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Home Study Material Semester 1 सामाजिक अध्ययन सड़क-रेल यातायात एवं सुरक्षा
Chapter 9 • सामाजिक अध्ययन

सड़क-रेल यातायात एवं सुरक्षा

UP DELED Semester 1 सामाजिक अध्ययन विषय के इस अध्याय में सड़क यातायात के नियम एवं संकेत, यातायात संकेतों के प्रकार, सड़क दुर्घटनाओं के कारण एवं बचाव, बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा नियम, भारत में रेल यातायात, रेलवे क्रॉसिंग के संकेत तथा रेल यात्रा के दौरान आवश्यक सावधानियों का अध्ययन करेंगे।

Chapter Overview

6
Topics
15
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Notes
Topic 1 यातायात एवं सड़क सुरक्षा के नियम

यातायात एवं सड़क सुरक्षा के नियम

यातायात का अर्थ

यातायात का शाब्दिक अर्थ आना-जाना है। जिन साधनों पर बैठकर या सवार होकर मनुष्य एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचता है, उन्हें यातायात के साधन कहा जाता है।

आधुनिक समय में वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने अनेक प्रकार के यातायात साधनों का विकास किया है। इनके बढ़ते प्रयोग से सड़कों पर वाहनों का दबाव और भीड़ लगातार बढ़ रही है।

जनसंख्या वृद्धि के कारण भी सड़कों पर लोगों और वाहनों की संख्या बढ़ी है। इसके परिणामस्वरूप सड़क दुर्घटनाओं की सम्भावना भी बढ़ जाती है।

यातायात सुरक्षा की आवश्यकता

सड़क दुर्घटनाएँ कभी दो वाहनों की आपसी टक्कर से, कभी वाहन के सड़क या रेल की पटरी से उतरने से और कभी रेलवे क्रॉसिंग जैसी परिस्थितियों में हो सकती हैं।

इसलिए केवल यातायात के साधनों का उपयोग करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके सुरक्षित उपयोग के लिए यातायात के नियमों, संकेतों, दुर्घटनाओं के कारणों और आवश्यक सावधानियों का ज्ञान होना भी जरूरी है।

यातायात नियमों का पालन स्वयं व्यक्ति की सुरक्षा के साथ-साथ अन्य लोगों और सार्वजनिक व्यवस्था की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।

यातायात के प्रमुख नियम

1. एकल दिशा मार्ग का पालन करें

एकल दिशा मार्ग में वाहन केवल निर्धारित दिशा में ही चलाना चाहिए। गलत दिशा में वाहन चलाने से दुर्घटना होने की सम्भावना बढ़ जाती है और अन्य वाहन चालकों को भी असुविधा होती है।

इसलिए एकल दिशा मार्ग में निर्धारित दिशा का पालन करते हुए सावधानीपूर्वक वाहन चलाना चाहिए।

2. ओवरटेक करते समय सावधानी रखें

किसी बड़े या आगे चल रहे वाहन को ओवरटेक करने से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दूसरी ओर से कोई वाहन न आ रहा हो और ओवरटेक करने के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध हो।

दूसरे वाहन से अनावश्यक रेस नहीं लगानी चाहिए। असावधानी से किया गया ओवरटेक सड़क दुर्घटना का कारण बन सकता है।

3. लगातार हॉर्न का प्रयोग न करें

हॉर्न का प्रयोग केवल आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए। लगातार और अनावश्यक हॉर्न बजाना उचित नहीं है।

अत्यधिक हॉर्न बजाने से आगे चलने वाले वाहन चालक पर मानसिक दबाव पड़ सकता है और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है।

यह धारणा गलत है कि लगातार हॉर्न बजाने से ट्रैफिक जल्दी खुल जाएगा। हॉर्न का प्रयोग केवल निश्चित आवश्यकता के लिए करना चाहिए।

4. अचानक यू-टर्न न लें

सड़क पर अचानक यू-टर्न लेना खतरनाक हो सकता है। इससे पीछे या सामने से आने वाले वाहन चालक को प्रतिक्रिया करने का पर्याप्त समय नहीं मिलता और दुर्घटना की सम्भावना बढ़ जाती है।

यू-टर्न लेने से पहले पीछे का यातायात देखना चाहिए और अपने वाहन या हाथ के संकेत द्वारा अन्य वाहन चालकों को पहले से सूचित करना चाहिए।

जब यातायात कम हो और मोड़ लेना सुरक्षित हो, तभी यू-टर्न लेना चाहिए।

5. गति सीमा का पालन करें

सड़कों पर विभिन्न स्थानों पर गति सीमा निर्धारित करने वाले बोर्ड लगाए जाते हैं। चालक को उन पर लिखी गति सीमा के अनुसार ही वाहन चलाना चाहिए।

उदाहरण के लिए यदि किसी स्थान पर गति सीमा 45 किमी. प्रति घंटा निर्धारित है, तो वाहन की गति 45 किमी. प्रति घंटा से अधिक नहीं रखनी चाहिए।

गति को नियंत्रण में रखने से वाहन सुरक्षित और सुचारु रूप से चलाया जा सकता है।

6. हाथ संकेत और संकेतक का प्रयोग करें

सड़क पर वाहन मोड़ते समय हाथ के संकेत या वाहन के संकेतक का प्रयोग करना आवश्यक है।

  • दाईं दिशा में मुड़ते समय दायाँ संकेतक या दाएँ हाथ का संकेत देना चाहिए।
  • बाईं दिशा में मुड़ते समय बायाँ संकेतक या बाएँ हाथ का संकेत देना चाहिए।

इससे आगे और पीछे चल रहे वाहन चालकों को समय रहते यह पता चल जाता है कि वाहन किस दिशा में मुड़ने वाला है।

7. लेन अनुशासन में चलें

जिस लेन में वाहन चल रहा हो, सामान्यतः उसी लेन में चलना चाहिए। बार-बार बिना आवश्यकता लेन बदलने से दूसरे वाहन चालकों को असुविधा होती है और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

लेन अनुशासन का पालन करने से यातायात अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित रहता है।

8. वाहन को निर्धारित पार्किंग क्षेत्र में ही पार्क करें

वाहन को खड़ा करते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह निर्धारित पार्किंग क्षेत्र में ही खड़ा किया जा रहा है।

वाहन को ऐसे स्थान पर पार्क करना चाहिए जहाँ वह दूसरे लोगों या वाहनों के लिए बाधा अथवा असुविधा का कारण न बने।

सड़क यातायात के प्रमुख सुरक्षा नियम
सड़क यातायात के प्रमुख नियम—सुरक्षित यात्रा के लिए आवश्यक सावधानियाँ

यातायात नियमों का महत्व

यातायात नियम व्यक्ति को सुरक्षित रूप से अपने गन्तव्य तक पहुँचने में सहायता करते हैं। नियमों का पालन करने से सड़क पर अनुशासन बना रहता है, अन्य वाहन चालकों को सुविधा मिलती है और दुर्घटना की सम्भावना कम होती है।

इसलिए वाहन चालक और सड़क उपयोगकर्ता दोनों को निर्धारित दिशा, गति सीमा, संकेत, लेन और पार्किंग सम्बन्धी नियमों का पालन करना चाहिए।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • यातायात का शाब्दिक अर्थ आना-जाना है।
  • यातायात के साधनों और जनसंख्या की वृद्धि से सड़कों पर भीड़ तथा दुर्घटनाओं की सम्भावना बढ़ी है।
  • सुरक्षित यातायात के लिए नियमों और संकेतों की जानकारी आवश्यक है।
  • एकल दिशा मार्ग में निर्धारित दिशा में ही वाहन चलाना चाहिए।
  • ओवरटेक करने से पहले सामने और विपरीत दिशा के यातायात को देखना चाहिए।
  • अनावश्यक और लगातार हॉर्न बजाने से बचना चाहिए क्योंकि इससे ध्वनि प्रदूषण भी होता है।
  • अचानक यू-टर्न नहीं लेना चाहिए; पहले संकेत देकर पीछे के यातायात को देखना चाहिए।
  • निर्धारित गति सीमा के अनुसार ही वाहन चलाना चाहिए।
  • मोड़ लेते समय हाथ संकेत या वाहन के संकेतक का प्रयोग करना चाहिए।
  • वाहन को अपनी निर्धारित लेन में चलाना चाहिए।
  • वाहन को निर्धारित पार्किंग क्षेत्र में इस प्रकार खड़ा करना चाहिए कि दूसरों को असुविधा न हो।
  • यातायात नियमों का पालन स्वयं तथा अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

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Topic 2 यातायात संकेत एवं उनके प्रकार

यातायात संकेत एवं उनके प्रकार

यातायात संकेत

यातायात संकेत सड़क पर मूक वक्ता की तरह कार्य करते हैं। ये वाहन चालकों और पैदल यात्रियों को सड़क की स्थिति, दिशा, नियम, प्रतिबन्ध तथा संभावित खतरे के बारे में जानकारी देते हैं।

विशेष रूप से चौराहों और जंक्शनों पर यातायात संकेत वाहन चालकों को दिशा-निर्देश और चेतावनी देते हैं तथा यातायात को व्यवस्थित रखने में सहायता करते हैं।

यातायात संकेतों और नियमों की अवहेलना करने से व्यक्ति के जीवन और सम्पत्ति को नुकसान हो सकता है तथा जन-धन की हानि हो सकती है।

भारत में ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने से पहले व्यक्ति को यातायात के नियमों और प्रतीकों से सम्बन्धित लिखित अथवा मौखिक परीक्षा से परिचित होना आवश्यक बताया गया है।

ट्रैफिक लाइट के संकेत

सड़क चौराहों पर सामान्यतः लाल, पीली और हरी बत्ती का प्रयोग किया जाता है। प्रत्येक रंग का अलग अर्थ होता है—

रंग अर्थ क्या करें?
लाल रुकना वाहन रोकें
पीला सावधान आगे बढ़ने के लिए तैयार रहें
हरा चलना आगे बढ़ें

यातायात संकेतों के प्रकार

यातायात संकेत मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं—

  1. अनिवार्य संकेत
  2. चेतावनी संकेत
  3. सूचनात्मक संकेत

1. अनिवार्य संकेत

अनिवार्य संकेतों का प्रयोग यातायात के सुगम और सुरक्षित संचालन के लिए किया जाता है। ये सड़क उपयोगकर्ताओं को कानून के नियमों और प्रतिबन्धों की जानकारी देते हैं।

इन संकेतों द्वारा बताए गए नियमों और प्रतिबन्धों का पालन करना आवश्यक होता है। इनका उल्लंघन करना अपराध माना जाता है।

अनिवार्य संकेतों के प्रमुख उदाहरण हैं—

  • रुकिए
  • रास्ता दें
  • प्रवेश निषेध
  • पैदल यात्री निषेध
  • हॉर्न बजाना निषेध
  • पार्किंग निषेध
  • रुकना या खड़ा होना निषेध
  • गति सीमा
  • साइकिल निषेध
  • मोटरसाइकिल निषेध
  • भारी वाहन निषेध
  • बैलगाड़ी निषेध
  • यू-टर्न निषेध
  • बाएँ मुड़ना वर्जित
  • दाहिने मुड़ना वर्जित

2. चेतावनी संकेत

चेतावनी संकेत वाहन चालक को आगे आने वाली खतरनाक या विशेष सड़क परिस्थितियों के बारे में पहले से सचेत करते हैं।

इन संकेतों को देखकर चालक अपनी गति और वाहन संचालन को परिस्थिति के अनुसार नियंत्रित कर सकता है।

चेतावनी संकेतों के प्रमुख उदाहरण हैं—

  • दाहिनी ओर मोड़
  • बाईं ओर मोड़
  • दायाँ हेयर-पिन मोड़
  • बायाँ हेयर-पिन मोड़
  • आगे संकरी सड़क
  • संकरी पुलिया
  • पैदल पारपथ
  • आगे विद्यालय
  • गोल चौराहा
  • खतरनाक गड्ढा या ढलान
  • गतिरोधक या ऊबड़-खाबड़ सड़क
  • आगे अवरोध

3. सूचनात्मक संकेत

सूचनात्मक संकेत यात्रियों और वाहन चालकों को उपयोगी स्थानों तथा सुविधाओं के सम्बन्ध में जानकारी देते हैं।

इनके द्वारा यात्रियों को विभिन्न स्थानों, वैकल्पिक मार्गों, भोजनालयों, सार्वजनिक शौचालयों और अस्पतालों आदि की जानकारी प्राप्त होती है।

कुछ महत्वपूर्ण सड़क संकेत

संकेत अर्थ
रुकिए वाहन को रोकें
रास्ता दें अन्य यातायात को पहले निकलने दें
प्रवेश निषेध उस दिशा में प्रवेश न करें
हॉर्न निषेध हॉर्न का प्रयोग न करें
पार्किंग निषेध वाहन खड़ा न करें
गति सीमा निर्धारित अधिकतम गति का पालन करें
दाहिनी ओर मोड़ आगे सड़क दाहिनी ओर मुड़ेगी
बाईं ओर मोड़ आगे सड़क बाईं ओर मुड़ेगी
संकरी सड़क आगे सड़क की चौड़ाई कम है
संकरी पुलिया आगे पुल संकरा है
पैदल पारपथ पैदल यात्रियों के सड़क पार करने का स्थान
आगे विद्यालय विद्यालय क्षेत्र होने के कारण सावधानी रखें
गोल चौराहा आगे गोल चौराहा है
गतिरोधक आगे ऊँचा या ऊबड़-खाबड़ भाग है
यू-टर्न निषेध यू-टर्न लेना मना है
केवल साइकिल मार्ग केवल साइकिल के लिए है
सीधे आगे बढ़ें वाहन को सीधे दिशा में चलाएँ
बाएँ मुड़ें निर्धारित दिशा में बाईं ओर मुड़ें
दाएँ मुड़ें निर्धारित दिशा में दाईं ओर मुड़ें
ट्रैफिक लाइट और यातायात संकेतों के तीन प्रकार
ट्रैफिक लाइट तथा अनिवार्य, चेतावनी और सूचनात्मक यातायात संकेत
सड़क पर उपयोग होने वाले महत्वपूर्ण यातायात संकेत
सड़क यातायात के प्रमुख संकेत और उनका अर्थ

यातायात संकेतों का महत्व

प्रत्येक यातायात संकेत का एक निश्चित अर्थ होता है। इसलिए वाहन चालक को इन संकेतों को पहचानना और उनका सही पालन करना चाहिए।

यातायात संकेत सड़क पर अनुशासन बनाए रखते हैं, आगे आने वाले खतरे की पूर्व सूचना देते हैं और आवश्यक स्थानों तथा सुविधाओं तक पहुँचने में सहायता करते हैं। इनका पालन सड़क यातायात को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • यातायात संकेत सड़क पर मूक वक्ता की तरह कार्य करते हैं।
  • लाल बत्ती का अर्थ रुकना, पीली का अर्थ सावधान रहना और हरी का अर्थ आगे बढ़ना है।
  • यातायात संकेत मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं—अनिवार्य, चेतावनी और सूचनात्मक।
  • अनिवार्य संकेत यातायात नियमों और प्रतिबन्धों की जानकारी देते हैं तथा इनका पालन करना आवश्यक है।
  • चेतावनी संकेत आगे आने वाली खतरनाक या विशेष सड़क परिस्थितियों के बारे में पहले से सचेत करते हैं।
  • सूचनात्मक संकेत स्थानों, वैकल्पिक मार्गों और आवश्यक सार्वजनिक सुविधाओं की जानकारी देते हैं।
  • रुकिए, प्रवेश निषेध, हॉर्न निषेध, पार्किंग निषेध और गति सीमा अनिवार्य संकेतों के प्रमुख उदाहरण हैं।
  • मोड़, संकरी सड़क, संकरी पुलिया, पैदल पारपथ, विद्यालय, गोल चौराहा और गतिरोधक चेतावनी संकेतों के उदाहरण हैं।
  • प्रत्येक यातायात संकेत का एक निश्चित अर्थ होता है, इसलिए चालक को संकेतों को समझकर उनका पालन करना चाहिए।
  • यातायात संकेतों का पालन दुर्घटनाओं को कम करने और यातायात को सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने में सहायक होता है।
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Topic 3 सड़क दुर्घटनाएँ—कारण एवं यातायात साधनों की अधिकता

सड़क दुर्घटनाएँ—कारण एवं यातायात साधनों की अधिकता

सड़क दुर्घटना का अर्थ

सड़क यातायात से होने वाली ऐसी अवांछनीय घटना, जिसमें व्यक्ति, वाहन या सम्पत्ति को हानि पहुँचती है, सड़क दुर्घटना कहलाती है।

सड़क दुर्घटनाएँ केवल संयोग से होने वाली घटनाएँ नहीं हैं। इनके पीछे अनेक मानवीय तथा यातायात सम्बन्धी कारण होते हैं। सावधानी, यातायात नियमों का पालन और सुरक्षा साधनों का प्रयोग करके इन दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण

1. तेज गति

तेज गति सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण है। स्रोत में एन.सी.आर.बी. की 2014 की रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि विश्व में तेज गति के कारण लगभग 48 प्रतिशत सड़क दुर्घटनाएँ होती हैं।

तेज गति से वाहन चलाने पर चालक को किसी अचानक उत्पन्न परिस्थिति पर प्रतिक्रिया करने के लिए कम समय मिलता है। वाहन को रोकने की दूरी भी बढ़ जाती है और दुर्घटना होने पर चोट अधिक गंभीर हो सकती है।

2. गलत ओवरटेकिंग एवं लेन कटिंग

गलत लेन में वाहन चलाना, बार-बार लेन बदलना तथा असुरक्षित ढंग से वाहन को ओवरटेक करना दुर्घटनाओं का दूसरा प्रमुख कारण है।

सड़क पर अलग-अलग प्रकार के वाहन एक साथ चलते हैं। कई बार अचानक उत्पन्न परिस्थितियों के कारण गलत ओवरटेकिंग या लेन बदलने से टक्कर का खतरा बढ़ जाता है।

3. थकान या नशे में वाहन चलाना

शराब अथवा अन्य नशीले पदार्थों के प्रभाव में वाहन चलाना अत्यन्त खतरनाक है और इसे दण्डनीय अपराध भी बताया गया है।

किसी दवा के प्रभाव अथवा नींद आने की स्थिति में भी वाहन चलाना सुरक्षित नहीं होता। थकान या नींद की अवस्था में चालक की एकाग्रता कम हो जाती है, प्रतिक्रिया का समय बढ़ जाता है, शरीर पर नियंत्रण घटता है और दृष्टि भ्रमित हो सकती है।

इसलिए थकान, नींद अथवा नशे की अवस्था में वाहन नहीं चलाना चाहिए।

4. ध्यान भटकना

वाहन चलाते समय थोड़े समय के लिए भी ध्यान भटकना दुर्घटना का कारण बन सकता है।

वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करना, संदेश पढ़ना या लिखना, हेडफोन अथवा संगीत सुनना, सहयात्रियों से लगातार बातचीत करना, खाना-पीना अथवा रेडियो की सेटिंग बदलना जैसे कार्य चालक का ध्यान सड़क से हटा सकते हैं।

सुरक्षित वाहन संचालन के लिए चालक का पूरा ध्यान सड़क और आसपास के यातायात पर होना चाहिए।

5. यातायात नियमों की अनदेखी

यातायात नियम केवल प्रतिबन्ध लगाने के लिए नहीं बनाए गए हैं, बल्कि उनका उद्देश्य यातायात को अनुशासित और सुरक्षित रखना है।

नियमों की अनदेखी से चालक स्वयं को ही नहीं, बल्कि अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं को भी संकट में डाल देता है। सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए यातायात नियमों का पालन अत्यन्त आवश्यक है।

6. क्षमता से अधिक भार का परिवहन

किसी वाहन में उसकी निर्धारित क्षमता से अधिक भार या सवारियाँ ले जाना असुरक्षित है।

सार्वजनिक परिवहन में क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना, मालवाहक वाहन में अत्यधिक भार रखना तथा मालवाहक वाहन में यात्रियों को बैठाना दुर्घटना की सम्भावना बढ़ाता है।

प्रत्येक वाहन की निर्धारित क्षमता का पालन करना चाहिए।

7. सुरक्षा साधनों का प्रयोग न करना

सुरक्षा साधनों का प्रयोग न करने से दुर्घटना के समय चालक और यात्रियों को गंभीर चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।

दुपहिया वाहन चालकों के लिए अच्छी गुणवत्ता वाला आई.एस.आई. मार्क हेलमेट महत्वपूर्ण सुरक्षा साधन है। स्रोत में बताया गया है कि यह लगभग 70 प्रतिशत तक जान बचाने में सहायता कर सकता है।

चार पहिया वाहनों में सीट बेल्ट का प्रयोग गंभीर चोट से बचाव में सहायक होता है।

सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण और यातायात साधनों की अधिकता के कारण
सड़क दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण तथा सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ने के कारण

सड़क पर यातायात के साधनों की अधिकता के कारण

आधुनिक समय में सड़कों पर यातायात के साधनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—

1. बढ़ती जनसंख्या

देश की जनसंख्या में निरन्तर वृद्धि होने से यात्रा करने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ती है। इसके कारण यातायात साधनों की आवश्यकता और उपयोग दोनों बढ़ जाते हैं।

2. शहरों में वाहनों की बढ़ती संख्या

शहरी क्षेत्रों में लोगों की संख्या और गतिविधियों के बढ़ने के साथ वाहनों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। इससे सड़कों पर यातायात का दबाव अधिक हो जाता है।

3. नए-नए वाहनों का आविष्कार

विज्ञान और तकनीक के विकास के कारण समय-समय पर नए प्रकार के वाहन विकसित हुए हैं। इनके बढ़ते उपयोग से सड़कों पर यातायात साधनों की संख्या बढ़ती गई है।

4. लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति

लोगों की आर्थिक क्षमता और क्रय शक्ति बढ़ने के कारण अधिक लोग निजी वाहन खरीदने में सक्षम हुए हैं। इससे सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या में वृद्धि होती है।

5. लोगों की आपसी प्रतिस्पर्धा

लोगों की आपसी प्रतिस्पर्धा भी वाहनों की संख्या बढ़ने का एक कारण है। वाहन सुविधाजनक साधन होने के साथ सामाजिक प्रतिष्ठा से भी जुड़ जाते हैं, जिससे उनका क्रय बढ़ता है।

6. वाहन कम्पनियों द्वारा विशेष छूट

वाहन कम्पनियाँ समय-समय पर ग्राहकों को विशेष छूट तथा अन्य सुविधाएँ देती हैं। इससे वाहन खरीदना अधिक आकर्षक होता है और वाहनों की संख्या बढ़ती है।

सड़क दुर्घटनाओं को कम करने का आधार

सड़क दुर्घटनाओं के अधिकांश कारण मानवीय सावधानी से जुड़े हैं। गति नियंत्रण, सुरक्षित ओवरटेकिंग, लेन अनुशासन, नशे या थकान में वाहन न चलाना, सड़क पर पूरा ध्यान रखना, निर्धारित क्षमता का पालन करना और सुरक्षा साधनों का प्रयोग दुर्घटनाओं की सम्भावना को कम करने में सहायक होते हैं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • सड़क दुर्घटना एक अवांछनीय घटना है जिसमें व्यक्ति, वाहन या सम्पत्ति को हानि पहुँच सकती है।
  • तेज गति सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण है।
  • गलत ओवरटेकिंग, बार-बार लेन बदलना और गलत लेन में वाहन चलाना दुर्घटना का खतरा बढ़ाते हैं।
  • थकान, नींद अथवा नशे की अवस्था में वाहन चलाना अत्यन्त खतरनाक है।
  • मोबाइल फोन, संदेश, हेडफोन, बातचीत तथा अन्य गतिविधियों से चालक का ध्यान भटक सकता है।
  • यातायात नियमों की अनदेखी सड़क दुर्घटनाओं का महत्वपूर्ण कारण है।
  • वाहन की क्षमता से अधिक भार या सवारियाँ नहीं लेनी चाहिए।
  • हेलमेट और सीट बेल्ट जैसे सुरक्षा साधनों का प्रयोग दुर्घटना में गंभीर चोट से बचाव करता है।
  • सड़कों पर वाहनों की अधिकता के कारणों में बढ़ती जनसंख्या और शहरों में वाहनों की बढ़ती संख्या शामिल हैं।
  • नए वाहनों का आविष्कार और लोगों की बढ़ती क्रय शक्ति भी वाहनों की संख्या बढ़ाती है।
  • लोगों की आपसी प्रतिस्पर्धा तथा वाहन कम्पनियों द्वारा दी जाने वाली विशेष छूट भी यातायात साधनों की अधिकता के कारण हैं।

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Topic 4 बच्चों के सड़क सुरक्षा नियम एवं दुर्घटना से बचाव

बच्चों के सड़क सुरक्षा नियम एवं दुर्घटना से बचाव

बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा की आवश्यकता

बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा का ज्ञान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बच्चों को सड़क पर सुरक्षित व्यवहार की प्रारम्भिक जानकारी सामान्यतः अपने माता-पिता और शिक्षकों से प्राप्त होती है।

बच्चे सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए उन्हें कम आयु से ही सड़क पार करने, पैदल चलने, साइकिल चलाने और वाहन में यात्रा करते समय अपनाई जाने वाली सावधानियों की जानकारी देना आवश्यक है।

बच्चों के लिए प्रमुख सड़क सुरक्षा नियम

1. सड़क पार करने से पहले दोनों ओर देखें

बच्चों को सड़क पार करने से पहले बाईं और दाईं दोनों दिशाओं में अच्छी तरह देखकर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई वाहन न आ रहा हो।

माता-पिता को बच्चों को अतिरिक्त सावधानी बरतने और सड़क पार करने से पहले हर ओर देखने की आदत डालनी चाहिए।

2. सड़क पार करते समय किसी बड़े का हाथ पकड़ें

छोटे बच्चों को सड़क पार करते समय अपने माता-पिता, अभिभावक या साथ मौजूद किसी बड़े व्यक्ति का हाथ पकड़कर चलना चाहिए।

3. सड़क पर न दौड़ें

बच्चों को सड़क पार करते समय दौड़ना नहीं चाहिए। जल्दबाजी में माता-पिता या साथ चल रहे व्यक्ति का हाथ छोड़ना भी उचित नहीं है।

सड़क पार करते समय धैर्य रखना और उचित अवसर की प्रतीक्षा करना अधिक सुरक्षित है।

4. सड़क पर पूरा ध्यान रखें

सड़क पर चलते समय बच्चों का ध्यान किसी अन्य वस्तु या गतिविधि की ओर नहीं भटकना चाहिए। उन्हें अपने आसपास के यातायात के प्रति सचेत रहना चाहिए।

5. फुटपाथ का प्रयोग करें

पैदल चलते समय जहाँ फुटपाथ उपलब्ध हो, वहाँ बच्चों को फुटपाथ पर ही चलना चाहिए।

जहाँ फुटपाथ उपलब्ध न हो, वहाँ सड़क के बाईं ओर चलने के लिए प्रेरित करने का उल्लेख किया गया है।

6. चौराहे पर यातायात संकेत देखकर सड़क पार करें

चौराहे पर सड़क पार करने से पहले यातायात संकेतों को ध्यान से देखना चाहिए और सुरक्षित संकेत मिलने पर ही सड़क पार करनी चाहिए।

7. ट्रैफिक लाइट के रंगों का अर्थ जानें

बच्चों को यातायात लाइट के मूल रंगों और उनके अर्थ की जानकारी होनी चाहिए—

  • लाल — रुकना।
  • हरा — चलना।
  • पीला — चलने के लिए तैयार रहना।

इसके साथ ही प्रमुख यातायात चिह्नों के अर्थ की जानकारी भी बच्चों को दी जानी चाहिए।

8. वाहन से हाथ या सिर बाहर न निकालें

कार या बस में यात्रा करते समय हाथ, सिर अथवा शरीर का कोई भाग वाहन की खिड़की से बाहर नहीं निकालना चाहिए।

बच्चों को सड़क पर या खेल के लिए निर्धारित क्षेत्र से बाहर नहीं खेलने की शिक्षा भी देनी चाहिए।

9. साइकिल चलाने से पहले उसकी जाँच करें

साइकिल चलाने से पहले ब्रेक, हॉर्न, स्टीयरिंग या हैंडल आदि को ठीक प्रकार से जाँच लेना चाहिए।

साइकिल चलाते समय आवश्यक सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए और ईयरफोन लगाकर अथवा गाना सुनते हुए साइकिल नहीं चलानी चाहिए।

10. सीट बेल्ट और हेलमेट का प्रयोग करें

कार में यात्रा करते समय सीट बेल्ट और बाइक पर यात्रा करते समय हेलमेट का प्रयोग करना चाहिए।

माता-पिता को स्वयं भी सड़क सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता के व्यवहार से बहुत कुछ सीखते हैं।

बच्चों के लिए प्रमुख सड़क सुरक्षा नियम
बच्चों के लिए सड़क सुरक्षा—सड़क पार करने, पैदल चलने, साइकिल चलाने और वाहन में यात्रा के नियम

सड़क दुर्घटना से बचाव हेतु सावधानियाँ

सड़क सुरक्षा केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए आवश्यक है। यातायात नियमों का ज्ञान और सावधानी सड़क दुर्घटनाओं को कम करने का महत्वपूर्ण आधार है।

सड़क दुर्घटनाओं से बचाव के लिए निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए—

  1. यात्री और चालक दोनों को यातायात नियमों का पालन करना चाहिए।
  2. कार चलाते समय सीट बेल्ट का प्रयोग करना चाहिए।
  3. वाहन में एयरबैग की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।
  4. अनावश्यक प्रकाश और प्रतिबिम्ब से बचना चाहिए।
  5. चालक की सहायता के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
  6. वाहन चलाते समय टायर फट जाए तो वाहन को नियंत्रित करने का लगातार प्रयास करना चाहिए।
  7. अँधेरे या कम प्रकाश में वाहन की साइड लाइट चालू रखनी चाहिए।
  8. लेन बदलते समय स्पष्ट संकेत देकर धीरे-धीरे और सावधानीपूर्वक लेन बदलनी चाहिए।
  9. अपने आसपास के यातायात पर निरन्तर नजर रखनी चाहिए।
  10. किसी दुर्घटना की स्थिति में यातायात पुलिस या 100 नम्बर पर पुलिस नियंत्रण कक्ष को सूचित करना चाहिए। आवश्यकता होने पर निकट के पुलिस थाने से सहायता ली जा सकती है।
  11. अपनी सुरक्षा के साथ दूसरों की सुरक्षा को भी प्राथमिकता देनी चाहिए।
  12. टायर केवल सही उपकरणों की सहायता से बदलना चाहिए।
  13. दुपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। स्रोत में दुपहिया वाहनों को सड़क दुर्घटनाओं से विशेष रूप से जोड़ा गया है।
  14. हाईवे पर वाहन चलाते समय अत्यधिक सतर्क रहना चाहिए।
  15. दुर्घटना होने पर ट्रैफिक पुलिस या निकट के पुलिस थाने को सूचित करना चाहिए तथा आसपास के लोगों की सहायता करनी चाहिए।
  16. सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने वाले व्यक्ति के सम्बन्ध में गुड सेमेरिटन सम्बन्धी प्रावधानों की जानकारी होनी चाहिए।

गुड सेमेरिटन / बाईस्टेंडर

सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की सहायता करने वाले व्यक्ति को गुड सेमेरिटन या बाईस्टेंडर कहा गया है।

दुर्घटना के बाद घायल व्यक्ति की सहायता करने में लोग कानूनी या प्रशासनिक परेशानी के डर से पीछे न हटें, इसके लिए सहायता करने वाले व्यक्ति के सम्बन्ध में कुछ महत्वपूर्ण निर्देश बताए गए हैं।

गुड सेमेरिटन के लिए प्रमुख संरक्षण

  • घायल व्यक्ति की मदद करने वाले को अपराधी नहीं माना जाएगा।
  • उससे मेडिकल खर्च की माँग नहीं की जाएगी।
  • यदि वह चश्मदीद गवाह या बाईस्टेंडर है तो उससे पुलिस पूछताछ एक ही बार की जाएगी।
  • उसके लिए व्यक्तिगत जानकारी देना आवश्यक नहीं है।
  • उसे अस्पताल में रुकना आवश्यक नहीं है।
  • परेशानी से मुक्त न्यायालयीय कार्यवाही सुनिश्चित किए जाने का उल्लेख किया गया है।
सड़क दुर्घटना से बचाव की सावधानियाँ और गुड सेमेरिटन
सड़क दुर्घटना से बचाव की प्रमुख सावधानियाँ और घायल की सहायता करने वाले गुड सेमेरिटन के संरक्षण

सड़क सुरक्षा में माता-पिता और शिक्षकों की भूमिका

बच्चों को सड़क सुरक्षा की सही आदतें प्रारम्भ से सिखाना आवश्यक है। इस कार्य में माता-पिता और शिक्षकों की विशेष भूमिका होती है।

बच्चे प्रायः अपने बड़ों के व्यवहार का अनुसरण करते हैं। इसलिए माता-पिता और शिक्षक स्वयं यातायात नियमों का पालन करके बच्चों के सामने सुरक्षित व्यवहार का उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • बच्चों को सड़क सुरक्षा के नियमों की जानकारी प्रारम्भिक अवस्था से देना आवश्यक है।
  • सड़क पार करने से पहले दोनों दिशाओं में देखकर वाहन की स्थिति सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • छोटे बच्चों को सड़क पार करते समय किसी बड़े व्यक्ति का हाथ पकड़ना चाहिए।
  • सड़क पार करते समय दौड़ना या जल्दबाजी करना उचित नहीं है।
  • जहाँ फुटपाथ उपलब्ध हो, पैदल चलने के लिए उसका प्रयोग करना चाहिए।
  • चौराहे पर यातायात संकेत देखकर ही सड़क पार करनी चाहिए।
  • बच्चों को लाल, पीली और हरी ट्रैफिक लाइट के अर्थ की जानकारी होनी चाहिए।
  • चलते वाहन से हाथ या सिर बाहर नहीं निकालना चाहिए।
  • साइकिल चलाने से पहले ब्रेक, हॉर्न और हैंडल आदि की जाँच करनी चाहिए।
  • साइकिल चलाते समय ईयरफोन या अन्य ध्यान भटकाने वाले साधनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • कार में सीट बेल्ट और बाइक पर हेलमेट का प्रयोग करना चाहिए।
  • वाहन चलाते समय आसपास के यातायात पर नजर रखना और लेन बदलते समय संकेत देना आवश्यक है।
  • दुर्घटना की स्थिति में पुलिस को सूचना देकर घायल व्यक्ति की सहायता करनी चाहिए।
  • सड़क दुर्घटना में घायल की सहायता करने वाले व्यक्ति को गुड सेमेरिटन या बाईस्टेंडर कहा गया है।
  • गुड सेमेरिटन के लिए व्यक्तिगत जानकारी देना या अस्पताल में रुकना आवश्यक नहीं बताया गया है।
  • माता-पिता और शिक्षक स्वयं यातायात नियमों का पालन करके बच्चों के लिए उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
Topic 5 भारत में रेल यातायात एवं रेलवे क्रॉसिंग के संकेत

भारत में रेल यातायात एवं रेलवे क्रॉसिंग के संकेत

भारत में रेल यातायात

रेल यातायात भारत की परिवहन व्यवस्था का महत्वपूर्ण भाग है। भारत का रेलमार्ग तंत्र एशिया के प्रमुख रेल तंत्रों में से एक है। इसके विकास की शुरुआत उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य से हुई।

भारत में रेलमार्ग का प्रारम्भ एवं विकास

भारत में पहली रेलवे लाइन 1853 ई. में मुंबई (तत्कालीन बम्बई) से ठाणे के बीच बनाई गई। इसकी लंबाई लगभग 34 किलोमीटर थी।

इसके बाद रेलमार्ग का विस्तार अन्य क्षेत्रों में भी हुआ—

  • 1854 ई. में कोलकाता से रानीगंज के बीच रेलमार्ग बनाया गया।
  • 1856 ई. में चेन्नई (तत्कालीन मद्रास) से अरक्कोनम के बीच रेलमार्ग बनाया गया।
  • वर्ष 1900 के बाद भारत में रेलमार्ग का विकास तेजी से हुआ।
  • 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भी रेल परिवहन का विकास जारी रहा।

प्रारम्भ में रेल परिवहन अंग्रेजों के स्वामित्व वाली निजी कम्पनियों द्वारा संचालित किया जाता था। वर्ष 1950 में रेल परिवहन के समस्त प्रबन्ध को भारत सरकार ने अपने स्वामित्व में ले लिया।

भारतीय रेल में पटरी की चौड़ाई—गेज

रेल की दो पटरियों के बीच की दूरी को सामान्य रूप से गेज कहा जाता है। भारतीय रेलमार्गों में पटरी की चौड़ाई के आधार पर तीन प्रकार के गेज बताए गए हैं—

गेज पटरी की चौड़ाई
ब्रॉड गेज 1.675 मीटर
मीटर गेज 1 मीटर
नैरो गेज 0.762 मीटर अथवा 0.610 मीटर
भारत में रेल यातायात का विकास और रेल गेज के प्रकार
भारतीय रेल का प्रारम्भ, प्रमुख विकास क्रम तथा ब्रॉड, मीटर और नैरो गेज

रेलवे के रंगीन संकेत

रेलवे में सुरक्षित संचालन के लिए रंगीन संकेतों का प्रयोग किया जाता है। लाल, पीले और हरे संकेतों का अर्थ अलग-अलग होता है।

संकेत प्रतीक अर्थ
लाल सिग्नल खतरा रुकना
पीला सिग्नल सावधान आगे बढ़ने की तैयारी
हरा सिग्नल ट्रैक साफ रेल आगे बढ़ेगी

रेलवे क्रॉसिंग तथा ट्रैक के किनारे लगे संकेत एवं प्रतीक

रेलवे लाइन अथवा ट्रैक के किनारे विभिन्न प्रकार के संकेत और प्रतीक लगाए जाते हैं। इनका उद्देश्य रेल संचालन से सम्बन्धित गति, प्रतिबन्ध, रेलवे क्रॉसिंग और अन्य आवश्यक स्थितियों की जानकारी देना है।

1. गति सीमा संकेत

नीले और पीले रंग के बोर्ड पर विशेष गति सीमा अंकित होती है। यह संकेत राजधानी तथा शताब्दी जैसी ट्रेनों की निर्धारित गति को सीमित करने के लिए भी प्रयुक्त होता है।

बोर्ड पर अंकित संख्या उस स्थान पर लागू गति सीमा को प्रदर्शित करती है।

2. समाप्ति संकेतक—टी

यह पीले रंग का गोलाकार बोर्ड होता है जिस पर टी का चिह्न बना रहता है। इसका अर्थ है कि निर्धारित गति सीमा समाप्त हो गई है।

विभिन्न प्रकार की गाड़ियों के लिए गति प्रतिबन्ध समाप्त होने से सम्बन्धित संकेतों में टी/पी, टी/जी तथा टी/बॉक्स एन जैसे संकेतों का प्रयोग बताया गया है।

3. सावधानी संकेतक

यह बाएँ अथवा दाएँ दिशा की ओर संकेत करने वाले तीर के आकार का बोर्ड होता है।

इसका प्रयोग रेलवे ट्रैक पर विशेष प्रतिबन्ध, अस्थायी प्रतिबन्ध अथवा इंजीनियरिंग कार्य से सम्बन्धित सावधानी की सूचना देने के लिए किया जाता है।

तीर जिस दिशा की ओर संकेत करता है, उसी ओर के ट्रैक पर सम्बन्धित प्रतिबन्ध लागू होने की जानकारी मिलती है।

4. स्टॉप संकेतक

स्टॉप संकेतक लाल और सफेद पट्टियों वाला आयताकार बोर्ड होता है। रात के समय इसे दो लाल लैम्पों द्वारा भी प्रदर्शित किया जाता है।

इसका प्रयोग स्थायी अथवा अस्थायी इंजीनियरिंग प्रतिबन्धों से सम्बन्धित स्थिति में किया जाता है।

5. लेवल क्रॉसिंग संकेत

लेवल क्रॉसिंग संकेत में एक वर्गाकार बोर्ड पर एल का चिह्न बनाया जाता है। यह आगे रेलवे लेवल क्रॉसिंग होने की सूचना देता है।

6. सीटी संकेतक

सीटी संकेतक एक वर्गाकार पीले बोर्ड पर लगाया जाता है। इसमें डब्ल्यू अथवा डब्ल्यू/एल जैसा संकेत दिखाई देता है।

डब्ल्यू/एल का प्रयोग लेवल क्रॉसिंग से सम्बन्धित सीटी संकेत के लिए किया जाता है। इसका आशय चालक को सीटी बजाने की सूचना देना है।

7. साइटिंग बोर्ड

साइटिंग बोर्ड एक लंबा चौकोर काले रंग का बोर्ड होता है। इसमें पीली क्षैतिज रेखाएँ तथा बीच में पीले रंग का गोल चिह्न रहता है।

यह लोको पायलट को यह बताता है कि इस स्थान से आगे का सिग्नल दिखाई देना प्रारम्भ हो जाता है।

8. शंटिंग सीमा

शंटिंग सीमा संकेत एक आयताकार पीले बोर्ड पर लगाया जाता है, जिसके ऊपरी भाग में काला क्रॉस बना होता है।

यह संकेत शंटिंग सेक्शन की सीमा समाप्त होने की जानकारी देता है।

9. रेलवे फाटक

जहाँ सड़क और रेलवे ट्रैक एक-दूसरे को काटते हैं, वहाँ रेलवे फाटक बनाया जाता है।

यदि ट्रेन सामान्य आबादी वाले क्षेत्र या शहर से होकर गुजरती है, तो सामान्य सड़क यातायात को रोकने के लिए फाटक बन्द कर दिया जाता है।

फाटक से लगभग 1 किलोमीटर पहले स्टॉप बोर्ड लगाए जाने का उल्लेख किया गया है। रेलवे लाइन पार करने से पहले इन संकेतों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

रेलवे क्रॉसिंग और रेलवे ट्रैक पर प्रयुक्त प्रमुख संकेत एवं संकेतक
रेलवे के रंगीन संकेत तथा गति सीमा, सावधानी, स्टॉप, लेवल क्रॉसिंग, सीटी और अन्य संकेतक

रेलवे संकेतों का महत्व

रेलवे के संकेत और प्रतीक रेल संचालन को व्यवस्थित एवं सुरक्षित रखने में सहायता करते हैं। इनके माध्यम से गति सीमा, खतरा, सावधानी, रेलवे क्रॉसिंग, अस्थायी प्रतिबन्ध और ट्रैक की स्थिति जैसी महत्वपूर्ण सूचनाएँ समय रहते प्राप्त होती हैं।

रेलवे क्रॉसिंग को पार करते समय संकेतों और फाटक की स्थिति पर विशेष ध्यान देना चाहिए। संकेतों की अनदेखी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • भारत में प्रथम रेलवे लाइन 1853 ई. में मुंबई से ठाणे के बीच लगभग 34 किमी. लंबी बनाई गई।
  • 1854 ई. में कोलकाता से रानीगंज तथा 1856 ई. में चेन्नई से अरक्कोनम के बीच रेलमार्ग बनाया गया।
  • 1900 के बाद भारत में रेलमार्ग का तेजी से विकास हुआ।
  • 1950 में रेल परिवहन का प्रबन्ध भारत सरकार के स्वामित्व में आ गया।
  • रेल गेज तीन प्रकार के बताए गए हैं—ब्रॉड गेज, मीटर गेज और नैरो गेज।
  • ब्रॉड गेज की चौड़ाई 1.675 मीटर तथा मीटर गेज की चौड़ाई 1 मीटर है।
  • नैरो गेज की चौड़ाई 0.762 मीटर अथवा 0.610 मीटर होती है।
  • रेलवे में लाल संकेत का अर्थ रुकना, पीले का अर्थ सावधान रहना और हरे का अर्थ आगे बढ़ना है।
  • गति सीमा संकेत निर्धारित गति की जानकारी देता है।
  • समाप्ति संकेतक टी गति सीमा समाप्त होने का संकेत देता है।
  • सावधानी संकेतक ट्रैक पर विशेष अथवा अस्थायी प्रतिबन्ध की जानकारी देता है।
  • स्टॉप संकेतक स्थायी अथवा अस्थायी इंजीनियरिंग प्रतिबन्ध से सम्बन्धित होता है।
  • लेवल क्रॉसिंग संकेत पर एल का चिह्न होता है।
  • सीटी संकेतक चालक को सीटी बजाने की सूचना देता है।
  • साइटिंग बोर्ड उस स्थान की सूचना देता है जहाँ से आगे का सिग्नल दिखाई देना प्रारम्भ होता है।
  • शंटिंग सीमा संकेत शंटिंग सेक्शन की सीमा समाप्त होने की जानकारी देता है।
  • सड़क और रेलवे ट्रैक के मिलन वाले स्थान पर रेलवे फाटक बनाया जाता है।
  • रेलवे लाइन पार करते समय फाटक और संकेतों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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Topic 6 रेल यात्रा के दौरान सावधानियाँ

रेल यात्रा के दौरान सावधानियाँ

रेल यात्रा में सुरक्षा की आवश्यकता

रेल यात्रा सुविधाजनक और महत्वपूर्ण यातायात साधन है, लेकिन सुरक्षित यात्रा के लिए यात्रियों को रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, रेलवे ट्रैक तथा ट्रेन के भीतर कुछ आवश्यक सावधानियों का पालन करना चाहिए।

थोड़ी-सी असावधानी दुर्घटना, सामान की हानि या अन्य परेशानी का कारण बन सकती है। इसलिए यात्रा शुरू करने से लेकर गन्तव्य तक पहुँचने तक यात्री को सतर्क रहना चाहिए।

रेल यात्रा के दौरान प्रमुख सावधानियाँ

1. प्लेटफॉर्म की घोषणा ध्यान से सुनें

रेलवे स्टेशन पर होने वाली घोषणाओं को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए। ट्रेन की दिशा और प्लेटफॉर्म संख्या की सही जानकारी सुनिश्चित करने के बाद ही निर्धारित प्लेटफॉर्म पर जाना चाहिए।

2. चेतावनी संकेतों का पालन करें

स्टेशन तथा रेलवे ट्रैक के आसपास लगाए गए सभी चेतावनी संकेतों और निर्देशों का पालन करना चाहिए। ये संकेत यात्रियों को संभावित खतरे से बचाने के लिए लगाए जाते हैं।

3. रेलवे ट्रैक के किनारे से न गुजरें

रेलवे ट्रैक के बहुत पास अथवा उसके किनारे से चलना सुरक्षित नहीं है। ट्रेन की चौड़ाई ट्रैक से अधिक होती है, इसलिए ट्रैक के निकट रहने से दुर्घटना हो सकती है।

4. गुजरती ट्रेन से उचित दूरी रखें

जब ट्रेन प्लेटफॉर्म से गुजर रही हो तो उससे कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखने का उल्लेख किया गया है।

प्लेटफॉर्म के किनारे अत्यधिक पास खड़ा होना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

5. ट्रेन में चढ़ते समय हैंडल मजबूती से पकड़ें

ट्रेन में चढ़ते समय उपलब्ध हैंडल को मजबूती से पकड़ना चाहिए, जिससे संतुलन बना रहे और गिरने की सम्भावना कम हो।

6. रेलवे ट्रैक पार करते समय संकेतों का पालन करें

रेलवे ट्रैक पार करते समय निर्धारित संकेतों और नियमों का पालन करना चाहिए। किसी अन्य असुरक्षित तरीके से ट्रैक पार करना दुर्घटना का कारण बन सकता है।

7. सामान और बच्चों की सुरक्षा स्वयं करें

यात्रा के दौरान अपने सामान तथा बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

जहाँ तक सम्भव हो, आवश्यकता के अनुसार कम सामान लेकर यात्रा करनी चाहिए ताकि उसे संभालना आसान रहे।

8. वैध टिकट लेकर यात्रा करें

रेल यात्रा के लिए टिकट लेना आवश्यक है। बिना टिकट यात्रा करना दण्डनीय माना गया है।

यात्रा से पहले टिकट की व्यवस्था सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।

9. ज्वलनशील पदार्थ लेकर यात्रा न करें

रेल यात्रा में किसी प्रकार का ज्वलनशील पदार्थ, जैसे स्टोव या गैस सिलेंडर, लेकर यात्रा नहीं करनी चाहिए।

ऐसे पदार्थ आग लगने तथा यात्रियों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न कर सकते हैं।

10. असुरक्षा की स्थिति में जी.आर.पी. से सहायता लें

यात्रा के दौरान यदि किसी प्रकार की असुरक्षा महसूस हो तो जी.आर.पी. पुलिस की सहायता लेनी चाहिए।

11. लावारिस या आपत्तिजनक वस्तु की सूचना दें

रेल के डिब्बे में कोई संदिग्ध, लावारिस अथवा आपत्तिजनक वस्तु दिखाई देने पर उसकी सूचना सम्बन्धित टोल-फ्री नम्बर पर देनी चाहिए।

ऐसे नम्बर सीट के किनारे लगे चार्ट अथवा कार्ड पर लिखे होने का उल्लेख किया गया है।

12. मान्य पहचान-पत्र साथ रखें

यात्रा करते समय मान्य पहचान-पत्र साथ रखना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर इससे यात्री की पहचान सुनिश्चित की जा सकती है।

13. अपरिचित व्यक्तियों से वस्तुएँ साझा न करें

यात्रा के दौरान किसी अपरिचित व्यक्ति के साथ खाने-पीने या अन्य वस्तुओं को साझा करने से बचना चाहिए।

व्यक्तिगत सुरक्षा की दृष्टि से अनजान व्यक्तियों के प्रति आवश्यक सावधानी रखना उचित है।

14. खाने-पीने की आवश्यक वस्तुएँ साथ रखें

जहाँ सम्भव हो, यात्रा के लिए आवश्यक खाने-पीने की वस्तुएँ अपने साथ ले जानी चाहिए।

विशेष रूप से बच्चों के साथ यात्रा करते समय उनकी आवश्यकताओं और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

15. आपातकालीन खिड़की की जानकारी रखें

रेल के डिब्बे में स्थित आपातकालीन खिड़की के बारे में जानकारी होनी चाहिए, जिससे आपात स्थिति में आवश्यकता पड़ने पर उसका उपयोग किया जा सके।

16. असुविधा होने पर शिकायत करें

रेल यात्रा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा होने पर सम्बन्धित शिकायत रेलवे की वेबसाइट के माध्यम से दर्ज की जा सकती है।

17. अपने सामान को सुरक्षित रखें

अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करनी चाहिए। सीट के साथ उपलब्ध हुक आदि की सहायता से सामान को बाँधकर रखना अधिक सुरक्षित होता है।

रेल यात्रा के दौरान आवश्यक सुरक्षा सावधानियाँ
रेलवे स्टेशन, प्लेटफॉर्म, रेलवे ट्रैक और ट्रेन के भीतर अपनाई जाने वाली प्रमुख सुरक्षा सावधानियाँ

स्टेशन और प्लेटफॉर्म पर सावधानी

स्टेशन पर घोषणाएँ सुनना, सही प्लेटफॉर्म की पहचान करना, चेतावनी संकेतों का पालन करना तथा प्लेटफॉर्म के किनारे और रेलवे ट्रैक से सुरक्षित दूरी रखना आवश्यक है।

रेलवे ट्रैक पार करने के लिए निर्धारित स्थान और संकेतों का ही पालन करना चाहिए।

ट्रेन के भीतर सावधानी

ट्रेन में यात्रा करते समय टिकट और पहचान-पत्र सुरक्षित रखना, बच्चों तथा सामान पर ध्यान देना, ज्वलनशील पदार्थ न ले जाना, अपरिचित व्यक्तियों से सावधान रहना और किसी संदिग्ध वस्तु की सूचना देना सुरक्षित यात्रा के महत्वपूर्ण उपाय हैं।

आपात स्थिति में उपलब्ध सुरक्षा व्यवस्थाओं की जानकारी रखना तथा आवश्यकता पड़ने पर जी.आर.पी. अथवा रेलवे से सहायता लेना चाहिए।

परीक्षा उपयोगी सारांश
  • रेल यात्रा के समय प्लेटफॉर्म की घोषणाओं को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए।
  • ट्रेन की दिशा और प्लेटफॉर्म संख्या पहले सुनिश्चित करनी चाहिए।
  • स्टेशन और रेलवे ट्रैक पर लगे चेतावनी संकेतों का पालन करना चाहिए।
  • रेलवे ट्रैक के बहुत निकट नहीं चलना चाहिए।
  • प्लेटफॉर्म से गुजरती ट्रेन से कम से कम तीन फीट दूरी रखने का उल्लेख किया गया है।
  • ट्रेन में चढ़ते समय हैंडल को मजबूती से पकड़ना चाहिए।
  • रेलवे ट्रैक केवल निर्धारित संकेतों और नियमों का पालन करते हुए पार करना चाहिए।
  • यात्रा के दौरान अपने सामान और बच्चों की सुरक्षा स्वयं करनी चाहिए।
  • बिना टिकट यात्रा करना दण्डनीय है।
  • स्टोव और गैस सिलेंडर जैसे ज्वलनशील पदार्थ लेकर रेल यात्रा नहीं करनी चाहिए।
  • असुरक्षा महसूस होने पर जी.आर.पी. पुलिस की सहायता लेनी चाहिए।
  • संदिग्ध या लावारिस वस्तु दिखाई देने पर सम्बन्धित नम्बर पर सूचना देनी चाहिए।
  • यात्रा के समय मान्य पहचान-पत्र साथ रखना चाहिए।
  • अपरिचित व्यक्तियों से वस्तुएँ साझा करने से बचना चाहिए।
  • बच्चों के साथ यात्रा करते समय उनका विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • कोच की आपातकालीन खिड़की की जानकारी होनी चाहिए।
  • यात्रा में असुविधा होने पर रेलवे के माध्यम से शिकायत दर्ज की जा सकती है।
  • सामान को सुरक्षित रूप से बाँधकर रखना चाहिए।

अभ्यास प्रश्न

अध्याय पूरा पढ़ने के बाद अपनी तैयारी जाँचने के लिए इन महत्वपूर्ण प्रश्नों का अभ्यास करें।

Q 1

यातायात संकेत के प्रकार हैं—

व्याख्या: यातायात संकेत मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं—अनिवार्य संकेत, चेतावनी संकेत और सूचनात्मक संकेत।
Q 2

प्रथम रेलवे लाइन बनाई गई—

व्याख्या: भारत में प्रथम रेलवे लाइन वर्ष 1853 में मुंबई से ठाणे के बीच बनाई गई थी।
Q 3

भारतीय रेलमार्गों की चौड़ाई के प्रकार हैं—

व्याख्या: भारतीय रेलमार्गों में पटरी की चौड़ाई के आधार पर ब्रॉड गेज, मीटर गेज और नैरो गेज पाए जाते हैं।
Q 4

एक आयताकार पीला बोर्ड जिसके शीर्ष पर एक काला क्रॉस होता है, इंगित करता है—

व्याख्या: ऊपरी भाग में काले क्रॉस वाला आयताकार पीला बोर्ड शंटिंग सीमा को इंगित करता है।
Q 5

एक वर्गाकार बोर्ड पर काले रंग का ‘L’ इंगित करता है—

व्याख्या: वर्गाकार बोर्ड पर ‘L’ का चिह्न लेवल क्रॉसिंग की सूचना देता है।
Q 6

ब्रॉड गेज की चौड़ाई होती है—

व्याख्या: अध्याय में ब्रॉड गेज की चौड़ाई 1.675 मीटर दी गई है।
Q 7

मुंबई से ठाणे के मध्य रेलमार्ग की दूरी है—

व्याख्या: भारत की प्रथम रेलवे लाइन मुंबई से ठाणे के बीच लगभग 34 किलोमीटर लंबी थी।
Q 8

कोलकाता से रानीगंज के मध्य रेलमार्ग बनाया गया—

व्याख्या: कोलकाता से रानीगंज के बीच रेलमार्ग वर्ष 1854 में बनाया गया।
Q 9

यातायात संकेत में लाल रंग का तात्पर्य है—

व्याख्या: लाल यातायात संकेत का अर्थ रुकना होता है।
Q 10

सड़क दुर्घटना में घायलों की मदद करने वाले व्यक्ति को कहते हैं—

व्याख्या: सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सहायता करने वाले व्यक्ति को गुड सेमेरिटन या बाईस्टेंडर कहा गया है।
Q 11

चेतावनी संकेत का मुख्य उद्देश्य है—

व्याख्या: चेतावनी संकेत वाहन चालक को आगे आने वाली खतरनाक या विशेष सड़क परिस्थितियों के बारे में पहले से सावधान करते हैं।
Q 12

चेन्नई से अरक्कोनम के बीच रेलमार्ग बनाया गया था—

व्याख्या: अध्याय के अनुसार 1856 में चेन्नई से अरक्कोनम के बीच रेलमार्ग बनाया गया।
Q 13

रेलवे में ‘W/L’ संकेत का सम्बन्ध है—

व्याख्या: W/L सीटी संकेतक लेवल क्रॉसिंग से सम्बन्धित है और लोको पायलट को सीटी बजाने का संकेत देता है।
Q 14

रेलवे में पीले सिग्नल का अर्थ है—

व्याख्या: रेलवे में पीला सिग्नल सावधानी तथा आगे बढ़ने की तैयारी का संकेत देता है।
Q 15

रेलवे का ‘T’ समाप्ति संकेतक बताता है कि—

व्याख्या: पीले गोलाकार बोर्ड पर बना ‘T’ संकेत निर्धारित गति प्रतिबन्ध के समाप्त होने को दर्शाता है।

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पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्न

UP D.El.Ed Semester 1 के विषय सामाजिक अध्ययन के अध्याय सड़क-रेल यातायात एवं सुरक्षा से पिछले वर्षों की परीक्षाओं में पूछे गए लघु उत्तरीय प्रश्न वर्ष सहित दिए गए हैं।

Q 1

यातायात के साधन किसे कहते हैं?

Q 2

रेलवे क्रॉसिंग के संकेतों का संक्षिप्त विवरण दीजिए।

Q 3

सड़क दुर्घटना से बचाव के पाँच उपाय लिखिए।

Q 4

बच्चों के लिए कोई पाँच सड़क सुरक्षा नियम बताइए।

Q 5 2019

सड़क दुर्घटना के प्रमुख कारण बताइए।

Q 6

सड़क दुर्घटनाएँ क्यों होती हैं?

Q 7

यातायात की सुरक्षा क्यों आवश्यक है?

Q 8

ध्वनि प्रदूषण से आप क्या समझते हैं?

Q 9 2016

सड़क पर यातायात के साधनों की अधिकता के कारण बताइए।

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Practice More Questions

इसी semester और subject के MCQ Tests तथा Previous Year Papers practice करके अपनी तैयारी को और मजबूत बनाइए।

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