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Home Study Material Semester 1 संस्कृत धातु रूप के अन्तर्गत लकार का प्रयोग
Chapter 4 • संस्कृत

धातु रूप के अन्तर्गत लकार का प्रयोग

UP DELED Semester 1 के संस्कृत विषय के इस अध्याय में धातु रूप का अर्थ एवं प्रकार, लकार और उनके प्रयोग, प्रमुख धातुओं के विभिन्न लकारों में रूप, प्रथम-मध्यम-उत्तम पुरुष, वचन के अनुसार क्रिया-प्रयोग, संस्कृत अनुवाद के सामान्य नियम तथा हिन्दी-संस्कृत अनुवाद का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

8
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15
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Notes
Topic 1 धातु रूप—ज्ञान एवं प्रकार

धातु रूप—ज्ञान एवं प्रकार

धातु का अर्थ

संस्कृत व्याकरण में क्रिया के मूल रूप को धातु कहा जाता है। धातु संस्कृत शब्दों के निर्माण का मूल तत्व है। धातुओं के साथ उपसर्ग, प्रत्यय तथा सामासिक क्रियाएँ मिलकर विभिन्न शब्दों का निर्माण करती हैं।

संस्कृत में धातुओं की संख्या लगभग 2012 मानी गई है। संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया आदि अनेक शब्दों के निर्माण में धातुओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

‘धातु’ शब्द ‘धा’ में ‘तिन्’ प्रत्यय लगाने से बना है। संस्कृत का लगभग प्रत्येक शब्द किसी-न-किसी धातु से जोड़ा जा सकता है।

कुछ प्रमुख धातुएँ

कृ, स्था, भू, युज्, मन्, गम्, जन्, दृश् आदि प्रमुख धातुएँ हैं।

धातु के प्रकार

धातुएँ मुख्यतः दो प्रकार की होती हैं—

  1. परस्मैपदी
  2. आत्मनेपदी

कुछ धातुएँ उभयपदी भी होती हैं। इस प्रकार प्रयोग की दृष्टि से धातुओं को परस्मैपदी, आत्मनेपदी और उभयपदी रूपों में समझा जाता है।

धातु का प्रकार उदाहरण
परस्मैपदी भू, गम्, पठ्, स्था, वद् आदि
आत्मनेपदी लभ्, वद्, भाष्, यत्, रम्, शिक्ष्, सेव आदि
उभयपदी पच्, यज्, भज्, याच्, खाद्, बुध्, वप् आदि

1. परस्मैपदी धातु

वाक्य में जिस धातु की क्रिया का फल कर्ता को न मिलकर किसी दूसरे को प्राप्त होता है, उसे परस्मैपदी धातु कहते हैं।

उदाहरण—

मोहनः पठति। — मोहन पढ़ता है।

इस वाक्य में पढ़ने की क्रिया का फल मोहन को न मिलकर उस व्यक्ति या उद्देश्य को प्राप्त होता है जिसके लिए वह पढ़ रहा है।

2. आत्मनेपदी धातु

वाक्य में जिस धातु की क्रिया का फल स्वयं कर्ता को प्राप्त होता है, उसे आत्मनेपदी धातु कहते हैं।

उदाहरण—

अहम् भुञ्जे। — मैं खाता हूँ।

यहाँ खाने की क्रिया का फल ‘अहम्’ अर्थात् कर्ता को ही प्राप्त होता है।

3. उभयपदी धातु

वाक्य में जिस धातु की क्रिया का फल कर्ता तथा दूसरे व्यक्ति—दोनों से सम्बन्धित होता है, उसे उभयपदी धातु कहते हैं।

उदाहरण—

अध्यापकः कथयते। — अध्यापक कहता है।

यहाँ कहने की क्रिया का सम्बन्ध अध्यापक तथा उस व्यक्ति से भी है जिससे कहा जा रहा है।

वाच्य के अनुसार धातु का प्रयोग

भाववाच्य एवं कर्मवाच्य में सभी धातुएँ आत्मनेपदी होती हैं, जबकि कर्तृवाच्य में परस्मैपदी रूप का प्रयोग होता है।

तीनों प्रकारों में अन्तर

प्रकार क्रिया के फल का सम्बन्ध
परस्मैपदी फल दूसरे को प्राप्त होता है
आत्मनेपदी फल स्वयं कर्ता को प्राप्त होता है
उभयपदी फल कर्ता और दूसरे दोनों से सम्बन्धित होता है
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं।
  • धातु संस्कृत शब्दों के निर्माण का मूल तत्व है।
  • संस्कृत में लगभग 2012 धातुएँ मानी गई हैं।
  • कृ, स्था, भू, युज्, मन्, गम्, जन् और दृश् प्रमुख धातुओं के उदाहरण हैं।
  • धातुएँ मुख्यतः परस्मैपदी और आत्मनेपदी होती हैं तथा कुछ धातुएँ उभयपदी भी होती हैं।
  • परस्मैपदी में क्रिया का फल दूसरे को, आत्मनेपदी में कर्ता को तथा उभयपदी में दोनों से सम्बन्धित होता है।

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Topic 2 लकार—अर्थ, प्रकार एवं प्रयोग

लकार—अर्थ, प्रकार एवं प्रयोग

लकार का अर्थ

संस्कृत में काल तथा क्रिया की विभिन्न अवस्थाओं का बोध कराने के लिए लकार का प्रयोग किया जाता है। हिन्दी में जिस प्रकार काल तथा अंग्रेजी में Tense के माध्यम से क्रिया के समय का ज्ञान होता है, उसी प्रकार संस्कृत में लकार से क्रिया के समय और भाव का बोध होता है।

प्रत्येक क्रिया किसी-न-किसी समय में होती है। उस समय को स्पष्ट करने के लिए संस्कृत में अलग-अलग लकारों का प्रयोग किया जाता है।

संस्कृत में लकारों की संख्या

संस्कृत में दस लकार होते हैं—

  1. लट्
  2. लिट्
  3. लुट्
  4. लृट्
  5. लेट्
  6. लोट्
  7. विधिलिङ्
  8. लङ्
  9. आशीर्लिङ्
  10. लुङ्

प्रत्येक लकार में तीन पुरुष होते हैं और प्रत्येक पुरुष के तीन वचन होते हैं। इसलिए एक धातु के किसी एक लकार में पुरुष और वचन के आधार पर नौ रूप बनते हैं।

प्रमुख पाँच लकार

माध्यमिक स्तर पर मुख्य रूप से पाँच लकारों का अध्ययन किया जाता है—

लकार अर्थ / प्रयोग हिन्दी में पहचान
लट् लकार वर्तमान काल ता है, ती है, ते हैं
लोट् लकार आज्ञार्थक आज्ञा के अर्थ में
विधिलिङ् लकार चाहिए के अर्थ में चाहिए
लङ् लकार भूतकाल था, थी, थे, या, ये, यी
लृट् लकार भविष्यत्काल गा, गे, गी

1. लट् लकार — वर्तमान काल

वर्तमान समय में होने वाले कार्य को प्रकट करने के लिए लट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

सः पठति। — वह पढ़ता है।

2. लृट् लकार — भविष्यत्काल

भविष्य में होने वाली क्रिया को प्रकट करने के लिए लृट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

सः गृहं गमिष्यति। — वह घर जाएगा।

3. लङ् लकार — भूतकाल

जो क्रिया वर्तमान समय से पहले हो चुकी हो, उसे प्रकट करने के लिए लङ् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

रामः गृहम् अगच्छत्। — राम घर गया।

4. लोट् लकार — आज्ञार्थक

आज्ञा, प्रार्थना, अनुमति और आशीर्वाद आदि का भाव प्रकट करने के लिए लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

स्वगृहम् गच्छ। — अपने घर जाओ।

5. विधिलिङ् लकार — ‘चाहिए’ के अर्थ में

जहाँ किसी कार्य के लिए ‘चाहिए’ का भाव व्यक्त किया जाता है, वहाँ विधिलिङ् लकार का प्रयोग होता है।

उदाहरण—

सत्यं ब्रूयात्। — सत्य बोलना चाहिए।

लकार की सरल पहचान

  • कार्य वर्तमान में हो रहा हो — लट् लकार।
  • कार्य भूतकाल में हो चुका हो — लङ् लकार।
  • कार्य भविष्य में होने वाला हो — लृट् लकार।
  • आज्ञा, प्रार्थना, अनुमति या आशीर्वाद का भाव हो — लोट् लकार।
  • ‘चाहिए’ का भाव हो — विधिलिङ् लकार।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • काल तथा क्रिया की विभिन्न अवस्थाओं का बोध कराने वाले रूप को लकार कहते हैं।
  • संस्कृत में कुल दस लकार होते हैं।
  • प्रमुख पाँच लकार—लट्, लोट्, विधिलिङ्, लङ् और लृट् हैं।
  • लट् वर्तमान काल, लङ् भूतकाल तथा लृट् भविष्यत्काल का बोध कराता है।
  • लोट् लकार आज्ञा आदि तथा विधिलिङ् लकार ‘चाहिए’ के अर्थ में प्रयुक्त होता है।
  • प्रत्येक लकार में तीन पुरुष और प्रत्येक पुरुष में तीन वचन होते हैं।
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Topic 3 लट्, लोट्, विधिलिङ्, लङ् एवं लृट् लकार

लट्, लोट्, विधिलिङ्, लङ् एवं लृट् लकार

1. लट् लकार — वर्तमान काल

जब हिन्दी वाक्य के अन्त में ‘ता है’, ‘ती है’, ‘ते हैं’ आदि शब्द आते हैं, तब वर्तमान काल का बोध होता है और संस्कृत में लट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

  • वह जाता है। — सः गच्छति।
  • तुम खाना खाते हो। — त्वं भोजनम् खादसि।
  • मैं प्रतिदिन खेलता हूँ। — अहं प्रतिदिनं क्रीडामि।

लट् लकार में क्रिया का रूप कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार बदलता है।

पठ् धातु का लट् लकार
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष सः पठति।
(वह पढ़ता है।)
तौ पठतः।
(वे दोनों पढ़ते हैं।)
ते पठन्ति।
(वे सब पढ़ते हैं।)
मध्यम पुरुष त्वं पठसि।
(तुम पढ़ते हो।)
युवां पठथः।
(तुम दोनों पढ़ते हो।)
यूयं पठथ।
(तुम सब पढ़ते हो।)
उत्तम पुरुष अहं पठामि।
(मैं पढ़ता हूँ।)
आवां पठावः।
(हम दोनों पढ़ते हैं।)
वयं पठामः।
(हम सब पढ़ते हैं।)

2. लोट् लकार — आज्ञार्थक

जहाँ वाक्य में आज्ञा, अनुमति, प्रार्थना, आशीर्वाद अथवा इच्छा का भाव प्रकट होता है, वहाँ लोट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

  • त्वम् पठ। — तुम पढ़ो।
  • मित्रम् क्रीडतु। — मित्र खेलें।
गम् धातु का लोट् लकार
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष सः गच्छतु।
(वह जाए।)
तौ गच्छताम्।
(वे दोनों जाएँ।)
ते गच्छन्तु।
(वे सब जाएँ।)
मध्यम पुरुष त्वं गच्छ।
(तुम जाओ।)
युवां गच्छतम्।
(तुम दोनों जाओ।)
यूयं गच्छत।
(तुम सब जाओ।)
उत्तम पुरुष अहं गच्छानि।
(मैं जाऊँ।)
आवां गच्छाव।
(हम दोनों जाएँ।)
वयं गच्छाम।
(हम सब जाएँ।)

3. विधिलिङ् लकार — ‘चाहिए’ के अर्थ में

जिस हिन्दी वाक्य में किसी कार्य को करने के लिए ‘चाहिए’ का भाव हो, वहाँ संस्कृत में विधिलिङ् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

  • छात्राः पठेयुः। — छात्रों को पढ़ना चाहिए।
  • रामः गच्छेत्। — राम को जाना चाहिए।
पा धातु का विधिलिङ् लकार
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष सः पिबेत्।
(उसे पीना चाहिए।)
तौ पिबेताम्।
(उन दोनों को पीना चाहिए।)
ते पिबेयुः।
(उन सब को पीना चाहिए।)
मध्यम पुरुष त्वं पिबेः।
(तुम्हें पीना चाहिए।)
युवां पिबेतम्।
(तुम दोनों को पीना चाहिए।)
यूयं पिबेत।
(तुम सब को पीना चाहिए।)
उत्तम पुरुष अहं पिबेयम्।
(मुझे पीना चाहिए।)
आवां पिबेव।
(हम दोनों को पीना चाहिए।)
वयं पिबेम।
(हम सबको पीना चाहिए।)

4. लङ् लकार — भूतकाल

जब हिन्दी वाक्य के अन्त में ‘था’, ‘थी’, ‘थे’, ‘या’, ‘यी’, ‘ये’ आदि रूप आते हैं और क्रिया के बीते हुए समय में होने का बोध होता है, तब लङ् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

  • मैंने खाना खाया। — अहं भोजनम् अखादम्।
  • सीता ने नृत्य किया। — सीता अनृत्यत्।
पठ् धातु का लङ् लकार
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष सः अपठत्।
(वह पढ़ता था।)
तौ अपठताम्।
(वे दोनों पढ़ते थे।)
ते अपठन्।
(वे सब पढ़ते थे।)
मध्यम पुरुष त्वम् अपठः।
(तुम पढ़ते थे।)
युवाम् अपठतम्।
(तुम दोनों पढ़ते थे।)
यूयम् अपठत।
(तुम सब पढ़ते थे।)
उत्तम पुरुष अहम् अपठम्।
(मैं पढ़ता था।)
आवाम् अपठाव।
(हम दोनों पढ़ते थे।)
वयम् अपठाम।
(हम सब पढ़ते थे।)

5. लृट् लकार — भविष्यत्काल

जब हिन्दी वाक्य के अन्त में ‘गा’, ‘गी’, ‘गे’ आदि शब्द आते हैं और भविष्य में होने वाली क्रिया का बोध होता है, तब लृट् लकार का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण—

  • मैं दूध पीऊँगा। — अहं दुग्धं पास्यामि।
  • तुम पत्र लिखोगे। — त्वम् पत्रम् लेखिष्यसि।
लिख् धातु का लृट् लकार
पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष सः लेखिष्यति।
(वह लिखेगा।)
तौ लेखिष्यतः।
(वे दोनों लिखेंगे।)
ते लेखिष्यन्ति।
(वे सब लिखेंगे।)
मध्यम पुरुष त्वम् लेखिष्यसि।
(तुम लिखोगे।)
युवाम् लेखिष्यथः।
(तुम दोनों लिखोगे।)
यूयम् लेखिष्यथ।
(तुम सब लिखोगे।)
उत्तम पुरुष अहम् लेखिष्यामि।
(मैं लिखूँगा।)
आवाम् लेखिष्यावः।
(हम दोनों लिखेंगे।)
वयम् लेखिष्यामः।
(हम सब लिखेंगे।)

पाँचों लकारों की सरल पहचान

लकार मुख्य अर्थ सामान्य पहचान
लट्वर्तमान कालता है, ती है, ते हैं
लोट्आज्ञा आदिजाओ, पढ़ो आदि
विधिलिङ्चाहिए का भावकरना चाहिए
लङ्भूतकालथा, थी, थे, या, यी, ये
लृट्भविष्यत्कालगा, गी, गे
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • लट् लकार वर्तमान काल के लिए प्रयुक्त होता है।
  • लोट् लकार आज्ञा, अनुमति, प्रार्थना, आशीर्वाद और इच्छा के लिए प्रयुक्त होता है।
  • विधिलिङ् लकार ‘चाहिए’ के अर्थ में प्रयुक्त होता है।
  • लङ् लकार बीते हुए समय अर्थात् भूतकाल का बोध कराता है।
  • लृट् लकार भविष्य में होने वाली क्रिया का बोध कराता है।
  • प्रत्येक लकार में क्रिया के नौ रूप पुरुष और वचन के अनुसार बनते हैं।

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Topic 4 प्रमुख धातु रूप—पठ्, लिख्, गम्, भू, दा, कृ एवं अस्

प्रमुख धातु रूप—पठ्, लिख्, गम्, भू, दा, कृ एवं अस्

धातु रूप

संस्कृत में धातु के रूप पुरुष और वचन के अनुसार बदलते हैं। प्रत्येक लकार में प्रथम, मध्यम और उत्तम—तीन पुरुष तथा प्रत्येक पुरुष में एकवचन, द्विवचन और बहुवचन होते हैं। इस प्रकार एक लकार में किसी धातु के नौ रूप बनते हैं।

यहाँ पठ्, लिख्, गम्, भू, दा, कृ और अस् धातुओं के लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ् और लृट् लकार में रूप दिए गए हैं।

1. पठ् धातु — पढ़ना

लकार / पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
लट् — प्रथम पुरुषपठतिपठतःपठन्ति
लट् — मध्यम पुरुषपठसिपठथःपठथ
लट् — उत्तम पुरुषपठामिपठावःपठामः
लोट् — प्रथम पुरुषपठतुपठताम्पठन्तु
लोट् — मध्यम पुरुषपठपठतम्पठत
लोट् — उत्तम पुरुषपठानिपठावपठाम
लङ् — प्रथम पुरुषअपठत्अपठताम्अपठन्
लङ् — मध्यम पुरुषअपठःअपठतम्अपठत
लङ् — उत्तम पुरुषअपठम्अपठावअपठाम
विधिलिङ् — प्रथम पुरुषपठेत्पठेताम्पठेयुः
विधिलिङ् — मध्यम पुरुषपठेःपठेतम्पठेत
विधिलिङ् — उत्तम पुरुषपठेयम्पठेवपठेम
लृट् — प्रथम पुरुषपठिष्यतिपठिष्यतःपठिष्यन्ति
लृट् — मध्यम पुरुषपठिष्यसिपठिष्यथःपठिष्यथ
लृट् — उत्तम पुरुषपठिष्यामिपठिष्यावःपठिष्यामः

2. लिख् धातु — लिखना

लकार / पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
लट् — प्रथम पुरुषलिखतिलिखतःलिखन्ति
लट् — मध्यम पुरुषलिखसिलिखथःलिखथ
लट् — उत्तम पुरुषलिखामिलिखावःलिखामः
लोट् — प्रथम पुरुषलिखतुलिखताम्लिखन्तु
लोट् — मध्यम पुरुषलिखलिखतम्लिखत
लोट् — उत्तम पुरुषलिखानिलिखावलिखाम
लङ् — प्रथम पुरुषअलिखत्अलिखताम्अलिखन्
लङ् — मध्यम पुरुषअलिखःअलिखतम्अलिखत
लङ् — उत्तम पुरुषअलिखम्अलिखावअलिखाम
विधिलिङ् — प्रथम पुरुषलिखेत्लिखेताम्लिखेयुः
विधिलिङ् — मध्यम पुरुषलिखेःलिखेतम्लिखेत
विधिलिङ् — उत्तम पुरुषलिखेयम्लिखेवलिखेम
लृट् — प्रथम पुरुषलेखिष्यतिलेखिष्यतःलेखिष्यन्ति
लृट् — मध्यम पुरुषलेखिष्यसिलेखिष्यथःलेखिष्यथ
लृट् — उत्तम पुरुषलेखिष्यामिलेखिष्यावःलेखिष्यामः

3. गम् धातु — जाना

लकार / पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
लट् — प्रथम पुरुषगच्छतिगच्छतःगच्छन्ति
लट् — मध्यम पुरुषगच्छसिगच्छथःगच्छथ
लट् — उत्तम पुरुषगच्छामिगच्छावःगच्छामः
लोट् — प्रथम पुरुषगच्छतुगच्छताम्गच्छन्तु
लोट् — मध्यम पुरुषगच्छगच्छतम्गच्छत
लोट् — उत्तम पुरुषगच्छानिगच्छावगच्छाम
लङ् — प्रथम पुरुषअगच्छत्अगच्छताम्अगच्छन्
लङ् — मध्यम पुरुषअगच्छःअगच्छतम्अगच्छत
लङ् — उत्तम पुरुषअगच्छम्अगच्छावअगच्छाम
विधिलिङ् — प्रथम पुरुषगच्छेत्गच्छेताम्गच्छेयुः
विधिलिङ् — मध्यम पुरुषगच्छेःगच्छेतम्गच्छेत
विधिलिङ् — उत्तम पुरुषगच्छेयम्गच्छेवगच्छेम
लृट् — प्रथम पुरुषगमिष्यतिगमिष्यतःगमिष्यन्ति
लृट् — मध्यम पुरुषगमिष्यसिगमिष्यथःगमिष्यथ
लृट् — उत्तम पुरुषगमिष्यामिगमिष्यावःगमिष्यामः

4. भू धातु — होना

लकार / पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
लट् — प्रथम पुरुषभवतिभवतःभवन्ति
लट् — मध्यम पुरुषभवसिभवथःभवथ
लट् — उत्तम पुरुषभवामिभवावःभवामः
लोट् — प्रथम पुरुषभवतुभवताम्भवन्तु
लोट् — मध्यम पुरुषभवभवतम्भवत
लोट् — उत्तम पुरुषभवानिभवावभवाम
लङ् — प्रथम पुरुषअभवत्अभवताम्अभवन्
लङ् — मध्यम पुरुषअभवःअभवतम्अभवत
लङ् — उत्तम पुरुषअभवम्अभवावअभवाम
विधिलिङ् — प्रथम पुरुषभवेत्भवेताम्भवेयुः
विधिलिङ् — मध्यम पुरुषभवेःभवेतम्भवेत
विधिलिङ् — उत्तम पुरुषभवेयम्भवेवभवेम
लृट् — प्रथम पुरुषभविष्यतिभविष्यतःभविष्यन्ति
लृट् — मध्यम पुरुषभविष्यसिभविष्यथःभविष्यथ
लृट् — उत्तम पुरुषभविष्यामिभविष्यावःभविष्यामः

5. दा धातु — दान देना

लकार / पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
लट् — प्रथम पुरुषददातिदत्तःददति
लट् — मध्यम पुरुषददासिदत्थःदत्थ
लट् — उत्तम पुरुषददामिदद्वःदद्मः
लोट् — प्रथम पुरुषददातु, दत्तात्दत्तम्ददतु
लोट् — मध्यम पुरुषदेहि, दत्तात्दत्तम्दत्त
लोट् — उत्तम पुरुषददानिददावददाम
लङ् — प्रथम पुरुषअददात्अदत्ताम्अददुः
लङ् — मध्यम पुरुषअददाःअदत्तम्अदत्त
लङ् — उत्तम पुरुषअददाम्अददावअददाम
विधिलिङ् — प्रथम पुरुषदद्यात्दद्याताम्दद्युः
विधिलिङ् — मध्यम पुरुषदद्याःदद्यातम्दद्यात
विधिलिङ् — उत्तम पुरुषदद्याम्दद्यावदद्याम
लृट् — प्रथम पुरुषदास्यतिदास्यतःदास्यन्ति
लृट् — मध्यम पुरुषदास्यसिदास्यथःदास्यथ
लृट् — उत्तम पुरुषदास्यामिदास्यावःदास्यामः

6. कृ धातु — करना

लकार / पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
लट् — प्रथम पुरुषकरोतिकुरुतःकुर्वन्ति
लट् — मध्यम पुरुषकरोषिकुरुथःकुरुथ
लट् — उत्तम पुरुषकरोमिकुर्वःकुर्मः
लोट् — प्रथम पुरुषकरोतुकुरुताम्कुर्वन्तु
लोट् — मध्यम पुरुषकुरुकुरुतम्कुरुत
लोट् — उत्तम पुरुषकरवाणिकरवावकरवाम
लङ् — प्रथम पुरुषअकरोत्अकुरुताम्अकुर्वन्
लङ् — मध्यम पुरुषअकरोःअकुरुतम्अकुरुत
लङ् — उत्तम पुरुषअकरवम्अकुर्वअकुर्म
विधिलिङ् — प्रथम पुरुषकुर्यात्कुर्याताम्कुर्युः
विधिलिङ् — मध्यम पुरुषकुर्याःकुर्यातम्कुर्यात
विधिलिङ् — उत्तम पुरुषकुर्याम्कुर्यावकुर्याम
लृट् — प्रथम पुरुषकरिष्यतिकरिष्यतःकरिष्यन्ति
लृट् — मध्यम पुरुषकरिष्यसिकरिष्यथःकरिष्यथ
लृट् — उत्तम पुरुषकरिष्यामिकरिष्यावःकरिष्यामः

7. अस् धातु — होना / वर्तमान रहना

लकार / पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
लट् — प्रथम पुरुषअस्तिस्तःसन्ति
लट् — मध्यम पुरुषअसिस्थःस्थ
लट् — उत्तम पुरुषअस्मिस्वःस्मः
लोट् — प्रथम पुरुषअस्तु, स्तात्स्ताम्सन्तु
लोट् — मध्यम पुरुषएधि, स्तात्स्तम्स्त
लोट् — उत्तम पुरुषअसानिअसावअसाम
लङ् — प्रथम पुरुषआसीत्आस्ताम्आसन्
लङ् — मध्यम पुरुषआसीःआस्तम्आस्त
लङ् — उत्तम पुरुषआसम्आस्वआस्म
विधिलिङ् — प्रथम पुरुषस्यात्स्याताम्स्युः
विधिलिङ् — मध्यम पुरुषस्याःस्यातम्स्यात
विधिलिङ् — उत्तम पुरुषस्याम्स्यावस्याम
लृट् — प्रथम पुरुषभविष्यतिभविष्यतःभविष्यन्ति
लृट् — मध्यम पुरुषभविष्यसिभविष्यथःभविष्यथ
लृट् — उत्तम पुरुषभविष्यामिभविष्यावःभविष्यामः

धातु रूप पढ़ने का सरल क्रम

किसी भी धातु के रूप याद करते समय पहले लकार पहचानें, फिर प्रथम, मध्यम और उत्तम पुरुष के क्रम में एकवचन, द्विवचन और बहुवचन के रूप पढ़ें। इसी क्रम से अन्य धातुओं के रूपों का भी अभ्यास किया जा सकता है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • धातु रूप पुरुष और वचन के अनुसार बदलते हैं।
  • प्रत्येक लकार में तीन पुरुष और तीन वचन होने से कुल नौ रूप होते हैं।
  • पठ् का अर्थ पढ़ना, लिख् का लिखना और गम् का जाना है।
  • भू और अस् का सम्बन्ध होने से, दा का देने से तथा कृ का करने से है।
  • लट्, लोट्, लङ्, विधिलिङ् और लृट्—इन पाँच लकारों में प्रमुख धातु रूपों का अभ्यास आवश्यक है।
Topic 5 पुरुष एवं वचन के अनुसार क्रिया का प्रयोग

पुरुष एवं वचन के अनुसार क्रिया का प्रयोग

पुरुष का ज्ञान

संस्कृत में कर्ता के अनुसार क्रिया के भी तीन पुरुष होते हैं। वाक्य में प्रयुक्त कर्ता किस पुरुष और किस वचन में है, इसके आधार पर क्रिया का रूप निर्धारित होता है। इसलिए संस्कृत वाक्य-निर्माण और अनुवाद में पुरुष तथा वचन का ज्ञान आवश्यक है।

संस्कृत में तीन पुरुष होते हैं—

  1. प्रथम पुरुष या अन्य पुरुष
  2. मध्यम पुरुष
  3. उत्तम पुरुष
पुरुष मुख्य कर्ता अर्थ
प्रथम पुरुष / अन्य पुरुष संज्ञा एवं अन्य सर्वनाम शब्द वह, वे, राम, बालक, सीता आदि
मध्यम पुरुष त्वम्, युवाम्, यूयम् तुम, तुम दोनों, तुम सब
उत्तम पुरुष अहम्, आवाम्, वयम् मैं, हम दोनों, हम सब

1. प्रथम पुरुष या अन्य पुरुष

प्रथम पुरुष को अन्य पुरुष भी कहा जाता है। युष्मद् और अस्मद् शब्द के कर्ताओं को छोड़कर अन्य सभी कर्ता प्रथम पुरुष के अन्तर्गत आते हैं।

जैसे—सः, रामः, बालकः, मोहनः, सीता, बालिका आदि।

प्रथम पुरुष के उदाहरण
  1. सः पठति। — वह पढ़ता है।
  2. तौ पठतः। — वे दोनों पढ़ते हैं।
  3. ते पठन्ति। — वे सब पढ़ते हैं।
  4. बालिका गच्छति। — बालिका जाती है।
  5. विवेकः अद्य गृहं गच्छति। — विवेक आज घर जा रहा है।
  6. बालकः तिष्ठति। — बालक बैठा है।
  7. ते गृहे किम् अकुर्वन्? — वे सब घर पर क्या कर रहे थे?
  8. सः किमर्थम् लज्जते? — वह क्यों लज्जित होता है?
  9. सन्तोषः उत्तमं सुखम् अस्ति। — सन्तोष उत्तम सुख है।
  10. अभ्यासेन निपुणता वर्धते। — अभ्यास से निपुणता बढ़ती है।

2. मध्यम पुरुष

मध्यम पुरुष में केवल युष्मद् शब्द के तीन कर्ता—त्वम्, युवाम् और यूयम्—प्रयुक्त होते हैं। इनके अतिरिक्त कोई अन्य कर्ता मध्यम पुरुष में प्रयुक्त नहीं होता।

वचन कर्ता पठ् धातु गम् धातु
एकवचन त्वम् त्वम् पठसि।
तुम पढ़ते हो।
त्वम् गच्छसि।
तुम जाते हो।
द्विवचन युवाम् युवाम् पठथः।
तुम दोनों पढ़ते हो।
युवाम् गच्छथः।
तुम दोनों जाते हो।
बहुवचन यूयम् यूयम् पठथ।
तुम सब पढ़ते हो।
यूयम् गच्छथ।
तुम सब जाते हो।

3. उत्तम पुरुष

उत्तम पुरुष में केवल अस्मद् शब्द के तीन कर्ता—अहम्, आवाम् और वयम्—प्रयुक्त होते हैं। इनके अतिरिक्त कोई अन्य कर्ता उत्तम पुरुष में प्रयुक्त नहीं होता।

वचन कर्ता पठ् धातु गम् धातु
एकवचन अहम् अहम् पठामि।
मैं पढ़ता हूँ।
अहम् गच्छामि।
मैं जाता हूँ।
द्विवचन आवाम् आवाम् पठावः।
हम दोनों पढ़ते हैं।
आवाम् गच्छावः।
हम दोनों जाते हैं।
बहुवचन वयम् वयम् पठामः।
हम सब पढ़ते हैं।
वयम् गच्छामः।
हम सब जाते हैं।

पुरुष एवं वचन के अनुसार क्रिया का प्रयोग

वाक्य में कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार क्रिया का रूप बदलता है। इसे पठ् धातु के उदाहरण से सरलता से समझा जा सकता है—

पुरुष एकवचन द्विवचन बहुवचन
प्रथम पुरुष
(अन्य पुरुष)
बालकः पठति।
लड़का पढ़ता है।

सः पठति।
वह पढ़ता है।
बालकौ पठतः।
दो लड़के पढ़ते हैं।

तौ पठतः।
वे दोनों पढ़ते हैं।
बालकाः पठन्ति।
लड़के पढ़ते हैं।

ते पठन्ति।
वे सब पढ़ते हैं।
मध्यम पुरुष त्वम् पठसि।
तुम पढ़ते हो।
युवाम् पठथः।
तुम दोनों पढ़ते हो।
यूयम् पठथ।
तुम सब पढ़ते हो।
उत्तम पुरुष अहम् पठामि।
मैं पढ़ता हूँ।
आवाम् पठावः।
हम दोनों पढ़ते हैं।
वयम् पठामः।
हम सब पढ़ते हैं।

पुरुष और वचन की पहचान

  • सः, तौ, ते अथवा किसी संज्ञा के साथ क्रिया हो तो प्रथम पुरुष होता है।
  • त्वम्, युवाम्, यूयम् के साथ मध्यम पुरुष का प्रयोग होता है।
  • अहम्, आवाम्, वयम् के साथ उत्तम पुरुष का प्रयोग होता है।
  • एक कर्ता के लिए एकवचन, दो के लिए द्विवचन तथा दो से अधिक के लिए बहुवचन क्रिया-रूप प्रयुक्त होता है।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संस्कृत में प्रथम, मध्यम और उत्तम—तीन पुरुष होते हैं।
  • प्रथम पुरुष को अन्य पुरुष भी कहा जाता है।
  • त्वम्, युवाम् और यूयम् मध्यम पुरुष के कर्ता हैं।
  • अहम्, आवाम् और वयम् उत्तम पुरुष के कर्ता हैं।
  • कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार क्रिया का रूप बदलता है।
  • प्रत्येक पुरुष में एकवचन, द्विवचन और बहुवचन—तीन वचन होते हैं।

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Topic 6 संस्कृत अनुवाद के सामान्य नियम

संस्कृत अनुवाद के सामान्य नियम

संस्कृत अनुवाद के सामान्य नियम

संस्कृत में सही अनुवाद करने के लिए कर्ता, क्रिया, पुरुष, वचन, लिंग, कारक और विभक्ति का उचित ज्ञान होना आवश्यक है। वाक्य का अनुवाद करते समय इनका क्रमबद्ध रूप से ध्यान रखने पर सही संस्कृत वाक्य बनाया जा सकता है।

1. सबसे पहले कर्ता की पहचान करें

अनुवाद करते समय सबसे पहले वाक्य के कर्ता को पहचानना चाहिए। क्रिया से ‘कौन?’ लगाकर प्रश्न करने पर जो उत्तर प्राप्त होता है, वह कर्ता होता है।

उदाहरण—

रमेशः क्रीडति।

प्रश्न—कौन खेलता है?
उत्तर—रमेश।

अतः इस वाक्य का अर्थ है—रमेश खेलता है।

2. कर्ता के वचन के अनुसार क्रिया का प्रयोग करें

कर्ता और क्रिया के वचन में समानता होती है। यदि कर्ता एकवचन है तो क्रिया भी एकवचन, कर्ता द्विवचन है तो क्रिया द्विवचन और कर्ता बहुवचन है तो क्रिया भी बहुवचन होती है।

कर्ता का वचन क्रिया का वचन
एकवचनएकवचन
द्विवचनद्विवचन
बहुवचनबहुवचन

जैसे—रमेशः क्रीडति। यहाँ ‘रमेशः’ एकवचन कर्ता है, इसलिए ‘क्रीडति’ क्रिया भी एकवचन में है।

3. काल के अनुसार लकार पहचानें

क्रिया के काल का बोध कराने के लिए सामान्यतः पाँच लकारों का प्रयोग किया जाता है—

  • लट् लकार — वर्तमान काल
  • लङ् लकार — भूतकाल
  • लृट् लकार — भविष्यत्काल
  • लोट् लकार — आज्ञा आदि के अर्थ में
  • विधिलिङ् लकार — ‘चाहिए’ के अर्थ में

4. कर्ता के अनुसार पुरुष का चयन करें

संस्कृत में तीन पुरुष होते हैं—

  1. प्रथम पुरुष या अन्य पुरुष
  2. मध्यम पुरुष
  3. उत्तम पुरुष

वाक्य में प्रयुक्त कर्ता के अनुसार उचित पुरुष की क्रिया का प्रयोग करना चाहिए।

5. वचन का सही प्रयोग करें

संस्कृत में तीन वचन होते हैं—

  • एकवचन — एक के लिए
  • द्विवचन — दो के लिए
  • बहुवचन — दो से अधिक के लिए

अनुवाद करते समय कर्ता की संख्या पहचानकर उसी वचन की क्रिया का प्रयोग करना आवश्यक है।

6. लिंग का ध्यान रखें

संस्कृत में तीन लिंग होते हैं—

  1. पुल्लिंग
  2. स्त्रीलिंग
  3. नपुंसकलिंग

संज्ञा और अन्य शब्दों का सही रूप चुनते समय उनके लिंग का ध्यान रखना चाहिए।

7. कर्ता और क्रिया में पुरुष तथा वचन की समानता

कर्ता और क्रिया के पुरुष तथा वचन में समानता होती है। जिस पुरुष और वचन में कर्ता होगा, क्रिया भी उसी पुरुष और वचन में होगी।

कर्ता के लिंग का क्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। क्रिया का रूप मुख्यतः कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार निर्धारित होता है।

8. पुरुष की पहचान

कर्ता पुरुष
युष्मद् — त्वम्, युवाम्, यूयम् आदि मध्यम पुरुष
अस्मद् — अहम्, आवाम्, वयम् आदि उत्तम पुरुष
शेष सभी प्रकार के कर्ता प्रथम पुरुष / अन्य पुरुष

9. वर्तमान काल की क्रिया के साथ ‘स्म’ का प्रयोग

वर्तमान काल की क्रिया में ‘स्म’ जोड़ने से भूतकाल की क्रिया का बोध कराया जाता है।

उदाहरण—

सः पठति स्म। — वह पढ़ा।

10. कारक और विभक्ति का ज्ञान

संस्कृत में अनुवाद करते समय विभक्ति, कारक तथा उनके चिह्नों की जानकारी आवश्यक होती है। वाक्य में किसी शब्द का अन्य शब्दों और क्रिया से सम्बन्ध देखकर उसकी उचित विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

अनुवाद करते समय उपयोगी क्रम

  1. सबसे पहले कर्ता पहचानें।
  2. कर्ता का पुरुष और वचन निर्धारित करें।
  3. क्रिया का काल या भाव पहचानकर उचित लकार चुनें।
  4. कर्ता के पुरुष और वचन के अनुसार क्रिया का रूप रखें।
  5. संज्ञा आदि शब्दों के लिंग पर ध्यान दें।
  6. कारक और विभक्ति के अनुसार अन्य शब्दों के उचित रूप लगाएँ।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • अनुवाद में सबसे पहले कर्ता की पहचान करनी चाहिए।
  • कर्ता और क्रिया के पुरुष तथा वचन में समानता होती है।
  • संस्कृत में प्रथम, मध्यम और उत्तम—तीन पुरुष तथा एकवचन, द्विवचन और बहुवचन—तीन वचन होते हैं।
  • युष्मद् के लिए मध्यम, अस्मद् के लिए उत्तम तथा शेष कर्ताओं के लिए प्रथम पुरुष का प्रयोग होता है।
  • कर्ता के लिंग का क्रिया के रूप पर प्रभाव नहीं पड़ता।
  • सही अनुवाद के लिए लकार, लिंग, वचन, पुरुष, कारक और विभक्ति का ज्ञान आवश्यक है।
Topic 7 संस्कृत से हिन्दी एवं हिन्दी से संस्कृत अनुवाद

संस्कृत से हिन्दी एवं हिन्दी से संस्कृत अनुवाद

संस्कृत से हिन्दी अनुवाद

संस्कृत वाक्य का हिन्दी में अनुवाद करते समय कर्ता, क्रिया, काल, पुरुष, वचन तथा विभक्ति को पहचानना आवश्यक है। इनके आधार पर वाक्य का सही अर्थ समझा जा सकता है।

संस्कृत वाक्य हिन्दी अर्थ
मम मित्रं पुस्तकं अपठत्। मेरे मित्र ने पुस्तक पढ़ी।
ते गृहे किम् करिष्यन्ति? वे लोग घर पर क्या करेंगे?
सः गोदुग्धम् पिबति। वह गाय का दूध पीता है।
वयं विद्यालयं गच्छामः। हम लोग विद्यालय जाते हैं।
त्वं शीघ्रं गृहम् गच्छ। तुम शीघ्र घर जाओ।
वयं मित्राणां सहायतां कुर्मः। हमें मित्रों की सहायता करनी चाहिए।
विवेकः अद्य गृहं गमिष्यति। विवेक आज घर जाएगा।
सदाचारेण विश्वासं वर्धते। सदाचार से विश्वास बढ़ता है।
सः किमर्थम् लज्जते? वह क्यों लज्जित होता है?
आवां अद्य चलचित्रम् अपश्याव। हम दोनों ने आज चलचित्र देखा।
आवां कक्षायाम् स्व पाठम् पठिष्यावः। हम दोनों कक्षा में अपना पाठ पढ़ेंगे।
सा गृहम् अगच्छत्। वह घर गई।
संतोषः उत्तमं सुखम् अस्ति। सन्तोष उत्तम सुख है।
वृक्षात् पत्राणि पतन्ति। पेड़ से पत्ते गिरते हैं।
अहं वाराणसीं गमिष्यामि। मैं वाराणसी जाऊँगा।
अहं गृहं गच्छेयम्। मुझे घर जाना चाहिए।
सत्येन आत्मशक्तिः वर्धते। सत्य से आत्मशक्ति बढ़ती है।
अशौचेन दारिद्र्यं वर्धते। अपवित्रता से दरिद्रता बढ़ती है।
अभ्यासेन निपुणता वर्धते। अभ्यास से निपुणता बढ़ती है।
औदार्येण प्रभुत्वं वर्धते। उदारता से अधिकार बढ़ते हैं।
उपेक्षया शत्रुता वर्धते। उपेक्षा से शत्रुता बढ़ती है।
मानव जीवनस्य संस्कारणम् एव संस्कृतिः अस्ति। मानव जीवन को संस्कारित करना ही संस्कृति है।
भारतीय संस्कृतिः सर्वश्रेष्ठः अस्ति। भारतीय संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है।
सर्वे सन्तु निरामयाः सर्वे भद्राणि पश्यन्तु च। सभी निरोग रहें और कल्याण प्राप्त करें।
कर्म कृत्वा एव फलं प्राप्यते। काम करके ही फल मिलता है।
अस्माकं पूर्वजाः धन्याः आसन्। हमारे पूर्वज धन्य थे।
वयं सर्वेऽपि एकस्याः संस्कृतेः समुपासकाः सन्ति। हम सब एक ही संस्कृति के उपासक हैं।
जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। जन्म भूमि स्वर्ग से भी बड़ी है।
विदेशेषु धनं मित्रं भवति। विदेश में धन मित्र होता है।
विद्या धनं सर्व धनं प्रधानम्। विद्या धन सब धनों में प्रधान है।
मनुष्यः लोभहीनः भवेत्। मनुष्य को निर्लोभी होना चाहिए।
अद्य मम विद्यालये उत्सवः भविष्यति। आज मेरे विद्यालय में उत्सव होगा।
ताजमहलः यमुना तटे स्थितः अस्ति। ताजमहल यमुना किनारे पर स्थित है।
वयं नित्यं भ्रमेम। हमें प्रतिदिन भ्रमण करना चाहिए।
धेनोः दुग्धं गुणकारी भवति। गाय का दूध गुणकारी होता है।
वने मयूराः नृत्यन्ति। जंगल में मोर नाच रहे हैं।
केनापि सह दुष्कृतं मा कुरु। किसी के साथ बुरा कार्य मत करो।
सत्यं मधुरं च वद। सत्य और मीठा बोलो।
सेवकः स्वकार्यं अकरोत्। सेवक ने अपना कार्य किया।
अहं पुस्तकं पठामि। मैं पुस्तक पढ़ता हूँ।
तं प्रति दयां कुरु। उसके प्रति दया करो।
शिशुः प्रकृत्या सरलः भवति। बालक स्वभाव से सरल होता है।
गुरवे नमः। गुरु को नमस्कार।

हिन्दी से संस्कृत अनुवाद

हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद करते समय पहले कर्ता का पुरुष और वचन पहचानना चाहिए। इसके बाद क्रिया का काल या भाव देखकर उचित लकार तथा वाक्य के अन्य शब्दों के लिए सही विभक्ति का प्रयोग करना चाहिए।

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
यह घर से विद्यालय जाता है। अयं गृहात् विद्यालयं गच्छति।
तुम दोनों संस्कृत पढ़ते हो। युवां संस्कृतं पठथः।
लड़के मैदान में खेलते हैं। बालकाः क्रीडाक्षेत्रे क्रीडन्ति।
राम रामपुर में रहता है। रामः रामपुरे वसति।
वृक्ष पर तीन पत्ते हैं। वृक्षे त्रीणि पत्राणि सन्ति।
वह विद्यालय से आता है। सः विद्यालयात् आगच्छति।
राम के पास दो फूल हैं। रामं निकषा द्वे पुष्पे स्तः।
राम ने रावण को मारा। रामः रावणं हतवान्।
वे सब बाजार गए। ते आपणं गतवन्तः।
बालक हँसता है। बालकः हसति।
शीला ने पुस्तक पढ़ी। शीला पुस्तकम् अपठत्।
पत्ते गिरते हैं। पत्राणि पतन्ति।
बन्दर दौड़ेंगे। बन्दरः धाविष्यन्ति।
गणेश को लड्डू अच्छा लगता है। गणेशाय मोदकम् रुच्यते।
गुरु को नमस्कार है। गुरवे नमः।
राम पढ़ने के लिए काशी जाता है। रामः पठनाय काशीपुरीं गच्छति।
श्याम पिता के साथ गया। श्यामः पित्रेण सह अगच्छत्।
मैं प्रतिदिन विद्यालय जाता हूँ। अहं प्रतिदिनं विद्यालयं गच्छामि।
तुम कहाँ रहते हो? त्वं कुत्र वससि।
श्याम पैर से लंगड़ा है। श्यामः पादेन खञ्जः।
पेड़ से फल गिरते हैं। वृक्षात् पत्राणि पतन्ति।

अनुवाद में ध्यान रखने योग्य बातें

  • सबसे पहले वाक्य के कर्ता को पहचानें।
  • कर्ता का पुरुष और वचन देखकर क्रिया का उचित रूप चुनें।
  • क्रिया के समय या भाव के अनुसार उचित लकार का प्रयोग करें।
  • कर्ता, कर्म, करण, सम्प्रदान, अपादान, सम्बन्ध और अधिकरण के अनुसार उचित विभक्ति लगाएँ।
  • संस्कृत से हिन्दी अनुवाद में पहले क्रिया पहचानने से वाक्य का काल और भाव समझना सरल हो जाता है।
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • संस्कृत से हिन्दी अनुवाद में कर्ता, क्रिया, पुरुष, वचन, काल और विभक्ति की पहचान आवश्यक है।
  • हिन्दी से संस्कृत अनुवाद में कर्ता के अनुसार पुरुष और वचन की क्रिया लगाई जाती है।
  • वर्तमान, भूत, भविष्य, आज्ञा और ‘चाहिए’ के भाव के अनुसार उचित लकार का प्रयोग किया जाता है।
  • वाक्य के विभिन्न शब्दों का उचित रूप उनके कारक और विभक्ति के अनुसार निर्धारित होता है।
  • नियमित वाक्य-अभ्यास से संस्कृत और हिन्दी दोनों दिशाओं में अनुवाद सरल हो जाता है।

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Topic 8 धातु, लकार एवं पुरुष पर आधारित गतिविधियाँ

धातु, लकार एवं पुरुष पर आधारित गतिविधियाँ

धातु, लकार एवं पुरुष पर आधारित गतिविधियाँ

धातु, लकार, पुरुष और वचन का ज्ञान कराने के लिए विद्यार्थियों को चित्र, रिक्त स्थान, क्रिया-पहचान तथा अनुवाद जैसी गतिविधियाँ कराई जा सकती हैं। इन गतिविधियों से विद्यार्थी क्रिया के रूपों को केवल याद ही नहीं करते, बल्कि वाक्यों में उनका प्रयोग करना भी सीखते हैं।

गतिविधि–1 : चित्र देखकर वाक्य बनाना

शिक्षक विद्यार्थियों को विभिन्न जानवरों और वस्तुओं के चित्र दिखाकर उनके संस्कृत नाम बताए। इसके बाद विद्यार्थियों से उन शब्दों का प्रयोग करते हुए उचित क्रिया, लकार और पुरुष के आधार पर संस्कृत वाक्य बनवाए जाएँ।

इस गतिविधि के लिए निम्न शब्द दिए गए हैं—

संस्कृत शब्द अर्थ
ग्रामः गाँव
अजा बकरी
सिंहः सिंह
ओदनम् पका हुआ चावल / भात
द्विदलम् दाल

विद्यार्थी इन शब्दों को देखकर उपयुक्त क्रिया चुनते हुए वाक्य बनाएँ। इससे संज्ञा तथा क्रिया के साथ पुरुष और लकार के प्रयोग का अभ्यास होता है।

गतिविधि–2 : पुरुष एवं वचन के अनुसार क्रिया-रूप

विद्यार्थियों को कर्ता का पुरुष और वचन पहचानकर उचित क्रिया-रूप से रिक्त स्थान भरने का अभ्यास कराया जाए।

  1. अश्वौ तीव्रं __________।
  2. त्वम् __________।
  3. छात्राः __________।
  4. अहम् __________।
  5. सः गजः __________।

इस अभ्यास में विद्यार्थी पहले कर्ता का वचन और पुरुष पहचानते हैं तथा उसके अनुसार उचित क्रिया का चयन करते हैं।

लकार एवं पुरुष की पहचान

वाक्यों में प्रयुक्त क्रिया को देखकर उसका लकार और पुरुष पहचानने का अभ्यास कराया जा सकता है।

  1. सः किं करोति?
  2. त्वं किं पठसि?
  3. सः पुस्तकम् अपठत्
  4. अहं गृहकार्यं अकरवम्

इस प्रकार विद्यार्थी क्रिया के रूप को देखकर यह पहचानने का अभ्यास करते हैं कि वह किस काल अथवा लकार में है और किस पुरुष के अनुसार प्रयुक्त हुई है।

गतिविधि–3 : साधारण वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद

धातु, पुरुष, वचन और लकार के ज्ञान को व्यावहारिक बनाने के लिए सरल हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कराया जाए।

हिन्दी वाक्य संस्कृत अनुवाद
मेरे विद्यालय में सभी शिक्षक कर्तव्यनिष्ठ हैं। मम विद्यालये सर्वे अध्यापकाः कर्तव्यपरायणाः सन्ति।
वह एक सिंह है। सः एकः सिंहः अस्ति।
तुम विद्यालय जाओ। त्वम् विद्यालयम् गच्छ।
मैं घर जाता हूँ। अहम् गृहं गच्छामि।

गतिविधियों का शैक्षिक उपयोग

चित्रों से शब्द पहचानना, कर्ता के अनुसार क्रिया चुनना, क्रिया से लकार और पुरुष पहचानना तथा सरल वाक्यों का अनुवाद करना—इन सभी गतिविधियों से धातु-रूपों का व्यावहारिक अभ्यास होता है। इससे विद्यार्थी पुरुष, वचन और लकार के अनुसार सही क्रिया-रूप का प्रयोग करना सीखते हैं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • चित्रों और संस्कृत शब्दों की सहायता से धातु, लकार और पुरुष का अभ्यास कराया जा सकता है।
  • कर्ता का पुरुष और वचन पहचानकर उचित क्रिया-रूप का प्रयोग किया जाता है।
  • क्रिया के रूप से उसके लकार और पुरुष की पहचान कराई जा सकती है।
  • रिक्त स्थान की पूर्ति द्वारा पुरुष और वचन के अनुसार क्रिया-प्रयोग का अभ्यास होता है।
  • सरल हिन्दी वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कराने से धातु, लकार, पुरुष और वचन का व्यावहारिक ज्ञान विकसित होता है।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

‘वसति’ शब्द में लकार है—

व्याख्या: ‘वसति’ वर्तमान काल की क्रिया है, इसलिए इसमें लट् लकार है।
Q 2

‘एताम्’ में पुरुष है—

व्याख्या: ‘एताम्’ प्रथम पुरुष अथवा अन्य पुरुष से सम्बन्धित रूप है।
Q 3

पठामः में वचन है—

व्याख्या: ‘पठामः’ उत्तम पुरुष बहुवचन का क्रिया-रूप है।
Q 4

अकुरुताम् में लकार है—

व्याख्या: ‘अकुरुताम्’ कृ धातु का लङ् लकार का रूप है।
Q 5

सेव धातु का मध्यम पुरुष बहुवचन है—

व्याख्या: सेव धातु का मध्यम पुरुष बहुवचन रूप ‘सेवध्वे’ होता है।
Q 6

संस्कृत में कितने पुरुष होते हैं—

व्याख्या: संस्कृत में प्रथम, मध्यम और उत्तम—तीन पुरुष होते हैं।
Q 7

माध्यमिक स्तर पर संस्कृत में लकारों की संख्या है—

व्याख्या: माध्यमिक स्तर पर लट्, लोट्, विधिलिङ्, लङ् और लृट्—पाँच लकारों का अध्ययन किया जाता है।
Q 8

वर्तमान काल को कहते हैं—

व्याख्या: वर्तमान काल को व्यक्त करने के लिए लट् लकार का प्रयोग होता है।
Q 9

पठ् धातु का प्रथम पुरुष द्विवचन में रूप है—

व्याख्या: लङ् लकार में पठ् धातु का प्रथम पुरुष द्विवचन रूप ‘अपठताम्’ होता है।
Q 10

‘कृ’ धातु लङ् लकार मध्यम पुरुष एकवचन में रूप होगा—

व्याख्या: कृ धातु का लङ् लकार मध्यम पुरुष एकवचन रूप ‘अकरोः’ होता है।
Q 11

भव शब्द रूप है—

व्याख्या: ‘भव’ भू धातु का मध्यम पुरुष एकवचन रूप है।
Q 12

‘अगाय’ क्रियापद में प्रयुक्त लकार है—

व्याख्या: ‘अगाय’ क्रियापद में लङ् लकार प्रयुक्त है।
Q 13

‘हमसब पाठ पढ़ेंगे’ वाक्य का संस्कृत अनुवाद है—

व्याख्या: ‘वयम्’ उत्तम पुरुष बहुवचन है, इसलिए भविष्यत्काल में क्रिया ‘पठिष्यामः’ होगी।
Q 14

लट्लकार प्रथम पुरुष बहुवचन में ‘दा’ धातु का रूप है—

व्याख्या: दा धातु का लट् लकार प्रथम पुरुष बहुवचन रूप ‘ददति’ है।
Q 15

लिखसि रूप है—

व्याख्या: ‘लिखसि’ लिख् धातु का लट् लकार मध्यम पुरुष एकवचन रूप है।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय संस्कृत के अध्याय धातु रूप के अन्तर्गत लकार का प्रयोग से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1 2019

‘दा’ धातु का लृटलकार में रूप लिखिए।

Q 2 2022

धातु से आप क्या समझते हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए।

Q 3 2016

पठ् धातु का लट् लकार एवं लङ् लकार में प्रथम, मध्यम तथा उत्तम पुरुष का तीनों वचनों में रूप लिखिए।

Q 4 2021

संज्ञा शब्दों का प्रयोग करते हुए लृटलकार प्रथम पुरुष में चार वाक्य संस्कृत में लिखिए।

Q 5 2017

लिख् धातु का लोट् लकार में रूप लिखिए।

Q 6 2018

“कृ” धातु का लट्लकार में रूप लिखिए।

Q 7 2021

लङ्लकार किस काल के लिए प्रयुक्त होता है, दो उदाहरण लिखिए।

Q 8 2016

‘भू’ धातु का रूप लृटलकार के तीनों वचनों व पुरुषों में लिखिए।

Q 9 2016

निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत से हिन्दी में अनुवाद कीजिए— (i) यूयम् पठथ। (ii) अहम् पठामि। (iii) वयम् गच्छामः। (iv) वृक्षात् फलं अपतत्।

Q 10 2017

निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए— (i) यह घर से विद्यालय जाता है। (ii) तुम दोनों संस्कृत पढ़ते हो। (iii) लड़के मैदान में खेलते हैं। (iv) राम रामपुर में रहता है।

Q 11 2018

निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए— (i) वृक्ष पर तीन पत्ते हैं। (ii) वह विद्यालय से आता है। (iii) राम के पास दो फूल हैं। (iv) राम ने रावण को मारा।

Q 12 2016

निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत से हिन्दी में अनुवाद कीजिए— (i) अहं पुस्तकं पठामि। (ii) तं प्रति दयां कुरु। (iii) शिशुः प्रकृत्या सरलः भवति। (iv) गुरवे नमः।

Q 13 2021

संस्कृत में अनुवाद कीजिए— (i) तुम पढ़ते हो। (ii) हम दोनों जाते हैं। (iii) मैं प्रतिदिन खेलता हूँ। (iv) वे सब बाजार गए।

Q 14 2022

संस्कृत में अनुवाद कीजिए— (i) बालक हँसता है। (ii) शीला ने पुस्तक पढ़ी। (iii) पत्ते गिरते हैं। (iv) बन्दर दौड़ेंगे।

Q 15 2023

निम्नलिखित का संस्कृत में अनुवाद कीजिए— (i) गणेश को लड्डू अच्छे लगते हैं। (ii) गुरु को नमस्कार है। (iii) राम पढ़ने के लिए काशी जाता है। (iv) श्याम पिता के साथ गया।

Q 16 2019

निम्नलिखित वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए— (i) मैं प्रतिदिन विद्यालय जाता हूँ। (ii) तुम कहाँ रहते हो? (iii) श्याम पैर से लंगड़ा है। (iv) पेड़ से फल गिरते हैं।

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Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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