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Home Study Material Semester 1 संस्कृत आस-पास की वस्तुओं, पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम
Chapter 1 • संस्कृत

आस-पास की वस्तुओं, पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम

UP DELED Semester 1 के संस्कृत विषय के इस अध्याय में संस्कृत वर्ण, वर्णमाला, वर्णभेद, संस्कृत शिक्षण का महत्त्व, पशु-पक्षियों, आस-पास की वस्तुओं एवं सामान्य जीव-जंतुओं के संस्कृत नाम तथा इनके शिक्षण की विभिन्न विधियों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

7
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15
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Notes
Topic 1 संस्कृत शिक्षण—वर्ण, वर्णमाला एवं वर्णभेद

संस्कृत शिक्षण—वर्ण, वर्णमाला एवं वर्णभेद

संस्कृत शिक्षण

संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। इसका साहित्य ऋग्वेद काल से लेकर आज तक निरन्तर प्रवाहित होता रहा है। ज्ञान-विज्ञान के अनेक ग्रन्थ संस्कृत भाषा में लिखे गए हैं तथा भारतीय भाषाओं में संस्कृत के अनेक शब्द प्रयुक्त होते हैं।

संस्कृत का अध्ययन भारतीय भाषाओं को समझने में सहायक है। बहुभाषी कक्षा में जिस प्रकार संस्कृत अन्य भारतीय भाषाओं को सीखने में सहायता करती है, उसी प्रकार संस्कृत सीखने में भी अन्य भाषाओं का सहयोग लिया जा सकता है।

संस्कृत वर्ण

संस्कृत भाषा भारत की महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक सम्पत्तियों में से एक है। इसके व्यवस्थित अध्ययन में वर्ण, शब्द, वाक्य, सन्धि, समास, शब्द-रूप, धातु-रूप, कारक, उपसर्ग और प्रत्यय आदि का ज्ञान आवश्यक होता है।

भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई को वर्ण कहा जाता है। वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।

संस्कृत वर्णमाला

संस्कृत वर्णमाला का स्वरूप हिन्दी वर्णमाला से काफी मिलता-जुलता है। पुस्तक के अनुसार संस्कृत में हिन्दी की अपेक्षा दो अतिरिक्त स्वर—ऋ तथा लृ—का उल्लेख किया गया है।

संस्कृत वर्णमाला महर्षि पाणिनि के चौदह माहेश्वर सूत्रों पर आधारित मानी गई है। इन सूत्रों में वर्णों का क्रम सामान्य हिन्दी वर्णमाला के क्रम से भिन्न है।

चौदह माहेश्वर सूत्र

  1. अ इ उ ण्
  2. ऋ लृ क्
  3. ए ओ ङ्
  4. ऐ औ च्
  5. ह य व र ट्
  6. ल ण्
  7. ञ म ङ ण न म्
  8. झ भ ञ्
  9. घ ढ ध ष्
  10. ज ब ग ड द श्
  11. ख फ छ ठ थ च ट त व्
  12. क प य्
  13. श ष स र्
  14. ह ल्

महर्षि पाणिनि ने माहेश्वर सूत्रों में स्वरों को अच् प्रत्याहार तथा व्यंजनों को हल् प्रत्याहार के अन्तर्गत वर्णित किया है।

संस्कृत में वर्णभेद

संस्कृत में वर्णों को मुख्य रूप से दो भागों में बाँटा जाता है—

  1. स्वर
  2. व्यंजन

1. स्वर

स्वरों को उच्चारण-काल के आधार पर ह्रस्व और दीर्घ स्वर में विभाजित किया गया है।

ह्रस्व स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में कम समय लगता है, वे ह्रस्व स्वर कहलाते हैं। पुस्तक में पाँच ह्रस्व स्वर दिए गए हैं—

अ, इ, उ, ऋ, लृ

दीर्घ स्वर

जिन स्वरों के उच्चारण में ह्रस्व स्वर की अपेक्षा अधिक समय लगता है, वे दीर्घ स्वर कहलाते हैं। पुस्तक के अनुसार आठ दीर्घ स्वर हैं—

आ, ई, ऊ, ॠ, ए, ऐ, ओ, औ

2. व्यंजन

संस्कृत के व्यंजनों को मुख्य रूप से तीन वर्गों में रखा गया है—

स्पर्श व्यंजन

स्पर्श व्यंजनों की संख्या 25 है। ये पाँच वर्गों में विभाजित हैं—

  • क, ख, ग, घ, ङ
  • च, छ, ज, झ, ञ
  • ट, ठ, ड, ढ, ण
  • त, थ, द, ध, न
  • प, फ, ब, भ, म
अन्तःस्थ व्यंजन

अन्तःस्थ व्यंजनों की संख्या चार है—

य, र, ल, व

ऊष्म व्यंजन

ऊष्म व्यंजनों की संख्या भी चार है—

श, ष, स, ह

संयुक्त व्यंजन

जब दो व्यंजन वर्ण मिलकर एक संयुक्त रूप धारण करते हैं, तो उन्हें संयुक्ताक्षर या संयुक्त व्यंजन कहा जाता है। जैसे—

  • क् + ष = क्ष
  • त् + र = त्र
  • ज् + ञ = ज्ञ
  • श् + र = श्र
  • द् + य = द्य
  • द् + व = द्व

पुस्तक के अनुसार संयुक्त अक्षरों को संस्कृत वर्णमाला में अलग स्वतंत्र वर्ण नहीं माना जाता है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • भाषा की सबसे छोटी ध्वनि-इकाई वर्ण कहलाती है और वर्णों के व्यवस्थित समूह को वर्णमाला कहते हैं।
  • संस्कृत वर्णमाला महर्षि पाणिनि के 14 माहेश्वर सूत्रों पर आधारित है।
  • पाणिनि ने स्वरों को अच् तथा व्यंजनों को हल् प्रत्याहार के अन्तर्गत रखा है।
  • संस्कृत वर्णों के दो प्रमुख भेद—स्वर और व्यंजन हैं।
  • स्वर दो प्रकार के हैं—ह्रस्व और दीर्घ।
  • व्यंजन तीन प्रमुख वर्गों में बाँटे गए हैं—स्पर्श, अन्तःस्थ और ऊष्म।
  • स्पर्श व्यंजन 25, अन्तःस्थ 4 और ऊष्म व्यंजन 4 हैं।
  • दो व्यंजनों के मेल से बनने वाले संयुक्त रूप को संयुक्ताक्षर कहते हैं; इन्हें अलग स्वतंत्र वर्ण नहीं माना जाता।

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Topic 2 संस्कृत शिक्षण का महत्त्व

संस्कृत शिक्षण का महत्त्व

संस्कृत शिक्षण का महत्त्व

संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। भारतीय संस्कृति का संचित ज्ञान संस्कृत भाषा में सुरक्षित है। इसलिए भारतीय संस्कृति, साहित्य, दर्शन और ज्ञान-परम्परा को समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण माना गया है।

पुस्तक में संस्कृत शिक्षण के महत्त्व को निम्नलिखित बिन्दुओं के माध्यम से स्पष्ट किया गया है—

  1. भारतीय संस्कृति का ज्ञान—प्राचीन भारतीय संस्कृति का विस्तृत स्वरूप संस्कृत साहित्य में सुरक्षित है। इसलिए भारतीय संस्कृति को ठीक प्रकार से समझने के लिए संस्कृत का अध्ययन आवश्यक है।
  2. भारत के गौरवपूर्ण अतीत का ज्ञान—संस्कृत साहित्य में भारत के सुन्दरतम अतीत की झाँकी मिलती है। इसके अध्ययन से भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का ज्ञान प्राप्त होता है।
  3. संस्कृत साहित्य का क्षेत्र अत्यन्त व्यापक है। साहित्य, दर्शन, विज्ञान, ललित कलाएँ, आयुर्वेद और ज्योतिष आदि के अध्ययन के लिए संस्कृत का ज्ञान उपयोगी एवं आवश्यक है।
  4. पुस्तक के अनुसार भारत में आर्य भाषा सम्बन्धी समस्त विकास का स्रोत संस्कृत भाषा है। इसलिए भारतीय भाषाओं के विकास को समझने में भी संस्कृत सहायक है।
  5. पुस्तक में भाषा-वैज्ञानिकों की खोजों के आधार पर संस्कृत को विश्व की अनेक भाषाओं की जननी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इस कारण भाषा-अध्ययन की दृष्टि से इसका विशेष महत्त्व बताया गया है।
  6. संस्कृत का ज्ञान मानसिक, आध्यात्मिक एवं बौद्धिक विकास में सहायक माना गया है। इसके अध्ययन से व्यक्ति के विचारों और ज्ञान का विस्तार होता है।
  7. संस्कृत के नीति-ग्रन्थ नैतिक एवं चारित्रिक शिक्षा प्रदान करते हैं। इनमें निहित शिक्षाएँ मनुष्य को नैतिक मूल्यों के अनुसार जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।
  8. व्यावसायिक एवं व्यावहारिक उन्नति की दृष्टि से भी संस्कृत ग्रन्थों को उपयोगी माना गया है।

निष्कर्ष

इस प्रकार संस्कृत का अध्ययन केवल एक प्राचीन भाषा के ज्ञान तक सीमित नहीं है। यह भारतीय संस्कृति और गौरवपूर्ण अतीत को समझने, साहित्य, दर्शन, विज्ञान, ललित कलाओं, आयुर्वेद और ज्योतिष का अध्ययन करने तथा मानसिक, आध्यात्मिक, बौद्धिक, नैतिक और व्यावहारिक विकास में सहायक है। इसलिए संस्कृत शिक्षण का विशेष महत्त्व है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • भारतीय संस्कृति का संचित ज्ञान संस्कृत में सुरक्षित है।
  • संस्कृत साहित्य से भारत के गौरवपूर्ण अतीत का ज्ञान प्राप्त होता है।
  • साहित्य, दर्शन, विज्ञान, ललित कलाएँ, आयुर्वेद और ज्योतिष के अध्ययन में संस्कृत उपयोगी है।
  • संस्कृत भारतीय आर्य भाषाओं के विकास को समझने में सहायक है।
  • संस्कृत मानसिक, आध्यात्मिक और बौद्धिक विकास में सहायक मानी गई है।
  • संस्कृत नीति-ग्रन्थ नैतिक और चारित्रिक शिक्षा प्रदान करते हैं।
  • व्यावसायिक एवं व्यावहारिक उन्नति में भी संस्कृत ग्रन्थ उपयोगी माने गए हैं।
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Topic 3 पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम

पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम

पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम

बालक अपने आस-पास पाए जाने वाले अनेक पशु-पक्षियों के हिन्दी नामों से पहले से परिचित होते हैं। संस्कृत शिक्षण में इन्हीं परिचित पशु-पक्षियों के संस्कृत नामों का ज्ञान कराकर उनके शब्द-भण्डार को बढ़ाया जा सकता है।

पुस्तक में दिए गए प्रमुख पशु-पक्षियों के हिन्दी तथा संस्कृत नाम निम्नलिखित हैं—

पशु वर्ग

हिन्दी संस्कृत
खरगोश शशकः
गीदड़ शृगालः, गोमायुः
नील गाय गवयः
बन्दर वानरः, मर्कटः
बाघ व्याघ्रः, शार्दूलः
भैंस महिषी, कलुषा
गीदड़ी शृगाली, शिवा
भेड़ मेषः
लोमड़ी लोमशः
वनमानुष वनमनुष्यः
भालू भल्लूकः
शेर सिंहः
सुअर शूकरः, वराहः
घोड़ा घोटक, अश्वः, सप्तिः, वाजिन्, हयः, सैन्धवम्
हाथी गजः, हस्ति, कुंजरः
बकरी अजा
ऊँट उष्ट्रः, क्रमेलकः
गाय गौः, धेनुः
हिरन मृगः, कुरंगः, हरिणः
दरियाई घोड़ा जलाश्वः
बैल वृषभः
तेंदुआ तरक्षुः
कुत्ता कुक्कुरः, श्वानः
कुतिया सरमा, शुनि
गैंडा खड्गी, गण्डकः
घोड़ी अश्वा, घोटिका
कनखजूरा कर्णजल्लिका
भेड़िया वृकः
ऊँटनी उष्ट्री, वार्गी, लम्बोष्ठी
बकरा अजः
हिरनी मृगी, हरिणी
बिल्ली मार्जारः, बिडालः
गधा गर्दभः
चूहा मूषकः

पक्षियों के नाम

हिन्दी संस्कृत
उल्लू उल्लूकः, दिवांधः
कबूतर कपोतः
कोयल पिकः
गौरैया चटका
गरुड़ गरुडः
गिद्ध पक्षी गृध्रः
सारस क्रौञ्चः
शुतुरमुर्ग उष्ट्रपक्षी
बतख वर्तिका
नीलकण्ठ चाषः, नीलकण्ठः
हंसिनी वरटा, मराली, हंसिनी
चकवा चक्रवाकः
चमगादड़ जतुका, अजिनपत्रा
तोता शुकः, कीरः
पपीहा चातकः
मैना सारिका, मदना
मुर्गी कुक्कुटी
हंस हंसः, मरालः
मोर मयूरः, शिखी, केकी
मुर्गा कुक्कुटः
बटेर लावः
बाज शशादनः
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • पशु-पक्षियों के संस्कृत नामों का ज्ञान विद्यार्थियों के संस्कृत शब्द-भण्डार को बढ़ाता है।
  • एक ही पशु या पक्षी के लिए संस्कृत में एक से अधिक नाम भी मिलते हैं, इसलिए परीक्षा की दृष्टि से सभी दिए गए पर्याय महत्त्वपूर्ण हैं।
  • पशु-पक्षियों के नाम चित्र, वार्तालाप तथा आसपास के परिचित उदाहरणों के माध्यम से सरलता से सिखाए जा सकते हैं।

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Topic 4 आस-पास की वस्तुओं एवं सामान्य जीव-जंतुओं के संस्कृत नाम

आस-पास की वस्तुओं एवं सामान्य जीव-जंतुओं के संस्कृत नाम

आस-पास की वस्तुओं के संस्कृत नाम

विद्यार्थियों के संस्कृत शब्द-भण्डार को बढ़ाने के लिए उनके दैनिक जीवन से जुड़ी वस्तुओं, खाद्य पदार्थों, सम्बन्धों, शरीर के अंगों, वृक्षों, फूलों तथा सामान्य जीव-जंतुओं के संस्कृत नामों का ज्ञान कराया जाता है। पुस्तक में दिए गए शब्द निम्नलिखित हैं—

अन्न वर्ग

हिन्दी संस्कृत
अनाजअन्नम्
अरहरआढकी, तुवरी
आटाअट्टं, चूर्णम्
उड़दमाषः
गेहूँगोधूमः
चनाचणकः
चावलतण्डुलः
मूँगमुद्गाः
सरसोंसर्षपः
जौयवः
तिलतिलः
दालद्विदला, दाली, द्विदलम्
बाजरावज्रकः, बजरी, प्रियङ्गुः
मक्कामकाय, मकिजः
मटरहरेणु, कलाय
मसूरमसूरः
बेसनचणकचूर्णम्
मट्ठा, छाछतक्रम्
मक्खननवनीतम्

शाक वर्ग

हिन्दी संस्कृत
अरबीरसिकालु, आलुकी
अदरकआर्द्रकम्
आलूआलुः
आलुबुखाराआलुकम्
ककड़ी, खीराकर्कटी, चर्भटिः
गाजरगुञ्जनम्
कटहलपनसम्
तोरीकोशातकी, जालिनी
कद्दूकूष्माण्डः, तुम्बी
धनियाधान्याकम्
करेलाकारवेल्लम्
परवलपटोलः
गोभीगोजिह्वा
पुदीनाअजगन्धः
टमाटररक्तवृन्तकम्, रक्ताङ्गः
पालकपालक्या, पालकी
चुकंदरपालङ्गुशाकः
टिण्डाटिण्डिशः
मूलीमूलिका, मूलकम्
पतागोभीशाकप्रभेदः, हरितम्
मिर्चमरीचम्
भिण्डीभिण्डिका, रामकोशातकी
मशरूमछत्राकम्
प्याजपलाण्डुः
लोबियावनमुद्गाः
मटरकलायः
बैंगनवृन्ताकम्, भण्टाकी
बथुआवास्तुकम्
शलजमशिखामूलं, श्वेतकन्दः
गाँठगोभीकेदशाकम्

फल वर्ग

हिन्दी संस्कृत
अनानासअनानासम्, परवतीफलम्
मौसमीमातुलुङ्गम्
अनारदाडिमम्
नींबूनिम्बुकम्, जम्बीरम्
नाशपातीअमृतफलम्
खरबूजावृत्तकर्कटी
अंगूरद्राक्षाफलम्
खजूरखर्जूरम्
अंजीरअंजीरम्, आर्द्रालुः
आँवलाआमलकम्
अमरूदबीजपूरम्, आम्रलम्
कैथाकपित्थ
आमआम्रं, आम्रकारं, सहकारः, रसालः
करौंदाकरमर्दकः, आमलकी
केलाकदलीफलम्
ककड़ीखदिरः
अखरोटअक्षोटम्
आडूआर्द्रालुः
चीकूचिकूलं
इमलीतिन्तिडीकम्, अम्लिका
जामुनजम्बूफलम्
खरबूजावृत्तकर्कटी
नारंगीनारंगफलम्, जाम्बजम्
गूलरउदुम्बरम्
नींबूनिम्बुकम्, जम्बीरम्
महुआमधूकः
शरीफासीताफलम्
नारियलनारिकेलम्
सन्तरानारंगम्, नारंगफलम्
पपीतामधुकर्कटी
सेबसेबम्
बेरबदरीफलम्
लीचीलीचिका
तरबूजउर्वारुकं, कलिङ्गम्
बेलबिल्वम्
मौसमीमातुलुङ्गम्
मकोयस्वर्णक्षीरी
जामुनजम्बूफलम्
छुहारादाहरम्

सम्बन्ध के वर्ग

हिन्दी संस्कृत
माँमातृ, जननी, अम्बा
नानीमातामही
पितापितृ, जनकः
पोतापौत्रः
पत्नीभार्या, दारा, जाया
पोतीपौत्री
चचेरा भाईपितृव्यजः, पितृव्यपुत्रः
बहूवधूः
चचेरी बहनपितृव्यजा, पितृव्यपुत्री
बेटापुत्रः, सुतः, आत्मजः
भांजाभागिनेयः
बेटीपुत्री, दुहिता, आत्मजा
चाचापितृव्यः
बड़ी बहनअग्रजा
चाचीपितृव्या, पितृव्यपत्नी
बड़ा भाईअग्रजः
छोटा भाईअनुजः
पुत्री का पुत्रदौहित्रः
छोटी बहनअनुजा
भाभीभ्रातृजाया
जमाई, दामादजामाता, जामातृ
भतीजाभ्रातृजः, भ्रातृपुत्रः
जेठानीज्येष्ठा
मामामातुलः
जेठज्येष्ठः
मामीमातुली
ताऊतातः
नातीनप्ता, नप्तृ
ताईज्येष्ठपितृव्या
सालाश्यालः
दादापितामहः
ससुरश्वशुरः, श्वसुरः
दादीपितामही
सासश्वश्रूः
नानामातामहः
बेटाआत्मजः
पुत्रवधूस्नुषा
बुआपितृस्वसा
फूफापितृस्वसुपतिः
फुफेरा भाईपैतृस्वस्त्रीयः
भतीजीभ्रातृजा, भ्रातृसुता
मौसीमातृस्वसा
मौसीमातृस्वसुपतिः
मौसेरा भाईमातृस्वस्त्रीयः

शरीरांग वर्ग

हिन्दी संस्कृत
अंगूठाअङ्गुष्ठः
गालकपोलः
आँखनेत्रम्, नयनं, लोचनम्
हाथहस्तः
अंगुलीअंगुल्यः, करशाखा
जीभजिह्वा, रसना
होंठओष्ठः
पैरपादः, चरणः
कमरकटिः
नाकनासिका, घ्राणः
कानकर्णः
खोपड़ीमानव कपालः, खर्परः
बालकेशः, कचः
रीढ़ की हड्डीकशेरुः
कन्धास्कन्धः
पीठपृष्ठम्
गर्दनग्रीवा
दाँतदन्तः, रदनः
गलाकण्ठः
नाखूननखम्
दाढ़ीदाढिका, कूर्चम्
पैर का टखनागुल्फः
भौंहभ्रूः
मूँछगुम्फः, मुच्छः
प्लीहागुल्मः
माँगसीमन्तः
मसूड़ादन्त मूलम्
शरीरदेहः, कायः
मुखआननम्
लारस्यंदिनी
हथेलीकरतलम्, प्रहस्तः
कोहनीकफोणिः
कलाईमणिबन्धः
कनपटीहनुः

संस्कृत में मिठाइयों के नाम

हिन्दी संस्कृत
आइसक्रीमपयोहिमम्
जलेबीकुण्डलिका
इमरतीअमृती
टॉफीमिष्टिका
कुल्फीहिमानी
पंजीरीपिष्टान्नम्
खाजामधुशीर्षः
पेठाकोषाण्डम्, कोषमाण्डी
खीरपायसम्
पेड़ापिण्डः, पिण्डिका
खुरमाखण्डपालः
बताशावाताशः, मिन्नाण्डः
गुझियासन्न्यावकम्
बर्फीहेमी, चक्रिका
गुलाब जामुनदुग्धपूपिका, पानकगोलकम्
मलाईसन्तानिका
घेवरघृतवरः, पिष्टपूरः
मिठाईमिष्ठान्नम्, मधुरान्नम्
चाकलेटचाकलेहः
मिश्रीसितोपला
चीलाचित्रापूपः
मीठी गोलीमधुरगुल्यः
मुरब्बामिष्टपाकः, गाण्डरवः
मोतीचूर का लड्डूमुक्ताचूर्णलड्डुकम्
मोती पाकमुक्तापाकः
लड्डूमोदकम्
मोहनभोगमोहनभोगः
रसगुल्लारसगोलकम्
रबड़ीकूचिका
सूजी का हलवासन्न्यावः, सन्न्यावकः
लस्सीस्वादुमथितम्
बेसन का लड्डूकुट्टिललड्डुकम्
हलुआलप्सिका

संस्कृत में वृक्षों के नाम

हिन्दी संस्कृत
अंगूर का पेड़द्राक्षा, मृद्वीका वृक्षः
अंजीरअंजीरः
अखरोटअक्षोटः
अनानासअनानासम्
अनारदाडिमम्
अमरूदबीजपूरः वृक्षः
अर्जुनअर्जुनं
अशोकअशोकः
आँवलाआमलकः वृक्षः
आकअर्कः वृक्षः
आमआम्रम्
आबनूसतमालः
इमलीतिन्तिडी, अम्लिका
कदम्बकदम्बः
कल्पवृक्षकल्पवृक्षः
कटहलपनसम्
कनेरकर्णिकारः
कुंदकुंदम्
करौंदाकरमर्दकः
केलाकदली
खजूरखर्जूरम्
गूलरउदुम्बरम्
चीड़भद्रदारुः
चंदनचंदनम्
ढाकपलाशः
ताड़तालवृक्षः
तुलसीतुलसिका
देवदारदेववृक्षः, देवदारुः
धतूराधतूरः
नींबूजम्बीरम्
नारियलनारिकेलः
नाशपातीअमृतफलवृक्षः
नीमनिम्बवृक्षः
पीपलअश्वत्थः
पानताम्बूलम्
पाकड़पर्कटीवृक्षः
पारिजातपारिजातः
पपीतामधुकर्कटीवृक्षः
बरगदवटवृक्षः
बेलबिल्वः
महुआमधूकः
मेहंदीमेन्धिका
मुसम्मीमातुलुङ्गः
लीचीलीचिका
रेड़एरण्डः
शीशमशिंशपा
शरीफासीताफलवृक्षः
सालसालः
संतरानारंगम्
पेड़वृक्षः
सेमरशाल्मलिः
हरसिंगारशेफालिका
पाकर का पेड़ (शहतूत)प्लक्षः

संस्कृत में फूलों के नाम

हिन्दी संस्कृत
कनेरकर्णिकारः
कमल (नीला)इंदीवरम्
कमल (लाल)कोकनदम्
कमल (सफेद)पुण्डरीकम्
कुमुदनीकुमुदम्
केवड़ाकेतकी
गुड़हलजपापुष्पम्
गुलाबपाटलम्
गुलमोहरराजभरण
गेंदास्थूलपद्म, गंधपुष्पम्
चमेलीनवमल्लिका, जातिपुष्पम्
चम्पाचम्पकः
जूहीयूथिका
बेलामल्लिका
मौलसरीबकुलः
रातरानीरजनीगंधा
सूर्यमुखीदिवाकरः, सूर्यवित्तम्
लिलीपद्मिनी
पारिजातपारिजातः
कमलसरसिजं

आस-पास की वस्तुएँ संस्कृत भाषा में

हिन्दी संस्कृत
कमराकक्ष / कोष्ठः
संसारजगत्
कपड़ाकर्पटः
मेजलेखाधारः
कागजकागदः
कालिख / काजलकज्जलम्
अँगोछाअङ्ग रक्षकम्
बिछौनाआस्तरणम्
तूषाम्घास
हारकण्ठहारः
एक लकड़ी की टोकरीकण्डोलः
समाचार पत्रसमाचारपत्रम्
न्यायालयन्यायालयः
आने वाला कलश्वः

कुछ सामान्य जीव-जंतुओं के संस्कृत नाम

हिन्दी संस्कृत
केंचुआकुलीरः
घोंघाशम्बूकः
कछुआकूर्मः, कच्छपः
टिड्डाशलभः
मछलीमत्स्यः, मीनः, झषः
मेंढकदर्दुरः
मक्खीमक्षिका
मगरमच्छमकरः, नक्रः
मकड़ीऊर्णनाभः, लूता
गिलहरीचिक्रोडः
गिरगिटकृकलासः
चूहामूषकः
चीतातरक्षुः, चित्रकः
छिपकलीगृहगोधिका
जिराफचित्रोष्ट्रः
नेवलानकुलः
परीक्षा उपयोगी सारांश
  • दैनिक जीवन से जुड़े शब्दों के संस्कृत नाम सीखने से विद्यार्थियों का संस्कृत शब्द-भण्डार बढ़ता है।
  • अध्याय में अन्न, शाक, फल, सम्बन्ध, शरीरांग, मिठाई, वृक्ष, फूल और आस-पास की वस्तुओं के संस्कृत नाम दिए गए हैं।
  • कई हिन्दी शब्दों के लिए संस्कृत में एक से अधिक नाम दिए गए हैं; परीक्षा के लिए सभी दिए गए रूप महत्त्वपूर्ण हैं।
  • सामान्य जीव-जंतुओं में केंचुआ, घोंघा, कछुआ, मछली, मेंढक, मक्खी, मगरमच्छ, मकड़ी, गिलहरी, गिरगिट, चूहा, चीता, छिपकली, जिराफ और नेवला आदि के संस्कृत नाम दिए गए हैं।
Topic 5 हिन्दी भाषा के सामान्य शब्दों के संस्कृत अर्थ

हिन्दी भाषा के सामान्य शब्दों के संस्कृत अर्थ

हिन्दी भाषा के सामान्य शब्दों के संस्कृत अर्थ

दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले अनेक हिन्दी शब्दों के संस्कृत रूपों का ज्ञान विद्यार्थियों के संस्कृत शब्द-भण्डार को बढ़ाता है। पुस्तक में दिए गए सामान्य हिन्दी शब्दों और उनके संस्कृत अर्थ निम्नलिखित हैं—

हिन्दी संस्कृत
सोनाकनकः, स्वर्णः
झीलकासारः
गेंदकन्दुकम्
दरवाजाद्वारम्
चालाकचतुरः
खेलक्रीडा
मशाल / टार्चकरदीपः
गीलाक्लिन्नः
पूरी बाजू की शर्टकञ्चुकम्
विकलांग / लंगड़ाखञ्जः
कैंचीकर्तरी
खिड़कीगवाक्षः
कपूरकर्पूर
पहाड़गिरिः
किसानकृषकः
घरगृहम्
कविकवयः
गाँवग्रामम्
बरगद का पेड़वट वृक्षः
घड़ाघटः
कायरकापुरुषः
कसाईघातुकः
बढ़ईतक्षकः
घीघृतं
लकड़ी का टुकड़ाकाष्ठः
शोरघोषम्
रस्सीरज्जुः
वाशिंग मशीनक्षालनयन्त्रम्
पलंगपर्यंकम्
कूँआकूपः
मोमबत्तीसिक्थवर्तिका
पंखाविद्युतव्यजनम्
फ्रिजशीतकम्
मोबाइल फोनजंगम दूरवाणी
नर्सउपचारिका
जहाजपोतः, जलयानम्
समाप्तउपरतं
नावनौका
रेस्तरांउपहारगृहम्
जीपदुर्गयान
तबलाउर्ध्वकः
एम्बुलेंसरुग्णवाहिका
चमकउल्लः
कुर्सीआसन्दः, सन्दर्शिका
थर्मस फ्लास्कउष्ण रक्षकम्
पर्दायवनिका
पगड़ीउष्णीषम्
चाबीकुञ्जिका
लहरउर्मिः
टेलीफोनदूरवाणी
दवाऔषधं
तकियाउपधानम्
साइकिलद्विचक्रिका
कम्पनीसंसर्गः
ऑटोरिक्शात्रिचक्रिका
चावलतण्डुलः
स्कूटरसचेत्र
पीपल का वृक्षअश्वत्थः
धनअर्थम्
बेहोशअसमप्रज्ञातः
आधाअर्धम्
वर्षआब्दः
आलसीअलसः
आमआम्रम्
समझअवगमं
सादगीआर्जवं
बेदागअवद्यः
बारिशआवृष्टिः
घिनौनाअवरं
गन्नाइक्षुः
निर्दयीअवाच्य
इच्छाईहा
निडरअशंकः
रिश्वतउत्कोचः
भोजनओदनं
खराबउत्सन्नम्
बेकाबूअशमः
पेटउदरम्
पत्थरप्रस्तरः
मालीउद्यानपालकः
चीनीशर्करा
लोहाअयसः
नमकलवणः
नीमनिम्बः
छाताछत्रम्
देवदारदेवदारुः
कीचड़पंकः
सिंघाड़ाशृंगाटकम्
तराजूतुला
हरसिंगारशेफालिका
साग / सब्जीशाक
धुआँधूमः
आगअनलः
हेडलाइटअग्रदीपः
बेरोजगारीअनुद्योगिता
दर्पणआदर्शः, दर्पणः
यादअनुस्मरणम्
आजअद्य
झूठाअनृतः
जंगलअरण्यम्

इन शब्दों का बार-बार पठन और लेखन करने से विद्यार्थी सामान्य हिन्दी शब्दों के संस्कृत रूपों को आसानी से याद कर सकते हैं। जहाँ पुस्तक में एक से अधिक संस्कृत रूप दिए गए हैं, वहाँ सभी रूप परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • दैनिक जीवन के सामान्य हिन्दी शब्दों के संस्कृत अर्थ जानना संस्कृत शब्द-भण्डार बढ़ाने में सहायक है।
  • सोना—कनकः/स्वर्णः, दरवाजा—द्वारम्, किसान—कृषकः, घर—गृहम्, गाँव—ग्रामम् जैसे शब्द विशेष रूप से उपयोगी हैं।
  • आधुनिक वस्तुओं के लिए भी संस्कृत शब्द दिए गए हैं, जैसे मोबाइल फोन—जंगम दूरवाणी, टेलीफोन—दूरवाणी और एम्बुलेंस—रुग्णवाहिका।
  • एक ही हिन्दी शब्द के लिए पुस्तक में जहाँ अनेक संस्कृत रूप दिए गए हैं, वहाँ सभी रूपों को याद करना चाहिए।

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Topic 6 वार्तालाप एवं चित्र विधि

वार्तालाप एवं चित्र विधि

आस-पास की वस्तुओं एवं पशु-पक्षियों के नाम सिखाने की विधियाँ

बालकों को आस-पास की वस्तुओं तथा पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम सरलता से सिखाने के लिए विभिन्न शिक्षण विधियों का प्रयोग किया जा सकता है। इनमें वार्तालाप विधि और चित्र विधि विशेष रूप से उपयोगी हैं।

1. वार्तालाप विधि

वार्तालाप विधि भाषा सीखने और उसमें दक्षता प्राप्त करने की प्रभावी विधि है। इसमें शिक्षक विद्यार्थियों के साथ बातचीत करते हुए उन्हें नए शब्दों और उनके प्रयोग से परिचित कराता है।

भाषा सीखने के क्रम में पढ़ना, लिखना, बोलना और सुनना प्रमुख क्रियाएँ हैं। इसलिए प्रशिक्षित शिक्षक विद्यार्थियों के दैनिक जीवन, आस-पास की वस्तुओं, पशु-पक्षियों तथा शिष्टाचार से सम्बन्धित संस्कृत शब्दों का प्रयोग करते हुए उनसे बातचीत करता है।

शिक्षक बालकों को दो समूहों में बाँटकर एक समूह से वस्तुओं या पशु-पक्षियों के नाम स्थानीय भाषा या हिन्दी में तथा दूसरे समूह से उनके संस्कृत नाम कहलवा सकता है। इस प्रकार बार-बार प्रयोग करने से बच्चे संस्कृत शब्दों से परिचित हो जाते हैं।

वार्तालाप विधि की गतिविधियाँ

गतिविधि–1 : संस्कृत नाम सुनकर हिन्दी अर्थ बताना

शिक्षक आस-पास की वस्तुओं और पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम बोले तथा विद्यार्थी उनके हिन्दी अर्थ बताएँ।

संस्कृत में नाम हिन्दी में नाम
काकःकौआ
विडालःबिल्ली
काष्ठःलकड़ी
वृक्षःपेड़
मूषकःचूहा
सन्दर्शिकाकुर्सी
कासारःझील
आदर्शःदर्पण
गतिविधि–2 : तद्भव एवं तत्सम रूप

दैनिक जीवन में प्रयुक्त कुछ शब्दों के तद्भव, तत्सम और संस्कृत रूपों का अभ्यास कराया जा सकता है।

तद्भव तत्सम संस्कृत शब्द
गलाकंठकंठः
कमराकक्षकक्षः
कुकुरकुक्कुरकुक्कुरः
नींबूनिम्बूकनिम्बूकम्
ककड़ीकर्कटीकर्कटी
कउआकौआकाकः
गधागर्दभगर्दभः
गतिविधि–3 : समूह आधारित वार्तालाप

कक्षा के विद्यार्थियों को चार समूहों में बाँटा जा सकता है। प्रत्येक समूह को किसी एक वर्ग की वस्तुओं के नाम बोलने के लिए प्रेरित किया जाए—

  1. घर में पाई जाने वाली वस्तुओं के नाम।
  2. खेल-सामग्री के नाम।
  3. शरीर के अंगों के नाम।
  4. पुष्पों के नाम।

शिक्षक विद्यार्थियों द्वारा बताए गए शब्दों के संस्कृत नाम श्यामपट्ट पर चार कॉलम में लिखे और उनसे पुनः पढ़वाए।

गतिविधि–4 : हिन्दी और संस्कृत में समानता वाले शब्द

ऐसे शब्दों का अभ्यास कराया जा सकता है जिनके हिन्दी और संस्कृत रूपों में बहुत अधिक समानता होती है।

हिन्दी संस्कृत
पण्डितपण्डितः
सूर्यसूर्यः
कविकविः
छात्रछात्रः
भूपतिभूपतिः
कलमकलमम्
जलजलम्
बालकबालकः
फलफलम्
विद्यालयविद्यालयः
वानरवानरः
पुस्तकपुस्तकम्

2. चित्र विधि

चित्र विधि में किसी वस्तु, पशु-पक्षी या व्यक्ति का चित्र दिखाकर उससे सम्बन्धित संस्कृत शब्द सिखाए जाते हैं। चित्र देखने के बाद बालक उस विषय से आसानी से जुड़ता है और शिक्षक की बात को सरलता से समझ पाता है।

इस विधि में शिक्षक चित्र में दिखाई देने वाली वस्तुओं या जीवों के हिन्दी नाम पूछता है और फिर उनके संस्कृत नामों से विद्यार्थियों को परिचित कराता है।

चित्र विधि की गतिविधियाँ

गतिविधि–1 : पशु-पक्षियों एवं वस्तुओं के चित्र

शिक्षक कक्षा में मोर, कुत्ता और घड़ी आदि के चित्र दिखाकर उनके बारे में संस्कृत वाक्यों द्वारा जानकारी दे सकता है।

  • अयम् मयूरः अस्ति। — यह मोर है।
  • अयम् नृत्यति। — यह नाचता है।
  • एतौ कुक्कुरौ स्तः। — ये दो कुत्ते हैं।
  • एतौ उच्चैः बुक्कतः। — ये जोर से भौंकते हैं।
  • सा घटिका अस्ति। — वह घड़ी है।
  • घटिका समयं सूचयति। — घड़ी समय बताती है।
गतिविधि–2 : मानव शरीर के अंगों का ज्ञान

मनुष्य का चित्र बनाकर उसके विभिन्न अंगों के संस्कृत नाम बताए जा सकते हैं। पुस्तक में दिए गए नाम इस प्रकार हैं—

शरीर का अंग संस्कृत नाम
बालकेशः
मस्तकललाटः
आँखनेत्रम्
कानकर्णम्
गालकपोलः
दाँतदन्तः
रीढ़ की हड्डीकशेरुः
पेटउदरम्
हाथकरः
नाखूननखः
पैरपादम्

वार्तालाप एवं चित्र विधि की उपयोगिता

वार्तालाप विधि विद्यार्थियों को संस्कृत शब्दों का बोलचाल में प्रयोग करने का अवसर देती है, जबकि चित्र विधि शब्द को उसकी वस्तु या आकृति से जोड़कर समझने में सहायता करती है। इन दोनों विधियों से आसपास की वस्तुओं और पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम अधिक सहज और रुचिकर ढंग से सिखाए जा सकते हैं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • वार्तालाप विधि में बातचीत के माध्यम से संस्कृत शब्दों का ज्ञान कराया जाता है।
  • वार्तालाप में हिन्दी-संस्कृत नाम, तद्भव-तत्सम शब्द, समूह-कार्य और समानता वाले शब्दों का अभ्यास कराया जा सकता है।
  • चित्र विधि में वस्तु या जीव का चित्र दिखाकर उसका संस्कृत नाम सिखाया जाता है।
  • पशु-पक्षियों, वस्तुओं और शरीर के अंगों के नाम सिखाने में चित्र विधि विशेष रूप से उपयोगी है।
  • दोनों विधियाँ संस्कृत शब्द-भण्डार तथा बोलने-समझने की क्षमता के विकास में सहायक हैं।
Topic 7 प्रश्नोत्तर एवं प्रोजेक्ट विधि

प्रश्नोत्तर एवं प्रोजेक्ट विधि

1. प्रश्नोत्तर विधि

बालक स्वाभाविक रूप से किसी वस्तु या चित्र को देखकर प्रश्न करते हैं। इसी प्रवृत्ति का उपयोग संस्कृत शिक्षण में प्रश्नोत्तर विधि के रूप में किया जा सकता है। इसमें शिक्षक प्रश्न पूछकर विद्यार्थियों से उत्तर प्राप्त करता है और आवश्यकता पड़ने पर सही संस्कृत शब्द बताता है।

इस विधि में विद्यार्थियों को दो समूहों में बाँटा जा सकता है। एक समूह दूसरे समूह को आस-पास की वस्तुएँ तथा पशु-पक्षी दिखाकर उनके संस्कृत नाम पूछे। यदि दूसरा समूह उत्तर न दे सके तो शिक्षक संस्कृत नाम बताए। बाद में दोनों समूहों की भूमिकाएँ बदल दी जाएँ। बार-बार अभ्यास से विद्यार्थी संस्कृत शब्दों से परिचित हो जाते हैं।

प्रश्नोत्तर विधि की गतिविधि–1

शिक्षक किसी वस्तु या पशु का चित्र अथवा मॉडल दिखाकर प्रश्न पूछ सकता है। पुस्तक में निम्न उदाहरण दिए गए हैं—

  • बैठे हुए शेर का मॉडल दिखाकर— अयम् कः?
  • पुस्तक दिखाकर— इदम् किम्?
  • बिल्ली का मॉडल दिखाकर— सा का?
उदाहरणात्मक प्रश्नोत्तर
संस्कृत हिन्दी अर्थ
शिक्षक— अयम् कः अस्ति? यह क्या है?
छात्र— अयम् सिंहः अस्ति। यह शेर है।
शिक्षक— अयम् किम् करोति? यह क्या कर रहा है?
छात्र— अयम् तिष्ठति। यह बैठा है।
शिक्षक— इमानि कानि सन्ति? ये सब क्या हैं?
छात्र— इमानि पुस्तकानि सन्ति। ये पुस्तकें हैं।
शिक्षक— सा का? वह क्या है?
छात्र— सा मार्जारी अस्ति। वह बिल्ली है।
शिक्षक— मार्जारी किम् करोति? बिल्ली क्या कर रही है?
छात्र— मार्जारी पश्यति। बिल्ली देख रही है।

प्रश्नोत्तर विधि की गतिविधि–2

कक्षा में उपलब्ध वस्तुओं के सम्बन्ध में विद्यार्थियों से संस्कृत में बातचीत की जा सकती है। इससे प्रश्न समझने और संस्कृत में उत्तर देने की क्षमता विकसित होती है।

शिक्षक— एतत् किम् अस्ति? यह क्या है?
छात्र— एतत् पुस्तकम् अस्ति। यह पुस्तक है।
शिक्षक— एतत् कस्य विषयस्य पुस्तकम् अस्ति? यह किस विषय की पुस्तक है?
छात्र— एतत् संस्कृत विषयस्य पुस्तकम् अस्ति। यह संस्कृत विषय की पुस्तक है।
शिक्षक— एतत् किम् अस्ति? यह क्या है?
छात्र— एतत् श्यामपट्टम् अस्ति। यह श्यामपट्ट है।
शिक्षक— श्यामपट्टे वयं किम् कुर्मः? श्यामपट्ट पर हम क्या करते हैं?
छात्र— श्यामपट्टे वयं सुधाखण्डेन लिखामः। श्यामपट्ट पर हम चाक से लिखते हैं।

2. प्रोजेक्ट विधि

प्रोजेक्ट विधि में विद्यार्थियों को किसी विषय से सम्बन्धित वस्तुओं का वर्गीकरण करके उन्हें शीर्षक और उपशीर्षकों के अन्तर्गत व्यवस्थित करने का कार्य दिया जाता है। इससे विद्यार्थी स्वयं कार्य करते हुए संस्कृत शब्दों का प्रयोग सीखते हैं।

प्रशिक्षित शिक्षक आस-पास की वस्तुओं का वर्गीकरण करके पहले शीर्षक एवं उपशीर्षक तैयार करता है और फिर विद्यार्थियों से उसी प्रकार कार्य करवाता है।

प्रोजेक्ट का उदाहरण

शीर्षक— अस्माकं परिवेशः

  • अस्माकं जीव-जन्तवः— गौः, वृषभः, काकः, मीनः।
  • अस्माकं वृक्षाः— आम्रः, जम्बूफलम्, कदलीफलम्।
  • अस्माकं यातायात साधनानि— रेलयानम्।

शिक्षक विद्यार्थियों से शीर्षक के अनुसार आस-पास की वस्तुओं और पशु-पक्षियों की सूची भी तैयार करा सकता है। पुस्तक में उदाहरण के रूप में पुस्तक, हाथी, कोयल और गाय दिए गए हैं।

प्रोजेक्ट विधि की गतिविधि–1

शिक्षक विद्यार्थियों को किसी फल, पशु या वस्तु का नाम देकर उससे सम्बन्धित तीन-तीन वाक्य लिखने के लिए कह सकता है।

आम — आम्रः
  1. अयम् आम्र फलम् अस्ति।
  2. अयम् मधुरम् फलम् अस्ति।
  3. आम्रः अस्माकं राष्ट्रीय फलम् अस्ति।
शेर — सिंहः
  1. अयम् सिंहः अस्ति।
  2. सिंहः वनस्य नृपं भवति।
  3. अयम् उच्चैः गर्जयति।
पुस्तक — पुस्तकम्
  1. इदम् पुस्तकम् अस्ति।
  2. पुस्तके ज्ञानस्य भण्डारं भवति।
  3. वयं पुस्तकम् पठामः।

चित्रों के माध्यम से अभ्यास

पुस्तक में चित्रों को देखकर उनके हिन्दी और संस्कृत नाम बताने की गतिविधि भी दी गई है। इसमें निम्न पशु-पक्षियों के चित्र दिए गए हैं—

हिन्दी संस्कृत
मोरमयूरः, शिखी, केकी
हंसहंसः, मरालः
हिरनमृगः, कुरंगः, हरिणः
बिल्लीमार्जारः, बिडालः
हाथीगजः, हस्ति, कुंजरः

प्रश्नोत्तर एवं प्रोजेक्ट विधि की उपयोगिता

प्रश्नोत्तर विधि विद्यार्थियों को संस्कृत में प्रश्न समझने और उत्तर देने का अवसर देती है। प्रोजेक्ट विधि में विद्यार्थी स्वयं वर्गीकरण, सूची-निर्माण और वाक्य-रचना करते हैं। इस प्रकार दोनों विधियाँ संस्कृत शब्दों के प्रयोग और भाषा-अभ्यास को सरल तथा सक्रिय बनाती हैं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • प्रश्नोत्तर विधि में वस्तु या चित्र दिखाकर संस्कृत में प्रश्न पूछे जाते हैं और विद्यार्थी उत्तर देते हैं।
  • समूहों में प्रश्नोत्तर कराने से पशु-पक्षियों और वस्तुओं के संस्कृत नामों की पुनरावृत्ति होती है।
  • प्रोजेक्ट विधि में वस्तुओं का वर्गीकरण, शीर्षक-उपशीर्षक, सूची-निर्माण और वाक्य-रचना कराई जाती है।
  • प्रश्नोत्तर विधि भाषा-प्रयोग को बढ़ाती है, जबकि प्रोजेक्ट विधि करके सीखने का अवसर देती है।

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अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

केंचुए को संस्कृत में कहते हैं—

व्याख्या: केंचुए का संस्कृत नाम ‘कुलीरः’ है।
Q 2

‘गृहगोधिका’ का हिन्दी अर्थ है—

व्याख्या: ‘गृहगोधिका’ का हिन्दी अर्थ छिपकली है।
Q 3

‘काकः’ का हिन्दी नाम है—

व्याख्या: संस्कृत में कौआ को ‘काकः’ कहा जाता है।
Q 4

‘यवनालः’ का अर्थ है—

व्याख्या: ‘यवनालः’ का हिन्दी अर्थ ज्वार है।
Q 5

केला का संस्कृत रूप है—

व्याख्या: केला के लिए संस्कृत में ‘कदलीफलम्’ शब्द दिया गया है।
Q 6

‘जामाता’ का हिन्दी अर्थ है—

व्याख्या: ‘जामाता’ का अर्थ जमाई अथवा दामाद होता है।
Q 7

‘नकुलः’ का हिन्दी अर्थ है—

व्याख्या: संस्कृत में नेवला को ‘नकुलः’ कहा जाता है।
Q 8

कैंची का संस्कृत रूप है—

व्याख्या: कैंची का संस्कृत नाम ‘कर्तरी’ है।
Q 9

‘उपचारिका’ का अर्थ है—

व्याख्या: नर्स के लिए संस्कृत में ‘उपचारिका’ शब्द प्रयुक्त होता है।
Q 10

‘ऊर्मिः’ का अर्थ है—

व्याख्या: ‘ऊर्मिः’ का हिन्दी अर्थ लहर है।
Q 11

‘अंगुष्ठः’ शब्द का अर्थ है—

व्याख्या: ‘अंगुष्ठः’ का अर्थ अंगूठा होता है।
Q 12

‘घोटक’ शब्द का अर्थ है—

व्याख्या: ‘घोटक’ संस्कृत में घोड़े के लिए प्रयुक्त शब्द है।
Q 13

‘वृषभ’ शब्द का अर्थ है—

व्याख्या: ‘वृषभ’ का हिन्दी अर्थ बैल है।
Q 14

‘प्रियङ्गुः’ शब्द बोधक है—

व्याख्या: पुस्तक में बाजरा के लिए ‘प्रियङ्गुः’ शब्द दिया गया है।
Q 15

‘लूता’ शब्द का अर्थ है—

व्याख्या: ‘लूता’ का हिन्दी अर्थ मकड़ी है।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय संस्कृत के अध्याय आस-पास की वस्तुओं, पशु-पक्षियों के संस्कृत नाम से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1 2019

‘नवनीतम्’ शब्द का हिन्दी अर्थ क्या है?

Q 2 2016

चिक्रोडः, मकरः, सारिका, मरालः, शशकः शब्दों में से किन्हीं दो शब्दों का हिन्दी अर्थ लिखिए।

Q 3 2016

समाचारपत्रम्, अश्रु, न्यायालयः, श्वः, पितृव्यः, पितामहः, धूमः, द्वारम् में से किन्हीं चार शब्दों के हिन्दी अर्थ लिखिए।

Q 4 2017

गधा, तोता, मछली और बकरी के नाम संस्कृत में लिखिए।

Q 5 2021, 2022

दो पशु और दो पक्षियों के नाम संस्कृत में लिखिए।

Q 6 2023

किन्हीं दो पशुओं के नाम संस्कृत में लिखिए।

Q 7 2023

सरसों, शरीफा, कटहल और पीपल का संस्कृत लिखिए।

Q 8 2023

प्लक्षः, पलाशः, तुम्बी और अमृतफलम् का नाम हिन्दी में लिखिए।

Q 9 2016

अपने आस-पास की किन्हीं पाँच वस्तुओं, पशुओं अथवा पक्षियों के नाम संस्कृत में लिखिए।

Q 10 2016

घोड़ा, कुत्ता, हिरन, बकरी, कोयल, चिड़िया, पेड़, तरबूज, लड्डू और अनार में से किन्हीं छह के संस्कृत नाम लिखिए।

Q 11 2017

खगाः, कुञ्जरः, दाडिमः, गोधूमः, सरसिजम्, नकुलः, पिपीलिका और अश्वत्थः के हिन्दी अर्थ लिखिए।

Q 12 2018

गोधूमः, तक्रम्, द्राक्षा, कदलीफलम्, द्विदलम्, बदरीफलम्, लोचनम् और पंकः का हिन्दी अर्थ लिखिए।

Q 13 2019

शशकः, वृक्षम् और चिक्रोडः शब्दों का अर्थ हिन्दी में लिखिए।

Q 14 2022

किन्हीं चार फलों के नाम संस्कृत में लिखिए।

Q 15 2022

संस्कृत भाषा की वर्णमाला को कितने भागों में बाँटा जा सकता है?

Q 16 2023

संस्कृत के माहेश्वर सूत्रों को लिखिए।

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Practice More Questions

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