वस्तुनिष्ठ प्रश्न
प्रश्न 1. हरितलवक पाया जाता है—
(a) जन्तु कोशिका में
(b) कवक में
(c) विषाणु में
(d) वनस्पति कोशिका में
उत्तर: (d) : हरितलवक (Chloroplast) हरे पौधों की कोशिकाओं में पाया जाने वाला कोशिकांग है। इसमें क्लोरोफिल वर्णक उपस्थित होता है और यह प्रकाश-संश्लेषण का प्रमुख स्थल है।
प्रश्न 2. टेलीफोन का आविष्कार किसने किया था?
(a) ग्राहम बेल
(b) न्यूटन
(c) आर्किमिडीज
(d) सैमुअल मोर्स
उत्तर: (a) : दिए गए विकल्पों में सही उत्तर अलेक्जेंडर ग्राहम बेल है। उन्होंने 1876 में टेलीफोन से सम्बन्धित प्रसिद्ध पेटेंट प्राप्त किया।
प्रश्न 3. कार्बन का क्रिस्टलीय अपररूप है—
(a) काजल
(b) जन्तु चारकोल
(c) कोयला
(d) हीरा
उत्तर: (d) : हीरा कार्बन का क्रिस्टलीय अपररूप है। इसमें प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से मजबूत सहसंयोजक बन्धों द्वारा जुड़ा रहता है।
प्रश्न 4. द्रव के गैस में बदलने की क्रिया को कहते हैं—
(a) गलनांक
(b) हिमांक
(c) वाष्पीकरण
(d) संघनन
उत्तर: (c) : द्रव अवस्था से गैसीय अवस्था में परिवर्तन को वाष्पीकरण अथवा वाष्पन कहते हैं।
प्रश्न 5. चना/मटर की जड़ों की गाँठों में पाया जाने वाला जीवाणु है—
(a) राइजोबियम
(b) क्लॉस्ट्रिडियम
(c) एजोटोबैक्टर
(d) लैक्टोबैसिलस
उत्तर: (a) : राइजोबियम (Rhizobium) चना, मटर आदि दलहनी पौधों की जड़-ग्रन्थियों में सहजीवी रूप से रहता है तथा वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है।
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अति लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 6. वायुमण्डल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने पर क्या होता है?
उत्तर: कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से ग्रीनहाउस प्रभाव एवं वैश्विक तापन बढ़ता है। अधिक CO2 महासागरों के अम्लीकरण में भी योगदान देती है।
प्रश्न 7. जड़ किसे कहते हैं? पौधों में पाई जाने वाली जड़ें कितने प्रकार की होती हैं?
उत्तर: जड़ पौधे का वह भाग है जो सामान्यतः मिट्टी में रहकर पौधे को स्थिर करता तथा जल-खनिजों का अवशोषण करता है। मुख्य जड़-तन्त्र मूसला तथा रेशेदार दो प्रकार के होते हैं।
प्रश्न 8. कैंची किस प्रकार का उत्तोलक है?
उत्तर: कैंची प्रथम श्रेणी का उत्तोलक है, क्योंकि इसमें आलम्ब प्रयास और भार के बीच स्थित होता है।
प्रश्न 9. पॉलीथीन बहुलक के दो उपयोग लिखिए।
उत्तर: पॉलीथीन का उपयोग पैकेजिंग फिल्म एवं थैलियाँ बनाने तथा पाइप, डिब्बे एवं विभिन्न प्लास्टिक पात्र बनाने में किया जाता है।
प्रश्न 10. दूरदृष्टि दोष दूर करने के लिए चश्मे में कौन-सा लेंस प्रयोग किया जाता है?
उत्तर: दूरदृष्टिता (Hypermetropia) में निकट की वस्तुएँ स्पष्ट नहीं दिखतीं। इसे दूर करने के लिए उचित क्षमता का उत्तल या अभिसारी लेंस प्रयोग किया जाता है।
प्रश्न 11. कौन-सा जन्तु मरुस्थलीय वातावरण के लिए अधिक उपयुक्त है और क्यों?
उत्तर: ऊँट मरुस्थलीय वातावरण के लिए अत्यधिक अनुकूलित है। उसके चौड़े गद्देदार पैर, जल-संरक्षण की क्षमता तथा कूबड़ में संचित वसा उसे रेगिस्तान में जीवित रहने में सहायता करते हैं।
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लघु उत्तरीय प्रश्न
प्रश्न 12. प्राकृतिक सम्पदा क्या है? इसके संरक्षण के उपाय लिखिए।
उत्तर: प्रकृति से प्राप्त वे पदार्थ एवं संसाधन जिनका उपयोग मनुष्य तथा अन्य जीव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए करते हैं, प्राकृतिक सम्पदा अथवा प्राकृतिक संसाधन कहलाते हैं। इनमें जल, वायु, मिट्टी, वन, वन्यजीव, खनिज एवं जीवाश्म ईंधन आदि सम्मिलित हैं।
प्राकृतिक सम्पदा के संरक्षण के प्रमुख उपाय—
- जल संरक्षण— जल का विवेकपूर्ण उपयोग करना तथा वर्षा जल-संचयन अपनाना।
- वन संरक्षण— वनों की अनियन्त्रित कटाई रोकना तथा वृक्षारोपण और पुनर्वनीकरण करना।
- मृदा संरक्षण— मृदा-अपरदन रोकने के लिए वनस्पति आवरण बनाए रखना और उचित कृषि-पद्धतियाँ अपनाना।
- खनिज संरक्षण— खनिजों का सीमित एवं विवेकपूर्ण उपयोग तथा धातुओं का पुनर्चक्रण करना।
- वन्यजीव संरक्षण— शिकार रोकना तथा प्राकृतिक आवासों, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों का संरक्षण करना।
प्रश्न 13. ऊष्मा संचरण की कितनी विधियाँ हैं? किसी एक विधि के बारे में लिखिए।
उत्तर: तापान्तर के कारण ऊष्मा का उच्च ताप वाले भाग से निम्न ताप वाले भाग की ओर जाना ऊष्मा संचरण कहलाता है। इसकी तीन प्रमुख विधियाँ हैं—
- चालन
- संवहन
- विकिरण
चालन— ऊष्मा संचरण की वह प्रक्रिया जिसमें माध्यम के कण अपने औसत स्थान से स्थानान्तरित हुए बिना परस्पर ऊर्जा का संचार करते हैं, चालन कहलाती है। यह ठोस पदार्थों, विशेषकर धातुओं में प्रमुख रूप से होता है।
उदाहरण— धातु की छड़ के एक सिरे को गर्म करने पर कुछ समय बाद उसका दूसरा सिरा भी गर्म हो जाता है।
प्रश्न 14. प्रतिजैविक दवाएँ किसे कहते हैं? इनका क्या उपयोग है?
उत्तर: प्रतिजैविक (Antibiotics) ऐसे पदार्थ हैं जो रोग उत्पन्न करने वाले जीवाणुओं की वृद्धि को रोकते हैं अथवा उन्हें नष्ट करते हैं। अनेक प्रतिजैविक सूक्ष्मजीवों द्वारा बनाए जाते हैं तथा कुछ अर्द्ध-संश्लेषित या संश्लेषित भी होते हैं।
उपयोग—
- जीवाणुजनित संक्रमणों के उपचार में।
- कुछ शल्यक्रियाओं में जीवाणु संक्रमण की रोकथाम हेतु चिकित्सकीय सलाह से।
- टी.बी., टायफाइड एवं कुछ प्रकार के निमोनिया जैसे जीवाणुजनित रोगों के उपचार में उचित प्रतिजैविक प्रयोग किए जाते हैं।
प्रतिजैविक वायरसजनित रोगों जैसे सामान्य सर्दी-जुकाम या फ्लू पर प्रभावी नहीं होते और इनका उपयोग चिकित्सकीय सलाह के अनुसार करना चाहिए।
प्रश्न 15. पत्तियों के कार्य क्या हैं? लिखिए।
उत्तर: पत्तियाँ पौधे के महत्वपूर्ण अंग हैं। इनके प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं—
- प्रकाश-संश्लेषण— हरी पत्तियाँ क्लोरोफिल की सहायता से सूर्य के प्रकाश में कार्बन डाइऑक्साइड और जल से भोजन बनाती हैं।
- गैसों का आदान-प्रदान— रन्ध्रों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन एवं जलवाष्प का आदान-प्रदान होता है।
- वाष्पोत्सर्जन— पत्तियों के रन्ध्रों से जलवाष्प के रूप में जल बाहर निकलता है।
वाष्पोत्सर्जन पौधे के ताप-नियमन एवं जड़ों से जल और खनिजों के ऊपर की ओर परिवहन में भी सहायक होता है।
प्रश्न 16. प्रकाश के अपवर्तन के नियम लिखिए।
उत्तर: जब प्रकाश एक पारदर्शी माध्यम से दूसरे पारदर्शी माध्यम में प्रवेश करता है और उसकी चाल में परिवर्तन के कारण उसका मार्ग सामान्यतः बदल जाता है, तो इस घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
अपवर्तन के दो नियम हैं—
- आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन-बिन्दु पर खींचा गया अभिलम्ब एक ही समतल में होते हैं।
-
निश्चित दो माध्यमों तथा निश्चित रंग के प्रकाश के लिए आपतन कोण की ज्या और अपवर्तन कोण की ज्या का अनुपात नियत रहता है।
sin i / sin r = n21इसे स्नेल का नियम कहते हैं।
प्रश्न 17. उत्तल दर्पण के द्वारा किस प्रकार का प्रतिबिम्ब बनता है?
उत्तर: उत्तल दर्पण वास्तविक वस्तु का प्रतिबिम्ब सदैव आभासी, सीधा तथा वस्तु से छोटा बनाता है।
- वस्तु अनन्त पर हो— प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे मुख्य फोकस (F) पर अत्यन्त छोटा एवं बिन्दुवत बनता है।
- वस्तु किसी सीमित दूरी पर हो— प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे ध्रुव (P) और मुख्य फोकस (F) के बीच बनता है तथा आभासी, सीधा एवं छोटा होता है।
इसी कारण उत्तल दर्पण का उपयोग वाहनों में पीछे का विस्तृत क्षेत्र देखने के लिए किया जाता है।
प्रश्न 18. सूक्ष्मजीवों की उपयोगिता लिखिए।
उत्तर: अनेक सूक्ष्मजीव मनुष्य, कृषि एवं पर्यावरण के लिए अत्यन्त उपयोगी हैं। उनकी प्रमुख उपयोगिताएँ निम्नलिखित हैं—
- दही निर्माण— लैक्टोबैसिलस जैसे जीवाणु दूध को दही में बदलने में सहायता करते हैं।
- ब्रेड एवं मद्य निर्माण— यीस्ट का उपयोग ब्रेड बनाने तथा शर्करा के किण्वन से एथेनॉल बनाने में किया जाता है।
- नाइट्रोजन स्थिरीकरण— राइजोबियम दलहनी पौधों की जड़-ग्रन्थियों में वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करता है।
- अपघटन— जीवाणु एवं कवक मृत जीवों और कार्बनिक अपशिष्ट का अपघटन करके पोषक तत्त्वों का पुनर्चक्रण करते हैं।
- औषधि निर्माण— अनेक सूक्ष्मजीव प्रतिजैविक एवं अन्य उपयोगी जैव सक्रिय पदार्थ बनाते हैं। उदाहरणतः Penicillium कवक से पेनिसिलिन प्राप्त हुई।
- अपशिष्ट जल उपचार— विभिन्न सूक्ष्मजीव सीवेज में उपस्थित कार्बनिक पदार्थों के अपघटन में सहायक होते हैं।
Semester 3 की Complete तैयारी
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