृत में प्रश्न पूछ सकता है। विद्यार्थी चित्र में दिखाई देने वाली संख्या के अनुसार उत्तर देते हैं।

प्रश्न उत्तर वचन
इमानि कानि सन्ति? इमानि फलानि सन्ति। बहुवचन
अयम् कः अस्ति? अयम् कपोतः अस्ति। एकवचन
इमौ कौ स्तः? इमौ शुकौ स्तः। द्विवचन

इस प्रकार चित्र देखकर विद्यार्थी यह समझते हैं कि एक के लिए एकवचन, दो के लिए द्विवचन तथा दो से अधिक के लिए बहुवचन का प्रयोग किया जाता है।

गतिविधि–3 : वचन के अनुसार सही क्रिया चुनना

विद्यार्थियों का मूल्यांकन करने के लिए उन्हें ऐसे शब्द या वाक्य दिए जा सकते हैं जिनमें वचन के अनुसार उचित क्रिया चुननी हो। पुस्तक में निम्न उदाहरण दिए गए हैं—

शब्द विकल्प
पुष्पम्पतन्ति, विकसति
मित्रम्गच्छति, पतन्ति
चक्रेभ्रमतः, गच्छति
बालकाःनमति, नमन्ति
छात्रःपठति, पठन्ति
तौहसन्ति, हसतः
बालिकेनमतः, नमन्ति

इस अभ्यास से विद्यार्थी यह समझते हैं कि वचन बदलने पर वाक्य में प्रयुक्त क्रिया का रूप भी उसके अनुसार बदलता है।

अन्य समेकित अभ्यास

पुस्तक में वचन के साथ पूर्व में पढ़े गए लिंग एवं शब्द-ज्ञान की पुनरावृत्ति के लिए कुछ अन्य अभ्यास भी दिए गए हैं।

रिक्त स्थान की पूर्ति
पुल्लिंग स्त्रीलिंग नपुंसकलिंग
बालकः ---------- ----------
---------- रमा ----------
---------- ---------- फलम्
सुमेलित कीजिए
कमलकमलम्
पेड़वृक्षम्
चश्माउपनेत्रम्
कमलाकमला
रमेशरमेशः
लिंग के अनुसार क्रिया-प्रयोग
स्त्रीलिंग पुल्लिंग
सासः
स्त्रीपुरुष
छात्राछात्रः

इन शब्दों के साथ उचित क्रिया लगवाकर विद्यार्थियों से वाक्य बनवाए जा सकते हैं। इससे संज्ञा, लिंग, वचन और क्रिया के पारस्परिक सम्बन्ध की पुनरावृत्ति होती है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • वस्तुओं की संख्या दिखाकर एकवचन, द्विवचन और बहुवचन का ज्ञान सरलता से कराया जा सकता है।
  • शब्द-मिलान द्वारा विद्यार्थी हिन्दी शब्दों के सही संस्कृत वचन-रूप पहचानते हैं।
  • चित्र आधारित गतिविधि में एक वस्तु, दो वस्तुओं तथा अनेक वस्तुओं के आधार पर वचन की पहचान कराई जाती है।
  • वचन के अनुसार क्रिया का रूप भी बदलता है, इसलिए वचन के साथ क्रिया-प्रयोग का अभ्यास आवश्यक है।
  • समूह-कार्य, चित्र, मिलान और सही विकल्प चुनने जैसी गतिविधियाँ वचन-ज्ञान को व्यावहारिक बनाती हैं।

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अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

“हिमालये हिमं पतति” में किस शब्द का वाक्य प्रयोग किया गया है—

व्याख्या: “हिमालये हिमं पतति” वाक्य में ‘हिमालये’ शब्द का प्रयोग किया गया है।
Q 2

जातिवाचक संज्ञा का उदाहरण है—

व्याख्या: पुस्तक की उत्तर-कुंजी के अनुसार ‘मित्रम्’ जातिवाचक संज्ञा का उदाहरण है।
Q 3

मयूर का द्विवचन है—

व्याख्या: ‘मयूरः’ का द्विवचन रूप ‘मयूरौ’ होता है।
Q 4

द्रव्यवाचक संज्ञा का उदाहरण है—

व्याख्या: स्टील, दूध और घी सभी द्रव्य या पदार्थ का बोध कराते हैं, इसलिए ये द्रव्यवाचक संज्ञा के उदाहरण हैं।
Q 5

“नद्याः जलं मधुरं अस्ति” वाक्य में संज्ञा है—

व्याख्या: इस वाक्य में ‘नद्याः’ और ‘जलं’ दोनों संज्ञा शब्द हैं।
Q 6

भाववाचक संज्ञा का उदाहरण है—

व्याख्या: पुस्तक में ‘मधुरं’ को भाववाचक संज्ञा के उदाहरण के रूप में दिया गया है।
Q 7

इकारान्त पुल्लिंग का शब्द है—

व्याख्या: ‘कविः’ इकारान्त पुल्लिंग शब्द है।
Q 8

उकारान्त नपुंसकलिंग का उदाहरण है—

व्याख्या: ‘मधु’ उकारान्त नपुंसकलिंग शब्द है।
Q 9

संज्ञा के कितने भेद होते हैं—

व्याख्या: अध्याय में व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक, समूहवाचक और द्रव्यवाचक—संज्ञा के पाँच भेद बताए गए हैं।
Q 10

व्यक्तिवाचक संज्ञा का उदाहरण है—

व्याख्या: पुस्तक की उत्तर-कुंजी के अनुसार रामाय, सूर्यः और काकः सभी व्यक्तिवाचक संज्ञा के उदाहरण हैं।
Q 11

उकारान्त पुल्लिंग शब्द है—

व्याख्या: पुस्तक की उत्तर-कुंजी में ‘भानु’ को उकारान्त पुल्लिंग का सही उत्तर दिया गया है।
Q 12

गुण, दोष, दशा या अवस्था बताने वाले शब्दों की संज्ञा होती है—

व्याख्या: गुण, दोष, दशा, स्वभाव या भाव का बोध कराने वाले शब्द भाववाचक संज्ञा कहलाते हैं।
Q 13

संस्कृत भाषा में लिंग के कितने भेद होते हैं—

व्याख्या: संस्कृत में तीन लिंग होते हैं—पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग।
Q 14

संस्कृत में वचन कितने प्रकार के होते हैं—

व्याख्या: संस्कृत में तीन वचन होते हैं—एकवचन, द्विवचन और बहुवचन।
Q 15

दो व्यक्तियों या वस्तुओं का बोध कराने वाला वचन है—

व्याख्या: दो व्यक्तियों या दो वस्तुओं का बोध कराने वाले रूप को द्विवचन कहते हैं।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय संस्कृत के अध्याय संज्ञा, लिंग एवं वचन की जानकारी से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1 2016

निम्नलिखित शब्दों में से पुल्लिंग, स्त्रीलिंग और नपुंसकलिंग शब्दों की अलग-अलग सूची बनाइए—हिमालयः, सागरः, राजन्, गंगा, नदी, वधू, फलम्, पुस्तकम्, सौन्दर्यम्।

Q 2 2022

लिंग के तीन प्रकारों के नाम लिखिए।

Q 3 2019

संस्कृत में वचन कितने प्रकार के होते हैं?

Q 4 2016

‘वचन’ किसे कहते हैं? छोटे बच्चों को वचन की जानकारी किस प्रकार दी जानी चाहिए, सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।

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Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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